Sunday, November 1, 2026
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NATIONAL : छठ पर बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत, दिल्ली सरकार चलाएगी बसे

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छठ पूजा से पहले दिल्ली सरकार दिल्ली और बिहार के बीच बस सेवा शुरू करने की तैयारी में है. पहले चरण में 2-3 रूट्स पर बसें चलाने की योजना है.

छठ पूजा पर अपने घर बिहार जाने की तैयारी कर रहे दिल्ली में रहने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राहत की खबर है. ट्रेनों में टिकट नहीं मिल पाने की वजह से परेशान लोगों के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली और बिहार के बीच बस सेवा शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार की कोशिश है कि दिवाली और छठ पूजा से पहले कुछ चुनिंदा रूट्स पर बसों का परिचालन शुरू हो जाए.

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने प्रस्तावित पारस्परिक परिवहन समझौते को लेकर मिले सुझावों पर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमिटी का गठन किया है. परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद तय रूट्स, किराया और दूसरी शर्तों की जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी.

सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में दिल्ली और बिहार के बीच 2 या 3 रूट्स पर ही बस सेवा शुरू की जा सकती है. इसके बाद जरूरत और यात्रियों की मांग के आधार पर दूसरे रूट्स पर भी बसें चलाने की योजना है.

दोनों राज्यों के बीच तैयार हुआ था समझौते का ड्राफ्ट
विभाग के मुताबिक दिल्ली से बिहार के बीच बस सेवा शुरू करने के लिए अगस्त 2026 में दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक परिवहन समझौते का ड्राफ्ट तैयार किया गया था. दिल्ली सरकार ने बिहार के अलग-अलग शहरों को जोड़ने वाले 18 रूट्स भी चिह्नित किए हैं.

परिवहन विभाग के अनुसार दोनों राज्यों के बीच तय अंतरराज्यीय मार्गों पर स्टेज कैरिज बसों का संचालन आपसी समझौते में तय रूट्स के मुताबिक होगा. हालांकि, अभी अंतिम रूट तय नहीं हुए हैं. सुझावों पर कमिटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा.

सरकार का कहना है कि बढ़ती परिवहन जरूरतों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को बिहार से बेहतर तरीके से जोड़ने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है. फिलहाल दिल्ली और बिहार के बीच सरकारी बसों का संचालन नहीं होता है. हालांकि, दोनों राज्यों के बीच बड़ी संख्या में प्राइवेट बसें चलती हैं.

सरकार अब इस कनेक्टिविटी को और बेहतर करना चाहती है. इसके लिए प्राइवेट बस ऑपरेटर्स के साथ तय नियमों के आधार पर समझौता भी किया जा सकता है. कोशिश है कि दिवाली और छठ पूजा से पहले कम से कम 2-3 रूट्स पर बस सेवा शुरू हो जाए.

प्रदूषण मानकों का भी रखना होगा ध्यान
प्रस्तावित समझौते में बसों के प्रदूषण मानकों को भी शामिल किया गया है. इसके तहत सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों को अनुमति होगी. वहीं, अंतरराज्यीय मार्गों पर चलने वाली डीजल बसों के लिए BS-VI या उससे नए उत्सर्जन मानकों का पालन करना जरूरी होगा.

इन शहरों के लिए प्रस्तावित हैं बस रूट
सरकार ने दिल्ली से पटना के लिए चार रूट प्रस्तावित किए हैं, जिनकी दूरी करीब 1045 से 1182 किलोमीटर के बीच है. इसके अलावा दिल्ली से बिहार शरीफ, अररिया, भागलपुर, बक्सर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गयाजी, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर और नवादा के लिए भी बस सेवा प्रस्तावित है.

11 साल से फरार उम्रकैदी हिमाचल से गिरफ्तार, फरलो पर जेल से हुआ था फरार

इन रूट्स में दिल्ली-बिहार शरीफ की दूरी 1109 किमी, अररिया 1348 किमी, भागलपुर 1280 किमी, बक्सर 915 किमी, दरभंगा 1167 किमी, पूर्वी चंपारण 1043 किमी, गयाजी 1078 किमी, किशनगंज 1416 किमी, मधुबनी 1198 किमी, मुजफ्फरपुर 1110 किमी और नवादा 1206 किमी बताई गई है.

Asian Games 2026: मेडल के साथ हुई भारत के 8वें दिन की शुरुआत, 44 साल का दोहराया इतिहास

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Asian Games 2026 Day-8: भारत ने 2 सिल्वर मेडल के साथ एशियाई खेलों में 8वें दिन की शुरुआत की. एक मेडल मैराथन और दूसरा 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस टीम में आया.

एशियाई खेलों में भारत के लिए 8वें दिन की शुरुआत मेडल के साथ हुई. शनिवार (26 सितंबर) को सावन बरवाल ने पुरूषों की मैराथन फाइनल में अपना बेस्ट समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता. इस इवेंट में 44 साल बाद यह भारत का पहला मेडल है. पिछली बार भारत ने मैराथन में 1982 के एशियाई खेलों में मेडल जीता था. इसके अलावा महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस टीम ने सिल्वर पर निशाना लगाया. टीम में आशी चौकसी, तिलोत्तमा सेन और विदर्सा विनोद शामिल रहे.

28 साल के बरवाल ने दो घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में 42.195 किलोमीटर की मैराथन पूरी की. गोल्ड मेडल जीतने वाले जापान के इचिताका यामाशिता से भारत के सावन सिर्फ 48 सेकंड पीछे रहे. जापानी खिलाड़ी ने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकंड के वक्त में रेस पूरी की. वहीं चीन के पेइयू फेंग 2 घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के समय के साथ तीसरे पायदान पर रहे.

बरवाल एशियाई खेलों में मैराथन में मेडल जीतने वाले चौथे भारतीय भी बन गए. उन्होंने रेस के बाद कहा, “मेरा लक्ष्य मेडल जीतना था, अपना रिकॉर्ड बेहतर करना नहीं. लेकिन यह भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड है. मुझे खुशी है कि इतने लंबे वक्त बाद देश के लिए पदक जीत सका. मेरा लक्ष्य 39.40 किलोमीटर तक पहले ग्रुप में रहना था.”

50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस में ऐसे जीता सिल्वर
तिलोत्तमा सेन, विदर्सा विनोद और आशी चौकसी की तिकड़ी 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस में 1763 अंक के साथ दूसरे पायदान पर रही. वहीं चीन ने 1773 अंक के साथ गोल्ड मेडल जीता. बाकी कजाखस्तान को ब्रॉन्ज मेडल मिला. इसके साथ तिलोत्तमा और विदर्सा व्यक्तिगत फाइनल में जगह बना ली.

व्यक्तिगत वर्ग में आशी और तिलोत्तमा टॉप-3 में रहे जिन्होंने 395.25 एक्स और 395.23 एक्स स्कोर किया. विदर्सा ने 588 के स्कोर के साथ क्वालीफिकेशन में छठा पायदान हासिल किया. दुनिया की 107वीं रैंकिंग पर काबिज तिलोत्तमा नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग में कुल 590 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रही. इसके अलावा आशी ने 585 अंक हासिल किए.

BUSINESS : दुनियाभर के 500 Airbus विमानों में निर्माण खामी, IndiGo भी दायरे में

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अगर आप हवाई सफर करते हैं तो Airbus A321neo से जुड़ी यह खबर आपके काम की है. विमान की जांच के दौरान उसकी Protective Coating में खामी सामने आई है, जिससे दुनियाभर के कई विभाम प्रभावित हो सकते हैं.

Airbus A321neo विमान में फ्यूजलेज की surface protection coating से जुड़ी एक क्वालिटी समस्या सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर में करीब 500 A321neo विमान इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं. इनमें IndiGo के करीब 12 विमान भी शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि Airbus ने साफ किया है कि यह सुरक्षा से जुड़ी समस्या नहीं है और प्रभावित विमान अपनी उड़ान जारी रख सकते हैं.

Airbus के मुताबिक नियमित जांच और काम के दौरान विमान के फ्यूजलेज के निचले हिस्से के आगे वाले हिस्से में कुछ components की surface protection में खामी सामने आई. सरल भाषा में समझें तो विमान के कुछ हिस्सों पर जंग और दूसरे नुकसान से बचाने के लिए लगाई जाने वाली protective coating तय मानकों के मुताबिक नहीं मिली. कंपनी का कहना है कि समस्या की वजह का पता लगा लिया गया है और उसे नियंत्रित कर लिया गया है. इसे ठीक करने की प्रक्रिया भी Airbus के पास मौजूद है.

करीब 500 विमान प्रभावित

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस समस्या का असर करीब 500 A321neo विमानों पर हो सकता है. इनमें कुछ विमान पहले ही एयरलाइंस को डिलीवर किए जा चुके हैं जबकि कुछ अभी निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं.

IndiGo के सूत्रों के मुताबिक एयरलाइन के करीब 12 A321neo विमान इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं. हालांकि इस संख्या की Airbus या IndiGo ने अलग से आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

Airbus ने कहा- उड़ान जारी रख सकते हैं विमान

Airbus ने इस मामले को quality issue, not a safety issue बताया है यानी इस खामी के सामने आने के बाद प्रभावित A321neo विमानों को तुरंत उड़ान से हटाने की जरूरत नहीं बताई गई है. विमान तय प्रक्रिया के तहत उड़ान जारी रख सकते हैं. Airbus के मुताबिक नई प्रक्रिया के तहत की गई coating सभी जरूरी मानकों को पूरा करती है.

विमान का हिस्सा खोलने की जरूरत नहीं

इस समस्या को ठीक करने के लिए विमान के फ्यूजलेज के हिस्से को खोलने या stringers को हटाने की जरूरत नहीं होगी. Airbus के मुताबिक तय प्रक्रिया के तहत उसी जगह पर जरूरी rework किया जा सकता है. काम पूरा होने के बाद विमान को उसकी मूल डिजाइन स्थिति के अनुरूप माना जाएगा.

यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल इस समस्या के कारण यात्रियों की उड़ानों पर तत्काल असर पड़ने की जानकारी नहीं है. Airbus का कहना है कि प्रभावित विमान उड़ान जारी रख सकते हैं और समस्या को ठीक करने का समाधान उपलब्ध है. एयरलाइंस अपने नियमित रखरखाव कार्यक्रम के दौरान इन विमानों पर जरूरी rework कर सकती हैं.

NATIONAL : गयाजी मेले में AI का कमाल, QR बैंड से मिलेंगे बिछड़े लोग, 75 हजार लोगों का मुफ्त इंतजाम

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गयाजी पितृपक्ष मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए QR रिस्ट बैंड और AI निगरानी की व्यवस्था की गई है. 70 स्वास्थ्य शिविर, 150 ई-रिक्शा और मुफ्त आवासन जैसी सुविधाएं भी हैं.

गया में पितृपक्ष मेला 2026 में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर गयाजी में QR कोड युक्त रिस्ट बैंड, AI आधारित निगरानी और ट्रांसलेशन सिस्टम समेत कई व्यवस्थाएं की गई हैं. इसका उद्देश्य खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को परिजनों से बिछड़ने की स्थिति में जल्द मिलाना और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना है.

मेले में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए QR कोड वाले रिस्ट बैंड की व्यवस्था की गई है. इसमें परिजनों का मोबाइल नंबर और जरूरी विवरण दर्ज रहेगा. किसी श्रद्धालु के बिछड़ने पर QR कोड स्कैन कर उसके परिजनों तक जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था होगी. जरूरत पड़ने पर परिजनों के मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भी भेजा जाएगा

AI से भीड़ और गुमशुदा लोगों की निगरानी
पितृपक्ष मेले में कानून-व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने पर अधिकारियों को लोकेशन के साथ अलर्ट मिलने की व्यवस्था है. वहीं, गुमशुदा व्यक्ति की पहचान में AI और कैमरों की मदद ली जाएगी. कैमरे के जरिए चेहरे की पहचान कर संबंधित व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाने की व्यवस्था की गई है. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेल्प डेस्क पर गूगल ट्रांसलेटर सिस्टम भी लगाया गया है. इससे भाषा की बाधा कम होगी और श्रद्धालु अपनी भाषा में हिंदी में दिए गए जवाब सुन सकेंगे.

75 हजार लोगों के लिए रोजाना आवासन
मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 75,348 लोगों के निशुल्क आवासन की व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं के लिए 943 शौचालय, 134 स्नानागार, 74 चेंजिंग रूम, 280 चापाकल और 890 नल लगाए गए हैं. पेयजल की गुणवत्ता की रोजाना PHED लैब में जांच की जा रही है. इसके अलावा 70 स्वास्थ्य शिविरों में 125 डॉक्टर और 178 पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की गई है. IMA की ओर से निशुल्क प्राथमिक इलाज की व्यवस्था भी रहेगी.

150 ई-रिक्शा और 30 रुपये में सात्विक भोजन
श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए 150 निशुल्क ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं. जीविका दीदियों की रसोई के जरिए श्रद्धालुओं को 30 रुपये में सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. वहीं, गया शहर में ‘कायाकल्प’ अभियान के तहत दीवारों पर भगवान विष्णु से जुड़ी कलाकृतियां बनाई जा रही हैं, जिसमें स्थानीय बच्चों की भी भागीदारी है.

बता दें कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार, 25 सितंबर को विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना की और देव घाट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने पितृपक्ष मेले के लिए टेंट सिटी का उद्घाटन भी किया और अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

ENTERTAINMENT : ‘रामायण’ के प्रमोशन के लिए भारत आए मिस्टरबीस्ट, रणबीर कपूर की फिल्म का करेंगे प्रमोशन

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रणबीर कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘रामायण’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. खबरें हैं कि दुनिया के सबसे अमीर यूट्यूबर मीस्टर बीस्ट फिल्म का प्रमोशन करेंगे. वो इन दिनों भारत में हैं.यूट्यूब सेंसेशन मिस्टर बीस्ट इन दिनों भारत में हैं और उन्हें आगरा में ताजमहल घूमते हुए देखा गया. वो अपनी पत्नी और टीम के साथ यहां पहुंचे, जिसके बाद भारतीय फैंस के बीच उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे.

मिस्टर बीस्ट के भारत आने के बीच ऐसी चर्चा भी है कि वो नितेश तिवारी की मच अवेटेड फिल्म ‘रामायण’ के प्रमोशनल कैंपेन का हिस्सा बन सकते हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिस्टर बीस्ट 26 सितंबर को रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म ‘रामायण’ के लिए होने वाले एक खास शोकेस में शामिल हो सकते हैं. इस दौरान फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा के भी उनके साथ बातचीत में शामिल होने की खबर है.

हालांकि, यश इस इवेंट का हिस्सा होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. वहीं, फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे एक्टर रवि दुबे के भी इस खास इवेंट में शामिल होने की खबर है.

शुरुआत में मिस्टर बीस्ट और ‘रामायण’ के साथ आने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी. हालांकि, सोशल मीडिया पर एक इनविटेशन के स्क्रीनशॉट तेजी से शेयर होने लगे, जिसमें मीस्टर बीस्ट की मौजूदगी में खास रामायण इवेंट का जिक्र था.

इस पोस्ट में ये भी दावा किया गया कि इस खास बातचीत को ‘रामायण’ के ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइवस्ट्रीम किया जाएगा.

कब रिलीज होगी ‘रामायण’?
‘रामायण’ को दो पार्ट में बनाया जा रहा है. फिल्म का पहला पार्ट ‘रामायण: पार्ट 1’ 6 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाला है. वहीं, फिल्म के दूसरे पार्ट को 2027 में रिलीज करने की तैयारी है.

‘गॉडजिला’ से होगा ‘रामायण’ का क्लैश
‘रामायण’ दिवाली वीकेंड पर इंटरनेशनल मार्केट में रिलीज होगी, जहां इसका क्लैश जापानी फिल्म ‘गॉडजिला: माइनस जीरो’ से होगा. दोनों फिल्मों को आईमैक्स में भी रिलीज किया जाना है, ऐसे में इंटरनेशनल बॉक्स ऑफिस पर दोनों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा.

NATIONAL : गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर BJP विधायक का विवादित बयान, ‘सनातन अपना लें फिर…’

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जयपुर में हवामहल से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने डांडिया और गरबा में गैर हिन्दुओं के प्रवेश को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहले सनातन धर्म अपना लेना चाहिए.

राजस्थान के जयपुर में हवा महल से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने नवरात्र में डांडिया और गरबा में शामिल होने वाले गैर धर्म के लोगों को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा, “अगर किसी को इतनी दिलचस्पी है तो उसे सनातार्ण धर्म अपना लेना चाहिए.”

बालमुकुंद आचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “नवरात्र पर डांडिया और गरबा के आयोजन देवी मां की आराधना का हिस्सा होते हैं. देवी मां के आगमन और उनके स्वागत के लिए भक्ति भाव में डांडिया और गरबा के आयोजन किए जाते हैं. जिन लोगों को देवी मां का नाम लेने में दिक्कत होती है, ऐसे आयोजनों में कतई नहीं आना चाहिए. सनातनी परंपरा के उत्सव में अगर किसी को इतनी ही दिलचस्पी है तो उसे सनातन धर्म अपना लेना चाहिए.”

गलत मंशा से आने वालों को एंट्री नहीं
बालमुकुंद आचार्य ने आगे कहा, “सनातन धर्म अपना कर उसके उत्सव में शामिल हो तो कोई दिक्कत नहीं है. ऐसे में कोई उनकी मंशा पर सवाल भी नहीं खड़े करेगा. सनातन से नफरत कर उससे दूरी बनाए रखना और उसके धार्मिक उत्सव में गलत मंशा से शामिल होना कतई उचित नहीं हैं. यह सभी को पता है कि दूसरे धर्मों के लोग किस नियत से डांडिया और गरबा के आयोजन में शामिल होना चाहते हैं.ऐसे में उन्हें एंट्री नहीं देना ही बेहतर होगा.”

एंट्री गेट पर देवी मां का जयकारा लगवाया जाए
उन्होंने आगे कहा, “अगर सनातन धर्म अपनाए बिना कोई डांडिया या गरबा में शामिल होना चाहता है, तो एंट्री गेट पर ही उस देवी मां का जयकारा लगवाना चाहिए. उसके हाथ में कलावा बांधना चाहिए. माथे पर तिलक लगाना चाहिए. इसके बाद ही किसी को एंट्री देनी चाहिए .अगर सनातन में आस्था है तो ठीक, नहीं तो धार्मिक उत्सव में शामिल कराना उचित नहीं है.”

गलत मकसद से शामिल होने का आरोप
बालमुकुंद ने दूसरे धर्मों के लोगों के शामिल होने के रोक के फैसले को सही ठहराया और कहा, “ऐसे में साफ है कि दूसरे धर्म के लोग सिर्फ गलत मकसद से ही ऐसे आयोजन में शामिल होना चाहते हैं, दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री पर रोक के फैसले पूरी तरह सही हैं.”

बीजेपी विधायक के इस बयान से नवरात्र पर होने वाले आयोजनों में दूसरे धर्म के लोगों के शामिल होने पर छिड़ा विवाद और बढ़ गया है. वो इससे पहले भी कई बार विवादीय बयान दे चुके हैं.

BUSINESS : सेंसेक्स 1248 और निफ्टी 384 अंक गिरा, अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा ब्याज मिलने से विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे, महंगा कच्चा तेल भी वजह

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भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव काफी बढ़ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.66% गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 383.71 अंक यानी 1.64% टूटकर 23,063.10 पर आ गया। बाजार में गिरावट की शुरुआत कमजोर रही और पूरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा। बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और व्यापक बाजार में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी बड़ी गिरावट रही?
गुरुवार के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के अंत में 73,600 के आसपास और निफ्टी 23,100 के नीचे बंद हुआ। एक दिन में सेंसेक्स का करीब 1,248 अंक टूटना बाजार में बिकवाली की तीव्रता को दिखाता है। निफ्टी में भी 384 अंकों से अधिक की गिरावट रही।बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बाजार पर क्या असर पड़ा?
बाजार में दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में बॉन्ड यील्ड का 19 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचना शामिल रहा। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे निवेशकों के लिए फिक्स्ड-इनकम एसेट्स का आकर्षण बढ़ सकता है। गुरुवार को यील्ड में उछाल के साथ इक्विटी बाजार में भी जोखिम कम करने की प्रवृत्ति दिखाई दी।

क्या सिर्फ बड़े शेयरों में ही बिकवाली हुई?
नहीं। गुरुवार को व्यापक बाजार में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों करीब 1% नीचे रहे। इससे संकेत मिलता है कि दबाव केवल सेंसेक्स और निफ्टी की बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की।

कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे?
गुरुवार को सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। खास तौर पर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव अधिक रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 2% तक टूटे। वित्तीय शेयरों में गिरावट का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा।

एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस में कितनी गिरावट आई?
बाजार की प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। दोनों शेयरों में करीब 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय क्षेत्र में व्यापक बिकवाली के बीच इन शेयरों में गिरावट ने बाजार के कमजोर सेंटीमेंट को और स्पष्ट किया।

गुरुवार की गिरावट से क्या संकेत मिलते हैं?
गुरुवार का कारोबार दिखाता है कि बाजार फिलहाल कई दबावों के बीच है। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी के साथ मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल इंडेक्स में एक साथ गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 73,580.54 और निफ्टी 23,063.10 पर बंद हुए। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर बाजार की दिशा, बॉन्ड यील्ड और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के रुख पर रहेगी।

पांच में गिरावट के पांच बड़े कारण क्या?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल
वैश्विक बॉन्ड मार्केट में मची बिकवाली के कारण 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 15 बेसिस अंक बढ़कर 19 साल के उच्चतम स्तर 5.11% पर पहुंच गई है। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 102 से106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ने, वित्तीय घाटा होने और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंताएं गंभीर हो गई हैं।

बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में भारी बिकवाली
घरेलू स्तर पर, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा इंश्योरेंस एजेंटों के कमीशन कैप और डिस्ट्रीब्यूशन पेआउट्स में कटौती के प्रस्ताव ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी। इस नियामक बदलाव के कारण वित्तीय और बीमा सेक्टर के हैवीवेट शेयरों, जैसे एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसने सूचकांकों को नीचे धकेल दिया।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां मिल रहे सुरक्षित रिटर्न के आकर्षण के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार बड़ी बिकवाली की जा रही है। घरेलू संस्थागत निवेशकों के सपोर्ट के बावजूद, विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) का दबाव बढ़ गया है।

महंगा वैल्यूएशन और डेरिवेटिव एक्सपायरी का दबाव
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय सूचकांक अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में काफी महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे थे। किसी नए सकारात्मक ट्रिगर के न होने और आज ही मंथली फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) एक्सपायरी होने के कारण ट्रेडर्स ने आक्रामक रूप से प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

BUSINESS : सोने-चांदी के दाम में लगातार चौथे दिन गिरावट, चांदी ₹7 हजार सस्ती होकर ₹2.28 लाख किलो पर आई, सोना ₹1231 गिरा

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सोमवार से गुरुवार तक सोने-चांदी के भाव लगातार 4 दिन तक गिरे। क्या गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर से गोल्ड-सिल्वर के भाव चढ़ेंगे। क्योंकि, आगे करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं। इन त्योहारों में सोने-चांदी की डिमांड बढ़ जाती है। अगर पिछले चार दिनों की बात करें तो इस अवधि में चांदी करीब 7000 रुपये और सोना करीब 2,500 रुपये सस्ता हो चुका है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक गुरुवार को भी 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,231 रुपये सस्ता होकर 1.51 लाख रुपये पर आ गया। वहीं, एक किलो चांदी 4,518 रुपये टूटकर 2.28 लाख रुपये पर पहुंच गई।

क्या सोने-चांदी में यह गिरावट आगे भी रहेगी जारी

ऑस्ट्रेलिया के हेज फंड मैनेजर राफेल लैम का मानना है कि सोने में हाल की गिरावट टेंपरेरी है। उनका लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड पिछले साल लॉन्च होने के बाद से निवेशकों को 200% से ज्यादा नेट रिटर्न दे चुका है। लैम का तर्क है कि सोने की लॉन्ग-टर्म तेजी को सहारा देने वाली मुख्य ताकतें अभी भी बरकरार हैं।

क्यों बढ़ेंगे सोने के दाम

ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक लैम ने कहा कि “बड़े बाजारों की राजकोषीय हालत टिकाऊ नहीं है”, खासकर अमेरिकी सरकार का 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज और केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी सोने को मीडियम से लॉन्ग टर्म में सपोर्ट देगी। उन्होंने कहा कि नजदीकी समय में कीमतें अमेरिका-ईरान युद्ध, रियल ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों से तय होंगी। लैम, मार्क लांडाऊ के साथ 1.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (1.1 अरब अमेरिकी डॉलर) के एल1 गोल्ड फंड को को-मैनेज करते हैं।

ईरान युद्ध और ब्याज दरों का दबाव

जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से सोने पर दबाव है। एनर्जी की कीमतें चढ़ने और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने के दांवों से सोने जैसी ब्याज न देने वाली धातु पर असर पड़ा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 16% गिर चुका है।

लैम ने एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान युद्ध के बाद से सोने के बाजार और कीमतों के लिए कुछ विपरीत हवाएं जरूर आई हैं, लेकिन हमारे हिसाब से ये बहुत टेंपरेरी हैं। सोने की मांग को चलाने वाले ज्यादातर मुख्य कारक मीडियम टर्म में बने रहेंगे, बल्कि और मजबूत होंगे।”

सोना 4,286 डॉलर प्रति औंस पर

सिडनी में गुरुवार शाम सोना 4,286.01 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। लैम ने कहा, “जब सोने की कीमत 4,000 डॉलर के नीचे गई, तो हमने अपनी लॉन्ग पोजिशन काफी आक्रामक तरीके से बढ़ानी शुरू की। अब हम इसे वहीं रखे हुए हैं, यानी लो-टू-मिड 60% नेट लॉन्ग।” उन्होंने कहा कि अगर सोने की कीमत में और तेजी की उम्मीद सच होती है, तभी फंड लॉन्ग पोजिशन घटाने पर विचार करेगा।

NATIONAL : नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार को मिली जमानत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूछा- 19 साल पुराने मामले में कार्रवाई क्यों

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नंदीग्राम के कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने जमानत के लिए फिर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। बुधवार को उनके दो अधिवक्ताओं मिलन मुखोपाध्याय और अयन भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत में मामले का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि मिलन उपचुनाव के प्रत्याशी हैं और जमानत याचिका पर सुनवाई में समय लगेगा, इसलिए जल्द सुनवाई की जाए। अदालत ने जमानत याचिका दायर करने की अनुमति दे दी। इस सप्ताह मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार
मिलन को पिछले शुक्रवार पूर्व मेदिनीपुर के चंडीपुर से 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास, लोगों को जुटाने और लूटपाट समेत नंदीग्राम थाने में तीन और खेजुरी थाने में एक मामला दर्ज था।
इससे पहले मिलन ने पांच अन्य मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने उपचुनाव से पहले गिरफ्तारी पर सवाल उठाया।

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजुमदार ने कहा कि गिरफ्तारी वारंट 2007 से लंबित थे और आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद मिलन समेत अन्य लोगों के खिलाफ लंबित वारंट भी लागू किए गए हैं।

दो मामलों में हो चुकी है गिरफ्तारी
राज्य ने यह भी कहा कि बाकी पांच मामलों में मिलन मुख्य आरोपित नहीं हैं और उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हाई कोर्ट ने इस पर तत्काल कोई निर्देश नहीं दिया। इधर, हल्दिया अनुमंडल अदालत ने मिलन को तीन अक्टूबर तक जेल हिरासत में भेजा था।

इसके बाद कांथी अदालत ने उन्हें पांच अक्टूबर तक जेल हिरासत में भेज दिया। बुधवार को खेजुरी थाने में दर्ज एक मामले में उन्हें फिर कांथी अदालत में पेश किया गया। अभी तक दो मामलों में उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है।

NATIONAL : वांगचुक बोले-सरकार के खिलाफ बोला, मेरा एनकाउंटर हो सकता है, लेह हिंसा को लेकर कहा- गृहमंत्री इस्तीफा दें, हिंसा की जिम्मेदारी लें

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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आशंका जताई कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें ‘मुठभेड़’ में मारा जा सकता है। उन्होंने लेह में पिछले साल हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर 24 सितंबर, 2025 को हुए प्रदर्शन के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा की उस घटना को एक साल पूरा होने के मौके पर एक सभा को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान के खतरे को लेकर चेतावनियां मिली हैं और यदि इससे देश को जागरूक करने में मदद मिलती है तो वह कोई भी नतीजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

आशंका है कि कहीं मुझे मुठभेड़ में मार दिया जाये
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने मुझे जेल में डाला। अब इस बात की भी आशंका है कि कहीं मुझे मुठभेड़ में मार दिया जाये। लोग मुझसे कहते हैं कि आपको मुठभेड़ में मार दिया जायेगा। अगर ऐसा होता है तो होने दें ताकि देश तो जाग जाये। उन्होंने न्यायिक जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की और चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट जारी नहीं की गई तो पुलिस गोलीबारी की जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘‘जन न्यायाधिकरण’’ का गठन किया जायेगा। पिछले साल के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के लिए गृह मंत्री को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए वांगचुक ने कहा कि इस घटना के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।अमित शाह से मांगा इस्तीफा
वांगचुक ने कहा कि आज लद्दाख से मैं कहता हूं अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए। लद्दाख में जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने स्थानीय युवाओं के खिलाफ एके-47 समेत स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर शाह के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए वांगचुक ने इस मांग का समर्थन किया, लेकिन लद्दाख की स्थिति पर गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया।

राहुल गांधी की चुप्पी पर उठाए सवाल
वांगचुक ने कहा कि राहुल गांधी ने आवाज उठाई और पूछा कि छात्रों के खिलाफ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, उन्होंने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। मैं इसका समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा कि लेकिन यदि उन्होंने पहले अमित शाह के इस्तीफे की मांग की थी, तो फिर लद्दाख में जो कुछ हुआ उसका क्या, जहां एके-47 का इस्तेमाल किया गया और लोगों की मौत हुई, गोलियां उनके सिर और सीने में लगीं। पिछले साल के प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की मौत स्वचालित हथियारों से की गई गोलीबारी में हुई।लद्दाख के लिए न्याय की जिम्मेदारी पूरे देश की
उन्होंने कहा कि लद्दाख के लिए न्याय केवल केंद्र शासित प्रदेश के लोगों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है। लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में 24 सितंबर की हिंसा की पहली बरसी पर बृहस्पतिवार को बंद रखा गया। लेह और कारगिल में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम रही, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। वांगचुक ने आरोप लगाया कि भारी सुरक्षा तैनाती और पाबंदियों के कारण बृहस्पतिवार के कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही। उन्होंने कहा कि सीमित भागीदारी को आंदोलन की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के विपरीत बना डर का माहौल
लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को ‘झूठा, निराधार और भ्रामक’ बताते हुए कहा कि 2025 की हिंसा के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित प्रार्थना सभा में शामिल होने से किसी को नहीं रोका गया था। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख ने भारत के साथ रहने का विकल्प इसलिए चुना क्योंकि उसे लोकतंत्र और सम्मान के साथ जीने के अधिकार में भरोसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख में स्थिति ने भय का माहौल पैदा कर दिया है और कहा कि यह उन लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के विपरीत है, जिनके साथ लोगों ने भारत को चुना था। वांगचुक ने कहा कि 2014 से 2019 तक देश में चीजें अच्छी चल रही थीं, जब वे (भाजपा) सत्ता में आए थे।
अमित साह की आलोचन की
उन्होंने शाह की आलोचना करते हुए कहा कि जब से वह गृह मंत्री बने हैं, तब से हर जगह दंगों की घटनाएं हुई और अशांति का माहौल है। लद्दाख में वादे किए गए और फिर तोड़ दिए गए। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के एक तरफ चीन था और दूसरी तरफ भारत। लद्दाख ने भारत को इसलिए चुना क्योंकि हमें विश्वास था कि भारत में लोकतंत्र है और हम सिर ऊंचा करके जी सकेंगे। उन्होंने कहा कि आज लद्दाख में ऐसा दमन किया जा रहा है कि मेरे विचार में चीन भी तिब्बत के साथ ऐसा नहीं कर रहा है।

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