Sunday, November 1, 2026
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NATIONAL : दिल्ली में झुग्गी-बस्ती पहुंचे राहुल गांधी ने SIR पर लगाया SDM को फोन, बोले- ‘मैं आपको दूसरे तरीके से देखूंगा’

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने SIR में कथित अनियमितता को लेकर सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि सीईसी को तो जाना पड़ेगा, लेकिन उस ‘सिस्टम’ का भी हिसाब होगा, जिसने उनसे यह सब करवाया है. उन्होंने दिल्ली के यमुना किनारे स्थित झुग्गी बस्ती ‘बेला एस्टेट’ में जाकर कई ऐसे लोगों से मुलाकात की जिनके नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे.

उनका कहना था कि इस इलाके में रहने वाले 728 लोगों में से 727 लोगों के नाम काट दिए गए. राहुल गांधी ने लोगों से मुलाकात का एक वीडियो भी ‘एक्स’ पर शेयर किया, जिसमें वह क्षेत्र के एसडीएम से फोन पर बात करते नजर आ रहे हैं. वीडियो में राहुल एसडीएम से मतदाताओं के नाम हटाने के कारणों के बारे में पूछते नजर आ रहे हैं और बातचीत के आखिर में वह चेतावनी भरे लहजे में कहते हैं, ‘आप मुझे अपना पूरा नाम, पद के बारे में जानकारी दे दीजिए, मैं आपको दूसरे तरीके से देखता हूं.’

‘ज्ञानेश कुमार तो जाएंगे’
कांग्रेस नेता ने इस विषय को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ज्ञानेश कुमार तो जाएंगे. पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा.’ उन्होंने ने दावा किया कि यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं. SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम बचा – बाकी 727 नाम काट दिए गए.

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘ये लोग दशकों से वहां रह रहे हैं और उन्होंने 2024 के लोकसभा तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में मतदान किया था. साल 2023 में उनके घर तोड़ दिए गए थे, लेकिन वे वहां से गए नहीं और अब भी उसी इलाके में रह रहे हैं.’

उन्होंने पोस्ट में कहा, “एसडीएम से फोन पर मैंने यही कहा- मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है. खुद सीईसी ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि ‘हाउस नंबर 0’ बेघरों के लिए है. फिर भी 727 लोगों के नाम काट दिए गए.”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘यह एसआईआर नहीं, यह वोट चोरी का तरीका है. जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताकत छीनी जा रही है.’ दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने पिछले दिनों कहा था कि बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती के लोगों का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके मकान ध्वस्त कर दिए गए थे.

NATIONAL : मोदी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस का महामंथन: CWC में बनेगी अहम रणनीति; खरगे की अध्यक्षता में बैठक आज

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कांग्रेस की CWC बैठक में छात्रों के मुद्दों, राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी, आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे इंदिरा भवन में होगी।

कांग्रेस बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक करेगी। बैठक में देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के साथ-साथ छात्रों से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर भी मंथन किया जाएगा।

इंदिरा भवन में होगी CWC की बैठक
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक दोपहर 3 बजे इंदिरा भवन में होगी। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बैठक की अध्यक्षता करेंगे। पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इसमें शामिल होंगे।

छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के एजेंडे में छात्रों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से शामिल हैं। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने और विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा करेगी। इसके साथ ही राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की भी होगी समीक्षा
CWC की बैठक में अगले साल की शुरुआत में होने वाले संभावित विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की भी समीक्षा की जाएगी। पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। कांग्रेस इन राज्यों में संगठन की स्थिति, चुनावी रणनीति और तैयारियों पर भी चर्चा कर सकती है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी मंथन संभव
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़े परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक के मुद्दे पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की है। कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी रणनीति को लेकर विपक्षी दलों के साथ समन्वय पर भी विचार कर सकती है।

जयराम रमेश ने विपक्षी दलों से संपर्क का किया था जिक्र
सरकार की ओर से निकट भविष्य में ऐसा विधेयक लाए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पिछले सप्ताह कहा था कि हम सभी पार्टियों के संपर्क में हैं। हम सभी पार्टियों के संपर्क में बने हुए हैं। मुझे यकीन है कि 19 अगस्त को CWC की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा था, ‘हम ढिलाई नहीं बरत सकते, क्योंकि वे (सरकार) हर तरह की चालें चलने की कोशिश करेंगे। लेकिन उनके पास संख्या बल नहीं है। अभी उनके पास जो संख्या है और जिसकी उन्हें जरूरत है, उसके बीच का अंतर छोटा नहीं है। यह दो अंकों का बड़ा अंतर है।

पिछली CWC बैठक में भी कांग्रेस ने उठाया था महिला आरक्षण का मुद्दा
अप्रैल में हुई पिछली CWC बैठक के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। पार्टी ने कहा था कि इससे जुड़ी प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया “संवैधानिक नहीं” है और इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं।

BUSINESS : फूड प्रोडक्ट पर लिखना होगा इसमें आर्टिफिशियल स्वीटनर है:इससे डायबिटीज–हार्ट अटैक का खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से कहा– जल्द नियम लागू करें

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चिप्स और कोल्ड्रिंक जैसे खाने-पीने के प्रोडक्ट में अगर आर्टिफिशियल स्वीटर यानी बिना कैलोरी वाली मिठास है तो कंपनी को पैकेट के सामने चेतावनी देनी होगी।

इसमें लिखना होगा- ‘CONTAIN NON CALORIC SWEETENER यानी इसमें आर्टिफिशियल स्वीटनर मिला है।’ पहले यह जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में होती थी।

फूड सेफ्टी अथॉरिटी FSSAI ने सोमवार को यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में पेश किया।FSSAI ने कोर्ट को बताया कि, नमक-शकर या सैचुरेटेड फैट की लिमिट ज्यादा हुई तो पैकेट के सामने षटकोण लाल निशान लगाने का नियम सिंगल फेज में लागू होगा। पहले ये 2 फेज में लागू होने वाला था।

बता दें कि आर्टिफिशियल स्वीटनर ज्यादा मात्रा में खाने-पीने से डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बिमारी का खतरा बढ़ जाता है।

चैरिटेबल ट्रस्ट की जनहित याचिका पर एक्शन

दरअसल, 3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी नाम के एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर डिब्बा बंद या पैकेट वाले खाने पर वार्निंग लेबल लगाने की मांग की थी। इसके बाद से कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

13 अगस्त की सुनवाई- जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI को नियमों में देरी के लिए फटकार लगाई और पूछा कि क्या सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें?

31 अगस्त की सुनवाई- FSSAI ने कोर्ट में हलफनामा पेश किया, जिसमें पैकेट पर षटकोण लाल वॉर्निंग लेबल अलग-अलग फेज में लागू करने का प्रस्ताव दिया।

फेज 1: उन प्रोडक्ट्स पर लाल लेबल लगेगा, जिनमें फैट, शुगर या साल्ट में से कोई भी ‘दो या दो से अधिक’ चीजें तय सीमा से ज्यादा होंगी। इसमें सभी अधिक मीठी कोल्ड ड्रिंक्स भी शामिल होंगी।
फेज 2: यह नियम उन प्रोडक्ट्स पर भी लागू हो जाएगा, जिनमें इनमें से कोई ‘एक’ चीज भी ज्यादा मात्रा में होगी।
10 सितंबर- बेंच ने FSSAI से पूछा दोनों चरणों को लागू करने की टाइमलाइन क्या होगी।

28 सितंबर की सुनवाई- FSSAI ने नोटिफिकेशन जारी करने के लिए 4 महीने, उस पर सुझाव के लिए 60 दिन और कंपनियों को अपनाने के लिए 365 दिन की मोहलत देने की बात कही।

कोर्ट के सवाल- आप आपत्ति और सुझाव मांगने की प्रक्रिया फिर से क्यों शुरू करना चाहते हैं? जब आपने 2022 में यह प्रक्रिया शुरू की थी, तो पिछले 4 सालों में क्या किया गया? जब मामला लोगों की हेल्थ से जुड़ा है, तो नियम लागू करने में इतना समय क्यों लग रहा है?
इसके बाद FSSAI ने खाने-पीने के पैकेट पर वॉर्निंग लेबल लगाने का नियम 2 फेज के बजाए 1 फेज में लागू करने की बात कही। कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।

फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब

सवाल 1: क्या कुछ खाद्य पदार्थों को इस लाल लेबल से छूट भी मिली है?

जवाब: हां, कुछ चुनिंदा कैटगरी को इससे बाहर रखने का प्रस्ताव है। सिंगल-इंग्रीडिएंट (सिर्फ एक सामग्री वाले) प्रोडक्ट्स और ऐसे पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से ही फैट, शुगर या नमक से भरपूर होते हैं, उन्हें छूट मिलेगी। उदाहरण के लिए शुद्ध घी, खाद्य तेल, साधारण नमक, चीनी, गुड़ और शहद को इस फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग से छूट दी जाएगी।

सवाल 2: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ क्या है?

जवाब: फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) वह लेबल है, जो किसी फूड प्रोडक्ट के पैकेट के आगे के हिस्से में लिखा रहता है। इसमें खाने के मेन इंग्रीडिएंट्स जैसे शुगर, नमक और फैट की जानकारी को आसान और जल्दी समझ आने वाले तरीके से दिखाया जाता है।

इसका मकसद ये है कि ग्राहक तुरंत समझ सके कि वो जो फूड खरीद रहा है, वह स्वास्थ्य के लिए कितना सही है। ये जानकारी पैकेट के बैक पर लिखे लंबे‑चौड़े न्यूट्रिशनल फैक्ट्स से अलग होती है। इसमें सिर्फ जरूरी जानकारी को सरल ग्राफिक्स या रंगों के जरिए दिखाया जाता है।

सवाल 3: अभी पैकेज्ड पर फूड से जुड़ी न्यूट्रिशनल जानकारी कहां लिखी होती है?

जवाब: यह आमतौर पर पैकेज्ड फूड के पीछे या किनारे पर एक टेबल के फॉर्म में लिखी होती है। यह जानकारी प्रोडक्ट के 100 ग्राम, 100 मिलीलीटर या हर सर्विंग में मौजूद न्यूट्रिशनल वैल्यू जैसे- कैलोरी, फैट, प्रोटीन, शुगर और सोडियम की मात्रा बताती है।

सवाल 4: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ से क्या पता चलता है?

जवाब: फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग से पता चलता है कि फूड हेल्दी है या अनहेल्दी। उसमें कितनी कैलोरी, शुगर, नमक और फैट है और क्या वह स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

सवाल 5: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ क्यों जरूरी है?

जवाब: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ इसलिए जरूरी है ताकि लोग पैकेज्ड फूड खरीदते समय जल्दी और स्पष्ट रूप से उसके हेल्थ इम्पैक्ट को समझ सकें। इससे उनके लिए हेल्दी ऑप्शन्स चुनना आसान हो जाएगा और अनहेल्दी फूड के अधिक सेवन को रोका जा सकेगा।

सवाल 6: ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ से हमें क्या फायदा होगा?

जवाब: फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग का मकसद न्यूट्रिशन की जटिल जानकारी को सरल बनाना है, ताकि ग्राहक खरीदते समय ही फैसला ले सके और अनहेल्दी फूड खाने से बच सकें। नीचे दिए ग्राफिक से इसके फायदे समझिए-

सवाल 7: सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को लोगो का निर्देश क्यों दिया?

जवाब: देश में लाइफस्टाइल बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह अनहेल्दी खान-पान है। पैकेज्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड में मौजूद अधिक शुगर, नमक और फैट की मात्रा इन बीमारियों का बड़ा कारण बन रही है।

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से कहा है कि वह पैकेज्ड फूड पर ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ लागू करने पर गंभीरता से विचार करे, ताकि लोग खरीदते समय ही संभावित हेल्थ रिस्क समझ सकें। ग्राफिक से समझते हैं कि भारत में लाइफस्टाइल बीमारियों की स्थिति कितनी गंभीर है-

सैचुरेटेड फैट: यह घी, मक्खन, मलाई, पनीर, चीज, फैटी मीट और नारियल तेल या इससे बनी चीजों में ज्यादा होता है। इसे ज्यादा खाने से खून में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। यह नुकसानदायक है।
अनसैचुरेटेड फैट: यह मुख्य रूप से मूंगफली, बादाम, अखरोट, तिल, सरसों का तेल, जैतून का तेल और मछली में पाया जाता है। यह सही मात्रा में लेना हार्ट के लिए फायदेमंद माना जाता है।

NATIONAL : F18 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं बना पाएंगे सोशल मीडिया अकाउंट! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिए निर्देश

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को ऐसे कानूनी नियम बनाने के निर्देश दिए, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नाबालिगों से जुड़े भारतीय कानूनों का पालन करना अनिवार्य बनाएं. इसमें स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए कम से कम 18 वर्ष की आयु सीमा लागू करना भी शामिल है.

यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की पीठ के सामने आया. अदालत ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ नाम के गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

एनजीओ ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों को स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और उनका इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम और डिजिटल रुकावटें (फायरवॉल) लगाने की मांग की थी. अदालत में एनजीओ की तरफ से वरिष्ठ वकील एच. एस. फुल्का और केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए

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सर्वोच्च अदालत का ध्यान ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, साइबर बुलिंग (इंटरनेट पर मानसिक रूप से परेशान करना) और यौन शोषण जैसे गंभीर खतरों की ओर खींचा गया. पीठ को यह भी बताया गया कि उम्र की सही जांच न होने के कारण बच्चों के डेटा का गलत इस्तेमाल हो रहा है.

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “आपको इसकी जांच करनी चाहिए. सोशल मीडिया अकाउंट खोलने के लिए डिजिटल सेवा की शर्तों पर सहमति देनी होती है, जो कि एक कानूनी अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) की तरह काम करता है.”

पीठ ने आगे कहा, “भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 11 के तहत, नाबालिग (जैसे 12 और 15 साल के बच्चे) कोई कानूनी अनुबंध नहीं कर सकते हैं, और नाबालिगों के साथ किए गए ऐसे समझौते ‘वॉइड एब इनिशियो’ (शुरुआत से ही अमान्य या रद्द) माने जाते हैं.”

मेहता ने सहमति जताते हुए कहा कि इस मामले में कुछ करना होगा और उन्होंने स्वीकार किया कि नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों के साथ किए गए अनुबंध शुरुआत से ही अमान्य होते हैं. पीठ ने टिप्पणी की कि सरकार को सोशल मीडिया कंपनियों से जुड़े नियमों के ढांचे के तहत इसे एक कानूनी रूप देने पर विचार करना चाहिए.

मेहता ने अदालत के सामने बात रखी कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि यह मुद्दा डीपीडीपी (DPDP – डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन) एक्ट के दायरे में आता है. हालांकि, वकील फुल्का ने ध्यान दिलाया कि डीपीडीपी एक्ट अभी लागू नहीं हुआ है और यह 2027 से प्रभावी होगा.

पीठ ने टिप्पणी की कि सोशल मीडिया कंपनियों को कम से कम अपनी सदस्यता (अकाउंट बनाने) की प्रक्रिया को इस तरह व्यवस्थित करना चाहिए जिससे 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा का उल्लंघन न हो.

इस याचिका में बच्चों के लिए इंटरनेट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की गई है, बल्कि माता-पिता या अभिभावक की अनिवार्य सहमति और तकनीकी रूप से स्वचालित ‘फायरवॉल’ लगाने की मांग की गई है. सरकार द्वारा पिछले साल तैयार किए गए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 में भी बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट खोलने के लिए माता-पिता की सहमति की बात कही गई थी.

NATIONAL : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा- याचिका का निपटारा कितने समय में करेंगे?

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सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के मामले में चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. 28 सितंबर को अगली सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट की पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह (Symbol) फ्रीज करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (EC) से एक अहम सवाल पूछा है. कोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील को निर्देश दिया है कि वह आयोग से निर्देश लेकर अदालत को बताएं कि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में दायर याचिका का निपटारा कितने समय में किया जाएगा.

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान की मुख्य बातें और वकीलों की दलीलें
याचिकाकर्ता (TMC) का पक्ष: ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि उनके पास अब कोई अन्य कानूनी उपचार नहीं बचा है, क्योंकि उपचुनाव का शेड्यूल (कार्यक्रम) तय हो चुका है. उन्होंने कहा कि कार्यवाही जून में शुरू हुई थी और जुलाई में ही जवाब दाखिल कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद दूसरे पक्ष को बार-बार समय दिया गया और उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद पार्टी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया गया. सिब्बल ने कहा कि वह फिलहाल उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह समझ से बाहर है कि ऐसा कैसे हो सकता है.

अचानक आए अंतरिम आदेश पर कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि यह चुनाव आयोग का एक ‘अंतरिम आदेश’ है. वहीं, जस्टिस वी. मोहना ने कहा कि आयोग ने यह कदम दोनों पक्षों के हितों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी कहा कि आदेश सही या गलत हो सकता है, लेकिन यह एक अंतरिम आदेश है, कोई अंतिम (Final) निर्णय नहीं है और इस बात को ध्यान में रखना होगा. जस्टिस बागची ने यह भी जोड़ा कि यह चिंता का विषय जरूर हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल एक अंतरिम व्यवस्था के आधार पर कोई स्थायी निर्णय ले लिया जाए.

क्या है पूरा विवाद और चुनाव आयोग का फैसला?
टीएमसी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा खुद को ‘असली टीएमसी‘ होने का दावा किए जाने के बाद यह विवाद खड़ा हुआ है. चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड एलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 के तहत एक अंतरिम कदम उठाते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. आयोग ने पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है.

इस फैसले के बाद ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को किसी समझौते के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की असली पहचान व चुनाव चिन्ह को वापस पाने के लिए कड़ा संघर्ष करेंगी. ममता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ अपने 39 साल के लंबे राजनीतिक संघर्ष, त्याग और जुड़ाव का हवाला देते हुए कहा कि वह इस पार्टी को कभी नहीं छोड़ सकतीं.

BUSINESS : अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में हलचल तेज, कच्चे तेल की कीमतें और तिमाही नतीजे तय करेंगे इस हफ्ते की दिशा

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Market This Week: इस हफ्ते शेयर बाजार की नजर कई बड़े फैक्टर्स पर रहने वाली है, जिनमें अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं घटनाक्रमों…

इस हफ्ते शेयर बाजार की नजर कई बड़े फैक्टर्स पर रहने वाली है, जिनमें अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं घटनाक्रमों से बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल सबसे अहम ट्रिगर बना हुआ है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेश माहौल पर पड़ता है।

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच घोषित संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।

घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों पर रहेगा। इन नतीजों से कंपनियों की कमाई और आगे के कारोबार की स्थिति का अंदाजा लगेगा।

इसके अलावा, विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई की ट्रेडिंग गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। अगर विदेशी निवेशकों की खरीद या बिकवाली बढ़ती है तो उसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिख सकता है।

शेयर बाजार में इस हफ्ते निवेशकों की नजर सबसे पहले देश के बड़े प्राइवेट बैंकों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञ मिश्रा के अनुसार, शुरुआत में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गजों के परिणामों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। इसके बाद एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, हैवेल्स, इंडसइंड बैंक और श्रेयराम फाइनेंस जैसी कई बड़ी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी।

इस बीच देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.04 प्रतिशत बढ़कर 20,350.76 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर छोटे कारोबारियों से जुड़े लोन सेगमेंट पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में कुछ जोखिम बने रह सकते हैं।

आईसीआईसीआई बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 9.28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 14,755 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बैंक के मुनाफे में यह तेजी मुख्य रूप से प्रोविजनिंग में करीब 90 फीसदी की भारी गिरावट की वजह से आई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीना का कहना है कि इस सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी दिशा तय करने वाली चीज कंपनियों के तिमाही नतीजों की भरमार होगी। इसके साथ ही अमेरिकी मैक्रो आर्थिक डेटा और वैश्विक हालात भी बाजार की चाल पर असर डालेंगे।

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 943.29 अंक यानी 1.21 फीसदी बढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 302.95 अंक यानी 1.25 फीसदी मजबूत हुआ।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि निवेशकों की नजर खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर रहेगी। अगर इसमें स्थायी समाधान की ओर संकेत मिलते हैं तो इसका असर वैश्विक जोखिम वाले एसेट्स, पूंजी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है।

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात लगातार बदल रहे हैं। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग से आवाजाही रोक दी थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। बाद में शुक्रवार को ईरान ने इसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने की बात कही, लेकिन शनिवार को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों पक्षों के बीच बनी समझ का उल्लंघन किया है।

IND vs WI 1st ODI: विराट कोहली और शुभमन गिल के तूफान में उड़ा वेस्टइंडीज, भारत ने 50 गेंद रहते जीता मैच

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शुभमन गिल के शतकों की मदद से भारत ने वेस्टइंडीज को पहले वनडे में 8 विकेट से करारी शिकस्त दी. जानिए मैच की पूरी हाइलाइट्स और रिकॉर्ड्स.
IND vs WI 1st ODI: भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट से जीत दर्ज की. तिरुवनंतपुरम में खेले गए मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट पर 295 रन बनाए थे. जवाब में भारतीय टीम ने 41.4 ओवर में 2 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया. विराट कोहली और शुभमन गिल ने शानदार शतकीय पारियां खेलकर टीम को आसान जीत दिलाई.

रोहित ने दी अच्छी शुरुआत
296 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने शानदार शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए 74 रन जोड़े. रोहित 35 गेंदों में 32 रन बनाकर आउट हुए. उनकी पारी में 2 चौके और 3 छक्के शामिल रहे. उन्हें अल्जारी जोसेफ ने आउट किया.

रोहित के आउट होने के बाद शुभमन गिल और विराट कोहली ने पारी को संभाला. कप्तान शुभमन गिल ने भी वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में शानदार बल्लेबाजी की. उन्होंने 108 गेंदों में 110 रन की पारी खेली, जिसमें 13 चौके और एक छक्का शामिल रहा. यह वेस्टइंडीज के खिलाफ गिल का पहला वनडे शतक था. गिल और कोहली की शतकीय पारियों ने भारत के लिए 296 रन के लक्ष्य को आसान बना दिया.

विराट कोहली ने जड़ा 55वां वनडे शतक
विराट कोहली ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया. उन्होंने गुडाकेश मोती की गेंद पर छक्का लगाकर अपना 55वां वनडे शतक पूरा किया. इसके बाद कोहली ने अपनी पारी को अंत तक ले जाते हुए भारत को जीत दिलाई.

कोहली ने 139 रन की नाबाद पारी खेली. इस दौरान उन्होंने 10 चौके और 9 छक्के लगाए. 41.4 ओवर में कोहली ने छक्का लगाकर भारत के लिए विजयी रन बनाया और टीम ने 8 विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया. पहले वनडे में 8 विकेट से जीत के साथ भारतीय टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है.

ग्रीव्स के शतक के बाद कुलदीप का कहर
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत शानदार रही. जॉन कैम्पबेल और जस्टिन ग्रीव्स ने पहले विकेट के लिए 135 रन की साझेदारी की. कुलदीप यादव ने कैम्पबेल को 62 रन पर आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. कैम्पबेल ने 60 गेंदों में 6 चौके और 3 छक्के लगाए.

भारत की जीत में गेंदबाजी के दौरान कुलदीप यादव की भूमिका भी अहम रही. उन्होंने 10 ओवर में 4 विकेट लेकर वेस्टइंडीज के मध्यक्रम को लगातार दबाव में रखा. कुलदीप ने जॉन कैम्पबेल, शाई होप, जस्टिन ग्रीव्स और ज्वेल एंड्रयू को अपना शिकार बनाया. उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा ने दो और नीतीश कुमार रेड्डी ने एक विकेट हासिल किया. शानदार गेंदबाजी के चलते कुलदीप को मैन आफ द मैच का अवार्ड दिया गया.

ग्रीव्स ने जड़ा शतक
ग्रीव्स ने 108 गेंदों में 101 रन की शानदार पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे. यह उनके वनडे करियर का पहला शतक था. ज्वेल एंड्रयू बिना खाता खोले आउट हुए. इसके बाद आमिर जंगू ने पारी को संभाला. उन्होंने 43 गेंदों में नाबाद 58 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 1 छक्का शामिल रहा. रोस्टन चेज ने 24 रन बनाए. अंत में वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 7 विकेट पर 295 रन का स्कोर खड़ा किया.

कोहली ने पूरे किए 15 हजार ODI रन
विराट कोहली ने 15 हजार वनडे रन का आंकड़ा सिर्फ उपलब्धि के तौर पर ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड समय में हासिल किया. उन्होंने यह मुकाम 303वीं पारी में हासिल किया और वनडे इतिहास में सबसे तेज 15 हजार रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन गए. इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था, जिन्होंने 377 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था. यानी कोहली ने सचिन से 74 पारियां कम खेलकर यह उपलब्धि हासिल की.

भारत का वेस्टइंडीज पर दबदबा
आंकड़ा संख्या
कुल वनडे मुकाबले 142
भारत की जीत 72
वेस्टइंडीज की जीत 64
बेनतीजा मैच 4
टाई मैच 2
वेस्टइंडीज ने आखिरी बार 2006 में भारत को द्विपक्षीय वनडे सीरीज में हराया था. इसके बाद दोनों टीमों के बीच खेली गई 13 वनडे सीरीज में भारत ने जीत दर्ज की है. विराट कोहली वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं.

दोनों टीमों की प्लेइंग-11
भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (विकेटकीपर), नमन धीर, नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, गुरनूर बरार, प्रसिद्ध कृष्णा और कुलदीप यादव.

वेस्टइंडीज: जॉन कैम्पबेल, जस्टिन ग्रीव्स, कीसी कार्टी, शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), आमिर जंगू, ज्वेल एंड्रयू, रोस्टन चेज, मैथ्यू फोर्ड, गुडाकेश मोती, अल्जारी जोसेफ और जेडन सील्स.

BUSINESS : दिवाली से पहले बड़ा झटका! AC से TV तक महंगे होंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान, जानें कितनी बढ़ेगी कीमतें

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AC TV Firdge Price Hike: अगर आप इस फेस्टिव सीजन में घर के लिए AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो बजट थोड़ा बढ़ाना पड़ सकता है। अक्टूबर की शुरुआत आपके लिए महंगी खरीदारी लेकर आ सकती है। कंपनियां बढ़ती लागत का असर अब सीधे उत्पादों की कीमतों पर डालने की तैयारी में हैं। कहा जा रहा है कि 1 अक्टूबर से कंपनियां AC, LED TV, वॉशिंग मशीन और फ्रिज जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतों में 8 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।

इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर, स्टील, एल्युमीनियम और क्रूड ऑयल से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है। वहीं करेंसी में उतार-चढ़ाव की वजह से कंपनियों ने दाम बढ़ाने का फैसला किया है। साल 2026 में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की तरफ से यह कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी होगी।

AC की कीमत 5-8% तक बढ़ सकती है
नई कीमत बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर एयर कंडीशनर पर पड़ सकता है। इंडस्ट्री के मुताबिक AC की कीमतों में करीब 5-8% तक इजाफा हो सकता है। वहीं, कुछ कंपनियां LED TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन की कीमतों में करीब 3-4% तक बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। हालांकि, हर कंपनी कीमत बढ़ाने का फैसला एक ही तारीख से लागू नहीं करेगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लू स्टार, गोदरेज अप्लायंसेज, हायर, डाइकिन और सुपर प्लास्ट्रोनिक्स अलग-अलग कैटेगरी में कीमत बढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं। LG और बॉश होम कंफर्ट ने भी AC की कीमतों में करीब 5 फीसदी की बढ़ोतरी की है। वहीं पैनासोनिक अभी लागत और बाजार की स्थिति के आकलन में जुटी हुई है।

ब्लू स्टार के एमडी बी थियागराजन का कहना है कि युद्ध के कारण तांबा, लोहा और प्लास्टिक समेत सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार लागत लगभग 15% बढ़ गया है, जबकि जीएसटी के लगभग 10% लाभ से खरीदारों पर कुल प्रभाव करीब 5% तक कम होगा।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट कमल नंदी का कहना है कि पिछली कीमत समीक्षा के बाद कमोडिटी लागत में 8-10% की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कैटेगरी में 5-7% की कीमत बढ़ोतरी जरूरी हो गई है। हालांकि, कंपनियां इसे अलग-अलग समय पर लागू कर सकती हैं। कुछ अक्टूबर से और कुछ नवंबर से नई कीमतें लागू कर सकती हैं।

NATIONAL : UPI पर चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सरकार के फैसले को दी चुनौती

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केंद्र सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। PIL में इस व्यवस्था को कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू करने का आरोप लगाते हुए इसे रद्द या स्थगित करने की मांग की गई है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में कहा गया है कि यह शुल्क पर्याप्त कानूनी सुरक्षा उपायों, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू किया गया है।

क्या है मामला?
सरकार ने 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाएगा। हालांकि, 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा। यह शुल्क व्यापारियों को देना होगा।

अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर पीआईएल में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित एमडीआर व्यवस्था को चुनौती दी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है।

याचिका के अनुसार, नयी व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के सामान्य पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर का प्रावधान है। इसके साथ ही 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।

याचिका में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह प्रावधान कार्यपालिका को बिना स्पष्ट दिशानिर्देश के यह अधिकार देता है कि कौन सा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम शुल्क मुक्त रहेगा।

याचिका में शुल्क दरों, लेनदेन सीमा, अधिकतम सीमा और अलग-अलग क्षेत्रों के वर्गीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि ये प्रावधान एक प्रेस बयान के जरिये घोषित किए गए हैं और शुल्क तय करने वाला पूरा आदेश आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित नहीं किया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि यह व्यवस्था मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा इससे कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसमें उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष बोझ और डिजिटल भुगतान से वंचित होने की आशंका भी जताई गई है।

पुनर्विचार की अपील
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने वाली व्यवस्था को रद्द या स्थगित करने का अनुरोध किया है। वैकल्पिक रूप से, उसने पारदर्शी परामर्श, आंकड़ों के प्रकाशन, प्रभाव आकलन और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए सुरक्षा उपायों के बाद इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की अपील की गई है। याचिका में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार से स्वतंत्र समीक्षा कराने का भी आग्रह किया गया है।

BUSINESS : इंडिगो फ्लाइट का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया:गुवाहाटी से बेंगलुरु आ रहा था विमान, सभी यात्री सुरक्षित; 47 दिन में इंडिगो से जुड़ा छठा मामला

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बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इंडिगो की फ्लाइट 6E 6542 का पिछला हिस्सा लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गया। रविवार दोपहर गुवाहाटी से आ रहे प्लेन को केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दिक्कत हुई थी।

फ्लाइट ने जब पहली बार लैंडिंग की कोशिश की तो उसका पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। इसके बाद उसने गो-अराउंड किया (यानी विमान ने वापस उड़ान भर ली)। इसके बाद दूसरी बार दोपहर 1:34 बजे प्लेन ने सुरक्षित लैंडिंग की।

अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि फ्लाइट में कितने लोग सवार थे। हालांकि, सभी यात्री सुरक्षित हैं।

यह पिछले 47 दिनों में इंडिगो की किसी फ्लाइट में आई दिक्कत (इमरजेंसी लैंडिंग, डायवर्जन और तकनीकी खराबी) से जुड़ा छठा मामला है।

DGCA ने जांच शुरू की

हादसे के बाद इस प्लेन की उड़ान रोक दी गई है और उसकी तकनीकी जांच चल रही है। पूरी तरह ठीक पाए जाने के बाद ही इसे दोबारा उड़ाया जाएगा।

इंडिगो ने कहा कि उन्होंने नियमों के मुताबिक सभी अफसरों को जानकारी दे दी है। कंपनी के लिए यात्रियों और स्टाफ की सुरक्षा सबसे पहले है।

इस प्लेन को आगे कोयंबटूर भी जाना था। बेंगलुरु से कोयंबटूर जाने वाले यात्रियों के लिए तुरंत दूसरा प्लेन लगाया गया, ताकि किसी को परेशानी न हो।

उड्डयन विभाग (DGCA) ने इंडिगो की इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

सिर्फ 42 दिनों में इंडिगो फ्लाइट्स से जुड़ी 5 घटनाएं

22 सितंबर 2026: लंदन से दिल्ली आ रही फ्लाइट में तकनीकी खराबी (धुआं) के कारण वापस लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

15 सितंबर 2026: अगरतला से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट के कार्गो हिस्से में धुएं की चेतावनी मिलने पर उसे तुरंत लखनऊ डायवर्ट किया गया।

3 सितंबर 2026: दोहा से बेंगलुरु आ रही फ्लाइट के पायलट की अचानक तबीयत खराब होने (फूड पॉइजनिंग) के कारण मस्कट में इमरजेंसी लैंडिंग हुई।

1 सितंबर 2026: गोवा से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का हवा में एक इंजन फेल होने के कारण उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद गोवा में वापस लैंडिंग हुई।

11 अगस्त 2026: कोलकाता से चेन्नई जाने वाली फ्लाइट का बायां इंजन काम करना बंद कर देने पर चेन्नई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

तकनीकी खराबी होने पर यात्रियों को सुविधाएं देती हैं एयरलाइंस

अगर तकनीकी खराबी की वजह से फ्लाइट में 2 से 4 घंटे की देरी होती है, तो एयरलाइन को यात्रियों को मुफ्त नाश्ता, खाना और पानी देना पड़ता है। यदि देरी रात भर के लिए हो जाए या 24 घंटे से ज्यादा खिंच जाए, तो यात्रियों के रुकने के लिए फ्री होटल और आने-जाने की गाड़ी की व्यवस्था करना भी कंपनी की जिम्मेदारी होती है।

इसके अलावा, एयरलाइन को हर आधे घंटे में फ्लाइट का सही अपडेट देना जरूरी है, और अगर आप चाहें तो अपनी यात्रा रद्द करके पूरे पैसे वापस ले सकते हैं या बिना किसी अतिरिक्त खर्च के दूसरी फ्लाइट चुन सकते हैं।

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