Sunday, May 10, 2026
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NATIONAL : एअर इंडिया ने विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच सिस्टम में नहीं पाई कोई गड़बड़ी, एयरलाइन ने पूरी की जांच

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एअर इंडिया ने अपनी सभी बोइंग 787 और 737 विमानों की फ्यूल कंट्रोल स्विच (FCS) लॉकिंग मैकेनिज़्म की जांच पूरी कर ली है और उनमें कोई समस्या नहीं पाई गई है. यह जांच 12 जून को हुए अहमदाबाद हादसे के बाद की गई, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी. DGCA ने एयरलाइंस को फ्यूल कंट्रोल स्विच के इंस्पेक्शन के निर्देश दिए थे.

एअर इंडिया ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी पूरी बोइंग 787 और बोइंग 737 फ्लीट में फ्यूल कंट्रोल स्विच (Fuel Control Switch – FCS) लॉकिंग मैकेनिज़्म की ऐहतियाती जांच पूरी कर ली है. एक बयान में एयरलाइन ने बताया कि जांच के दौरान फ्यूल स्विच में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं पाई गई.

यह कार्रवाई 12 जून को हुए एक भयावह विमान हादसे के बाद की गई. उस दिन एक एअर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रहा था, लेकिन उड़ान भरने के तुरंत बाद एक इमारत से टकराकर क्रैश कर गया था. इस हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 19 जमीन पर मौजूद लोग भी शामिल थे. विमान में सवार 242 यात्रियों में से सिर्फ एक ही यात्री जीवित बच सका था.

एअर इंडिया ने जानकारी दी कि उसने 12 जुलाई को DGCA के आधिकारिक निर्देश से पहले ही इसकी जांच शुरू कर दी थी. कंपनी ने बताया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यह जांच पूरी कर ली गई और इसकी जानकारी रेगुलेटर को भी दे दी गई है. एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस, दोनों की फ्लीट पर यह जांच की गई.एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “जांच के दौरान लॉकिंग मैकेनिज्म में कोई समस्या नहीं पाई गई. हम यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.” जांच की पुष्टि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के उस आदेश के बाद की गई है, जिसमें भारत में उड़ान भर रहे बोइंग सहित अन्य विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच सिस्टम की जांच के निर्देश दिए गए थे.

12 जून की एअर इंडिया विमान दुर्घटना की 15 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि टेक-ऑफ के एक सेकंड के भीतर ही इंजन को फ्यूल देने वाले स्विच ‘RUN’ से ‘CUT OFF’ मोड में चले गए थे, जिससे इंजन को फ्यूल सप्लाई फ्रीज हो गई और यह हादसा हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, विमान ने 180 नॉट्स की स्पीड तक पहुंचने के बाद कुल 30 सेकंड में क्रैश कर गया. हालांकि, रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि फ्यूल स्विच फ्लाइट के दौरान कैसे बंद हो गए.

NATIONAL : सीएम रेखा गुप्ता ने किया कांवड़ियों का स्वागत, महिला श्रद्धालुओं के छुए पैर

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दिल्ली में कांवड़ियों के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने महिलाओं का तिलक लगा कर स्वागत किया और उनके पैर छू कर आशीर्वाद भी लिया।

इस समय पूरे देश में कावड़ यात्राएं निकाली जा रही है। राजधानी दिल्ली में भी जोर शोर से कांवड़ यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे है और कार्यक्रमों का आयोजन भी हो रहा है। मंगलवार को आयोजित ऐसे ही एक कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में स्थित बाबा श्यामगिरी मंदिर में आयोजित किया गया था। बता दे कि इस बार दिल्ली की सरकार ने कांवड़ियों के लिए 374 शिविरों का आयोजन किया है। इन सभी कैंपों में जरूरी सुविधा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है।

इस दौरान सीएम रेखा ने न सिर्फ कांवड़ा ला रही महिलाओं का तिलक लगा कर स्वागत किया बल्कि उनके पैर छू कर आशीर्वाद भी लिया। सीएम ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी शिव भक्तों पर फूल भी बरसाए और उनके साथ मिल कर कार्यक्रम का आंनद लिया। सीएम रेखा के साथ दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा, शाहदरा से विधायक संजय गोयल और दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष सत्या शर्मा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

 

LUCKNOW : ‘डेविल’ प्रिंट वाली टीशर्ट से पकड़ा गया कातिल! 10 साल पुरानी रंजिश में किया था ठेले वाले का मर्डर, ऐसे हुआ खुलासा

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पुलिस की जांच में सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी पार्टी मनाने चले गए थे. सीसीटीवी फुटेज में एक युवक ऑरेंज कलर की ‘डेविल’ प्रिंट वाली टी-शर्ट में भागता दिखा, जिसकी पहचान सोनू कश्यप के रूप में हुई. सोशल मीडिया खंगालने पर सोनू की वही टी-शर्ट पहने पार्टी में झूमते हुए एक तस्वीर मिली. इस तरह मामला खुलता गया.

लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में नारियल पानी बेचने वाले एक दुकानदार की हत्या के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है. 22 साल के मनोज की 19 जून की रात पीट-पीटकर हत्या की गई थी. वारदात को ‘ब्लाइंड मर्डर’ मानकर जांच शुरू की गई. करीब 150 सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया. पूछताछ में पता चला कि मुख्य आरोपी सोनू कश्यप ने 10 साल पहले अपनी मां से मारपीट का बदला लेने के लिए इस हत्या की साजिश रची थी.

इंदिरा नगर थाना पुलिस की जांच में सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी पार्टी मनाने चले गए थे. सीसीटीवी फुटेज में एक युवक ऑरेंज कलर की ‘डेविल’ प्रिंट वाली टी-शर्ट में भागता दिखा, जिसकी पहचान सोनू कश्यप के रूप में हुई. सोशल मीडिया खंगालने पर सोनू की वही टी-शर्ट पहने पार्टी में झूमते हुए एक तस्वीर मिली. जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपना जुर्म नहीं कबूला, लेकिन फोटो में नजर आ रहे अन्य युवकों ने पुलिस के सामने हत्या की बात स्वीकार ली.

मामले में डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया- सोनू ने पुलिस से कहा कि वह 10 साल से मनोज को खोज रहा था. तीन महीने पहले माही मेडिकल के पास उसे ठेला लगाते देखा, जिसके बाद वह रेकी करने लगा. मनोज से बदला लेने के लिए सोनू ने चार दोस्तों को शामिल किया और वारदात के दिन सबने मिलकर रॉड से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी. मनोज की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने 2015 में सोनू की मां से मारपीट की थी, जिसके खिलाफ थाने में एनसीआर दर्ज थी.

पुलिस के मुताबिक, घटना की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी. सलामू ने रॉड लाने की जिम्मेदारी ली जबकि बाकी आरोपी मनोज की दुकान बंद होने का इंतजार करते रहे. जैसे ही मनोज ठेला समेटकर घर के लिए निकला, सभी आरोपी उस पर टूट पड़े. गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी.

रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी सोनू कश्यप समेत पांचों आरोपियों- सन्नी कश्यप, सलामू, रंजीत कुमार और रहमत अली को गिरफ्तार कर लिया. इंदिरा नगर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और सोशल मीडिया अकाउंट की गहन जांच की. इस खुलासे के साथ पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझा ली है और अब सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

MUMBAI : 3 हफ्ते से लापता विजय चौहान की लाश अपने ही घर पर फर्श के नीचे गड़ी मिली , अब पत्नी गायब

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नालासोपारा में विजय चौहान नामक व्यक्ति का शव घर में फर्श के नीचे दबा मिला. उसकी पत्नी चमन देवी लापता है. विजय का फोन तीन हफ्ते से बंद आ रहा था, जिसपर भाइयों को शक हुआ.महाराष्ट्र के नालासोपारा इलाके से एक हैरान करने वाला खौफनाक मामला सामने आया है. यहां पर तीन हफ्ते से लापता 32 वर्षीय विजय चौहान की लाश उसी के घर में फर्श के नीचे दबी पाई गई. फर्श के ऊपर नए टाइल भी लगाए गए थे. वहीं, मृतक विजय चौहान की पत्नी 28 वर्षीय चमन देवी गायब है.

मुंबई पुलिस की गई जांच में सामने आया है कि विजय चौहान का फोन तीन हफ्ते से लगातार स्विच ऑफ आ रहा था. यह बात पुलिस को विजय के भाइयों ने बताई. विजय की चिंता में भाई जब उसकी चॉल पर पहुंचे तो देखा कि केवल एक कोने में फर्श पर नए टाइल लगाए गए हैं. हैरानी की बात यह भी रही कि विजय चौहान का 20 वर्षीय पड़ोसी भी कुछ दिन से गायब है. पुलिस अभी तक लापता व्यक्ति और विजय चौहान के बीच कोई कनेक्शन नहीं निकाल पाई है. यह साबित नहीं हो सका है कि लापता हुए पड़ोसी का हाथ विजय चौहान की हत्या में है भी या नहीं?

विजय चौहान के भाई उसी इलाके में कुछ दूरी पर रहते हैं. आखिरी बार 10 जुलाई को वे विजय चौहान के घर आए थे. तब पत्नी चमन देवी ने उन्हें बताया था कि विजय ने कुर्ला में कोई काम पकड़ लिया है और अभी वहीं है. इस दौरान लगातार उसका फोन ऑफ आता रहा.

बीते शनिवार (18 जुलाई) को विजय चौहान के भाई फिर से उसके घर आए. तब पड़ोसियों ने उन्हें बताया कि चमन देवी काफी दिन से घर नहीं आई है. यहां ताला लगा हुआ है. मृतक के भाई घर के अंदर पहुंचे तो घर में कोई नहीं था. शक बढ़ने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी. इसके बाद घर की तलाशी ली गई और विजय की लाश घर में ही फर्श के नीचे गड़ी हुई मिली.

अब पुलिस विजय की पत्नी चमन देवी को ढूंढने की कोशिश कर रही है. यह पता लगाने की भी कोशिश कर रही है कि 20 वर्षीय पड़ोसी कहां गया और उसका इस हत्याकांड से क्या कनेक्शन है?

निमिषा श्रीवास्तव ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है. इनको पत्राकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. इस दौरान इन्होंने राजनीति, क्राइम और हेल्थ-लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. अभी निमिषा एबीपी न्यूज के डिजिटल विंग में अपनी सेवाएं दे रही हैं. निमिषा को इतिहास, साहित्य और कविताएं पढ़ने में रुचि है.

ENTERTAINMENT : ‘दूध जैसी गोरी नहीं हो’, रंग की वजह से एक्ट्रेस से छिन गया था रोल, पतली होने पर भी होती हैं ट्रोल, अब छलका दर्द

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वाणी कपूर ने खुलासा किया है कि कभी उन्हें दूध जैसी गोरी ना होने की वजह से फिल्म से हटा दिया गया था. एक्ट्रेस ने ये भी बताया कि वे पतली होने कीवजह से भी ट्रोल होती रहती हैं.बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाना आसान नही हैं. यहां हाई ब्यूटी स्टैंडर्ड और लगातार आलोचनाओं के चलते, नए लोगों को अक्सर कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. मंडला मर्डर्स एक्ट्रेस वाणी कपूर के लिए बॉलीवुड में अपने पैर जमाना आसान नहीं रहा. नई दिल्ली से मुंबई आकर, उन्होंने फिल्मों में बड़ा नाम कमाने का सपना देखा. लेकिन ना केवल उन्हें उनके टैलेंट के लिए बल्कि उनके लुक्स के लिए जज किया गया. अब एक्ट्रेस ने इस पर चुप्पी तोड़ी है.

वाणी ने अपने शुरुआती करियर की एक चौंकाने वाली याद का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि एक निर्देशक ने सिर्फ़ उनके रंग के कारण उन्हें कास्ट नहीं किया था. उन्होंने बताया, “मुझे सीधे तौर पर तो नहीं बताया गया, लेकिन दूसरे लोगों के ज़रिए जानकारी मुझ तक पहुंचती है. एक फ़िल्म निर्माता ने एक बार कहा था कि मैं इतनी गोरी नहीं हूं कि मुझे कोई रोल मिल सके. उन्होंने कहा कि मेरा रंग दूध जैसा गोरा नहीं है.”

हालांकि वाणी ने इस बात को अपने हौसले को टूटने नहीं दिया. एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने खुद से कहा कि जो है सो है. अगर यही शर्त है, तो मैं उसके प्रोजेक्ट्स का हिस्सा नहीं बनना चाहती. वहां भावनाएं पूरी तरह से एक जैसी हैं।.वह अपनी मिल्की व्हाइट ब्यूटी या अपनी फेयर हीरोइन ढूंढ सकता है. मुझे पता है कि मैं अपने लिए एक बेहतर फिल्म निर्माता ढूंढ सकती हूं. यह बहुत पहले की बात है.” वाणी ने आगे ये भी बताया कि वह फिल्म निर्माता मुंबई से नहीं था.

आज वाणी कपूर इंडस्ट्री में एक जाना-माना नाम बन चुकी हैं तब भी उन्हें ट्रोल किया जाता है. इस लेकर वाणी ने कहा, “मैं कभी-कभी अक्सर सुनती हूँ कि मैं बहुत पतली हूं और मुझे थोड़ा वज़न बढ़ाना चाहिए क्योंकि लोगों को भरे हुए शरीर वाली महिलाएं पसंद आती हैं. लेकिन मुझे मैं पसंद हूं! मैं अपने बारे में कुछ भी नहीं बदलना चाहती. मैं फिट और हेल्दी हूं. मैं आमतौर पर इन चीज़ों से परेशान नहीं होती।. कभी-कभी, आपको पता नहीं चलता कि ऐसे कमेंट्स चिंता की वजह से आ रहे हैं या अच्छी सलाह की तरह. लेकिन मुझे लगता है कि मैं काफी ठीक हूं, और मुझे मैं जैसी हूँ वैसी ही पसंद हूं.”

वाणी कपूर के वर्क फ्रंट की बात करें तो हाल ही में उनकी अजय देवगन स्टारर रेड 2 रिलीज हुई थी. वहीं अब वे मंडला मर्डर्स में पुलिस की भूमिका में नजर आएंगीं. इसे गोपी पुथरन ने निर्देशित किया है और ये ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर 25 जुलाई को रिलीज होगी.

 

BUSINESS : भारत में गूगल और मेटा की मुश्किलें बढ़ीं! इस केस में ED ने दोबारा भेजा समन, जानें क्या है पूरा मामला

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भारत में गैरकानूनी ऑनलाइन सट्टेबाज़ी ऐप्स के विज्ञापन को लेकर गूगल और मेटा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ED ने दोनों कंपनियों को 28 जुलाई 2025 को पेश होने के लिए दोबारा समन जारी किया है.

भारत में गैरकानूनी ऑनलाइन सट्टेबाज़ी ऐप्स के विज्ञापन को लेकर गूगल और मेटा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दोनों कंपनियों को 28 जुलाई 2025 को पेश होने के लिए दोबारा समन जारी किया है. इससे पहले, गूगल और मेटा के प्रतिनिधियों ने कानूनी दस्तावेजों की कमी का हवाला देते हुए पिछली सुनवाई में हाज़िर होने में असमर्थता जताई थी और नई तारीख मांगी थी. अब उन्हें जरूरी दस्तावेजों के साथ अगली सुनवाई में पेश होने को कहा गया है.

सूत्रों के अनुसार, ED की जांच में खुलासा हुआ है कि इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल फर्जी ब्रांड प्रचार और ऑनलाइन सट्टेबाज़ी ऐप्स के विज्ञापनों के लिए किया जा रहा है. ये ऐप्स न सिर्फ अवैध हैं बल्कि देशभर के करोड़ों युवाओं को बर्बादी की राह पर भी ले जा रहे हैं. ये सट्टा ऐप्स नशे की तरह काम करते हैं और यूज़र्स को लत लगने की स्थिति में पहुंचा देते हैं.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में करीब 22 करोड़ लोग ऐसे ऐप्स से जुड़े हुए हैं जिनमें 11 करोड़ लोग रोज़ाना इनमें भाग लेते हैं. 2025 की पहली तिमाही में इन साइट्स पर करीब 1.6 अरब बार विज़िट दर्ज किए गए. भारत में ऑनलाइन सट्टेबाज़ी का बाज़ार अब 100 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और हर साल लगभग 27,000 करोड़ रुपये का टैक्स बचाया जा रहा है.

मामले में टॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों को भी समन भेजा गया है जो इन ऐप्स के ब्रांड प्रमोशन में शामिल रहे हैं. यह साफ है कि इन कंपनियों ने पैसे के लालच में ऐसे विज्ञापनों को बढ़ावा दिया, जिनका सीधा असर समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ा.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सट्टेबाज़ी मानसिक रोग का कारण बन सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इसे मानसिक विकार मानता है. भारत में अब तक हजारों लोग, जिनमें छात्र, गृहणियां और बेरोज़गार युवक शामिल हैं, इस लत की वजह से आत्महत्या कर चुके हैं. तेलंगाना में दाखिल एक जनहित याचिका के मुताबिक, सिर्फ इसी राज्य में 1,023 से ज्यादा आत्महत्याएं ऑनलाइन सट्टेबाज़ी की वजह से हुई हैं.

यह मामला एक गंभीर चेतावनी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अब अपने विज्ञापन मानकों को सख्त करना होगा. खासकर भारत जैसे देश में, जहां सट्टेबाज़ी से जुड़ी लत और नुकसान तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है. Google और Meta जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब ज़िम्मेदारी लेनी होगी, वरना सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है.

 

NATIONAL : फूल उत्पादन में MP का डंका… गुना के गुलाबों ने लंदन-पेरिस तक बिखेरी महक, भोपाल की किसान हर महीने कमा रही ₹4 लाख

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Flower Production in MP: गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुंबई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुंच रही है. शिक्षित युवाओं के साथ गांव के किसान भी फूलों के उत्पादन की ओर आकर्षित हुए हैं. मध्यप्रदेश ने फूलों के उत्पादन में देश में अलग पहचान बनाई है. देश में मध्यप्रदेश फूल उत्पादन में तीसरे स्थान पर है. गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुंबई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुंच रही है, वहीं राजधानी भोपाल में एक महिला किसान फूलों से हर महीने 4 लाख रुपए कमा रही है.

सरकार का कहना है कि छोटी कृषि जोत वाले किसान, जिनके पास एक-दो या तीन एकड़ भूमि है, फूलों का उत्पादन कर अच्छा लाभ कमा सकते हैं. मध्यप्रदेश के उत्पादित फूलों की मांग देश के महानगरों के साथ विदेशों में भी बढ़ी है. गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुंबई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुंच रही है. शिक्षित युवाओं के साथ गांव के किसान भी फूलों के उत्पादन की ओर आकर्षित हुए हैं.

राजधानी भोपाल की ग्राम पंचायत बरखेड़ा बोंदर की रहने वाली लक्ष्मीबाई कुशवाह ने धान, गेहूं, सोयाबीन की खेती छोड़कर गुलाब, जरबेरा और गेंदा के फूलों का उत्पादन शुरू किया और हर महीने 3 से 4 लाख रुपये कमा रही हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनसे प्रदेश में फूलों का उत्पादन बढ़ा है.

मध्यप्रदेश में प्रमुख रूप से गेंदा, गुलाब, सेवंती, ग्लैडियोलस, रजनीगंधा और औषधीय पुष्पों में इसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली और कोलिक्स का उत्पादन किया जाता है. प्रदेश में सर्वाधिक उत्पादन क्षेत्र गेंदा का है.

सूबे में 24 हजार 214 हेक्टेयर में गेंदे की खेती की जा रही है. दूसरे स्थान पर गुलाब 4 हजार 502 हेक्टेयर, तीसरे स्थान पर सेवंती 1 हजार 709 हेक्टेयर, चौथे स्थान पर ग्लैडियोलस 1 हजार 58 हेक्टेयर, पांचवें स्थान पर रजनीगंधा 263 हेक्टेयर और अन्य पुष्प 11 हजार 227 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं. प्रदेश में फूलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.01 मैट्रिक टन है, जो फूलों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. इस उत्पादकता के लिए प्रदेश की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और सरकार का सहयोग जिम्मेदार है.

फूलों के उत्पादन, गुणवत्ता में सुधार और मार्केटिंग पर मध्यप्रदेश शासन का उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग लगातार काम कर रहा है. साल 2024-25 में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में 14 हजार 438 हेक्टेयर का विस्तार हुआ, जिसमें फूलों का रकबा 5 हजार 329 हेक्टेयर बढ़ा.प्रदेश में 33 प्रतिशत से अधिक फूलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में उद्यानिकी विभाग की हाईटेक नर्सरी और प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी प्रदान करना जारी है.

इसी कड़ी में केंद्र सरकार के सहयोग से ग्वालियर जिले में 13 करोड़ रुपए की लागत से हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी विकसित की जा रही है. यह नर्सरी मध्यप्रदेश में पुष्प उत्पादन के लिए वरदान साबित होगी. वह दिन दूर नहीं जब मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश का सिरमौर बनेगा.राज्य में उद्यानिकी के कुल 27.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फूल उत्पादन का क्षेत्र 42 हजार 978 हेक्टेयर है. साल 2024-25 में 5 लाख 12 हजार 914 टन फूलों का उत्पादन हुआ, जो रिकॉर्ड है. वह दिन दूर नहीं जब फूलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश का सिरमौर बनेगा.

प्रदेश में किसानों का फूलों के उत्पादन के प्रति बढ़ता रुझान है. पिछले चार वर्षों में फूलों का उत्पादन क्षेत्र, जो वर्ष 2021-22 में 37 हजार 647 हेक्टेयर था, वह 2024-25 में बढ़कर 42 हजार 976 हेक्टेयर हो गया और उत्पादन में 86 हजार 294 टन की बढ़ोतरी हुई.

NATIONAL : मुंबई में बुजर्ग महिला के साथ फ्रॉड, साइबर ठगों ने लूटे 7.88 करोड़ रुपये

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अधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन साइबर शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है.मुंबई महानगर की 62 वर्षीय एक महिला को शेयर बाजार में भारी लाभ के लिए निवेश करने का लालच देकर साइबर ठगों ने कथित तौर पर 7.88 करोड़ रुपये की ठगी कर ली.

पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने सोमवार (21 जुलाई) को बताया कि ठगों ने खुद को एक प्रसिद्ध वित्तीय सेवा कंपनी का प्रतिनिधि बताकर बांद्रा क्षेत्र की निवासी महिला को से पिछले दो महीनों में यह ठगी की.


महिला ने पुलिस में की गई शिकायत में बताया कि उसे एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज प्राप्त हुआ था. मैसेज भेजने वाले ने खुद को महिला बताया और पीड़िता से कहा कि वह कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी की सहायक है और उसने शेयर निवेश के बारे में बातचीत शुरू की.इसके बाद महिला को कंपनी अधिकारी का संपर्क नंबर और एक वेबसाइट का लिंक भेजा गया. उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया और फिर एक और व्यक्ति से परिचय कराया गया, जिसने भी खुद को वित्तीय कंपनी से जुड़ा हुआ बताया.

पुलिस ने बताया कि महिला के आग्रह पर पीड़िता ने कुछ समय में कई बैंक खातों में कुल 7,88,87,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब उसने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो उससे 10 प्रतिशत अतिरिक्त जमा करने को कहा गया. कुछ संदिग्ध लगने पर, महिला ने पूछताछ करने का फैसला किया, जिससे धोखाधड़ी का पता चला.

अधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन साइबर शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

 

NATIONAL FLAG DAY : तिरंगा कैसे बना राष्ट्रीय ध्वज, किसने किया डिजाइन, जानिए दिलचस्प कहानी

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National Flag: हर साल 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाया जाता है, जिसे तिरंगा अपनाने का दिन भी कहा जाता है। आइए, इस मौके पर जानते हैं तिरंगे के डिजाइन, इसके इतिहास और राष्ट्रीय ध्वज बनने की कहानी।

जुलाई 1947 को आधिकारिक रूप से अपनाए जाने की याद दिलाता है। तिरंगा न केवल भारत की आजादी और एकता का प्रतीक है, बल्कि यह लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और देशभक्ति की भावना को भी दर्शाता है। आइए, इस मौके पर जानते हैं तिरंगे के डिजाइन, इसके इतिहास और राष्ट्रीय ध्वज बनने की रोचक कहानी।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ की डिजाइन का श्रेय स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया को जाता है। आंध्र प्रदेश के रहने वाले पिंगली एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, भूवैज्ञानिक, शिक्षाविद और कृषक थे। 1916 में उन्होंने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की, जो पूरे भारत को एक सूत्र में बांधे। उनकी इस पहल को समर्थन मिला और उन्होंने नेशनल फ्लैग मिशन की शुरुआत की।

1921 में विजयवाड़ा में हुए अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन में पिंगली ने महात्मा गांधी को अपना डिजाइन दिखाया। इस ध्वज में लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं, जो हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं। गांधी जी ने सुझाव दिया कि इसमें शांति और अन्य समुदायों के प्रतीक के रूप में सफेद पट्टी और आत्मनिर्भरता के लिए चरखा जोड़ा जाए। इस तरह तिरंगे का प्रारंभिक स्वरूप तैयार हुआ, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियां थीं, और केंद्र में चरखा था।

तिरंगे का वर्तमान स्वरूप एक लंबी यात्रा का परिणाम है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज कई बदलावों से गुजरा, जो स्वतंत्रता संग्राम और राजनैतिक विकास का प्रतीक है। कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव इस प्रकार हैं:

1906: पहला गैर-आधिकारिक ध्वज कोलकाता के पारसी बागान चौक में फहराया गया। स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा डिजाइन किए गए इस ध्वज में हरे, पीले और लाल रंग की पट्टियां थीं, जिनमें कमल, सूरज और चांद के प्रतीक थे। यह स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक था।

1907: मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टटगार्ट में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में दूसरा ध्वज फहराया। इसमें नारंगी, पीली और हरी पट्टियां थीं, और कमल की जगह सितारे थे।

1917: होम रूल आंदोलन के दौरान एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने नया ध्वज प्रस्तुत किया, जिसमें 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां थीं, साथ ही सप्तऋषि नक्षत्र के सात सितारे और एक अर्धचंद्र था।

1931: पिंगली वेंकैया के डिजाइन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने औपचारिक रूप से अपनाया। इसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग थे, और केंद्र में चरखा था। यह ध्वज स्वराज का प्रतीक बना।

1947: स्वतंत्रता से पहले, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में गठित समिति ने तिरंगे को अंतिम रूप दिया। चरखे को हटाकर सम्राट अशोक के धर्म चक्र (24 तीलियों वाला नीला चक्र) को शामिल किया गया, जो धर्म, न्याय और प्रगति का प्रतीक है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया।

22 जुलाई 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में प्रस्तावित किया। उन्होंने कहा, “यह ध्वज हमें गर्व, उत्साह और साहस देता है। यह उन स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद दिलाता है, जिन्होंने इसके लिए अपने प्राण न्योछावर किए।” 2002 में भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन के बाद आम नागरिकों को भी तिरंगा फहराने की अनुमति मिली, बशर्ते वे ध्वज संहिता का पालन करें। उदाहरण के लिए, तिरंगा कटा-फटा नहीं होना चाहिए, इसे जमीन पर नहीं रखा जाना चाहिए, और रात में फहराने के लिए पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।

 

MP: सड़क न होने पर महिला ने लिया बैलगाड़ी का सहारा, एंबुलेंस के पहुंचने से पहले बच्चे को दिया जन्म

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प्रसूता महिला सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गई. एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही आदिवासी महिला ने गांव में बच्चे को जन्म दे दिया. एंबुलेंस महिला को लेने गांव तक इसलिए नहीं पहुंच पाई क्योंकि गांव में सड़क ही नहीं थी.

मध्य प्रदेश के गुना में अजब तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक आदिवासी प्रसूता महिला को बैलगाड़ी पर बैठाकर एंबुलेंस तक लाया जा रहा है. सिस्टम की लापरवाही के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, क्योंकि गांव में सड़क ही नहीं है.

इस देरी के चलते बमोरी विधानसभा इलाके के मोहनपुर खुर्द के डमरा डेरा गांव की इस आदिवासी महिला ने गांव में ही बच्चे को जन्म दे दिया. अब बैलगाड़ी पर सवार प्रसूता की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसने सिस्टम की लालफीताशाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं.गांववालों ने बताया कि यहां सड़क नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं. प्रसूताओं को कभी खटिया पर तो कभी बैलगाड़ी पर गांव के बाहर तक लाना पड़ता है, तब जाकर एंबुलेंस तक पहुंच पाते हैं. खराब सड़क के कारण एंबुलेंस गांव में प्रवेश नहीं कर पाती. देखें Video:-

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