Thursday, April 30, 2026
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ENTERTAINMENT : गोविंदा की भांजी आरती सिंह पर लुटाया मामी सुनीता ने प्यार, बोलीं – ‘वो सबके लिए खड़ी रहती हैं, अब जल्दी से मां भी बन जाए’

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गोविंदा पत्नी सुनीता आहूजा अपने बेबाक बयान के लिए जानी जाती हैं. किसी भी मुद्दे पर वो अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटतीं, फिर चाहे वो किसी को बुरा लगे या भला. लेकिन, इस बार उनके तेवर बदले हुए दिखे.सुनीता आहूजा इन दिनों खूब लाइमलाइट बटोर रही हैं. आए दिन वो इंटरव्यू दे रही हैं, इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने अब तो अपना यूट्यूब चैनल भी शुरू कर लिया है.हाल ही में सुनीता को पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में देखा गया. इस दौरान उन्होंने गोविंदा के भांजे कृष्णा अभिषेक और भांजी आरती सिंह के संग अपने रिश्ते पर खुलकर बात की.

सुनीता ने पॉडकास्ट के दौरान नानी बनने की भी इच्छा जाहिर की. साथ ही आरती सिंह के पति की भी जमकर तारीफ की. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं उन्होंने क्या कहा. सुनीता ने कृष्णा अभिषेक और आरती सिंह संग झगड़े पर सफाई देते हुए कहा कि मेरा कोई झगड़ा नहीं है.ये दोनों मेरे बच्चे हैं, बहुत हो गया, अब लड़ने-झगड़ने की उम्र नहीं है.इस दौरान बात करते हुए सुनीता आहूजा ने कहा,’मैं चाहती हूं जल्दी-जल्दी आरती मम्मी बन जाए. उसका बेटा-बेटी जो भी हो, देखूं.मुझे बहुत खुशी हुई कि उसकी शादी हो गई.

वो घर आती है यश को राखी बांधने के लिए. बहुत अच्छी बच्ची है. सच में मुझे बहुत पसंद है. सबके लिए खड़ी रहती है वो. एक फोन पर.’सुनीता ने आगे कहा कि देखो उसको इतना अच्छा लड़का मिल गया. उसका स्वभाव बहुत अच्छा है. दो-तीन बार मिली हूं और आरती उसे डिजर्व करती है. उसके लिए मैं बहुत खुश हूं. आई लव यू आरती, आई लव यू कृष्णा.पारस छाबड़ा ने भी इस दौरान आरती की तारीफ की. उन्होंने कहा कि आरती बहुत ही स्वीट लड़की है, मेरी बहुत हेल्प की है. इतना ही नहीं बल्कि सबके लिए एक फोन पर वो खड़ी रहती है.

SHIMLA : सरकारी टीचरों की दरिंदगी, 8 साल के दलित छात्र को बेरहमी से पीटा, पैंट में डाला बिच्छू

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लगातार पिटाई के बाद बच्चे के कान से खून बहने लगा. इतना ही नहीं उसके कान का पर्दा भी क्षतिग्रस्त हो गया. आरोप है कि बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी भी दी गई.

शिमला के एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर सहित तीन शिक्षकों पर आठ साल के दलित लड़के को बार-बार पीटने और उसकी पैंट में बिच्छू डालने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने रविवार (2 नवंबर) को यह जानकारी दी. पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के खड़ापानी क्षेत्र में सरकारी प्राथमिक विद्यालय के पहली कक्षा के छात्र के पिता ने हेडमास्टर देवेंद्र और शिक्षकों बाबू राम व कृतिका ठाकुर पर आरोप लगाया है कि वे लगभग एक साल से उसके बेटे की पिटाई करते रहे हैं.

शिकायतकर्ता ने बताया कि लगातार पिटाई से बच्चे के कान से खून बहने लगा और उसके कान का पर्दा क्षतिग्रस्त हो गया. उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों ने उनके बेटे को स्कूल के शौचालय में ले जाकर उसकी पैंट में एक बिच्छू डाल दिया.

शिकायत के बाद, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 127(2) (गलत तरीके से बंधक बनाना), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 351(2) (आपराधिक धमकी), 3(5) (समान इरादे से आपराधिक कृत्य करना) और किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चे के प्रति क्रूरता का मामला दर्ज किया है.

शिक्षकों के खिलाफ जांच के आदेश
शिक्षकों पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश भेजा जा रहा है कि क्या जांच किसी राजपत्रित अधिकारी से कराई जाए.

पिता के अनुसार, शिक्षकों ने लड़के को यह कहकर धमकाया कि यदि उसने घर पर शिकायत की तो उसे गिरफ्तार करवा दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर को हेडमास्टर ने कथित तौर पर बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी दी थी.

पिता का कहना है कि, बच्चे से कहा गया था अगर मामला सार्वजनिक किया गया तो परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और उसे यह कहकर धमकाया कि ‘हम तुम्हें जला देंगे.’ लड़के के पिता को भी चेतावनी दी गई कि वह पुलिस में शिकायत दर्ज न कराए और न ही सोशल मीडिया पर घटना के बारे में पोस्ट करे अन्यथा उन्हें ‘अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा.’

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कृतिका ठाकुर के पति नीतीश ठाकुर पिछले एक साल से उनकी जगह पर अवैध रूप से स्कूल में छात्रों को पढ़ा रहे हैं. उन्होंने स्कूल के शिक्षकों पर जातिगत भेदभाव का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भोजन के दौरान नेपाली और हरिजन छात्रों को राजपूत छात्रों से अलग बैठाया जाता था.

ENTERTAINMENT : AI ‘महाभारत’ में बड़ा ब्लंडर, हस्तिनापुर में दिखा मॉडर्न फर्नीचर, पीछे पड़े ट्रोल्स

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जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रहे AI आधारित महाभारत शो ने दर्शकों का ध्यान खींचा है. लेकिन एक सीन में मॉर्डन फर्नीचर दिखने से विवाद पैदा हो गया है. यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इस ब्लंडर को वायरल कर ट्रोल किया है.

माइथोलॉजिकल शोज का इंडियन ऑडियंस के बीच हमेशा से क्रेज देखा गया है. खासकर अगर उसका सब्जेक्ट रामायण या महाभारत की कहानी पर बेस्ड हो. आपको बीआर चोपड़ा की एपिक महाभारत और उसके दमदार किरदार अभी तक याद होंगे. इसके बाद कई मेकर्स ने महाभारत बनाई लेकिन कोई बीआर चोपड़ा के विजन के सामने नहीं टिक सका.

अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नए अंदाज की महाभारत दर्शकों को देखने को मिल रही है. बिना एक्टर्स और मैनपावर के बनी ये महाभारत AI की देन है.
जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रहे इस शो का नाम है, महाभारत- एक धर्मयुद्ध. इसे पूरी तरह AI यानी आर्टिफिशियल एंटेलीजेंस द्वारा बनाया गया है. शो के रिलीज होते ही नया विवाद खड़ा हो गया है. यूजर्स ने एक ब्लंडर को नोटिस किया है. जिसमें हस्तिनापुर में आज के दौर का मॉर्डन फर्नीचर रखा हुआ दिखा. शो का पहला एपिसोड 25 अक्टूबर को स्ट्रीम हुआ था. इसमें प्रिंस देवव्रत (जो बाद में भीष्म के नाम से जाने गए) के जन्म पर फोकस किया गया.

एक सीन में दिखाया जाता है मां गंगा नवजात बच्चे के साथ हस्तिनापुर पैलेस के कमरे में हैं. उस सदी के इंटीरियर से कमरे को मैच करने की पूरी कोशिश हुई. लेकिन एक जगह चूक हुई. बेड के बगल में एक साइड टेबल रखा है, जिसपर ड्रॉअर भी बनी हुई हैं. प्राचीनकाल के उस दौर में ये मॉर्डन फर्नीचर देखकर यूजर्स के होश उड़ गए हैं.

चंद सेकेंड के सीन को लोगों ने तुरंत नोटिस किया और स्क्रीनशॉट लेकर इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है. शख्स ने लिखा- अब सीन में बस वायरलेस चार्जर की जरूरत है. किसी ने लिखा- बेडसाइड टेबल देखकर मेरी हंसी नहीं रुक रही है. एक शख्स के मुताबिक, एक सीन में दीवार पर टंगी फोटो में शख्स ने सूट पहना हुआ था. यूजर्स ने

शो के बजट के बारे में भी सवाल पूछे हैं. कई यूजर्स का कहना है ये शो एक मजाक है, जिसे एक बार फन के लिए देखा जाना चाहिए. किसी का कहना है कि महाभारत के आइकॉनिक करैक्टर्स को AI वर्जन में देखकर दुख हो रहा है. अभी शो के 2 ही एपिसोड ऑनएयर हुए हैं. इंटरनेट पर शो को मिस्क्ड रिस्पॉन्स मिल रहा है. जहां एक तरफ फिल्ममेकिंग में एआई तकनीक का इस्तेमाल ना करने की बात हो रही है. वैसे महाभारत जैसे प्रोजेक्ट को AI वर्जन में लाकर मेकर्स ने बड़ा एक्सपेरिमेंट किया है. देखते हैं उनका ये रिस्क कितना फायदेमंद साबित होता है.

GUJARAT : नाच- नाचकर ले गए मृतक की आत्मा… मौत के बाद तांत्रिक को लेकर अस्पताल पहुंचे परिजन

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गुजरात के दाहोद में अंधविश्वास का मामला सामने आया, जहां मृतक के परिजन उसकी आत्मा को बुलाने के लिए मध्य प्रदेश से तांत्रिक को अस्पताल ले आए. सफेद वस्त्रधारी तांत्रिक ने अस्पताल में पूजा-पाठ कर नाचते-झूमते ‘आत्मा ले जाने’ का दावा किया. मृतक के पुत्र लोकेन्द्र गामड़ ने बताया कि वे आत्मा को शांति दिलाने घर ले जा रहे हैं.

गुजरात के दाहोद जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि 21वीं सदी के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं. यहां तीन माह पहले अस्पताल में आखिरी सांस लेने वाले एक मृतक के परिजन उसकी आत्मा को घर ले जाने के लिए अस्पताल पहुंचे. यहां उन्होंने एक तांत्रिक के जरिए विधि-विधान से पूजा-पाठ कराया.

मिली जानकारी के अनुसार, तीन महीने पहले एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था और उसे दाहोद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. मृतक के परिवारजन, जो मध्य प्रदेश के निवासी हैं, मानते हैं कि मृतक की आत्मा अब भी अस्पताल में भटक रही है.

इसी विश्वास के चलते वे रविवार को दाहोद के उसी निजी अस्पताल पहुंचे और एक तांत्रिक को साथ लेकर आए. तांत्रिक ने अस्पताल परिसर में पूजा-पाठ और तांत्रिक क्रियाएं कीं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसने सफेद वस्त्र पहन रखे थे और पूजा के बाद वह नाचने-झूमने लगा. उसने दावा किया कि मृतक की आत्मा अब शांत हो गई है और वह उसे साथ लेकर जा रहा है.

यह पूरा घटनाक्रम अस्पताल के स्टाफ और मरीजों के सामने हुआ, जिससे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया. कई लोग इस अंधविश्वास पर आश्चर्य और आक्रोश दोनों प्रकट कर रहे हैं. मृतक के पुत्र लोकेन्द्र गामड़ ने बताया कि ‘हमारे परिवार ने तांत्रिक को बुलाया ताकि पिता की आत्मा को शांति मिल सके. अब हम उसे घर ले जा रहे हैं ताकि विधिवत क्रिया की जा सके.’

स्थानीय लोगों ने इस घटना को अंधश्रद्धा का उदाहरण बताया और कहा कि विज्ञान और शिक्षा के इस दौर में भी लोग अंधविश्वास में यकीन रखते हैं, यह समाज के लिए चिंताजनक है. फिलहाल प्रशासन ने इस घटना पर कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की है, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

NATIONAL : बाहर से कमरा लॉक, अंदर रोता बच्चा, ताला तोड़कर घुसे तो मिली मां की लहूलुहान लाश! जानिए हमीरपुर का रोशनी हत्याकांड

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हमीरपुर जिले में एक लव मैरिज का दर्दनाक अंत हुआ. मौदहा के कम्हरिया गांव में नशेड़ी पति मोइनुद्दीन ने पत्नी रोशनी को लोहे की रॉड से पीटकर मार डाला. हत्या के बाद वह डेढ़ साल के मासूम को लाश के साथ कमरे में बंद कर फरार हो गया. बच्चे के रोने पर घटना का खुलासा हुआ.

यूपी के हमीरपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां तीन साल पहले हुई लव मैरिज का दर्दनाक अंत हुआ. मौदहा थाना इलाके में एक नशे के आदी पति ने अपनी 27 वर्षीय पत्नी रोशनी को लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद वह अपने डेढ़ साल के मासूम बच्चे को लाश के साथ कमरे में बंद कर फरार हो गया.

यह घटना यूपी के हमीरपुर जिले के मौदहा थाना इलाके के कम्हरिया गांव में हुई. मोइनुद्दीन ने अपनी 27 वर्षीय पत्नी रोशनी की हत्या कर दी. शनिवार रात पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. नशे के आदी पति ने लोहे की रॉड से पत्नी को पीट-पीटकर मार डाला और बच्चे को कमरे में बंद कर भाग गया.

रविवार सुबह करीब सात बजे जब आस-पास के लोगों ने कमरे के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो वह दरवाज़ा खोलकर अंदर पहुंचे. कमरे के अंदर का दृश्य देखकर सभी लोग दंग रह गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी. मासूम बच्चा अपनी मां के लहूलुहान शव के पास बिलख-बिलख कर रो रहा था. घटना से पूरे गांव में सनसनी और खलबली मच गई.

पुलिस को बताया गया कि मोइनुद्दीन का देर रात अपनी पत्नी रोशनी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. विवाद इतना बढ़ गया कि मोइनुद्दीन ने बेडरूम में लेटी पत्नी पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया. रॉड से पीट-पीटकर उसने रोशनी की नृशंस हत्या कर दी. हत्या करने के बाद, आरोपी पति मोइनुद्दीन अपने तीन वर्षीय मासूम बच्चे को उसी कमरे में बंद करके फरार हो गया.

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे का ताला तोड़कर मासूम बच्चे को बाहर निकाला और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. पुलिस अधीक्षक (SP) हमीरपुर ने बताया कि पुलिस ने हत्यारोपी पति की तलाश शुरू कर दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन साल पहले हुई इस लव मैरिज का इतना दर्दनाक अंजाम होगा, किसी ने नहीं सोचा था.

ENTERTAINMENT : एक्टर सतीश शाह की पत्नी को है ये खतरनाक बीमारी, चेहरे तक नहीं रहते याद

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सतीश शाह की पत्नी मधु शाह भी खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं.चलिए आपको बताते हैं कि उनको कौन सी बीमारी है और वह कितनी खतरनाक है.

फिल्म इंडस्ट्री को इस साल लगातार एक के बाद एक दिग्गज अलविदा कर रहे हैं. इसमें एक नाम सतीश शाह का है. 74 साल के अभिनेता का किडनी फेल होने की वजह से निधन हो गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सतीश शाह की पत्नी मधु शाह भी खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं, उनको अल्जाइमर की बीमारी है. इस बीमारी में इंसान धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है. चलिए आपको बताते हैं कि यह बीमारी कितनी खतरनाक है और इसमें इंसान को क्या-क्या याद रहता है और वह क्या-क्या भूल जाता है.

अल्जाइमर एक प्रोग्रेसिव न्यूरोडिजेनरेटिव डिसऑर्डर है, यानी यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है. इसमें दिमाग की सेल्स एक-दूसरे से संपर्क खो देती हैं और मरने लगती हैं. इसकी शुरुआत हल्के भूलने से होती है, जैसे चीज़ें कहां रखीं, लोगों के नाम याद न रहना. लेकिन धीरे-धीरे यह स्थिति गंभीर हो जाती है. मरीज को रोजमर्रा के काम करने, बातचीत समझने और निर्णय लेने में कठिनाई होने लगती है.

अगर इसके इलाज की बात करें, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि Harvard Health Publishing की रिपोर्ट के अनुसार, अल्जाइमर का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है. Alzheimer’s Society यूके के अनुसार, कुछ दवाएं इसके शुरुआती लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं. इसके अलावा, मरीज को प्यार, धैर्य और मेंटल सपोर्ट देना बहुत जरूरी होता है. आप अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इससे राहत पा सकते हैं, जैसे कि नियमित रूप से व्यायाम करें, दिमाग को सक्रिय रखें, खाने-पीने की चीजों का विशेष ध्यान रखें, तनाव कम करें और सामाजिक रूप से एक्टिव रहें.

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं.

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

UP : यूपी में 4 नवंबर से शुरू होने जा रहा है SIR, ये दस्तावेज रखें तैयार नहीं तो होगी मुश्किल

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उत्तर प्रदेश में 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, इसका उद्देश्य राज्य में मतदाता सूची का शुद्धिकरण करना है, जिसके तहत वोटर लिस्ट से फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना है. प्रदेश में 22 साल पर फिर से ये प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. चुनाव आयोग का दावा है कि ये प्रक्रिया पारदर्शी और सरल तरीके संपन्न होगी.

राज्य चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की है. मंगलवार से बीएलओ घर-घर पहुंचने लगेंगे और मतदाताओं से संपर्क कर उन्हें एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे. इस फॉर्म में सभी जानकारी भरकर इसकी दो प्रतियां वोटरों से ली जाएंगी. इनमें से एक प्रति बीएलओ के पास रहेगी जबकि दूसरी मतदाता को दी जाएगी.

अगर किसी परिवार में मतदाता उपस्थिति नहीं हो तो ऐसे में परिवार का कोई अन्य सदस्य या वो रिश्ते की जानकारी देते हुए फॉर्म पर हस्ताक्षर कर सकता है. इस फॉर्म में मतदाताओं के माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर, आधार संख्या की जानकारी देनी होंगी.

पहले चरण में बीएलओ घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे, जिसे भरकर जमा करना होगा. इस दौरान किसी दस्तावेज की ज़रूरत नहीं होगी बाद में जिनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट से लिंक नहीं होगा तो आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा और फिर घोषित दस्तावेज जमा कराने होंगे.

जिन लोगों का जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है और उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में है तो उन्हें सिर्फ लिस्ट की कॉपी देनी होगी. लेकिन, अगर ऐसा नहीं है तो दिए गए 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा. जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है तो उन्हें अपना या माता-पिता का दस्तावेज जमा कराना होगा.

एसआईआर के लिए मान्य होंगे ये दस्तावेज

  • जन्म प्रमाण-पत्र
  • 10वीं या किसी अन्य परीक्षा का प्रमाण-पत्र
  • पासपोर्ट, सरकारी जमीन और मकान के कागजात
  • जाति प्रमाण-पत्र
  • 1 जुलाई 1987 से पहले का कोई सरकारी ID या प्रमाण-पत्र
  • मूल निवास प्रमाण-पत्र
  • सरकारी नौकरी का पहचान पत्र या पेंशन पेमेंट ऑर्डर
  • परिवार रजिस्टर की नकल
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रविष्टि
  • वन अधिकार प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज मान्य हैं.

यूपी में इससे पहले साल 2003 में एसआईआर किया गया, चुनाव आयोग का कहना है कि साल 2003 की वोटर लिस्ट का वर्तमान लिस्ट से मिलान किया गया है, इनमें से 48 फ़ीसद वोटरों के नाम दोनों सूची में शामिल है. राहत की बात ये हैं कि इस प्रक्रिया में 70 फीसद मतदाताओं को कोई दस्तावेज जमा नहीं करने पड़ेंगे. कई ऐसे मतदाता, जिनके माता-पिता का नाम भी पहले से सूची में शामिल हैं उन्हें भी कोई पहचान या आवास प्रमाण पत्र नहीं देना होगा.

DELHI : ‘साइलेंट किलर’ प्रदूषण…दिल्ली के अस्पतालों में बढ़े मरीज, हेल्थ इमरजेंसी के हालात! एक्सपर्ट की चेतावनी

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तापमान में गिरावट आने और सर्दी बढ़ने के साथ दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंच गई है. अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में 20% तक बढ़ोतरी हुई है. AIIMS के पूर्व निदेशक और प्रमुख श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इसे हेल्थ इमरजेंसी माना है.

हर साल सर्दी बढ़ने के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जहरीली धुंध की चादर में लिपट जाती है, लेकिन डॉक्टर का मानना है कि इस बार वायु की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी पहले से कहीं अधिक जहरीली हो चुकी है. कुछ स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 300 के पार बना हुआ है. आनंद विहार का AQI 3 नवंबर को 371 जबकि लोधी रोड पर 312, कर्तव्य पथ के करीब 307 रिकॉर्ड किया गया है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पूर्व निदेशक और प्रमुख श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने आगाह किया है कि शहर में स्वास्थ्य संकट जैसी परिस्थिति पैदा हो गई है. जो लगातार लोगों के फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा रही है. दरअसल, सर्दी के साथ हवाओं का थमना प्रदूषण के कणों को हवा में ही रोके रखता है. इससे आसमान में धुंध छाई रहती है. प्रदूषण के कारण सांस लेने में मुश्किल, आंखों में चुभन, गले में खराश समेत तमाम तरह की दिक्कतें अब आम हो गईं हैं. सड़कों पर दिखाई देने वाली मोटी धुंध वाहन चालकों के लिए भी चुनौती बन गई है.

AIIMS के पूर्व निदेशक व पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि अस्पतालों में सांस की समस्या, खांसी और पुरानी फेफड़ों की बीमारियों (अस्थमा, COPD) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. डॉ. गुलेरिया ने बताया कि जब से वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI बिगड़ा है, तो सांस की बीमारियों के मामलों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. डॉ. गुलेरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह प्रदूषण लोगों को धीरे-धीरे मौत की ओर धकेल रहा है और इसका खतरा महामारी कोविड-19 से भी अधिक जानलेवा है.

अब सिर्फ बुजुर्ग और पहले से बीमार व्यक्ति ही नहीं, बल्कि युवा, जिनमें कोई पुराना रोग नहीं था, वे भी सीने में जकड़न, लगातार खांसी और सांस फूलने जैसी शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉ. गुलेरिया ने बताया कि यह वृद्धि आमतौर पर प्रदूषण बढ़ने के चार से छह दिन बाद दिखाई देती है. इसके साथ ही, सिरदर्द, आंखों में जलन, थकान, और अपर्याप्त नींद जैसी दिक्कतें भी आम हो गई हैं.

मौसम विभाग (IMD) की मानें तो तापमान में गिरावट और हवा की गति धीमी होने की वजह से प्रदूषण की एक परत जम गई है. आया नगर में न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री दर्ज किया गया जो इस मौसम का सबसे ठंडा दिन है. वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 318 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में माना जाता है. बता दें कि प्रशासन ने कई इलाकों में धूल और कणों को दबाने के लिए ट्रक-माउंटेड वॉटर स्प्रिंकलर लगाए हैं.

डॉ. गुलेरिया के मुताबिक, बारीक कण जैसे पीएम2.5 खून में चले जाते हैं, जो रक्त-वाहिकाओं में सूजन लाते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, कोलेस्ट्रॉल में बदलाव और शुगर लेवल बढ़ाते हैं. उन्होंने वायु प्रदूषण को साइलेंट किलर करार दिया है. साल 2021 में यह वैश्विक स्तर पर आठ मिलियन से अधिक मौतों के लिए जिकैम्मेदार था, जो कोविड-19 से भी अधिक है. दरअसल, डेथ सर्टिफिकेट्स पर भले ही वायु प्रदूषण कभी दर्ज नहीं होता लेकिन यह संबंधित बीमारियों को तेजी से बढ़ाता है.

प्रदूषण का असर दिमाग पर भी देखा जा रहा है. डॉ. गुलेरिया के अनुसार, यह क्लासिक ब्रेन फॉग नहीं है, फिर भी लोग स्पष्ट रूप से कम सतर्क और कम ऊर्जा महसूस कर रहे हैं. मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रदूषण का असर है. विभिन्न रिपोर्ट्स में पाया गया है कि स्मॉग के महीनों में कई लोगों को थकान और काम पर फोकस में कमी की शिकायतें हैं. प्रदूषण की वजह से ही आलस्य भी बढ़ रहा है.

ऐसे में प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनना, अधिकतर समय घर के अंदर रहना, संतुलित भोजन लेना और बच्चों की बाहरी गतिविधि सीमित करना जरूरी है.

RAJASTHAN : साबरमती एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में आर्मी जवान का मर्डर, अटेंडेंट ने ही मारा चाकू

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बीकानेर में साबरमती एक्सप्रेस में कोच अटेंडेंट ने एक सैन्य जवान जिगर कुमार की चाकू मारकर हत्या कर दी. पुलिस ने अटेंडेंट को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है.

राजस्थान के बीकानेर जिले में रविवार (2 नवंबर) की देर रात चलती ट्रेन में आर्मी जवान की हत्या कर दी गई. मामला साबरमती एक्सप्रेस का है, जिसमें भारतीय सेना के जवान को चाकू से गोदकर मार डाला गया. इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने का आरोप ट्रेन अेटंडेंट पर लगा है. बताया जा रहा है कि साबरतमी एक्सप्रेस देर रात बीकानेर पहुंची थी, जब उसके स्लीपर कोच में अचानक चाकूबाजी शुरू हो गई.

संगीन वारदात में कोच अटेडेंट्स ने एक सैन्य जवान की हत्या कर दी. जानकारी के अनुसार, गुजरात का सैन्य जवान जिगर कुमार फिरोजाबाद से साबरमती एक्सप्रेस में सवार होकर साबरमती पहुंचना था. इस दौरान कोच विवाद के दौरान कोच अटेडेंट्स ने सैन्य जवान पर चाकू से वार कर दिये.

चलती ट्रेन में लूणकरणसर से बीकानेर के बीच हुई इस वारदात में चाकू लगने के कारण गंभीर रूप से घायल सैन्य जवान को पीबीएम ट्रोमा सेंटर पहुंचाया गया जहां, पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई.

जीआरपी सीआई आनंद गिला ने बताया कि वारदात के सिलसिले में कोच अटेडेंट्स को निगरानी में लेकर पूछताछ की जा रही है. लूणकरणसर और बीकानेर के बीच कुछ युवकों से सेना के जवान का झगड़ा हुआ था जिसमें चाकू लगने से उसकी मौत हो गई.साबरमती एक्सप्रेस के जिस डिब्बे में यह घटना हुई उस डिब्बे को सीज कर दिया गया है. RPF के जवान उस डिब्बे में हैं. घटना की फॉरेंसिंक जांच भी करवाई जा रही है. ट्रेन रोकी नहीं जा सकती थी इसलिए जोधपुर पहुंचने के बाद फॉरेंसिक जांच की जाएगी.

सेना के जवान का शव बीकानेर के PBM अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है जहां पर परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम किया जाएगा. वहीं GRP भी मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं.

NATIONAL : पुष्कर मेले में विदेशियों की साफा बांध प्रतियोगिता, इस देश के कपल ने मारी बाजी

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राजस्थान पर्यटन विभाग ने भारतीय और राजस्थानी संस्कृतिक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुष्कर मेले में विदेशी पर्यटकों के लिए साफा बांध प्रतियोगिता और देसी खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें विदेशी पर्यटकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. साफ बांध प्रतियोगिता में आर्जेंटीना के कपल ने पहला स्थान हासिल किया है.

विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेले में राजस्थान पर्यटन विभाग ने विदेशी पर्यटकों के लिए साफा बांध प्रतियोगिता का आयोजन किया. इसके अलावा विदेशी पर्यटकों को देसी खेलों से अवगत कराने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, गिल्ली डंडा, सतोलिया और लंगड़ी टांग जैसे पारंपरिक खेल शामिल थे.इन प्रतियोगिता का उद्देश्य भारतीय और राजस्थानी संस्कृति को आगे बढ़ाना है.पर्यटन विभाग ने बताया कि भारतीय और राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुष्कर मेले में विदेशी पर्यटकों के लिए साफा बांध प्रतियोगिता आयोजन किया गया, जिसमें विदेशी नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

विभाग ने बताया कि इस प्रतियोगिता में अर्जेंटीना की कैथरीना और उनके पार्टनर पाब्लो ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि रूस की ओल्गा और नीदरलैंड के कपल को द्वितीय स्थान से संतोष करना पड़ा. इस प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले भारतीय को भी अंत में सम्मानित किया गया. स्थानीय पिंकी नागौर निवासी प्रथम भारतीय रहीं, जबकि कनाडाई महिला द्वितीय रहीं और स्थानीय प्रगति तृतीय रहीं. इनाम देने का मकसद इनका हौसला बनाए रखना है.

उधर, साफा बांध प्रतियोगिता में स्थानीय महिलाओं ने भी कमाल कर दिखाया. प्रथम स्थान पर नागौर निवासी पिंकी रहीं, जिन्होंने अपनी पारंगत तकनीक से सभी को प्रभावित किया. द्वितीय स्थान पर कनाडा की एक महिला ने कब्जा जमाया, जबकि तृतीय स्थान पर स्थानीय निवासी प्रगति रही. सभी विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए.

मेले में विदेशी पर्यटकों को भारतीय देसी खेलों से परिचित कराने के लिए विभिन्न खेल कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें गीली डंडा, सतोलिया, लंगड़ी टांग जैसे पारंपरिक खेल शामिल हैं. ये आयोजन राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) और खेलकूद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया.विभाग ने बताया कि इन कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों की तादाद में देसी और विदेशी पर्यटक उमड़ रहे हैं. ये आयोजन भारतीय संस्कृति और राजस्थानी परंपरा को दुनिया के सामने रखने का एक शानदार मौका है. साफा बांधने की प्रतियोगिता ने विदेशी मेहमानों को राजस्थान की शानदार पहनावे से जोड़ा है.

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