Wednesday, September 16, 2026
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BUSINESS : असफलता के बाद बड़ी वापसी की तैयारी में ISRO, 4 सितंबर को लॉन्च होगा भारत की तीसरी आंख ‘हॉक्स आई’ सैटेलाइटGSLV Mk II

रॉकेट ने हाल ही में NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने में अहम भूमिका निभाई थी. यह भारत-अमेरिका का एक ऐतिहासिक मिशन था, जिसे दुनिया का सबसे महंगा अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट माना जाता है.

अपने भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) रॉकेट के लगातार दो बार फेल होने के बाद, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) एक अहम वापसी मिशन की तैयारी कर रहा है. 4 सितंबर की सुबह, ISRO अपने सबसे महत्वाकांक्षी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (पृथ्वी पर नज़र रखने वाले उपग्रह) में से एक को जियो-सिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV F17) रॉकेट के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजने की कोशिश करेगा.

इस मिशन में EOS 5 (जिसे पहले GISAT 1A के नाम से जाना जाता था) सैटेलाइट शामिल है. इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह भारत को पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की बहुत ज़्यादा ऊंचाई से देश का लगातार ‘बर्ड्स आई व्यू’ (ऊपर से नज़ारा) दे सके. अगर यह मिशन सफल होता है, तो सैटेलाइट भारत को अपने इलाके, समुद्र तट, मौसम प्रणालियों और आपदा की आशंका वाले इलाकों पर लगातार नज़र रखने की अभूतपूर्व क्षमता देगा. इसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा लगा होने के कारण यह भारत की सीमाओं को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा. यह एक ऐसा सैटेलाइट है जिसका भारत का रणनीतिक समुदाय लंबे समय से इंतज़ार कर रहा था.

ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने NDTV को कन्फर्म किया कि लंबे समय तक कोई लॉन्च न होने के बाद स्पेस एजेंसी आखिरकार लॉन्च पैड पर लौट रही है. यह लॉन्च भारतीय स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बहुत व्यस्त समय की शुरुआत हो सकता है. डॉ. नारायणन ने कन्फर्म किया कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो EOS-5 को शुक्रवार, 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.

डॉ. नारायणन के अनुसार, ISRO की योजना अभी से मार्च 2027 के बीच सात लॉन्च करने की है, जिसमें गगनयान ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम का बहुप्रतीक्षित G1 मिशन (पहली बिना क्रू वाली उड़ान) भी शामिल है. उन्होंने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप भी तैयार किया है. ISRO 12 सैटेलाइट तैयार करने और आठ लॉन्च व्हीकल मिशन पूरे करने का लक्ष्य रख रहा है. ये मिशन कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और साइंटिफिक रिसर्च में मदद करेंगे और साथ ही भविष्य के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट और एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम के लिए आधार तैयार करेंगे. इस वापसी को खास बनाने वाली बात यह है कि यह कितनी मुश्किल परिस्थितियों में हो रही है.

भारत का बहुत भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) लगातार दो बार फेल होने के बाद कई जांच और वैलिडेशन टेस्ट पूरे होने तक अभी रुका हुआ है. मई 2025 में EOS 09 को ले जा रहा PSLV C61 मिशन फेल हो गया था. उस झटके के बाद, 13 जनवरी 2026 को EOS N1 और कई कस्टमर सैटेलाइट ले जा रहा PSLV C62 मिशन भी फेल हो गया. PSLV प्रोग्राम के लंबे और शानदार इतिहास में ऐसी लगातार विफलताएं पहले कभी नहीं देखी गईं. इसे दशकों से दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल में से एक माना जाता रहा है.

ISRO के लिए अच्छी बात यह है कि EOS 5 को ले जाने वाले GSLV Mk II में PSLV वाले इंजन या ज़रूरी प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया गया है. जिन समस्याओं की वजह से PSLV फ्लीट को रोका गया है, वे GSLV व्हीकल से जुड़ी नहीं लगतीं. इस अंतर से यह भरोसा मिलता है कि PSLV की नाकामियों की जांच जारी रहने के बावजूद आने वाला मिशन सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकता है. यह मिशन ISRO के लिए भावनात्मक रूप से भी अहम है.

12 अगस्त 2021 को इसी तरह के एक सैटेलाइट को ऑर्बिट में भेजने की पिछली कोशिश नाकाम रही थी. तब, EOS 03 (असली GISAT सैटेलाइट) को ले जाने वाला GSLV F10 रॉकेट, स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई खराबी के कारण फेल हो गया था. क्रायोजेनिक इंजन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाया, जिससे स्पेसक्राफ्ट खो गया. इस नाकामी की वजह से भारत उस क्षमता को हासिल नहीं कर पाया, जिसकी वैज्ञानिक लंबे समय से कोशिश कर रहे थे, और ISRO को फिर से नए सिरे से काम शुरू करना पड़ा. EOS 5 असल में उसी खोए हुए मिशन का अगला वर्जन है.

इस सैटेलाइट को स्पेस में एक खास जगह पर तैनात करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. ज़्यादातर अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर ऑर्बिट करते हैं और किसी जगह के ऊपर से कभी-कभी ही गुज़रते हैं, लेकिन EOS 5 भूमध्य रेखा (equator) से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से काम करेगा. इतनी ऊंचाई से, यह सैटेलाइट भारतीय इलाके के ऊपर स्थिर रहेगा और लगातार उपमहाद्वीप और आसपास के समुद्री इलाकों पर नज़र रखेगा. इस क्षमता को अक्सर आसमान में एक स्थायी ‘बाज़ जैसी नज़र’ (hawk’s eye) रखने जैसा बताया गया है.

उम्मीद है कि यह सैटेलाइट दिन भर भारत के भू-भाग की बार-बार तस्वीरें लेगा, जिससे चक्रवात, बाढ़, बादल फटने, जंगल की आग और तेज़ी से होने वाली दूसरी घटनाओं पर तुरंत नज़र रखी जा सकेगी. वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों, मौसम की भविष्यवाणी करने वालों, कृषि योजनाकारों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगभग रियल-टाइम जानकारी मिल सकती है. सैटेलाइट के सिर के ऊपर से गुज़रने के लिए घंटों या दिनों तक इंतज़ार करने के बजाय, फ़ैसला लेने वाले एक ऐसे स्पेसक्राफ्ट से लगातार अपडेट पा सकेंगे, जो कभी भी भारत से अपनी नज़र नहीं हटाता.

यह क्षमता ऐसे देश के लिए बहुत ज़रूरी है जो मौसम की बड़ी घटनाओं के प्रति तेज़ी से संवेदनशील होता जा रहा है. हिंद महासागर में तेज़ी से बनने वाले चक्रवात, हिमालय में बादल फटना और अचानक बाढ़ आने जैसी घटनाओं पर लगातार अंतरिक्ष-आधारित निगरानी से फ़ायदा मिल सकता है.

इस लॉन्च से GSLV Mk II रॉकेट को अपनी परिपक्वता और विश्वसनीयता साबित करने का एक और मौका भी मिलेगा.

इस रॉकेट ने हाल ही में NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने में अहम भूमिका निभाई थी. यह भारत-अमेरिका का एक ऐतिहासिक मिशन था, जिसे दुनिया का सबसे महंगा अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट माना जाता है. उस मिशन की सफलता ने GSLV Mk II प्लेटफ़ॉर्म पर भरोसा बढ़ाया और जटिल क्रायोजेनिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में ISRO की तरक्की को दिखाया.

इसलिए, स्पेस एजेंसी के लिए EOS 5 मिशन सिर्फ़ एक और सैटेलाइट लॉन्च करने से कहीं ज़्यादा है. यह मुश्किलों के बाद मज़बूती से वापसी का टेस्ट है. यह कई महीनों तक कोई लॉन्च न होने के बाद गति को फिर से हासिल करने का मौका है. यह उस क्षमता को आखिरकार हासिल करने का मौका है जिसे भारत ने पांच साल पहले चाहा था, लेकिन EOS 03 के ऑर्बिट तक न पहुंच पाने के कारण खो दिया था.

सबसे अहम बात यह है कि यह उस गतिविधि के ज़ोरदार दौर की शुरुआत है, जिसकी ISRO को उम्मीद है. इसमें नेविगेशन, कम्युनिकेशन और वैज्ञानिक मिशन के साथ-साथ भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की तैयारी भी शामिल होगी.

4 सितंबर को भोर से पहले के शांत समय में, सबकी नज़रें एक बार फिर श्रीहरिकोटा पर होंगी. महीनों की अनिश्चितता और मुश्किलों के बाद, ISRO वापसी की तैयारी कर रहा है. वह अपने साथ एक ऐसा सैटेलाइट ले जा रहा है जिसे अंतरिक्ष की सीमा से भारत पर लगातार नज़र रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है. अगर यह सफल होता है, तो EOS 5 आसमान में भारत का स्थायी प्रहरी बन सकता है और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए गतिविधियों के एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे सकता है.

NATIONAL : पूर्व CM अशोक गहलोत के बयान से गरमाई सियासत, बीजेपी नेताओं ने गहलोत पर किए पलटवार, देखिए ये खास रिपोर्ट

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जयपुर: पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयानों ने कांग्रेस की अंदरूनी ही नहीं बल्कि पूरे सूबे की सियायत को उफान पर ला दिया. गहलोत के बयान ने कांग्रेस के भीतर मौजूद पुराने मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है. वहीं भाजपा को बैठे बिठाए मुद्दा मिला गया. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस नेता मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, लेकिन उनकी राजनीति में मोहब्बत दिखाई नहीं देती, यह कैसी मोहब्बत है जो अपनी ही पार्टी के लोगों के बीच बांटी जा रही है.यात्रा की गाइड और यात्रा की जानकारी

BJP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अंतर कलह से उबर नहीं पाई है..कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर आने से रोकने की साजिश को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयानों पर तेज गर्मी में राजनीतिक पारा चढ़ गया है… भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यसभा उम्मीदवार डॉ सतीश पूनिया,पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को घेरा.. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस के अंदरूनी विवाद को लेकर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेता मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, लेकिन उनकी राजनीति में मोहब्बत दिखाई नहीं देती. शेखावत ने कहा कि यह कैसी मोहब्बत है जो अपनी ही पार्टी के लोगों के बीच बांटी जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत स्वार्थ, महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति और राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपने ही सहयोगियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करते हैं. शेखावत ने कहा कि अपनी लाइन लंबी करने के बजाय दूसरों की लाइन मिटाने की राजनीति कांग्रेस में लंबे समय से चल रही है और आज भी वही स्थिति दिखाई दे रही है.

भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश पूनिया ने भी कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाए. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस लगातार आभासी राजनीति में उलझी हुई है और आत्मविश्लेषण करने से बच रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह समझने का प्रयास नहीं कर रही कि जनता लगातार उसे क्यों नकार रही है. पूनिया के अनुसार कांग्रेस गंभीर अंतर्कलह से गुजर रही हैराजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर कहा कि कांग्रेस में अंतर्कलह कोई नई बात नहीं है. यह स्थिति पिछले दस वर्षों से लगातार बनी हुई है, पुराने चांवल है जो खटक रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को भाजपा की चिंता छोड़कर अपने संगठन पर ध्यान देना चाहिए. चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए कहा, जो उनके घर को खटक रहा है, पहले उसे देखें. हमारे घर को देखने की बजाय अपना घर संभालें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी संघर्ष खुलकर सामने आ रहा है, जिससे पार्टी की वास्तविक स्थिति उजागर हो रही है.

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान पर तंज कसते हुए कहा कि गहलोत साहब को अब कांग्रेस आलाकमान पूछ नहीं रहा है. इसलिए वह विद्रोही तेवर दिखाकर दोबारा आलाकमान में अपना स्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. राठौड़ ने कहा कि गहलोत के दर्द की अभी तक कोई दवा नहीं हुई है और जब भी उन्हें मौका मिलता है, उनका दर्द बाहर आ जाता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति किसी से छिपी नहीं है. पार्टी की ए और बी टीम लगातार एक-दूसरे पर गोल दाग रही हैं, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है.

मानेसर का घटनाक्रम उस समय का है जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया थे. तब भी पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उन पर आरोप जड़े थे. अब फिर जब सतीश पूनिया राज्यसभा में बीजेपी के उम्मीदवार बने है मानेसर का जिन्न बाहर आ गया.

NATIONAL : राजस्थान में 15 नवम्बर तक बारिश से टूटी सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता

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राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने मंगलवार को सचिवालय में सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और एनएचएआई की चल रही परियोजनाओं की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी कार्य त्वरित गति तथा पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। राज्य सरकार ने अस्थाई मरम्मत के लिए 645 करोड़ रुपये और स्थाई मरम्मत के लिए 800 करोड़ रुपये का बजट पहले ही जारी कर दिया है। विभाग द्वारा कार्य शुरू कर दिए गए हैं और मुख्य सचिव ने 15 नवम्बर तक पेच रिपेयर वर्क उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भावना के अनुरूप अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहकर कार्य समय पर पूर्ण करें। अपवाद की स्थिति में ही निविदा की तिथि बढ़ाई जाए तथा वर्क ऑर्डर जारी करने तक की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी की जाए।

मुख्य सचिव ने एनएचएआई की 7919 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अंतर्विभागीय मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने के लिए सभी विभागों को सामंजस्य के साथ काम करना होगा।

बैठक में 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले पीडब्ल्यूडी के कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जो 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं उन्हें 31 दिसम्बर तक और शेष कार्य मार्च 2026 तक पूरे किए जाएं। उन्होंने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम (PMIS) की सराहना करते हुए कहा कि हर प्रोजेक्ट की 3–4 उच्च गुणवत्ता की फोटो अपलोड की जाएं और सुगम पथ ऐप के माध्यम से सड़कों की निगरानी नियमित रूप से की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं को समय पर पूरा करने और आमजन को शीघ्र लाभ दिलाने के लिए हर माह बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बीते दो वर्षों में राज्य में 24,976 करोड़ रुपये की लागत से 36,140 किमी सड़कों का निर्माण हो चुका है, जबकि 2024–25 और 2025–26 की बजट घोषणाओं में 15,000 करोड़ रुपये के 12 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

बैठक में लिए गए 5 बड़े निर्णय
सड़कों की त्वरित मरम्मत पर जोरमुख्य सचिव ने बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। 15 नवम्बर तक सभी पेच रिपेयर कार्य उच्च गुणवत्ता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
निविदा प्रक्रिया में सख्तीअपवाद की स्थिति में ही निविदा तिथि बढ़ाई जाए और वर्क ऑर्डर जारी करने तक तय समयसीमा का पालन अनिवार्य किया जाए।
एनएचएआई परियोजनाओं के लिए स्पेशल टास्क फोर्सएनएचएआई–एनएच कार्यों में तेजी लाने और विभागीय विवादों के समाधान के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए गए।
लम्बित कार्यों की समयसीमा तय50 करोड़ से अधिक लागत के 35 कार्यों को 31 दिसम्बर तक और शेष 8 कार्यों को मार्च 2026 तक पूर्ण करने की समयसीमा तय की गई।
पीएमआईएस और सुगम पथ ऐप पर निगरानी बढ़ेगीमुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम को सुदृढ़ करने और सुगम पथ ऐप के जरिए सड़कों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए।

WORLD : ‘दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील’; ट्रंप ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर किया अमेरिकी नियंत्रण का दावा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है. ट्रंप के मुताबिक इससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुने से अधिक हो जाएंगे और पेट्रोल की कीमतों में कमी आने में मदद मिलेगी.

‘दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील’; ट्रंप ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर किया अमेरिकी नियंत्रण का दावा65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, ट्रंप ने बताया दुनिया की सबसे बड़ी डीलवाशिंगटन:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े ऊर्जा समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण हासिल कर लिया है. ट्रंप ने इसे “विश्व इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा” बताया और कहा कि इससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुने से अधिक हो जाएंगे, घरेलू आपूर्ति बढ़ेगी और लंबे समय तक पेट्रोल की कीमतों में कमी आएगी. ट्रंप के अनुसार यह समझौता विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के सहयोग से हुआ है. इस घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर की घोषणा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी. उन्होंने लिखा है कि ‘संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी वेनेजुएला के साथ विश्व इतिहास के सबसे बड़े तेल समझौते पर एक समझौता किया है! मेरे निर्देश पर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की अत्यंत सम्मानित अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ मिलकर और निजी क्षेत्र की साझेदारी के माध्यम से वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर अमेरिका का बहुमत नियंत्रण सुनिश्चित कर लिया है. यह सब अमेरिकी करदाताओं पर किसी भी लागत के बिना किया गया है. यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिकी तेल भंडार को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगा, तेल आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और लंबे समय तक सभी अमेरिकियों के लिए पेट्रोल की कीमतों में महत्वपूर्ण कमी लाएगा. साथ ही, यह वेनेजुएला को भी जबरदस्त सफलता और समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ाने में मदद करेगा. यह समझौता वेनेजुएला और अमेरिका के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को और अधिक सशक्त बनाएगा. इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व विषय पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद. अमेरिका को फिर महान बनाएं!’ ट्रंप ने कहा कि यह सौदा अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और भविष्य में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मददगार साबित होगा.

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब करीब नौ महीने पहले ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर अमेरिका लाया गया था. मादुरो पर मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-टेररिज्म से जुड़े आरोप लगाए गए थे. मादुरो के सत्ता से हटने के बाद ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए थे कि अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में फिर से अवसर दिए जा सकते हैं.

ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों की चुनौती
अमेरिकी प्रशासन पर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर दबाव बढ़ रहा है. ईरान युद्ध छह महीने से जारी है और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार अगस्त की शुरुआत में अमेरिका का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 30 करोड़ बैरल से नीचे पहुंच गया था. वर्ष 2026 की शुरुआत से इसमें 10 करोड़ बैरल से अधिक की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में ट्रंप प्रशासन इस समझौते को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने और घरेलू बाजार को स्थिर करने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रहा है.

WORLD : वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अब अमेरिका का कब्जा, ट्रंप का दावा- दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी ऑयल डील

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ 65 अरब बैरल से अधिक के प्रमाणित कच्चे तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण का ऐतिहासिक समझौता किया है। जानें इस ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ तेल सौदे के सभी पहलू।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। इस समझौते के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित कच्चे तेल के भंडार पर नियंत्रण हासिल करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फैसले की जानकारी देते हुए इसे “विश्व इतिहास की सबसे बड़ी ऑयल डील” करार दिया है।

किन नेताओं के बीच हुआ यह ऐतिहासिक समझौता?
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल सौदे की रूपरेखा और बातचीत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच गहन कूटनीतिक चर्चा के बाद तय हुई है। इस समझौते में निजी व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ भी रणनीतिक साझेदारी की गई है। सबसे खास बात यह है कि इस विशाल तेल सौदे को हासिल करने के लिए अमेरिकी करदाताओं का एक भी डॉलर खर्च नहीं हुआ है।

अमेरिका के तेल रिजर्व पर असर और आम जनता को राहत
इस सौदे के लागू होने से अमेरिका के ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में दूरगामी बदलाव देखने को मिलेंगे 65 अरब बैरल का यह नया भंडार जुड़ने से अमेरिका का कुल राष्ट्रीय तेल रिजर्व दोगुने से भी अधिक हो जाएगा। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि कच्चे तेल की भारी आपूर्ति से आने वाले समय में अमेरिकी नागरिकों के लिए पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कटौती होगी। वर्षों से आर्थिक संकट और बदहाली झेल रहे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को इस सौदे के जरिए नई गति मिलने की उम्मीद है।

मादुरो की गिरफ्तारी और वैश्विक तेल बाजार की हलचल
यह ऐतिहासिक डील पिछले कई महीनों के अमेरिकी कूटनीतिक दबाव, कड़े प्रतिबंधों और प्रत्यक्ष निगरानी के बाद संभव हुई है। यह समझौता वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक अमेरिकी सैन्य अभियान के जरिए हिरासत में लिए जाने और नारको-टेररिज्म के आरोपों में अमेरिका स्थानांतरित किए जाने के 9 महीने बाद हुआ है। अगस्त के शुरुआती हफ्तों में अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व गिरकर 300 मिलियन बैरल से नीचे आ गया था, जिसके बाद अमेरिका के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ करना बेहद जरूरी हो गया था। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल कच्चा तेल है, जो दुनिया की कुल आपूर्ति का लगभग 17% है। हालांकि, जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण वेनेजुएला अब तक अपनी क्षमता का 1% से भी कम उत्पादन कर पा रहा था।

BUSINESS : जियो के आईपीओ को सेबी की मंजूरी: 27 करोड़ नए शेयर जारी कर बाजार में उतरेगी कंपनी, निवेशकों के लिए खास क्या?

सेबी की मंजूरी के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की राह का बड़ा नियामकीय पड़ाव पार हो गया है। कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अब शेयर का भाव और आईपीओ से जुटाई जाने वाली कुल रकम तय होना बाकी है।

जियो प्लेटफॉर्म्स को अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और कनेक्टिविटी कंपनी ने शेयर बाजार में उतरने की दिशा में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है।

27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करने की तैयारी में कंपनी
कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की तैयारी में है। हर शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये होगी। खास बात यह है कि आईपीओ में ऑफर फॉर सेल का कोई हिस्सा नहीं होगा। यानी मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

सेबी ने जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट की प्रोसेसिंग स्थिति में बताया कि 28 अगस्त, 2026 वाले सप्ताह में कंपनी को टिप्पणियां जारी की गईं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आधिकारिक ऑफर डॉक्यूमेंट पोर्टल पर भी जियो के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी की स्थिति पहले ‘अप्रूव्ड’ दिखाई गई थी।

19 जून को डीआरएचपी दाखिल
कंपनी ने 19 जून को डीआरएचपी दाखिल किया था। दस्तावेज के मुताबिक, शेयरों का भाव बुक बिल्डिंग प्रक्रिया से तय होगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि आईपीओ के जरिए कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी। जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 19 जून को आईपीओ की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की थी। उस दिन जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने डीआरएचपी को मंजूरी दी थी। इसके बाद रिलायंस ने शेयर बाजारों को बताया था कि प्रस्तावित आईपीओ जरूरी नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा। इसी दिन रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, “जियो की प्रस्तावित लिस्टिंग दुनिया को दिखाएगी कि भारत वैश्विक स्तर, वैश्विक क्षमता और वैश्विक मूल्य वाली टेक्नोलॉजी कंपनियां बना सकता है।”

कई साल पुरानी है जियो की योजना
जियो को शेयर बाजार में लाने की योजना कई साल पुरानी है। 2019 में रिलायंस की वार्षिक आम बैठक में मुकेश अंबानी ने जियो और रिलायंस रिटेल, दोनों को अगले पांच वर्षों में सूचीबद्ध करने की दिशा में बढ़ने की बात कही थी। इसके बाद नवंबर 2019 में जियो प्लेटफॉर्म्स को रिलायंस के डिजिटल और कनेक्टिविटी कारोबार की होल्डिंग कंपनी के रूप में शामिल किया गया।

BUSINESS : दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी 3.89 रुपये महंगी, 29 अगस्त सुबह 6 बजे से बढ़े हुए रेट पर मिलेगी गैस

CNG Price Hike: दिल्ली और एनसीआर में सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों का सफर महंगा हो गया है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने सीएनजी के दामों में 3.89 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की है. नई दरें शनिवार 29 अगस्त सुबह 6 बजे से लागू हो जाएंगी. इस फैसले के बाद राजधानी में सीएनजी 83.09 रुपये से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलो मिलेगी. यह बढ़ोतरी नोएडा और गाजियाबाद समेत आसपास के सभी इलाकों में लागू होगी.

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाने वालों को महंगाई का झटका लगा है. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने सीएनजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है. शनिवार, 29 अगस्त सुबह 6 बजे से सीएनजी के दाम 3.89 रुपये प्रति किलो बढ़ जाएंगे. इस इजाफे के बाद दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 86.98 रुपये प्रति किलो हो जाएगी. अब तक राजधानी में यह 83.09 रुपये प्रति किलो मिल रही थी. बढ़ी हुई नई दरें दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी तुरंत लागू होंगी. इससे ऑटो, कैब और प्राइवेट कार चालकों का सफर महंगा हो जाएगा.

मई में भी 11 दिनों के अंदर 6 रुपये महंगी हुई थी सीएनजी
दिल्ली-एनसीआर में इससे पहले मई के महीने में भी महज 11 दिनों के भीतर सीएनजी के दाम 6 रुपये तक बढ़ाए गए थे. उस दौरान 26 मई को 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद राजधानी में सीएनजी 81.09 रुपये से बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थी. इसके साथ ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी दरें बढ़कर 88.70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई थीं.

पब्लिक सेक्टर की कंपनी IGL ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें ‘काफी ज़्यादा’ हैं. कंपनी ने कहा कि ‘लागत का असर तेज़ी से बढ़ रहा है’, इसलिए ‘सीएनजी सप्लाई की निरंतरता और भरोसेमंदता बनाए रखते हुए इनपुट गैस की लागत में हुई बढ़ोतरी की आंशिक भरपाई के लिए अब 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम का बदलाव करना जरूरी हो गया है’.कंपनी ने अपने बयान में इसके साथ ही कहा, ‘इस बदलाव के बाद भी दिल्ली में CNG की खुदरा कीमत ग्राहकों के लिए सबसे किफायती विकल्पों में से एक बनी हुई है.’ इसमें आगे कहा गया, ‘सीएनजी ग्राहक आयातित स्पॉट एनएलजी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के असर से काफी हद तक बचे हुए हैं.’

BUSINESS : 1 सितंबर से 9 रुपए महंगा होगा दूध, इस शहर में डेयरी एसोसिएशन ने कर दिया ऐलान

चीनी, प्याज और अंडों के बाद अब दूध के दाम बढ़ने वाले हैं. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने एक सितंबर से दूध के दाम में 9 रुपए का इजाफा करने का ऐलान कर दिया है.

आम जनता को एक सितंबर से महंगाई का बहुत बड़ा झटका लगने वाला है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दूध की कीमतों में सीधे 9 रुपए की बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है. यह ऐलान मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने किया है. कीमतें बढ़ने के साथ ही मुंबई में दूध का मौजूदा होलसेल दाम 93 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 102 रुपए प्रति लीटर हो जाएगा.

मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने यह फैसला डेयरी जानवरों की बढ़ती कीमतों और जानवरों के चारे की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए लिया है. एसोसिएशन के प्रेसिडेंट चंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ये नई कीमतें मुंबई में 1 सितंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेंगी. यह फैसला जोगेश्वरी के दीवान सेंटर हॉल में हुई एक मीटिंग में लिया गया.

जानवरों के चारे में 25 फीसदी की बढ़ोतरी- एसोसिएशन

इस मीटिंग में यह बताया गया कि डेयरी जानवरों की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ जानवरों के चारे जैसे अनाज, तुरचुनी, चना चुन्नी की कीमतों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. यह भी कहा गया कि चारे, खली वगैरह की कीमतों में बढ़ोतरी से दूध प्रोड्यूसर्स पर फाइनेंशियल बोझ पड़ रहा है.

अब 102 रुपए बिकेगा दूध

बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट को देखते हुए दूध की कीमत 9 रुपए प्रति लीटर बढ़ाकर 102 रुपए लीटर कर दी गई है. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने साफ किया कि यह फैसला दूध प्रोड्यूसर्स को बढ़ती कॉस्ट से राहत देने के लिए लिया गया है.

दिल्ली-एनसीआर में दूध के रेट क्या हैं?

बता दें कि दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में अभी फुल क्रीम दूध 72 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है. वहीं लोकल दूधवाले 80 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से दूध बेच रहे हैं. गाय के दूध की कीमत 65 रुपए प्रति लीटर से 70 रुपए प्रति लीटर है. हालांकि स्थानीय डेयरी फार्म या खुला दूध विक्रेताओं के दाम इलाके के हिसाब से अलग-अलग होते हैं.

दूध का प्रकार (आधा लीटर)
(एक लीटर)
फुल क्रीम दूध (Full Cream Milk)(Amul Gold / Mother Dairy Full Cream) 36 रुपए 72 रुपए
टोंड दूध (Toned Milk)(Amul Taaza / Mother Dairy Toned) 29 – 30 रुपए 58 – 60 रुपए
गाय का दूध (Cow Milk)(Amul Cow Milk / Mother Dairy Cow Milk) 31 – 32 रुपए 62 – 64 रुपए
डबल टोंड / डाइट दूध (Double Toned)(Mother Dairy Live Lite / Amul Slim n Trim) 25 – 26 रुपए 50 – 52 रुपए
भैंस का दूध (Buffalo Milk – A2/Special) 38 – 40 रुपए 75 – 80 रुपए
टोकन मिल्क (Mother Dairy Token / Bulk Vended) — 54 रुपए

NATIONAL : वाल्मीकि निगम विवाद: मंत्री बी नागेंद्र ने दिया इस्तीफा, बोले- पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए हट रहा हूं

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वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला फिर कर्नाटक की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा के लगातार दबाव के बीच मंत्री बी. नागेंद्र ने पद छोड़ने का एलान किया। उनका कहना है कि वह पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए हट रहे हैं। क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में मंत्रिमंडल से इस्तीफे का एलान कर दिया। उन पर लंबे समय से पद छोड़ने का दबाव था। भाजपा लगातार उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रही थी। नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया है, जिससे दल को शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा और खुद को उसकी ‘मनुवादी राजनीति’ का शिकार बताया।

यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि जिस निगम में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, वह अनुसूचित जनजातियों के विकास से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, निगम के धन को अलग-अलग खातों में भेजे जाने के आरोपों की जांच हुई है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

नागेंद्र ने क्या-क्या कहा?
बी नागेंद्र ने कहा कि वह भाजपा की ओर से दी जा रही ‘झूठी धमकियों’ से नहीं डरते और मुख्यमंत्री से मिलने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर बात करेंगे। नागेंद्र ने कहा, ‘मैं भाजपा की झूठी धमकियों से नहीं डरूंगा। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा। मैं मुख्यमंत्री से मिलने जा रहा हूं। मेरी वजह से पार्टी को शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। मैं मुख्यमंत्री के साथ इस मामले पर विस्तार से चर्चा करूंगा।’

सीएम डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने मुझे फ़ोन करके बताया। वह मुझसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं। शायद वह कृष्णा ऑफिस में होंगे। उन्होंने फोन पर कहा कि वह घर पर हैं या कृष्णा में कहीं हैं, मैं वहां पहुंचूंगा। आपने ही मुझे अभी बताया कि उन्होंने इसकी घोषणा कर दी है। मुझे भी फोन आया था। मैं उनसे मिलूंगा। उन्होंने फैसला किया है कि वह न सिर्फ मंत्री पद से, बल्कि एमएलए पद से भी इस्तीफा देंगे। इससे उन्हें बहुत दुख पहुंचा है। क्योंकि वह एक बेगुनाह इंसान हैं। मैंने इसकी जांच की है, मैंने सभी रिपोर्ट देखी हैं, मैंने सबसे बात की है। इसलिए उन्हें अपराधी की तरह दिखाना, जिस तरह से भाजपा ने चार बार जीत चुके एक दलित नेता के साथ बर्ताव किया है, इससे न सिर्फ़ उन्हें दुख पहुंचा है, बल्कि पूरे समुदाय और गरीब लोगों को भी दुख पहुंचा है, आज हर कोई दुखी है।

क्या है पूरा मामला?
महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम का विवाद मई 2024 में सामने आया था। निगम के लेखा अधिकारी पी. चंद्रशेखरन की मृत्यु के बाद मिले एक नोट में धन के अनधिकृत हस्तांतरण का आरोप लगाया गया था। इसके बाद जांच शुरू हुई। जांच में निगम के बैंक खाते से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेजे जाने के आरोप सामने आए। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, करीब 89.63 करोड़ रुपये के कथित अवैध हस्तांतरण की बात कही गई। कुछ रिपोर्टों में कुल कथित धन हेरफेर करीब 187 करोड़ रुपये बताया गया है। ये आरोप जांच एजेंसियों के हैं और इन पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।

NATIONAL : वाल्मीकि स्कैम: बी नागेंद्र ने दूसरी बार दिया कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा, प्रेस ब्रीफिंग में रो पड़े

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कर्नाटक में कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को डीके कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। वह दो साल में दूसरी बार ऐसा करने वाले मंत्री बन गए। नागेंद्र पर 89 करोड़ के घोटाले का आरोप है। बता दें इसी महीने की शुरुआत में कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इससे पहले वह 2024 में सिद्धरमैया सरकार में भी मंत्री रहे थे।

शुक्रवार शाम को इस्तीफे के एलान के साथ ही नागेंद्र भावुक हो गए और रोने लगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेंद्र ने कहा, ‘मैं संविधान में विश्वास करता हूं। हमने कई बार BJP से कहा कि वे विधानसभा में आकर मुझ पर लगे आरोपों पर चर्चा करें, लेकिन वे नहीं आए। सबूत कहां है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि BJP मनुस्मृति लागू करना चाहती है और उसकी आदिवासी-विरोधी सोच है; साथ ही कहा कि उन पर इसलिए हमला किया जा रहा है क्योंकि मैं दलित हूं। इसके बाद उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं।’

नागेंद्र पर क्या है आरोप?
बता दें भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में 89 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।

यह मामला तब सामने आया जब मई 2024 में निगम के अकाउंट्स ऑफिसर चंद्रशेखरन पी।ने आत्महत्या कर ली और एक नोट छोड़ा जिसमें बिना मंजूरी के फंड ट्रांसफर करने का आरोप लगाया गया था। जांच में पता चला कि निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम कई अन्य खातों में ट्रांसफर की गई थी।

जब समाचार चैनेल ने नागेंद्र से पूछा कि क्या पार्टी आलाकमान ने उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा था, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, मैं अपने फैसले खुद लेता हूं।’ कर्नाटक में नागेंद्र प्रमुख ST नेता हैं जो पार्टी द्वारा शिवकुमार को CM बनाने के फैसले लेने से पहले सिद्धरमैया की कैबिनेट में आदिवासी कल्याण मंत्री थे।

विवाद के बीच जून 2024 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। शिवकुमार के पद संभालने के बाद 3 अगस्त को उन्हें फिर से शामिल किया गया और योजना एवं सांख्यिकी विभाग का जिम्मा दिया गया।

कैसा रहा अब तक का सियासी सफर?
नागेंद्र ने 2008 में BJP के टिकट पर और फिर 2013 में कुदलिगी से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और बेल्लारी (ST-रिजर्व्ड) सीट से लगातार दो बार जीते।

उन्होंने कहा कि वे BJP को उसके प्रस्तावित विरोध मार्च के लिए कोई मुद्दा नहीं देना चाहते थे। कर्नाटक BJP ने राज्य में कांग्रेस सरकार की कथित नाकामियों को उजागर करने के लिए 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी, बेरोजगारी और भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा, नागेंद्र की पार्टी में वापसी भी उस 200 किलोमीटर लंबी पदयात्रा में एक बड़ा मुद्दा बनने की उम्मीद थी। राज्य BJP प्रमुख बी.वाई।विजयेंद्र ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी इसका उद्घाटन करेंगे।

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