Thursday, September 17, 2026
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NATIONAL : देहरादून में भारत-नेपाल के अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक शुरू, सीमा एवं व्यापार के मुद्दे पर होगी चर्चा

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देहरादून (उत्तराखंड): भारत-नेपाल के अधिकारियों के बीच देहरादून में 14वीं संयुक्त कार्य समूह बैठक (14th Joint Working Group Meeting) शुरू हो गई है. दरअसल, दो दिवसीय यानी 20 और 21 अगस्त को अधिकारियों के बीच चार दौर की बैठक की जाएगी. ऐसे में आज पहले दौर की बैठक शुरू हो गई है, जिसमें गृह मंत्रालय के अधिकारी, आईटीबीपी, एसएसबी और सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी शामिल हुए. दरअसल, भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच पिछले साल भी नेपाल देश के पोखरों में बैठक की गई थी. इसके बाद, देहरादून में दो दिवसीय 14वीं संयुक्त कार्य समूह बैठक आयोजित की गई.

इस महत्वपूर्ण बैठक के पहले सत्र में सीमा विवाद, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने जैसे मामलों पर वार्ता चल रही है. दरअसल, सीमा निर्धारण से जुड़े पुराने अभिलेखों और मानचित्रों का अध्ययन बैठक का एक अहम हिस्सा होगा. इसमें सर्वे ऑफ इंडिया के ब्रिटिश-कालीन नक्शों की भी समीक्षा की जा सकती है. अधिकारियों का उद्देश्य इन ऐतिहासिक दस्तावेजों और वर्तमान जमीनी हालात का मिलान कर विवादित क्षेत्रों पर स्पष्ट निष्कर्ष निकालना है.

बैठक के लिए दोनों देशों के अधिकारी बुधवार रात को मसूरी रोड स्थित होटल में पहुंच गए थे. साथ ही रात्रिभोज के दौरान मुलाकात की थी. देहरादून में बैठक से पहले 14 अगस्त 2026 को लखनऊ में भारत और नेपाल की बीच हुए समन्वय सम्मेलन में दोनों देशों के सर्वे विभागों ने सीमा से जुड़ी जमीन, खेती व निर्माण के वास्तविक हालात जानने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर सहमति दी थी. प्रस्तावित सर्वे में ड्रोन से ली गई हवाई तस्वीरें और स्थल-आधारित आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण शामिल किया गया था.

लिहाजा, देहरादून में चल रही संयुक्त कार्य समूह बैठक में इन तकनीकी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है. दरअसल, भारत- नेपाल सीमा की लंबाई करीब 1,751 किलोमीटर है. जिसकी सीमा भारत के कई राज्यों से जुड़ी हुई है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत और उधमसिंह नगर जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई जिले से नेपाल की सीमाएं जुड़ी हुई हैं, जहां से पारंपरिक आवाजाही और व्यापार चलता रहा है.

ऐसे में दोनों देशों के अधिकारियों का उद्देश्य है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवादों के समाधान के दौरान स्थानीय व्यापार और आवागमन पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े. यही वजह है कि देहरादून में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच दो दिवसीय बैठक चल रही है.

NATIONAL : सिख दंगा मामले में दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, अस्पताल ने जारी किया बयान

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1984 के सिख दंगों के मामले में दोषी ठहराते हुए उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2018 में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.इसके साथ ही 12 फ़रवरी, 2025 को एक अदालत ने पूर्व कांग्रेस सांसद को दिल्ली में दो सिखों की हत्या के मामले में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. वो तिहाड़ जेल में सज़ा काट रहे थे.सफ़दरजंग अस्पताल ने एक बयान जारी कर बताया है कि 84 वर्षीय सज्जन कुमार को पुलिस सुबह क़रीब 11 बजे बेहोशी की हालत के साथ वीएमएमसी और सफ़दरजंग अस्पताल लाई थी, उन्हें तुरंत एडमिट किया गया और होश में लाने के उपाय शुरू किए गए.

“सभी ज़रूरी मेडिकल और लाइफ़-सपोर्ट उपाय करने के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका और दोपहर 12:30 बजे उनकी मौत हो गई.””उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और पार्किंसंस बीमारी थी और पहले भी वो कई बार हॉस्पिटल में भर्ती हो चुके थे.”सज्जन कुमार के निधन पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (एसजीपीसी) के एक्ज़िक्यूटिव मेंबर सुरजीत सिंह गढ़ी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा है कि इंदिरा गांधी के क़त्ल के बाद जो उन्होंने किया वो कभी भुलाया नहीं जा सकता है.उन्होंने कहा, “वो ज़ख़्म आज भी हरे हैं, आज तक उन्होंने इस घटना के लिए पछतावा नहीं किया.”

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा है कि पार्टी के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन की दुखदायी ख़बर मिली उनको श्रद्धांजली.

सज्जन कुमार कौन थे?

सज्जन कुमार कांग्रेस के नेता रहे हैं और 1970 के दशक से दिल्ली की राजनीति में सक्रिय थे. सज्जन ने सबसे पहले 1977 में दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ा और पार्षद चुने गए.

1980 में सज्जन कुमार ने लोकसभा चुनावों में चौधरी ब्रह्म प्रकाश को शिकस्त दी और पहली बार सांसद बने.

सज्जन कुमार पर 1984 में सिख दंगों में शामिल होने का आरोप लगा और उसी साल हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया. 1991 में सज्जन एक बार फिर सांसद चुने गए. लेकिन इसके बाद उन्हें संसद में घुसने के लिए 13 साल इंतज़ार करना पड़ा.

साल 2004 में उन्हें कांग्रेस ने लोकसभा का टिकट दिया. सज्जन ने बाहरी दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए.

साल 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.वरिष्ठ वकील एचएस फूलका का कहना है कि मृतक जसवंत सिंह की पत्नी ने 1985 में एक हलफ़नामे में लिखा था कि भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें

साल 1984 में 31 अक्तूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी और इसके बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे.सज्जन कुमार से जुड़ा पहला मामला दिल्ली छावनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या से जुड़ा था.दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में पांच सिखों केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी.

जगदीश कौर इस मामले में एक प्रमुख शिकायतकर्ता और चश्मदीद थीं. दंगे में उनके पति केहर सिंह और बेटे गुरप्रीत सिंह को मार डाला गया था. रघुविंदर, नरेंद्र और कुलदीप उनके और मामले के एक अन्य गवाह जगशेर सिंह के भाई थे.

पीड़ितों के वकील रहे एचएस फूलका ने बीबीसी संवाददाता अवतार सिंह को बताया था कि 1 नवंबर, 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को पश्चिमी दिल्ली में ज़िंदा जला दिया गया था.

फूलका कहते हैं, “दोनों की हत्या कर दी गई और उन्हें ज़िदा जला दिया गया. उनके घर को लूट लिया गया. जसवंत सिंह की पत्नी, बेटी और भतीजियों को भी भीड़ ने बुरी तरह पीटा. इस भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहा था.”इस मामले के रिकॉर्ड में जसवंत सिंह की बेटी पीड़ित ‘वाई’ और गवाह संख्या 11 है. रिकॉर्ड के मुताबिक़, उसने आरोप लगाया था कि शाम लगभग 4-4.30 बजे भीड़ एक बार फिर आई और उसके घर पर आगे और पीछे से हमला किया.

उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने बाहर हज़ारों लोगों की भीड़ देखी, जिनके पास ईंटें, लाठियां और लोहे की छड़ें थीं. भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया और उनके सिर पर ईंट से हमला किया गया.मृतक की पत्नी ने 6 नवंबर, 1991 को न्यायमूर्ति जेडी जैन और न्यायमूर्ति डीके अग्रवाल की समिति के समक्ष एक बयान दर्ज कराया था कि उसने बाद में एक पत्रिका में आरोपी की तस्वीर देखी थी और उस व्यक्ति की पहचान की थी जिसने भीड़ को उकसाया था.

NATIONAL : केंद्रीय सचिवों के साथ पीएम मोदी की चली 4 घंटे मैराथन बैठक, जानें सभी विभागों के साथ क्या हुई चर्चा

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पीएम मोदी और सचिवों की बैठक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं उस पर मंथन हुआ.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की बैठक के साथ करीब 4 घंटे की बैठक खत्म हो गई है. इस बैठक में सरकार की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर चर्चा हुई, जिससे आम आदमी को फायदा मिले. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं विभागों के साथ इसको लेकर भी मंथन हुआ.

बेहतर तालमेल और सही फैसले लेने के लिए उन्होंने ‘पीएम गतिशक्ति’ (PM GatiShakti) प्लेटफॉर्म का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया. पीएम मोदी ने सचिवों से कहा कि सरकारी योजनाओं का असली मकसद तभी पूरा होगा, जब उनका सीधा और सकारात्मक असर आम लोगों के जीवन पर दिखाई दे.

पीएम मोदी ने भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जब देश ब्रिटिश सत्ता से आजादी के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा. बैठक में उन्होंने सचिवों को गवर्नेंस और इंप्लीमेंटेशन पर ध्यान केंद्रित रखने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि सरकारी कार्यों, खास तौर पर जन-केंद्रित पहलों में कोई ढिलाई या देरी न हो.

पीएम मोदी ने इससे पहले अगले 10 वर्षों के लिए सुधार प्राथमिकताओं की रूपरेखा तैयार की थी. उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार की ‘सुधार एक्सप्रेस’ व्यवस्थागत बदलाव लेकर आई है और नागरिकों को महत्वपूर्ण रूप से लाभ पहुंचाया है.

वरिष्ठ अधिकारियों ने संरचनात्मक सुधारों पर अपडेट दिया. यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में रेलवे सहित कई मंत्रालयों में ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ जैसी महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जिसमें इन्हें लागू करने की समय-सीमा स्पष्ट रूप से तय की गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा तय समय-सीमा के भीतर परिणाम हासिल करने के महत्व पर जोर दिया है, जिससे समय-समय पर समीक्षा सरकार के कामकाज का एक अहम हिस्सा बन गई है.

NATIONAL : एक रजिस्ट्रेशन से कहीं भी प्रैक्टिस कर सकेंगे डॉक्टर, NMC का नया प्रस्ताव

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नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. प्रस्तावित नियमों के तहत देश के हर रजिस्टर्ड डॉक्टर को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) मिलेगा.

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. प्रस्तावित नए नियमों के तहत देश के हर रजिस्टर्ड डॉक्टर को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) दिया जाएगा. यह नंबर डॉक्टर की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगा. इसके बाद किसी एक राज्य में मेडिकल रजिस्ट्रेशन होने पर डॉक्टर को दूसरे राज्य में प्रैक्टिस शुरू करने के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही डॉक्टरों की लाइसेंस स्थिति और उनके खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा.

एक UID से देशभर में प्रैक्टिस की सुविधा
NMC के 2026 के ड्राफ्ट नियमों में डॉक्टरों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान रजिस्ट्रेशन व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है. राज्य मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद NMC का एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) डॉक्टर को UID जारी करेगा. इसके बाद डॉक्टर का नाम नेशनल मेडिकल रजिस्टर (NMR) में दर्ज किया जाएगा.

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यह UID पूरे देश में डॉक्टर की पहचान के तौर पर इस्तेमाल होगा. इससे डॉक्टर को किसी दूसरे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में काम करने के लिए अलग लाइसेंस प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

लाइसेंस 5 साल के लिए होगा वैलिड
प्रस्ताव के अनुसार डॉक्टर का प्रैक्टिस लाइसेंस पांच साल तक मान्य रहेगा. लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद तीन महीने के भीतर उसको अपडेट कराना जरूरी होगा. तय समय में रिन्यू नहीं कराने पर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन निष्क्रिय किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर को प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं होगी और इसकी जानकारी NMR में भी अपडेट की जाएगी.

कार्रवाई का रिकॉर्ड भी राष्ट्रीय स्तर पर दिखेगा
नए सिस्टम में डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी एक डिजिटल रिकॉर्ड में रखी जाएगी. अगर किसी राज्य की मेडिकल काउंसिल डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करती है तो उसकी जानकारी NMR में भी दर्ज होगी. साथ ही संबंधित डॉक्टर के मूल राज्य के मेडिकल रजिस्टर में भी यह रिकॉर्ड अपडेट हो जाएगा. मरीज और अस्पताल भी उपलब्ध जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे.

एक पोर्टल से होगा रजिस्ट्रेशन
इस व्यवस्था के लिए यूनिफाइड पैन इंडिया रजिस्ट्रेशन पोर्टल तैयार करने का प्रस्ताव है. जिन राज्यों में पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा है, उन्हें भी इस राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा.

पुराने डॉक्टरों को भी मिलेगा UID
जिन डॉक्टरों के पास अभी UID नहीं है उनके लिए एक विशेष अपडेट अभियान चलाया जा सकता है. वो EMRB पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करके UID हासिल कर सकेंगे. इसके लिए EMRB की ओर से कोई फीस नहीं लिया जाएगा.

NATIONAL : भारत में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बुलडोजर एक्शन, इस्लामाबाद की कार्रवाई का दिल्ली में जवाब

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दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर भारतीय अधिकारियों ने एक्शन लिया है. परिसर के बाहर बने अनधिकृत ढांचे और बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के बाहर भी सुरक्षा अवरोध हटाए गए थे.
भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसी के अंदाज में जवाब दिया है. नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बने अवैध ढांचे और अतिक्रमण को हटा दिया है. ये निर्माण वीजा सेक्शन के पास तय परिसर सीमा से बाहर किए गए थे. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के बाहर से भी सुरक्षा बैरिकेड्स हटाए जाने की खबर सामने आई थी.

पहलगाम हमले के बाद बढ़ा था तनाव
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद तनाव और बढ़ गया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद भारत ने आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव भी देखने को मिला था.

पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बरकरार
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है.
भारत लगातार पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो पाए हैं.
पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था.
अभियान के दौरान भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था.
पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक सैन्य टकराव चला था. एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी दोनों देशों के रिश्तों में कोई खास सुधार नहीं आया है.

इसी बीच भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया. श्रीनगर यात्रा के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक अहम हिस्सा बताया. गोर ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के प्रयासों की भी तारीफ की. उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान की ओर से नाराजगी जताई गई.

सर्जियो गोर ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने नागरिकों के लिए जारी यात्रा सलाह की समीक्षा कर सकता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल इस बारे में कोई बड़ा ऐलान नहीं किया जा रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा. गोर के मुताबिक, केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर बेहद खूबसूरत इलाका है और बेहतर हालात में ज्यादा अमेरिकी पर्यटक यहां आ सकते हैं.

पाकिस्तान ने अमेरिकी अधिकारी को किया तलब
सर्जियो गोर के बयान के बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास की वरिष्ठ अधिकारी नताली बेकर को तलब किया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर गोर की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और उनके बयान को गलत बताया.

WORLD : इस अफ्रीकी देश में सोने की खदान धंसी, 100 से अधिक लोगों की मौ’त, बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा (Video)

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कैमरून सीमा के पास पश्चिमी मध्य अफ्रीकी गणराज्य (सीएआर) के जाम्बोई में सोने की खदान के क्षेत्र में भूस्खलन से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गयी है। बीबीसी ने एक स्थानीय अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी।

बांगुईः कैमरून सीमा के पास पश्चिमी मध्य अफ्रीकी गणराज्य (सीएआर) के जाम्बोई में सोने की खदान के क्षेत्र में भूस्खलन से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। बीबीसी ने एक स्थानीय अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी।

कैमरून के सीमावर्ती शहर गरुआ-बुलई के मेयर अदामो अब्दोन ने बताया कि हादसा मंगलवार दोपहर हुआ। राहत और बचाव अभियान जारी है तथा मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। अब्दोन ने कहा कि अब तक मलबे से 107 शव निकाले जा चुके हैं और अभी भी कई लोग मलबे में दबे हुए हैं। हादसे के कारण का तत्काल पता नहीं चल सका है।

कैमरून के पूर्वी क्षेत्र के गवर्नर ग्रेगोयर म्वोंगो ने सरकारी मीडिया को बताया कि मृतकों में कम से कम तीन कैमरून के नागरिक हैं। उनके शव अंतिम संस्कार के लिए स्वदेश भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जाम्बोई में घायल हुए लोगों के उपचार की भी व्यवस्था की जा रही है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, मध्य अफ्रीकी गणराज्य के अधिकारियों ने भूस्खलन के कारणों की जांच शुरू कर दी है। इस क्षेत्र में खनिज निकालने का श्रम-प्रधान पारंपरिक तरीका कुटीर या हस्तशिल्प खनन बड़ी संख्या में परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। यहां काम करने की परिस्थितियां खराब हैं और खनिकों को स्वास्थ्य तथा पर्यावरण संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ता है। खदानों का धंसना और भूस्खलन इस क्षेत्र में असामान्य नहीं है। आमतौर पर खनन के बाद गड्ढों को ठीक से बंद नहीं किया जाता और भारी बारिश के कारण मिट्टी कमजोर पड़ जाती है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

WORLD : भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा से पहले बवाल! अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता संस्था ने की RSS नेताओं पर बैन लगाने की मांग

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अमेरिकी कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के अधिकारियों ने वॉशिंगटन से आग्रह किया है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करे। साथ ही कहा है कि संगठन के नेताओं को राजनयिक शिष्टाचार न दिखाए या उनके साथ उच्च-स्तरीय बैठकें न करे

मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली एक अमेरिकी सलाहकार संस्था ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संस्था ने अमरिकी सरकार से कहा है कि वह इसके नेताओं को राजनयिक शिष्टाचार न दिखाए और न ही उनके साथ उच्च-स्तरीय बैठकें करे। US कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के अधिकारियों की ये टिप्पणियां RSS प्रमुख मोहन भागवत की 29 अगस्त को न्यूयॉर्क यात्रा से पहले आई हैं।

भागवत की यह यात्रा ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स’ के लिए हो रही है। US कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने एक बयान में कहा, “RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। अमेरिकी सरकार को RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए।”

USCIRF ने X पर एक पोस्ट में कमिश्नर जीन मिल्स की बात शेयर की है। मिल्स ने बताया कि USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को RSS का सदस्य बताया था। RSS एक मुख्य संगठन है, जिसके सहयोगी समूहों पर ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगे हैं।

USCIRF की तरफ से X पोस्ट में लिखा गया है, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य हैं। यह भारत का एक ऐसा संगठन है जिसके कई सहयोगी समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका का दौरा करने वाले हैं।”

मिल्स ने अपनी बात में यह भी कहा कि RSS नेताओं को न तो हाई-लेवल मीटिंग्स में शामिल किया जाना चाहिए और न ही उन्हें डिप्लोमैटिक शिष्टाचार (डिप्लोमैटिक कर्टसी) मिलना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों।

मिल्स ने कहा, “भले ही RSS नेता भारत सरकार से जुड़े हों, फिर भी उन्हें हाई-लेवल मीटिंग्स या डिप्लोमैटिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं मिलना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए जो FoRB (धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता) के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार पाए गए हैं।”

इसके अलावा ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ नाम के एडवोकेसी ग्रुप ने भी भागवत के दौरे की आलोचना की है। ग्रुप का कहना है कि इस दौरे को RSS नेटवर्क से जुड़े मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा के आरोपों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस एडवोकेसी ग्रुप ने X पर एक पोस्ट में कहा, “‘एकता का जश्न धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता।” ये ताजा बयान मार्च में जारी USCIRF की सालाना रिपोर्ट के बाद आई हैं।

इस रिपोर्ट में कमीशन ने धार्मिक आजादी के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की थी। साथ ही RSS तथा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ लोगों और संस्थाओं पर ‘टारगेटेड प्रतिबंध’ लगाने का समर्थन किया था। भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने USCIRF पर आरोप लगाया कि उसने संदिग्ध स्रोतों और विचारधारा पर आधारित नैरेटिव के आधार पर देश की तोड़-मरोड़कर और चुनिंदा तस्वीर पेश की है।

NATIONAL : CAQM का सख्त आदेश: 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियों का होगा रजिस्ट्रेशन

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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक सख्त फैसला लिया है। आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में 3,500 किलोग्राम से कम वजन वाले नए हल्के मालवाहक वाहनों (LGVs) के लिए पेट्रोल,…

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक सख्त फैसला लिया है। आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में 3,500 किलोग्राम से कम वजन वाले नए हल्के मालवाहक वाहनों (LGVs) के लिए पेट्रोल, डीजल और सीएनजी- तीनों ईंधन से चलने वाले मॉडलों के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। 1 जनवरी 2027 के बाद राजधानी में सिर्फ इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।

नए निर्देश के तहत, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में 3,500 किलोग्राम से कम वज़न वाले (N1 कैटेगरी) किसी भी नए CNG, डीज़ल या पेट्रोल लाइट गुड्स व्हीकल (LGV) का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। ये पाबंदियां 1 जुलाई 2027 से NCR के ज़िलों – गुरुग्राम, फ़रीदाबाद, सोनीपत, ग़ाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर – में भी लागू होंगी। N1 का मतलब है सामान ढोने वाला मोटर वाहन जिसका कुल वज़न 3,500 किलोग्राम से ज़्यादा न हो

बुधवार को CAQM के चेयरमैन राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में, कमीशन ने दिल्ली-NCR में साफ़-सुथरे तरीके से चलने वाले LGV (लाइट कमर्शियल व्हीकल) के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने की मंज़ूरी दी। यह कदम दिल्ली-NCR में PM2.5 उत्सर्जन में गाड़ियों से होने वाले बड़े योगदान और LGV से होने वाले बहुत ज़्यादा पार्टिकुलेट उत्सर्जन को देखते हुए उठाया गया है।

CAQM ने N2 LGV के रजिस्ट्रेशन पर भी पाबंदियां लगाने की घोषणा की, N2 LGV उन गाड़ियों को कहते हैं जिनका अधिकतम वज़न 3,500 kg से 7,500 kg के बीच होता है। 1 जनवरी 2028 से दिल्ली में सिर्फ़ इलेक्ट्रिक N2 LGV के रजिस्ट्रेशन की इजाज़त होगी। यह पाबंदी गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में 1 जुलाई 2028 से और बाकी NCR में 1 जनवरी 2029 से लागू होगी।

यह कदम दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के बाद उठाया गया है। इस पॉलिसी के तहत, 30 जुलाई 2026 को यह नियम बनाया गया था कि 1 जनवरी 2027 से राष्ट्रीय राजधानी में नए रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ़ इलेक्ट्रिक N1 कैटेगरी के माल ढोने वाले वाहनों को ही मंज़ूरी दी जाएगी। CAQM का यह निर्देश इस बदलाव की योजना को NCR के दूसरे अहम ज़िलों तक भी बढ़ाता है। इसका मकसद कमर्शियल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और पूरे इलाके में हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

NATIONAL : अब दोबारा नहीं लौटेगा Cancer, ‘कीट्रूडा’ संग mRNA वैक्सीन का कमाल, ट्यूमर को फैलने से रोकने में मिली बड़ी कामयाबी

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कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। मॉडर्ना और मर्क की जॉइंट पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन ने स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप यानी हाई-रिस्क मेलेनोमा के लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल (Phase 3) में बेहद सकारात्मक और…

नई दिल्ली : कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। मॉडर्ना और मर्क की जॉइंट पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन ने स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप यानी हाई-रिस्क मेलेनोमा के लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल (Phase 3) में बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम दिए हैं।

इस तकनीक में कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों को दोबारा कैंसर होने या ट्यूमर के शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोकने के लिए यह स्पेशल वैक्सीन दी जाती है। इस वैक्सीन को सर्जरी के बाद मेलेनोमा के दोबारा होने या फैलने के जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है। इस वैक्सीन का परीक्षण मर्क की व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (पेम्ब्रोलिज़ुमैब) के साथ मिलाकर किया गया।

कंपनियों ने बताया कि इस इलाज ने कैंसर के दोबारा होने के जोखिम को कम करने का अपना मुख्य लक्ष्य हासिल किया और साथ ही मेलेनोमा के शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने के जोखिम को कम करने का दूसरा लक्ष्य भी पूरा किया। उम्मीद है कि इसके विस्तृत नतीजे जल्द ही होने वाली एक मेडिकल मीटिंग में पेश किए जाएंगे।

ये नतीजे mRNA कैंसर वैक्सीन के उभरते हुए क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं। इन वैक्सीन को मरीज़ के इम्यून सिस्टम को इस तरह प्रशिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि वे मरीज़ के ट्यूमर में पाए जाने वाले म्यूटेशन के आधार पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकें और उन पर हमला कर सकें।

वहीं संक्रमण को रोकने के लिए बनाई जाने वाली पारंपरिक वैक्सीन के विपरीत, पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन खास तौर पर किसी एक मरीज़ के लिए विकसित की जाती हैं। सर्जरी के ज़रिए ट्यूमर को हटाने के बाद, उसके जेनेटिक म्यूटेशन का विश्लेषण करके ऐसे टारगेट की पहचान की जा सकती है जो इम्यून सिस्टम को बची हुई कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में मदद कर सकें।

मॉडर्ना की वैक्सीन mRNA तकनीक का इस्तेमाल करके इम्यून सिस्टम को ट्यूमर-स्पेसिफिक म्यूटेशन से जुड़ी जानकारी देती है। इसका मकसद एक ऐसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करना है जो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने या फैलने से पहले ही उन्हें पहचानकर नष्ट कर सके।

फेज़ 3 ट्रायल में हाई-रिस्क स्टेज IIB से IV वाले मेलेनोमा के 1,137 मरीज़ों को शामिल किया गया जिनके ट्यूमर सर्जरी के ज़रिए हटा दिए गए थे। प्रतिभागियों को रैंडम तरीके से दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप को लगभग एक साल तक कीट्रूडा के साथ पर्सनलाइज़्ड mRNA वैक्सीन दी गई और दूसरे ग्रुप को सिर्फ़ कीट्रूडा दी गई।

बता दें कि मॉडर्ना के प्रेसिडेंट स्टीफन होग ने कहा कि कंपनियां पहले से ही रेगुलेटर्स के साथ इस इलाज पर बातचीत कर रही हैं। चूंकि इस थेरेपी को ‘ब्रेकथ्रू थेरेपी’ का दर्जा मिला है इसलिए कंपनियों का मानना ​​है कि रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने पर यह अगले साल तक उपलब्ध हो सकती है।

मॉडर्ना और मर्क के ट्रायल की सफलता का असर मेलेनोमा से कहीं आगे तक हो सकता है। अगर यह तरीका सुरक्षित और असरदार साबित होता रहा तो पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन ‘प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी’ का एक अहम हिस्सा बन सकती हैं।

रिसर्चर अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या कई तरह के सॉलिड ट्यूमर के लिए ऐसी ही वैक्सीन बनाई जा सकती हैं। इसका बड़ा मकसद कैंसर के इलाज को ऐसी थेरेपी की ओर ले जाना है जो हर मरीज़ के ट्यूमर की खास जेनेटिक विशेषताओं के हिसाब से तैयार की गई हों।

मॉडर्ना के लिए भी ये नतीजे एक अहम डेवलपमेंट हैं क्योंकि कंपनी COVID-19 वैक्सीन से आगे अपनी mRNA टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ाना चाहती है। मर्क के लिए यह कॉम्बिनेशन कैंसर के इलाज में ‘कीट्रूडा’ (Keytruda) की भूमिका को बढ़ा सकता है क्योंकि इस दशक के आखिर में यह दवा पेटेंट से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने वाली है।

हालांकि मैन्युफैक्चरिंग, बड़े पैमाने पर उत्पादन (स्केलेबिलिटी), कीमत और लंबे समय तक जीवित रहने के फायदों को लेकर अभी भी सवाल हैं लेकिन late-stage के सकारात्मक नतीजे पर्सनलाइज़्ड कैंसर ट्रीटमेंट और mRNA कैंसर वैक्सीन रिसर्च की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकते हैं।

ENTERTAINMENT : Operation Sindoor’ देख बौखलाए पाकिस्तानी ऑफिसर, रात 2 बजे पोस्ट कर कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता का दावा झूठा’

डिस्कवरी चैनल की नई डॉक्यू-सीरीज ‘Declassified: Operation Sindoor’ में दिखाया गया है कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को कैसे प्लान किया और अंजाम दिया, जिसे देख पाकिस्तानी सशस्त्र बल के प्रवक्ता ने रात के दो बजे किया पोस्ट।

ऐसा कम ही होता है कि किसी डॉक्यूमेंट्री सीरीज की इतनी चर्चा हो कि दूसरे देश की सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को उस पर प्रतिक्रिया देनी पड़े, और वो भी आधी रात को। लेकिन डिस्कवरी चैनल की नई लिमिटेड सीरीज डॉक्यूमेंट्री ‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ ने पिछले हफ्ते ऐसा कर दिखाया। रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद, पाकिस्तान सशस्त्र बलों के प्रवक्ता, लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने सोशल मीडिया पर रात 2 बजे इसे गलत बताने की कोशिश की।

किस बारे में है ‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’?

‘डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ दो हिस्सों वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज है, जो 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर डिस्कवरी चैनल पर शुरू हुई। यह सीरीज भारतीय सशस्त्र बलों के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की योजना और उसे अंजाम देने की कार्यवाई को दिखाती है। बता दें कि यह ऑपरेशन मई 2025 में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के बुनियादी ढांचों पर मिसाइल हमलों के बारे में है। इस डॉक्यूमेंट्री के 45-45 मिनट के दो एपिसोड हैं, ‘द ग्रीनलाइट’ और ‘अटैक एंड काउंटरस्ट्राइक’। सीरीज में बताया गया है: “अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत के सैन्य नेतृत्व ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। यह 88 घंटे का सैन्य ऑपरेशन 7 मई को शुरू हुआ था, जिसमें ऑपरेशन में शामिल लोगों और एक्सपर्ट्स के बयान शामिल हैं।”

इसमें भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों, जैसे सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आदि के बयान शामिल हैं। सीरीज में 88 घंटे चली इस जंग के दौरान क्या हुआ, इसकी पूरी कहानी बताई गई है। इसमें भारत के वॉर रूम और मोर्चे पर मौजूद लोगों के अनुभवों के जरिए भारत-पाकिस्तान के बीच हुई इस सैन्य कार्रवाई को समझाया गया है।

पाकिस्तानी सेना की हड़बड़ाहट भरी प्रतिक्रिया
डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के कुछ दिनों बाद, पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने X (पहले ट्विटर) पर इसे ‘कॉमेडी और ट्रेजेडी’ बताया। बीते मंगलवार को सुबह 2 बजे शेयर की गई एक पोस्ट में शरीफ ने लिखा, “चुनिंदा तरीके से एडिट किए गए इंटरव्यू, इमोशनल नैरेशन और बॉलीवुड फिल्मों जैसे सीन बनाकर असल तथ्यों को बदलने और ऑपरेशन के नतीजे को नए सिरे से पेश करने की कोशिश की गई है। साफ है कि डॉक्यूमेंट्री में बताई गई बातों में बुनियादी विरोधाभास हैं, जो घटनाओं का ऐसा वर्जन बनाने की देर से की गई कोशिश को उजागर करते हैं, जो देश के लोगों को पसंद आए।”

पाकिस्तानी जनरल ने आरोप लगाया कि डॉक्यूमेंट्री, और उसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की 100% सफलता का दावा, एक झूठ है। उन्होंने आगे कहा, “भारत ने सच को सार्वजनिक नहीं किया है। उसने एक प्रोपेगैंडा वीडियो तैयार किया है ताकि सेना की एक बड़ी गलती को सफल कोशिश के तौर पर दिखाया जा सके।” सैटेलाइट तस्वीरों के रूप में भारतीय प्रशासन के सबूतों के बावजूद, पाकिस्तान लंबे समय से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भारत के दावे का खंडन करता रहा है।

कहां देखें ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’?

‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित हुई थी और अब इसे डिस्कवरी+ ऐप पर देखा जा सकता है। इसे सब्सक्रिप्शन के बाद Amazon Prime Video के डिस्कवरी बंडल के जरिए भी देखा जा सकता है।

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