Sunday, November 1, 2026
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NATIONAL : तमिलनाडु का RTI छूट वाला फैसला वापस, विरोध के बाद कुछ ही घंटों में पीछे हटी थलपति विजय सरकार, समझें पूरा मामला

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तमिलनाडु सरकार ने RTI एक्ट से ‘पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट’ को छूट देने वाला अपना नोटिफिकेशन जारी करने के कुछ ही घंटों बाद वापस ले लिया। सरकार के इस कदम की कांग्रेस के कार्ति पी. चिदंबरम और BJP की तमिलिसाई सुंदरराजन समेत कई राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की।

चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने 21 सितंबर को एक आदेश जारी किया। इस आदेश पर तमिलनाडु में सियासत गरमाने लगी। बयानबाजी तेज हो गई। विवाद बढ़ने पर थलपति विजय सरकार ने आदेश वापस ले लिया। जिस आदेश पर विवाद हुआ, वह था राज्य की कानून-व्यवस्था मशीनरी को RTI एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाना। इस आदेश का राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर कड़ा विरोध हुआ था।

कानून मंत्री ने दी जानकारी
बिजली और कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने X पर पोस्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24, उप-धारा (4) के तहत, मानव संसाधन प्रबंधन विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के संबंध में तमिलनाडु सरकार के सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को दी गई छूट वापस ले ली गई है।

टीवीके के सहयोगी दलों ने भी किया था विरोध
यह पोस्ट मंत्री के उस बयान के लगभग एक घंटे बाद आया जिसमें उन्होंने RTI से छूट देने के पीछे का तर्क समझाया था। हालांकि उससे विरोध शांत नहीं हुआ, जिसमें TVK के सहयोगी भी शामिल थे। अब वापस लिए गए आदेश में कानून-व्यवस्था विंग को खुफिया और सुरक्षा संगठन के तौर पर वर्गीकृत करने की कोशिश की गई थी, जिससे यह जानकारी सार्वजनिक करने के पारदर्शिता नियमों के दायरे से बाहर हो जाता।

जाति आधारित घटनाओं से जुड़ी जांच रहेगी सीक्रेट
निर्मल कुमार ने पहले तर्क दिया था कि केवल कुछ हिस्से, जैसे जाति-आधारित घटनाओं से जुड़ी जांच, ही RTI एक्ट के दायरे से बाहर होंगे। उन्होंने दावा किया कि ऐसे सवालों के जवाब से अक्सर समाज में और भ्रम पैदा होता है। इससे पहले दिन में, 21 सितंबर के GO 57 का गजट प्रकाशन वायरल हो गया था और हर तरफ से इसकी आलोचना हो रही थी।

सरकारी आदेश में क्या
सरकार के जीओ में सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को राज्य सरकार द्वारा स्थापित खुफिया और सुरक्षा संगठन बताया गया था, जिस पर एक्ट की धारा 24 के तहत RTI एक्ट लागू नहीं होता। यह विंग सांप्रदायिक और जातिगत झड़पों, राजनीतिक दलों, छात्रों और खेतिहर मजदूरों से जुड़े आंदोलनों और राजनीतिक आधार पर दर्ज मामलों को वापस लेने के अनुरोधों से संबंधित मामलों को देखता है।

कार्ति चिदंबरम ने भी साधा निशाना
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार का फैसला एक बुरी मिसाल कायम करता है और RTI एक्ट का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, न कि सीमित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह आदेश लागू रहता, तो कानून लागू करने के दौरान कथित उल्लंघनों के रिकॉर्ड तक पहुंच बंद हो जाती। VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने इस नोटिफिकेशन को बेहद चौंकाने वाला बताया और कहा कि यह मानवाधिकारों के दमन का रास्ता बनाने जैसा है। कांग्रेस और VCK, TVK सरकार की सहयोगी पार्टियां हैं।

भड़का विपक्ष
DMK सांसद कनिमोझी ने कहा कि पारदर्शिता का वादा करके सत्ता में आई सरकार के लिए यह शर्मनाक है कि वह अपने कार्यकाल के सिर्फ चार महीने बाद ही लोगों को सवाल पूछने से रोकने की कोशिश कर रही है, जबकि राज्य में 500 से ज्यादा कथित हत्याएं हो चुकी हैं।

AMMK के संस्थापक TTV दिनाकरन ने सीधे मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय से बात करते हुए इस नियम में बदलाव का कड़ा विरोध किया और कहा कि ऐसी किसी भी छूट को मामले को छिपाने की कोशिश (कवर-अप) के तौर पर देखा जाएगा। AIADMK के डी जयकुमार ने RTI एक्ट को कथित तौर पर कमजोर करने की कोशिश के लिए प्रशासन की तुलना ईदी अमीन सरकार से की।

NATIONAL : कुणाल घोष की कार पर दो दिन में दूसरी बार हमला, शीशा तोड़ा; सुरक्षाकर्मी पर बंदूक तानने का लगाया आरोप

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टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि दो दिनों में उनकी कार पर दूसरी बार हमला हुआ। उन्होंने हमलावरों पर शीशा तोड़ने और सुरक्षाकर्मी पर बंदूक तानने का आरोप लगाया। भाजपा ने आरोपों से इनकार किया है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुणाल घोष ने रविवार को आरोप लगाया कि उनकी कार पर लगातार दूसरे दिन हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि कोलकाता के नर्केलडांगा इलाके में बाइक सवार लोगों ने उनकी कार को घेर लिया और हथौड़े से शीशे तोड़ दिए। घोष के मुताबिक, हमलावरों में से एक ने उनके सुरक्षाकर्मी पर बंदूक भी तानी।

घोष ममता बनर्जी के खेमे से जुड़े टीएमसी विधायक हैं और बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह घटना शनिवार को हुगली के उत्तरपाड़ा में उनकी कार पर कथित पथराव और अंडे फेंके जाने की घटना के एक दिन बाद हुई।

‘कल हमला हुआ था, आज मारने की कोशिश की’
कुणाल घोष ने पत्रकारों को कार के टूटे शीशे के टुकड़े दिखाते हुए कहा कि शनिवार को उत्तरपाड़ा में उनकी कार पर हमला हुआ था और रविवार को उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया “कल उत्तरपाड़ा में मुझ पर हमला हुआ था। आज वे मुझे मारना चाहते थे।” घोष के अनुसार, वह अपने विधानसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, तभी बाइक सवार लोगों ने उनकी कार को घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हथौड़े से कार का शीशा तोड़ा और उनके सुरक्षाकर्मी की ओर हथियार ताना। रविवार की घटना को लेकर घोष ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है

शनिवार को भी कार पर हुआ था हमला
इससे एक दिन पहले, शनिवार को हुगली जिले के उत्तरपाड़ा इलाके में भी कुणाल घोष की कार को कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। उस समय वह ममता बनर्जी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सेरामपुर जा रहे थे।

घोष के अनुसार, उनकी कार को रोककर उस पर पत्थर और अंडे फेंके गए, जिससे वाहन के शीशे टूट गए। इस घटना को लेकर भी उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही थी। हालांकि, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर पुलिस की ओर से तत्काल कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया था।

पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे घोष
पहली घटना के बाद कुणाल घोष क्षतिग्रस्त कार लेकर कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे थे। उनके मुताबिक, उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। रविवार की घटना के बाद भी उनकी क्षतिग्रस्त कार को नर्केलडांगा पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

कुणाल घोष ने भाजपा पर लगाए आरोप
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है और सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े लोगों पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। उत्तरपाड़ा के भाजपा विधायक दिपांजन चक्रवर्ती ने घोष के आरोपों को ‘ड्रामा’ बताया। भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने दावा किया कि घोष प्रचार हासिल करने के लिए खुद अपनी गाड़ी पर हमले करवा रहे हैं और इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है।

UP : सीएम योगी ने सपा-कांग्रेस को बताया सनातन विरोधी, कहा- रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे, इनसे रहें सावधान

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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास व रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कांग्रेसी व सपाई नहीं गए, क्योंकि उन्हें भय था कि कहीं जालीदार टोपी छिटक न जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास व रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कांग्रेसी व सपाई नहीं गए, क्योंकि उन्हें भय था कि कहीं जालीदार टोपी छिटक न जाए। उन्होंने चेताया कि रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे, इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। वह रविवार को गोमतीनगर के एक स्कूल में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष (1926-2026) के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में अशोक सिंहल के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।

सीएम ने कहा कि गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने के लिए हमें एकजुट होकर कार्य करना है। रामद्रोही अयोध्या को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। रामभक्तों पर गोलियां चलाने वालों का खुद को राम भक्त ठहराने का प्रयास करना विश्व हिंदू परिषद की वैचारिक विजय है। अशोक सिंघल ने जिस ज्योति को 1980 के दशक में प्रज्ज्वलित किया था, वह ज्वाला बनकर सकल हिंदू समाज के संरक्षण व संवर्धन के लिए अहर्निश लगी है। वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने के दौरान आरएसएस के संपर्क में आए औरसनातन धर्म के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उनके जीवन का एक ही संकल्प था कि जब तक राम का काम नहीं होगा, तब तक विश्राम नहीं लूंगा। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में बिखरे हुए समाज को एकजुट किया।

2 नवंबर 1990 को रामभक्तों पर तत्कालीन रामद्रोही सरकार ने गोलियां चलवाईं, तब अशोक सिंहल सीना तानकर खड़े हो गए। उनका सपना अब भव्य राम मंदिर के रूप में दिख रहा है। इस अवसर पर विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, आरएसएस के प्रांत प्रचारक कौशल, संत श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी, रविंद्र कीर्ति स्वामी जी, भंते शीलरत्न, सरदार निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्य गिरि, विहिप के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, एमएलसी महेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।

सीएम ने कहा कि मेरे गुरु अवैद्यनाथ राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष थे। अशोक सिंहल के साथ गोरखपुर व कारसेवकपुरम में राम मंदिर आंदोलन आदि की बैठकें होती थीं। पहले अयोध्या में परिक्रमा करने पर रोक लगती थी, आज भव्य दीपोत्सव होता है। अब रामपथ, धर्मपथ, भक्ति पथ व जन्मभूमि पथ फोरलेन से जुड़े हैं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, मां शबरी के नाम पर भोजनालय, निषादराज के नाम पर यात्री विश्रामालय हैं। संतों के नाम पर मंदिर-मूर्तियां भी हैं। कभी अंधेरे में रहने वाली अयोध्या अब सोलर सिटी बन गई है।

गो-माता को पशु कहने वाले पशुवत
सीएम ने कहा कि नकलची गाय को पशु घोषित करने का ज्ञापन देते हैं। गाय को पशु कहने वालों की बुद्धि पशुवत है। पहले यूपी में अवैध बूचड़खानों में गोमाता कटती थी। हमने सख्त कानून बनाया और 7700 से अधिक गोशाला का निर्माण भी कराया। हम 16 लाख गायों का संरक्षण कर रहे हैं। जो अवैध बूचड़खाने संचालित कर रहे थे, गोमाता की तस्करी करा रहे थे। उनसे प्रश्न पूछिए। हमने अशोक सिंघल से जो सीखा, उसे धरातल पर उतारा है।

NATIONAL : NTA की सुरक्षा अब CISF के हवाले, 39 जवान संभालेंगे गोपनीय क्षेत्र; पेपर लीक के बाद सुरक्षा चक्र और कड़ा

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NEET पेपर लीक के बाद NTA ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। 39 CISF जवानों की तैनाती और गोपनीय क्षेत्रों की निगरानी के साथ अब प्रश्नपत्र से लेकर साइबर सिस्टम तक सुरक्षा का कड़ा पहरा रहेगा।

नई दिल्ली: पेपर लीक को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली स्थित NTA कार्यालय में अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के 39 जवान तैनात किए गए हैं। ये जवान परीक्षा से जुड़े गोपनीय क्षेत्रों की निगरानी, प्रवेश नियंत्रण और कर्मचारियों व आगंतुकों की जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे। संवेदनशील परीक्षा सामग्री तक किसी भी अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए गोपनीय क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया गया है और वहां होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

CISF के जवानों को मिंटो रोड स्थित भारत सरकार के प्रेस भवन में बनाए गए गोपनीय क्षेत्रों के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर तैनात किया गया है। इन जवानों की जिम्मेदारी में प्रवेश नियंत्रण और जांच व्यवस्था शामिल होगी।


कर्मचारियों और आगंतुकों की तलाशी के लिए एक्स-रे सामान जांच मशीनों और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर यानी DFMD का इस्तेमाल किया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भवन में गोपनीय क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में आवाजाही और कामकाज की सख्त निगरानी की जाएगी, ताकि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा के लिए एक पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

गृह मंत्रालय ने मंजूर किया CISF सुरक्षा कवच
अधिकारी ने बताया कि इन परिसरों के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की सुरक्षा व्यवस्था को गृह मंत्रालय ने मंजूरी दी है। NTA के नए सुरक्षा ढांचे का उद्देश्य केवल कार्यालय की भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री, तकनीकी प्रणालियों और संवेदनशील कामकाज को अनधिकृत पहुंच से बचाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है।

ओखला से मिंटो रोड पहुंचा NTA का संवेदनशील काम
NTA ने हाल ही में अपने पुराने ओखला कार्यालय से गोपनीय और संवेदनशील कामकाज को मिंटो रोड स्थित नए परिसर में स्थानांतरित किया है। सरकारी भारत मुद्रणालय भवन में NTA को 55,000 वर्ग फुट से अधिक का समर्पित कार्यालय स्थान दिया गया है। NTA को भवन की पांचवीं मंजिल और चौथी और छठी मंजिल के कुछ हिस्से आवंटित किए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में गोपनीय और संवेदनशील कामकाज को नए आवंटित भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रेस भवन के अन्य हिस्सों में पहले से ही CISF की सुरक्षा व्यवस्था है। अब NTA के परीक्षा संबंधी गोपनीय क्षेत्रों के लिए भी अलग और समर्पित सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

NTA परीक्षा चक्र के दौरान इस्तेमाल होने वाली तमाम प्रणालियों की सुरक्षा की भी समीक्षा कर रहा है। इसमें उम्मीदवारों का पंजीकरण, शुल्क भुगतान, प्रवेश पत्र, कंप्यूटर आधारित परीक्षा, ओएमआर प्रसंस्करण, परिणाम प्रणाली और परीक्षा से जुड़ा अन्य ढांचा शामिल है। हर परीक्षा चक्र से पहले परीक्षा से जुड़ी सभी प्रणालियों की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए NTA के प्रौद्योगिकी विभाग और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े विभाग के बीच समन्वय किया जा रहा है।

पेपर लीक ने खोली थी सुरक्षा व्यवस्था की खामियां
NTA की सुरक्षा व्यवस्था में यह बड़ा बदलाव 2024 NEET-UG पेपर लीक के बाद सामने आई खामियों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इस मामले के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था और NTA की परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे थे। CBI की आरोपपत्र में तीन विषय विशेषज्ञों को लीक हुए प्रश्नपत्र का प्राथमिक स्रोत बताया गया था। आरोपपत्र के मुताबिक, NTA के गोपनीय विभाग में प्रवेश करने और वहां से बाहर निकलने के दौरान इन विशेषज्ञों की जांच या तलाशी नहीं ली गई थी।

NATIONAL : वसुधैव कुटुंबकम भूल जाइए, अब परिवार एक रखना बड़ी चुनौती:सुप्रीम कोर्ट जज बोले- परिवार के विवादों में थोपा फैसला न्याय नहीं लगता, मध्यस्थता सबसे बेहतर

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एनवी अंजारिया ने पारिवारिक विवादों पर कहा कि कोर्ट से मिले समाधान अक्सर नकली लगते हैं। कई पक्षों को लगता है कि उन पर न्याय थोपा गया है, जो उनके लिए भ्रम जैसा होता है और अन्याय का रूप ले सकता है।जस्टिस अंजारिया ने पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता को सबसे सही बताया। उन्होंने कहा कि ये इंसानी भावनाओं और संवेदनशीलता से जुड़े विवाद होते हैं।

जस्टिस अंजारिया ने कहा, “भारत के संस्कार और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भूलिए। अब हम एक परिवार को भी एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”जस्टिस अंजारिया गुवाहाटी में ईस्टर्न जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे। जहां वे ‘फैमिली विवादों में ADR बनाम न्यायिक फैसला: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे।

फैमिली कोर्ट में बढ़ रही विवादों की संख्या

जस्टिस अंजारिया ने दो दिन चले सम्मेलन के समापन समारोह में कहा कि फैमिली विवाद का समाधान सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया भी है। फैमिली मुकदमों में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने बताया कि फैमिली विवादों की बढ़ती संख्या का मुद्दा जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 2008 में ही उठाया था।

उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि जहां भी मौका मिले उस कानूनी उपाय को अपनाकर मुकदमों की संख्या बढ़ाई जाए। मौजूदा समय में स्थिति और खराब है। फैमिली विवाद लगातार बढ़ते हुए एक के बाद एक नए विवादों को जन्म दे रहे हैं।

फैमिली कोर्ट्स एक्ट पर सवाल

जस्टिस अंजारिया ने पूर्वोत्तर राज्यों के कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों से पूछा कि क्या फैमिली कोर्ट्स एक्ट को अलग नजरिए से देखा गया है। क्या इसके प्रावधानों को ध्यान से पढ़ा है। इसके उद्देश्य में कहा गया है कि कानून फैमिली विवादों के समाधान के लिए बनाया गया था। इस कानून में सुलह और सामाजिक रूप से बेहतर नतीजे हासिल करने पर जोर था। इसमें प्रक्रिया के नियमों का पालन मकसद नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि फैमिली कोर्ट के जज को अलग-अलग रोल निभाने पड़ते हैं। उसे सुलह कराने वाला और मध्यस्थ बनना होता है। जज पति-पत्नी या परिवार के सदस्यों के बीच विवाद में पंच बन सकता है। उसकी जिम्मेदारी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाओं के इस्तेमाल की जरूरत सामने आई और उनके नए तरीकों पर काम करना पड़ा।

जज का दावा- मध्यस्थता कानूनी प्रक्रिया की कमियों को दूर करती है

जस्टिस अंजारिया ने कहा, “मेरा मानना है कि फैमिली विवाद सुलझाने के लिए सबसे सही व्यवस्था मध्यस्थता है। यह इंसानी मनोविज्ञान और मानसिकता को समझकर विवाद का समाधान खोजती है। यह दोनों पक्षों के लिए फायदे वाली स्थिति बनाती है। साथ ही कानूनी प्रक्रिया में जो कमी रह जाती है, यह उसे दूर कर देती है।

मध्यस्थता के अलावा कही ये बातें…

कोर्ट एक तरह से कई दरवाजों वाली व्यवस्था है। इसमें लोक अदालत, पंचाट, सुलह और मध्यस्थता जैसी अलग-अलग वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाएं शामिल हैं।
फैमिली विवादों की शुरुआत में ही उनकी जांच की जा सकती है। विवाद की प्रकृति और मुद्दों के आधार पर मामला उससे जुड़े विशेषज्ञ मध्यस्थ के पास भेजा जा सकता है।
मध्यस्थता प्रक्रिया और मध्यस्थता कानून में एक कमी है, शादी टूटने से जुड़े कई मामलों में मध्यस्थता के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से तलाक पर समझौता कर लेते हैं।
अगर ऐसा मामला सुप्रीम कोर्ट में आता है, तो सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कार्रवाई करता है। लेकिन निचली अदालतों और हाईकोर्ट के पास मध्यस्थता से हुए समझौते के आधार पर तुरंत तलाक की डिक्री देने का अधिकार नहीं है।
समझौता बना रहता है, लेकिन तलाक की डिक्री जारी नहीं हो पाती। इसके बाद पक्षों को संयुक्त आवेदन देना पड़ता है और एक बार फिर मुकदमेबाजी से गुजरना पड़ता है।
मध्यस्थता कानून की धारा 27 मध्यस्थता से हुए समझौते और उसकी शर्तों को लागू करने से जुड़ी है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुई है। इस धारा के तहत समझौता बाध्यकारी और लागू करने योग्य होना चाहिए।

NATIONAL : वसुधैव कुटुंबकम भूल जाइए, अब परिवार एक रखना बड़ी चुनौती:सुप्रीम कोर्ट जज बोले- परिवार के विवादों में थोपा फैसला न्याय नहीं लगता, मध्यस्थता सबसे बेहतर

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एनवी अंजारिया ने पारिवारिक विवादों पर कहा कि कोर्ट से मिले समाधान अक्सर नकली लगते हैं। कई पक्षों को लगता है कि उन पर न्याय थोपा गया है, जो उनके लिए भ्रम जैसा होता है और अन्याय का रूप ले सकता है।जस्टिस अंजारिया ने पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता को सबसे सही बताया। उन्होंने कहा कि ये इंसानी भावनाओं और संवेदनशीलता से जुड़े विवाद होते हैं।

जस्टिस अंजारिया ने कहा, “भारत के संस्कार और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भूलिए। अब हम एक परिवार को भी एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”जस्टिस अंजारिया गुवाहाटी में ईस्टर्न जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे। जहां वे ‘फैमिली विवादों में ADR बनाम न्यायिक फैसला: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे।

फैमिली कोर्ट में बढ़ रही विवादों की संख्या

जस्टिस अंजारिया ने दो दिन चले सम्मेलन के समापन समारोह में कहा कि फैमिली विवाद का समाधान सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया भी है। फैमिली मुकदमों में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने बताया कि फैमिली विवादों की बढ़ती संख्या का मुद्दा जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 2008 में ही उठाया था।

उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि जहां भी मौका मिले उस कानूनी उपाय को अपनाकर मुकदमों की संख्या बढ़ाई जाए। मौजूदा समय में स्थिति और खराब है। फैमिली विवाद लगातार बढ़ते हुए एक के बाद एक नए विवादों को जन्म दे रहे हैं।

फैमिली कोर्ट्स एक्ट पर सवाल

जस्टिस अंजारिया ने पूर्वोत्तर राज्यों के कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों से पूछा कि क्या फैमिली कोर्ट्स एक्ट को अलग नजरिए से देखा गया है। क्या इसके प्रावधानों को ध्यान से पढ़ा है। इसके उद्देश्य में कहा गया है कि कानून फैमिली विवादों के समाधान के लिए बनाया गया था। इस कानून में सुलह और सामाजिक रूप से बेहतर नतीजे हासिल करने पर जोर था। इसमें प्रक्रिया के नियमों का पालन मकसद नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि फैमिली कोर्ट के जज को अलग-अलग रोल निभाने पड़ते हैं। उसे सुलह कराने वाला और मध्यस्थ बनना होता है। जज पति-पत्नी या परिवार के सदस्यों के बीच विवाद में पंच बन सकता है। उसकी जिम्मेदारी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाओं के इस्तेमाल की जरूरत सामने आई और उनके नए तरीकों पर काम करना पड़ा।

जज का दावा- मध्यस्थता कानूनी प्रक्रिया की कमियों को दूर करती है

जस्टिस अंजारिया ने कहा, “मेरा मानना है कि फैमिली विवाद सुलझाने के लिए सबसे सही व्यवस्था मध्यस्थता है। यह इंसानी मनोविज्ञान और मानसिकता को समझकर विवाद का समाधान खोजती है। यह दोनों पक्षों के लिए फायदे वाली स्थिति बनाती है। साथ ही कानूनी प्रक्रिया में जो कमी रह जाती है, यह उसे दूर कर देती है।

मध्यस्थता के अलावा कही ये बातें…

कोर्ट एक तरह से कई दरवाजों वाली व्यवस्था है। इसमें लोक अदालत, पंचाट, सुलह और मध्यस्थता जैसी अलग-अलग वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाएं शामिल हैं।
फैमिली विवादों की शुरुआत में ही उनकी जांच की जा सकती है। विवाद की प्रकृति और मुद्दों के आधार पर मामला उससे जुड़े विशेषज्ञ मध्यस्थ के पास भेजा जा सकता है।
मध्यस्थता प्रक्रिया और मध्यस्थता कानून में एक कमी है, शादी टूटने से जुड़े कई मामलों में मध्यस्थता के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से तलाक पर समझौता कर लेते हैं।
अगर ऐसा मामला सुप्रीम कोर्ट में आता है, तो सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कार्रवाई करता है। लेकिन निचली अदालतों और हाईकोर्ट के पास मध्यस्थता से हुए समझौते के आधार पर तुरंत तलाक की डिक्री देने का अधिकार नहीं है।
समझौता बना रहता है, लेकिन तलाक की डिक्री जारी नहीं हो पाती। इसके बाद पक्षों को संयुक्त आवेदन देना पड़ता है और एक बार फिर मुकदमेबाजी से गुजरना पड़ता है।
मध्यस्थता कानून की धारा 27 मध्यस्थता से हुए समझौते और उसकी शर्तों को लागू करने से जुड़ी है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुई है। इस धारा के तहत समझौता बाध्यकारी और लागू करने योग्य होना चाहिए।

NATIONAL : वांगचुक ने CEC के खिलाफ 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को दिया समर्थन, बोले- जवाबदेही जरूरी

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शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश में जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने की कोशिशों का समर्थन मिलना चाहिए।

क्या वांगचुक भी होंगे शामिल?
सोनम वांगचुक ने सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को अपना समर्थन तो दे दिया, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वह फिजिकली शामिल नहीं होंगे। उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी।

सोनम वांगचुक का यह बयान चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे विवाद के बीच आया, जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में वोटर रजिस्ट्रेशन, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार ऑन रिकॉर्ड आपत्ति दर्ज कराई थी।

चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी मिली थी। इस दौरान, एसआईआर के दौरान नोटिस का सामना कर रहे मतदाताओं की मदद के लिए उपायों का भी ऐलान किया।

टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: ‘ज्ञानेश कुमार ने BJP से चुनाव लड़ने का दिया था ऑफर’, केरल के पूर्व मुख्य सचिव का बड़ा दावा! राहुल गांधी ने VIDEO शेयर कर घेरा

क्यों नहीं शामिल हो रहे वांगचुक?
वांगचुक ने सीजेपी के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। साथ ही कहा कि हर आंदोलन में उनका व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, ”समर्थन निश्चित रूप से है। देश में जवाबदेही बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, मैं हमेशा उनके साथ हूं।”

उन्होंने कहा, ”मेरे लिए आंदोलनों का समर्थन करने का मतलब यह है कि ये आंदोलन अपने दम पर आगे बढ़ें। इस मुद्दे को लेकर अब कई लोग सामने आ रहे हैं और यह देखकर मुझे खुशी है। इसलिए उम्मीद है कि सीईसी से जुड़े इस मुद्दे पर मेरी व्यक्तिगत मौजूदगी की जरूरत नहीं पड़ेगी।”

NATIONAL : ‘गांधी जयंती पर अब होगा जेल भरो आंदोलन’, मुंबई में CJP के प्रोटेस्ट को परमिशन नहीं मिलने पर बोले अभिजीत दीपके

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर मुंबई में जेल भारो आंदोलन किया जाएगा। मुंबई पुलिस ने CJP के प्रोटेस्ट को अनुमति नहीं दी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को मुंबई में विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, मुंबई पुलिस ने इस प्रोटेस्ट को करने की परमिशन नहीं दी है। यह जानकारी सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने रविवार को दी।

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी प्रदर्शन को शुरू करने का ऐलान किया था। सीजेपी की ओर से कहा गया था कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो ‘जंतर मंतर 2.0’ होगा और इसकी शुरुआत मुंबई से होगी।

गांधी जयंती पर होगा ‘जेल भरो आंदोलन’
सीजेपी के इस ऐलान के बाद मुंबई पुलिस ने उनके विरोध प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। रविवार को अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि मुंबई पुलिस ने उनके संगठन को 2 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन को इजाजत नहीं दी है। दीपके ने कहा है, “नागरिकों की आवाजा दबाने के ऐसे तरीके मंजूर नहीं हैं। अगर हमें विरोध करने का अधिकार नहीं दिया गया तो CJP गांधी जयंती पर मुंबई में जेल भरो आंदोलन शुरू करेगा।”

CEC विवाद पर क्या बोली थी CJP?
बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठे विवाद पर CJP ने कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो ‘जंतर-मंतर 2.0’ शुरू किया जाएगा। इस दौरान सीजेपी ने तीन मांगें रखी हैं- इसमें पहली मांग है ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई शुरू की जाए। दूसरी मांग- स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को रोकना और तीसरी मांग है- जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को बहाल करना। इसके अलावा सीजेपी ने इलेक्शन कमीशन को चलाने वाले 2023 के कानून को रद्द करने और आयोग में जरूरी करने की भी मांग उठाई है।

असम में आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर बोले दीपके
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने रविवार को एक दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह बताया कि वह सोमवार को असम जाएंगे, जहां गुवाहाटी में असम पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के को-फाउंडर आशुतोष रांका समेत कई वर्कर्स को डिटेन किया है। दीपके ने कहा कि अगर रांका को रिहा नहीं किया गया तो कल वह असम जाएंगे और वहां की पुलिस मुझे गिरफ्तार करके दिखाए।

मुंबई पुलिस ने बताई परमिशन नहीं दिए जाने की वजह
CJP के प्रोटेस्ट को अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है। मुंबई पुलिस की ओर से कहा गया है कि परमिशन इसलिए नहीं दी गई क्योंकि मुंबई पुलिस को PIL 116/2009 में माननीय हाई कोर्ट के 04/01/2013 के फैसले और उसके बाद महाराष्ट्र सरकार के 20/01/16 के आदेश के अनुसार, शिवाजी पार्क में किसी भी सभा के लिए परमिशन देने का अधिकार नहीं है। पुलिस की ओर से यह सलाह दी जाती है कि विरोध प्रदर्शन के लिए मुंबई शहर में दूसरी जगहें देखें और परमिशन मांगें।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जब राज्य की प्रमुख पार्टियां भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ जुटी हैं तो इसी केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान ने रविवार को बड़ा बयान दिया है। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का चुनाव लड़ने जा रही है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

NATIONAL : राहुल गांधी ने प्रवेश वर्मा के युवक को थप्पड़ मारने पर साधा निशाना, कहा- वोट चोरी से आता है अहंकार

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दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा पर सड़क निरीक्षण के दौरान एक युवक को थप्पड़ मारने के आरोप को लेकर राहुल गांधी ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि युवक सिर्फ वीडियो बना रहा था। राहुल ने इसे सरकार के अहंकार से जोड़ते हुए कहा कि सवाल पूछने वालों को दबाया जा रहा है और यह कथित ‘वोट चोरी’ से पैदा हुए अहंकार का नतीजा है।

दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने रविवार को राजधानी में एक सड़क निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर भ्रष्टाचार के सवाल पर एक युवक को थप्पड़ मार दिया। जिस पर विपक्ष ने जोरदार हमला बोला है। मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करके निशाना साधा है।

राहुल बोले- सवाल पूछने पर थप्पड़’
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- दिल्ली की भाजपा सरकार के एक मंत्री वीडियो में एक नौजवान को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। उसका गुनाह? वो वीडियो बना रहा था। मंत्री के सामने सड़क खोदकर दिखाई जा रही थी, और उसके हाथ में कैमरा था। ये उस सत्ता का चेहरा है जिसे अब वोटर से डर लगना बंद हो गया है।

ये लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इन्हें अब ये डर ही नहीं कि चुनाव इन्हें हटा सकता है। वोट चोरी यही खरीदती है – सिर्फ नतीजा नहीं, उसके बाद आने वाला अहंकार भी। जो सरकार जीत को पक्का मान लेती है, उसे आपकी रजामंदी नहीं चाहिए – आपकी खामोशी और अंधभक्ति चाहिए।

क्या है पूरा मामला
रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) ने एक वीडियो साझा किया था जिसमें मंत्री प्रवेश वर्मा एक सड़क निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर भ्रष्टाचार के सवाल पर एक युवक को थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि जब युवक सड़क की खराब स्थिति का वीडियो बना रहा था, तब तीखी झड़प के बाद मंत्री ने उसका फोन नीचे गिराया और उसे थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उनके सुरक्षा गार्ड ने युवक को वहां से हटाया।

NATIONAL : ‘मेरे परिवार को गालियां दी’,थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल होने पर मंत्री प्रवेश वर्मा का बड़ा खुलासा

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दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान एक स्थानीय युवक को थप्पड़ मारते हुए दिखाए गए वायरल वीडियो पर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी इस वीडियो को गलत तरीके से प्रचारित कर रही है।

प्रवेश वर्मा ने बताया कि विकासपुरी रिंग रोड पर पिछले कई दिनों से सड़क निर्माण का काम चल रहा है। उनके अनुसार, स्थानीय विधायक जरनैल सिंह लंबे समय से पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों पर दबाव बना रहे थे कि उन्हें ठेकेदार से मिलवाया जाए और कमीशन का इंतजाम किया जाए।

इंजीनियरों ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है और एफआईआर करवाने की प्रक्रिया चल रही है। मंत्री ने आरोप लगाया कि कमीशन न मिलने के कारण जरनैल सिंह रात में बनी सड़क को सुबह उखाड़ देते थे और फिर वीडियो बनाकर भ्रष्टाचार का दावा करते थे। मंत्री ने बताया कि आरोपी शख्स ने उनके परिवार को गाली-गलौज कर रहा था।

आज उस रास्ते से गुजरते हुए उन्होंने खुद काम का निरीक्षण करने का फैसला किया। निरीक्षण में काम संतोषजनक पाया गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह सड़क 15 साल से नहीं बनी थी और अब निर्माण हो रहा है। प्रवेश वर्मा ने जरनैल सिंह को तीन बार फोन किया और 45 मिनट तक उनका इंतजार किया। उन्होंने अपनी पार्टी के किसी कार्यकर्ता को मौके पर नहीं बुलाया था।

जब जरनैल सिंह अपने पहले से सूचित कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे तो उन्होंने बदतमीजी शुरू कर दी। एक कार्यकर्ता ने मंत्री के परिवार को गालियां दीं, जिसके बाद आवेश में आकर उन्होंने जो किया वही किया। प्रवेश वर्मा ने आखिर में कहा कि उनकी सरकार वह काम कर रही है जिसे आम आदमी पार्टी पूरा नहीं कर सकी, इसलिए उन्हें जलन हो रही है।

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