Tuesday, May 5, 2026
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UP : दूसरी औरत के साथ इश्क लड़ा रहा था प्रेमी, नाराज महिला ने बेटी के साथ मिलकर कर दी हत्या

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यूपी के हापुड़ में प्रेमी से दूसरी महिला के इश्क लड़ाने पर महिला को मौत के घाट उतार दिया है. महिला ने बेटी और दो लोगों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया है.उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां एक महिला ने अपने प्रेमी से दूसरी महिला के इश्क लड़ाने पर अपनी बेटी और दो सहयोगियों के साथ मिलकर उसे गला दबाकर मौत के घाट उतार दिया.

मृतक महिला के शव को आरोपी महिला ने धौलाना थाना क्षेत्र के उदयरामपुर स्थित बम्बे में फेंक दिया. पुलिस ने अब आरोपी महिला और उसकी बेटी व दो अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार घटना का खुलासा कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है. हापुड़ एसपी ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि 26 अगस्त की शाम को धौलाना थाना क्षेत्रान्तर्गत उदयरामपुर बम्बे में एक महिला का शव तैरता हुआ ग्रामीणों को मिला था. ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिस ने मृतक महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस महिला की शिनाख्त कराने और महिला की हत्या के कारणों का पता लगाने में जुट गई.

एसपी ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि मृतक महिला की शिनाख्त सुशीला निवासी बिजौली, थाना अतरौली, जिला अलीगढ़ के रूप में हुई. जांच के दौरान सामने आया कि बबली पत्नी स्व. सोमवीर निवासी ग्राम धतूरी थाना सलेमपुर, बुलंदशहर व हाल निवासी सेन विहार, विजयनगर बाईपास, गाजियाबाद के संबंध गौरव निवासी महाराणा बिहार, बिहारीपुरा गाजियाबाद से पिछले पांच वर्षों से थे.

बबली ने पुलिस को बताया कि गौरव और उसकी रिलेशनशिप के बीच में सुशीला की एंट्री हुई, जिसकी वजह से गौरव उससे दूर जाने लगा. इसकी भनक जब बबली को हुई, तो उसने सुशीला को रास्ते से हटाने की योजना तैयार कर ली.

एसपी ने बताया कि बबली ने 26 अगस्त को सुशीला को घूमने के बहाने से गाजियाबाद रिपब्लिक क्रॉसिंग के पास बुलाया और उसके साथ उसकी बेटी, व एक अन्य महिला सुमन पत्नी राकेश यादव निवासी ग्राम नान थाना हाफिजपुर, हाल निवासी सेन विहार, विजयनगर बाईपास और विपिन पुत्र कालू यादव निवासी ग्राम नान थाना हाफिजपुर, हाल निवासी सेन विहार विजयनगर बाईपास भी थे.

विपिन मैक्स पिकअप गाड़ी लेकर आया था और सभी लोग गाड़ी में पीछे की ओर सवार हो गये. इसी दौरान बबली ने सुमन और अपनी बेटी के साथ मिलकर सुशीला का गाड़ी में ही गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया और उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए धौलाना थाना क्षेत्र के उदयरामपुर स्थित बम्बे में फेंक दिया. फिलहाल, पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है और महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिवारीजनों के हवाले कर दिया है. पुलिस ने इस हत्या में प्रयुक्त मैक्स पिकअप गाड़ी को भी बरामद किया है.

 

JAIPUR : बिल्डिंग से कूदने की धमकी दे रही थी NEET की तैयारी कर रही छात्रा… कोचिंग स्टाफ ने सूझबूझ से बचाई जान,

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जयपुर के एक कोचिंग सेंटर में नीट की तैयारी कर रही छात्रा ने अचानक बिल्डिंग की छत पर चढ़कर सुसाइड की धमकी दी. इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. कोचिंग के कर्मचारियों की सूझबूझ से छात्रा को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया. घटना के पीछे छात्रा का लंबे समय से डिप्रेशन में होना बताया जा रहा है.राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक कोचिंग सेंटर में सनसनीखेज मामला सामने आया. यहां नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा अचानक कोचिंग सेंटर की ऊंची बिल्डिंग पर चढ़ गई और कूद जाने की धमकी देने लगी. इस दौरान मौके पर मौजूद लोग सहम गए. कुछ देर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए.

जानकारी के अनुसार, छात्रा काफी समय से डिप्रेशन में थी और कोचिंग के टेस्ट भी नहीं दे पाई थी. शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे छात्रा कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग की छत पर पहुंची और किनारे पर खड़े होकर छलांग लगाने की धमकी देने लगी. इस मामले को लेकर कोचिंग संस्थान में हड़कंप मच गया. कोचिंग के कर्मचारियों ने तुरंत सक्रियता दिखाई और कुछ ही समय में सूझबूझ दिखाकर छात्रा को सुरक्षित नीचे उतार लिया.

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि छात्रा कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग की छत पर है. वहां वह मुंडेर पर खड़ी दिखाई दे रही है. वहीं नीचे तमाम लोग खड़े हैं, जो उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं. गनीमत रही कि समय रहते संस्थान के कर्मियों ने छात्रा को उतार लिया.थानाधिकारी गुंजन वर्मा ने बताया कि यह घटना शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे की है. छात्रा लंबे समय से डिप्रेशन में थी. उसने कोचिंग के टेस्ट भी नहीं दिए थे. परिजनों को जब इसकी जानकारी मिली तो वे आनन-फानन में तुरंत जयपुर पहुंचे. परिजनों की डांट के डर से घबराकर छात्रा छत पर चढ़ गई. हालांकि, छात्रा को सुरक्षित नीचे उतारने के बाद परिजन उसे अपने साथ घर ले गए. उन्होंने किसी भी प्रकार की शिकायत पुलिस से नहीं की है.

KANPUR : ‘अगर तुम नहीं आओगी तो मर जाऊंगा…’, पत्नी से फोन पर बात करने के बाद शख्स ने मौत को लगाया गले

कानपुर में एक शख्स ने पत्नी से फोन पर बात करते-करते आत्महत्या कर ली, मृतक की पहचान विजय के रूप में हुई है. बताया गया कि विजय की शादी डेढ़ महीने पहले हुई थी, चौथी में मायके वाले पत्नी को विदा करा कर ले गए थे. इसके बाद वह वापस नहीं आई. इसी को लेकर दोनों में विवाद चल रहा था. मृतक के माता-पिता नहीं थे, वह अपने भाई-भाभी के साथ रहता था. घटना के वक्त के घर के सभी लोग बाहर थे. घटना की सूचना पर पहुंची ने शव को फंदे से नीचे उतरवाकर पीएम के लिए भिजवाया. साथ ही मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है.

दरअसल, कानपुर का 28 साल का विजय कैंट के संजय नगर खलवा का रहने वाला था. वह मेस्टन रोड स्थित कपड़े की एक दुकान में काम करता था. माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है. वह अपने भाइयों के साथ रहता था. गुरुवार शाम को पत्नी से बात करते-करते विजय ने आत्महत्या कर ली.

विजय के चचेरे भाई सत्यवीर ने बताया कि डेढ़ माह पहले विजय की शादी आजमगढ़ के मालिकपुर गांव की रहने वाली शालू से हुई थी. 21 जुलाई को शालू के परिजन उसे चौथी में विदा करा ले गए थे. जिसके बाद से वह वापस नहीं आई. सत्यवीर ने बताया कि कई बार विजय ने उसे फोन कर आने को कहा, लेकिन शालू ने आने से मना कर दिया.

मृतक के चचेरे भाई सत्यवीर ने आगे बताया कि 27 अगस्त की शाम विजय के भाई सूरज और भाभी कंचन अपने बेटे को लेकर डॉक्टर के पास गए थे. इस दौरान विजय घर पर अकेला था. विजय ने पत्नी कर फोन कर घर आने को कहा तो दोनों के बीच में विवाद होने लगा. इस दौरान विजय ने पत्नी से कहा- अगर वापस नहीं आई तो जिंदा नहीं पाओगी. जिस पर पत्नी ने 4 से 10 सितंबर के बीच आने की बात कही. उसकी बात सुनकर विजय परेशान हो गया. फोन पर ही बात करते-करते विजय ने आत्महत्या कर ली.

घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा खोला तो विजय का शव फंदे पर लटक रहा था, कान में ईयरबड्स लगे हुए थे. परिजनों ने विवाहिता पर प्रेम प्रसंग का आरोप लगाया, परिजनों ने बताया कि प्रेम प्रसंग के कारण ही विवाहिता के परिजनों ने 15 दिन के भीतर ही शादी करा दी थी. परिजनों के मुताबिक, विजय की पत्नी ने कहा कि तेरहवीं की डेट की जानकारी दे देना, तब घर आ जाएंगे. कैंट पुलिस ने मृतक के फोन को जब्त कर शव को पोस्टमॉर्टम भिजवाया है.

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MP : ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन, क्यों फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन रहा MP?

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ग्वालियर में आयोजित रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश को इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर का केंद्र बताया गया. इस आर्टिकल में जानें कि मध्य प्रदेश पर्यटन का नया हब कैसे बन रहा है ‘मध्य प्रदेश अपनी इतिहास, विरासत और प्राकृतिक धरोहरों के लिए पहचाना जाता है’ ये कहना है प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति शिव शेखर शुक्ला का. उन्होंने ये बात ग्वालियर में आयोजित रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में कही.

बता दें कि मध्य प्रदेश में 750 से अधिक संरक्षित केंद्र और 18 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं. ग्वालियर को यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटी ऑफ म्यूजिक घोषित किया गया है. इसके बाद यहां के पर्यटन महत्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है.प्रदेश के कई शहर और क्षेत्र जैसे मांडू, ओरछा और ग्वालियर न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के लिए बल्कि संस्कृति और संगीत परंपरा के लिए भी जाने जाते हैं. प्रदेश का 30 प्रतिशत क्षेत्र जंगलों से ढका है और यहां 12 नेशनल पार्क मौजूद हैं.

श्योपुर क्षेत्र में चीता पुनर्वास के बाद अब उनकी संख्या बढ़ रही है. धार्मिक दृष्टि से भी प्रदेश महत्वपूर्ण है- यहां दो ज्योतिर्लिंग, भगवान राम और कृष्ण के पदचिह्न तथा मां नर्मदा का आध्यात्मिक सौंदर्य देखने लाखों पर्यटक आते हैं.सरकार का दावा है कि प्रदेश सरकार ने पर्यटन को निवेश और विकास का नया केंद्र बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं. नई पर्यटन नीति के तहत निवेशकों को 15 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जा रही है. 100 करोड़ के निवेश पर 30 प्रतिशत तक लाभ दिया जा रहा है.

प्रदेश में 50 से अधिक ऐसे स्थल चिह्नित हैं जहां निवेशक पर्यटन आधारित उद्योग विकसित कर सकते हैं. फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए शूटिंग परमिशन को ऑनलाइन किया गया है और छूट की सुविधाएं दी गई हैं. इसी का नतीजा है कि अब हर 10 में से 3-4 फिल्में मध्य प्रदेश में शूट हो रही हैं.ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन भी यहां तेजी से विकसित हो रहा है. प्रदेश में 350 से अधिक होम स्टे बनाए गए हैं जहां पर्यटक जनजातीय जीवनशैली और खानपान का अनुभव ले सकते हैं. लाड़पुरा और छिंदवाड़ा के होमस्टे को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.

चंदेरी की साड़ियां विश्व प्रसिद्ध हैं और प्राणपुरा गांव को क्राफ्ट विलेज घोषित किया गया है. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के किला, चंबल घाटी की रॉक आर्ट साइट और चौसठ योगिनी मंदिर को यूनेस्को हेरिटेज साइट्स में शामिल कराया गया है.सरकार का लक्ष्य ग्वालियर को शास्त्रीय संगीत का केंद्र बनाना और गोल्डन ट्रायंगल को ग्वालियर से जोड़कर ‘डायमंड रिंग’ टूरिज्म सर्किट विकसित करना है.

 

LIFESTYLE : पूजा के बाद बची राख को फेंकें नहीं, ये उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत!

पूजा के वक्त हम जो भी धूपबत्ती या दीया जलाते हैं. उसके बाद बची राख को हम फालतू समझ कर फेंक देते हैं. यह करना अशुभ साबित हो सकता है. जानिए पूजा के बाद बची राख का क्या करें?

सनातन धर्म में पूजा-पाठ में उपयोग हुई चीजों का खास महत्व बताया है. जैसे रोली, अक्षत, फल, फूल और नारियल के बिना पूजी अधूरी होती है. इन समाग्रियों का पूजा में खास इस्तेमाल किया जाता है. पूजा के वक्त हमारे द्वारा जो भी धूपबत्ती या दीया जलाया जाता है. उसके बाद इसके बचे राख को हम फालतू समझ कर फेंक देते हैं. यह करना अशुभ साबित हो सकता है. अगर आप लोग भी ऐसा करते हैं तो यह करने से बचे. अब आप लोगों के मन में सवाल उठ रहा होगा की जली हुई बत्ती का क्या करना चाहिए? इसे फेंक देना चाहिए या नहीं? चलिए जानते हैं कि पूजा के बाद बची राख का क्या करें.

पूजा के बाद बची राख का क्या उपाय करें?

पूजा करने के बाद धूपबत्ती की राख और दीपक की जली बत्ती को किसी भी पेड़ के नीचे छुपाकर रख दें. यह उपाय करने से कर्जे से मुक्ति मिल जाएगी और शुभ चीजों का आगमन होगा.
शास्त्रों में पूजा से बची राख का एक उपाय यह भी बताया गया है कि अगर किसी व्यक्ति को नजर लगी हो तो राख को इकट्ठा कर उसके ऊपर से 11 बार नजर उतारे और उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ फेंक दें. यह करने से नजर दोष समाप्त हो जाएगा और जीवन में खुशियों का प्रारंभ होगा.
शत्रु भय दूर करने के लिए करें उपाय
आपको लगता है कि आप के ऊपर शत्रु भय है, तो पूजा के बाद बची राख और बत्ती को अपने हाथ में लेकर शत्रु का नाम लेते हुए उसे दक्षिण दिशा की तरफ फेंक दें. यह उपाय करने से जीवन में लाभ हो सकता है और शत्रु की हार होगी.

धन के लाभ के लिए करें यह काम
अगर आप को धन से जुड़ी तकलीफें हो रही हैं तो पूजा के बाद जली हुई दीपक की बत्ती और धूपबत्ती की राख को इकट्ठा करके उसे जमीन के नीचे रख दें और शनिदेव के मंत्रों का जाप भी करें.

कपड़े में बांधकर नदी में करें प्रवाहित
अगर जीवन में ग्रहदोष चल रहा है तो पूजा से बची धूपबत्ती की राख और दिपक की बत्ती को कहीं पर भी न फेंके. यह करना अशुभ माना जाता है. इन दोनों को एक लाल कपड़े में रख दें और एक हफ्ते बाद इन्हें नदी में प्रवाहित कर दें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

ENTERTAINMENT : ‘मोहब्बतें’ की सक्सेस के बाद भी नहीं चला शमिता शेट्टी का करियर, फिल्में हुईं फ्लॉप, कुछ तो कभी रिलीज ही नहीं हुईं

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शमिता शेट्टी ने अपने बॉलीवुड सफर पर खुल कर बात की. एक्ट्रेस ने बताया रोल पाने के लिए फिल्ममेकर से खुद संपर्क करती रहती हैं.एक्ट्रेस शमिता शेट्टी का बॉलीवुड सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसे दिग्गजों के साथ ‘मोहब्बतें’ में एक शानदार शुरुआत के बावजूद, उनके पास फ्लॉप फिल्में, अधूरे प्रोजेक्ट्स और अपनी बड़ी बहन शिल्पा शेट्टी से लगातार तुलनाओं से घिर गई. सालों बाद, शमिता अपने संघर्षों, खोए हुए अवसरों के सफर के बारे में खुलकर बात की.

शमिता ने पिंकविला से बातचीत में कहा कि अपने बॉलीवुड डेब्यू के कुछ समय बाद ही, उन्होंने संजय दत्त, चंद्रचूड़ सिंह और आर. माधवन के साथ चार फिल्में पूरी की थीं, लेकिन ये सभी फिल्में कभी रिलीज नहीं हुईं. शमिता ने बताया कि इन फिल्मों के रिलीज न होने से उनके करियर को बड़ा झटका लगा और उनकी शुरुआत की रफ्तार धीमी पड़ गई.

एक्ट्रेस की हालिया फिल्म ‘द टेनेंट’ भी अपनी पहचान बनाने में मुश्किलों का सामना करती रही. कई बार देरी के बाद, यह फिल्म अंत में केवल कुछ ही सिनेमाघरों में रिलीज हुई और बहुत कम प्रचार मिला. एक्ट्रेस ने बताया कि वो अहम रोल पाने के लिए फिल्म मेकर और कास्टिंग डायरेक्टर से खुद संपर्क करती रहती हैं. उन्होंने कहा कि काम के लिए अपनी इच्छा जताने में कोई शर्म नहीं है, और यह उनके धैर्य और मजबूत इरादों को दिखाता है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी बड़ी बहन से तुलना उन्हें कभी परेशान करती थी, तो शमिता ने कहा कि पहले ऐसा होता था, लेकिन अब नहीं. उन्होंने बताया कि शिल्पा की सफलता की छाया में बड़े होने की वजह से अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए मुश्किल था. जहां शिल्पा को ‘पवित्र और आदर्श’ माना जाता था, वहीं शमिता को अक्सर ‘बिगड़ैल’ कहा जाता था. एक्ट्रेस ने बताया कि इससे उनके अंदर काफी उलझन हुई और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें क्या बनना चाहिए.

शमिता ने बताया कि अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती उनके बचपन से ही रही. लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने ये सीख लिया कि खुद को अपनाना कितना जरूरी है. आज वो अपनी पहचान को लेकर आत्मविश्वास महसूस करती हैं और कहती हैं कि अब उनकी बहन से तुलना उन्हें प्रभावित नहीं करती.

शमिता ने आगे बताया कि बचपन में उन्होंने शायद ही कभी अपनी बहन से तुलना के असर के बारे में खुलकर बात की. लेकिन समय के साथ, उन्हें ये तुलना बेमानी लगने लगी. उनका मानना है कि हर व्यक्ति अनोखा होता है, भले ही वे एक ही परिवार में हों, और वह खुद और शिल्पा को बिल्कुल अलग व्यक्तित्व और खूबियों वाला मानती हैं.

 

 

ENTERTAINMENT : मुनव्वर फारूकी ने मां की मौत और पिता के पैरालिसिस अटैक को लेकर किया रिएक्ट, बोले- कैसे नफरत करूं?

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स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने हाल ही में अपनी मां के निधन और पिता के पैरालिसिस के दर्द के बारे में बात की. मुनव्वर ने उस वक्त के दर्द के बारे में बात की.

स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी आज इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं. उन्होंने इंडस्ट्री में नेम-फेम पाने के लिए बहुत मेहनत की. मुनव्वर ने हाल ही में अपने पेरेंट्स को लेकर बात की. मुनव्वर ने बताया कि कैसे उनकी मां ने जिंदगी में दुख देखा.

मुनव्वर ने बताया, ‘मेरी मां को परिवार में कभी भी सराहना नहीं मिली. उन्होंने मेरे पिता के साथ 22 साल की शादी में बहुत दर्द देखा. वो बहुत धैर्य वाली थीं, लेकिन उस सब्र की भी एक लिमिट है. उन्होंने सालों तक अपने अंदर बहुत कुछ दबाए रखा. मैं 13 साल का था और किसी ने मुझे सुबह उठाया और कहा कि वो हॉस्पिटल में हैं. जब मैं वहां पहुंचा तो मुझे पता चला कि मेरा परिवार किसी को भी ये नहीं बताना चाहता था कि उन्होंने जहर लिया था. जिसकी वजह मुझे समझ नहीं आई. उस अस्पताल में एक नर्स थी जो मेरी मां की तरफ से फैमिली फ्रेंड थी. मैंने उन्हें बताया. उसके बाद मेरी मां को तुरंत इमरजेंसी रूम में ले जाया गया लेकिन वो बच नहीं पाई.’

प्रखर गुप्ता संग बातचीत में आगे मुनव्वर ने कहा, ‘शुरू में मैं मेरे पिता से बहुत नाराज था. लेकिन फिर मैंने देखा कि उन्हें अपनी गलतियों का एहसास हुआ. तो मैंने अपने गुस्से को जाने दिया. मेरी मां के जाने के दो साल बाद, मेरे पापा को पैरालिसिस अटैक आया और 80 परसेंट बॉडी उनकी पैरालिसिस हो गई. वो ऐसे 11 साल रहे. मैं उन्हें विलेन के तौर पर देखता रहा लेकिन थे तो वो मेरे पिता ही. तुम अपने आप को कहते रहते हो कि उन्हें ये गलत किया, लेकिन उन्हें उसकी सजा मिल गई. वो खुद भी दर्द से गुजरे. इस इंसान से मैं क्या नफरत करूं? उनके आसपास कोई भी नहीं था. उनकी सिचुएशन ने मुझे उन्हें माफ करने के लिए मजबूर कर दिया. इसके बाद कुछ भी इफेक्ट करना बंद कर दिया.’

 

MP : दो अवारा कुत्तों का बच्चे पर हमला, नीचे गिराकर नोचा……

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मध्य प्रदेश के भोपाल के बागमुगलिया कटारा हिल्स में आवारा कुत्तों ने मासूम बच्चे पर हमला कर दिया. घटना सीसीटीवी में कैद हुई, जिससे लोगों में आक्रोश है. अब पूरे इलाके में दहशत है.

मध्य प्रदेश के भोपाल के बागमुगलिया कटारा हिल्स इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक लोगों की नींद हराम कर रहा है. आए दिन कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं. ताजा मामला बेहद डरावना है, जहां एक मासूम बच्चे पर आवारा कुत्ते ने हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया. यह पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई.

घटना के बाद मोहल्ले में दहशत का माहौल है. लोग अपने बच्चों को घर से बाहर खेलने भेजने से डर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है. पहले भी कई बार बच्चे और बुजुर्ग कुत्तों का शिकार बन चुके हैं. घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है.

रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रही. लोग कहते हैं कि निगम की डॉग कैचिंग टीम इलाके में आती है, लेकिन कुछ डॉग लवर्स टीम के लोग कुत्तों को पकड़ने से रोक देते हैं. यही वजह है कि ये कुत्ते खुलेआम सड़कों पर घूमते हैं और किसी पर भी हमला कर देते हैं.

मोहल्ले के लोगों का कहना है कि जिम्मेदारी सिर्फ निगम की नहीं बल्कि उन लोगों की भी बनती है, जो कुत्तों को पकड़ने से रोकते हैं. अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो यह हादसा नहीं होता. गुस्साए लोगों ने निगम प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे.फिलहाल, इस घटना के बाद क्षेत्र में डर और आक्रोश दोनों का माहौल है. लोग चाहते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए आवारा कुत्तों पर तुरंत नियंत्रण लगाया जाए.

 

NATIONAL : पटना का बी.टेक ग्रेजुएट युवक म्यांमार में बना बंधक, फर्जी नौकरी के लालच में फंसा

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पटना का बी.टेक ग्रेजुएट म्यांमार में फर्जी जॉब रैकेट का शिकार होकर दो महीने तक बंधक बना रहा. उसे एक नेपाली एजेंट ने अच्छी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर म्यांमार भेजा, जहां पहुंचते ही उसे बंधक बना लिया गया और स्कैम में शामिल होने के लिए प्रताड़ित किया गया. परिजनों से फिरौती भी मांगी गई. पुलिस और भारतीय दूतावास की मदद से युवक को छुड़ाया गया.

पटना का एक बी.टेक ग्रेजुएट युवक म्यांमार में फर्जी नौकरी के लालच में फंसकर दो महीने तक बंधक बना रहा. पुलिस और भारतीय दूतावास के प्रयासों से युवक को सुरक्षित देश वापस लाया गया है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि बंधक बने युवक की पहचान सचिन कुमार के रूप में हुई है. वो पटना का रहने वाला है. सचिन को एक नेपाली एजेंट ने म्यांमार में अच्छी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर फंसाया. एजेंट ने उसका टूरिस्ट वीजा बनवाकर म्यांमार भेजा. जून के आखिर में जैसे ही सचिन वहां पहुंचा, उसे बंधक बना लिया गया.

पटना सिटी एसपी (पश्चिम) भानु प्रताप सिंह ने बताया कि बंधक बनाने के बाद आरोपियों ने सचिन को एक स्कैम में शामिल करने का दबाव बनाया. इंकार करने पर उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया. इसके अलावा, परिजनों से फिरौती भी मांगी गई. सचिन के परिवार से संपर्क कर रकम देने के लिए धमकाया गया.परिवार की शिकायत पर पटना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और एक आरोपी को गिरफ्तार किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई. इसके साथ ही म्यांमार के अधिकारियों से संपर्क कर भारतीय दूतावास की मदद से युवक की रिहाई सुनिश्चित कराई गई.

अधिकारियों ने बताया कि सचिन को म्यांमार से छुड़ाकर भारतीय दूतावास के सुपुर्द किया गया. शुक्रवार को वह कोलकाता के रास्ते पटना पहुंचा. फिलहाल पुलिस आरोपी नेटवर्क की तलाश में जुटी है. यह गिरोह नेपाली एजेंटों के माध्यम से भारतीय युवाओं को ऊंची सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर म्यांमार बुलाता है और उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल करता है. पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी अनजान एजेंट या कंपनी के झांसे में आकर विदेश जाने से पहले उनकी सत्यता की जांच जरूर करें.

ENTERTAINMENT : ‘पवित्र रिश्ता’ फेम एक्ट्रेस प्रिया मराठे का 38 की उम्र में निधन, एक साल से कैंसर से थीं पीड़ित

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मशहूर एक्ट्रेस प्रिया मराठे अब हमारे बीच नहीं रहीं. एक्ट्रेस का आज मुंबई में निधन हो गया है. लंबे वक्त से वो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. एक्ट्रेस के निधन से हर किसी को गहरा सदमा लगा है.

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आ रही है. मशहूर टीवी एक्ट्रेस प्रिया मराठे का 38 की उम्र में निधन हो गया है. एक्ट्रेस ने 31 अगस्त 2025 को मुंबई में अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि वो पिछले एक साल से कैंसर से पीड़ित थीं. बीमारी से जूझते हुए उन्होंने आज इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है.

जानकारी के मुताबिक, प्रिया लंबे वक्त से कैंसर से जूझ रही थीं. उनका इलाज चल रहा था. मगर अफसोस वो इस बीमारी से उबर नहीं पाईं और कैंसर से जंग लड़ते हुए आज रविवार (31 अगस्त) की सुबह उनका निधन हो गया. प्रिया सिर्फ 38 साल की थीं. इतनी कम उम्र में एक्ट्रेस के यूं अचानक दुनिया छोड़कर चले जाने से उनके परिवार समेत फैंस को भी तगड़ा झटका लगा है. उनके तमाम करीबी लोग सदमे में हैं.

प्रिया का जन्म 23 अप्रैल 1987 को मुंबई में हुआ था. उनकी परवरिश और पालन-पोषण भी यहीं हुआ था. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई मुंबई से ही की थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और अपने सपनों को पूरा किया. प्रिया मराठे छोटे पर्दे की जानी-मानी एक्ट्रेस होने के साथ स्टैंड-अप कॉमेडियन भी थीं. उन्होंने कई पॉपुलर हिंदी और मराठी शोज में काम किया था. उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से हमेशा फैंस के दिल जीते.

प्रिया ने मराठी सीरियल ‘या सुखानोया’ और फिर ‘चार दिवस सासुचे’ से टीवी जर्नी की शुरुआत की थी. इसके बाद वो बालाजी टेलीफिल्म्स के ‘कसम से’ शो में विद्या बाली के किरदार में नजर आई थीं. उन्हें ‘कॉमेडी सर्कस’ के पहले सीजन में भी देखा गया था.प्रिया ने टीवी के सबसे पॉपुलर और हिट शो ‘पवित्र रिश्ता’ में भी काम किया था. इस शो में वो वर्षा की भूमिका में दिखाई दी थीं. उनके किरदार को काफी पसंद किया गया था. फैंस और सेलेब्स प्रिया को नम आंखों से याद कर रहे हैं. एक्ट्रेस की मौत से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सन्नाटा छा गया है.

 

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