Monday, June 22, 2026
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BUSINESS : प्याज किसानों को बड़ी राहत: केंद्र सरकार 1235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी सीधी खरीद

गिरते दामों से परेशान प्याज किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदने की घोषणा की है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि निर्यात प्रभावित होने से घरेलू दाम गिरे हैं। हालांकि, किसान इस भाव से नाखुश हैं। लासलगांव स्थित किसान संघ ने 3,000 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और पुराने नुकसान के मुआवजे की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

लगातार गिरते दामों और निर्यात में आ रही रुकावटों की मार झेल रहे प्याज किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने किसानों का नुकसान कम करने के लिए सीधे तौर पर उनसे प्याज खरीदने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने तय किया है कि वह 1235 रुपये प्रति क्विंटल (यानी 12.35 रुपये प्रति किलो) के भाव से किसानों का प्याज खरीदेगी। यह अहम घोषणा महाराष्ट्र के सतारा में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान की गई है, जिससे किसानों को तुरंत आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद जगी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में इस खरीद योजना का आधिकारिक एलान किया। कृषि मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे भारी संकट और ईरान पर अमेरिका-इस्राइल के हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्याज का निर्यात बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। बाहर माल न जा पाने के कारण देश के भीतर (घरेलू बाजार) प्याज के दाम तेजी से गिर गए हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी नुकसान की भरपाई और किसानों को समर्थन देने के लिए सरकार ने खुद 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से ताजा प्याज खरीदने का यह कड़ा फैसला लिया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार द्वारा प्याज की यह खरीद आज से ही शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसानों के पास जितना भी प्याज का स्टॉक (भंडार) मौजूद है, वह पूरा का पूरा खरीदा जाएगा। इस काम को तेजी से और सही ढंग से पूरा करने के लिए सरकार ने ‘राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ’ (नाफेड – NAFED) को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस बात की पूरी पुष्टि की है कि राज्य के किसानों को इस योजना का सीधा लाभ पहुंचाया जाएगा।

भले ही केंद्र सरकार ने प्याज खरीदने की घोषणा कर दी है, लेकिन महाराष्ट्र के प्याज किसान इस फैसले से बहुत ज्यादा खुश या उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी, जो महाराष्ट्र के लासलगांव में स्थित है, वहां के ‘महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ’ ने सरकार के इस भाव पर गहरी निराशा जताई है। किसान संगठन का स्पष्ट कहना है कि 1,235 रुपये प्रति क्विंटल का जो भाव सरकार दे रही है, उससे किसानों की फसल उगाने की लागत (खर्चा) भी पूरी तरह नहीं निकल पा रही है। इसलिए किसान इसे कोई बड़ी राहत नहीं मान रहे हैं।

अपनी नाराजगी जताते हुए, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने केंद्र सरकार के सामने अपनी कुछ नई और बड़ी मांगें रख दी हैं। संघ ने मांग की है कि सरकार प्याज का समर्थन मूल्य 1,235 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तय करे, तभी किसानों का सही मायने में फायदा होगा। इसके अलावा, संगठन ने यह भी कहा है कि जिन किसानों ने पिछले कुछ महीनों में मजबूरी में बहुत कम दाम पर अपना प्याज बेचा है, उन्हें सरकार की तरफ से उचित मुआवजा (आर्थिक मदद) मिलना चाहिए। संघ ने कड़ी चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी ये मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन करेंगे।

BUSINESS : सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगाया तीन रुपये का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, डीजल पर दी राहत

केंद्र सरकार ने 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात शुल्क को 23 रुपये से घटाकर 16.5 रुपये और एटीएफ को 33 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बदलेंगे।

केंद्र सरकार ने ईंधन के निर्यात को लेकर एक बहुत ही अहम और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने देश से बाहर भेजे जाने वाले यानी निर्यात होने वाले पेट्रोल पर अप्रत्याशित लाभ कर यानी विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। वहीं दूसरी तरफ, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात शुल्क में भारी कटौती करके कंपनियों को राहत दी है। यह कड़ा फैसला 16 मई से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब पेट्रोल के निर्यात पर तीन रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स देना होगा। हालांकि, सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 23 रुपये से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ (विमान ईंधन) पर 33 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर अब शून्य रहेगा। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि देश के अंदर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले कर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि आम जनता के लिए देश में ईंधन के दाम नहीं बढ़ेंगे।

पश्चिम एशिया में चल रहे गहरे संकट की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब पेट्रोल पर तीन रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है। इस कदम का मुख्य मकसद अमेरिका-इस्राइल और ईरान युद्ध के बीच घरेलू बाजार में तेल की कमी को रोकना है। दरअसल, युद्ध शुरू होने के बाद से ही दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में तेल निर्यातक कंपनियां इस कीमत के अंतर का गलत फायदा उठाकर सारा तेल विदेशों में न बेच दें, इसलिए निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए यह विंडफॉल टैक्स लगाया गया है।

डीजल और एटीएफ पर लगने वाले निर्यात शुल्क में पिछले कुछ महीनों में कई बार समीक्षा और बदलाव किए गए हैं। 30 अप्रैल की समीक्षा में डीजल पर शुल्क 23 रुपये और एटीएफ पर 33 रुपये प्रति लीटर तय किया गया था, जिसे अब घटाया गया है। इससे पहले 26 मार्च को सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये और एटीएफ पर 29.5 रुपये का निर्यात शुल्क लगाया था। इसके बाद 11 अप्रैल को हुई समीक्षा में इस शुल्क को बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।

NATIONAL : भोजशाला सरस्वती मंदिर केस: हाईकोर्ट के फैसले का काशी में स्वागत, संत बोले- सत्य की विजय हुई; सनातन को मजबूती

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धार स्थित भोजशाला प्रकरण में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा और अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने इसे सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक सत्य की विजय बताया। उन्होंने कहा कि फैसले से सांस्कृतिक विरासत और देवी सरस्वती से जुड़ी आस्था को सम्मान मिला है।

धार स्थित भोजशाला सरस्वती मंदिर प्रकरण में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने इसे सनातन संस्कृति, ऐतिहासिक प्रमाणों और सत्य की विजय बताया। उन्होंने कहा कि न्यायालय का यह निर्णय भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और देवी सरस्वती की आराधना से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की पुनर्पुष्टि करता है।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला केवल एक स्थापत्य संरचना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा और अध्यात्म का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। न्यायालय के फैसले ने उन पुरातात्त्विक और ऐतिहासिक प्रमाणों को स्वीकार किया है, जो लंबे समय से भोजशाला के प्राचीन हिंदू मंदिर स्वरूप की पुष्टि करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता का मूल स्वर ज्ञान, साधना और संस्कृति में निहित है। भोजशाला जैसी धरोहरें देश की गौरवशाली परंपरा की जीवंत प्रतीक हैं। यह निर्णय नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत के प्रति जागरूक और गौरवान्वित करेगा।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका द्वारा ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर लिया गया यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है। सत्य चाहे जितने समय तक आवृत रहे, अंत में उसकी विजय निश्चित होती है। इससे सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि भोजशाला परिसर का संरक्षण और विकास उसकी सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप किया जाएगा।
भोजशाला को ऐतिहासिक एवं संरक्षित वाग्देवी मंदिर मानने संबंधी दिए गए महत्वपूर्ण फैसले का स्वागत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा धार स्थित भोजशाला को ऐतिहासिक एवं संरक्षित वाग्देवी मंदिर मानने संबंधी दिए गए फैसले का अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने स्वागत किया है। उन्होंने इस निर्णय को भारत की सांस्कृतिक चेतना, सनातन परंपरा और ऐतिहासिक सत्य की विजय बताया।

स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि न्यायालय ने पुरातात्विक तथ्यों, ऐतिहासिक प्रमाणों और एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाकर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भोजशाला एक ऐतिहासिक एवं संरक्षित स्थल है, जो देवी सरस्वती का मंदिर है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने एएसआई एक्ट के प्रावधानों और अयोध्या विवाद मामले में स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने उम्मीद जताई कि इससे देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

NATIONAL : ‘एक ग्राम ड्रग्स भी देश में प्रवेश नहीं करने देंगे’: अमित शाह बोले- 2047 तक नशा मुक्त भारत का लक्ष्य

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गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2047 तक नशामुक्त भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मादक पदार्थों के गिरोहों को खत्म करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और इस लक्ष्य की दिशा में काम कर रही हैं

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वर्ष 2047 तक ‘नशा मुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मादक पदार्थों के गिरोहों को खत्म करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और इस लक्ष्य की दिशा में काम कर रही हैं।

अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग की ओर से आयोजित आरएन काओ स्मृति व्याख्यान-2026 को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस वर्ष व्याख्यान का विषय था, ‘नशीले पदार्थ: एक सीमा रहित खतरा, एक सामूहिक जिम्मेदारी’।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नशीले पदार्थों का एक ग्राम भी न देश के अंदर आने पाए और न ही देश से बाहर जाए। उन्होंने कहा कि ड्रग तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर समाज और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। शाह ने कहा कि ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद और अपराधी नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाता है। इसके साथ ही नशे से मानव शरीर को होने वाले स्थायी नुकसान को भी गंभीर खतरा बताया।

अमित शाह ने कहा कि दुनिया के जिम्मेदार देशों को ड्रग्स के खिलाफ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभी संयुक्त प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने ड्रग तस्करी के खिलाफ एक समान वैश्विक कानूनी ढांचा बनाने, खुफिया जानकारी साझा करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

गृह मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत ने मित्र देशों की मदद से 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को वापस लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को भू-राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठाना होगा और नार्को नेटवर्क तथा नार्को-टेरर राज्यों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करनी होगी। कार्यक्रम में 40 से अधिक देशों के राजदूत, कूटनीतिज्ञ, रॉ के पूर्व अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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WORLD : नीदरलैंड में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, प्रवासी भारतीयों ने भोजपुरी गीतों के साथ लगाए ‘हर-हर महादेव’ के नारे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड पहुंचने पर प्रवासी भारतीयों ने जोरदार स्वागत किया। भोजपुरी गीतों और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान द हेग में भारतीय प्रवासी समुदाय और स्थानीय कलाकारों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भोजपुरी गीत गाकर और नारे लगाकर अपना उत्साह व्यक्त किया।

भारतीय प्रवासियों ने बातचीत करते हुए भोजपुरी गीत “ए राजा जी, एकरे त रहल हा जरूर, मुहूर्त खुबसूरत हो” गाया। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल पर “हर हर मोदी, घर-घर मोदी” और “देश का नेता कैसा हो, मोदी जी जैसा हो” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में शामिल नीदरलैंड के कलाकारों ने भी भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। एक कलाकार ने राम भजन प्रस्तुत करने के बाद बताया कि, “हमने एक सुंदर राम भजन प्रस्तुत किया। पीएम मोदी के सामने प्रस्तुति देना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात थी। उनकी आंखों में चमक देखना बेहद सुखद था और उनके लिए प्रस्तुति देना सचमुच एक आशीर्वाद जैसा था।”

एक अन्य कलाकार ने कहा, “यह एक अनोखा अनुभव था। दुनिया के अग्रणी नेताओं में से एक पीएम मोदी के सामने प्रस्तुति देना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।” शास्त्रीय कला प्रस्तुत करने वाले कलाकारों ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नीदरलैंड में प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रदर्शन करना उनके लिए ‘धन्य क्षण’ जैसा था। कलाकारों ने भारतीय दूतावास का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने का मौका मिला।

भारतीय मूल के लोगों ने भी पीएम मोदी से मुलाकात को यादगार बताया। एक सदस्य ने कहा, “यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा दिन था। पीएम मोदी से व्यक्तिगत रूप से मिलना सचमुच एक आशीर्वाद जैसा है।”एक अन्य सदस्य ने कहा, “हम काफी देर से इंतजार कर रहे थे। वे सिर्फ हमारे प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि हमारे लिए सब कुछ हैं। उनसे मिलकर बेहद खुशी हुई।” एक प्रवासी भारतीय ने पीएम मोदी को ‘वर्ल्ड लीडर’ बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत को मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों ने पीएम मोदी से हाथ मिलाने और उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने को अपने जीवन का यादगार क्षण बताया।

NATIONAL : एक ही रूट, दो एयरलाइंस, तो किराया 8000 से 18000 तक कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

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सुप्रीम कोर्ट ने भारत में हवाई किराये की आसमानता को लेकर हैरानी जताई है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइनों की ओर से इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 से 18,000 रुपये तक किराया लेना गंभीर असमानता दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग विमान कंपनियों के किराये में अंतर पर हैरानी जताई(फोटो- IANS)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किरायों में भारी अंतर और अनियमित बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से यात्रियों को राहत देने के उपाय करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइनों की ओर से इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 से 18,000 रुपये तक किराया लेना गंभीर असमानता दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका पर हुई, जिसमें निजी एयरलाइनों के ‘अनिश्चित’ किरायों और अतिरिक्त शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए मजबूत रेग्युलेटर की मांग की गई है। केंद्र ने बताया कि 2024 का नया कानून लागू हो चुका है और परामर्श जारी है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

किरायों में इस तरह की विसंगति से आम यात्रियों पर बोझ बढ़ता है, इसलिए केंद्र सरकार को राहत देने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट दो एयरलाइंस के अलग-अलग किराये से SC चिंतित, केंद्र से कहा- इसका कुछ करें
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा- यात्रियों को मिले राहत
कोर्ट बोला- इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 से 18,000 तक किराया लेना गंभीर असमानता
पुराने विमान नियमों के पालन को लेकर बहस
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने अदालत में कहा कि 1937 के विमान अधिनियम के तहत बने पुराने नियम अब भी लागू हैं, लेकिन उनका सही पालन नहीं हो रहा। डीजीसीए के पास अत्यधिक या शोषणकारी किरायों पर निर्देश जारी करने की शक्ति है, लेकिन प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

NATIONAL : कुलकर्णी की काली करतूत: 23 लाख अभ्यर्थियों की मेहनत पर फेरा पानी, CBI ने बताया कैसे लीक हुआ NEET का पेपर?

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सीबीआई ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक के मास्टरमाइंड को पकड़ लिया है। जांच के मुताबिक पुणे के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी ने गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर छात्रों को प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए। मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं। पेपर लीक का पूरा घटनाक्रम नीचे प्वाइंट्स में बताया गया है।नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि उसने प्रश्न पत्र लीक होने की पूरी कड़ी का पता लगा लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले का मुख्य स्रोत पुणे का प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी था, जिसे शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।

सीबीआई के मुताबिक, पी. वी. कुलकर्णी लातूर का रहने वाला है और केमिस्ट्री का डोमेन एक्सपर्ट है। वह कई वर्षों से नीट प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़े पैनलों में शामिल रहा है। एजेंसी का आरोप है कि कुलकर्णी ने अपने विशेष अधिकार और गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करते हुए प्रश्न पत्र लीक किया।में सामने आया है कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने अपने घर पर विशेष कोचिंग क्लास आयोजित की थी। इन क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और उनके उत्तर डिक्टेट किए गए थे। सीबीआई का कहना है कि यही प्रश्न 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पूछे गए।

सीबीआई के अनुसार, इस काम में मनीषा वाघमारे नाम की आरोपी ने छात्रों को जुटाने में मदद की। मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने बताया कि छात्रों से इन विशेष क्लासों में शामिल होने के लिए कई लाख रुपये वसूले गए थे। छात्रों ने कॉपियों में प्रश्न लिखे थे और बाद में वे वास्तविक प्रश्न पत्र से पूरी तरह मेल खाते पाए गए।

जांच में यह भी पता चला है कि पेपर लीक के बाद इसे कई लोगों के जरिए आगे फैलाया गया। सीबीआई के मुताबिक, धनंजय लोखंडे को मनीषा वाघमारे से पेपर मिला था। इसके बाद उसने यह प्रश्न पत्र नासिक के शुभम खैरनार को दिया। शुभम खैरनार ने आगे इसे यश यादव तक पहुंचाया, जिसने कई अन्य लोगों में इसे फैलाया।

इस मामले में सीबीआई ने जयपुर से मांगिलाल बीवाल, विकास बीवाल और दिनेश बीवाल को भी गिरफ्तार किया है। वहीं, गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को पकड़ा गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, अप्रैल महीने में शुभम खैरनार ने यश यादव को बताया था कि मांगिलाल बीवाल अपने छोटे बेटे के लिए लीक प्रश्न पत्र खरीदने को तैयार है। इसके बदले 10 से 12 लाख रुपये देने की बात हुई थी।

सीबीआई का दावा है कि खैरनार ने यश यादव के साथ 500 से 600 प्रश्न साझा किए थे ताकि मेडिकल कॉलेज में सीट पाने लायक अंक सुनिश्चित किए जा सकें। अधिकारियों के अनुसार, मांगिलाल बीवाल ने यह पेपर अपने बेटे को देने के साथ-साथ रिश्तेदारों में भी बांटा था।

जांच में यह भी सामने आया कि यश यादव ने विकास बीवाल से कहा था कि वह अन्य नीट अभ्यर्थियों को भी प्रश्न बेचकर रकम की भरपाई करे।

परीक्षा से पहले एक गेस पेपर वायरल हुआ, यह व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए साझा किया गया था और बाद में इसकी फोटोकॉपी भी कई जगहों पर बांटी गई।
परीक्षा वाले दिन ही कुछ छात्रों ने सीकर में इस बात की शिकायत दी।

सीबीआई ने पिछले 24 घंटों में देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी की है। एजेंसी ने कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। डिजिटल डिवाइस की जांच में कथित चैट, लीक प्रश्न पत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि डिलीट किया गया डेटा भी निकाला जा सके।

गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। यह परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर कराई गई थी। करीब 23 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, 7 मई की शाम को कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। इसके बाद अगले ही दिन मामले को स्वतंत्र जांच और कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया।

NATIONAL : विदेश यात्रा पर टैक्स की खबरों को पीएम मोदी ने बताया फर्जी, बोले- कोई प्रतिबंध या फैसला नहीं लिया गया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी यात्रा पर टैक्स या सेस लगाने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। सरकार ने कहा है कि इस तरह का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी यात्रा पर टैक्स, सेस या सरचार्ज लगाने की खबरों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी किसी भी योजना को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह पूरी तरह से झूठ है। इस तरह की खबरों में एक भी सच्चाई नहीं है और सरकार का फोकस आम लोगों के जीवन को आसान बनाने पर है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा पर किसी भी प्रकार की रोक या प्रतिबंध लगाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। उनका कहना था कि ऐसी अफवाहें देश की नीतिगत दिशा को गलत तरीके से पेश करती हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि सरकार विदेशी यात्रा पर नया टैक्स या सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही है। दावा किया गया कि यह प्रस्ताव उच्च स्तर पर चर्चा में है और इसका उद्देश्य युद्ध संबंधी वित्तीय दबाव को संतुलित करना हो सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि यह संभावित शुल्क अस्थायी हो सकता है और इसका उपयोग इम्पोर्ट खर्च और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव को कम करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया संकट और देश के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए नागरिकों से कुछ महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में छोटे-छोटे कदम भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि फिलहाल एक साल तक सोने की खरीद और दान से बचें, क्योंकि इसके आयात में देश का काफी विदेशी मुद्रा खर्च होता है। उनका कहना था कि इस तरह की बचत से देश के आर्थिक संसाधनों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने ईंधन बचत पर भी जोर देते हुए कहा कि अनावश्यक वाहन उपयोग को कम किया जाए, सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो का अधिक उपयोग किया जाए और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत घटाई जा सके।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने खाद्य तेल की खपत को भी थोड़ा कम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि हर परिवार इस दिशा में प्रयास करे, तो इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए और रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को धीरे-धीरे रासायनिक खाद की निर्भरता कम करनी चाहिए और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। अंत में उन्होंने विदेश यात्राओं को लेकर भी अपील की और कहा कि वर्तमान आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए शादी, छुट्टियों या अन्य कारणों से विदेश यात्रा कुछ समय के लिए टालना देशहित में बेहतर होगा।

WORLD : नेपाल में 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी पर रोक

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काठमांडू, 16 मई (हि.स.)। नेपाल-भारत सीमा नाकों पर दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर लगाए जा रहे कस्टम शुल्क पर नेपाल उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार शुल्क लगाने संबंधी वित्त मंत्रालय के निर्णय पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश जारी किया।

भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपभोग के सामान लाने पर भंसार शुल्क लगाने की व्यवस्था को व्यापार संधि के प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए अधिवक्ता अमितेश पण्डित सहित अन्य लोगों ने रिट याचिका दायर की थी।

इससे पहले वित्त मंत्रालय ने 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार कर अनिवार्य करने का निर्णय लिया था। इसके बाद तराई-मधेश क्षेत्र के सीमा नाकों पर सख्ती शुरू कर दी गई थी, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था।

27 अप्रैल को दायर रिट याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सरकार को अंतरिम आदेश पर बहस के लिए बुलाया था। सरकार की ओर से दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को अदालत ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय और कस्टम विभाग के नाम अंतरिम आदेश जारी करते हुए तत्काल इस व्यवस्था पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार बनने के तुरंत बाद सीमा नाकों पर सख्ती शुरू की गई थी। सीमा पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा सामान जब्त किए जाने के फोटो और वीडियो सार्वजनिक होने के बाद व्यापक विरोध हुआ था, लेकिन सरकार अपने निर्णय से पीछे नहीं हटी थी।

NATIONAL : तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज, अमित शाह को धमकी और भड़काऊ बयानों का आरोप

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कोलकाता, 16 मई (हि.स.)। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने और उकसावे वाली भाषा इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। शुक्रवार शाम को विधाननगर साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने राजीव सरकार नामक एक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता राजीव सरकार ने गत पांच मई को बागुईआटी थाने में शिकायत दी थी। उसी शिकायत के आधार पर अभिषेक के खिलाफ कुल छह धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती थी।

पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 192, 196, 351(2) और 353(1)(c) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही उन पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(2) और 125 भी लगाई गई है। पुलिस की एफआईआर में कहा गया है कि आरोपित ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया था।

शिकायतकर्ता राजीव सरकार ने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस दोबारा सत्ता में लौटती, तो आम लोगों पर हमले हो सकते थे। उन्होंने दावा किया कि उनकी शिकायत किसी भी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है।

राजीव सरकार खुद को समाजसेवी बताते हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

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