Thursday, September 17, 2026
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NATIONAL : ‘उद्धव ठाकरे को बेहतर कहने का वक्त, शिंदे गद्दार’, मनोज जरांगे ने चेतावनी देते हुए कहा हर सीट पर हराऊंगा

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महाराष्ट्र में एक बार फिर से मराठा मुद्दे पर राजनीति गरमा सकती है। राज्य में मराठा समाज को आरक्षण दिलाने के लिए आंदोलन और भूख हड़ताल कर चुके मनोज जरांगे पाटिल ने मराठवाड़ा में कुनबी सर्टिफिकेट रद्द होने पर नाराजगी व्यक्त की है। जरांगे पाटिल ने एकनाथ शिंदे, सीएम फडणवीस और राजस्व मंत्री चंद्रशेखकर बावनकुले को निशाने पर लिया है।

मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन में बड़ा चेहरा बनकर उभरे मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को निशाने पर लिया है। सरकार द्वारा जारी कुणबी प्रमाण पत्र रद्द होने पर जरांगे पाटिल शिंदे पर गद्दारी करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि मैं अब उन्हें हर सीट पर हराऊंगा। जरंगे का यह गुस्सा मराठवाड़ा में मराठा जन प्रतिनिधियों के कुणबी प्रमाणपत्र रद्द होने पर फूटा है। इसे नगरसेवक पद समाप्त किए गए हैं। अंतरवाली सराटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जरांगे ने राज्य सरकार पर मराठों को खत्म करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया। जरांगे ने उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर सीधा हमला बोला। जरांगे ने उद्धव की तारीफ की।

मनोज जरांगे पाटिल का आरोप है कि बावनकुले के। कहने पर अधिकारियों ने वैध कुणबी प्रमाणपत्रों को रद्द किया है। जरांगे ने गुस्से में कहा कि शिंदे ने मराठों के साथ गद्दारी की है और आगामी चुनावों में मराठा शिंदे के उम्मीदवारों को हर सीट पर हराएंगे। मनोज जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया कि मराठा जनप्रतिनिधियों के पास ठोस सबूत है। इसके बाद भी प्रमाणपत्र खारिज किए गए हैं। फडणवीस को बावनकुले के कारण भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। मनोज जरांगे के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कोई प्रमाणपत्र जान-बूझ कर रद्द नहीं किया गया है। फडणवीस ने कहा है कि जाति वैधता समितियां सुप्रीम कोर्ट के आधीन काम करती हैं। इसमें सरकार की भूमिका नहीं है।

अगर मोदी होते तो देश आजाद ही नहीं होता, अधीर रंजन चौधरी का बड़ा अटैक

यह पहला मौका है जब मनोज जरांगे पाटिल ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेपर सीधा निशाना साधा। जरांगे का आरोप है कि एकनाथ शिंदे डबल गेम खेल रहे हैं। शिंदे के लिए मराठों ने मेहनत की थी, लेकिन उन्होंने मराठों की पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब उद्धव ठाकरे की बेहतर कहने का समय आ गया है। जरांगे के आरोपों पर पलटवार करते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने खंडन किया है और कहा है सरकार या कोई भी मत्री इसके काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। सीएम फडणवीस ने कहा है कि बीजेपी के कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रमाणपत्र भी जाति वैधता समितियों द्वारा रद्द किए गए हैं। इसलिए राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप सही नहीं है। जरांगे मराठा आरक्षण को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं।

MAHARASHTRA : : डिप्टी CM शिंदे बोले- गणेशोत्सव से पहले सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, बेहतर निकायों को मिलेंगे पुरस्कार

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महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभी नगर निगमों को सड़कें गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं। शोभायात्रा और विसर्जन मार्गों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले तीन नगर निगमों को पुरस्कार मिलेगा, जबकि खराब प्रदर्शन का असर भविष्य के फंड आवंटन पर पड़ सकता है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गणेशोत्सव से पहले राज्य की सभी नगर निगमों को सड़कों से गड्ढे हटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गणेश प्रतिमाओं की शोभायात्रा और विसर्जन वाले रास्तों पर किसी भी तरह के गड्ढे नहीं होने चाहिए। इसके लिए नगर निकायों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना होगा। एकनाथ शिंदे ने सोमवार को गणेशोत्सव की तैयारियों को लेकर नगर निकायों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस साल गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा। यह महाराष्ट्र का प्रमुख और दस दिन तक चलने वाला त्योहार है। ऐसे में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

तीन बेहतर नगर निगमों को पुरस्कार
एकनाथ शिंदे ने कहा कि जो नगर निगम गणेशोत्सव की तैयारियां तेजी से पूरी करेंगे और अपने क्षेत्र में गड्ढामुक्त सड़कें, दुर्घटनामुक्त आयोजन और जरूरी नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करेंगे, उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा। शहरी विकास विभाग की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगर निगमों को पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं, जिन नगर निगमों और अधिकारियों का प्रदर्शन खराब रहेगा, उनका भी रिकॉर्ड रखा जाएगा। शिंदे ने कहा कि भविष्य में नगर निगमों को मिलने वाले फंड के आवंटन में उनके प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाएगा।

24 घंटे गड्ढों की मरम्मत की व्यवस्था
उपमुख्यमंत्री ने नगर आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने शहरों में गड्ढों की मरम्मत का काम तुरंत शुरू कराएं। इसके लिए विशेष टीमें बनाई जाएं, जो सड़कों का नियमित निरीक्षण करें और गड्ढे मिलने पर तुरंत उनकी मरम्मत कराएं। नागरिकों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने को भी कहा गया है। मोबाइल एप के जरिए मिलने वाली शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। गड्ढों की मरम्मत के लिए 24 घंटे काम करने वाली व्यवस्था तैयार करने और चल रहे काम की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ने नगर आयुक्तों से जरूरत पड़ने पर खुद मौके पर जाकर मरम्मत कार्य की समीक्षा करने को कहा। नगर निकायों को मरम्मत से पहले और बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लोगों को पता चल सके कि किस सड़क पर कितना काम हुआ है।

आधुनिक तकनीक से होगी मरम्मत
मानसून के दौरान जल्द मरम्मत के लिए नगर निगमों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने को कहा गया है। इनमें प्रीकास्ट सामग्री और जियोपॉलीमर टेक्नो-पैच जैसी तकनीक शामिल हैं। इनका इस्तेमाल ऐसे स्थानों पर किया जा सकता है, जहां तत्काल सड़क की मरम्मत जरूरी है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी), महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) और पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) भी नगर निकायों के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र वाली सड़कों पर गड्ढों के कारण लोगों को परेशानी होती है तो संबंधित नगर निगम अपने खर्च पर उनकी मरम्मत करा सकते हैं। बाद में यह खर्च संबंधित एजेंसी से वसूला जाएगा।

गणेश विसर्जन मार्गों पर विशेष ध्यान
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि गणेश प्रतिमाओं की शोभायात्रा और विसर्जन वाले मार्गों की विशेष रूप से जांच की जाए। गणेशोत्सव के दौरान नई सड़क खोदने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बिजली के ओवरहेड तारों को लेकर भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए। खासकर विसर्जन मार्गों पर यह सुनिश्चित किया जाए कि बिजली के तारों की वजह से कोई दुर्घटना न हो।

NATIONAL : हेमंत सोरेन सरकार को छात्रों ने दी चेतावनी, मांगे नहीं मानी गईं तो 10 अगस्त को करेंगे विधानसभा घेराव

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झारखंड में JPSC, JSSC, CGL और TDPL भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र नेताओं ने सरकार से वार्ता के बाद आगे की रणनीति तय करने की बात कही है, लेकिन मांगें नहीं माने जाने पर 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। जानिए छात्रों की प्रमुख मांगें, सरकार की ओर से गठित मंत्रियों की समिति और भर्ती परीक्षा अनियमितता मामले में अब तक हुई 19 गिरफ्तारियों की पूरी जानकारी।

झारखंड में JPSC, JSSC, CGL और TDPL भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच गुरुवार को छात्र नेताओं ने कहा कि वे हेमंत सोरेन सरकार से वार्ता के बाद अपने कदम पर विचार करेंगे। हालांकि, इस दौरान छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव हर हाल में किया जाएगा।

एसडीओ के साथ बैठक से पहले छात्र नेता राधे कुमार ने पत्रकारों से कहा, ‘हमारी कोर टीम के पांच सदस्य बैठक में शामिल होंगे। हम एसडीओ के माध्यम से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाएंगे। वे इन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। सरकार की प्रतिक्रिया मिलने के बाद हम अपने अगले कदम पर निर्णय लेंगे।’

हालांकि, राधे कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आता है तो 10 अगस्त को विधानसभा घेराव तय कार्यक्रम के मुताबिक होगा। उन्होंने कहा, ’10 अगस्त को विधानसभा घेराव प्रस्तावित है। हाल ही में एसडीओ सहित सरकारी अधिकारी हमारे पास आए थे। हमने उन्हें अपनी मांगें बता दी हैं। यदि इन्हें नहीं माना गया तो 10 अगस्त को लाखों छात्रों की भागीदारी के साथ विधानसभा का घेराव किया जाएगा।’

क्या हैं छात्रों की मांगें?
राधे कुमार ने कहा कि छात्र जेपीएससी, जेएसएससी, सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के दौरान टीडीपीएल कंपनी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं भी रद्द की जाएं। इसके अलावा अभय तिवारी से जुड़ी सभी परीक्षाओं को भी निरस्त करने और पूरे मामले की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं रद्द होने के बाद जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, ‘झारखंड गठन के 26 वर्षों में छात्रों के साथ लगातार अन्याय हुआ है। जब भी छात्रों ने आंदोलन किया, उसे दबाने की कोशिश की गई। लेकिन 2026 का यह आंदोलन दबाया नहीं जा सकेगा, क्योंकि छात्र अब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

कैबिनेट मंत्रियों की समिति की गई गठित
झारखंड सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से वार्ता के लिए कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति गठित की है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह समिति छात्रों की समस्याएं सुनेगी। सरकार और छात्रों के बीच सेतु का काम करेगी। उन्होंने छात्रों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।

मामले में अब तक कुल 19 गिरफ्तार
CID ने भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के मामले में पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 19 हो गई है। मामले की जांच SIT द्वारा की जा रही है।

NATIONAL : CM हेमंत का बड़ा फैसला; JSSC-CGL समेत TDPL के सभी एग्जाम और रिजल्ट रद, छात्रों ने मनाया जश्न

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के विरोध के बाद टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद कर दी हैं। इस फैसले में टीडीपीएल से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं, परिणाम और चयन भी शामिल हैं।

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर मचे बवाल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है।

छात्रों के भारी विरोध-प्रदर्शन और विधानसभा में लगातार हो रहे हंगामे के बाद हेमंत सरकार ने विवादित प्राइवेट एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसकी पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद करने का ऐलान कर दिया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मुद्दे के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए, हमने टीडीपीएल (TDPL) से जुड़ी हर चीज को रद करने का फैसला किया है- जिसमें आयोजित की गई परीक्षाएं, घोषित किए गए परिणाम, चयनित या भाग लेने वाले उम्मीदवार और टीडीपीएल द्वारा की गई अन्य सभी गतिविधियां शामिल हैं।

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि 2014 से जितनी भी छोटी बड़ी गलतियां हुई हैं सभी की जांच होगी। इसी के साथ कैबिनेट ने JSSC-CGL को भी रद करने का निर्णय लिया है।उन्होंने कहा कि सरकार रिफॉर्म में पारदर्शिता के साथ काम करेगी। परीक्षा कैसे होनी चाहिए इसका पहले से ही SOP बना हुआ है। अगर SOP का पालन होता तो ये गड़बड़ियां नहीं होती। उस रिफॉर्म में कुछ और बेहतर चीजें जोड़ी जाएंगी। रिफॉर्म के लिए IAS अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का निर्णय लिया है।

NATIONAL : ‘जब मैं पहली बार MLA बना था, वे बच्चे थे’, खड़गे का अमित शाह पर तंज, वंदे मातरम् विवाद पर बोले- ‘हमें देशभक्ति न सिखाएं बीजेपी’

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‘जब मैं पहली बार MLA बना था, वे बच्चे थे’, खड़गे का अमित शाह पर तंज, वंदे मातरम् विवाद पर बोले- ‘हमें देशभक्ति न सिखाएं बीजेपी’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को गोवा में आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। खड़गे ने कहा कि जब वह पहली बार विधायक बने थे, उस समय अमित शाह काफी छोटे थे, लेकिन आज बीजेपी के नेता कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

खड़गे ने कहा, “जब मैं पहली बार MLA बना था, तब अमित शाह बच्चे थे और आज हमें देशभक्ति सिखा रहे हैं।” उन्होंने बीजेपी पर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं को देशभक्ति का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर देश में नफरत और विभाजन की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को एकता और भाईचारे की बात करनी चाहिए, न कि समाज को बांटने वाली राजनीति।खड़गे ने अपने बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि बीजेपी और उसके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी, इसलिए कांग्रेस के लोगों को देशभक्ति का पाठ न पढ़ाया जाए।

उन्होंने बीजेपी पर सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों के विधायकों को तोड़ने और खरीदने का आरोप लगाते हुए उसे ‘चोरों की सरकार’ तक करार दिया। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की नीतियों पर भी सवाल उठाए।

वंदे मातरम् को लेकर फिर सियासी विवाद
गोवा के इसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् को लेकर भी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस के कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो अंतरे ही गाए गए। मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए जाने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् को लेकर पहले ही राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

‘जब मैं पहली बार MLA बना था, वे बच्चे थे’, खड़गे का अमित शाह पर तंज, वंदे मातरम् विवाद पर बोले- ‘हमें देशभक्ति न सिखाएं बीजेपी’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को गोवा में आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। खड़गे ने कहा कि जब वह पहली बार विधायक बने थे, उस समय अमित शाह काफी छोटे थे, लेकिन आज बीजेपी के नेता कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

खड़गे ने कहा, “जब मैं पहली बार MLA बना था, तब अमित शाह बच्चे थे और आज हमें देशभक्ति सिखा रहे हैं।” उन्होंने बीजेपी पर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं को देशभक्ति का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर देश में नफरत और विभाजन की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को एकता और भाईचारे की बात करनी चाहिए, न कि समाज को बांटने वाली राजनीतिखड़गे ने अपने बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि बीजेपी और उसके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी, इसलिए कांग्रेस के लोगों को देशभक्ति का पाठ न पढ़ाया जाए।

उन्होंने बीजेपी पर सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों के विधायकों को तोड़ने और खरीदने का आरोप लगाते हुए उसे ‘चोरों की सरकार’ तक करार दिया। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की नीतियों पर भी सवाल उठाए।

वंदे मातरम् को लेकर फिर सियासी विवाद
गोवा के इसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् को लेकर भी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस के कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो अंतरे ही गाए गए। मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए जाने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् को लेकर पहले ही राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

UP : यूपी से BJP की केंद्रीय टीम में शामिल हो सकते हैं ये 5 नेता; नितिन नवीन का यूपी दौरा, फाइनल हो सकता है नाम

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UP BJP News: यूपी से आने वाले कई नेताओं को भाजपा की केंद्रीय टीम में जगह मिल सकती है। माना जा रहा है कि यूपी चुनाव 2027 से पहले पार्टी प्रदेश के नेताओं को संगठन में जगह देकर बड़ा संदेश दे सकती है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 को लेकर भारतीय जनता पार्टी दिया है। इस क्रम में केंद्र से लेकर प्रदेश स्तर तक पार्टी की गतिविधियों को तेज किया गया है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। इसके बाद संगठन के स्तर पर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी टीम का ऐलान कर एक बड़े वर्ग को संदेश देने का प्रयास किया है। वहीं, अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से गठित होने वाली पार्टी की केंद्रीय टीम में प्रदेश के कई नेताओं को जगह मिलने की बात कही जा रही है। इसके जरिए पार्टी क्षेत्र और सामाजिक समीकरणों को साध कर यूपी चुनाव 2027 की रणनीति को अंतिम रूप देती दिखेगी।

क्या है योजना?
नितिन नवीन की टीम में उत्तर प्रदेश के कई चेहरों को जगह मिलने की बात कही जा रही है। राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश का प्रतिनिधित्व दिखेगा। उत्तर प्रदेश से स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा विनोद सोनकर को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। महेंद्र सिंह और अशोक कटारिया के नाम की भी चर्चा है। दरअसल, 3-4 जुलाई को नितिन नवीन का लखनऊ दौरा है। इसके बाद बड़े परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

इन चेहरों पर गरमाई चर्चा:
स्मृति ईरानी: स्मृति ईरानी पिछले तीन चुनाव से अमेठी लोकसभा सीट पर भाजपा की उम्मीदवार रहीं। लोकसभा चुनाव 2014 में उन्हें राहुल गांधी से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, कांग्रेस की परंपरागत सीट पर स्मृति ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराकर जीत का झंडा गाड़ा। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा से हार झेलनी पड़ी। हालांकि, भाजपा संगठन में लाकर राहुल गांधी को अमेठी से अलग किए जाने वाला संदेश देती दिख सकती है।

विनोद सोनकर: विनोद सोनकर भाजपा की अनुसूचित जाति का बड़ा चेहरा हैं। वे 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कौशांबी सीट पर जीत दर्ज की थी। वे भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में काम कर चुके हैं। उनके जरिए भाजपा विपक्ष के दलित पॉलिटिक्स को निशाना पर लेने की कोशिश करती दिखेगी। इसके अलावा प्रयागराज और आसपास के इलाकों के इस वर्ग के वोट बैंक पर भी पार्टी की नजर रहेगी।

अमरपाल मौर्य: रायबरेली से आने वाले अमरपाल मौर्य का अपने समाज में खासा प्रभाव है। ऊंचाहार सीट से वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें तत्कालीन सपा उम्मीदवार मनोज पांडेय से हार झेलनी पड़ी थी। मनोज पांडेय अब भाजपा में हैं। योगी सरकार में मंत्री बन चुके हैं। वहीं, अमरपाल मौर्य को राज्यसभा भेजा जा चुका है। ऐसे में उन्हें संगठन में लाकर मौर्य समाज को बड़ा संदेश देने का प्रयास होगा।

महेंद्र सिंह: डॉ. महेंद्र सिंह यूपी विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्हें योगी सरकार के पहले कार्यक्रम में मंत्रिमंडल में भी जगह मिली थी। महेंद्र सिंह पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य रह चुके हैं। प्रतापगढ़ से आने वाले महेंद्र सिंह को संगठनात्मक कौशल के कारण नितिन नवीन की टीम में जगह मिलने की बात कही जा रही है।

अशोक कटारिया: अशोक कटारिया यूपी विधान परिषद के सदस्य हैं। वे योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं। बिजनौर से आने वाले अशोक कटारिया किसान परिवार से हैं। अशोक कटारिया गुर्जर समाज से आते हैं। पश्चिमी यूपी में जाट-गुर्जर समाज के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए भाजपा बड़े दांव खेल सकती है। इस कारण अशोक कटारिया का नाम भी खूब चर्चा में है।

NATIONAL : नितिन नवीन की नई टीम घोषित: स्मृति ईरानी, वसुंधरा और राम माधव को बड़ी जिम्मेदारी, इन 12 महिला नेताओं को मौका

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भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का एलान किया। स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया, जबकि वसुंधरा राजे समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का एलान कर दिया। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

वसुंधरा राजे समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया
भाजपा की ओर से जारी सूची के अनुसार, वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, सरदार मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस सूची में अलग-अलग राज्यों के नेताओं को जगह दी गई है, जिससे संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है।

स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को मिली बड़ी जिम्मेदारी
नई टीम में स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। दोनों नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी की जारी सूची में बीएल संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) के पद पर बरकरार रखा गया है। वहीं शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा की नई टीम में महिला नेताओं को भी खास जगह मिली
नई राष्ट्रीय टीम में महिला नेताओं की भी अच्छी भागीदारी दिखाई देती है। वसुंधरा राजे सिंधिया, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, डॉ. भारती प्रवीण पवार और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। इस तरह पार्टी की नई संगठनात्मक टीम में कई महिला नेताओं को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारियां मिली हैं।

नितिन नवीन की टीम में कई राज्यों को मिला प्रतिनिधित्व
भाजपा की नई सूची में राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी के केंद्रीय संगठन में अलग-अलग राज्यों के नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने से राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के विस्तार और समन्वय को मजबूत करने का संकेत मिलता है।

भाजपा की नई टीम में किसे कौन सी जिम्मेदारी मिली?

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष:-
क्रमांक नाम राज्य
1 वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान
2 तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड
3 राम माधव दिल्ली
4 बैजयंत जय पांडा ओडिशा
5 डी. पुरंदेश्वरी आंध्र प्रदेश
6 रेखा वर्मा उत्तर प्रदेश
7 वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी गुजरात
8 डॉ. भारती प्रवीण पवार महाराष्ट्र
9 सरदार मनप्रीत सिंह बादल पंजाब
10 लाल सिंह आर्य मध्य प्रदेश
11 प्रो. एम. नागराजा कर्नाटक
12 प्रो. तारिक मंसूर उत्तर प्रदेश
13 डॉ. मधुचंद्र कर पश्चिम बंगाल

राष्ट्रीय महामंत्री:-
पद नाम राज्य
राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल. संतोष दिल्ली
राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री (संगठन) शिवप्रकाश मुंबई
राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री (संगठन) सौदान सिंह चंडीगढ़
राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े महाराष्ट्र
राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल दिल्ली
राष्ट्रीय महामंत्री बिप्लब कुमार देब त्रिपुरा
राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सतीश पूनिया राजस्थान
राष्ट्रीय महामंत्री गजेंद्र पटेल मध्य प्रदेश
राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय महामंत्री संजय भाटिया हरियाणा
राष्ट्रीय सचिव:-
क्रमांक नाम राज्य
1 कविता पाटीदार मध्य प्रदेश
2 के. सुरेंद्रन केरल
3 डॉ. भोला सिंह उत्तर प्रदेश
4 डॉ. प्रदीप वर्मा झारखंड
5 जगदीश ईश्वरभाई पटेल गुजरात
6 डॉ. संदीप पाठक दिल्ली
7 फांगनोन कोन्याक नागालैंड
8 संगीता यादव उत्तर प्रदेश
9 अनिल एंटनी केरल
10 डॉ. एम. वेंकटेशन तमिलनाडु
11 मनोज तिग्गा पश्चिम बंगाल
12 सिद्धार्थ शंभू बिहार
13 डॉ. स्वदेश सिंह दिल्ली
14 श्री मृगांका बरमन असम
15 रोहन गुप्ता गुजरात
16 जय प्रकाश दिल्ली
कोषाध्यक्ष और संयुक्त कोषाध्यक्ष:-
पद नाम राज्य
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पीयूष गोयल महाराष्ट्र
राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष राजेश मंगल राजस्थान
भाजपा मोर्चों के अध्यक्ष:-
क्रमांक मोर्चा अध्यक्ष राज्य
1 युवा मोर्चा डॉ. हेमंत जोशी गुजरात
2 महिला मोर्चा रूप कुमारी चौधरी छत्तीसगढ़
3 ओबीसी मोर्चा अमरपाल मौर्य उत्तर प्रदेश
4 किसान मोर्चा बंसीलाल गुर्जर मध्य प्रदेश
5 एससी मोर्चा शिवेश कुमार राम बिहार
6 एसटी मोर्चा डॉ. मन्नालाल रावत राजस्थान
7 अल्पसंख्यक मोर्चा कुंवर बासित अली उत्तर प्रदेश
मीडिया और सोशल मीडिया पदाधिकारी:-
क्रमांक पद नाम राज्य
1 मीडिया संयोजक अनिल बलूनी उत्तराखंड
2 मीडिया सह-संयोजक आशीष उषा अग्रवाल मध्य प्रदेश
3 मीडिया सह-संयोजक प्रदीप भंडारी दिल्ली
4 मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव दिल्ली
5 सोशल मीडिया संयोजक दीपक म्हस्के छत्तीसगढ़
6 सोशल मीडिया सह-संयोजक प्रीति गांधी महाराष्ट्र
7 सोशल मीडिया सह-संयोजक शिवानंद द्विवेदी दिल्ली
8 सोशल मीडिया सह-संयोजक आलोक भट्ट उत्तराखंड
9 सोशल मीडिया सह-संयोजक अरुण यादव हरियाणा
पीएम मोदी ने भाजपा की नई टीम को दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों और पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने वाले नेताओं को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि नई टीम में संगठन का अनुभव, नई ऊर्जा और जमीनी स्तर से जुड़ाव का बेहतर तालमेल देखने को मिल रहा है।

पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि नवनियुक्त पदाधिकारी पार्टी को और मजबूत करने के लिए पूरी क्षमता से काम करेंगे। उन्होंने कहा कि नई टीम का ध्यान जनसेवा पर भी केंद्रित रहेगा। प्रधानमंत्री ने सभी नेताओं को उनकी नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

NATIONAL : राम मंदिर दान का होगा हिसाब: SIT को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी की जांच कर रही एसआईटी को जांच में तेजी लाने और उसे सही नतीजे तक पहुंचाने को कहा। कोर्ट ने जांच की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर निष्पक्षता से विचार करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की जांच कर रही कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम एसआईटी से अपनी जांच में तेजी लाने और दो सप्ताह में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने एसआईटी को दान में कथित चोरी के मामले में अब तक हुई जांच की प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट दान प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नए निर्देश जारी कर सकता है।

याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर निष्पक्षता से विचार करने का निर्देश
पीठ ने एसआईटी से कहा कि जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच में किसी भी तरह की कमी न रहे और पूरे मामले की पड़ताल प्रभावी तरीके से आगे बढ़े।

रिपोर्ट के बाद दान प्रबंधन पर आ सकते हैं नए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट देखने के बाद वह राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले दान के प्रबंधन में सुधार के लिए जरूरी निर्देश जारी कर सकता है। यानी कोर्ट की नजर केवल कथित हेराफेरी की जांच पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर भी है।

27 जुलाई को चार सदस्यीय एसआईटी के गठन का लिया था संज्ञान
इससे पहले 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी की जांच के लिए IGP किरण एस. की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय एसआईटी का संज्ञान लिया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने के लिए भी कहा था।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर कोर्ट ने दिया था जोर
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसमें ‘सुधारात्मक कदम उठाने होंगे’। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि दान के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

20 जुलाई को एसआईटी गठित करने की संभावना पर मांगी थी जानकारी
20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए SIT गठित करने की क्या संभावना है। कोर्ट की इस पहल के बाद मामले की जांच को लेकर राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई आगे बढ़ी और विशेष जांच टीम का गठन किया गया।

13 जुलाई को पुलिस से मांगी थी स्टेटस रिपोर्ट
इससे पहले 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही दान की कथित चोरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस भी जारी किया था।

NATIONAL : मनमाने हवाई किराये पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, 7 दिन में नियम जारी करें केंद्र, कहा- उड़ान रोक देंगे

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सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में उतार-चढ़ाव और अतिरिक्त शुल्क से जुड़ी याचिका पर केंद्र को भारतीय विमान अधिनियम 2024 के नियम सात दिनों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने एयरलाइंस के नियम नहीं मानने पर उड़ान रोकने समेत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।

नई दिल्ली: हवाई किराये में लगातार उतार-चढ़ाव और यात्रियों से वसूले जा रहे अतिरिक्त शुल्क को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि भारतीय विमान अधिनियम, 2024 के तहत नियम को अंतिम रूप देने में तीन हफ्ते का समय लगेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों को 7 दिनों के भीतर प्रकाशित किया जाए। बेंच ने यह भी कहा कि अगर एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्हें जमीन पर उतारने यानी उड़ान रोकने तक का कदम उठाया जा सकता है।

केंद्र ने कहा, नियम बनाने की प्रक्रिया तेज की गई है
सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। केंद्र के और समय मांगने पर बेंच ने सुनवाई 7 सितंबर को तय की। हवाई किराये को नियंत्रित करने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मी नारायणन की अर्जी पर सुनवाई हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री के दिए बयान का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि सरकार हवाई किराये की सीमा तय नहीं कर सकती।

‘नियामक कितना प्रभावी साफ नहीं’
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने नियमों का मसौदा सीलबंद कवर में पेश किया। उन्होंने बताया कि मसौदे पर अंतिम स्तर की चर्चा चल रही है। अदालत ने मसौदे को देखने के बाद कहा कि इसमें नियामकीय व्यवस्था का प्रस्ताव तो है, लेकिन यह साफ नहीं है कि नियामक की भूमिका कितनी प्रभावी होगी।

NATIONAL : चुनाव में काले धन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जब्ती की सूचना 24 घंटे में देने का निर्देश; और क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि चुनावी प्रक्रिया में काला धन लोकतंत्र, कानून के शासन और पूरी चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करता है। शीर्ष अदालत ने चुनाव के दौरान अवैध तरीके से हासिल धन की बरामदगी से जुड़े आपराधिक मामलों की समय पर जांच और जल्द सुनवाई पूरी करने पर जोर दिया।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा, “इस पसंद को प्रभावित करने वाले किसी भी बाहरी कारक में लोकतंत्र के मूल स्वरूप को कमजोर करने की क्षमता है।” पीठ ने कहा कि जब अवैध धन शामिल होता है तो व्यक्ति की ओर से किया गया चुनाव स्वतंत्र नहीं रहता। उसकी पसंद मौद्रिक या अन्य तरह के लाभ से प्रभावित हो जाती है। कभी ये लाभ वास्तविक होते हैं तो कभी भ्रामक वादों के रूप में होते हैं।

पीठ ने कहा, “चुनावी प्रक्रिया में काला धन, यानी जिस मुद्दे पर हम यहां विचार कर रहे हैं, ऐसा ही एक पहलू है जो लोकतंत्र, कानून के शासन और खुद चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करता है।” शीर्ष अदालत ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया में संदिग्ध धन के प्रसार और उसे दूषित करने का मुद्दा कोई हाल की घटना नहीं है। इसे बार-बार पहचाना गया है।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान नकदी और संपत्ति की जब्ती का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि “जब्ती करने वाले प्राधिकारी को 24 घंटे के भीतर इसकी सूचना जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत को देनी होगी।” साथ ही लिखित कारणों में यह बताना होगा कि जब्त नकदी या अन्य संपत्ति का संदिग्ध चुनावी अपराध से प्रथम दृष्टया क्या संबंध है।

पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि जब प्राथमिकी दर्ज हो जाती है तो जांच अधिकारी को हर संभव प्रयास करके एक साल के भीतर जांच पूरी करनी होगी। पीठ ने निर्देश दिया, “यदि यह समयसीमा पार होती है तो इसके कारण दर्ज किए जाएंगे और भारत निर्वाचन आयोग को बताए जाएंगे।”

यह आदेश कर्नाटक सरकार की ओर से दायर एक याचिका पर आया। यह मामला 2014 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है, जब बेल्लारी जिले में चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर काला धन जब्त किया गया था। पीठ ने निर्वाचन आयोग और राज्य सरकारों को 18 नवंबर तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

अदालत ने निर्देश दिया कि जांच अधिकारी संबंधित जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त की मंजूरी के बाद नोडल अधिकारी के माध्यम से निर्वाचन आयोग को जांच की स्थिति की तिमाही रिपोर्ट देगा। शीर्ष अदालत ने कहा, “जब स्थैतिक निगरानी दल (SST) जांच के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक की राशि पाते हैं तो इसकी जानकारी आयकर अधिकारियों को भेजी जाएगी।”

पीठ ने लोकतंत्र में चुनावों की अनिवार्यता का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग चुनाव लड़ रहे हैं, वे खुद चुनाव कराने की जिम्मेदारी नहीं संभाल सकते। पीठ ने कहा, “अगर ऐसा होता है तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया ही निरर्थक हो जाएगी।” अदालत ने निर्देश दिया कि उम्मीदवारों और मौजूदा सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। इसमें चुनावों के बार-बार होने की प्रकृति को ध्यान में रखा जाए।

मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को प्रक्रिया का पालन करने और ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई व निपटारे के लिए अदालतें निर्धारित करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, “किसी विशेष चुनावी चक्र में उम्मीदवारों के खिलाफ मामलों को वापस लेने के लिए संबंधित उच्च न्यायालय की मंजूरी अनिवार्य है।” अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों का भी उल्लेख किया।

पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हलफनामे में 2024 के लोकसभा चुनाव और 2019 से 2025 के बीच हुए विधानसभा चुनावों से जुड़े लंबित मामलों की संख्या का विवरण दिया गया है। इससे पता चलता है कि काफी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, “संबंधित अदालतों को पूरी तत्परता के साथ मामलों को उनके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।”

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