Sunday, October 4, 2026
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BHOPAL : मोबाइल गेम ने छीनी 14 साल के अंश की जिंदगी, मां-बाप को फंदे पर लटका मिला इकलौता बेटा

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भोपाल में एक 14 वर्षीय लड़के ने ऑनलाइन गेम में 28 हजार रुपये हारने के बाद आत्महत्या कर ली. वह फ्री फायर गेम का आदी था. माता-पिता के बाहर होने पर उसने यह कदम उठाया.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे जानकर हर मां-बाप का दिल दहल जाए. यहां पर 14 साल के मासूम बच्चे की जिंदगी ऑनलाइन गेम की लत ने खत्म कर दी. 14 साल का अंश साहू फ्री फायर गेम खेलने का शौकीन था, लेकिन उसमें 28 हजार रुपये हार गया था. माता-पिता के पैसों का नुकसान होने के डर से मासूम अंश ने अपने ही घर में अपनी जान दे दी.

अंश के माता-पिता तेरहवीं में गए थे. जब वे घर लौटे तो अपने इकलौते बेटे को फंदे पर लटका पाया. यह दृश्य दुनिया में किसी मां-बाप को कभी न देखना पड़े, लेकिन अंश के माता-पिता को जो सहना पड़ा उसे समझना बहुत मुश्किल है. अपने इकलौते बेटे की मौत से परिवार टूट गया है.

अंश साहू 8वीं क्लास में पढ़ता था और अपने माता-पिता की अकेली संतान था. पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन बच्चे के कमरे से उसका मोबाइल फोन बरामद किया गया है. परिजनों ने पुलिस को बताया कि अंश मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलने का आदी था. गेम में दिए गए किसी टास्क को पूरा करने के दबाव में उसने यह कदम उठाया हो सकता है.

अभी आत्महत्या के सही कारणों का खुलासा नहीं हो सका है, लेकिन परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं. पिपलानी थाना पुलिस फिलहाल जांच में जुटी है.उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से भी ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां पर भारत सिटी सोसाइटी के एक टावर से तीन नाबालिग सगी बहनें नवीं मंजिल से कूद गईं. तीनों की मौके पर ही मौत हो गई. ये लड़कियां महज 12, 14 और 16 साल की थीं. बच्चियों ने सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसके जरिए पता चला है कि वे भी मोबाइल गेम की आदी थीं. आत्महत्या की इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है.

ENTERTAINMENT : ‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ के लिए मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे हर्षवर्धन, ऐसे बने हिस्सा

फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ में अपनी एक्टिंग से लोगों के दिल पर राज करने वाले और उन्हें दीवाना बना देने वाले एक्टर हर्षवर्धन राणे मेकर्स के नहीं थे पहली पसंद.

बॉलीवुड में ‘सनम तेरी कसम’ से डेब्यू करने वाले अभिनेता हर्षवर्धन राणे की फिल्म पहली बार कमाल दिखाने में असफल रही. मगर, री-रिलीज पर इसका जादू बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिला. वहीं, ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ भी दर्शकों को खासा इंप्रेस कर गई. पर क्या आप जानते हैं कि इन दोनों ही फिल्मों के लिए हर्षवर्धन मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे?

‘सनम तेरी कसम’ में उनके साथ पाकिस्तानी अभिनेत्री मावरा होकैन नजर आई थीं, यह फिल्म साल 2016 में रिलीज हुई थी.अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनकी दो सबसे चर्चित फिल्में ‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ में वह मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे. दोनों फिल्मों के मुख्य रोल पहले किसी और को ऑफर किए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें चुना गया.

हर्षवर्धन ने बताया, “दोनों फिल्मों में मैं फर्स्ट चॉइस नहीं था. ‘सनम तेरी कसम’ का रोल किसी और के पास था और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ भी किसी और को ऑफर हो चुकी थी. ‘सनम तेरी कसम’ फिल्म रिलीज होने के तीसरे दिन ही निर्देशक मिलाप मिलन जावेरी का मैसेज आया था. फिल्म 5 फरवरी 2016 को रिलीज हुई थी और 7 फरवरी को मिलाप सर ने संपर्क किया और मिलने को कहा. जब उन्होंने ये कहानी मुझे सुनाने की बात कही तो मैंने कहा कि सर, मैं तो ऑलरेडी आपके काम को पसंद करता हूं और मुझे आपके साथ काम करना है.”

हर्षवर्धन ने कहा कि मिलाप सर का विजन उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है. वह मास ऑडियंस के लिए फिल्में बनाते हैं और उनकी कहानियां आम लोगों के दिलों तक पहुंचती हैं. दोनों फिल्मों में काम करके उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला.

हर्षवर्धन ने बताया, “मिलाप सर की फिल्में टियर-2 और टियर-3 शहरों की मास ऑडियंस के लिए बनती हैं. वह हमेशा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इमोशनल कहानियां पहुंचाना चाहते हैं. मुझे ऐसे डायरेक्टर पसंद हैं जो मास ऑडियंस तक बात पहुंचाएं, न कि सिर्फ चुनिंदा दर्शकों के लिए फिल्म बनाएं. यही वजह थी कि मैंने मिलाप सर के साथ काम किया.”

वहीं, ‘सनम तेरी कसम’ को लेकर अभिनेता ने बताया, “मैंने ऑडिशन दिया था. मेकर्स ने उनका ऑडिशन देखा और एक घंटे बाद उन्हें दोबारा ऑडिशन देने को कहा. दूसरी बार सीन करने पर डायरेक्टर इमोशनल हो गए. जबकि, यह फिल्म दूसरे एक्टर को ऑफर हो चुकी थी. मैं समझ गया था कि उन्हें मेरा काम पसंद आया.”

फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ का निर्देशन राधिका राव और विनय सप्रू ने मिलकर किया, जो बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत में कमजोर रही, लेकिन बाद में री-रिलीज से सुपरहिट हो गई. साल 2025 में इसकी री-रिलीज ने इस फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया. दर्शकों को हर्षवर्धन और मावरा की जोड़ी बेहद पसंद आई और लोगों ने इतना प्यार दिया कि फिल्म 30 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने में सफल रही.’एक दीवाने की दीवानियत’ साल 2025 में आई थी, जिसे मिलाप जावेरी ने डायरेक्ट किया है. इस फिल्म में हर्षवर्धन का इंटेंस और इमोशनल रोल दर्शकों को बेहद पसंद आया. फिल्म ने अच्छा बिजनेस किया और हर्षवर्धन की परफॉर्मेंस की जमकर तारीफ हुई.

NATIONAL : आस्था, वोटर और पावर… पंजाब चुनाव 2027 का फैसला कैसे तय कर सकते हैं डेरे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बजट वाले दिन डेरा सचखंड बल्लन जाना और गुरु रविदास जयंती में शामिल होना पंजाब की राजनीति में दलित वोट बैंक और डेरों की भूमिका को फिर केंद्र में ले आया है. करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी वाले राज्य में बीजेपी अपनी कमजोर पकड़ मजबूत करने के लिए डेरों के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य दल भी समय-समय पर डेरों का रुख करते रहे हैं.

बजट वाले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डेरा सचखंड बल्लन पहुंचना अब पंजाब की सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया है. वह गुरु रविदास जयंती के 649वें कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके बाद पूरे पंजाब में डेरों पर सबकी नजर टिक गई है. प्रधानमंत्री की इस यात्रा को दलित समाज तक मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. पंजाब में करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित है. यह वर्ग चुनाव में बहुत अहम माना जाता है. बीजेपी लंबे समय से पंजाब में खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. लेकिन उसे अब तक बड़ी चुनावी जीत नहीं मिल पाई है.

बीजेपी पहले अकाली दल के साथ मिलकर सरकार में रही. 1997 से 2002 और 2007 से 2017 तक वह छोटे सहयोगी की भूमिका में थी. वह परंपरागत रूप से 117 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी. तीन कृषि कानूनों के दौरान 2020 में अकाली दल ने गठबंधन तोड़ दिया. तब से बीजेपी अकेले अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन रास्ता आसान नहीं है.

हाल ही में पद्म श्री से सम्मानित डेरा बल्लन के प्रमुख से प्रधानमंत्री मिले. उन्होंने वहां समय बिताया और गुरु रविदास के समानता और सद्भाव के संदेश को दोहराया. इसे पंजाब के रविदासिया समाज तक पहुंच बनाने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है. खासकर दोआबा इलाके की करीब 19 सीटों पर इसका असर माना जाता है. इससे पहले दिसंबर 2025 में डेरा प्रमुख ने दिल्ली में उनसे मुलाकात कर न्योता दिया था.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीजेपी अभी दलित वोट बैंक में मजबूत पकड़ नहीं बना पाई है. पार्टी अकाली दल की सपोर्टर वाली अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलना चाहती है. इसके लिए वह सिख नेताओं को पार्टी में ला रही है. विपक्ष इसे बाहर से लाए गए नेता बताता है. साथ ही पार्टी डेरों से नजदीकी भी बढ़ा रही है, क्योंकि डेरों का असर माना जाता है.

पंजाब के कई डेरा खुद को गैर राजनीतिक बताते हैं. वे कहते हैं कि उनका काम आध्यात्म और समाज सेवा है. लेकिन हकीकत यह है कि उनका चुनाव पर असर दिखता है. खासकर जाति आधारित वोटिंग में डेरों की भूमिका अहम मानी जाती है. पंजाब में दलित आबादी करीब 32 प्रतिशत है. इसमें रविदासिया और वाल्मीकि समुदाय सबसे बड़े समूह हैं. दोनों का वोट चुनाव की दिशा बदल सकता है. माना जाता है कि रविदासिया वोट पहले कांग्रेस को ज्यादा मिलता रहा. जबकि वाल्मीकि वोट बिखरा रहा और 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को फायदा मिला.

पंजाब हमेशा से बीजेपी के लिए कठिन राज्य रहा है. हरियाणा से सीख लेते हुए पार्टी सामाजिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है. इसी रणनीति में डेरों को अहम माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी नवंबर 2022 में राधा स्वामी सत्संग ब्यास भी गए थे. वहां उन्होंने प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की थी. वह करीब एक घंटे वहां रहे. प्रधानमंत्री हर साल वाराणसी में गुरु रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धनपुर भी जाते हैं. लेकिन 2026 का बल्लन दौरा समय और राजनीतिक संकेत के कारण खास माना गया.

मार्च 2016 में राहुल गांधी ने ब्यास में गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की. उन्होंने पंजाब में नशे के मुद्दे पर चर्चा की. दिसंबर 2016 में वह डेरा मुख्यालय में रात रुके. उनके साथ तब के पंजाब कांग्रेस प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह भी थे. जनवरी 2017 में उन्होंने संत निरंजन दास से बंद कमरे में मुलाकात कर आशीर्वाद लिया. कांग्रेस के कई नेता नियमित रूप से डेरों में जाते रहे हैं.

सितंबर 2016 में अरविंद केजरीवाल ने ब्यास डेरा का दौरा किया. यह 2017 चुनाव से पहले हुआ था. उन्होंने गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की. मार्च 2016 में केजरीवाल और भगवंत मान डेरा बल्लन भी गए थे. मार्च 2023 में भी दोनों नेता वहां पहुंचे. उन्होंने गुरु रविदास रिसर्च सेंटर के लिए रकम देने का ऐलान किया.हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी हाल में पंजाब के डेरों और सामाजिक कार्यक्रमों में पहुंचे हैं. वह अक्सर पगड़ी पहनकर हरियाणा मॉडल की बात करते हैं और आम आदमी पार्टी पर हमला करते हैं.

डेरों का रास्ता राजनीतिक दलों के लिए आसान नहीं होता. हाल में राधा स्वामी ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों के बिक्रम सिंह मजीठिया से जेल में मिलने पर विवाद हुआ. उन्होंने सितंबर 2025 और फिर 2 फरवरी 2026 को मजीठिया से मुलाकात की. दूसरी मुलाकात के बाद ढिल्लों ने मजीठिया पर लगे आरोपों को गलत बताया.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पर तंज किया. उन्होंने कहा कि भगवान अदालतों को बचाए, जहां मिलने वाला ही जज बन जाए. रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री के बयान की निंदा की. आम आदमी पार्टी समर्थक कहते हैं कि डेरा प्रमुख मजीठिया के रिश्तेदार हैं, इसलिए उनके बयान को उसी नजर से देखा जाना चाहिए.

2017 चुनाव से पहले कई सिख नेता डेरा सच्चा सौदा गए थे. उन्होंने वहां आशीर्वाद मांगा था. यह 2007 के अकाल तख्त के आदेश के खिलाफ माना गया. 4 अप्रैल 2017 को अकाल तख्त ने 44 नेताओं को पेश होने को कहा. इसमें अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता शामिल थे. करीब 39 नेता पेश हुए और उन्हें धार्मिक सजा दी गई.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम 2017 से जेल में है. उसे दो साध्वियों से दुष्कर्म और हत्या के मामलों में सजा मिली है. इसके बाद भी उसे कई बार पैरोल और फरलो मिली. फरवरी 2026 तक उसे 15 बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली. वह कुल 400 से ज्यादा दिन जेल से बाहर रहा. अक्सर यह समय चुनाव के आसपास रहा. इस पर भी राजनीतिक असर के आरोप लगते रहे हैं.

अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार पंजाब के 13000 गांवों में करीब 9000 डेरा बताए जाते हैं. लेकिन औपचारिक अनुमान करीब 100 बड़े डेरों का है. इनमें से आधा दर्जन डेरों का पूरे पंजाब पर असर माना जाता है.

पंजाब के प्रमुख डेरा

  1. राधा स्वामी सत्संग ब्यास

मुख्यालय अमृतसर के ब्यास में है. इसके लाखों अनुयायी हैं. देश और विदेश में भी बड़ा असर है. यह शाकाहार, ध्यान और अनुशासन पर जोर देता है. इसे पंजाब का सबसे संगठित डेरा माना जाता है. करीब 19 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. डेरा सच्चा सौदा

मुख्यालय हरियाणा के सिरसा में है. लेकिन मालवा क्षेत्र में मजबूत असर है. इसका प्रमुख गुरमीत राम रहीम है. इसके अनुयायी बड़ी संख्या में बताए जाते हैं. करीब 69 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. डेरा सचखंड बल्लन

जालंधर के पास बल्लन गांव में है. इसके प्रमुख संत निरंजन दास हैं. इसका असर खास तौर पर रविदासिया और दलित समाज में है. दोआबा की करीब 8 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान

मुख्यालय जालंधर के नूरमहल में है. यह आध्यात्म और समाज सेवा पर जोर देता है. करीब 8 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. संत निरंकारी मिशन

मुख्यालय दिल्ली में है. पंजाब में इसकी शाखाएं हैं. यह जीवित गुरु की परंपरा पर जोर देता है. करीब 4 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. नामधारी संप्रदाय

इसका मुख्य केंद्र लुधियाना के भैणी साहिब में है.

भले ही बीजेपी ने शुरुआत जल्दी कर दी हो, लेकिन पंजाब के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बाकी दल भी डेरों का रुख करेंगे. सवाल यही है कि क्या डेरा आगे भी चुनाव में गेम चेंजर बनेंगे. राजनीतिक दलों को इससे काफी उम्मीद जरूर है.

UP : गोंडा में मामी पर चढ़ा इश्क का खुमार, पति और दो बच्चों को छोड़कर 11 साल छोटे भांजे के साथ हुई फरार

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यूपी के गोंडा में मामी और भांजे के बीत प्रेम प्रसंग का मामला सुर्खियों में बना हुआ है. दोनों पर इश्क का ऐसा भूत सवार हुआ कि महिला अपने दोनों बच्चों और पति को छोड़कर भांजे के साथ चली गई.उत्तर प्रदेश के गोंडा में 30 साल की मामी पर इश्क का ऐसा भूत सवार हुआ कि अपने दो बच्चे और पति को छोड़कर वो 11 साल छोटे भांजे के साथ फरार हो गई. दोनों के बीच प्यार की ऐसी खुमारी थी कि मामी ने एक बार फांसी पर लटककर जान देने की भी कोशिश की. मामी-भांजे के प्रेम-प्रसंग की चर्चाएं अब आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

ये घटना गोंडा के थाना इटियाथोक क्षेत्र के परना गांव की है जहां रहने वाला दद्दन तिवारी पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं. चंडीगढ़ में ही दद्दन की मुलाकात मनीषा से हुई थी. वो मनीषा के घर में किराये पर रहता था. साल 2017 में दोनों ने गोंडा में आकर कोर्ट मैरिज कर ली, उनके दो बेटे हुए. बड़े बेटे की उम्र नौ साल और छोटा बेटा चार साल का है.मनीषा की मुलाकात यहीं पर भांजे विनीत से हुई. उसे दसवीं के बाद पढ़ाई लिखाई छोड़ दी थी. उसके पिता अरुण दीक्षित राशन की दुकान चलाते हैं. विनीत का अक्सर दद्दन के घर पर आना-जाना था. इसी बीच मनीषा और विनीत एक-दूसरे के करीब आ गए और फिर चोरी छिपे एक दूसरे से मिलने लगे.

इस बात की भनक जब दद्दा को लगी तो उसने मनीषा को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. जिसके बाद दोनों साथ रहने की जिद करे लगे, पति ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो मनीषा ने दो महीने पहले फांसी पर लटककर जाने देने की भी कोशिश की. हालांकि परिजनों ने किसी तरह उसे समझाकर शांत किया. वहीं दूसरी तरफ़ भांजे विनीत ने भी अपनी शादी तोड़ दी थी.

बीते रविवार की रात को भी मनीषा ने भांजे को घर बुलाया था. जिसके बाद दोनों पूरी रात साथ रहे. अगले दिन सोमवार मनीषा की सास ने जब कपड़े लेने के लिए घर में घुसी तो उसने विनीत को देख लिया जिसके बाद उसने शोर मचा दिया. घर से शोरगुल की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर इकट्ठा हो गए.

परिजनों ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हुए, जिसके बाद मंगलवार को ये मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया. लेकिन फिर भी मामी और भांजा मानने को तैयार नहीं हुए. मनीषा भांजे विनीत के साथ रहने की जिद पर अड़ गई. यहीं नहीं अपने प्यार के लिए उसने दोनों बच्चों को भी छोड़ दिया.

मनीषा ने पुलिस के सामने ये लिखकर दिया कि वो विनीत से प्यार करती है और उसी के साथ रहना चाहती है. उसका अपने बच्चों, पति और पति की संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है और ना ही उससे कोई नाता है. जिसके बाद पुलिस ने उसे प्रेमी के साथ जाने दिया.

BUSINESS : क्रैश होने के बाद अब फिर से उठ रही सोने-चांदी की कीमतें, जानें आपके शहर में कितनी है 24 कैरेट की कीमत?

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जनवरी में सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद कीमतों में हाल-फिलहाल के दिनों में बड़ी गिरावट देखी गई. लेकिन अब सोने-चांदी की कीमत फिर से धीरे-धीरे चढ़ रही है.जनवरी में देश में सोने और चांदी की कीमतों में गजब की तेजी आई. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ग्लोबल ट्रेड को लेकर अनिश्चितता और कमजोर होती करेंसी के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ती गई. नतीजतन, कुछ ही हफ्तों में कीमतें भी लगभग दोगुनी हो गईं.

GoodReturns की डेटा के मुताबिक, भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत 29 जनवरी को अपने अब तक के सबसे हाई लेवल 17,885 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गई थी. इसमें महज छह दिनों में लगभग 2,492 रुपये प्रति ग्राम और 24,920 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है. मंगलवार, 3 फरवरी को भारत में 24 कैरेट सोने का रेट 15,393 रुपये प्रति ग्राम था, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 14,110 रुपये प्रति ग्राम थी.

आज कितनी सोने की कीमतें?
आज बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 16,053 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल के मुकाबले 660 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत मंगलवार को 14,110 रुपये के मुकाबले आज 605 रुपये बढ़कर 14,715 रुपये प्रति ग्राम हो गई है. 18 कैरेट सोने की कीमत भी 495 रुपये बढ़कर आज 12,040 रुपये प्रति ग्राम हो गई है.

सोने का इन शहरों में भाव
दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, अयोध्या, गुड़गांव, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, लुधियाना, अमृतसर जैसे शहरों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,068 रुपये, 22 कैरेट की कीमत 14,730 रुपये और 18 कैरेट की कीमत 12,055 रुपये प्रति ग्राम है.
मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, मैसूर, अमरावती में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,053 रुपये प्रति ग्राम है. इन शहरों में 22 और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 14,715 और 12,040 रुपये प्रति ग्राम है.
चेन्नई, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे कई दक्षिण भारतीय शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत 16,256 रुपये प्रति ग्राम है. यहां 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 14,900 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,750 रुपये प्रति ग्राम है.

चांदी की कितनी है कीमत?
भारत में चांदी की कीमत आज 320 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल के मुकाबले 40 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से एक किलो चांदी की कीमत 3,20,000 रुपये है, जिसमें 40,000 रुपये का उछल आया है. पिछले एक हफ्ते में भारत में चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जनवरी में चांदी की कीमतें 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर चली गई थीं. सिर्फ एक हफ्ते में भारत में चांदी की कीमत 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के निशान से नीचे आ गई.

NATIONAL : शिकारी से जान बचाने को नदी में कूद पड़ा बारहसिंगा, गांव वालों ने किया रेस्क्यू, इलाज के दौरान तोड़ा दम

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यह दुखद कहानी हिमाचल प्रदेश के मंडी की है. एक मादा बारहसिंगा के पीछे शिकारी पड़ गया. जान बचाने के लिए बेजुबान जानवर ने नदी में छलांग लगा दी. ग्रामीणों ने देखा तो तुरंत उसका रेस्क्यू किया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी. इस घटना का वीडियो भी सामने आया है. वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है.

हिमाचल प्रदेश के मंडी से सटे बालीचौकी-बंजार क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति के एक मादा बारहसिंगा के शिकार का मामला सामने आया है. शिकारी से जान बचाने के लिए बारहसिंगा ने तीर्थन नदी में छलांग लगा दी. ग्रामीणों और वन विभाग ने मिलकर रेस्क्यू तो किया, लेकिन गंभीर हालत के चलते उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.जानकारी के मुताबिक, बालीचौकी और बंजार क्षेत्र की सीमा पर बीते दिन देर शाम ग्रामीणों ने एक घायल मादा बारहसिंगा को तीर्थन नदी के किनारे भागते देखा. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जान बचाने की कोशिश में वह सीधे नदी में कूद गई थी. स्थानीय लोगों ने तुरंत पशुपालन विभाग और वन विभाग को सूचना दी.

मौके पर पहुंची टीम ने ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. पंचायत मंगलौर से जुड़े कर्मचारी भूपेंद्र शर्मा ने नदी में उतरकर बारहसिंगा को बाहर निकाला. इसके बाद उसे वन विभाग बंजार की टीम को सौंप दिया गया.रेस्क्यू के समय बारहसिंगा बुरी तरह सहमी हुई और घायल हालत में थी. उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान दिखाई दिए. जांच में आशंका जताई गई कि उसे छर्रे लगे हो सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह मादा बारहसिंगा दुर्लभ प्रजाति की थी और करीब दो महीने पहले थाची क्षेत्र के आसपास भी देखी गई थी. हाल के दिनों में इसकी मूवमेंट लगभग 10 किलोमीटर दूर भूराह क्षेत्र की तरफ दर्ज की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजाति का इस इलाके में दिखना अपने आप में महत्वपूर्ण था.

रेस्क्यू के बाद बारहसिंगा को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही. तमाम कोशिशों के बावजूद बीती रात इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया है, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके.घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें घायल बारहसिंगा और रेस्क्यू के दृश्य दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद अवैध शिकार की आशंका और गहरा गई है.

वन मंडल बंजार के डीएफओ मनोज कुमार ने बताया कि बारहसिंगा के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं. छर्रे लगने की बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि अवैध शिकार की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि जिस समय बारहसिंगा को देखा गया, उस दौरान उसके साथ एक नन्हा हिरन भी मौजूद था. हालांकि रेस्क्यू के दौरान वह नजर नहीं आया और अब तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका है.विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाएं वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर खतरा हैं. दुर्लभ प्रजातियों की संख्या पहले ही सीमित है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं.

SPORTS : क्रिकेट के नियमों में होने जा रहे बड़े बदलाव… टेस्ट मैच का बढ़ेगा रोमांच, कुल 73 संशोधनों को मंजूरी

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क्रिकेट के नियमों को बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने कुछ बड़े बदलावों को मंजूरी दी है. एमसीसी ने ऐसा फैसला लिया है, जिसके चलते टेस्ट मैचों में रोमांच और बढ़ जाएगा. मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने कुल 73 संशोधनों को मंजूरी दी है.

मेरिलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने क्रिकेट के नियमों में ऐतिहासिक बदलावों की घोषणा की है. सबसे बड़ा बदलाव टेस्ट क्रिकेट को लेकर किया गया है. अब टेस्ट मैच मैच के दौरान दिन के आखिरी ओवर के दौरान यदि विकेट गिरता है, तो खेल वहीं खत्म नहीं होगा. नए नियमों के अनुसार, आखिरी ओवर हर हाल में पूरा किया जाएगा और आउट होने पर नया बल्लेबाज तुरंत मैदान में आएगा. यह बदलाव एमसीसी की ओर घोषित नए नियमों का हिस्सा हैं, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे.

एमसीसी ने लॉ 12.5.2 में बदलाव करते हुए साफ किया है कि दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिरने पर खेल नहीं रुकेगा और नया बल्लेबाज तुरंत क्रीज पर आएगा.बचे हुए गेंद अगले दिन के लिए नहीं छोड़े जाएंगे. एमसीसी की नियम उप-कमेटी का मानना था कि पुराना नियम बल्लेबाजी टीम के पक्ष में झुका हुआ था और इससे मैच का रोमांच भी खत्म हो जाता था.

एमसीसी ने कहा, ‘अगर फील्डिंग टीम आखिरी ओवर में विकेट लेती है और बल्लेबाजी टीम को नया खिलाड़ी भेजने की जरूरत नहीं पड़ती, तो यह नाइंसाफी है. यह वक्त अक्सर गेंदबाजों के लिए सबसे अनुकूल होता है और ऐसे में खेल का रोमांच खत्म हो जाता है.’ एमसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बदलाव समय बचाने के लिए नहीं है क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन फिर भी पूरी करनी पड़ती थी.

एमसीसी ने वयस्क रिक्रिएशनल क्रिकेट में लैमिनेटेड बैट्स के इस्तेमाल को भी मंजूरी दे दी है. लैमिनेटेड बैट अलग-अलग किस्म की लकड़ियों से बनता है. आम बैट की तुलना में यह काफी सस्ता होता है और अधिकतम तीन लकड़ी के टुकड़ों से बनाया जा सकता है. एमसीसी ने बताया कि इंग्लिश विलो को तैयार होने में 15 साल से ज्यादा समय लगता है और वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है. इसी वजह से बैट महंगे होते जा रहे हैं. 2017 में ये बैट पहले ही जूनियर क्रिकेट में मंजूर किए जा चुके थे. अब लॉर्ड्स में हुई बैठक और वैश्विक बैट निर्माताओं से बातचीत के बाद एमसीसी ने इन्हें एडल्ट क्लब क्रिकेट के लिए भी हरी झंडी दी है.

लॉ 35.1.1 और 35.2 के तहत अब हिटविकेट को लेकर स्थिति साफ कर दी गई है. अगर बल्लेबाज शॉट खेलने के बाद संतुलन खो देता है और कुछ कदम इधर-उधर लेने के बाद स्टम्प्स पर गिर जाता है तो उसे हिट विकेट आउट माना जाएगा, भले ही गेंद काफी पहले खेली जा चुकी हो. हालांकि अगर बल्लेबाज किसी फील्डर से टकराकर स्टम्प्स पर गिरता है, तो वह हिटविकेट आउट नहीं होगा. अगर बल्ला हाथ से छूटकर सीधे विकेट से टकराता है, तो बल्लेबाज आउट होगा, लेकिन अगर बल्ला पहले विकेटकीपर या किसी खिलाड़ी से टकराए और फिर विकेट गिरे, तो नॉट आउट रहेगा.

ओवरथ्रो की नई परिभाषा (लॉ 19.8)
MCC ने लॉ 19.8 की अस्पष्ट भाषा हटाते हुए साफ परिभाषा दी है-
ओवरथ्रो: जब जानबूझकर गेंद को स्टम्प्स की ओर फेंका जाए ताकि रन रोके जा सकें या रन आउट किया जा सके
मिसफील्ड: गेंद को रोकने या पास करने का प्रयास हो तो इसे ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा.

डेड बॉल नियम में बड़ा बदलाव (लॉ 20.1.1.1)
अब गेंद को डेड घोषित करने के लिए उसका गेंदबाज या विकेटकीपर के हाथ में होना जरूरी नहीं है. नए नियम के अनुसार गेंद किसी भी फील्डर के हाथ में हो सकती है या जमीन पर स्थिर हो सकती है. अंपायर को यह तय करने की पूरी छूट होगी कि गेंद आखिकार डेड हुई है या नहीं. यह बदलाव खासतौर पर क्लोज मैच के आखिरी गेंदों में बेहद अहम माना जा रहा है.

GUJARAT : ऑनलाइन गेम से शुरू हुई प्रेम कहानी, फिर नाबालिग से किया रेप, आरोपी गिरफ्तार

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अहमदाबाद के वेजलपुर में फ्री फायर गेम के जरिए नाबालिग लड़की का संपर्क पश्चिम बंगाल के युवक से हुआ. युवक ने अहमदाबाद आकर दुष्कर्म किया और उसे लेकर भाग गया. पुलिस ने तकनीकी जांच के बाद दोनों को खड़गपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया. नाबालिग को परिवार को सौंपा गया और आरोपी गिरफ्तार किया गया.

आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन गेम बच्चों के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं, इसका गंभीर मामला अहमदाबाद के वेजलपुर इलाके से सामने आया है. यहां फ्री फायर गेम की लत ने एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को ऐसे जाल में फंसा दिया, जहां से उसे पुलिस की मदद से ही बाहर निकाला जा सका. पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक 21 वर्षीय युवक को नाबालिग के साथ खड़गपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है.

पुलिस के अनुसार वेजलपुर इलाके में रहने वाली नाबालिग कक्षा 12 में विज्ञान की पढ़ाई कर रही है. वह अपने स्मार्टफोन पर अक्सर फ्री फायर गेम खेलती थी. करीब डेढ़ साल पहले गेम खेलते समय उसका संपर्क पश्चिम बंगाल निवासी आशिक उर्फ अरमान मोहम्मद अजगर से हुआ. धीरे धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और उन्होंने एक दूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए. इसके बाद व्हाट्सएप पर भी लगातार बातचीत होने लगी.

कुछ दिन पहले युवक पश्चिम बंगाल से अहमदाबाद आया. आरोप है कि नाबालिग के घर पर उस समय कोई मौजूद नहीं था. युवक ने इसी का फायदा उठाकर लड़की के साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद उसने उसे बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाने की योजना बनाई. युवक नाबालिग को अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में बैठाकर पश्चिम बंगाल ले जा रहा था.

इधर नाबालिग के घर से गायब होने पर परिवार ने वेजलपुर थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पता चला कि दोनों ट्रेन से बंगाल की ओर जा रहे हैं. जब ट्रेन खड़गपुर पहुंची, तो वेजलपुर पुलिस ने रेलवे पुलिस को सूचना दीखड़गपुर रेलवे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ट्रेन से युवक और नाबालिग को पकड़ लिया. इसके बाद वेजलपुर पुलिस की टीम खड़गपुर पहुंची और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया. नाबालिग लड़की को सुरक्षित उसके परिवार के हवाले कर दिया गया है. पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है.

NATIONAL : दुकानदार ने बच्ची को टॉफी की जगह दिया बारूद, चबाते ही हुआ विस्फोट… उड़ा जबड़ा

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अलवर के रामगढ़ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां एक बच्ची ने टॉफी समझकर बारूद चबा लिया. जिससे बच्ची का जबड़ा और गाल फट गया. बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र के बास गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां टॉफी समझकर विस्फोटक चबाने से तीन साल की मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई. बच्ची के मुंह में तेज विस्फोट हुआ. धमका इतना तेज था कि बच्ची का जबड़ा और गाल बुरी तरह फट गया. तेज धमाके की आवाज सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे तो बच्ची खून से लथपथ पड़ी मिली. जिसके बाद उसे तुरंत इलाज के लिए अलवर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया. जहां उसकी सर्जरी की गई है और उसका इलाज जारी है. अभी भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है.

पुलिस ने बताया कि अक्शु (3) पुत्री साक्षी अपनी बड़ी बहन अहाना (6) के साथ गांव की ही एक किराना दुकान पर टॉफी लेने गई थी. आरोप है कि दुकानदार सुदील उर्फ काला पुत्र नत्थो ने टॉफी की जगह बारूद से भरी पटाखेनुमा टॉफी बच्ची को दे दी. जैसे ही अक्शु ने उसे मुंह में डालकर चबाया तो बच्ची के मुंह में तेज जोरदार विस्फोट हो गया. विस्फोट के बाद बच्ची खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ी.

इस मामले में बच्ची की चाची निकिता पुत्री परवीन की रिपोर्ट पर रामगढ़ थाने में केस दर्ज किया गया है. थानाधिकारी डॉ. विजेन्द्र सिंह ने बताया कि आरोपी दुकानदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. घटना की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल जांच और विशेषज्ञों की राय ली जा रही है. वहीं आरोपी दुकानदार का कहना है कि बच्ची को चोट सड़क पर गिरने और कोल्डड्रिंक की कांच की बोतल लगने से आई है, लेकिन बच्ची के जबड़े और मुंह की हालत विस्फोट की ओर स्पष्ट इशारा कर रही है. इस घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है. इस संबंध में पुलिस भी मामले की जांच पड़ताल में जुटी है.

रामगढ़ के डीएसपी पिंटू कुमार ने कहा कि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना के बाद से गांव में तरह-तरह की बात होने लगी है. पुलिस ने दुकानदार के बयान दर्ज किए हैं. साथ ही ग्रामीणों से भी पूछताछ की जा रही है. घटना के बाद से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. क्योंकि बच्ची का चेहरा पूरी तरह से खराब हो चुका है.

NATIONAL : 10 साल पहले जिसके साथ भागी थी मां…बेटे ने उसे मार डाला, लाश पर पैर टिकाए करता रहा पुलिस का इंतजार

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कर्नाटक के सावदत्ती तालुका में दिनदहाड़े हुई एक खौफनाक हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी. अवैध संबंध की पुरानी रंजिश में एक व्यक्ति ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर सरेआम चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी. वारदात के बाद आरोपी शव के पास खड़ा रहा और खुद पुलिस को फोन कर अपराध कबूल कर लिया.

कर्नाटक के बेलगावी जिले के सावदत्ती तालुका में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली हत्या की वारदात सामने आई, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया. हूलिकट्टी गांव के पास सड़क पर एक व्यक्ति की सरेआम बेरहमी से हत्या कर दी गई. हत्या के बाद आरोपी का शव के पास खड़े रहना और पुलिस के आने तक लाश की छाती पैर टिकाए रहना, राहगीरों के लिए किसी डरावने मंजर से कम नहीं था.

मृतक की पहचान 51 साल के बसप्पा होसमानी के रूप में हुई है, जो बसडोनी गांव का निवासी था. पुलिस के मुताबिक, सोमवार शाम बसप्पा किसी काम से सड़क से गुजर रहा था, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपी एरय्या मठपति ने उसे रोक लिया और धारदार हथियार से हमला कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी ने बसप्पा पर करीब 16 बार वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई.

यह वारदात सावदत्ती कस्बे के पास हुई, जो प्रसिद्ध येल्लम्मा मंदिर के कारण एक धार्मिक क्षेत्र माना जाता है. खुलेआम हुई इस हत्या से आसपास मौजूद लोग स्तब्ध रह गए और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया.पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी एरय्या मठपति और मृतक बसप्पा होसमानी के बीच पुरानी दुश्मनी थी. करीब दस साल पहले बसप्पा, आरोपी की मां के साथ कथित रूप से घर छोड़कर चला गया था. बाद में दोनों कोल्हापुर में रहने लगे थे. इसी घटना के बाद से आरोपी एरय्या मन में गहरी रंजिश पाले हुए था. बताया जा रहा है कि हाल ही में बसप्पा फिर से अपने गांव और आसपास के इलाके में लौट आया था. इसी दौरान एरय्या को उसके लौटने की जानकारी मिली और उसने बदला लेने की ठान ली. मौका मिलते ही उसने सार्वजनिक स्थान पर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया.

हत्या के बाद आरोपी ने खुद सावदत्ती पुलिस को फोन कर बताया कि उसने बसप्पा की हत्या कर दी है. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपी वहीं खड़ा मिला, जिसका एक पैर मृतक के शव पर रखा हुआ था. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और हत्या का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है. फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के वक्त आरोपी अकेला था या किसी ने उसकी मदद की. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच जारी है.

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