Sunday, November 1, 2026
Home Blog Page 32

BUSINESS : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के IPO से ग्रे मार्केट में मची हलचल, जानिए लेटेस्ट GMP से लिस्टिंग डेट तक

0

NSE IPO Latest GMP: सेबी से DRHP की मंजूरी मिलते ही NSE IPO का GMP ₹282 के पार पहुंच गया है। क्या 15 सितंबर को खुलेगा देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू? पढ़ें प्राइस बैंड और लिस्टिंग डेट की पूरी डिटेल।

NSE IPO Buzz GMP: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE के IPO का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है। सेबी ने इसके DRHP को मंजूरी देते हुए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया है। सेबी के लेटर जारी करते ही ग्रे मार्केट में तहलका मच गया और इसका जीएमपी अभी से बढ़ने लगा है। Investorgain.com पर NSE के आईपीओ का जीएमपी इस समय 282 के पार चला गया है। ये जीएमपी इस बात का संकेत दे रहा है कि निवेशकों को इस आईपीओं में बंपर मुनाफा हो सकता है।

कब होगी NSE के आईपीओ की लिस्टिंग?
एनएसई का आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा। इसमें मौजूदा शेयरधारक करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। ओएफएस होने की वजह से इससे जुटाई गई राशि एनएसई को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएसई अगले सप्ताह आईपीओ के लिए मूल्य दायरा और अन्य प्रमुख विवरण घोषित कर सकता है। इस निर्गम के 15 सितंबर को खुलने और 24-25 सितंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना है।

यह भी पढ़ें | सोमवार को निफ्टी की अग्निपरीक्षा! 23,800 का लेवल तय करेगा अगली चाल
2010 से अब तक देश के सबसे बड़े IPOs की लिस्ट
कंपनी IPO का साल IPO का आकार
Jio Platforms प्रस्तावित करीब ₹37,700 करोड़
NSE 2026 करीब ₹30,000 करोड़
Hyundai Motor India 2024 ₹27,858.75 करोड़
LIC 2022 ₹20,557.23 करोड़
Paytm 2021 ₹18,300 करोड़
Tata Capital 2025 ₹15,511.87 करोड़
Coal India 2010 ₹15,200 करोड़
करीब एक दशक की नियामकीय अड़चनों के बाद आने वाला यह आईपीओ एनएसई को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, करीब 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से एनएसई का बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

देश के प्रमुख शेयर बाजार का संचालन करने वाली कंपनी एनएसई ने इस साल 17 जून को सेबी के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। मसौदा दस्तावेज के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) आईपीओ में 2.48 करोड़ तक शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

हालांकि, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से कोई भी शेयर नहीं बेचेगी।एनएसई के निदेशक मंडल ने इस साल छह फरवरी को आईपीओ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज को सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल गया था।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी जिम्मेदार नहीं है।

India Rich List 2026: मुकेश अंबानी नहीं… गौतम अडानी बने देश के सबसे अमीर भारतीय, ₹59,400 करोड़ का फासला

0

देश के दिग्गजों की संपत्ति को दर्शाती ‘M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026’ के आंकड़े सामने आ चुके हैं। इस नई रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनका परिवार एक बार फिर देश के सबसे अमीर भारतीय बन गए हैं। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के…

नई दिल्ली: देश के दिग्गजों की संपत्ति को दर्शाती ‘M3M हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026’ के आंकड़े सामने आ चुके हैं। इस नई रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनका परिवार एक बार फिर देश के सबसे अमीर भारतीय बन गए हैं। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है।

गौतम अडानी की संपत्ति 13% बढ़कर ₹9.23 लाख करोड़ ($96 बिलियन) हो गई, जबकि मुकेश अंबानी की संपत्ति 10% घटकर ₹8.63 लाख करोड़ ($90 बिलियन) रह गई। अब गौतम अडानी, मुकेश अंबानी से ₹59,400 करोड़ आगे हैं।

हुरुन लिस्ट के इस नए एडिशन में 1,810 लोग शामिल हैं जिनकी नेट वर्थ कम से कम ₹1,000 करोड़ है। उनकी कुल संपत्ति पिछले साल के मुकाबले 12.8% बढ़कर ₹187.5 लाख करोड़ ($1.96 ट्रिलियन) हो गई है, जो भारत की GDP का लगभग आधा है। भारत में अब रिकॉर्ड 391 डॉलर अरबपति हैं, जबकि पांच साल पहले यह संख्या 237 थी। पिछले साल देश में 27 और डॉलर अरबपति जुड़े।

टॉप 10 में स्टील और मेटल सेक्टर के बड़े नाम
LN मित्तल (आर्सेलर-मित्तल): यूरोप में स्टील ट्रेड प्रोटेक्शन नीतियों और मजबूत कीमतों के चलते LN मित्तल की संपत्ति में इस साल सबसे बड़ा उछाल देखा गया। उनकी नेट वर्थ 93% की भारी बढ़ोतरी के साथ ₹3.39 लाख करोड़ हो गई। ₹1.64 लाख करोड़ का इजाफा दर्ज करते हुए वे आठ पायदान छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर आ गए हैं।

अनिल अग्रवाल (वेदांता रिसोर्सेज): वेदांता ग्रुप में मेटल, पावर और एनर्जी बिजनेसेज के पुनर्गठन (Reorganization) से पोर्टफोलियो वैल्यू में सुधार हुआ। अनिल अग्रवाल और उनका परिवार सात पायदान ऊपर चढ़कर नौवें स्थान पर आ गया, जिनकी संपत्ति 87% बढ़कर ₹2.08 लाख करोड़ दर्ज की गई।

समीर मेहता (टोरेंट फार्मा): JB केमिकल्स के साथ सफल मर्जर के बाद टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स के समीर मेहता की संपत्ति 52% बढ़कर ₹1.89 लाख करोड़ हो गई और उन्होंने 10वां स्थान हासिल किया।

टॉप पर 131 महिलाएं
इस लिस्ट में 131 महिलाएं शामिल हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 100 थी। इनमें से 33 महिलाएं डॉलर अरबपति हैं।

कुल महिलाएं: लिस्ट में 131 महिलाएं शामिल हैं (पिछले साल 100 थीं), जिनमें से 33 महिलाएं डॉलर अरबपति हैं।

सबसे अमीर महिला: HCL की रोशनी नाडर मल्होत्रा ₹2.79 लाख करोड़ की संपत्ति के साथ देश की सबसे अमीर महिला और ओवरऑल लिस्ट में पांचवें स्थान पर बनी हुई हैं।

सेल्फ-मेड और प्रोफेशनल लीडर्स: एरिस्टा नेटवर्क्स की जयश्री उलाल ₹77,400 करोड़ की संपत्ति के साथ देश की सबसे अमीर ‘सेल्फ-मेड’ महिला और सबसे अमीर प्रोफेशनल मैनेजर के रूप में उभरी हैं।

नई एंट्री: दुबई स्थित लैंडमार्क ग्रुप की रेणुका जगतियानी ₹70,500 करोड़ की संपत्ति के साथ 36वें स्थान पर नई एंट्री लेने वाली सबसे अमीर महिला बनीं।

क्वांटम कंप्यूटिंग की एंट्री: बेंगलुरु की कंपनी QpiAi के संस्थापक नागेंद्र नागराजा क्वांटम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षेत्र से लिस्ट में शामिल होने वाले देश के पहले एंटरप्रेन्योर बने हैं। उनकी शुरुआती नेट वर्थ ₹1,700 करोड़ आंकी गई है।

Artificial Intelligence (AI): हुरुन लिस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी एक अलग सेक्टर के तौर पर शामिल किया गया है, जिसमें 19 लोग हैं और उनकी कुल संपत्ति ₹3.07 लाख करोड़ (लगभग $1.5 बिलियन) है। इनमें से 15 लोग नए हैं।

एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर से 23 लोग लिस्ट में शामिल हुए, जिनकी कुल संपत्ति ₹85,200 करोड़ है। 28 साल के तनाय कोठारी और सहज गर्ग अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ‘व्हिस्पर फ्लो’ (Whisper Flow) के साथ लिस्ट में शामिल हुए। उनकी कुल संपत्ति ₹4,200 करोड़ है।

WORLD : 11 साल बाद जिनपिंग पहुंचे अमेरिका, प्रोटोकॉल तोड़कर खुद रिसीव करने गए ट्रम्प

0

11 साल बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंचे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी वहां थी। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रोटोकॉल तोड़कर खुद जिनपिंग को जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर रिसीव करने गए। इस दौरान फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी मौजूद रहीं।

11 साल बाद शी जिनपिंग पहुंचे अमेरिका
आपको बता दें कि किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति अमुमन एयरपोर्ट नहीं जाते। व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में स्टेट डिनर होगा।

जिसकेबाद ट्रम्प-जिनपिंग के बीच द्वपक्षीय बातचीत पहले से प्रस्तावित है। जिसमें टैरिफ, व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और रूस आदि मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

प्रोटोकॉल तोड़कर खुद रिसीव करने गए ट्रम्प, स्वागत में B-1 बॉम्बर उड़े
राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बड़े ही खास तरीके से स्वागत किया गया। उनके लिए रेड कार्पेट, सैन्य सम्मान, बैंड और तोपों की सलामी दी गई। साथ ही हवाई प्रदर्शन में B-1 बॉम्बर विमानों ने फ्लाईपास्ट किया।

इन चार मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
बता दें कि इससे पहले बीते एक साल में दोनों नेता की दो बार मुलाकात हो चुकी है। गुरवार की मुलाकात तीसरी मुलाकात होगी। दोनों ट्रम्प-जिनपिंग के बीच 4 अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। दोनों देशों के बीच ट्रेड और टैरिफ बड़ा मुद्दा है। पिछले साल ट्रम्प ने चीन पर टैरिफ लगाए थे।

जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर टैक्स लगाया था। इसके साथ ही पहली बाद दोनों देशों के बीच एआई को लेकर बातचीत हो सकती है। इसके अलावा ताइवान के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। तो वहीं रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी बातचीत में शामिल हो सकता है।

उत्तराखंड की डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय उमा कोठारी खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) में बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। वे राजनीति, मनोरंजन, खेल और ट्रेंडिंग विषयों पर गहन और तथ्यपरक खबरें लिखती हैं। उत्तराखंड के स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर इनकी पकड़ मजबूत है। डिजिटल मीडिया में इनका अनुभव पाठकों को सटीक, संतुलित और समय पर जानकारी देने में सहायक है। उत्तराखंड | खबर उत्तराखंड

BUSINESS : खाने का तेल होगा सस्ता! सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी घटी

0

केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग को ध्यान में रखते हुए खाने के तेल के दामों को नियंत्रित करने के लिए सोयाबीन और पाम ऑयल पर आयात ड्यूटी घटा दी है।

त्योहारों के सीजन से पहले महंगे होते खाने के तेल पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने कच्चे और रिफाइंड एडिबल ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) घटा दी है। यह बदलाव 24 सितंबर, 2026 से लागू हो गया है। सरकार का मकसद आयात का खर्च कम करके घरेलू बाजार में खाने के तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है।

सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक कच्चे सोयाबीन और कच्चे ऑयल पर BCD को 10% से घटाकर 5% कर दिया गया है। वहीं, कच्चे सनफ्लावर ऑयल पर 10% की ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इसके अलावा रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% कर दी गई है, जबकि रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल पर इसे 32.5% से घटाकर 22.5% किया गया है।

त्योहारों से पहले क्यों लिया गया फैसला?
भारत में खाने के तेल की कीमतों का असर सीधे घर खर्च और खाद्य महंगाई पर पड़ता है। देश अपनी सालाना खाद्य तेल जरूरत का 58% से ज्यादा यानी करीब 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है। इसमें पाम, सोयाबीन, सनफ्लावर तेल सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं। जब भी इन तेलों के दाम ग्लोबल मार्केट में बढ़ते हैं, तो भारत में भी इन तेलों के दाम पर असर पड़ता है। हाल के महीनों में ढुलाई (Freight) और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने, रुपये में कमजोरी और कुछ बायो फ्यूल में पाम, सोयाबीन और सनफ्लावर का इस्तेमाल बढ़ने से इन तेलों के दाम बढ़े हैं।

अभी कितना महंगा बिक रहा है तेल?
सरकारी प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के मुताबिक 23 सितंबर, 2026 को देश में सरसों तेल के पैकेट की औसत रिटेल कीमत ₹202.87 प्रति किलो थी। सोयाबीन तेल ₹166.87 और पाम ऑयल ₹153.89 प्रति किलो बिक रहा था। एक साल पहले के मुकाबले सरसों के तेल में करीब 8%, सोयाबीन में 14% और पाम ऑयल के तेल की कीमत में 16% का इजाफा हुआ है। यानी त्योहारों के पहले ग्राहकों को ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

आयात खर्च कितना बढ़ा?
Solvent Extractors Association of India यानी SEA के आंकड़ों के मुताबिक 18 सितंबर को मुंबई पोर्ट पर कच्चे पाम ऑयल की लैंडिंग प्राइस करीब $1,265 प्रति टन थी। सोयाबीन तेल के लिए यह $1,314 और सनफ्लावर तेल के लिए $1,380 प्रति टन रही। एक साल की तुलना में पाम और सोयाबीन की लागत करीब 11% ज्यादा थी, जबकि सनफ्लावर की कीमत करीब 7% बढ़ी है। यही वजह है कि सरकार के लिए कस्टम ड्यूटी में कटौती के जरिए लैंडिंग कॉस्ट कम करने का प्रयास किया है।

क्या अब तुरंत सस्ता होगा तेल?
इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती से तेल आयात करने की लागत घट सकती है, लेकिन इसका पूरा फायदा तुरंत रिटेल मार्केट में पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। क्योंकि, रिटेल प्राइस इंटरनेशनल प्राइस, फ्रेट, रुपी-डॉलर एक्सचेंज रेट के साथ ही कंपनियों के मार्जिन के बाद तय होते हैं। हालांकि, फिर भी ड्यूटी में कटौती से आयातकों और रिफाइनरों की लागत पर दबाव कम होने की संभावना है। ऐसे में इसका फायदा ग्राहकों तक जा सकता है।

JODHPUR : केमिकल फैक्टरी में आग लगने से कई हताहत, 14 घायल अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर क्या बोले?

0

जोधपुर के बसनी औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल फैक्टरी में आग लगने के बाद धमाका हुआ। इसमें 14 दमकलकर्मी घायल हो गए, जिनमें से आठ 50 फीसदी से अधिक झुलस गए। जिला प्रशासन और पुलिस मौके पर मौजूद हैं।

बासनी स्थित गणेश कॉलोनी की एक केमिकल फैक्ट्री में बुधवार शाम लगी आग बुझाने के दौरान अचानक हुए जोरदार विस्फोट ने बड़ा हादसा कर दिया। फैक्ट्री में रखा केमिकल का टैंक अचानक फट गया और इसकी चपेट में आने से नगर निगम के दमकल दल के 14 कर्मचारी घायल हो गए। इनमें आठ दमकलकर्मी 50 फीसदी से ज्यादा झुलस गए हैं। हादसे के बाद घायलों को दमकल वाहनों और मौके पर मौजूद पिकअप की मदद से एम्स जोधपुर पहुंचाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) की बर्न यूनिट में शिफ्ट किया गया।

आग बुझाते समय अचानक फटा केमिकल टैंक, धमाके की चपेट में आए दमकलकर्मी

बताया गया कि बासनी औद्योगिक क्षेत्र में गणेश कॉलोनी स्थित केमिकल फैक्ट्री में बुधवार शाम अचानक आग लग गई। सूचना मिलने के बाद नगर निगम की दमकल टीमें आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मी आग पर काबू पाने में जुटे थे। इसी दौरान फैक्ट्री में रखा केमिकल का टैंक अचानक फट गया और जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट की चपेट में आने से मौके पर मौजूद दमकलकर्मी झुलस गए। शुरुआती जानकारी में घायल कर्मचारियों की संख्या 13 से 14 बताई गई, जबकि पुलिस कमिश्नर अंशुमान भोमिया ने बाद में 14 लोगों के घायल होने की जानकारी दी।

आठ दमकलकर्मी 50 फीसदी से ज्यादा झुलसे, एमजीएच में बनाया गया अलग बर्न आईसीयू

पुलिस कमिश्नर अंशुमान भोमिया ने बताया कि विस्फोट में झुलसे 14 दमकलकर्मियों में से आठ 50 फीसदी से ज्यादा जल गए हैं। गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारियों के लिए महात्मा गांधी अस्पताल में अलग से बर्न आईसीयू बनाया गया है। सभी घायलों का बर्निंग चार्ट तैयार किया जा रहा है और उनके उपचार के लिए विशेष मेडिकल टीम लगाई गई है। जिलाधिकारी आलोक रंजन ने बताया कि सभी दमकलकर्मियों को पहले एम्स जोधपुर में प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें बेहतर और विशेष उपचार के लिए एमजीएच की बर्न यूनिट में शिफ्ट किया गया। गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

NATIONAL : ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा, स्लीपर बस में लगी भीषण आग, 9 लोगों की मौत

0

Greater Noida Sleeper Bus Fire Accident: गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर देर रात स्लीपर बस में आग लग गई. बताया जा रहा है कि बस ग्रेटर नोएडा से महोबा की ओर जा रही थी. इस दौरान अचानक से बस में आग लग गई. आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई.

ग्रेटर नोएडाः दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा हो गया. इस हादसे में कुल 9 लोगों की अबतक मौत की जानकारी सामने आई है. बुधवार-गुरुवार की देर रात को स्लीपर बस ग्रेटर नोएडा से महोबा जा रही थी. इस दौरान अचानक से बस में आग लग गई. आग लगते ही बस में अफरातफरी मच गई. ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को किनारे पर रोक दिया. लेकिन तब तक आग इतनी भीषण हो गई कि कई लोगों की जानें चली गईं. आग को कड़ी मशक्कत के बाद दमकलकर्मियों ने बुझाया. अभी बस के कूल होने का इंतजार किया जा रहा है ताकि अगर कोई बस के अंदर फंसा हो तो निकाला जा सके.

सीएम योगी ने हादसे का लिया संज्ञान
ग्रेटर नोएडा में हुए सड़क हादसे का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार करवाने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों से संवाद कर हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का भी निर्देश दिया है.

सीएम योगी ने मुआवजे का किया ऐलान
ग्रेटर नोएडा बस हादसे पर सीएम योगी ने मुआवजे का ऐलान किया है. मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए व घायलों को 50-50 हजार रुपए को आर्थिक मदद का सीएम ने किया ऐलान. बस हादसे में 30 लोगों को पुलिस व बचाव दल ने सुरक्षित बचाया.

साथ ही सीएम योगी ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. यह घटना यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट से करीब 32 किलोमीटर आगे हुई, जो जेवर थाना क्षेत्र में आता है. ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बस से कूदना शुरू कर दिया. हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई. देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपने चपेट में ले लिया.

आग की सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद फायर टीम ने आग पर काबू पा लिया. चिंता की बात यह है कि कुछ लोगों के अभी भी बस में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. फायर विभाग के मुताबिक जब तक कूलडाउन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तबतक बस के अंदर तलाशी नहीं ली जा सकेगी.

NATIONAL : डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों से शोर का मामला पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट, गणेशोत्सव में नियमों के पालन का निर्देश देने की गुहार

0

मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में इस समय गणेशोत्सव की धूम है। इस दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों बज रहे हैं। ऐसे में गणेशोत्सव के दौरान तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के 2016 के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य में ध्वनि प्रदूषण रोकने के नियमों का प्रभावी रूप से पालन नहीं हो रहा है।

चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस सेठना की बेंच के सामने आगामी 5 अक्टूबर 2026 को याचिका पर सुनवाई हो सकती है। हालांकि सीनियर ऐडवोकेट अनिल साखरे ने कोर्ट से याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि कि पुणे में गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर विवाद की स्थिति बनी है। एक व्यक्ति पर तेज आवाज वाले डीजे का विरोध करने के कारण हमला भी हुआ है।

याचिका में महेश विजय बेडेकर बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में 2016 में दिए गए हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है। उस फैसले में अदालत ने ध्वनि प्रदूषण नियमों के कड़ाई से पालन के लिए कई निर्देश जारी किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि धार्मिक स्थलों पर भी लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। इस मुद्दे पर अक्षय बिक्कड़ ने इस मुद्दे पर याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि अदालत के निर्देशों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक, शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई तथा शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था समेत कई उपाय शामिल थे। मगर जमीनी स्तर पर नियमों का पालन होता नहीं दिखाई देता है। प्रमुख त्योहारों से पहले आयोजकों को ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों की जानकारी देने के लिए बैठकें आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया था।

याचिका के मुताबिक, आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और साइलेंस जोन में ध्वनि स्तर की प्रभावी निगरानी अब भी एक चुनौती है। याचिकाकर्ता ने गणेशोत्सव के साथ आगामी नवरात्रि जैसे त्योहारों को देखते हुए अदालत से 2016 के निर्देशों का प्रभावी ढंग पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

HEALTH : कैंसर की दवाओं को जीएसटी से बाहर करने की सिफारिश, आयुष्मान में कीमो-इम्युनोथेरेपी का खर्च जोड़ने की सलाह

0

कैंसर के इलाज का खर्च आम मरीज की पहुंच में लाने के लिए संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने बैठक की। समिति ने कैंसर की सभी दवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर करने की बात कही। इसके अलावा महंगे इलाज को आयुष्मान भारत योजना में अधिक व्यापक रूप से शामिल करने पर जोर दिया।

संसदीय समिति ने क्या कहा?

समिति ने कीमोथेरेपी और इम्युनोथेरेपी जैसे महंगे उपचार को भी आयुष्मान के दायरे में लाने, कैंसर मरीजों के लिए अतिरिक्त उपचार राशि की सुविधा देने की बात भी कही। संसदीय समिति ने कहा कि दवाओं की कीमतों में निर्माता से मरीज तक बढ़ने वाली लागत की जांच होनी चाहिए। कहा कि जो दवा निर्माता स्तर पर कम कीमत में उपलब्ध होती है, वह मरीज तक पहुंचते-पहुंचते कई गुना महंगी हो जाती हैं। नजर रखने के लिए विशेष कोड लगाने का सुझाव भी दिया।

आयुष्मान में कैंसर के महंगे उपचार का दायरा बढ़ाने पर जोर:

स्वास्थ्य मंत्रालय को कैंसर मरीजों के लिए आयुष्मान योजना के तहत विशेष टॉपअप देने की बात कही। कीमोथेरेपी, इम्युनोथेरेपी जैसे महंगे उपचारों का पूरा खर्च इस योजना के दायरे में लाने को कहा।

BIHAR : मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार… ज्ञानेश कुमार को लेकर एकजुट हुआ विपक्ष

0

बिहार में वोटर लिस्ट की जांच और वोट चोरी के आरोपों के बीच, विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट हो रहा है। विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं, क्योंकि वे उनके व्यवहार से नाराज हैं।

नई दिल्ली : बिहार में वोटर लिस्ट की गहन जांच और वोट चोरी के आरोप के बीच विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट होता दिख रहा है। इस क्रम में विपक्ष की तरफ से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी चल रही है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इस आशय की खबर सामने आ रही है। खबर है कि विपक्ष सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सदन में महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार से नाराज बताया जा रहा है। विपक्ष बिहार में वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के साथ ही वोटों की चोरी और पक्षपात को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद परिसर में चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों के सदस्य बीजेपी और चुनाव आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ने भाजपा से यही अनुरोध क्यों नहीं किया? उन्होंने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी के साथ कांग्रेस जैसा व्यवहार क्यों नहीं कर रहे हैं? मुझे लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस संवैधानिक पद की गरिमा को कमजोर किया गया है।

वहीं, कांग्रेस सांसद वामसी गद्दाम ने कहा कि यह बहुत मजेदार है। ज्ञानेश कुमार ऐसे बात कर रहे हैं जैसे वे चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि बीजेपी का प्रतिनिधित्व कर रहे हों। कांग्रेस सांसद ने कहा कि राहुल गांधी ने कुछ बुनियादी सवाल उठाए हैं, जिसमें चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया गया है। चुनाव आयोग का काम आम आदमी और देश के आम मतदाता को यह विश्वास दिलाना है कि कोई चोरी नहीं हो रही है, कोई हेराफेरी नहीं हो रही है।

चुनाव आयोग ने दी थी सफाई
इससे पहले चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेस कर वोट चोरी के आरोपों पर सफाई दी थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना था कि आयोग सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करता है, क्योंकि हर दल का जन्म चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन से होता है। सीईसी का कहना था कि चुनाव आयोग के लिए, कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है, सभी समकक्ष हैं। चाहे किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी हो, चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पलटवार किया था। राहुल के आरोप पर उन्होंने कहा कि 7 दिन में हलफनामा देना होगा या फिर देश से माफी मांगनी होगी। उन्होंने कहा था कि मैं मीडिया के माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि अगर 7 दिन में हलफनामा नहीं मिला, तो ये सभी आरोप बेबुनियाद माने जाएंगे। हमारे मतदाताओं के बारे में यह बोलना कि वह फर्जी है, जो भी इस बात को बोल रहा है, उसे माफी मांगनी चाहिए।

NATIONAL : SIR प्रॉसेस पर उठे सवालों पर चुनाव आयोग की दो टूक- सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए

0

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने आज बुधवार को एसआईआर प्रक्रिया पर मतभेद को लेकर बयान दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद हंगामा शुरू हो गया है. इन सबके बीच चुनाव आयोग ने भी अपनी सफाई पेश की है. आयोग ने कहा कि पूरे देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अपने सभी फैसलों पर शुरू से ही एकमत था.

चुनाव आयोग ने दावा करते हुए कहा कि SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी ली गई थी. छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक एसआईआर प्रॉसेस के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी-अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. दोनों आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में 14 बार ये आपत्तियां कीं. बता दें, चुनाव आयोग के सभी बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त के पैनल मिलकर करते हैं. दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ये सभी आपत्तियां जताई थीं.

सवालों के जवाब में अधिकारियों ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने वोटर डेटाबेस को संभालने के दौरान अलग-अलग राज्यों में नाम हटाने से जुड़े फैसलों पर ध्यान दिलाया था. अधिकारियों ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को कंट्रोल करने वाला कानून और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बात पर जोर देता है कि जितना हो सके, फैसले एकमत से लिए जाने चाहिए और अगर जरूरत हो, तो ज्यादातर लोगों की राय को माना जाना चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि तीन मेंबर वाले इलेक्शन कमीशन (EC) में ही इलेक्टोरल रोल के SIR से जुड़े मामलों पर तीन में से दो इलेक्शन कमिश्नर, संधू और जोशी ने बार-बार सवाल उठाए. वहीं, मामले को तूल पकड़ता देख विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है. बता दें, विपक्षी पार्टियों ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है और दावा किया है कि इसका मकसद उन वोटर्स को टारगेट करना है जो बीजेपी और उसके सहयोगियों से जुड़े नहीं हैं.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि आज दोपहर में इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. जयराम रमेश ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर ECI की क्रेडिबिलिटी और इंटीग्रिटी को खत्म करने का आरोप लगाया. इस साल की शुरुआत में सेक्रेटरी जनरल को चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाने के लिए 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों के नए नोटिस ऑफ मोशन का जिक्र करते हुए, सीनियर कांग्रेस लीडर ने सोशल मीडिया ‘एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह 24 अप्रैल, 2026 की बात है. यह अभी भी राज्यसभा के चेयरमैन के पास पेंडिंग है. इसे स्थगित नहीं किया गया है.

इसी तरह राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पांच महीने पहले, 60+ राज्यसभा सांसद (50 चाहिए) ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए चेयरमैन सभापति को लिखा था. दो इलेक्शन कमिश्नरों ने CEC के कई कामों पर आपत्ति जताई थी, अब RS मोशन लाने का समय आ गया है.

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर लीडर सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर का बर्ताव एक नासमझ बीजेपी बूथ एजेंट जैसा है. चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर हमला करते हुए उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि जब मैं ECI में ज्ञानेश कुमार से मिला, तो उनका बर्ताव एक नासमझ बीजेपी बूथ एजेंट जैसा था. हर सवाल पर, वह बेमतलब की सफाई देकर हम पर पलटवार करते थे. बाकी दो इलेक्शन कमिश्नर लगातार सिर हिला रहे थे. BJP बूथ एजेंट जब पुलिस के आस-पास होते हैं (उन्हें पिटाई से बचाने के लिए) तो वे भी वैसा ही बर्ताव करते हैं.

अभी SIR का तीसरा चरण 16 राज्यों और दिल्ली समेत तीन केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मिजोरम, ओडिशा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, कर्नाटक, नागालैंड, झारखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र और मेघालय शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ महाभियोग लाना जरूरी है.

- Advertisement -

News of the Day