Thursday, September 17, 2026
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NATIONAL : खरगे की बैठक से पहले 108 BLA का इस्तीफा, गोवा में कांग्रेस को झटका

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गोवा दौरे के बीच कांग्रेस को झटका लगा है. पार्टी के 108 BLA ने इस्तीफा दे दिया है. खरगे उन्हें संबोधित करने वाले थे.

गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की बैठक से पहले सोमवार (17 अगस्त) को कांग्रेस के 108 बीएलए ने इस्तीफा दे दिया. खरगे को आज ही गोवा में बीएलए की बैठक को संबोधित करना था. बताया जा रहा है कि आने वाले समय में और भी बीएलए इस्तीफा दे सकते हैं.

मल्लिकार्जुन खरगे के गोवा दौरे के दौरान पार्टी के जमीनी संगठन से जुड़े 108 BLA के इस्तीफे से कांग्रेस के भीतर हलचल बढ़ गई है. BLA चुनाव के दौरान बूथ स्तर पर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और BLA भी इस्तीफा दे सकते हैं. इससे गोवा में कांग्रेस के संगठन और चुनावी तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

क्या है BLA की भूमिका?

बूथ लेवल एजेंट (BLA) पार्टी की ओर से बूथ स्तर पर काम करने वाला प्रतिनिधि होता है. चुनाव के दौरान मतदाता सूची से जुड़े काम, बूथ की जानकारी और चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखने में उसकी भूमिका रहती है. ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में BLA का इस्तीफा कांग्रेस के लिए संगठनात्मक स्तर पर चिंता का विषय माना जा रहा है.

मल्लिकार्जुन खरगे का पहला गोवा दौरा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे गोवा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले हैं. इस संबंध में पहले राज्य पार्टी प्रमुख गिरीश चोडनकर ने PTI को बताया था कि कांग्रेस अगले साल की शुरुआत में होने वाले गोवा विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के बाद यह पहली बार है जब खरगे गोवा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. 40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में, कांग्रेस के पास अभी विपक्ष के नेता यूरी अलेमाओ सहित तीन MLA हैं. कांग्रेस ने 2022 के गोवा चुनावों में 11 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में उसके 8 MLA सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

NATIONAL : योगगुरु बाबा रामदेव का बड़ा बयान: बोले- देश में बहुत घपला हो रहा है, बेची जा रही नौकरियां, दोबारा आंदोलन की कही बात

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हरिद्वार (उत्तराखंड): योगगुरु बाबा रामदेव ने जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. साथ ही बाबा रामदेव ने खासकर सरकारी नौकरियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नसीहत दी है. झारखंड में छात्रों के आंदोलन के सवाल पर योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि देश में चारों तरफ हंगामा है. छोटे छोटे स्कूल कॉलेजों से बच्चे निकल रहे हैं. वहां टीचर, किताब, लाइट, पानी और शौचालय जैसी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं की कमी है. जहां सब कुछ है, वहां पढ़ाई में नकल हो जाती है, पेपर लीक हो जाता है.

बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि खासकर सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू के दौरान 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है. अपने जाति, वर्ग, समुदाय और विचार के लोगों को नौकरी देते हैं और बाकियों को धक्का मार देते हैं. यह सब अपमानजनक और लोकतंत्र के खिलाफ है. एक तरफ हम सत्यमेव जयते की बात कर रहे हैं. दूसरी तरफ पहले से तय करके लाखों करोड़ों रुपए लेकर नौकरियां बांटी जा रहीं हैं. यदि देश में आंदोलन ही चलते रहे तो, यह देश कैसी चलेगा.

स्वामी रामदेव ने कहा कि दो टूक कहा कि अभी भी समय है, सुधर जाओ. नहीं तो देश में और भी ज्यादा आंदोलन हो सकते हैं. स्वामी रामदेव ने कहा वैसे तो आंदोलन के नाम पर वह अराजकता का समर्थन और उसे बर्दाश्त नहीं करते हैं. लेकिन यह भी सच है कि देश में घपला भी बहुत है. ये घपले ठीक कर लो, कहीं ऐसा न हो कि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन करने पड़े. स्वामी रामदेव ने कहा कि आज देश में नफरत और घृणा का ऐसा माहौल बन गया है कि देश की संसद में पक्ष और विपक्ष पाकिस्तान और हिंदुस्तान की तरह एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं.

राजनीतिक और जातीय तौर पर नफरत करने वाले लोगों पर धिक्कार है. देश में ऐसा नहीं होना चाहिए. सत्ता पक्ष को विपक्ष से माता पिता के समान प्यार करना चाहिए. वहीं जेन जी प्रोटेस्ट में शामिल युवक युवतियों पर भी स्वामी रामदेव ने सवाल खड़े किये, उन्होंने युवक युवतियों पर भी तंज कसा. लेकिन आजादी के नाम पर ऐसा नहीं होना चाहिए. बता दें कि योगगुरु स्वामी रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंजलि योगपीठ में ध्वजारोहण किया और देश को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी. इस दौरान उनके साथ पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण और कई साधक उपस्थित रहे. कई देशभक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए.

NATIONAL : किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर बिताई रात, पीएम मोदी और हरियाणा सरकार से दिल्ली तक शांतिपूर्ण मार्च की अपील

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भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रमुख जगजीत सिंह डल्लेवाल ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की कि वे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने दें।

भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रमुख जगजीत सिंह डल्लेवाल ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की कि वे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने दें। उन्होंने कहा कि उनकी योजना सीमित संख्या में शांतिपूर्वक पैदल मार्च करने की है।

विरोध प्रदर्शन करते हुए दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों के एक समूह ने बीती रात सड़क पर ही अपने बिस्तर बिछा लिए और पंजाब-हरियाणा के बीच खनौरी बॉर्डर पर रात बिताने की तैयारी की। हरियाणा पुलिस ने दिल्ली की ओर किसानों के एक नए मार्च को रोकने के लिए खनौरी चेकपॉइंट पर भारी बैरिकेडिंग की।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि हमारे संगठन, हमारे गैर-राजनीतिक समूह में हजारों किसानों को यहां लाने की क्षमता है। हालांकि, हमारी योजना सीमित संख्या में लोगों के साथ शांतिपूर्वक, पैदल आगे बढ़ने की है। किसान पैदल निकले थे लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया और अब वे यहीं फंसे हुए हैं। मैं हरियाणा सरकार और भारत के प्रधानमंत्री से अपील करना चाहता हूं कि कृपया हमें आगे बढ़ने दें। हरियाणा सरकार के साथ हमारा कोई झगड़ा नहीं है। व्यापार समझौता एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। किसानों के लिए MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी देने वाला कानून बनवाना बहुत जरूरी है। किसानों का कर्ज माफ करना और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना भी हमारी मुख्य मांगें हैं। सरकार को इन मांगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। पीएम मोदी को उनकी तकलीफ और दर्द को समझने की कोशिश करनी चाहिए। दूसरी बात, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट इस मामले का संज्ञान ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले का संज्ञान ले सकता है और आगे का रास्ता बना सकता है।

NATIONAL : कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर SC में आज सुनवाई, कर्नाटक को पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग

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कावेरी जल विवाद ने तमिलनाडु में सरकार बदलते ही अब नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिसमें कर्नाटक सरकार से कावेरी जल का तत्काल वितरण करने का निर्देश मांगा गया है।

शीर्ष अदालत की सूची के अनुसार यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ व संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगा। 12 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु सरकार और अन्य (जिसमें द्रमुक भी शामिल है) द्वारा दायर याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी।

कावेरी का नहीं मिल रहा उचित हिस्सा
इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि राज्य को वर्षा की कमी वाले वर्ष में कावेरी जल का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।

जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की टीवीके सरकार ने तीन अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार से जल का तत्काल वितरण करने का निर्देश मांगा गया था।

कर्नाटक ने कम मात्रा में छोड़ा पानी
तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) द्वारा उसे आवंटित मात्रा और उसके पड़ोसी कर्नाटक द्वारा छोड़े गए जल की मात्रा बहुत कम थी।

28 जुलाई को सीडब्ल्यूआरसी की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए 3,500 क्यूसेक्स जल छोड़ने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार के अनुसार, 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलीगुंडलु में छोड़े गए जल की मात्रा 158 से 550 क्यूसेक्स के बीच रही।

तमिलनाडु सरकार ने रखी अपनी बात
तमिलनाडु सरकार की विज्ञप्ति में कहा गया कि तीन अगस्त तक कर्नाटक के जलाशयों (केआरएस, कबिनी, हरंगी और हेमावती) में संयुक्त कुल भंडारण 77.537 टीएमसी था और कर्नाटक को तमिलनाडु का उचित हिस्सा अनुपात में छोड़ने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

तमिलनाडु का कहना है कि 4.536 टीएमसी जल आवंटन का कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का आदेश बहुत कम है। कर्नाटक ने तमिलनाडु के साथ जल का उचित हिस्सा साझा करने में विफल रहा है और मात्रा 26.954 टीएमसी है।

NATIONAL : भारत की रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग, स्वदेशी जेट पावर्ड ‘दिव्यास्त्र Mk3’ ने भरी पहली सफल उड़ान

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भारत स्थित एक प्राइवेट कंपनी ने स्वदेशी रूप से विकसित जेट-पावर्ड प्रिसीजन स्ट्राइक सिस्टम दिव्यास्त्र Mk3 की सफल उड़ान कराई। कंपनी के सह-संस्थापकों ने इसे महज टेस्ट फ्लाइट नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन बताया।भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने भारत में विकसित अगली पीढ़ी के जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन ‘ दिव्यास्त्र Mk3 ‘ की सफल पहली उड़ान पूरी की है। कंपनी के मुताबिक यह उड़ान 11 अगस्त 2026 को हुई।

रविवार को कंपनी ने दावा किया कि दिव्यास्त्र Mk3 भारत का पहला स्वदेशी जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन है। इसमें भारतीय एयरफ्रेम, स्वदेशी जेट इंजन, स्वतंत्र तकनीक और स्वदेशी फायरपावर का इस्तेमाल किया गया है।

क्या है लॉइटरिंग म्यूनिशन
लॉइटरिंग म्यूनिशन ऐसा हथियार होता है, जो लक्ष्य क्षेत्र के आसपास कुछ समय तक मंडरा सकता है और लक्ष्य मिलने पर उस पर हमला करता है। इसी वजह से इसे आम बोलचाल में कामिकाजी ड्रोन कहा जाता है।

एक साल में तैयार हुआ सिस्टम
कंपनी के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर पहली उड़ान तक दिव्यास्त्र Mk3 को महज एक साल में विकसित किया गया। इसमें इस्तेमाल किया गया जेट इंजन भी स्वदेशी है, जिसे DG Propulsion ने विकसित किया है। कंपनी का कहना है कि इस सिस्टम में न तो आयातित जेट इंजन का इस्तेमाल किया गया है और न ही किसी विदेशी महत्वपूर्ण सब-सिस्टम पर निर्भरता रखी गई है। इसे भारत में विकसित करने के बाद भारत में ही उड़ाया गया है।

‘यह सिर्फ टेस्ट फ्लाइट नहीं’
कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सह-संस्थापकों ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षण उड़ान नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत ने बड़े पैमाने और तेज गति से यह साबित किया है कि वह अपने देश के भीतर ही जेट-पावर्ड प्रिसीजन स्ट्राइक सिस्टम की परिकल्पना, इंजीनियरिंग और उड़ान परीक्षण कर सकता है।

कंपनी ने दिव्यास्त्र Mk3 को आत्मनिर्भर भारत इन एक्शन बताते हुए कहा कि इसकी सफलता भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और उन्नत मानव रहित प्रणालियों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। द स्काई हैज चेंज्ड के मैसेज के साथ पेश किए गए दिव्यास्त्र Mk3 की पहली उड़ान को भारत के स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

NATIONAL : ‘लोकतंत्र की साख को खत्म करने का प्रयास’, संसद में विपक्ष के हंगामे पर बोले राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश

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राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही बाधित करना लोकतंत्र की नींव और संसदीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रहार है.राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण ने संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान डालना देश में लोकतंत्र की नींव पर बड़ा प्रहार है। उन्होंने कहा, इससे संसदीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश होती है।

ANI को दिए एक इंटरव्यू में हरिवंश ने कहा कि संसद में बार-बार संविधान का जिक्र किया जाता है और उसकी प्रतियां लेकर प्रदर्शन किए जाते हैं। हम संविधान की पुस्तके लेकर घूमते हैं मगर हमारा आचरण कैसा है? मैं किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं कह रहा हूं। आज हजारों की संख्या में लोग संविधान की किताब लेकर घूमते हैं। संविधान पर चर्चा के दौरान करीब 2400 संशोधन पेश किए गए थे।’

‘संसद के कामकाज में अवरोध पैदा करने वाले के खिलाफ गुस्सा’
उन्होंने आगे कहा, ‘जो लोग संसद के कामकाज में अवरोध पैदा करते हैं उनके प्रति मेरा गुस्सा है। संसद की कल्पना हमारे लिए लोकतंत्र के मंदिर की तरह है। हमारी सत्ता में लोग आते-जाते रहते हैं और यह लोकतंत्र की खूबसूरती है मगर हमें संकट में एक होकर भारत को बचाना है। दुनिया भर की भू-राजनीति को देखते हुए हमें मिलकर काम करना चाहिए। हमारी पीढ़ी को पूछना चाहिए कि आखिर क्यों हमने 2014 के बाद विकसित भारत का सपना देखा था।’

‘पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी’
हरिवंश ने कहा, ‘जिम्मेदारी सरकार और विपक्ष की बराबर है। अगर एक पक्ष भी कार्यवाही रोकने के लिए दृढ़ हो जाए तो सदन में वही स्थिति देखने को मिलती है, जो हमने हाल में देखी।’

उन्होंने कहा कि वह यह बात राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर नहीं, बल्कि देश के एक चिंतित नागरिक के रूप में कह रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे पत्रकारिता अनुभव, जेपी आंदोलन से जुड़ाव और पिछले 12 वर्षों से सांसद के रूप में अपने अनुभव का भी जिक्र किया।

‘लोकतंत्र की साख को खत्म करने का प्रयास’
संसद के मानसून सत्र 2026 पर उपसभापति हरिवंश नारायण ने कहा, ‘आज मैं आपसे इस देश के चिंतित नागरिक के रूप में बात कर रहा हूं। मैं पिछले 12 वर्षों से सांसद हूं, पर मैं आज एक नागरिक दर्शक के रूप में बात करना चाहता हूं। इस सत्र पर यदि मुझे टिप्पणी करनी हो तो मैं कहना चाहूंगा कि इस सत्र में कामकाज कितने हुए उसे घोषित आंकड़े बता रहे हैं लेकिन संसदीय लोकतंत्र की साख को खत्म करने, इसे अविश्वसनीय और विफल बनाने, जन प्रतिनिधियों के प्रति समाज में, लोकमानस में अनास्था पैदा करने बल्कि मैं कहूं तो संसदीय लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में इस तरह का प्रयास किया गया है।

उन्होंने आगे कहा, ‘इस देश में संसदीय लोकतंत्र से बेहतर मंच नहीं हो सकता। अब फैसला संसद में नहीं हो रहे, सड़कों पर हो, ये बौद्धिक विमर्श अगर इस देश में चले और संसद में भी इस तरह का अवरोध दिखाई दे तो मेरे जैसे इस देश के करोड़ों नागरिकों के लिए इससे अधिक चिंता की बात नहीं हो सकती।

हरिवंश नारायण ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को कोट करते हुए कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1958 में राज्यसभा के सदस्यों को क्या कहा था ये मैं आज आपको बताना चाहूंगा। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और अनुशासन, संसद देश के बाकी हिस्सों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। हमारी तरफ लाखों-करोड़ों निगाहें लगी हैं, उन निगाहों को रास्ता दिखाने का काम हमारा है। क्या हम उस पर खरे उतरे, क्या हम उसमें सफल हुए? मैं इस पीड़ा के कारण ये बात कह रहा हूं जो लोकतंत्र की साख पर सीधा प्रहार था। संसद चलाने का सामान्य दायित्व सरकार का भी है और विपक्ष का भी है लेकिन एक भी पक्ष यदि तैयार हो कि हम इसे चलने नहीं देंगे तो ऐसा ही दृश्य होगा जिसे हम देख रहे हैं।’

पेपर लीक के मुद्दे पर क्या बोले?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण ने देश के कई राज्यों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर हो रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर कहा, ‘पेपर लीक का यह मुद्दा 25, 30 या 40 सालों से चला आ रहा है। उत्तर प्रदेश में एक सरकार इसलिए गिर गई थी क्योंकि उसने परीक्षाओं में नकल रोकने की कोशिश की थी। मौजूदा रक्षा मंत्री उस समय वहां मंत्री थे। ऐसा क्यों है कि समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में अब एक समिति बनाई गई है? 1960 के दशक में ऐसा क्यों नहीं किया गया, जब सिस्टम की कमियां साफ दिखने लगी थीं?।’

उन्होंने कहा, ‘मैं छात्रों से अपील करता हूं कि वे सिर्फ शिक्षा से आगे बढ़कर सोचें और राज्यों में गवर्नेंस (शासन-व्यवस्था) में भी इसी तरह के सिस्टम से जुड़े सुधारों की जरूरत पर विचार करें। हर किसी ने छात्र आंदोलन के पीछे के दर्द को समझा, और मैं सरकार की संवेदनशीलता की तारीफ करता हूं। उन्होंने तुरंत सभी मांगें मान लीं, जिसके लिए मैं उनका आभारी हूं।’राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही बाधित करना लोकतंत्र की नींव और संसदीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रहार है।

नई दिल्ली: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण ने संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान डालना देश में लोकतंत्र की नींव पर बड़ा प्रहार है। उन्होंने कहा, इससे संसदीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश होती है।

ANI को दिए एक इंटरव्यू में हरिवंश ने कहा कि संसद में बार-बार संविधान का जिक्र किया जाता है और उसकी प्रतियां लेकर प्रदर्शन किए जाते हैं। हम संविधान की पुस्तके लेकर घूमते हैं मगर हमारा आचरण कैसा है? मैं किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं कह रहा हूं। आज हजारों की संख्या में लोग संविधान की किताब लेकर घूमते हैं। संविधान पर चर्चा के दौरान करीब 2400 संशोधन पेश किए गए थे।’

‘संसद के कामकाज में अवरोध पैदा करने वाले के खिलाफ गुस्सा’
उन्होंने आगे कहा, ‘जो लोग संसद के कामकाज में अवरोध पैदा करते हैं उनके प्रति मेरा गुस्सा है। संसद की कल्पना हमारे लिए लोकतंत्र के मंदिर की तरह है। हमारी सत्ता में लोग आते-जाते रहते हैं और यह लोकतंत्र की खूबसूरती है मगर हमें संकट में एक होकर भारत को बचाना है। दुनिया भर की भू-राजनीति को देखते हुए हमें मिलकर काम करना चाहिए। हमारी पीढ़ी को पूछना चाहिए कि आखिर क्यों हमने 2014 के बाद विकसित भारत का सपना देखा था।’

‘पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी’
हरिवंश ने कहा, ‘जिम्मेदारी सरकार और विपक्ष की बराबर है। अगर एक पक्ष भी कार्यवाही रोकने के लिए दृढ़ हो जाए तो सदन में वही स्थिति देखने को मिलती है, जो हमने हाल में देखी।’

उन्होंने कहा कि वह यह बात राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर नहीं, बल्कि देश के एक चिंतित नागरिक के रूप में कह रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे पत्रकारिता अनुभव, जेपी आंदोलन से जुड़ाव और पिछले 12 वर्षों से सांसद के रूप में अपने अनुभव का भी जिक्र किया।

‘लोकतंत्र की साख को खत्म करने का प्रयास’
संसद के मानसून सत्र 2026 पर उपसभापति हरिवंश नारायण ने कहा, ‘आज मैं आपसे इस देश के चिंतित नागरिक के रूप में बात कर रहा हूं। मैं पिछले 12 वर्षों से सांसद हूं, पर मैं आज एक नागरिक दर्शक के रूप में बात करना चाहता हूं। इस सत्र पर यदि मुझे टिप्पणी करनी हो तो मैं कहना चाहूंगा कि इस सत्र में कामकाज कितने हुए उसे घोषित आंकड़े बता रहे हैं लेकिन संसदीय लोकतंत्र की साख को खत्म करने, इसे अविश्वसनीय और विफल बनाने, जन प्रतिनिधियों के प्रति समाज में, लोकमानस में अनास्था पैदा करने बल्कि मैं कहूं तो संसदीय लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में इस तरह का प्रयास किया गया है।

उन्होंने आगे कहा, ‘इस देश में संसदीय लोकतंत्र से बेहतर मंच नहीं हो सकता। अब फैसला संसद में नहीं हो रहे, सड़कों पर हो, ये बौद्धिक विमर्श अगर इस देश में चले और संसद में भी इस तरह का अवरोध दिखाई दे तो मेरे जैसे इस देश के करोड़ों नागरिकों के लिए इससे अधिक चिंता की बात नहीं हो सकती।

हरिवंश नारायण ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को कोट करते हुए कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1958 में राज्यसभा के सदस्यों को क्या कहा था ये मैं आज आपको बताना चाहूंगा। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और अनुशासन, संसद देश के बाकी हिस्सों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। हमारी तरफ लाखों-करोड़ों निगाहें लगी हैं, उन निगाहों को रास्ता दिखाने का काम हमारा है। क्या हम उस पर खरे उतरे, क्या हम उसमें सफल हुए? मैं इस पीड़ा के कारण ये बात कह रहा हूं जो लोकतंत्र की साख पर सीधा प्रहार था। संसद चलाने का सामान्य दायित्व सरकार का भी है और विपक्ष का भी है लेकिन एक भी पक्ष यदि तैयार हो कि हम इसे चलने नहीं देंगे तो ऐसा ही दृश्य होगा जिसे हम देख रहे हैं।’

पेपर लीक के मुद्दे पर क्या बोले?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण ने देश के कई राज्यों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर हो रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर कहा, ‘पेपर लीक का यह मुद्दा 25, 30 या 40 सालों से चला आ रहा है। उत्तर प्रदेश में एक सरकार इसलिए गिर गई थी क्योंकि उसने परीक्षाओं में नकल रोकने की कोशिश की थी। मौजूदा रक्षा मंत्री उस समय वहां मंत्री थे। ऐसा क्यों है कि समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में अब एक समिति बनाई गई है? 1960 के दशक में ऐसा क्यों नहीं किया गया, जब सिस्टम की कमियां साफ दिखने लगी थीं?।’

उन्होंने कहा, ‘मैं छात्रों से अपील करता हूं कि वे सिर्फ शिक्षा से आगे बढ़कर सोचें और राज्यों में गवर्नेंस (शासन-व्यवस्था) में भी इसी तरह के सिस्टम से जुड़े सुधारों की जरूरत पर विचार करें। हर किसी ने छात्र आंदोलन के पीछे के दर्द को समझा, और मैं सरकार की संवेदनशीलता की तारीफ करता हूं। उन्होंने तुरंत सभी मांगें मान लीं, जिसके लिए मैं उनका आभारी हूं।’

NATIONAL : बंगाल के स्कूल पर सवाल: CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत, कटघरे में भाजपा; CM शुभेंदु ने क्या कहा?

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पश्चिम बंगाल में स्कूल की हालत पर सवाल उठाने वाले युवा कार्यकर्ता के पिता की मौत का मामला तूल पड़कने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नाम की सोशल मीडिया मुहिम से जुड़े कार्यकर्ता के पिता की मौत के बाद सीजेपी ने भाजपा पर आरोप लगाए हैं। सीएम शुभेंदु अधिकरी ने कहा है कि तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस दो अन्य की तलाश कर रही है। उन्होंने मामले में पूरा इंसाफ होने का भरोसा भी दिलाया।

सोशल मीडिया मुहिम- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े कार्यकर्ता और हजारों युवा राष्ट्रव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के इंडस क्षेत्र में सीजेपी के अभियान से जुड़े एक कार्यकर्ता के पिता की मौत होने की घटना सुर्खियों में है। पीड़ित पक्ष ने राज्य में सत्ताधारी दल- भाजपा को घेरने का प्रयास किया है। सीजेपी ने स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट का आरोप लगाया है। मृतक की शिनाख्त एसके मोहम्मद मफिक के रूप में हुई है।

बांकुड़ा जिले के इंडस क्षेत्र का मामला, अभिजीत दीपके क्या बोले?
रविवार को मामला तूल पकड़ने के बाद सीजेपी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने रविवार दोपहर को आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। दीपके ने एक्स पर लिखा कि अब्दुल ने बंगाल में उस सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया था, जहां वह कभी पढ़ा था। उन्होंने कहा कि बेहतर स्कूलों की मांग करने पर लोगों की हत्या करना निंदनीय है। सीजेपी अब्दुल और उनके परिवार के साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया क्या?
इस मामले में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में नामित पांच में से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी दो की तलाश जारी है। अधिकारी ने कोलकाता में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि शिकायत में इन लोगों को भाजपा कार्यकर्ता नहीं बताया गया था। शिकायत में उन्हें अज्ञात व्यक्ति कहा गया था। पुलिस शिकायत में नामित दो संदिग्धों की तलाश कर रही है। एफआईआर में नामित लोगों के अलावा पांच अन्य लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

राज्य शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि इस घातक हमले में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। पॉल ने कहा कि भारत भर में लाखों भाजपा कार्यकर्ता हैं। हमारी पार्टी के लिए हर कार्यकर्ता के चरित्र को सुधारना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हम तृणमूल कांग्रेस नहीं हैं। हम व्यक्ति की मृत्यु के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को गिरफ्तार करेंगे। भाजपा के लिए काम करने से किसी को भी किसी पर जूता फेंकने का भी अधिकार नहीं मिल जाता।

सीजेपी का बयान, मृतक की पत्नी क्या बोलीं?
सीजेपी का आरोप है कि स्कूल ठीक करो अभियान के तहत एक सरकारी स्कूल का जायजा लेने के बाद बांकुड़ा जिले के कारिसुंडा इलाके में अब्दुल के घर पर हमला हुआ। अब्दुल ने 13 अगस्त को गांव के स्थानीय सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए देशव्यापी स्कूल ठीक करो अभियान में हिस्सा लिया था। सीजेपी का आरोप है कि उसी शाम हथियारबंद लोग जबरन अब्दुल के घर में घुस गए। आरोप है कि हमलावरों की पहचान भाजपा कार्यकर्ता के रूप में हुई। हमले के दौरान सिर में गंभीर चोट लगने से शनिवार को अब्दुल के पिता माफिक की मौत हो गई। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, यह बेहद निंदनीय हरकत है। हम सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए एक अभियान चला रहे हैं जिसका समर्थन सभी राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों को करना चाहिए। फिर भी, भाजपा कार्यकर्ता लोगों को डराने-धमकाने के लिए ऐसी हरकतें करते हैं।

अब्दुल के आरोप कितने गंभीर?
अब्दुल ने 13 अगस्त 2026, गुरुवार को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भाजपा कार्यकर्ता उनके घर आए और उन्होंने तथा उनके पिता पर हमला किया। यह घटना उनके प्राथमिक स्कूल का सर्वेक्षण करने के कुछ घंटों बाद हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनसे स्कूल की स्थिति पर चिंता जताने के लिए माफी मांगने वाला एक वीडियो रिकॉर्ड करने को कहा। वे चाहते थे कि वह वीडियो में कहें कि वह बाहरी लोगों के निर्देश पर काम कर रहे थे। अब्दुल ने इसका पालन करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि संभव है कि दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण वह निशाना बने।

NATIONAL : राहुल गांधी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, आय से अधिक संपत्ति के आरोप की CBI-ED जांच के निर्देश का मामला

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राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के CBI-ED जांच के निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने केस को दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की मांग भी की है। सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को सुनवाई करेगी।

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिए गए निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राहुल गांधी ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग करते हुए अलग से ट्रांसफर याचिका भी दाखिल की है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इन पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगी।

बीजेपी कार्यकर्ता की शिकायत पर शुरू हुआ मामला
मामला कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी के पास उनकी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति है। शिकायत पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई में सीबीआई और ईडी को आरोपों का कानून के मुताबिक सत्यापन करने को कहा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हुई है तो उसमें लगाए गए आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सीबीआई या ईडी कानून के तहत उपलब्ध उचित कदम उठा सकती हैं।

सीबीआई की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी
हाईकोर्ट ने दोनों केंद्रीय जांच एजेंसियों को मामले की प्रगति से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद 20 जुलाई को हुई सुनवाई में अदालत ने सीबीआई के हलफनामे पर असंतोष जताया और कहा कि यह उसके पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है। दूसरी ओर, अदालत ने कहा कि ईडी ने आवश्यक कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान यदि ईडी को कोई सूचना प्राप्त होती है तो वह कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 20 अगस्त को सूचीबद्ध कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट से मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग
राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देने के साथ-साथ अलग ट्रांसफर याचिका भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि शिकायत के आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों को आरोपों के सत्यापन के लिए दिए गए हाईकोर्ट के निर्देशों की कानूनी वैधता क्या है और क्या इस मामले को दूसरे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाना उचित होगा।17 अगस्त को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

NATIONAL : ‘सरकार झुकती है बस आवाज एक साथ उठनी चाहिए’, प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ से पहले राहुल गांधी का हमला

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प्रयागराज में 8 अगस्त को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पेपर लीक, अटकी भर्तियों और जवाबदेही के मुद्दे उठाते हुए कहा कि एकजुट होकर आवाज उठे तो सरकार को झुकना पड़ता है।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रयागराज में होने वाले अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार तभी झुकती है, जब लोगों की आवाज एकजुट होकर बुलंद होती है। राहुल गांधी का यह बयान पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में देरी और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर उनके लगातार हमलों के बीच आया है।राहुल गांधी 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित केपी ग्राउंड में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम से पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि प्रयागराज देश का ऐसा शहर है, जहां बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों को अब लगने लगा है कि व्यवस्था ईमानदारी से काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की मेहनत में कोई कमी नहीं है, बल्कि समस्या उस व्यवस्था की नीयत में है, जो उनकी मेहनत का उचित परिणाम नहीं देती।राहुल गांधी ने पेपर लीक, सरकारी भर्तियों में देरी और जवाबदेही की कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इन समस्याओं के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।

‘सरकार झुकती है बस आवाज एक साथ उठनी चाहिए’
उन्होंने अपने पोस्ट में राजस्थान के कोटा और उत्तराखंड के देहरादून में छात्रों के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। राहुल गांधी के मुताबिक, कोटा में छात्रों ने अपनी आवाज उठाई और देहरादून में भी छात्रों की आवाज बुलंद हुई। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में सवाल पूछने वाले छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं। राहुल गांधी ने कहा, “आखिर में एक मंत्री को जाना पड़ा। यह सरकार झुकती है बस आवाज एक साथ उठनी चाहिए।”

8 अगस्त को प्रयागराज में कार्यक्रम
राहुल गांधी ने छात्रों से 8 अगस्त को शाम 5 बजे प्रयागराज के केपी ग्राउंड में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। इस कार्यक्रम में वह छात्रों की समस्याओं, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत करेंगे।यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के बीच लगातार असंतोष देखने को मिला है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रही है।

पहले अनुमति रद्द होने से पैदा हुआ था असमंजस
राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम को लेकर इससे पहले असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। कार्यक्रम के लिए केपी कॉलेज के खेल मैदान के इस्तेमाल की अनुमति पहले वापस ले ली गई थी। केपी कॉलेज प्रबंधन ने अपने फैसले के पीछे शैक्षणिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका और इलाहाबाद हाई कोर्ट के 14 अगस्त 2025 के आदेश का हवाला दिया था।

कॉलेज प्रबंधन की ओर से कांग्रेस को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियां बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके बाद कार्यक्रम के लिए दी गई अनुमति वापस लेने और जमा राशि कार्यालय से प्राप्त करने को कहा गया था।

प्रशासन से मिली कार्यक्रम की मंजूरी
हालांकि, अब राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को प्रशासन की मंजूरी मिल गई है। कार्यक्रम स्थल को लेकर पैदा हुआ गतिरोध भी समाप्त हो गया है और 8 अगस्त को प्रयागराज में कार्यक्रम आयोजित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।राहुल गांधी का यह कार्यक्रम कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लगातार राजनीतिक तौर पर उठा रही है। प्रयागराज में होने वाली इस बातचीत के दौरान राहुल गांधी पेपर लीक, भर्ती में देरी और छात्रों की मांगों को लेकर केंद्र सरकार को घेर सकते हैं।

NATIONAL : BJP में बड़े फेरबदल की तैयारी, नितिन नवीन की नई टीम का कल हो सकता है ऐलान; सियासी हलचल हुई तेज

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बीजेपी में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। वहीं, 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार को नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान भी संभव है। बता दें कि उपचुनाव में हार के बाद से नितिन नवीन के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगा है।

नई दिल्ली: हाल के उपचुनाव में बीजेपी की करारी शिकस्त मिलने के बाद अब नई जानकारी सामने आ रही है। मीडिया सूत्रों के हवाले से जानकारी आ रही है कि कल यानी 17 अगस्त को बीजेपी में बड़े फेरबदल किए जा सकते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी नई टीम का भी ऐलान कर सकते हैं। बता दें कि हार के उपचुनाव में हार के बाद से नितिन नवीन की लीडरशिप पर सवाल उठने लगे थे। वहीं आगे 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में चुनाव के बिगुल बजने वाले हैं। ऐसे में वर्तमान हालात को देखते हुए यह फैसला अहम माना जा रहा है।

युवा चेहरे तो मिल सकती है जिम्मेदारी
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के जेन-जी आंदोलन को देखते हुए बीजेपी की नई टीम में युवा चेहरों को जिम्मेदारी मिल सकती है ताकि युवाओं की भावना को सही तरीके से समझा जा सके और उस हिसाब से रणनीति बनाई जा सके। बता दें कि हाल के जेन-जी आंदोलन ने सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया। यहां तक कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक को इस्तीफा देना पड़ गया। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आगामी उत्तर प्रदेश समेत 7 राज्यों को विधानसभा चुनाव में जेन-जी को कैसे साधा जाए। यूपी में 15 फीसदी के करीब जेन-जी वोटर्स हैं जो कि चुनाव परिणाम को उलटफेर करने का माद्दा रखते हैं।

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