Saturday, March 21, 2026
Home Blog Page 35

Life style : AI का साइड इफेक्ट! ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग की सोचने की ताकत हो सकती है कम, हार्वर्ड स्टडी ने किया चौंकाने वाला खुलासा

0

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे लगभग हर पेशे का हिस्सा बन चुका है.

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे लगभग हर पेशे का हिस्सा बन चुका है. कोडिंग करने वाले डेवलपर्स से लेकर अकाउंटेंट, मार्केटिंग प्रोफेशन
ल और मैनेजर्स तक कई लोग रोजमर्रा के काम के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं. कई बार एक ही व्यक्ति अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है. हालांकि इससे काम तेज और आसान जरूर हो जाता है लेकिन लंबे समय में इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है.

एक हालिया स्टडी, जो Harvard Business Review में प्रकाशित हुआ, इसी विषय पर रोशनी डालता है. इस रिसर्च में अमेरिका के 1,488 कर्मचारियों से उनके काम में AI के इस्तेमाल और उससे होने वाले मानसिक प्रभाव के बारे में सवाल किए गए.

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे लगभग हर पेशे का हिस्सा बन चुका है. कोडिंग करने वाले डेवलपर्स से लेकर अकाउंटेंट, मार्केटिंग प्रोफेशन
ल और मैनेजर्स तक कई लोग रोजमर्रा के काम के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं. कई बार एक ही व्यक्ति अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है. हालांकि इससे काम तेज और आसान जरूर हो जाता है लेकिन लंबे समय में इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है.एक हालिया स्टडी, जो Harvard Business Review में प्रकाशित हुआ, इसी विषय पर रोशनी डालता है. इस रिसर्च में अमेरिका के 1,488 कर्मचारियों से उनके काम में AI के इस्तेमाल और उससे होने वाले मानसिक प्रभाव के बारे में सवाल किए गए.

रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन कर्मचारियों को AI ब्रेन फ्राय का अनुभव हुआ उनमें निर्णय लेने की थकान लगभग 33 प्रतिशत ज्यादा थी. इससे गलत फैसले और छोटी-बड़ी गलतियों की संभावना भी बढ़ जाती है. इतना ही नहीं जिन लोगों पर AI का दबाव ज्यादा था उनमें नौकरी छोड़ने की इच्छा भी ज्यादा देखने को मिली.

AI का सही इस्तेमाल भी फायदेमंद

हालांकि रिसर्च में यह भी स्पष्ट किया गया कि AI हमेशा नकारात्मक असर ही नहीं डालता. जब AI का इस्तेमाल दोहराए जाने वाले या उबाऊ कामों को कम करने के लिए किया गया तो कर्मचारियों में तनाव कम देखा गया. ऐसे लोगों ने काम में ज्यादा रुचि और बेहतर सहयोग का अनुभव भी बताया. इससे यह साफ है कि AI का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कैसे और किस मात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा है.

Business : योगी सरकार की ODOP योजना ने बदला महिलाओं का भाग्य, 10 लाख के कर्ज से शुरू किया स्मार्ट लॉक बिजनेस

0

अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कोविड के कठिन समय में ओडीओपी योजना के तहत डिजिटल लॉक यूनिट शुरू कर स्थानीय रोजगार सृजित किया और व्यवसाय में सफलता हासिल की.उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कठिन समय को सफलता की नई शुरुआत में बदल दिया. ताला नगरी के नाम से मशहूर अलीगढ़ में उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत एक डिजिटल लॉक यूनिट की स्थापना की. यह यूनिट न केवल लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है, बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम भी बन गई है.

दरअसल, नीलम ने वर्ष 2019 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी. उसी समय देश कोविड महामारी के संकट से जूझ रहा था. आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप थीं. बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया था. ऐसे कठिन समय में नीलम ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर एक ऐसा व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा, जिससे स्थानीय लोगों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके.अलीगढ़ पहले से ही ताला उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है. नीलम ने पारंपरिक ताले को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का फैसला किया. इसी सोच के साथ उन्होंने “ओव्लॉक्स इंडिया” के नाम से डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट शुरू की. इसकी शुरुआत आसान नहीं थी क्योंकि आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी.

ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के माध्यम से बैंक ऑफ़ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ. इसमें लगभग ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त हुई. योगी सरकार की इस योजना के सहयोग से उनके सपनों को साकार करने के लिए मजबूत नींव तैयार हो गई. आज उनका यह व्यवसाय 10 करोड़ रुपये के पार जा चुका है. जब इस यूनिट की शुरुआत हुई थी, तब यहां केवल पांच-छह कर्मचारी काम करते थे. धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज यहां 20 से 25 लोग काम कर रहे हैं. इस यूनिट से जुड़े कर्मचारी अपने काम के अनुसार हर महीने लगभग 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं. इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है.

इस यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को असेंबल कर आधुनिक डिजिटल लॉक तैयार किए जाते हैं. इन लॉक को आरएफआईडी कार्ड, मोबाइल फोन और सामान्य चाबी के माध्यम से संचालित किया जा सकता है. यही आधुनिक तकनीक इन्हें पारंपरिक तालों से अलग बनाती है.

सबसे खास बात यह है कि ओव्लॉक्स इंडिया के डिजिटल लॉक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में सप्लाई किए जा रहे हैं. इससे अलीगढ़ की पारंपरिक ताला उद्योग की पहचान को एक नई तकनीकी दिशा मिल रही है.

नीलम का कहना है कि “पहले अलीगढ़ में अधिकतर हैंडमेड और की-बेस्ड लॉक बनाए जाते थे. इनमें मजदूरों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी और आय भी सीमित होती थी लेकिन डिजिटल लॉक के इस नए उद्योग ने काम के स्वरूप को बदल दिया है. आज यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर आय मिल रही है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि उनके हाथों से बने उत्पाद देश-विदेश तक लोकप्रिय हो रहे हैं.”यह कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों में भी अवसर तलाशती है. नीलम की यह पहल बताती है कि जब परंपरा और तकनीक साथ मिलती हैं, तो स्थानीय उद्योग भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं.

World : नेवी के मामले में नंबर-1 है अमेरिका तो दूसरा कौन, जानें कहां खड़ा है अपना भारत?

0

दुनिया की टॉप नौसेनाओं की रैंकिंग में अमेरिका नंबर-1 पर बना हुआ है. आइए जानें कि इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर किस देश की सेना का नाम शामिल है और भारत की स्थिति आखिर क्या है.समंदर की लहरों पर राज करने की होड़ ने दुनिया के शक्ति संतुलन को बदल दिया है. वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स (WDMMW) की रिपोर्ट ने कुछ वक्त पहले वैश्विक नौसैनिक ताकतों की एक नई तस्वीर पेश की थी. जिसमें अमेरिकी नौसेना अपनी परमाणु शक्ति और विशाल बेड़े के साथ अब भी शीर्ष पर काबिज है, लेकिन दूसरे स्थान पर कौन से देश की पकड़ है? आइए जान लेते हैं.

वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स (WDMMW) की रैंकिंग में अमेरिकी नौसेना पहले स्थान पर बनी हुई है. अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसके 11 विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जिनमें से ज्यादातर परमाणु ऊर्जा से संचालित होते हैं. यह तकनीक अमेरिकी बेड़े को बिना ईंधन की चिंता किए महीनों तक समंदर में तैनात रहने की क्षमता प्रदान करती है. अमेरिका के पास न केवल जहाजों की संख्या अधिक है, बल्कि उसके पास आधुनिक लॉजिस्टिकल सपोर्ट और दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने की बेजोड़ क्षमता मौजूद है.

इस सूची में दूसरे नंबर पर काबिज भारत के पड़ोसी देश चीन ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन कई मामलों में तकनीकी रूप से अमेरिका के करीब पहुंच चुका है और जल्द ही उसे पछाड़ने की क्षमता रख सकता है. चीनी नौसेना का आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट इतनी तेजी से चल रहा है कि WDMMW ने अनुमान लगाया है कि वह आने वाले समय में दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना बन जाएगी. दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सक्रियता और उसके नए युद्धपोतों की संख्या इसका स्पष्ट प्रमाण है.दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली नौसेना का खिताब रूस के पास है. रूसी नौसेना को एक जटिल ताकत के रूप में देखा जाता है, क्योंकि उसकी असली मजबूती उसकी पनडुब्बियों में छिपी है. रूस के पास ऐसा पनडुब्बी बेड़ा है जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और समंदर की गहराई से दुश्मन को तबाह कर सकता है. इसके अलावा, रूस की एडवांस्ड एंटी-शिप मिसाइलें उसे रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों ही मोर्चों पर एक घातक खिलाड़ी बनाती हैं.


हैरानी की बात यह है कि चौथे नंबर पर इंडोनेशिया की नौसेना का कब्जा है. इंडोनेशिया के पास लगभग 245 अलग-अलग तरह के युद्धपोत हैं और वह अपनी ‘ब्लू वॉटर’ ऑपरेशन्स की क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है. वहीं, पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया है, जिसकी नौसेना को एशिया की सबसे आधुनिक नौसेनाओं में गिना जाता है. दक्षिण कोरिया ने अपनी तकनीक और जहाजों की बनावट पर इतना निवेश किया है कि उसने जापान और कई यूरोपीय देशों को भी पीछे छोड़ दिया है.

विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति और क्षमता

भारतीय नौसेना इस सूची में सातवें स्थान पर है, जिसे 100.5 की ट्रू वैल्यू रेटिंग दी गई है. भारत के पास वर्तमान में दो ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर- INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य मौजूद हैं. इसके अलावा भारतीय बेड़े में 19 पनडुब्बियां और 74 फ्लीट कोर शामिल हैं. हालांकि भारत टॉप-5 से बाहर है, लेकिन हिंद महासागर में भारत का एम्फीबियस असॉल्ट दस्ता और उसकी रणनीतिक स्थिति उसे एक बेहद प्रभावशाली ताकत बनाती है. लेकिन चीन के बढ़ते कद को देखते हुए भारत को अपने आधुनिकीकरण की गति तेज करनी होगी.

Business : मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल में उछाल से भारत में बढ़ेगी महंगाई? निर्मला सीतारमण का बड़ा जवाब

0

वेस्ट एशिया में पैदा हुए इस संकट को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश में महंगाई पर सीमित रह सकता है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है. चार साल में पहली बार क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार पहुंचकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. वहीं खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ईरान द्वारा बंद करने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि मिडिल ईस्ट में यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है. भारत जैसे देशों के लिए यह चुनौती और बड़ी है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है.

हालांकि वेस्ट एशिया में पैदा हुए इस संकट को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश में महंगाई पर सीमित रह सकता है. संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में वस्तुओं की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हैं, इसलिए क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है. गौरतलब है कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 26 प्रतिशत तक उछाल देखा गया. यह तेजी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा खामनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है.

एक सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्ला खामनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की धमकी दी गई, जिसके चलते खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल निर्यातक देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने शिपमेंट में कटौती की घोषणा की है.मोज्तबा खामनेई को ऐसे समय में ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी नियुक्ति को मान्यता देने से इनकार कर दिया है. वहीं इजरायल ने भी चेतावनी दी है कि ईरान का जो भी नया नेतृत्व होगा, वह उसके निशाने पर रहेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी को तनाव बढ़ने से पहले पिछले एक साल के दौरान इंडियन क्रूड बास्केट की कीमतों में गिरावट का रुख था. उनके अनुसार फरवरी के अंत में इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत बढ़कर 69.01 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी, जो 2 मार्च को बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. हालांकि उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद भारत के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत मामूली रहेगा.

World : ‘पाकिस्तान का रक्षा बजट बढ़ाएं’, मिडिल ईस्ट के हालात देखकर घबराए ख्वाजा आसिफ, लगाई ये गुहार

0

ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान की तरफ से किए गए हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान फितना अल-खारीज जैसे आतंकवादी समूहों से किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा.अफगानिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के साथ तनाव और मिडिल ईस्ट के हालात पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश का रक्षा बजट बढ़ाने आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि देश के आसपास जो हालात हैं, और पिछले दिनों बलूचों और अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में जिस तरह हमले किए, उसको और देश की सुरक्षा के लिए चुनौतियों को देखते हुए जरूरी है कि रक्षा बजट बढ़ाया जाए.

पाकिस्तानी न्यूज चैनल समा टीवी के साथ बात करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मौजूदा हालात देखते हुए, यह जरूरी है कि हम रक्षा बजटा बढ़ाएं ताकि हम हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रह सकें। उन्होंने मिडिल ईस्ट संकट के भू-राजनीतिक प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट होर्मुज से होकर गुजरता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय देश अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने से बच रहे हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर व्यापक रूस से इसको अच्छा नहीं कहा जा रहा है.

ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान की तरफ से किए गए हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान फितना अल-खारीज जैसे आतंकवादी समूहों से किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं करेगा. ख्वाजा आसिफ ने कहा, ‘अफगान सरकार और वहां के लोगों का मौजूदा व्यवहार न तो अतीत में स्वीकार्य था, न वर्तमान में और न ही भविष्य में.’

ख्वाजा आसिफ ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ बातचीत के जरिए सुरक्षा मुद्दों को सुलझाने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन उन्होंने इन प्रयासों को अविश्वसनीय बताया. उन्होंने कहा, ‘हम उनसे दो बार मिल चुके हैं, फिर भी धमकियां बरकरार हैं. जब तक खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक अभियान जारी रहना चाहिए.’उन्होंने अफगानिस्तान पर ऐतिहासिक रूप से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाया और दावा किया कि अफगान समर्थन के बिना, पाकिस्तान की सेना ने इन समूहों को पहले ही खत्म कर दिया होता. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वर्तमान स्थिति को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना आवश्यक है.’

Delhi : दंगा मामला शरजील इमाम को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

दिल्ली दंगा मामले में आरोपी शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार (9 मार्च) को 10 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी.दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को दिल्ली दंगा साजिश मामले में 10 दिन की अंतरिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने यह राहत उन्हें अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने के लिए दी है.

एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने ये फैसला सुनाया. 20 मार्च 206 से 30 मार्च 2026 तक अंतरिम जमानत दी गई है. इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने शरजील को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया. पिछले साल बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए भी शरजील ने जमानत मांगी थी लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट से उसे जमानत नहीं मिली थी.

शरजील इमाम 2020 दिल्ली दंगा के साजिश मामले में आरोपी है, जिसमें 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क गए थे. शरजील जनवरी 2020 से जेल में बंद है. 2020 में यूएपीए के तहत गिरफ्तार उसे किया गया था और उस पर हिंसा भड़काने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है.

Health : क्या नींद में सपना देखकर आप भी चलाते हैं हाथ-पैर? इसे ‘नॉर्मल’ समझकर न करें नजरअंदाज!

0

कई लोग सोते समय तमाम तरह की हरकतें करते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आप भी सपने में चिल्लाते और चीखते हैं तो आपको कौन सी दिक्कत हो सकती है? नींद का समय शरीर के आराम करने और दिमाग के पूरे दिन की जानकारी को व्यवस्थित करने का समय माना जाता है, इस दौरान सपने आना सामान्य बात है. कई बार ये सपने साफ-साफ याद रहते हैं, तो कभी अजीब और धुंधले लगते हैं. लेकिन आमतौर पर सपने सिर्फ दिमाग तक ही सीमित रहते हैं. हालांकि कुछ लोगों के साथ ऐसा नहीं होता. उनके सपनों के साथ-साथ शरीर भी हरकत करने लगता है. कई बार व्यक्ति सोते-सोते चिल्लाने लगता है, हाथ-पैर चलाने लगता है या अचानक बिस्तर से उठ बैठता है. पास में सो रहे लोग रात में अचानक होने वाली इन हरकतों से चौंक सकते हैं. सुबह उठने पर अक्सर ऐसे लोग बताते हैं कि उन्होंने कोई बहुत जीवंत या डरावना सपना देखा था.

डॉक्टर इस स्थिति को रैपिड स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर कहते हैं. यह एक दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण नींद से जुड़ी समस्या है, क्योंकि इसमें सोते समय व्यक्ति खुद को या अपने साथी को चोट पहुंचा सकता है. कुछ मामलों में यह दिमाग से जुड़ी अन्य बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है. न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट और हेड ऑफ एपिलेप्सी सर्विस डॉ. केनी रविश राजीव ने TOI को बताया कि “रैपिड स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर में व्यक्ति सोते समय अपने सपनों को वास्तविक हरकतों में बदल देता है. सामान्य तौर पर REM स्लीप के दौरान ब्रेन शरीर की मांसपेशियों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर देता है, ताकि हम सपनों के अनुसार हरकत न करें. लेकिन RBD में यह प्रक्रिया सही तरह से काम नहीं करती.”

नींद के कई चरण होते हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण चरण REM स्लीप होता है. इसी समय दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है और अधिकतर सपने आते हैं. सामान्य स्थिति में इस दौरान शरीर की मांसपेशियां कुछ समय के लिए निष्क्रिय हो जाती हैं. लेकिन RBD में यह सिक्योरिटी पैटर्न काम नहीं करता और व्यक्ति सपने के अनुसार हाथ-पैर चलाने लगता है. ऐसे लोगों में रात के दौरान जोर से बोलना, चिल्लाना, हाथ-पैर मारना या अचानक उठ बैठना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार वे सपने में खुद को किसी से बचाते या भागते हुए महसूस करते हैं.

रिसर्च के अनुसार यह समस्या खासतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में ज्यादा देखी जाती है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकती है. कुछ मामलों में यह पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से भी जुड़ी हो सकती है. इसकी पहचान के लिए डॉक्टर आमतौर पर पॉलिसोमनोग्राफी नाम का स्लीप टेस्ट करते हैं, जिसमें रात भर दिमाग की गतिविधि, मांसपेशियों की हलचल और सांस लेने के पैटर्न को रिकॉर्ड किया जाता है. इलाज में आमतौर पर मेलाटोनिन या क्लोनाजेपाम जैसी दवाओं के साथ-साथ सोने की जगह को सुरक्षित बनाना भी शामिल होता है.

Sports : टी20 वर्ल्ड कप जीतने से नहीं भरा कप्तान सूर्यकुमार का मन, कर दिया बहुत बड़ा एलान

0

2026 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने आगे के बहुत बड़े प्लान पर बयान दिया है.रविवार, 8 मार्च को भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया. फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर भारत कुल तीसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन बना. एमएस धोनी और रोहित शर्मा के बाद सूर्यकुमार यादव टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाले तीसरे भारतीय कप्तान हैं. वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत के बाद सूर्यकुमार यादव ने कहा कि भारतीय टीम का अगला लक्ष्य ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल जीतना है.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टीम की वर्ल्ड कप जीत को ऐतिहासिक बताया, लेकिन साथ ही भविष्य में आने वाली चुनौतियों की बात की.इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा, “यह जीत बहुत खास है. मगर सबसे बड़ा लक्ष्य ओलंपिक्स हैं, ओलंपिक्स गोल्ड मेडल और उसी साल होने वाले टी20 वर्ल्ड कप को जीतना है.”

क्रिकेट पहली बार 1900 ओलंपिक्स में खेला गया था, लेकिन उसके 128 साल बाद क्रिकेट का खेल Los Angeles Olympics 2028 में वापसी करने वाला है. भारतीय टीम ने 2024 का टी20 वर्ल्ड कप रोहित शर्मा की कप्तानी में जीता था, उसके बाद भारत की टी20 टीम ने आक्रामक दृष्टिकोण से खेलना शुरू किया है.2013 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद 11 साल बीत चुके थे, लेकिन टीम इंडिया का ICC ट्रॉफी जीतने का सूखा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था. यह खिताबी सूखा 2024 में समाप्त हुआ, जब टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 रनों से हराया था. उससे अगले साल भारतीय टीम ने 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया था. वहीं अब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई है. अब अगले साल 2027 ODI वर्ल्ड कप होना है, जो दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाएगा.

Health : दांतों में बना हुआ है दर्द तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है कैंसर

0

दांत के दर्द को अक्सर लोग इग्नोर कर देते हैं, उनको लगता है कि यह नॉर्मल है. चलिए आपको बताते हैं कि ये दर्द कब आपके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं.कई बार दांत में दर्द होना एक सामान्य समस्या लगती है. हमें लगता है कि शायद कुछ ज्यादा ठंडा खा लिया, कुछ सख्त चीज चबा ली या ठीक से ब्रश नहीं किया, इसलिए दर्द हो रहा है. लेकिन अगर यह दर्द लंबे समय तक बना रहे और सामान्य दर्द से थोड़ा अलग महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ज्यादातर मामलों में दांत का दर्द किसी सामान्य दांत की समस्या का संकेत होता है, लेकिन कुछ रेयर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी, जैसे ओरल कैंसर या जबड़े के कैंसर का संकेत भी हो सकता है. इसलिए सामान्य दांत दर्द और कैंसर से जुड़े लक्षणों के बीच फर्क समझना जरूरी है.

दांतो के आसपास होने वाला कैंसर आमतौर पर मसूड़ों, दांतों के आसपास की परत या जबड़े की हड्डी में शुरू हो सकता है. कई लोग यह मानते ही नहीं कि मुंह या दांतों के आसपास भी कैंसर हो सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. यही कारण है कि कई बार मरीज इलाज के लिए देर से पहुंचते हैं. अच्छी बात यह है कि अगर इस बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इसका इलाज संभव है. डॉक्टर छोटे प्रभावित हिस्से को हटाकर कैंसर को फैलने से रोक सकते हैं और मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकता है.

दांत का दर्द बहुत आम है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कैविटी, मसूड़ों का इंफेक्शन, दांत पीसने की आदत या साइनस की समस्या. इन स्थितियों में इलाज के बाद दर्द ठीक हो जाता है, लेकिन कैंसर से जुड़ा दर्द अलग तरह का होता है. यह धीरे-धीरे शुरू होकर लगातार बना रह सकता है और समय के साथ बढ़ भी सकता है. कई बार यह दर्द जबड़े, चेहरे या कान तक फैलने लगता है.सामान्य दांत दर्द अक्सर कुछ समय बाद कम हो जाता है, लेकिन कैंसर से जुड़ा दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है. ब्रश करने, दवा लेने या घरेलू उपाय करने के बाद भी अगर दर्द कई हफ्तों या महीनों तक रहे, तो यह चिंता की बात हो सकती है.इंफेक्शन या चोट की वजह से सूजन होना सामान्य है, लेकिन अगर सूजन धीरे-धीरे बढ़े, कठोर महसूस हो और लंबे समय तक ठीक न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार इससे चेहरे का आकार भी थोड़ा बदल सकता है या मुंह खोलने में परेशानी हो सकती है.

कभी-कभी दांत मसूड़ों की बीमारी या चोट की वजह से हिलने लगते हैं, लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के दांत ढीले होने लगें, तो यह जबड़े की हड्डी या आसपास के ऊतकों में बदलाव का संकेत हो सकता है.सामान्य दांत दर्द का कारण स्पष्ट होता है और इलाज के बाद राहत मिल जाती है. लेकिन कैंसर से जुड़े लक्षणों में दर्द लगातार बना रहता है, सूजन खत्म नहीं होती और दांत या जबड़े में बदलाव धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं. इसके साथ मुंह में लंबे समय तक घाव रहना, सुन्नता महसूस होना या बिना कारण दांत ढीले होना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं. अगर ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है. समय रहते जांच और इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

Delhi news : दिल्ली से मैनचेस्टर के लिए उड़ा था इंडिगो का विमान, 7 घंटे के सफर के बाद लिया यू-टर्न, क्या हो सकती हे वजह

इंडिगो ने कहा कि मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति के कारण कई फ्लाइट्स पहले से ही लंबे रूट ले रही हैं, लेकिन 6E033 के साथ जो हुआ, वो आखिरी वक्त पर हुआ. इसका कोई पूर्व अनुमान नहीं था.मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण भारत की राजधानी दिल्ली से मैनचेस्टर जा रही इंडिगो एयरलाइन की एक फ्लाइट को सोमवार (9 मार्च, 2026) को बीच रास्ते से वापस दिल्ली लौटना पड़ा. यह फैसला अचानक आखिरी समय पर पश्चिमी एशिया में लागू किए गए एयरस्पेस प्रतिबंधों की वजह से लिया गया. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि इंडिगो के उन यात्रियों की हकीकत है, जो सोमवार (9 मार्च, 2026) को दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाले थे.

इंडिगो की फ्लाइट 6E 033 दिल्ली से मैनचेस्टर के लिए रवाना हुई, लेकिन पश्चिमी एशिया के ऊपर एयरस्पेस अचानक बंद हो जाने की वजह से पायलट के पास वापस लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा और फ्लाइट को दिल्ली वापस मोड़ दिया गया. इंडिगो ने बयान में कहा कि मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति की वजह से उनकी कई फ्लाइट्स पहले से ही लंबे रूट ले रही हैं, लेकिन 6E 033 के साथ जो हुआ, वो आखिरी वक्त पर हुआ, जिसका कोई पूर्व अनुमान नहीं था.

इंडिगो की फ्लाइट 6E 033, जिसे नॉर्स की ओर से ऑपरेट किया जा रहा था, ने अपनी करीब सात घंटे की यात्रा पूरी कर ली थी, जिसके बाद उसे वापस मुड़ना पड़ा. फ्लाइट ट्रैकिंग सर्विस फ्लाइटट्रेडर24 ने सोमवार (9 मार्च, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसके मुताबिक इंडिगो एयरलाइन का विमान इथियोपिया और इरीट्रिया के बॉर्डर के पास से यू-टर्न लिया और दिल्ली के लिए वापस रवाना हो गया.यह विमान सोमवार को तड़के सुबह दिल्ली से मैनचेस्टर के लिए रवाना हुआ था, जो 26 फरवरी, 2026 के बाद पहली बार इस लंबे रूट पर शुरू हुई थी. इस रूट पर पिछले कुछ समय से विमान उड़ान की सेवा को स्थगित किया गया था, जिसे हाल ही में फिर से बहाल किया गया था. आमतौर पर इस लॉन्ग-हॉल रूट पर उड़ान करीब 11 घंटे में दिल्ली से मैनचेस्टर की दूरी तय करती है, लेकिन एयरस्पेस के प्रतिबंधों के चलते इसे बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा.

फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, इंडिगो एयरलाइन के विमान ने करीब 7 घंटे की उड़ान भरने के बाद यू-टर्न लिया था, जबकि उसने पश्चिम एशिया के सक्रिय संघर्ष वाले के इलाके से बचने के लिए पहले से ही एक अलग रास्ते को अपनाया था, फिर भी उसे वापस लौटना पड़ा.फ्लाइट के यू-टर्न को लेकर इंडिगो के प्रवक्ता ने जारी किए गए एक बयान में कहा कि आखिरी समय में अचानक लगाए गए एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन को यह फैसला लेना पड़ा. उन्होंने कहा, ‘मध्य पूर्व और उसके आसपास की स्थिति लगातार बदल रही है, जिसके कारण हमारी कुछ उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है या उन्हें डायवर्ट करना पड़ सकता है. दिल्ली से मैनचेस्टर जा रही हमारी फ्लाइट 6E 033 को पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण आखिरी समय में लगे एयरस्पेस प्रतिबंधों की वजह से दिल्ली लौटना पड़ा.’

उन्होंने यह भी कहा कि हम संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर यात्रा को फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं.

- Advertisement -

News of the Day