Monday, February 2, 2026
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ENTERTAINMENT : विवेक ओबेरॉय ने फिल्मों से क्यों बनाई थी दूरी? ट्रेनर ने खोला सीक्रेट, कहा- डिप्रेशन…

विवेक ओबेरॉय अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. मगर उन्होंने अचानक फिल्मों से दूरी बनाकर बिजनेस का रुख कर लिया था. एक्टिंग में उनके करियर ने बैकसीट ले ली थी. अब विवेक के फिटनेस ट्रेनर रह चुके विनोद चन्ना ने एक्टर को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

विवेक ओबेरॉय इंडस्ट्री के बेहतरीन एक्टर्स में शुमार किए जाते हैं. उन्होंने अपने करियर में कई हिट फिल्मों में काम किया है. मगर उन्हें इंडस्ट्री में वो नाम और फेम नहीं मिला, जिसकी हर कलाकार को चाहत होती है. उनके फिल्मी करियर ने एक समय पर बैकसीट ले ली थी. एक्टिंग करियर में उतार-चढ़ाव देखने के बाद विवेक ओबेरॉय ने बिजनेस का रुख कर लिया था. अब विवेक के फिटनेस ट्रेनर ने खुलासा किया है कि आखिर उन्होंने फिल्मों में काम करना कम क्यों कर दिया था?

विवेक ओबेरॉय को एक समय पर विनोद चन्ना ट्रेन करते थे. अब उन्होंने लेटेस्ट इंटरव्यू में बताया है कि एक्टर का खतरनाक एक्सीडेंट हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने फिल्में करनी कम कर दी थीं. विनोद चन्ना ने कहा- उनका एक बहुत बुरा एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उन्हें काफी चोटें आई थीं. इंडस्ट्री से उनके दूर जाने की एक बड़ी वजह यही थी. अक्सर लोगों को लगता है कि उन्होंने डिप्रेशन के कारण काम छोड़ा, लेकिन यह पूरा सच नहीं है. एक्सीडेंट में लगी चोटों की वजह से भी उन्हें इंडस्ट्री से दूर रहने का फैसला लेना पड़ा था.

एक्टिंग से हटकर विवेक के बिजनेस स्किल्स की तारीफ करते हुए विनोद ने कहा- वो बहुत ही टैलेंटेड इंसान हैं. वो बेहतरीन बिजनेस टाइकून हैं. उनके बिजनेस मैनेजमेंट स्किल्स ने मुझे दंग कर दिया था. उन्हें MBA के लोग लेक्चर के लिए बुलाते हैं. उनके पास एक अलग ही लेवल का टैलेंट है.

बता दें कि विवेक ओबेरॉय ने एक पुराने इंटरव्यू में अपने एक्सीडेंट के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि उनका एक्सीडेंट साल 2002 में फिल्म ‘रोड’ की शूटिंग के दौरान हुआ था. एक्टर ने कहा था- मैं ‘रोड’ के लिए राजस्थान में शूटिंग कर रहा था. हम बीकानेर से जैसलमेर जा रहे थे. सड़कें सुंदर थीं, ड्राइव भी बहुत अच्छी थी, लेकिन रात का समय था. मैंने ड्राइवर को कम से कम 15 से 20 बार धीरे चलने के लिए कहा था. ‘रात है, तो विजिबिलिटी कम है, गाड़ी धीरे चलाओ.’ मैं फ्रंट सीट पर बैठा था. मगर उस हादसे के बाद से मैं कभी फ्रंट सीट पर नहीं बैठा.

एक्टर ने आगे बताया था- मैंने अपनी सीट पीछे की तरफ झुका रखी थी और तभी अचानक एक बहुत बड़ा क्रैश हुआ, एक जोरदार आवाज आई. सड़क पर अचानक एक ऊंटगाड़ी आ गई, जिसमें लोहे की रॉड लदी हुई थीं. रॉड ने विंडशील्ड को तोड़ दिया था, और अगर मेरी सीट सीधी होती, तो वो रॉड मेरे शरीर के आर-पार हो जातीं. मैं कार से बाहर नहीं निकल पा रहा था, क्योंकि रॉड मेरे ठीक ऊपर थीं. लेकिन मैं सुरक्षित बच गया. लगभग मरते-मरते बच गया था. उसके बाद, मैंने रात में कभी ट्रैवल ना करने का फैसला किया था.

विवेक ओबेरॉय की बात करें तो उन्होंने फिल्म ‘कंपनी’ से अपना एक्टिंग डेब्यू किया था. वो ‘साथिया’, ‘दम’, ‘मस्ती’, ‘ओमकारा’, ‘मस्ती 4’ समेत कई शानदार फिल्मो में अपनी दमदार एक्टिंग से फैंस को इंप्रेस कर चुके हैं. उनकी कुछ फिल्में पाइपलाइन में भी हैं.

UP : झांसी में प्रेमी युगल ने की आत्महत्या, पेड़ पर मिले दोनों के शव, जांच में जुटी पुलिस

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उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से प्रेम संबंधों के नाम पर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां के चिरगांव थाना क्षेत्र के गांव कुम्हर्रा पट्टी में एक युवक और युवती ने समाजिक दबाव और परिस्थितियों से तंग आकर एक साथ आत्महत्या कर ली. दोनों के शव गांव के बाहर एक पेड़ पर एक ही रस्सी के सहारे लटके हुए मिले, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.

घटना की सूचना सुबह ग्रामीणों को मिली, ग्रामीण जब खेतों की ओर गए लोगों ने पेड़ पर दोनों के शव देखे. देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को नीचे उतरवाकर कब्जे में लिया. स्थानीय लोगों के अनुसार, मृत युवती की मांग में सिंदूर भरा हुआ था, जिससे यह संकेत मिला कि आत्महत्या से पहले दोनों ने खुद को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. यह दृश्य देख ग्रामीण भी भावुक हो गए.

युवक और युवती अलग-अलग समुदाय से थे, जिसके चलते दोनों को सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था. मामले को और भी संवेदनशील बना देने वाली बात यह है कि युवती की शादी की तारीख महज एक दिन पहले ही तय हुई थी. परिजन उसकी शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह प्रेम कहानी इतना दर्दनाक मोड़ ले लेगी. पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान युवक रियाजुल और युवती मुस्कान के रूप में हुई है. दोनों ही अविवाहित बताए जा रहे हैं. घटना के बाद से दोनों परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और परिजन सदमे की हालत में हैं.

पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग और सामाजिक दबाव से जुड़ा माना जा रहा है. हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है. इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज में प्रेम संबंधों को लेकर मौजूद बाधाओं और दबावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ENTERTAINMENT : ‘जहां भगवान है, वहां शैतान भी है..’ ब्लैक मैजिक से हुई शेफाली जरीवाली की मौत, पति पराग त्यागी बताई एक-एक डिटेल

पॉपुलर एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला का निधन ब्लैक मैजिक की वजह से हुई थी.अक्सर सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर कयास लगाए जाते रहते हैं. अब उनके पति ने इस बारे में बात की है.शेफाली जरीवाला ने महज 42 साल की उम्र में 2025 में दुनिया को अलविदा कह दिया था. ये उनकी फैमिली और फैंस के लिए किसी तगड़े झटके से बिल्कुल भी कम नहीं था.लोगों के लिए अभी भी विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि एक्ट्रेस इस दुनिया में नहीं हैं.

वहीं, पराग त्यागी तो अभी भी अपनी पत्नी की मौत के दर्द से नहीं उभरे हैं.उन्होंने अपनी वाइफ याद में यूट्यूब चैनल और पॉडकास्ट शुरू किया है. इतना ही नहीं वो अपनी वाइफ के अधूरे सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं.पराग ने तो अपनी जिंदगी ही शेफाली की यादों को समर्पित कर दी है.इसी बीच उन्होंने शेफाली की मौत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. पराग ने कहा कि शेफाली पर काला जादू किया गया और उन्हें पूरी विश्वास है.पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में पराग त्यागी ने कहा कि उन्हें लगता नहीं बल्कि पता है कि किसी ने शेफाली पर काला जादू किया था

पराग ने कहा,’यार पता है, बहुत सारे लोग इन चीजों को नहीं मानते, लेकिन मैं बहुत मानता हूं. जहां पर भगवान है, वहां शैतान भी है.पता है लोग अपने दुख से दुखी नहीं होते लेकिन दूसरे के सुख से दुखी होते हैं.मुझे लगता नहीं, मुझे पता है किसी ने किया है.’पराग ने आगे कहा,’मैं ये नहीं बोल सकता कि किसने किया, लेकिन किसी ने तो किया है.और मुझे महसूस होता है कि कुछ तो ड़बड़ है. एक बार नहीं दो बार हुआ है ऐसा महसूस और एक बार तो निकल गए लेकिन इस बार थोड़ी हैवी रही चीजें.मुझे नहीं पता, आइडिया नहीं क्या चीज थी क्या नहीं.’

पराग ने ये भी दावा किया कि ये पहली बार नहीं बल्कि दूसरी बार था.जब उन पर और शेफाली पर काला जादू किया गया था.’ पराग के अनुसार,’उन्हें लग रहा था कि शेफाली के संग कुछ तो गलत हुआ है.’ वो बोले,’मैं जब बैठा हूं ना भक्ति में, मुझे महसूस हो जाता है कुछ तो गड़बड़ है. पहली बार में वो इतनी हंसमुख लड़की है, उनको वही मेन लक्षण तो नहीं बता पाऊंगा. मैं ज्यादा डिटेल्स में नहीं जाना चाहूंगा, लेकिन मुझे उनको टच करके समझ आता था कि भाई कुछ तो गड़बड़ है.इस बार कुछ ज्यादा था तो मैं थोड़ा सा, पूजा बढ़ा दी थी. मैं 100 पर्सेंट श्योर हूं कि किसी ने तो किया है.’

पराग ने आगे कहा,’कर्मा आप साथ लेकर जाओगे. कुछ नहीं रहेगा और कुछ नहीं लेकर जाओगे.मेरी बीवी एक ट्रैक पैंट और शर्ट में गई है. मैं माफी मांगते हुए कह रहा हूं कि आज के समय पर मां-बाप नहीं भाते, भाई-बहन तो बिल्कुल नहीं भाते. लोग इमोशन से खेलते हैं.’

NATIONAL : पतंगबाजी का ऐसा जुनून! लाखों रुपये में किराए पर ली गईं छतें…, पूरी रात रोशन रहा हैदराबाद का आसमान

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हैदराबाद की ओल्ड सिटी में रात के समय पतंगबाजी एक नए उत्सव के रूप में उभर रही है. गोशामहल और बेगमबाजार इलाके में हर रात हजारों लोग इस अनोखे नजारे का हिस्सा बन रहे हैं. बड़ी बात ये है कि इसके लिए लाखों रुपये में छतें किराए पर ली जा रही हैं.

तेलंगाना के हैदराबाद की ओल्ड सिटी में इन दिनों एक अनोखा और रंगीन नजारा देखने को मिल रहा है. मकर संक्रांति और अन्य मौकों तक सीमित रहने वाली पतंगबाजी अब रात के समय भी बड़े पैमाने पर की जा रही है. खासतौर पर गोशामहल और बेगमबाजार इलाके में यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जहां हर रात हजारों लोग पतंग उड़ाने के लिए जुट रहे हैं.

सूरज ढलते ही इस पूरे इलाके का दृश्य बदल जाता है. इमारतों और घरों की छतों पर तेज रोशनी की व्यवस्था की गई है, जो सीधे आसमान की ओर की जाती है ताकि पतंगें साफ दिखाई दें. अंधेरे आसमान में चमकती रोशनी के बीच रंग-बिरंगी पतंगें एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं. यह नजारा न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि शहर के अन्य हिस्सों से आने वाले युवाओं और परिवारों को भी आकर्षित कर रहा है.

इस बढ़ते क्रेज का असर रियल एस्टेट पर भी साफ नजर आ रहा है. कई मकान मालिकों ने अपनी छतें रात की पतंगबाजी के लिए किराए पर दे दी हैं, जिनका किराया लाखों रुपये तक पहुंच गया है. छतें अब सिर्फ घर का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि मनोरंजन और उत्सव का प्रमुख केंद्र बन गई हैं.रात की पतंगबाजी में सुरक्षा और सुविधा का भी खास ध्यान रखा जा रहा है. कई स्थानों पर वॉलंटीयर व्यवस्था संभालते नजर आते हैं, वहीं स्थानीय दुकानदारों को भी इससे अच्छा खासा फायदा हो रहा है. पतंग, मांझा, लाइटिंग उपकरण और खाने-पीने की चीजों की बिक्री में तेजी आई है.

गोशामहल के विधायक राजा सिंह ने इस ट्रेंड को वर्षों की मेहनत का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि लगभग 15 वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद बेगमबाजार और गोशामहल क्षेत्र में रात की पतंगबाजी को पहचान मिली है. उनके अनुसार, यहां की नाइट काइट फ्लाइंग अब दिन की पतंगबाजी से कहीं ज्यादा जोशीली और कंपटीटिव हो गई है.कुल मिलाकर, हैदराबाद के ओल्ड सिटी में रात की पतंगबाजी न सिर्फ एक नया शौक बन चुकी है, बल्कि यह सांस्कृतिक उत्सव, सामाजिक मेलजोल और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा दे रही है.

NATIONAL : बुजुर्ग से 58 करोड़ की हुई थी ठगी… महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने पीड़ित को 2 करोड़ रुपये वापस दिलाए

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महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने साइबर ठगी के केस में कार्रवाई की है. मुंबई के रहने वाले 72 साल के बुजुर्ग से 58.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पहली किस्त के रूप में 2 करोड़ रुपये की राशि वापस कराई गई है. पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों की संपत्तियां फ्रीज की हैं, जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार है.

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने देश के अब तक के सबसे बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़ित को 2 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाई है. यह राशि 58.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पहली किस्त के तौर पर कोर्ट के आदेश के बाद रिफंड कराई गई है. पीड़ित 72 साल के बुजुर्ग मुंबई के रहने वाले हैं, जिन्हें साइबर अपराधियों ने महीनों तक डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बनाया था.

एजेंसी के अनुसार, ठगों ने खुद को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर पीड़ित और उनकी पत्नी से संपर्क किया. उन्हें कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेनदेन के मामले में फंसाने की धमकी दी गई. इसके बाद दंपति को करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया, यानी वीडियो कॉल और फोन के जरिए लगातार निगरानी और डर का माहौल बनाया गया.

इस दौरान ठगों ने अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराने के लिए दबाव डाला, जिससे कुल 58.13 करोड़ रुपये की ठगी हो गई. जब दंपति को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने महाराष्ट्र साइबर पुलिस से संपर्क किया.

राज्य पुलिस की साइबर टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की. अधिकारियों ने कई बैंक खातों और आरोपियों की संपत्तियों को फ्रीज कराया. लगातार कानूनी प्रयासों और कोर्ट के आदेश के बाद 2 करोड़ रुपये की राशि पीड़ित को वापस दिलाई गई.पुलिस का कहना है कि यह केवल पहली किस्त है और आगे भी फ्रीज की गई संपत्तियों और खातों के जरिए और रकम रिकवर करने की कोशिश जारी है.

इस मामले में देवेंद्र सैनी को मुख्य ऑपरेशनल हैंडलर बताया गया है, जो अब भी फरार है. महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 3 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है. पुलिस का मानना है कि सैनी की गिरफ्तारी से इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं.

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती. यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर पैसे की मांग करे या डराने की कोशिश करे, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.

NATIONAL : ‘मेरी कोई बहन नहीं है…’ से शुरू हुई कहानी, इंस्टाग्राम पर भाई बनकर महिला से साइबर फ्रॉड, चौंका देगी ये कहानी

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धनबाद में साइबर फ्रॉड का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इंस्टाग्राम के जरिए खुद को भाई बताने वाले ठग ने डराकर और धमकी देकर एक महिला से लाखों की ठगी कर ली. पुलिस की धमकी और फर्जी वीडियो भेजकर पीड़िता को मानसिक दबाव में रखा गया. फिलहाल इस मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई गई है.

डिजिटल अरेस्ट स्कैम का चौंकाने वाला मामला झारखंड के धनबाद से सामने आया है. यहां इंस्टाग्राम के जरिए मैसेज भेजकर खुद को भाई बताने वाले एक युवक ने डर और धमकी से एक परिवार से लाखों रुपये की ठगी कर ली. दरअसल, यह मामला पुटकी थाना इलाके के भागाबांध ओपी के भागाबांध बस्ती का है. महिला की बेटी को ठग ने इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजा था.

दरअसल, तिलकी देवी की बेटी को एक लड़के ने इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजा और कहा कि मेरी कोई बहन नहीं है. तुम ही मेरी बहन हो. मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट भेज रहा हूं. गिफ्ट भेजने के लिए एयरपोर्ट जा रहा हूं. डिलीवरी के लिए आए तो तुम रिसीव कर लेना.बेटी ने कहा कि ठीक है भाई. थोड़ी देर बाद फिर उसी नंबर से बताया गया कि उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है, कुछ पैसों की जरूरत है. इसके बाद बेटी ने अपनी मां को फोन दे दिया. फिर उसी नंबर से कॉल आया और कहा गया कि आपकी वजह से ही मेरा एक्सीडेंट हुआ है. पैसे नहीं देंगी तो पुलिस पहुंचेगी और तुम्हें घसीटते हुए लेकर आएगी.

तिलकी देवी ने कहा कि मोबाइल पर एक वीडियो भी भेजा, जिसमें एक महिला को पुलिस ले जा रही थी. यह सब देखकर डर गई. उसके बाद सऊदी अरब में रहने वाले भाई को फोन किया, उसने मेरे बैंक अकाउंट में पैसे भिजवाए. फोन करने वाले लड़के ने स्कैनर भेजा.स्कैनर के जरिए उसे 2 लाख 7 हजार 201 रुपए भेजे. इतने पैसे मिलने के बाद भी ठग ने 3 लाख रुपये और मांगने शुरू कर दिए.

जब ठग की मांग लगातार बढ़ने लगी तो महिला ने पड़ोसियों और आसपास के लोगों को पूरे मामले की जानकारी दी. तब उन्हें बताया गया कि यह साइबर फ्रॉड का केस है. इसके बाद वह सरायढेला स्थित साइबर थाने पहुंचीं, जहां पुलिस ने उन्हें नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने को कहा. पीड़िता ने हीरापुर के एक साइबर कैफे जाकर नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की और फिर साइबर थाने में लिखित आवेदन भी सौंपा.

साइबर थाना प्रभारी रविकांत प्रसाद ने कहा कि पीड़िता की ओर से लिखित आवेदन मिला है और नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई है. उन्होंने कहा कि पोर्टल पर दर्ज शिकायत 24 घंटे बाद साइबर थाने को प्राप्त होती है. शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर भावनात्मक बातें और डर दिखाकर ठग आसानी से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं. साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं, पैसे की मांग या पुलिस की धमकी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने से संपर्क करें. डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस या एजेंसी बताकर वीडियो कॉल, फर्जी वीडियो और गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं.

BIHAR : मिड-डे मील बना जहर, खिचड़ी खाने के बाद 50 से अधिक बच्चे बीमार

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मधेपुरा के सिंहेश्वर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद 50 से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए. बच्चों ने भोजन में छिपकली गिरने का आरोप लगाया है. सभी बच्चों को इलाज के लिए जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.

बिहार के मधेपुरा में एक सरकारी स्कूल में थाली में परोसी गई खिचड़ी बच्चों के लिए पोषण नहीं, बल्कि संकट बन गई. सिंहेश्वर प्रखंड के गहुमणि मध्य विद्यालय में मिड-डे मील के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां खिचड़ी खाने के बाद 50 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए. बच्चों की हालत बिगड़ते ही स्कूल से लेकर अस्पताल तक अफरा-तफरी मच गई.

घटना शनिवार की है. विद्यालय में बच्चों को मिड-डे मील के तहत खिचड़ी परोसी गई थी. भोजन करने के कुछ ही देर बाद कई बच्चों को उल्टी, चक्कर और पेट दर्द की शिकायत होने लगी. देखते ही देखते बच्चों की तबीयत बिगड़ती चली गई और वो घबराने लगे. बच्चों का आरोप है कि खाने में छिपकली गिरी हुई थी. कुछ बच्चों ने बताया कि जब उन्होंने इसकी शिकायत रसोईया से की, तो कथित तौर पर उनकी थाली छीन ली गई और मामले को दबाने की कोशिश की गई.

बच्चों की हालत बिगड़ने पर वो किसी तरह घर पहुंचे और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद आक्रोशित परिजन बच्चों को लेकर आनन-फानन में जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज, मधेपुरा पहुंचे. अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने से वहां भी हड़कंप मच गया. डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया और लगातार निगरानी में बच्चों को रखा गया. चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है.

घटना की सूचना मिलते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे. उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों से मुलाकात कर उनका हाल जाना. इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इस घटना ने एक बार फिर मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषण देना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं अभिभावकों की चिंता और नाराज़गी को और बढ़ा रही हैं.

NATIONAL : मौनी अमावस्या पर संगम तट पर बवाल… शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान करने से मना किया, शिष्यों से मारपीट

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माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या पर स्नान करने से मना कर दिया है. उन्होंने यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता पर शिष्यों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया. जिसके बाद उन्होंने अपनी पालकी बीच रास्ते से अखाड़े की तरफ लौटा दी.

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या पर स्नान से मना कर दिया है. उन्होंने अपनी पालकी बीच रास्ते से अखाड़े में लौटा दी है. बताया जाता है कि जब वे अपनी पालकी से अखाड़े से निकलकर संगम नोज पर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों से यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता ने धक्कामुक्की शुरू कर दी. जिसके बाद बवाल बढ़ गया और अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से ही मना कर दिया.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आज तक से कहा कि मेरे शिष्यों से मारपीट हो रही है. अधिकारी मारने का इशारा कर रहे हैं, इसलिए स्नान नहीं करूंगा. आपको बता दें कि मौनी अमावस्या पर संगम नगरी प्रयागराज में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ रहा हैं. इस मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात है. पुलिस अफसर कंट्रोल रूम से लेकर संगम नोज तक रात से ही पेट्रोलिंग कर रहे हैं.

संगम तट पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें देखा जा सकता है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी के साथ संगम तट पर जा रहे होते हैं. उनके साथ बड़ी संख्या में उनके शिष्य भी थे. इसी दौरान यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और कई पुलिसकर्मियों से उनके शिष्यों की बहस हो गई. जिसके बाद बवाल बढ़ गया. इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई. जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से मना कर दिया. हालांकि पुलिस का कहना है कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य एक साथ संगम नोज पर जा रहे थे, जबकि उन्हें टुकड़ों में जाने के लिए कहा जा रहा था. क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा था. ऐसे में व्यवस्था बिगड़ने का भी डर था.

मौनी अमावस्या पर संगम नगरी प्रयागराज में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ रही है. रात 12:00 बजे के बाद से श्रद्धालु मौनी अमावस्या के पावन पर स्नान करने के लिए संगम की तरफ बढ़ रहे हैं. भीड़ को संगम नोज पर नियंत्रित करने के लिए भी पुलिस और पीएसी के जवान लगाए गए हैं. सीटी बजाकर पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं को एक ही जगह पर नहीं रुकने दे रहे हैं. लगातार लोगों को संगम नोज पर स्नान करने के बाद आगे बढ़ाया जा रहा है.

पीपा पुल से होकर संगम में मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए जाते श्रद्धालु. (Photo- PTI)
प्रशासन ने मौनी अमावस्या में तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया है. स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी पीएसी और गोताखोर तैनात किए हैं. इसके अलावा मेले में पुलिस, पीएसी, आर ए एफ, बीडीएस, यूपी एटीएस के कमांडो के साथ ही खुफिया एजेंसियां तैनात हैं.

पुलिस कमिश्नर के मुताबिक चप्पे- चप्पे पर नजर रखी जा रही है. सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे से पूरे माघ मेले की निगरानी की जा रही है. संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है.प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं और साधु संतों पर पुष्प वर्षा कराई गई. ये पुष्प वर्षा हेलिकॉप्टर से योगी सरकार ने कराई. पुष्प वर्षा कर योगी सरकार ने सनातन की आस्था का सम्मान किया. पुष्प वर्षा से श्रद्धालु और साधु-संत गदगद नजर आए.

MP : इंस्टाग्राम से हुआ प्यार, जन्मदिन मनाने मुंबई से खरगोन आई लड़की, फिर क्यों दे दी जान

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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में 14 वर्षीय मुंबई निवासी आरुषी लोकरे ने इंस्टाग्राम के जरिए 18 वर्षीय चिराग राठौर से दोस्ती की, जो प्यार में बदल गई. चिराग का जन्मदिन मनाने के लिए आरुषी बिना परिवार को बताए खरगोन आई. परिवार ने समझाया, लेकिन दोनों ने खेत में स्थित कुएं में कूदने का प्रयास किया. ट्रैक्टर चालक और ग्रामीणों ने दोनों को बाहर निकाला, लेकिन आरुषी की मौत हो गई. चिराग का अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस ने मामला दर्ज कर मुंबई थाने को भेजा.मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ प्यार एक नाबालिग लड़की की जान ले गया. 14 वर्षीय आरुषी लोकरे मुंबई की रहने वाली थी. उसने इंस्टाग्राम के जरिए 18 वर्षीय चिराग राठौर से दोस्ती की, जो खरगोन के मंडलेश्वर क्षेत्र के जलूद गांव में रहता है. महज दो माह में दोस्ती प्यार में बदल गई.

दो दिन पहले चिराग का जन्मदिन था और आरुषी ने बिना परिवार को बताए अपने प्रेमी का जन्मदिन मनाने के लिए मुंबई से खरगोन पहुंची. चिराग और आरुषी को उनके परिवार ने समझाने की कोशिश की और लड़की के परिजनों को इसकी जानकारी दी. यह बात दोनों को बुरी लगी और वे गांव के पास खेत में स्थित कुएं में कूद गए.आसपास खेतों में काम कर रही महिलाओं ने किसी के चिल्लाने की आवाज सुनी और कुएं की ओर दौड़ी. वहां ट्रैक्टर चालक गोविंद देवड़ा ने तुरंत कुएं में कूदकर और अन्य लोगों की मदद से दोनों को बाहर निकाला. दुर्भाग्यवश, नाबालिग आरुषी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चिराग को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

पुलिस ने लड़की के परिजनों को सूचना दी और शव का पोस्टमार्टम कराया. चिराग का फिलहाल अस्पताल में उपचार चल रहा है. पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच के लिए मुंबई थाने को भेज दिया है. वहीं, मीरा भाईंदर पुलिस थाना में लड़की के परिजनों ने गुमशुदा और अपहरण का केस पहले ही दर्ज करा रखा है.

यह घटना सोशल मीडिया के माध्यम से शुरू हुए प्यार और किशोरावस्था में फैसलों की गंभीरता को उजागर करती है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के उपायों पर भी ध्यान देगी.

ENTERTAINMENT : पिता के निधन से टूट गई थीं ‘तारक मेहता’ की बबीता जी, याद कर हुईं इमोशनल, बोलीं- झटका लगा…

‘तारक मेहता’ शो की बबीता जी ने अपने दिवंगत पिता को याद किया. उन्होंने बताया कि वो अपने पिता की तबीयत ठीक करना चाहती थीं. लेकिन तभी उनका अचानक निधन हुआ, जिससे वो शॉक में थीं. एक्ट्रेस इस दौरान इमोशनल भी हुईं.

एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता इंडिया के लगभग हर घर में पॉपुलर हैं. सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने उन्हें वो पहचान दिलाई है, जिसकी जिंदगी में हर एक्टर को चाहत होती है. साल 2008 में शुरू हुआ ये शो अभी भी दर्शकों को हंसा रहा है. बबीता जी के किरदार में मुनमुन को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है.हाल ही में मुनमुन दत्ता रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में आईं जहां उन्होंने अपने हिट शो से लेकर अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ी कई बातें की. इस दौरान एक्ट्रेस ने अपने दिवंगत पिता को भी याद किया, जिन्हें वो साल 2018 में खो चुकी थीं. ये वो दौर था जब मुनमुन अपने करियर के पीक पर थीं. उनका शो टीआरपी रेटिंग्स में टॉप पर रहता था.

अपने पिता को याद करते हुए मुनमुन ने बताया कि उनके लिए वो पल काफी मुश्किल था. क्योंकि उनके पिता को एक बीमारी थी, जिसका वो इलाज कराना चाहती थीं. एक्ट्रेस ने कहा, ‘जब 2018 में मैंने अपने पिता को खोया, वो मेरे लिए एक पर्सनल सेटबैक था. उसकी एक वजह है. हर कोई अपनी जिंदगी में किसी ना किसी को खोता है. लेकिन मेरे पिता को गठिया की परेशानी थी. वो बहुत सालों से इससे गुजर रहे थे.’

‘इसलिए वो ठीक से चल भी नहीं पाते थे. तो मैं उनको हमेशा बोलती थी कि मैं आपका ऑपरेशन कराऊंगी. वो भी एक्साइटेड थे कि हां मेरा ऑपरेशन हो जाएगा, तो मैं ठीक हो जाऊंगा. फिर साल 2018 में हमने ऑपरेशन का फैसला किया. मगर ऑपरेशन से ठीक एक महीना पहले वो थोड़े घबरा गए. वो बोलने लगे कि नहीं, अगर मेरा ऑपरेशन होगा तो मैं वहीं मर जाऊंगा. लेकिन हम लोगों ने उन्हें समझाया.’

मुनमुन ने आगे कहा, ‘उनका ऑपरेशन सक्सेसफुल हुआ. 11वें दिन उन्हें घर लौटना था. लेकिन उससे ठीक एक रात पहले ही उनका हॉस्पिटल में ही निधन हो गया. तो वो मेरे लिए बहुत शॉकिंग चीज थी और झटका भी इसलिए लगा क्योंकि मेरे दिमाग में वही चल रहा था कि शायद मैं उनका ऑपरेशन ना कराती. मैं हमेशा खुद को यही बोलती हूं कि मैं अच्छाई के लिए वो चीज करने वाली थी.’

‘मेरे पिता बिल्कुल भी चल नहीं पाते थे. मैंने ये बात काफी समय तक नहीं की थी. लेकिन हाल ही में मैंने अपनी मां से इसके बारे में बात की. मैं ज्यादा बोलना नहीं चाहती वरना रोने लगूंगी. मेरी मां ने मुझसे कहा कि तुम अपने पिता के लिए कुछ अच्छा करना चाहती थी.’

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