Wednesday, June 24, 2026
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NATIONAL : पुणे के अस्पताल में मिला 7 घंटे के टाइमर वाला बम, BDDS ने किया डिफ्यूज, एटीएस जांच में जुटी

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पुणे के उषाकिरण अस्पताल में बम जैसी संदिग्ध वस्तु मिलने से सनसनी फैल गई है। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को खाली करवाया। बाद में बम निरोधक दस्ता ने उसे डिफ्यूज किया।

पुणे के हडपसर इलाके में एक निजी अस्पताल में कम श्रेणी का एक विस्फोटक उपकरण मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंची और उसे डिफ्यूज किया। यह उपकरण अस्पताल परिसर के अंदर एक शौचालय के पास रखा था। जिसमें 7 घंटे का टाइमर लगा था। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कथित विस्फोटक अस्पताल में कैसे और कहां से आया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कामधेनु एस्टेट इलाके में स्थित अस्पताल के एक डॉक्टर ने सबसे पहले संदिग्ध वस्तु देखी, जिसमें डिजिटल घड़ी जैसा उपकरण लगा हुआ था और फिर उसने इसकी सूचना पुलिस को दी। शुरुआती जांच में इसे कम क्षमता वाला आईईडी माना जा रहा है।प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि अस्पताल में मिला उपकरण सक्रिय बम था जिसमें विस्फोटक सामग्री और एक चालू टाइमर मौजूद था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं।

पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा, “बुधवार रात करीब 8 बजे पुलिस को यह जानकारी मिली कि अस्पताल परिसर में बम जैसा कोई उपकरण मिला है। पुलिस टीम, बम निरोधक दस्ते के साथ, तुरंत मौके पर पहुंची। बम निरोधक दस्ते ने तय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उस उपकरण को वहां से हटाया और उसे ग्लाइडिंग सेंटर के एक खुले मैदान में ले गए। बम को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया है।“

उन्होंने आगे कहा, इस मामले की जांच के लिए सभी टीमों को काम पर लगा दिया गया है। पुणे शहर पुलिस, स्थानीय पुलिस थाना, साथ ही क्राइम ब्रांच और महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की टीमें मिलकर इस मामले की जांच कर रही हैं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं से जांच कर रही हैं।”

अस्पताल के बाहर मीडिया से बात करते हुए एनसीपी विधायक चेतन विठ्ठल तुपे ने कहा, “अस्पताल के अंदर एक बम लगाया गया था, जिसे पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया है। फिलहाल घबराने जैसी कोई बात नहीं है। पूरे अस्पताल भवन और आसपास के परिसर की गहन जांच की गई है। अब किसी भी तरह का खतरा नहीं है। हालांकि, यह वास्तव में एक जिंदा विस्फोटक उपकरण था। अगर धमाका हो जाता, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। पुलिस और प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद पुलिस अपनी जानकारी साझा करेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “फिलहाल बम रखने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है। हालांकि, कुछ लोग संदेह के घेरे में हैं। आरोप है कि दोपहर या शाम के समय एक वाहन वहां आकर रुका था। एक व्यक्ति कार से बाहर निकला और बाद में वापस उसी वाहन में बैठ गया, जिसके बाद कार दूसरी तरफ से निकल गई। यह जानकारी प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर सामने आई है। पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच करेंगी, जिसमें आतंकी हमले की संभावना भी शामिल है।”

NATIONAL : केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद को फिर मिला सेवा विस्तार, लगातार दूसरी बार बढ़ा कार्यकाल

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केंद्र सरकार ने बुधवार को सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया। सूद ने 25 मई 2023 को दो वर्ष की अवधि के लिए सीबीआई निदेशक का पदभार संभाला था। इससे पहले भी उनको एक साल के सेवा विस्तार दिया गया था। अब वह इस पद पर मई 2027 तक बने रहेंगे।

केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद के कार्यकाल को एक बार फिर बढ़ाने का फैसला किया है। यह उनके कार्यकाल में दूसरा सेवा विस्तार है। इससे पहले मंगलवार को अगले सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए पीएमओ में बैठक हुई थी। जिसमें मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल हुए थे।

केंद्र सरकार ने बुधवार को सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल फिर से एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया। सूद ने 25 मई 2023 को दो वर्ष की अवधि के लिए सीबीआई निदेशक का पदभार संभाला था। इससे पहले मई 2025 में भी उनको एक साल के सेवा विस्तार दिया गया था, अब वह इस पद पर मई 2027 तक बने रहेंगे।

सरकार की ओर से जारी बयान में मुताबिक, उनके कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई चयन समिति की बैठक में लिया गया। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे। चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर नियुक्तियों की मंत्रिमंडलीय समिति (एसीसी) ने एक वर्ष की अवधि के लिए सूद के कार्यकाल के विस्तार को मंजूरी दी।

बैठक के बाद राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया को लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इस प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए असहमति नोट दर्ज कराया। राहुल गांधी ने कहा कि वह ऐसी चयन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिसमें निष्पक्षता पर सवाल उठते हों। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें…

प्रवीन सूद 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं। उन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का निदेशक नियुक्त किए जाने से पहले कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में कार्यरत थे।

सूद का जन्म 1964 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हुआ था। उन्होंने 22 वर्ष की आयु में भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन की थी। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), बेंगलुरु और न्यूयॉर्क स्थित मैक्सवेल स्कूल ऑफ गवर्नेंस, सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।

सूद ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की निगरानी की। तकनीक-प्रेमी सूद कर्नाटक में न्यायपालिका के साथ मिलकर सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) और आईसीजेएस (इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य कर चुके हैं।

WORLD : US से जंग के 75 दिन बाद दिल्ली पहुंचे अराघची: भारत-ईरान संबंध पर हुकूमत की सोच क्या? BRICS समिट पर नजरें

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ईरान ने भारत को एक भरोसेमंद शांतिदूत मानते हुए मध्यस्थता की बड़ी उम्मीद जताई है। अब सबकी नजरें ब्रिक्स के मंच पर टिकी हैं, जहां भारत की संतुलित कूटनीति इस क्षेत्रीय तनाव को शांत करने की अहम कड़ी बन सकती है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने क्या-क्या कहा?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दिल्ली पहुंच चुके हैं। लगभग 75 दिनों से जारी क्षेत्रीय संघर्ष के बाद अराघची की यह यात्रा कूटनीतिक हलकों में बड़ी हलचल पैदा कर रही है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर एकजुटता का प्रदर्शन चाहता है।

ब्रिक्स में एकजुटता की ईरान ने भरी हुंकार
ब्रिक्स बैठक से ठीक पहले ईरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि संगठन के भीतर किसी भी बड़े मतभेद का संदेश दुनिया में नहीं जाना चाहिए। ईरान पूरी तरह से ब्रिक्स घोषणा के पक्ष में है। तेहरान चाहता है कि समूह के सदस्य देश पश्चिम एशिया संकट पर एक सुर में बात करें। यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें ब्रिक्स देशों के बीच आंतरिक मतभेदों की चर्चा हो रही थी।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी कहा कि इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अब खुद वह सच कुबूल कर लिया है, जिसकी जानकारी ईरान की सुरक्षा एजेंसियों को पहले से थी। अराघची ने कहा है कि ईरान से दुश्मनी मोल लेना एक बेवकूफी भरा जुआ है और जो भी देश इस्राइल के साथ मिलकर क्षेत्र में फूट डालने या ईरान के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश करेंगे, उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा और इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

भारत की मध्यस्थता का ईरान ने किया स्वागत
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए यदि भारत कोई भी पहल करता है, तो ईरान उसका दिल खोलकर स्वागत करेगा। ईरान भारत को एक ऐसे विश्वसनीय देश के रूप में देख रहा है, जिसके संबंध सभी पक्षों से बेहतर हैं। ईरान का यह रुख भारत की बढ़ती वैश्विक साख और विश्वबंधु की छवि पर मुहर लगाता है।

ईरानी पक्ष ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ईरान ने कहा किया कि वह इस समुद्री रास्ते में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के लिए यह बयान बेहद राहत भरा है। भारत की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। यहां शांति रहने से न केवल भारत बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

भारत की संतुलित कूटनीति की परीक्षा
भारत इस समय बेहद सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रहा है। देश के सामने एक तरफ ईरान के साथ अपने पुराने और रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को संतुलित करना है। यही कारण है कि भारत ने अभी तक किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है। सबकी नजरें अब ब्रिक्स के संयुक्त बयान पर हैं कि सदस्य देश इस संकट पर क्या रुख अपनाते हैं।

BUSINESS : भारत ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई, फैसला सितंबर तक रहेगा प्रभावी

भारत सरकार ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है। सरकार ने कहा कि यह प्रतिबंध मौजूदा टैरिफ-दर कोटा और व्यवस्थाओं के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी निर्यात पर लागू नहीं होगा।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने स्थानीय कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। सरकार का यह कदम वैश्विक सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों को सहारा दे सकता है। इससे ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों को एशियाई और अफ्रीकी खरीदारों को अधिक शिपमेंट भेजने का अवसर मिलेगा। भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले मिलों को 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन अब उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम रहने की उम्मीद है। प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार कमजोर हुई है। अल नीनो मौसम की स्थिति इस वर्ष के मानसून को बाधित कर सकती है। इससे अगले सीजन का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम रहने का जोखिम बढ़ गया है।

निर्यात के लिए स्वीकृत 1.59 मिलियन टन में से व्यापारियों ने लगभग 800,000 टन के अनुबंध किए थे। इसमें से 600,000 टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। सरकार ने कच्ची और सफेद चीनी के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है। हालांकि, निर्यात पाइपलाइन में पहले से मौजूद शिपमेंट को कुछ शर्तों के तहत आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

यदि आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन से पहले लोडिंग शुरू हो गई थी, तो खेपों को अनुमति दी जाएगी। यदि शिपिंग बिल दाखिल किया गया था और जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहले ही पहुंच चुका था, तो भी निर्यात की अनुमति होगी। यदि चीनी अधिसूचना के प्रकाशन से पहले सीमा शुल्क या संरक्षक को सौंप दी गई थी, तो भी शिपमेंट को मंजूरी मिलेगी। मुंबई के एक व्यापारी ने कहा कि फरवरी में दिए गए अतिरिक्त निर्यात कोटे के कारण व्यापारियों को अब निर्यात आदेश पूरे करने में परेशानी होगी। प्रतिबंध की घोषणा के बाद न्यूयॉर्क कच्ची चीनी वायदा 2 फीसदी से अधिक बढ़ा, जबकि लंदन सफेद चीनी वायदा 3 फीसदी उछल गया।

NATIONAL : भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान देश में लेन ड्राइविंग की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में “लेन ड्राइविंग जैसी कोई अवधारणा ही नहीं है” और सड़क हादसों की बड़ी वजह यही है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले S Rajaseekaran v. Union of India की सुनवाई कर रही थी, जिसमें कोर्ट समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “इस देश में यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि लोग लेन में गाड़ी चलाएं? यहां लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं इसी कारण होती हैं।” उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि लेन ड्राइविंग को बढ़ावा देने पर गंभीरता से काम किया जाए, क्योंकि इससे सड़क हादसों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सार्वजनिक सेवा वाहनों में Vehicle Location Tracking Devices (VLTD) और पैनिक बटन लगाने के नियमों के पालन पर भी चिंता जताई। अदालत ने नोट किया कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 125H के तहत यह व्यवस्था अनिवार्य होने के बावजूद देश में 1% से भी कम परिवहन वाहनों में ये डिवाइस लगे हैं।

सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की सज़ा रद्द की कोर्ट ने इसे “बेहद चिंताजनक” बताते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे नए और पुराने सभी सार्वजनिक वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन समयबद्ध तरीके से लगाना सुनिश्चित करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जब तक किसी वाहन में ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन लगे होने की पुष्टि “वाहन” (Vahan) पोर्टल पर दर्ज नहीं होती, तब तक उसे फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट जारी न किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने 21 दिसंबर 2018 तक पंजीकृत पुराने वाहनों में भी इन उपकरणों को रेट्रोफिट करने और निगरानी प्रणाली को वाहन डेटाबेस से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके। इसके अलावा स्पीड लिमिटिंग डिवाइस को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की उदासीनता पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद अधिकांश राज्यों ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। कोर्ट ने राज्यों को “वाहन” और “परिवहन” पोर्टल के आंकड़ों के साथ नई विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।\

सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अब तक गठन न होने पर भी असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने याद दिलाया कि 4 मई 2025 को केंद्र सरकार को छह महीने का समय दिया गया था, लेकिन अब तक बोर्ड का गठन नहीं हुआ। अदालत ने इसे “अंतिम अवसर” बताते हुए तीन महीने के भीतर बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। वहीं उत्तर प्रदेश के उस कानून पर भी सुनवाई हुई, जिसके तहत एक निश्चित तारीख से पहले मोटर वाहन अधिनियम के तहत कई मुकदमे स्वतः समाप्त हो गए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि कितने मामलों को दोबारा शुरू किया जाएगा और उसकी प्रक्रिया क्या होगी।

NATIONAL : LPG पर बड़ी खुशखबरी! भारत आ रहा एक और एलपीजी टैंकर, MV सनशाइन जहाज ने पार किया होर्मुज

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भारत जा रही एलपीजी टैंकर एमवी सनशाइन स्ट्रेट ऑफ होरमुज पार कर चुकी है. इसे सुरक्षित भारत की ओर बढ़ने के लिए पूरी मदद दी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक. यह 15वीं एलपीजी शिप है, जिसे पर्सियन गल्फ से सुरक्षित निकाला गया है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत को एक और बड़ी खुशखबरी मिली है. होर्मुज पार कर एक और LPG टैंकर भारत आ रहा है. जी हां, LPG टैंकर एमवी सनशाइन (MV Sunshine) ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है. अब वह भारत की ओर सीना तानकर बढ़ रहा है. भारतीय नौसेना और एजेंसियां ​​उसे एस्कॉर्ट कर रही है. होर्मुज पार कर भारत आने वाला यह 15वां LPG जहाज है, जिसे इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाला गया है. भारतीय नौसेना उसकी सुरक्षा कवच बनी हुई है.

LPG टैंकर एमवी सनशाइन (MV Sunshine) ने बुधवार की रात को होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया. फारस की खाड़ी से सुरक्षित निकाले जाने के बाद भारत की ओर बढ़ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना सहित कई एजेंसियां ​​भारत की ओर बढ़ रहे एलपीजी जहाज को सुरक्षा दे रही हैं. इस जहाज में कितनी एलपीजी गैस है, इसकी डिटेल सामने नहीं आई है.

इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं को सफलतापूर्वक संभाला है और साथ ही उपभोक्ताओं पर कम से कम बोझ पड़ना भी सुनिश्चित किया है. उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान भारत ने घरेलू LPG उत्पादन में भारी वृद्धि की है.

उधर, बुधवार को ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काजेम घरीबाबादी ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति तब बेहतर होगी, जब शांति स्थापित हो जाएगी. घरीबाबादी ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पहले से बेहतर होगी जब शांति आ जाएगी. सब कुछ साफ रहेगा, कोई गड़बड़ी नहीं होगी. हम अंतरराष्ट्रीय कानून से बाहर नहीं जाएंगे. अगर शांति स्थापित हो गई तो पहले से ज्यादा सुरक्षा और सेफ्टी होगी.’

इससे पहले मंगलवार को ईरान ने कहा कि वह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए भारत की किसी भी पहल का स्वागत करेगा और घरीबाबादी ने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले नई दिल्ली के निष्पक्ष रवैये की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘भारत हमेशा शांति का समर्थन करता है और हमेशा शांति के पक्ष में है.’

RAJASTHAN : नीट महाघोटाला: 10 राज्यों में बेचा गया लीक पेपर, सीबीआई की रडार पर पूरा सिंडिकेट

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गिरफ्तार दोनों भाइयों के परिवार के चार लोगों का दो साल पहले हुआ था चयन

राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की जांच में सामने आया है कि नीट का लीक पेपर 10 राज्यों में बेचा गया था। इनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, केरलम, उत्तराखंड सहित अन्य राज्य शामिल हैं।

एसओजी ने सभी राज्यों के नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बताएं हैं। एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने स्वीकार किया कि यह पेपर माफियाओं तक परीक्षा से दो से तीन सप्ताह पहले ही पहुंच गया था।

सीकर में ई-मित्र संचालकों तक पेपर पहुंच गया था
सीकर में ई-मित्र संचालकों तक पेपर पहुंच गया था। कोचिंग संचालकों और एक करियर काउंसलर की भी इसमें भूमिका सामने आई है । एसओजी ने जयपुर, सीकर व गुरुग्राम सहित अन्य शहरों से जिन आरोपितों को पकड़ा है, उनमें जयपुर जिले के जमवारामगढ़ निवासी दो भाई दिनेश बिंवाल और मांगीलाल भाजपा से जुड़े हैं।

दिनेश जयपुर जिला भाजपा का पूर्व मंत्री रह चुका है
दिनेश जयपुर जिला भाजपा का पूर्व मंत्री रह चुका है। वह क्षेत्रीय भाजपा विधायक महेंद्र मीणा का विश्वस्त है। सूत्रों के अनुसार सीबीआइ को सौंपी गई एसओजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि नीट का पेपर नासिक की प्रीटिंग प्रेस से लीक हुआ और फिर गुरुग्राम के खुरमपुर गांव निवासी एमबीबीएस छात्र यश यादव तक पहुंचा।

यश ने राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के लोगों को पेपर बेचा
यश ने राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के लोगों को पेपर बेचा। मांगीलाल एवं दिनेश बिंवाल ने 30 लाख रुपये में यश से पेपर 27 अप्रैल को खरीदा। दिनेश ने सीकर के निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ रहे अपने पुत्र रिषी को पेपर दिया और फिर खुद सीकर पहुंचकर 29 अप्रैल को दो से पांच लाख रुपये में कई लोगों को बेच दिया।

इस बीच रिषी ने केरलम में एमबीबीएस कर रहे अपने मित्र को इंटरनेट मीडिया से पेपर भेजा। इस मित्र ने सीकर में हास्टल संचालक अपने पिता को यह पेपर दो मई को देर रात भेजा।जांच और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ में सामने आया कि दो मई को सीकर के दो कोचिंग संचालकों एवं एक करियर काउंसलर राकेश मंडावरिया तक पेपर पहुंचा।उन्होंने गैस पेपर बताकर छात्रों को इसे बेचते हुए भरोसा दिया कि नीट की परीक्षा में 99.99 प्रतिशत गैस पेपर जैसे हूबहू सवाल आएंगे। हुआ भी ऐसा ही।

रिषी ने अपने साथी छात्रों को करीब तीन सप्ताह पहले ही नीट का पेपर मिलने का आश्वासन दिया था। ऐसे में अब इस बात को लेकर भी पड़ताल की जा रही है क्या दिनेश एवं मांगीलाल के पहले से पेपर लीक माफियाओं से संपर्क है ।

पेपर लीक मामले में हिरासत में लिए गए दिनेश एवं मांगीलाल परिवार के चार बच्चों का साल 2024 में नीट में चयन हुआ था। इनमें मांगीलाल का बेटा विकास सवाईमाधोपुर मेडिकल कॉलेज और पुत्री प्रगति दौसा मेडिकल कालेज में पढ़ रहे हैं ।

एक परिवार के चार बच्चों का एक ही साल में एकसाथ चयन कैसे संभव हो सकता है
इनके एक अन्य भाई स्व.घनश्याम की पुत्री सानिया मुंबई मेडिकल कॉलेज और पुत्र दिव्य जयपुर स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं। अब जांच इस बात को लेकर भी की जा रही है कि एक ही परिवार के चार बच्चों का एक ही साल में एकसाथ चयन कैसे संभव हो सकता है। दिनेश की पत्नी रजनी और मां प्रभुदेवी ने कहा कि इस मामले में सच्चाई नहीं है।

राजस्थान पेपर लीक का मूल केंद्र नहीं है। पूरा मामला सीबीआइ को सौंप दिया गया है। जांच से जुड़े दस्तावेज एवं हिरासत में लिए गए दो दर्जन लोगों को भी सीबीआइ टीम के हवाले किया गया है। इनमें से चार की जयपुर से गिरफ्तारी हुई है । नीट का पेपर राजस्थान पहुंचने से पहले ही बाहर आ चुका था। करीब 150 छात्रों के पास पेपर पहुंचा है। -अजयपाल लांबा, महानिरीक्षक, एसओजी

NATIONAL : वर्क फ्रॉम होम से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक, CM योगी के बड़े निर्देश, मंत्रियों के लिए बदली कार्यशैली

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल की बैठक में कई बड़े निर्देश दिए हैं. उन्होंने मंत्रियों से सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, वाहन फ्लीट कम करने और विदेश यात्राओं से परहेज करने को कहा है. साथ ही ऊर्जा संरक्षण, डिजिटल कार्यशैली और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.

लखनऊ में बुधवार को विस्तारित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन और प्रशासन की कार्यसंस्कृति को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए. बैठक में उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे जनता के बीच उदाहरण पेश करें और ऐसी जीवनशैली अपनाएं जिससे ऊर्जा संरक्षण और मितव्ययिता को बढ़ावा मिले. मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से आह्वान किया कि वो हफ्ते में कम से कम एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि मंत्री मेट्रो, बस, ई-रिक्शा, कारपूलिंग और साइकिल जैसी सुविधाओं को अपनाएं, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए. इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों की सरकारी वाहन फ्लीट को 50 प्रतिशत तक कम करने की अपील भी की.

बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि अगले छह महीने तक मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अनिवार्य परिस्थितियों को छोड़कर विदेश यात्राओं से बचें. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ईंधन संरक्षण सिर्फ आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है. उन्होंने प्रधानमंत्री के ईंधन खपत कम करने के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यों में डिजिटल और हाइब्रिड व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अंतरजनपदीय बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य प्रशासनिक गतिविधियां यथासंभव हाइब्रिड मोड में की जाएं. इसके साथ ही 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करने की बात कही गई.

एयरकंडीशनर के उपयोग को लेकर भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी कार्यालयों में एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाए. उन्होंने प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग और ऊर्जा बचत पर जोर दिया. साथ ही सचिवालय और निदेशालय स्तर पर लिफ्ट और अन्य संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करने की बात कही.

ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा, पीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की बात कही. उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए. इसके लिए नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया.

उन्होंने एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए और कहा कि कॉमर्शियल उपयोगकर्ताओं को भी पीएनजी से जोड़ा जाए. साथ ही सौर ऊर्जा के उपयोग को रिहायशी कॉलोनियों, विद्यालयों और महाविद्यालयों तक बढ़ाने की बात कही गई.

मुख्यमंत्री ने सामाजिक जीवन में मितव्ययिता को बढ़ावा देने की भी बात कही. उन्होंने कहा कि शादी और अन्य आयोजनों में घरेलू स्थलों का उपयोग किया जाए और अनावश्यक खर्च से बचा जाए. उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक जिला एक उत्पाद’ को अपनाने पर जोर दिया.बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने नए मंत्रियों का परिचय कराया और कहा कि जनता जनप्रतिनिधियों के कार्यों का रोज मूल्यांकन करती है. उन्होंने कहा कि मंत्रियों को कम समय में बेहतर प्रदर्शन करना होगा और वरिष्ठ मंत्रियों से मार्गदर्शन लेते रहना चाहिए.

NATIONAL : पवन खेड़ा को असम पुलिस ने आज फिर पूछताछ के लिए बुलाया, कल 10 घंटे तक किए थे सवाल-जवाब

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से बुधवार को असम पुलिस की अपराध शाखा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा द्वारा दर्ज किए गए मामलों के संबंध में 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। खेड़ा ने बताया कि उन्हें गुरुवार सुबह फिर से अपराध शाखा के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

यह मामले ऐसे समय में दर्ज किए गए हैं जब खेड़ा ने आरोप लगाया था कि शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। खेड़ा ने अपराध शाखा कार्यालय में प्रवेश करने से पहले पत्रकारों से कहा कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘मुझे पुलिस ने तलब किया था, जिसके बाद मैं यहां आया हूं। हम कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, इसलिए मैं कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यहां उपस्थित हूं।’

खेड़ा ने कहा कि पूछताछ पूरी होने के बाद वह मीडिया से विस्तार से बात करेंगे। इस मामले में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन हमें केंद्र सरकार से लिखित में यह सूचना मिल चुकी है कि खेड़ा द्वारा प्रदर्शित दस्तावेज फर्जी थे।

मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि इसलिए पुलिस जांच में ज्यादा समय नहीं लगेगा और वे निर्धारित समय के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर सकेंगे। अगर वह सहयोग करते रहे तो आरोपपत्र या अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने में तेजी आएगी, लेकिन अगर वह सहयोग नहीं करते हैं तो इसमें समय लग सकता है। हम इस मामले को जल्द से जल्द निपटाना चाहते हैं।की पत्नी ने बीएनएस के विभिन्न प्रविधानों के तहत गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में खेड़ा और अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई थीं।

कांग्रेस नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों में चुनाव के संबंध में झूठे बयान देना, धोखाधड़ी, जालसाजी, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना और मानहानि शामिल हैं।खेड़ा ने पहले तेलंगाना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उन्हें सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि, असम पुलिस ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

शीर्ष न्यायालय ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद खेड़ा ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बाद में शीर्ष न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत दी।

NATIONAL : वीडी सतीशन केरलम के अगले सीएम:चुनाव नतीजे घोषित होने के 10 दिन बाद कांग्रेस ने नाम का ऐलान किया

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कांग्रेस नेता वी डी सतीशन (61) केरलम के सीएम होंगे। कांग्रेस ने गुरुवार को राज्य के चुनाव नतीजे घोषित होने के 10 दिन बाद इसका ऐलान किया। सतीशन पारावूर सीट से विधायक हैं।

केरलम में मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नाम केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्नीथला और वी डी सतीशन का नाम चल रहा था। कांग्रेस आलाकमान ने सतीशन के नाम पर मुहर लगाई।केरलम सीएम पद के लिए राज्य की अलप्पुझा सीट से लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल राहुल गांधी की पहली पसंद कहे जा रहे थे। राहुल ने 11 मई को दिल्ली में वेणुगोपाल से अकेले में मुलाकात भी की थी।

कोट्टायम से विधायक राधाकृष्णन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हाईकमान ने सभी पक्षों की राय सुनी और इस पूरी प्रक्रिया में राहुल सीधे तौर पर शामिल थे।
उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई गई थी। जब कई नाम सामने हों तो नेता चुनने को लेकर भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है।

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