Sunday, November 1, 2026
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20 बागी सांसदों ने मांगा चार हफ्ते का और समय, लोकसभा की सदस्यता रद्द करने के नोटिस का देना है जवाब

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टीएमसी छोड़कर एनसीपीआ के साथ गए 20 लोकसभा सांसदों ने सदस्यता रद्द करने के नोटिस का जवाब देने के लिए चार हफ्ते का और समय मांगा है। सांसदों का कहना है कि जरूरी दस्तावेज जुटाने में अभी समय लग रहा है। आखिर इस मामले में आगे क्या होगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ जाने वाले 20 लोकसभा सांसदों ने सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़े नोटिस का जवाब देने के लिए चार हफ्ते का और समय मांगा है। उन्हें पहले 22 सितंबर तक जवाब देना था।

एनसीपीआई की संसदीय अध्यक्ष काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 20 सांसद अपने जवाब के लिए जरूरी सभी दस्तावेज अभी एकत्र नहीं कर पाए हैं। इसी वजह से लोकसभा सचिवालय से चार सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत मांगी गई है।

26 अगस्त को जारी हुआ था नोटिस
लोकसभा सचिवालय ने 26 अगस्त को इन सांसदों को नोटिस भेजकर टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल सदस्यता रद्द करने की याचिकाओं पर जवाब मांगा था। शुरुआत में सांसदों को जवाब के लिए सात दिन का समय दिया गया था। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने यह समय बढ़ाकर 22 सितंबर तक कर दिया था।

अभिषेक बनर्जी ने जून में इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई करते हुए सांसदों को नोटिस जारी किया और स्पीकर के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही थी।

जून में TMC छोड़कर NCPI के साथ गए थे सांसद
20 सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद जून में पार्टी छोड़ दी थी और एनसीपीआई के साथ जाने की घोषणा की थी। उन्होंने लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग भी की है। हालांकि, टीएमसी का कहना है कि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए थे और दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ जाने के कारण उन पर दलबदल कानून लागू होता है। वहीं, बागी सांसदों का पक्ष रहा है कि उनका एनसीपीआई के साथ जाना वैध विलय है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद चल रहा है।

TMC ने साधा निशाना
अतिरिक्त समय मांगने पर टीएमसी नेता कुनाल घोष ने बागी सांसदों पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सांसदों ने अपना राजनीतिक रास्ता तय कर लिया है तो नोटिस का जवाब देने में इतना समय क्यों लग रहा है। वहीं, काकोली घोष दस्तीदार ने इस बयान पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस मामले का फैसला अदालत और लोकसभा को करना है।

बागी सांसदों के BJP में जाने की चर्चा
इस बीच 20 सांसदों के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें जारी हैं। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, दूसरे असंतुष्ट सांसदों ने इस दावे को खारिज किया था और भाजपा ने भी इससे दूरी बनाई थी। फिलहाल सदस्यता रद्द करने की कार्यवाही में अगला कदम इन सांसदों के जवाब और उसके बाद लोकसभा स्तर पर होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

HEALTH : मोबाइल की लत और जंक फूड से बच्चियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या, एम्स के अध्ययन में कई और खुलासे

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मोबाइल फोन पर घंटों बिताना, जंक फूड की आदत और शारीरिक गतिविधि कम होना किशोरियों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इसका असर हार्मोन पर भी दिख रहा है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) इसी से जुड़ी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रहा है।

एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों ने 4000 स्कूली बच्चियों पर अध्ययन शुरू किया है। इसकी शुरुआती रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसमें पता चला है कि हर 100 में से करीब 3 से 8 किशोरियों में पीसीओएस की समस्या है। वयस्क महिलाओं में यह आंकड़ा करीब 5 से 18 फीसदी तक मिला।

एम्स की पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. रजनी शर्मा के मुताबिक, बदलती जीवनशैली से किशोरियों में हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ रहीं हैं। ज्यादा कैलोरी वाला भोजन, मीठे और प्रॉसेस्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की गड़बड़ी आने वाले दिनों में इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।

मोबाइल और जंक फूड के साथ कम हो रही शारीरिक गतिविधि
एम्स की एनाटॉमी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. रीमा दादा ने बताया कि पीसीओएस समस्या को केवल किसी एक कारण से नहीं जोड़ा जा सकता। आनुवंशिक कारणों के साथ बचपन की परिस्थितियां, हार्मोन, खानपान और जीवनशैली भी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बचाव का सबसे अच्छा तरीका अनियंत्रित स्क्रीन टाइम पर रोक लगाना, हेल्दी भोजन लेना और नियमित योग करना है। डॉ. रीमा के अनुसार, योग से अनियमित माहवारी जैसी समस्या को भी रोका जा सकता है।

BUSINESS : साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट वेज है या नॉनवेज, अब पता चलेगा, पैकेट पर लगेगा लाल-हरा निशान

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सरकार ने ग्राहकों के हक के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब साबुन, शैंपू, कॉस्मेटिक्स या खाने का पैकेट खरीदते ही डॉट देखकर पता चल जाएगा कि प्रोडक्ट शाकाहारी है या मांसाहारी. इस नए नियम के बारे में जानें.

अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक्स खरीदते समय ग्राहकों को यह पता लगाना आसान होगा कि प्रोडक्ट वेज है या नॉनवेज. सरकार ने पैकेज्ड सामान की पैकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियम के तहत साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और दूसरे कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ के पैकेट पर यह बताना जरूरी होगा कि प्रोडक्ट किस मूल का है.

नए नियम में इसके लिए अलग-अलग रंग के निशान तय किए गए हैं. अगर किसी प्रोडक्ट का मूल नॉनवेज है तो उसके पैकेट के मुख्य हिस्से में सबसे ऊपर लाल या भूरे रंग का डॉट लगाना होगा, वहीं अगर प्रोडक्ट वेज मूल का है तो पैकेट पर हरे रंग का डॉट लगाना होगा.

इसका मतलब यह हुआ कि ग्राहक को प्रोडक्ट के बारे में जानकारी लेने के लिए पैकेट पर लिखी लंबी जानकारी पढ़ने की जरूरत नहीं होगी. रंग के निशान से उसे आसानी से पता चल सकेगा कि प्रोडक्ट वेज है या नॉनवेज.

किन प्रोडक्ट्स पर होगा असर?

नए नियम का असर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई सामानों पर पड़ेगा. इनमें साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और दूसरी टॉयलेटरीज़ शामिल हैं.

ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

अभी तक कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ पर वेज या नॉनवेज मूल को लेकर ऐसी स्पष्ट पहचान की जरूरत नहीं थी. ऐसे में कई बार ग्राहक के लिए यह समझना आसान नहीं होता था कि प्रोडक्ट में इस्तेमाल सामग्री किस मूल की है. अब नए नियम के बाद पैकेट पर दिया गया हरा या लाल- भूरा डॉट ग्राहक को यह जानकारी जल्दी देने का काम करेगा. यानी आने वाले समय में साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट या कॉस्मेटिक्स खरीदते वक्त सिर्फ कीमत और ब्रांड ही नहीं बल्कि पैकेट पर लगा वेज-नॉनवेज निशान भी देखा जा सकेगा.

कब से लागू होगा नियम?

सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, यह बदलाव गजट में प्रकाशित होने की तारीख से ही लागू हो चुका है. यानी साफ है अब पैकेज्ड कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ की लेबलिंग में वेज और नॉनवेज की पहचान को लेकर एक साफ नियम सामने आ गया है.

NATIONAL : नंदीग्राम में कांग्रेस कैंडिडेट कत्ल के केस में गिरफ्तार, चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं? क्या होगा असर

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पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव को लेकर माहौल गरमा गया है. इस सीट पर हालात ऐसे हैं कि कोलकाता से दिल्ली तक हलचल तेज है. देश भर की नजरें अब इस सीट पर हैं. फिलहाल नंदीग्राम सीट से टीएमसी की कैंडिडेट रहीं संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस कैंडिडेट मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया. इस घोषणा के कुछ देर बाद ही मिलन प्रधान को अरेस्ट कर लिया गया. अब सवाल है कि 6 अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव पर इसका क्या असर होगा? आइए जानते हैं…

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार यदि किसी उम्मीदवार को अरेस्ट कर लिया जाता है, तब भी वह चुनाव में बना रहेगा. उसकी उम्मीदवारी रद्द नहीं होगी. ऐसी स्थिति तभी बनती है, जब उम्मीदवार को किसी मामले में दोषी ठहराकर दो साल या उससे अधिक की सजा सुना दी जाए. यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर महज गिरफ्तारी के आधार पर किसी कैंडिडेट को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता. नियम के मुताबिक सिर्फ गिरफ्तारी या हिरासत में होने मात्र से कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं होता.

जेल से भी हो सकता है चुनाव प्रचार, लड़ने पर रोक नहीं
नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार जेल से भी नामांकन दाखिल कर सकता है या चुनाव लड़ सकता है. इस दौरान वह वोट डालने के लिए बाहर नहीं आ सकता, लेकिन समर्थकों के माध्यम से चुनाव प्रचार करा सकता है. यदि किसी उम्मीदवार को किसी मामले में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा हो जाती है, तब उसकी उम्मीदवारी या सदस्यता समाप्त होती है. यदि नामांकन से पहले ही ऐसी सजा हो जाती है तो फिर उम्मीदवारी संभव ही नहीं है. लेकिन जैसी स्थिति कांग्रेस कैंडिडेट की है, उन्हें चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता. यही नहीं यदि वह विधायक चुने जाते हैं तो वह सामान्य कामकाज भी करते रहेंगे.

विधायक बनने के बाद भी सजा मिली तो चली जाएगी सदस्यता
यदि इस बीच में उन्हें भी दो साल या उससे अधिक की सजा सुना दी जाती है तो फिर सदस्यता चली जाएगी. गिरफ्तार उम्मीदवार जेल से ही कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जमानत के लिए आवेदन कर सकता है. इस तरह गिरफ्तारी या पुलिस हिरासत में होने से मिलन प्रधान की उम्मीदवारी रद्द नहीं होगी. वह जेल में रहे तो भी 6 अक्तूबर के चुनाव में उनकी उम्मीदवारी कायम रहेगी. इसके अलावा यदि बेल मिल गई तो वह सामान्य उम्मीदवार की तरह प्रचार भी कर सकेंगे.

WORLD : क्षेत्रीय शांति के खिलाफ है इस तरह की आक्रामकता, अफगानिस्तान में PAK के हवाई हमलों की भारत ने की निंदा

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अफगानिस्तान के इलाकों में पाकिस्तान के हवाई हमलों की भारत ने कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत ने कहा है कि एक संप्रभु देश के खिलाफ ‘इस तरह की आक्रामक कार्रवाई’ क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरे में डालने वाली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एक सवाल के जवाब में यह बयान दिया। एमईए प्रवक्ता ने कहा, ‘हम पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों और अफगानिस्तान के कुनार तथा पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। इन हवाई हमलों में कई नागरिक मारे गए हैं।’

कुनार और पक्तिका प्रांतों में किए हमले
उन्होंने कहा, ‘हम पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों, खासकर अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में की गई हवाई बमबारी की कड़ी निंदा करते हैं। इन हवाई हमलों में कई आम नागरिक मारे गए हैं।’

हमलों में 2 लोगों की हुई मौत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘एक संप्रभु पड़ोसी देश के खिलाफ आक्रामकता की ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के खिलाफ हैं। इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा प्रभावित होती है और यह पाकिस्तान की ओर से आक्रामकता का एक और उदाहरण है।’उन्होंने हमलों में लोगों की मौत पर संवेदना जताते हुए कहा कि भारत को उम्मीद है कि घायल हुए लोग जल्द और पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।

आत्मघाती हमलावरों समेत 28 आतंकी मारे गए
पाकिस्तान ने सोमवार को कहा कि उसके सुरक्षा बलों ने अफगानिस्तान के साथ लगी सीमा वाले क्षेत्र में आतंकवादियों के शिविरों और ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें कई आत्मघाती हमलावरों समेत 28 आतंकवादी मारे गए। अफगान तालिबान सरकार ने सोमवार को कहा कि उसके पूर्वी प्रांतों कुनार और पक्तिका में पाकिस्तानी हवाई हमलों में तीन आम नागरिक मारे गए और चार अन्य घायल हो गए। एक्सपर्ट का मानना है कि पाकिस्तान ने ये हमले इसलिए किए हैं ताकि वह सऊदी अरब को बता सके कि वह अपने अंदरूनी मामलों में घिरा हुआ है, इसलिए वह किसी और मोर्चे पर नहीं उलझ सकता।

NATIONAL : जयशंकर का बड़ा संदेश: CELAC देशों के साथ रिश्तों को नई रफ्तार देगा भारत ,अब निवेश और तकनीक पर फोकस

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई लेवल वीक 2026 के दौरान न्यूयॉर्क में भारत-CELAC विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और लैटिन अमेरिकी-कैरेबियाई देशों के बीच साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है.

जयशंकर का बड़ा संदेश: CELAC देशों के साथ रिश्तों को नई रफ्तार देगा भारत, अब निवेश और तकनीक पर फोकसजयशंकर ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष से भारत-CELAC वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को और व्यापक बनाया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई लेवल वीक 2026 के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित भारत-CELAC विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ संकेत दिया कि भारत अब लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत और CELAC के बीच सालाना व्यापार 50 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाएं इससे कहीं अधिक बड़ी हैं.

बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत CELAC (कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स) के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने CELAC देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारत में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, जैसे रायसीना डायलॉग, एआई इम्पैक्ट समिट और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी के लिए आभार जताया.

जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उभरकर सामने आया है. देश की जीडीपी दोगुने से अधिक बढ़ी है, विकास दर मजबूत बनी हुई है और भारत के पास बड़ा मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता, डिजिटल बुनियादी ढांचा तथा तेजी से बढ़ता बाजार है.

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उन्होंने कहा कि यही ताकत भारत को वैश्विक विकास में अधिक योगदान देने और साझेदार देशों की मदद करने में सक्षम बनाती है.

विदेश मंत्री ने भारत की ओर से CELAC क्षेत्र में किए गए सहयोग का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कैरेबियाई देशों में आजीविका से जुड़े प्रोजेक्ट्स, हरिकेन मेलिसा से प्रभावित वेनेजुएला को भेजे गए फील्ड अस्पताल और लैटिन अमेरिकी देशों को उपलब्ध कराई गई दवाएं भारत की उस सोच को दर्शाती हैं, जिसके तहत जरूरतमंद देशों के साथ विकास और मानवीय सहयोग साझा किया जाता है.


भारत और CELAC के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं. भारत तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, कुशल मानव संसाधन, डिजिटल क्षमताओं और विशाल बाजार की ताकत लेकर आता है, जबकि CELAC देशों के पास महत्वपूर्ण खनिज, टिकाऊ ऊर्जा संसाधन, कृषि उत्पाद, खाद्य संसाधन और अन्य प्राकृतिक संपदाएं हैं.

उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों का बढ़ता मध्यम वर्ग भी सहयोग की नई संभावनाएं पैदा कर रहा है. उन्होंने व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क, बेहतर कनेक्टिविटी और अधिक बाजार पहुंच की दिशा में काम करने की जरूरत है.

जयशंकर ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष से भारत-CELAC वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को और व्यापक बनाया जा सकता है, ताकि दोनों पक्षों के संबंधों के विभिन्न आयामों को एक मंच पर लाया जा सके.

चिली, पेरू और मर्कोसुर के साथ प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत चिली के साथ प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA), पेरू के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और मर्कोसुर के साथ प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के विस्तार के जरिए क्षेत्र के साथ आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत ऐसे ढांचे तैयार करना चाहता है जो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हों और जिनमें सभी देशों की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया जाए. जयशंकर ने यह भी कहा कि विकास सहयोग भारत की महत्वपूर्ण ताकत है और CELAC देशों के साथ कई कारोबारी और विकास संबंधी परियोजनाएं पहले से चल रही हैं.

उन्होंने डिजिटल क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया. उनके अनुसार, मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं.

NATIONAL : गृह मंत्री का संकल्प: एक ग्राम ड्रग भी दुनिया से हमारे देश में नहीं आने देंगे, न ही यहां से दुनिया में जाएगा

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि हमारा साझा दायित्व और संकल्प होना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों को खोखला करने वाली नशे की इस समस्या को हम समाप्त कर दें। हमारा संकल्प हो कि न एक ग्राम ड्रग हम दुनिया से देश में आने देंगे और न ही एक भी ग्राम ड्रग हमारे देश से दुनिया में जाएगी। दुनियभर के युवाओं के कल्याण का संकल्प लेकर हमने यह रोड मैप बनाया है। हमें संवेदना के साथ और इसके महत्व को समझकर टॉप मोस्ट प्रायोरिटी पर नशा मुक्त भारत के लिए काम करना होगा।

केन्द्रीय गृह अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गृह मंत्री ने मादक पदार्थों के विरुद्ध जागरूकता फैलाने वाले टेलीविजन कमर्शियल का लॉन्च किया। लखनऊ एवं देहरादून में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के नए जोनल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एएनटीएफ को सम्मानित भी किया गया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने नए स्वरूप में तैयार एनसीबी की वेबसाइट का शुभारंभ भी किया। एनसीबी द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एएनटीएफ प्रमुखों के साथ-साथ संबंधित सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

शाह ने कहा, देश और दुनिया के लिए सबसे गंभीर खतरा बन चुके नारकोटिक्स पर कड़ा और निर्णायक प्रहार करने और सामूहिक प्रयासों से विजय प्राप्त करने का समय आ गया है। 31 दिसंबर, 2029 तक हम भारत से नशे के व्यापार को जड़ से उखाड़कर फेंकने में सामूहिक रूप से सफल होंगे। विगत 5 साल में कश्मीर में आतंकवाद, नॉर्थईस्ट में उग्रवाद और नक्सलवाद की समस्या जैसी कई चुनौतियों के खिलाफ केंद्र सरकार ने सफलता हासिल की है। नशे के खिलाफ यह लड़ाई सभी लड़ाइयों में से सबसे कठिन है, लेकिन हम इस लड़ाई को छोड़ नहीं सकते। इस समस्या के खिलाफ हम सभी को एकजुट होकर जुनून के साथ लड़ना होगा और विजय प्राप्त करनी होगी।

विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 इस लड़ाई में शामिल सभी लोगों के लिए गीता के समान है। यह विजन डॉक्यूमेंट 35 से ज्यादा विभागों के साथ चर्चा के बाद बहुत मेहनत से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने सभी स्टेकहोल्डर्स के सुझाव लेकर यह कम्प्लीट रोडमैप बनाने का काम किया है, जो निश्चित लक्ष्यों के साथ सबको दिया गया है। इसमें लक्ष्य और समयसीमा भी निश्चित की गई है। कुछ समय बाद इसका रिव्यू भी होगा। नशे के खिलाफ लड़ाई को हमें स्पष्टता के साथ लड़ना है। इस लड़ाई के फोकल पॉइंट्स चिन्हित किया जा चुके हैं और राज्यस्तर पर खुफिया सूचना, जांच, वित्तीय कार्यवाही, अभियोजन को एक ही दिशा में चलाने के लिए एक रोडमैप भी बन चुका हैं। हमने पहली एएनटीएफ कॉन्फ्रेंस में संस्थागत व्यवस्था बनाई थी और उसे सुदृढ़ किया। दूसरे एएनटीएफ सम्मेलन में उस व्यवस्था को कार्यवाही में बदलने के लिए योग्यता, उसके एक्शन और एग्जीक्यूशन पर चर्चा की। अब यह तीसरा एएनटीएफ सम्मेलन इस रोडमैप को, नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में परिवर्तित करेगा।

अमित शाह ने कहा कि हमने अब तक जो कुछ भी किया है, वह पर्याप्त नहीं है। जब तक हर स्कूल का प्रिंसिपल, गांव का पटवारी, थाने का पीएसआई, राज्य के पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव और भारत सरकार के गृह सचिव तक, एक ही दिशा में काम नहीं करते हैं तब तक हमें सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज का सम्मेलन सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार हम टारगेट, टाइमलाइन और अकाउंटबिलिटी तय कर संपूर्ण विजय प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। अब हमें मीटिंग से मिशन, रिपोर्टिंग से रिज्ल्ट, सीजर से नेटवर्क की समाप्ति और केस से कन्विक्शन तक जाना है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उभरती हुई चुनौतियां, जैसे, सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर केमिकल्स का डायवर्जन, कम्युनिकेशन की नई तकनीकें, डार्कनेट, ड्रग मार्केट, क्रिप्टो, डेड ड्रॉप डिलीवरी प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के लिए आउट ऑफ बॉक्स सोचने वाले अधिकारियों की एक टीम हर राज्य में बनाई जाए और सफलता को साझा कर इसे पूरे देश में लागू किया जाए।

विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 में चार स्तंभ हैं

-इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन-आधारित एनफोर्समेंट,
-प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग पर नियंत्रण
-डिमांड और हार्म रिडक्शन
-क्षमता निर्माण और समन्वय।

इन चार स्तंभों में 100 से ज्यादा लक्ष्यों को विभाजित किया गया है। विज़न डॉक्यूमेंट में दिए गए 1 लाख नशामुक्त मित्र के निर्धारित लक्ष्य अंतर्गत अब तक विभिन्न मंत्रालयों ने 46,780 नशामुक्त मित्र पंजीकृत कर दिए हैं और वे काम भी कर रहे हैं। इस अभियान को ज़मीन तक पहुंचाने के लिए नशामुक्त मित्र आने वाले दिनों में देश के 10 लाख स्कूलों, कॉलेज, इंस्टीट्यूशन्स में जाकर युवाओं को चेताएंगे और कैंपस के डायरेक्टर को सेंसिटाइज करेंगे। बतौर शाह, हमारा लक्ष्य एएनटीएफ को एंटी नारको मिशन कमांड बनाने का होना चाहिए और मैनपावर, टेक्नोलॉजी, बजट आदि के लिए राज्यों के मुख्य सचिवों को अलग तरीके से सोचना पड़ेगा। केंद्र सरकार क्षमता निर्माण में तकनीक और फॉरेंसिक पर ध्यान दे रही है।

केन्द्रीय गृह ने कहा कि हमें सीजर-सेंट्रिक अप्रोच रखने की जगह नेटवर्क ध्वस्त करने का लक्ष्य रखकर आगे बढ़ना चाहिए। हमारी प्राथमिकता बैकवर्ड-फॉरवर्ड इन्वेस्टिगेशन के साथ-साथ फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन और डिजिटल लिंक्स ढूंढना भी होनी चाहिए। नशे के व्यापारियों द्वारा कमाए गए पैसों पर भी हमारा प्रहार होना चाहिए। कार्टेल पर तीन स्तरों पर प्रहार करना है – एंट्री पॉइंट, अंतरराज्यीय डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और जिलों में लोकल सेल के नेटवर्क पर। साथ ही, जिलों को तीन क्लस्टर में बांटा जाएगा – ड्रग बनाने वाले या देश में प्रवेश देने वाले जिले, ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर वाले जिले और उपभोग वाले जिले। पीआईटीएनडीपीएस का उपयोग बढ़ाना होगा क्योंकि देश में इसकी ज़रूकत है। इन्वेस्टिगेशन से कनविक्शन तक का पूरा रोडमैप पब्लिक प्रोसिक्यूटर्स के साथ बनाना होगा।

भारत में मौजूद विदेशी आरोपियों को वापस भेजने के लिए और वे दोबारा कभी भारत न आएं, इसके लिए उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का अभियान चलाना पड़ेगा। साथ ही विदेशों में बैठकर देश में ड्रग्स सप्लाई कर रहे भगोड़ों को पकड़कर भारत की अदालत के सामने लाना है। सीमाओं और उत्पादन केंद्रों को लक्ष्य बनाकर हमें सारे लूपहोल्स समाप्त करने पड़ेंगे। हर एएनटीएफ को इंफॉर्मेशन को एक्शनेबल इंटेलिजेंस बनाने की पूरी प्रक्रिया को अपने राज्य की पुलिस की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना चाहिए। गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि हम नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सफल होंगे और इसे जीत कर रहेंगे।

सम्मेलन के दौरान किए गए विचार-विमर्श से ड्रग्स नियंत्रण संबंधी कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन को और सुदृढ़ करने और देश के युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। यह राष्ट्रीय आयोजन ड्रग्स के दुरुपयोग से निपटने और नशा-मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए एनसीबी तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एएनटीएफ के बीच भविष्य के लिए तैयार साझेदारी को और मजबूत करने का एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा।

NATIONAL : 2700 की दवा 27,000 कीमत, 10 गुना ज्यादा MRP से मचा बवाल, मरीजों से लूट पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

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सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवा पर 2700 की जगह 27000 रुपए एमआरपी को दिनदहाड़े डकैती बताया। जानें अगली सुनवाई की तारीख और पूरे मामले की डिटेल।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण के अभाव और दुकानदार के खरीद मूल्य व मरीजों के लिए अधिकतम मूल्य (MRP) में भारी अंतर पर नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी टिप्पणियां कीं। जस्टिस विक्रम नाथ के साथ बेंच में सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कैंसर की कुछ आवश्यक दवाएं ऐसी हैं जो खुदरा केमिस्ट को 2700 रुपए में मिलती है और उसकी एमआरपी 27000 रुपए है। यह मरीजों के साथ सरासर अन्याय और दिनदहाड़े डकैती है।

जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों?
कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि इस पर निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से चुप हैं जिसके कारण बताने की जरूरत नहीं है। बेंच जेनरिक दवाओं के अनिवार्य नुस्खे, गैर-अधिसूचित दवाओं पर सख्त प्रारंभिक मूल्य नियंत्रण और चिकित्सा उपकरणों पर अधिकतम खुदरा मूल्य सीमा निर्धारित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने कहा कि यदि सभी दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया जाए तो हमें जेनरिक दवाओं की प्रणाली की भी आवश्यकता नहीं होगी, सब कुछ एक समान स्तर पर होगा। बेंच ने कहा कि खुदरा विक्रेता को आपूर्ति की जाने वाली कीमत और उसके MRP के बीच अंतर का कोई निश्चित मानदंड होना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में 29 सितंबर को अगली सुनवाई तय की।

सरकारी योजनाओं में टैक्सपेयर का पैसा
बेंच ने सरकारी योजनाओं में बढ़ी हुई एमआरपी से खर्च की प्रतिपूर्ति पर भी सवाल उठाते हुए इसे टैक्सपेयर के साथ धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला बताया। बेंच ने कहा कि जब मरीज आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करा रहे होते हैं, तो यह पूरी कीमत करदाताओं को चुकानी पड़ती है। अस्पताल इन कीमतों पर दवाएं खरीदते हैं और फिर सरकार से इसकी भरपाई करवाते हैं। अंततः यह करदाताओं का ही पैसा है।

केवल 1000 अधिसूचित दवाएं दायरे में
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता किशन चंद ने कहा कि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 (डीपीसीओ) में केवल 1000 दवाएं अधिसूचित हैं और करीब 82% दवाएं इस दायरे से बाहर हैं। इन दवाओं के प्रारंभिक दाम तय करने पर कोई नियंत्रण नहीं है। खुदरा विक्रेता और निजी अस्पतालों के लिए निर्माता मनमानी एमआरपी दर्ज करते हैं। सरकारी जन औषधि केंद्र का कुल दवा बाजार में केवल एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा है। निजी अस्पताल वाले अपने स्टोर से ही दवा खरीद को बाध्य करते हैं जहां भारी एमआरपी वसूली जाती है और बाहरी दवाएं स्वीकार नहीं की जाती।

अदालत की टिप्पणियां
अत्यधिक लाभ को कैसे उचित ठहराया जा सकता है जब आम लोगों को जीवन रक्षक उपचार के लिए घर और गहने बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
जिन दवाओं की उपलब्धता जन औषधि केंद्रों में नहीं है, उनके लिए मरीज कहां जाएं?
यह जबरन वसूली नहीं है, तो और क्या है? 100 रुपये की दवा 2000 रुपये में खरीदनी पड़ रही है।

केंद्र का जवाब: सुधार का भरोसा
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि सरकार हर नागरिक तक सस्ती दवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और जन औषधि केंद्र इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।

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फेस्टिव सीजन (Festive Season) में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए DGCA ने एयरलाइंस (Airlines) से कहा है कि वे फ्लाइट्स की संख्या बढ़ाएं. इसके बाद IndiGo, Air India और SpiceJet जैसी कंपनियों ने 1700 से ज्यादा अतिरिक्त उड़ानें जोड़ने का फैसला किया है. DGCA का कहना है कि वह किराए (Airfare) और क्षमता (Capacity) पर लगातार नजर रखेगा.

त्योहारों के मौसम में ट्रैवल डिमांड (Travel Demand) बढ़ने लगी है. ऐसे में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (Directorate General of Civil Aviation – DGCA) ने एयरलाइंस को साफ निर्देश दिए हैं कि वह टिकट की कीमतों (Ticket Prices) पर कंट्रोल रखें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फ्लाइट्स (Extra Flights) जोड़ें.

DGCA ने यह कदम इस वजह से उठाया, क्योंकि अक्टूबर से दिसंबर के बीच देशभर में यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है. पिछले साल कई रूट्स पर एयरफेयर दोगुना हो गया था, जिससे यात्रियों में नाराजगी दिखी थी.

एयरलाइंस का जवाब: 1700 से ज्यादा नई उड़ानें
DGCA की चेतावनी के बाद एयरलाइंस ने तुरंत एक्शन लिया है. 3 बड़ी कंपनियों ने अतिरिक्त उड़ानें जोड़ने की घोषणा की है, ताकि ट्रैवलर्स को सुविधा मिल सके. इंडिगो 730 नई उड़ानें शुरू कर रही है और स्पाइसजेट 546 उड़ानें जोड़ने वाली है. वहीं एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस मिलकर करीब 486 नई उड़ानें शुरू करेंगे. इन नई उड़ानों से त्योहारों में फ्लाइट की कमी की समस्या काफी हद तक दूर होगी.

किराए पर रहेगी DGCA की पैनी नजर
DGCA ने कहा है कि वह एयरफेयर ट्रेंड्स (Airfare Trends) पर लगातार नजर रखेगा. अगर किसी सेक्टर में टिकट के दाम जरूरत से ज्यादा बढ़े तो एयरलाइंस से जवाब मांगा जाएगा. सिविल एविएशन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) का कहना है कि यात्रियों के हितों की रक्षा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

फेस्टिव सीजन में फ्लाइट बुकिंग क्यों बढ़ती है?
भारत में अक्टूबर से जनवरी तक का समय सबसे व्यस्त ट्रैवल पीरियड (Travel Period) माना जाता है. इस दौरान दशहरा, दिवाली, क्रिसमस और न्यू ईयर जैसे त्योहार आते हैं. लोग अपने घरों या टूरिस्ट डेस्टिनेशंस पर जाने की योजना बनाते हैं, जिससे टिकट बुकिंग (Ticket Booking) में भारी बढ़ोतरी होती है.

Conclusion
DGCA का यह कदम यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है. त्योहारों के दौरान अगर फ्लाइट की संख्या बढ़ेगी तो टिकट के दाम स्थिर रहेंगे और यात्रियों को यात्रा में आसानी होगी.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1- DGCA क्या काम करता है?
DGCA भारत में सिविल एविएशन की निगरानी और रेगुलेशन का काम करता है.

2- एयरफेयर कौन तय करता है?
एयरलाइंस अपने रूट और डिमांड के हिसाब से टिकट की कीमत तय करती हैं.

3- फेस्टिव सीजन में टिकट महंगे क्यों हो जाते हैं?
बढ़ती डिमांड और सीमित सीटों की वजह से.

4- क्या DGCA किराए पर नियंत्रण लगा सकता है?
DGCA सीधे दखल नहीं देता, लेकिन निगरानी करता है.

5- फेस्टिव सीजन में कितनी फ्लाइट्स बढ़ाई गई हैं?
करीब 1700 अतिरिक्त उड़ानें जोड़ी जा रही हैं.

NATIONAL : दो दिन चलेगा मोदी सरकार का मंथन, 23-24 सितंबर को चिंतन शिविर; सुधारों और योजनाओं पर होगी चर्चा

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विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार 23 और 24 सितंबर को चिंतन शिविर आयोजित करेगी। इसमें केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा करेंगे और आने वाले समय के लिए नई योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह मंत्रिपरिषद की औपचारिक बैठक होगी। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में चल रहे कार्यों का जायजा लिया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
2021 से चल रहा विकसित भारत का अभ्यास

सरकार के अनुसार, विकसित भारत 2047 को लेकर यह प्रक्रिया वर्ष 2021 से चल रही है। विजन 2047 तैयार करने और इसके लिए अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक रोडमैप बनाने के लिए सचिवों के 10 सेक्टोरल समूह गठित किए गए थे।

इस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श भी किया गया। इसके बाद विकसित भारत@2047 के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के सामने अब तक आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं।

आगे की रणनीति पर होगा फोकस

23 और 24 सितंबर को होने वाला चिंतन शिविर इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इसमें सचिवों के समूहों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय तथा नीति आयोग की ओर से किए जा रहे काम को एक साथ देखा जाएगा। बैठक में सुधार, जीवन सुगमता, अनुपालनों में कमी और शासन से जुड़ी अन्य प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होगी। सरकार का जोर मौजूदा कार्यों की समीक्षा के साथ भविष्य की दिशा तय करने पर रहेगा।

सिर्फ दो दिन तक सीमित नहीं रहेगा मंथन

सरकार के अनुसार, यह कोई एक बार आयोजित होने वाला चिंतन शिविर नहीं है। 23 और 24 सितंबर को होने वाली दो दौर की चर्चाओं के बाद आने वाले दिनों में भी इस विषय पर आगे के दौर आयोजित किए जाएंगे। इन चर्चाओं के जरिए सरकार विकसित भारत 2047 के लिए चल रहे काम का जायजा लेने के साथ नई सोच, सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

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