Sunday, November 1, 2026
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NATIONAL : देशभर में गणेश विसर्जन आज- मुंबई में 25000 जवान तैनात, 350 से ज्यादा कुंड बनाए गए

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12 दिनों तक चलने वाले भव्य गणेश उत्सव का आज अनंत चतुर्दशी के दिन समापन हो रहा है। इसके साथ ही महाराष्ट्र भर में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन की शुरुआत हो चुकी है। मुंबई की सड़कों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है और पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह से ही मुंबई के प्रसिद्ध पंडालों और घरों से गणेश मूर्तियों की विसर्जन यात्राएं निकलनी शुरू हो गईं। पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद ‘गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के गूंजते जयकारों और ढोल-ताशों की थाप पर भक्त झूमते नजर आए।
प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी
बता दें कि लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मुंबई पुलिस और बीएमसी (BMC) ने चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र भर में 24000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
दूसरी ओर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने भी लगभग 25000 कर्मचारियों को विसर्जन ड्यूटी पर लगाया है। लोगों की सुविधा के लिए तालाब, गोताखोर, एंबुलेंस, मेडिकल टीमें, क्रेन और तमाम आपातकालीन सेवाएं तैनात की गई हैं।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से की अपील
इतना ही नहीं प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें, तय किए गए विसर्जन स्थलों का ही उपयोग करें और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सहयोग करें।

लालबाग में दिखा खास नजारा
गौरतलब है कि हर साल की तरह इस बार भी लालबाग इलाके में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। प्रसिद्ध ‘लालबागचा राजा’ समेत कई बड़े सार्वजनिक मंडलों के दर्शन और विसर्जन यात्रा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे हैं। सड़कों पर फूलों की वर्षा और गुलाल उड़ाते हुए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है।

NATIONAL : ‘हताश नेता की झूठी गूंज’, भाजपा ने CEC-SIR विवाद पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का उड़ाया मजाक

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चुनाव आयोग को लेकर सियासत गर्म है। एक तरफ जहां राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमतियों को लेकर लोकतंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा किया।

वहीं भाजपा की ओर से सांसद व प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बिंदुवार पलटवार करते हुए उस खबर पर ही सवाल खड़ा किया जिसमें आयोग के अंदर ही दरार की बात कही गई है।

सुंधाशु ने कहा कि उक्त अखबार की पूरी खबर में कहीं भी इसका साक्ष्य नहीं दिया गया कि एक भी फैसला बिना सर्वसम्मति के हुआ। अगर दो आयुक्त विरोध में हों तो फैसला हो ही नहीं सकता है।

एक दिन पहले ही आयोग ने भी विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि एक साल में 40 फैसले लिए गए और सभी सर्वसम्मति से थे। सुधांशु ने कहा कि राहुल गांधी को ऐसी खबरों के आधार पर बहस नहीं खड़ी करनी चाहिए क्योंकि 2012 में इसी अखबार में कहा गया था कि सेना सत्ता पर कब्जा करना चाहती थी।

सुधांशु ने कहा कि संविधान के नियमों के अनुसार आयोग को एसआइआर कराने का अधिकार है। और यह संविधान के अनुरूप है कि वोटर वही हो जो भारतीय नागरिक हो।

उन्होंने राहुल से पूछा कि 1987 में पहली बार यह तय हुआ कि 26 जनवरी 1987 से पहले जन्मे को भारतीय माना जाएगा। यह कांग्रेस के समय का कानून है और इसका अर्थ है कि उसके बाद जो भी वोटर बनेगा उससे सवाल पूछए जाएंगे।2003 में संशोधन हुआ माता पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके बाद यह भी संशोधन हुआ कि माता पिता में कोई भी एक अवैध रूप से भारत न आया हो। ऐसे मे क्या यह जरूरी नहीं कि जो भी नया वोटर बन रहा है उससे कुछ सवाल पूछे जाएं। इसीलिए फआर्म 6 के साथ घोषणापत्र लाया गया है।सुधांशु ने कहा कि कांग्रेस को घुसपैठियों से प्रेम है क्योंकि वह उसके भरोसे चुनाव जीतती है। यही कारण है 2024 चुनाव से पहले कांग्रेस के एक नेता ने बंग्लादेश के अखबार में आर्टिकल लिखा कि मोदी हैज टू गो(मोदी को जाना होगा)। जब चुनाव भारत में हो रहे थे तो बंग्लादेश के अखबार मे क्यों आर्टिकल लिखा गया। जबकि 70 फीसद मुस्लिम आबादी वाले असम के ढूबरी में कांग्रेस को सबसे बडी जीत मिली।

ऐसे कई और इलाके हैं जहां घुसपैठियों का सबसे ज्यादा संदेह है। कई घुसपैठियों ने तो वापस जाते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने चार बार वोट डाले हैं।

बंग्लादेश के सांसद अख्तर हुसैन ने भी कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई तो मुश्किल होगी क्योंकि उनके कई लोग वापस आने लगेंगे। इस सबके तार कांग्रेस से जुड़े हैं।

राहुल ने कहा था कि एंटी इनकंबैंसी स्थापित नियम है। इस पर सुधांशु ने चुटकी लेते कहा कि यह कांग्रेस और खासतौर पर गांधी परिवार के लिए है। क्योंकि खुद राहुल और सोनिया गांधी भी अपने पुस्तैनी सीट रायबरेली और अमेठी से सपा के समर्थन के बगैर नहीं जीत पाते हैं।

वायनाड में मुस्लिम लीग का समर्थन चाहिए होता है। जब तक देश में बूथ लूटा जाता रहा, वोटर आइ कार्ड की जरूरत नहीं थी, सीसीटीवी नहीं होते थे कांग्रेस रिपीट करती रही। जबस चुनाव स्वच्छ होने लगे कांग्रेस विदा हो गई। तमिलानाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्य हैं जहां कांग्रेस दशकों से गायब है।

क्या यह भी चुनाव आयोग के कारण हो रहा है। कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा आयोग पर न फोड़े। सुधांशु ने तीखा तंज किया और कहा- नग्न व्यक्ति नृत्य करे और कहे कि कपड़ा फट गया जैसी कांग्रेस की हालत है।

सुधांशु ने कांग्रेस के काल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की भी याद दिलाई और यह वीडियो भी दिखाया जिसमें तत्कालीन कैबिनेट सचिव टीएन शेषन ने कहा था कि राजीव गांधी ने चुनाव की तिथि के लिए आयोग को निर्देश देने की बात कही थी।

सुधांशु ने एक और सवाल खड़ा किया और कहा कि राज्यों में चुनाव आयुक्त नियुक्त होते हैं। कितने राज्यों में उनकी नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष शामिल होता है। कितनी जगह राज्य के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।

एसआईआर के सभी विषय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाए गए थे और वहीं से मुहर लगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाना चाहता है तो ले आए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

बिना सियासी जमीन के जमींदार बनना चाहती है कांग्रेस
भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस बौखलाहट में है। देश गवाह है कि खुद को सत्ता की स्वभाविक पार्टी समझने वाली ग्रांड ओल्ड पार्टी बिना जनाधार की जागीरदारी , बिना जमीन की जमींदारी के गुरूर सुरूर में अभी भी है। और इसीलिए केंद्र और राज्यों में सिमटती सिकुड़ती गई।

जबकि भाजपा 2014, 2019, 2024 के चुनाव में अकेले क्रमशः 282 सीट और 38% वोट, 303 सीट और 38% वोट, 240 सीट और 37% वोट हासिल कर श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निरंतरता के साथ बिना कांग्रेस के सपोर्ट, रहम-रिमोट के तीसरे कार्यकाल में प्रवेश कर गई।

चुनाव में लगी चोट को चुनाव तंत्र की खोट साबित करने की सोच, सनक, साजिश, सियासत ने हार की हताशा ने कांग्रेस को हुड़दंगी तमाशा बना दिया है ।

हर चुनाव राजनैतिक दलों के लिए सबक-संदेश होता है, कोई भी हार जीत स्थाई नहीं होती, जनतंत्र में जनादेश की ताकत को अहंकार, अराजकता की आफत से अपहरण करने की सनक सियासी सेहत के लिए हानिकारक होती है ।

NATIONAL : दिल्ली SIR: लालकृष्ण आडवाणी और एस जयशंकर समेत सभी VVIPs का वेरिफिकेशन पूरा, नहीं कटेगा नाम

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (L.K. Advani ), पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar), दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख लोगों को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में ‘विसंगतियों’ को लेकर नोटिस जारी किए गए थे. इनमें से ज्यादातर को 2002 में दिल्ली में हुए पिछले SIR से ‘अनमैप्ड’ होने के कारण नोटिस दिया गया था. ऐसे ज्यादातर प्रमुख मतदाता नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में वोटर थे.

पिछले कुछ दिनों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) समेत चुनाव अधिकारियों की टीमों ने ऐसे मतदाताओं के घर जाकर उनके विवरण का सत्यापन किया. अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के बाद इन मतदाताओं के नाम 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं.

क्यों जारी हुआ था नोटिस
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर आसीन लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल और सार्वजनिक सेवाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के नाम अगर चुनावी डेटाबेस में चिन्हित थे और 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में नहीं मिले, तो उन्हें नोटिस जारी किए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान उनसे जरूरी दस्तावेज हासिल करना था.

33.13 लाख मतदाताओं का है नाम
दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि करीब 33.13 लाख मतदाताओं को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में विसंगतियों के कारण नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है. इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिनके विवरण 2002 में तैयार की गई पिछली SIR की मतदाता सूची से मैच नहीं हो सके थे. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा. किसी भी नाम को हटाने से पहले मतदाता को सुनवाई का अवसर देना और उचित कारण वाला अपील योग्य आदेश पारित करना जरूरी है.

NATIONAL : सरकार बोली-UPI पर लगने वाला शुल्क 4 हिस्सों में बंटेगा, ये पैसा खजाने में नहीं जाएगा; फिर दोहराया कि कस्टमर चार्ज नहीं देगा

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केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा हाई वैल्यू वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला किया है. इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह डिजिटल पेमेंट पर एक नया टैक्स है. इसके अलावा सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसका बोझ ऐसे आम यूजर्स पर पड़ेगा, जो दिन भर में कई छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं. इसपर गुरुवार को सरकारी सूत्रों ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी मर्चेंट फीस का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा.15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा. हालांकि, रकम चाहे कितनी भी हो, व्यक्ति-से-व्यक्ति (Person-to-Person) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.

सरकारी खजाने में नहीं जाएगा पैसा
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की इस आलोचना को खारिज करते हुए कि यह ग्राहकों पर लगाया गया टैक्स है, सरकारी सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित MDR से एक पैसा भी सरकारी खजाने में नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि इकट्ठा की गई रकम UPI इकोसिस्टम में बैंकों और दूसरी संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी.

इकट्ठा किए गए कुल MDR का 40 फीसदी ग्राहकों के बैंकों को, 30 फीसदी पेमेंट गेटवे को, 20 फीसदी UPI ऐप को और बाकी 10 फीसदी UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा.

ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ
उन्होंने कहा, ‘2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) MDR शुल्क और यूजर्स पर इसके असर से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करेंगे.’ सूत्रों ने यह भी साफ किया कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई सेस या सरचार्ज.

मर्चेंट फीस पर जीएसटी
सूत्रों ने आगे कहा कि UPI पर मर्चेंट फीस की वजह से ग्राहकों के वापस कैश इस्तेमाल करने की आशंका बेबुनियाद है. उन्हें यह भी उम्मीद है कि GST काउंसिल ग्राहकों के व्यापक हित में 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट फीस पर लगने वाले 18 फीसदी GST की समीक्षा करेगी, जैसा कि इंश्योरेंस प्रीमियम के मामले में किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘IBA जल्द ही 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR शुल्क लगाने के बारे में फैली गलतफहमियों और अफवाहों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा.’ 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाने का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए कमाई का एक टिकाऊ ढांचा बनाना है.

MDR वह फीस है जो मर्चेंट (व्यापारी) डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं.

300 रुपये अधिकतम चार्ज
15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा. यह चार्ज कस्टमर नहीं, बल्कि मर्चेंट देंगे और 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी. लोगों के बीच होने वाले पेमेंट और रोजमर्रा के ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट मुफ्त रहेंगे.

रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी जरूरी सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के हर ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये की फ्लैट फीस लगेगी. कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन (म्यूचुअल फ़ंड, स्टॉक ब्रोकिंग) के लिए 0.02% की कम दर लागू होगी, जिसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये होगी.

UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक की कमाई करने वाले छोटे मर्चेंट किसी भी नए चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेंगे. इससे सभी मर्चेंट ट्रांजैक्शन का लगभग 96% हिस्सा सुरक्षित रहेगा.

MDR लगाने का क्या है मकसद?
UPI प्लेटफॉर्म चलाने वाली NPCI ने 15 सितंबर को कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के बारे में एक सर्कुलर जारी किया. इस कदम का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए कमाई का एक टिकाऊ ढांचा बनाना है.

छोटे मर्चेंट द्वारा UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास फंड बनाया जाएगा, जिसमें कुल MDR कलेक्शन का 5% हिस्सा योगदान के तौर पर डाला जाएगा. इस पहल से UPI का दायरा बढ़ेगा, लगातार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में छोटे व्यवसायों को शामिल करने की रफ्तार बढ़ेगी.

NATIONAL : राहुल बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने वोट चोरी की, मैंने उनकी नियुक्ति का विरोध किया था, सरकार ने उन्हें कानून से ऊपर रखा

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SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का उदाहरण देते हुए एंटी-इंकम्बेंसी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठना संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़ी ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने कहा कि वह हाल में खबरों में आई कुछ बातों पर अपनी राय रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और अपनी जिंदगी के 50 से ज्यादा साल एक राजनीतिक परिवार के बीच बिताए हैं। उनके मुताबिक, भारत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ एक बुनियादी राजनीतिक ताकत है, जो तेजी से किसी भी सरकार के खिलाफ माहौल बना सकती है और किसी को भी इससे छूट नहीं मिलती।

इंदिरा गांधी का उदाहरण देकर समझाया ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ का असर

राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने बांग्लादेश युद्ध जीता था और उस समय वह अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं। इसके बावजूद एक-दो साल के भीतर उन्हें जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में ऐसा कई नेताओं के साथ लगातार होता रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, कांग्रेस के नेताओं को भी इसका सामना करना पड़ा है और क्षेत्रीय दलों के नेता भी सत्ता-विरोधी लहर से प्रभावित होते रहे हैं।

‘मोदी, शाह और बीजेपी के साथ ऐसा क्यों नहीं होता?’

राहुल गांधी ने आगे कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में ऐसा क्यों नहीं होता। उन्होंने इसी संदर्भ में SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़ी रिपोर्ट का जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर एक सामान्य और प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी को लेकर यह सवाल अलग तरीके से सामने आता है।‘वोट चोरी से चुने सांसद कानून बना रहे, ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें’

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग वोट का संस्थागत संरक्षक है और उन्होंने चुनावों में कथित गड़बड़ी से जुड़े सबूत पहले ही सामने रखे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनावों में धांधली होने की पुष्टि के लिए पर्याप्त जानकारी मौजूद है। उन्होंने कहा कि जिन सवालों को वह लगातार उठाते रहे, उन्हें नजरअंदाज किया गया, जबकि देश की जनता ने उन पर भरोसा किया।

‘ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो चुनाव आयुक्त सवाल उठा रहे हैं’

राहुल गांधी ने कहा कि अब दो चुनाव आयुक्त भी उस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जिसकी जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पास है। उन्होंने दावा किया कि वोटिंग सिस्टम में हुई कथित अव्यवस्था और नुकसान के लिए ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी प्रक्रिया के जरिए हुआ। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।

‘वोट चोरी से कानून चोरी और फिर संस्था चोरी’

राहुल गांधी ने अपने आरोपों को एक कड़ी से जोड़ते हुए कहा कि अगर वोट की चोरी होती है तो उससे कानून की चोरी होती है और कानून की चोरी के बाद संस्थाओं की चोरी होती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा सिलसिला है जो लगातार आगे बढ़ता है। राहुल गांधी के मुताबिक, अगर संसद में कोई सांसद कथित तौर पर चोरी किए गए वोट के आधार पर पहुंचा है, तो उसके द्वारा बनाया गया कोई भी कानून गैर-कानूनी माना जाएगा और उसके जरिए किया गया संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी होगा।राहुल गांधी ने एंटी-इंकम्बेंसी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पिछले 50 वर्षों से सत्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास जाती रही है, लेकिन अचानक वहां एंटी-इंकम्बेंसी गायब हो जाती है।

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का भी उदाहरण दिया और कहा कि वहां भी ऐसा ही होता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कभी समाजवादी पार्टी तो कभी BSP की सरकार रही है, लेकिन वहां भी एंटी-इंकम्बेंसी के गायब होने का सवाल उठता है।

राहुल गांधी का दावा- ‘लोकतंत्र पर पहले कभी नहीं हुआ ऐसा हमला’

राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जिसका सामना भारतीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 का लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव ‘फेक’ थे। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान पारित किए गए कानून अवैध हैं और संस्थाओं को संचालित करने वाले लोग भी अवैध हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दो जूनियर चुनाव आयुक्तों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ‘बहुत अच्छा काम’ किया है।यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं, हर नागरिक का सवाल’

राहुल गांधी ने कहा कि उनके मुताबिक मौजूदा विवाद को सिर्फ वोट तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे हर भारतीय नागरिक के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति से जुड़ा मुद्दा बताया। राहुल गांधी ने दोहराया कि विपक्ष लगातार मतदान प्रक्रिया में समस्या होने की बात उठा रहा है और इसी वजह से SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।

NATIONAL : यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो आज से: गृह मंत्री अमित शाह करेंगे व्यापार मेले का उद्घाटन, सीएम योगी रहेंगे साथ

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इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में पांच दिवसीय उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस) के चौथे संस्करण का आज शुक्रवार को शुभारंभ होने वाला है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 11 बजे इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन करने करेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसका उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। ट्रेड शो में पहली बार आस्ट्रिया, जापान, रूस, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम साझेदार देश के तौर पर सहभागिता कर रहे हैं।

तैयारी और लक्ष्य को साझा किया

इन देशों की भागीदारी से व्यापार साझेदारी, तकनीकी सहयोग, सोर्सिंग, निवेश और नए बाजारों तक प्रदेश के उत्पादों की पहुंच के अवसर बढ़ेंगे। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खरीदारों की बीटूबी बैठक, सेक्टोरल नीति सत्र से प्रदेश में निवेश की नई संभावनाएं तैयार की जाएंगी। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता कर यूपीआइटीएस की तैयारी और लक्ष्य को साझा किया।

मंत्री ने कहा कि यूपीआइटीएस प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं, निर्यातकों और कारोबारियों को देश और दुनिया के बाजारों से जोड़ने का बड़ा मंच है। इसमें 2,400 से अधिक प्रदर्शकों, 1.5 लाख से अधिक बीटूबी खरीदारों एवं आगंतुकों, 4.5 लाख से अधिक सामान्य आगंतुकों के अलावा 85 देशों के 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है।अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी बढ़ रही

प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं। सरकार ऐसा ईकोसिस्टम विकसित कर रही है, जिसमें उद्यम आगे बढ़े, नवाचार करें और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें। यूपीआइटीएस स्थानीय उद्यमों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने के साथ निवेश, व्यावसायिक विस्तार और रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा। कार्यक्रम से पहले ही अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी बढ़ रही है।अब तक 72 देशों से विदेशी खरीदारों के पंजीकरण हो चुके हैं। होस्टेडबायर प्रोग्राम के माध्यम से वास्तविक खरीदारों, आयातकों, वितरकों, रिटेलर्स, सोर्सिंग एजेंट्स, प्रोक्योरमेंट प्रमुखों, व्यापार संघों और व्यावसायिक उद्यमों को जोड़ा जा रहा है। ट्रेड शो में वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पहल के साथ इस साल वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुजीन को विशेष पहचान दी जाएगी।

प्रदेश के विभिन्न जिलों की पारंपरिक पाक विधियों, स्थानीय व्यंजनों और खाद्य विरासत को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इस मौके पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील, जिलाधिकारी मेधा रुपम आदि मौजूद रहे।

NATIONAL : पीएम ने मंत्रियों से योजनाओं और कामकाज पर फीडबैक लिया, कहा- कोई जरूरतमंद योजना के लाभ से न छूटे, लोगों का जीवन आसान बनाना लक्ष्य

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पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुए दो दिन के चिंतन शिविर में मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज और योजनाओं पर चर्चा की। पीएम मोदी ने मंत्रियों से योजनाओं की स्थिति, सामने आ रही दिक्कतों और सुधार की जरूरतों पर फीडबैक लिया।

उन्होंने कहा कि कोई जरूरतमंद सरकारी योजना के लाभ से न छूटे और लोगों का जीवन आसान बनाना सरकार का लक्ष्य होना चाहिए। मंत्रियों को 8 ग्रुप में बांटा गया था। पीएम मोदी ने हर ग्रुप के साथ अलग-अलग बातचीत की और बाद में सभी मंत्रियों को संबोधित किया।

उन्होंने मंत्रियों से अपने मंत्रालयों की योजनाओं में आने वाली कमियों और चुनौतियों की पहचान कर जरूरी कदम उठाने को कहा। साथ ही लोगों तक सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी बेहतर तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया।
40-45 प्रमुख योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर

मंत्रियों को सरकार की 40-45 प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की पूरी जानकारी रखने को कहा गया। उन्हें इन योजनाओं के बारे में लोगों को बताने और सभी पात्र लोगों तक इनका लाभ पहुंचाने पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि मीडिया से बात करने से पहले वे हाल के मुद्दों और समस्याओं की पूरी जानकारी लें। उन्हें चिंतन शिविर में दूसरे मंत्रियों से मिली सीख और अपने अनुभवों को भी साझा करने को कहा गया।पहले दिन शासन और सुधारों पर चर्चा

शिविर के पहले दिन शासन व्यवस्था, सुधार और महिलाओं व युवाओं तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच पर चर्चा हुई। मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल से सरकारी कामकाज और योजनाओं की डिलीवरी सुधारने पर भी विचार किया गया।

‘जन विश्वास से जन भागीदारी’ और विकसित भारत@2047 पर मंथन

बैठक में ‘जन विश्वास से जन भागीदारी’, सरकार के अलग-अलग क्षेत्रों में सुधार और विकसित भारत@2047 की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई।

दो दिन का यह शिविर सरकारी कामकाज की समीक्षा, आपसी तालमेल बढ़ाने और आगे की कार्ययोजना तैयार करने के लिए आयोजित किया गया था।

विकसित भारत@2047 की तैयारी 2021 से चल रही है। इसके लिए सचिवों के 10 क्षेत्रीय समूह बनाए गए हैं, जो देश के विकास के लिए छोटी और लंबी अवधि के रोडमैप तैयार कर रहे हैं।

इस प्रक्रिया के तहत अब तक मंत्रिपरिषद के सामने अलग-अलग पहलुओं पर 8 प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं। मौजूदा चिंतन शिविर इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।सरकारी कामकाज में सुधार पर भी जोर

शिविर में सरकारी कामकाज की समीक्षा, नीतियों को लागू करने, समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और लोगों को बेहतर सरकारी सेवाएं देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सुधारों के तहत नियमों का बोझ कम करने और लोगों का जीवन आसान बनाने पर भी जोर दिया गया।हाल के समय में मंत्रालयों को अपनी गतिविधियों के लाइव डैशबोर्ड बनाने, काम की प्रगति की समीक्षा करने और कर्मचारियों से सुझाव लेने के निर्देश दिए गए हैं।

इस महीने की शुरुआत में पीएम मोदी ने मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को लोगों के लिए ज्यादा आसान बनाने को भी कहा था।
मोदी सरकार के मंत्रियों का आज से 2 दिन का चिंतन शिविर शुरू हो गया है। यह 24 सितंबर तक चलेगा। इसमें पीएम मोदी कैबिनेट मिनिस्टर्स की क्लास लेंगे।

WEATHER : चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट से टकराया, कई इलाकों में मचाई भारी तबाही

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बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान अर्नब देर रात उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों से टकरा गया। लैंडफॉल के दौरान तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश और 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। तूफान के असर से कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान अर्नब देर रात उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों से टकरा गया। लैंडफॉल के दौरान तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश और 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। तूफान के असर से कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। आंध्र प्रदेश में तेज हवाएं और शहरों में जलभराव स्थिति निर्मित हो गई है। वहीं श्रीकाकुलम और कलिंगपट्टनम में लैंडफॉल के समय 75 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलीं और मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। विजयवाड़ा में सुबह से जारी लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है। सुरक्षा के लिहाज से शहर के स्कूलों में लगातार दूसरे दिन छुट्टी घोषित की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम पिछले 6 घंटों में 3 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर तेजी से बढ़ा है।

प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संवेदनशील इलाकों से करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया है। राज्य के दक्षिणी जिलों में भारी जलभराव के कारण 4 से अधिक पुल और प्रमुख सड़कें बह गईं।

बंगाल: आरेंज अलर्ट और भूस्खलन की चेतावनी

साउथ 24 परगना जिले में कम दबाव के कारण तेज हवाओं के साथ बारिश जारी है। मौसम विभाग ने यहां आॅरेंज अलर्ट जारी किया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है। वहीं दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिलों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की चेतावनी दी गई है।

यूपी में फिर बारिश का दौर

उत्तर प्रदेश में तीन दिन के ब्रेक के बाद मानसूनी बारिश फिर शुरू हो गई है। लखनऊ, गोंडा, महराजगंज, उन्नाव और प्रयागराज में बारिश दर्ज की गई। गोंडा में तड़के 4 बजे से जारी मूसलाधार बारिश के कारण कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।

उत्तराखंड में बारिश की संभावना

उत्तराखंड मौसम विभाग ने राज्य के 10 जिलों (उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल, चंपावत, अल्मोड़ा, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़) में बारिश की संभावना जताई है, जबकि शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।

Asian Games 2026: रोशिबिना देवी ने वुशु में दिलाया भारत को सिल्वर मेडल, लगातार 3 मेडल जीतकर बनाया नया रिकॉर्ड

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भारत को एशियन गेम्स 2026 में एक और रजत पदक मिल गया है। वुशु की महिलाओं के सांडा 60 किलोग्राम फाइनल में भारत की रोशिबिना देवी गोल्ड से चूक गईं, लेकिन वो लगातार तीन मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।

Asian Games, Wushu: भारतीय वुशु एथलीट रोशिबिना देवी ने गुरुवार को आइची-नागोया में महिलाओं के सांडा 60 किग्रा फ़ाइनल में चीन की झांग ज़ियाओयू से हारकर एशियाई खेलों में लगातार अपना दूसरा सिल्वर मेडल जीता। ESPN के अनुसार, 2022 हांग्झू एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाली रोशिबिना अपने दोनों राउंड 0-5 के स्कोर से हार गईं और चीनी प्रतिद्वंद्वी ने 2-0 से मैच जीत लिया।

2018 एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत चुकीं रोशिबिना, एशियाई खेलों में वुशु में लगातार तीन मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। जापान में रोशिबिना का प्रदर्शन शानदार रहा, जिसमें उन्होंने वियतनाम की 2023 की वर्ल्ड चैंपियन गुयेन थी थू थुय को हराया।

बुधवार को, रोशिबिना ने सेमीफ़ाइनल में इंडोनेशिया की थानिया कुसुमानिंगत्यास को 2-0 से हराकर फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की। यह चल रहे इवेंट में भारत का 14वां मेडल है; इससे पहले भारत एक गोल्ड मेडल जीत चुका है और यह छठा सिल्वर मेडल है। भारत ने अब तक सात ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीते हैं।

रोइंग में भी कांस्य पदक आया
इससे पहले, गुरुवार को पुरुषों के डबल स्कल्स फ़ाइनल में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। ESPN के अनुसार, इस जोड़ी ने 6:13.25 का समय लिया, जो चीन के गोल्ड मेडलिस्ट यी ज़ुदी / नी यिदे से सिर्फ़ 3.48 सेकंड और सिल्वर मेडलिस्ट मेखरोज़बेक ममतकुलोव / पावेल सोरिन से 2.76 सेकंड पीछे था। सतनाम-सलमान ने 500 मीटर, 1000 मीटर और 1500 मीटर पर दूसरी पोजीशन बनाए रखी, लेकिन अंत में पिछड़ गए। एक समय पर, वे चीनी जोड़ी से सिर्फ़ आधे सेकंड पीछे थे।

पुरुषों के सिंगल्स स्कल्स मुक़ाबले में, बलराज पंवार मेडल जीतने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। बलराज 500 मीटर, 1000 मीटर और 1500 मीटर के निशान पर दूसरे स्थान पर बने रहे, लेकिन बाद में आखिरी 500 मीटर की दूरी में उज़्बेकिस्तान के शखबोज़ खोलमुर्ज़ायेव और जापान के तात्सुया सकुरामा से पीछे रह गए और मेडल नहीं जीत पाए।

आखिरी हिस्से से पहले बलराज, सकुरामा से पांच सेकंड आगे थे, लेकिन अंत में उनसे आठ सेकंड पीछे रहे। उन्होंने 6:54.80 का समय लिया, जो गोल्ड मेडल जीतने वाले चीन के झिवेई डेंग से 15 सेकंड ज़्यादा था।

BUSINESS : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के IPO से ग्रे मार्केट में मची हलचल, जानिए लेटेस्ट GMP से लिस्टिंग डेट तक

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NSE IPO Latest GMP: सेबी से DRHP की मंजूरी मिलते ही NSE IPO का GMP ₹282 के पार पहुंच गया है। क्या 15 सितंबर को खुलेगा देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू? पढ़ें प्राइस बैंड और लिस्टिंग डेट की पूरी डिटेल।

NSE IPO Buzz GMP: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE के IPO का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है। सेबी ने इसके DRHP को मंजूरी देते हुए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया है। सेबी के लेटर जारी करते ही ग्रे मार्केट में तहलका मच गया और इसका जीएमपी अभी से बढ़ने लगा है। Investorgain.com पर NSE के आईपीओ का जीएमपी इस समय 282 के पार चला गया है। ये जीएमपी इस बात का संकेत दे रहा है कि निवेशकों को इस आईपीओं में बंपर मुनाफा हो सकता है।

कब होगी NSE के आईपीओ की लिस्टिंग?
एनएसई का आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा। इसमें मौजूदा शेयरधारक करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। ओएफएस होने की वजह से इससे जुटाई गई राशि एनएसई को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएसई अगले सप्ताह आईपीओ के लिए मूल्य दायरा और अन्य प्रमुख विवरण घोषित कर सकता है। इस निर्गम के 15 सितंबर को खुलने और 24-25 सितंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना है।

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2010 से अब तक देश के सबसे बड़े IPOs की लिस्ट
कंपनी IPO का साल IPO का आकार
Jio Platforms प्रस्तावित करीब ₹37,700 करोड़
NSE 2026 करीब ₹30,000 करोड़
Hyundai Motor India 2024 ₹27,858.75 करोड़
LIC 2022 ₹20,557.23 करोड़
Paytm 2021 ₹18,300 करोड़
Tata Capital 2025 ₹15,511.87 करोड़
Coal India 2010 ₹15,200 करोड़
करीब एक दशक की नियामकीय अड़चनों के बाद आने वाला यह आईपीओ एनएसई को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, करीब 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से एनएसई का बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

देश के प्रमुख शेयर बाजार का संचालन करने वाली कंपनी एनएसई ने इस साल 17 जून को सेबी के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। मसौदा दस्तावेज के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) आईपीओ में 2.48 करोड़ तक शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

हालांकि, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से कोई भी शेयर नहीं बेचेगी।एनएसई के निदेशक मंडल ने इस साल छह फरवरी को आईपीओ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज को सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल गया था।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी जिम्मेदार नहीं है।

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