Sunday, May 10, 2026
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NATIONAL : मुंबई में बुजर्ग महिला के साथ फ्रॉड, साइबर ठगों ने लूटे 7.88 करोड़ रुपये

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अधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन साइबर शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है.मुंबई महानगर की 62 वर्षीय एक महिला को शेयर बाजार में भारी लाभ के लिए निवेश करने का लालच देकर साइबर ठगों ने कथित तौर पर 7.88 करोड़ रुपये की ठगी कर ली.

पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने सोमवार (21 जुलाई) को बताया कि ठगों ने खुद को एक प्रसिद्ध वित्तीय सेवा कंपनी का प्रतिनिधि बताकर बांद्रा क्षेत्र की निवासी महिला को से पिछले दो महीनों में यह ठगी की.


महिला ने पुलिस में की गई शिकायत में बताया कि उसे एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज प्राप्त हुआ था. मैसेज भेजने वाले ने खुद को महिला बताया और पीड़िता से कहा कि वह कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी की सहायक है और उसने शेयर निवेश के बारे में बातचीत शुरू की.इसके बाद महिला को कंपनी अधिकारी का संपर्क नंबर और एक वेबसाइट का लिंक भेजा गया. उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया और फिर एक और व्यक्ति से परिचय कराया गया, जिसने भी खुद को वित्तीय कंपनी से जुड़ा हुआ बताया.

पुलिस ने बताया कि महिला के आग्रह पर पीड़िता ने कुछ समय में कई बैंक खातों में कुल 7,88,87,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब उसने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो उससे 10 प्रतिशत अतिरिक्त जमा करने को कहा गया. कुछ संदिग्ध लगने पर, महिला ने पूछताछ करने का फैसला किया, जिससे धोखाधड़ी का पता चला.

अधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन साइबर शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

 

NATIONAL FLAG DAY : तिरंगा कैसे बना राष्ट्रीय ध्वज, किसने किया डिजाइन, जानिए दिलचस्प कहानी

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National Flag: हर साल 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाया जाता है, जिसे तिरंगा अपनाने का दिन भी कहा जाता है। आइए, इस मौके पर जानते हैं तिरंगे के डिजाइन, इसके इतिहास और राष्ट्रीय ध्वज बनने की कहानी।

जुलाई 1947 को आधिकारिक रूप से अपनाए जाने की याद दिलाता है। तिरंगा न केवल भारत की आजादी और एकता का प्रतीक है, बल्कि यह लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और देशभक्ति की भावना को भी दर्शाता है। आइए, इस मौके पर जानते हैं तिरंगे के डिजाइन, इसके इतिहास और राष्ट्रीय ध्वज बनने की रोचक कहानी।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ की डिजाइन का श्रेय स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया को जाता है। आंध्र प्रदेश के रहने वाले पिंगली एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, भूवैज्ञानिक, शिक्षाविद और कृषक थे। 1916 में उन्होंने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की, जो पूरे भारत को एक सूत्र में बांधे। उनकी इस पहल को समर्थन मिला और उन्होंने नेशनल फ्लैग मिशन की शुरुआत की।

1921 में विजयवाड़ा में हुए अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन में पिंगली ने महात्मा गांधी को अपना डिजाइन दिखाया। इस ध्वज में लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं, जो हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं। गांधी जी ने सुझाव दिया कि इसमें शांति और अन्य समुदायों के प्रतीक के रूप में सफेद पट्टी और आत्मनिर्भरता के लिए चरखा जोड़ा जाए। इस तरह तिरंगे का प्रारंभिक स्वरूप तैयार हुआ, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियां थीं, और केंद्र में चरखा था।

तिरंगे का वर्तमान स्वरूप एक लंबी यात्रा का परिणाम है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज कई बदलावों से गुजरा, जो स्वतंत्रता संग्राम और राजनैतिक विकास का प्रतीक है। कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव इस प्रकार हैं:

1906: पहला गैर-आधिकारिक ध्वज कोलकाता के पारसी बागान चौक में फहराया गया। स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा डिजाइन किए गए इस ध्वज में हरे, पीले और लाल रंग की पट्टियां थीं, जिनमें कमल, सूरज और चांद के प्रतीक थे। यह स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक था।

1907: मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टटगार्ट में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में दूसरा ध्वज फहराया। इसमें नारंगी, पीली और हरी पट्टियां थीं, और कमल की जगह सितारे थे।

1917: होम रूल आंदोलन के दौरान एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने नया ध्वज प्रस्तुत किया, जिसमें 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां थीं, साथ ही सप्तऋषि नक्षत्र के सात सितारे और एक अर्धचंद्र था।

1931: पिंगली वेंकैया के डिजाइन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने औपचारिक रूप से अपनाया। इसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग थे, और केंद्र में चरखा था। यह ध्वज स्वराज का प्रतीक बना।

1947: स्वतंत्रता से पहले, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में गठित समिति ने तिरंगे को अंतिम रूप दिया। चरखे को हटाकर सम्राट अशोक के धर्म चक्र (24 तीलियों वाला नीला चक्र) को शामिल किया गया, जो धर्म, न्याय और प्रगति का प्रतीक है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया।

22 जुलाई 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में प्रस्तावित किया। उन्होंने कहा, “यह ध्वज हमें गर्व, उत्साह और साहस देता है। यह उन स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद दिलाता है, जिन्होंने इसके लिए अपने प्राण न्योछावर किए।” 2002 में भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन के बाद आम नागरिकों को भी तिरंगा फहराने की अनुमति मिली, बशर्ते वे ध्वज संहिता का पालन करें। उदाहरण के लिए, तिरंगा कटा-फटा नहीं होना चाहिए, इसे जमीन पर नहीं रखा जाना चाहिए, और रात में फहराने के लिए पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।

 

MP: सड़क न होने पर महिला ने लिया बैलगाड़ी का सहारा, एंबुलेंस के पहुंचने से पहले बच्चे को दिया जन्म

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प्रसूता महिला सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गई. एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही आदिवासी महिला ने गांव में बच्चे को जन्म दे दिया. एंबुलेंस महिला को लेने गांव तक इसलिए नहीं पहुंच पाई क्योंकि गांव में सड़क ही नहीं थी.

मध्य प्रदेश के गुना में अजब तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक आदिवासी प्रसूता महिला को बैलगाड़ी पर बैठाकर एंबुलेंस तक लाया जा रहा है. सिस्टम की लापरवाही के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, क्योंकि गांव में सड़क ही नहीं है.

इस देरी के चलते बमोरी विधानसभा इलाके के मोहनपुर खुर्द के डमरा डेरा गांव की इस आदिवासी महिला ने गांव में ही बच्चे को जन्म दे दिया. अब बैलगाड़ी पर सवार प्रसूता की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसने सिस्टम की लालफीताशाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं.गांववालों ने बताया कि यहां सड़क नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं. प्रसूताओं को कभी खटिया पर तो कभी बैलगाड़ी पर गांव के बाहर तक लाना पड़ता है, तब जाकर एंबुलेंस तक पहुंच पाते हैं. खराब सड़क के कारण एंबुलेंस गांव में प्रवेश नहीं कर पाती. देखें Video:-

ENTERTAINMENT : 30 साल बाद शिल्पा शिरोडकर ने अपनी मौत की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी, कहा- मैं शूटिंग पर थी…

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एक्ट्रेस शिल्पा शिरोडकर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जटाधारा’ को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं। लेकिन उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में मौत से जुड़े एक ऐसे किस्से का खुलासा किया है। जो झूठी थी इस पर एक्ट्रेस ने कहा…

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शिरोडकर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जटाधारा’ को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं, लेकिन उन्होंने अपने मौत से जुड़े एक ऐसे किस्से का खुलासा किया है, जिसने 3 दशक पहले पूरे बॉलीवुड को हिलाकर रख दिया था। इसमे शिल्पा ने बताया कि एक बार उनकी मौत की झूठी खबर फैली थी। जिससे उनके परिवार और दोस्तों में अफरा-तफरी मच गई थी। दरअसल शिल्पा ने ये खुद बताया कि ये अफवाह जानबूझकर फैलाई गई थी। तो आइए जानते है कि कैसे फैली थी उनकी झूठी मौत की खबर?

बता दें कि शिल्पा शिरोडकर अपने एक इंटरव्यू में इस घटना को याद करते हुए कहा कि ‘मैं मनाली में थी और मेरे पापा होटल में लगातार फोन कर रहे थे, क्योंकि तब मोबाइल नहीं हुआ करता था। मैं वहां सुनील शेट्टी के साथ शूटिंग कर रही थी। वहां शूटिंग देखने आए लोग भी हैरान थे कि ये शिल्पा हैं या नहीं, क्योंकि सभी ने उनकी मौत की खबर सुन रखी थी। जब मैं कमरे में वापस आई तो मेरे माता-पिता के लगभग 20-25 मिस्ड कॉल पड़े थे, वे चिंतित थे और अखबार में सुर्खियां थीं कि शिल्पा शिरोडकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई।’ इसके साथ ही शिल्पा ने आगे बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि ये सब उनकी फिल्म के निर्माताओं की एक मार्केटिंग स्ट्रैटेजी थी। लेकिन मैं थोड़ा शॉक थी और सोच रही थी कि ये थोड़ा ज्यादा हो गया है। उस समय पीआर या प्रमोशन का कोई प्रोफेशनल तरीका नहीं होता था। क्योंकि मुझे भी ये लास्ट में पता चला था। उस समय लोग परमिशन नहीं लेते थे। फिल्म हिट हो गई तो मैंने ज्यादा गुस्सा नहीं किया।”

अब कई सालों के बाद एक्ट्रेस शिल्पा शिरोडकर भी एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन पर वापसी करने को तैयार हैं, वो भी फिल्म ‘जटाधारा’ के साथ। दरअसल ये एक अखिल भारतीय अलौकिक थ्रिलर है। जिसकी कहानी रहस्यमय पद्मनाभस्वामी मंदिर और वहां छिपी प्राचीन विद्याओं के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में सुधीर बाबू मेन लीड निभा रहे हैं और सोनाक्षी सिन्हा इस प्रोजेक्ट से तेलुगु-हिंदी द्विभाषी फिल्मों में डेब्यू कर रही हैं। इसके साथ ही ‘जटाधारा’ शिल्पा के लिए भी खास है, क्योंकि ये फिल्म में रहस्य, थ्रिल और पौराणिक तत्वों का मिश्रण है, जो फैंस के लिए एक अनोखा अनुभव होगा।

MONSOON : IMD का डबल अलर्ट जारी,सात दिनों तक भारी बारिश-बिजली गिरने का अलर्ट

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IMD के अनुसार मानसून ट्रफ रेखा अमृतसर से लेकर पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। पश्चिमी राजस्थान और पाकिस्तान सीमा पर बना निम्न दबाव अब कमजोर हो गया है। 24 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। जिससे मध्य और पूर्वी भारत में बारिश भयंकर रूप ले सकती है।

मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक मानसून और बारिश को लेकर अपडेट जारी किया है। इसमें कुछ राज्यों में भारी बारिश के चलते सावधान रहने की चेतावनी दी है। जबकि कुछ राज्यों में बिजली गिरने और आंधी चलने की संभावना बताई गई है। बात अगर दिल्ली-एनसीआर की करें तो यहां अगले सात दिनों तक बारिश और बादलों की मौजूदगी से मौसम सुहावना रहेगा। इस दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता भी संतोषजनक रह सकती है। रविवार को दिल्ली में AQI 75 रिकॉर्ड किया गया। जो साफ हवा की स्थिति को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो दिनों तक वायु गुणवत्ता में कोई गिरावट की संभावना नहीं है। इसके साथ ही अगले सात दिनों तक अधिकतम तापमान 31 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। मौसम विश्लेषण के अनुसार, मानसून ट्रफ रेखा अमृतसर से लेकर पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान और पाकिस्तान सीमा पर बना निम्न दबाव अब कमजोर हो गया है, लेकिन उससे जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण अभी भी सक्रिय है। जबकि बंगाल की खाड़ी में 24 जुलाई के आसपास एक और नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। जिससे मध्य और पूर्वी भारत में बारिश भयंकर रूप ले सकती है।

दिल्ली और एनसीआर के लोगों को भीषण गर्मी और उमस से इस सप्ताह राहत मिलने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 27 जुलाई तक इन इलाकों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, और 23 से 27 जुलाई के बीच हल्की से मध्यम बारिश के कई दौर देखने को मिल सकते हैं। खासतौर पर 23 और 24 जुलाई को गरज-चमक के साथ फुहारें पड़ने के आसार हैं, जबकि 25 से 27 जुलाई तक बादल छाए रहने और हल्की बौछारों की संभावना जताई गई है। 21 और 22 जुलाई को दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम समेत एनसीआर के कई इलाकों में वज्रपात के साथ बारिश हो सकती है। हालांकि किसी प्रकार का येलो, ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज़ बारिश का दौर जारी रहेगा। आज यानी 21 जुलाई को जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा होने की संभावना है। हिमाचल में यह सिलसिला 23 जुलाई तक चलेगा, जबकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 24 जुलाई तक लगातार तेज़ बारिश के आसार हैं। पूर्वी राजस्थान और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 और 27 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की से मध्यम वर्षा अगले एक सप्ताह तक जारी रहेगी।

कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 21 से 27 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। मराठवाड़ा में आज विशेष रूप से तेज़ बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। इसके अलावा दक्षिण भारत में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ सतही हवाएं चलने की संभावना है। 21 से 27 जुलाई के बीच केरल, माहे, तटीय और आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। तमिलनाडु में भी 21 और 22 जुलाई को भारी वर्षा के आसार हैं।

मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल और विदर्भ क्षेत्र में 23 से 25 जुलाई तक बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और झारखंड में भी 23 से 27 जुलाई के बीच लगातार बारिश का पूर्वानुमान है। बिहार में 21, 24 से 27 जुलाई के बीच तेज़ बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान जलभराव होने के दौरान मौसम विभाग ने सावधानी बरतने की आवश्यकता है। असम और मेघालय में भी 21 से 27 जुलाई तक, अरुणाचल प्रदेश में 21-22 जुलाई और नागालैंड, त्रिपुरा में भी 24 से 27 जुलाई के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

 

NATIONAL : त्रिपुरा के खोवाई में बड़ी कार्रवाई, ट्रक ड्राइवर के पास से पुलिस को बरामद हुए 14 करोड़ के ड्रग्स

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त्रिपुरा के खोवाई जिले में असम राइफल्स और सीमा शुल्क विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक ट्रक से 14 करोड़ रुपये की 1.40 लाख याबा टैबलेट जब्त की गईं. ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है और जब्त सामग्री को आगे की कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क विभाग को सौंपा गया.

त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक ट्रक ड्राइवर के पास से जो बरामद हुआ वह बहुत ही हैरान करने वाला था. मंगलवार को पुलिस ने बताया कि ट्रक ड्राइवर के पास से कुल 14 करोड़ रुपये के ड्रग्स मिलने के बाद से उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. असम राइफल्स और सीमा शुल्क विभाग ने सोमवार को एक संयुक्त अभियान में तुईचंद्राइबाड़ी में एक ट्रक को रोका.

बयान में आगे कहा गया, “वाहन की गहन तलाशी लेने पर पुलिस ने 1,40,000 याबा टैबलेट बरामद किए गए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 14 करोड़ रुपये आंकी गई है. ट्रक चालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. जब्त की गई प्रतिबंधित सामग्री और पकड़े गए व्यक्ति को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया है.’

बता दें कि दो माह पहले भी त्रिपुरा पुलिस ने नशे के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 5.5 करोड़ रुपये मूल्य की प्रतिबंधित याबा टेबलेट जब्त की थी.ो इस सिलसिले में तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर एक होटल में छापेमारी की गई थी, इस दौरान वहां से 1.10 लाख याबा टेबलेट बरामद की गईं. बरामद टेबलेट्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 5.5 करोड़ रुपये आंकी गई थी.

 

KANPUR : ‘मैं किसके साथ घूमूं, आपसे क्या मतलब…’ जंगल में बड़ी उम्र के प्रेमी संग पहुंची लड़की को तीन लड़कों ने पीटा

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यह मामला कानपुर का है, जहां एक लड़की अपने प्रेमी के साथ जंगल में गई थी. बताया जा रहा है कि लड़की का प्रेमी उम्र में काफी बड़ा था, और दोनों के रिश्ते को लेकर कुछ स्थानीय युवकों को आपत्ति थी. इसी दौरान खेतों में काम कर रहे तीन युवक कुलदीप, अरुण और शिवम ने इस जोड़े को घेर लिया. बताया जा रहा है कि जब इन लड़कों ने प्रेमी जोड़े को पकड़ा तो दाेनों आपत्तिजनक स्थिति में थे.

कानपुर में अपने से बड़ी उम्र के प्रेमी के साथ जंगल में समय बिता रही एक लड़की की कुछ युवकों ने न सिर्फ बेरहमी से पिटाई की, बल्कि इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि तीसरे की तलाश की जा रही है.

यह मामला कानपुर देहात के बिल्हौर क्षेत्र का है, जहां एक लड़की अपने प्रेमी के साथ जंगल में गई थी. बताया जा रहा है कि लड़की का प्रेमी उम्र में काफी बड़ा था, और दोनों के रिश्ते को लेकर कुछ स्थानीय युवकों को आपत्ति थी. इसी दौरान खेतों में काम कर रहे तीन युवक कुलदीप, अरुण और शिवम ने इस जोड़े को घेर लिया. बताया जा रहा है कि जब इन लड़कों ने प्रेमी जोड़े को पकड़ा तो दाेनों आपत्तिजनक स्थिति में थे.

जैसे ही युवकों ने प्रेमी जोड़े को रोका, उन्होंने मारपीट शुरू कर दी. सबसे पहले प्रेमी को निशाना बनाया गया. जब युवती ने अपने प्रेमी को बचाने की कोशिश की, तो उस पर भी हाथ उठाए गए. वीडियो में साफ-साफ सुनाई दे रहा है कि युवती गुस्से में कह रही है कि मैं किसके साथ घूमूं, इससे आपको क्या मतलब है. लेकिन तीनों युवकों ने लड़की की एक नहीं सुनी और उसकी भी पिटाई कर डाली.

घटना के बाद आरोपी युवक मौके से चले गए, और पीड़ित प्रेमी जोड़ा भी वहां से निकल गया. किसी ने पुलिस में शिकायत नहीं की, लेकिन जब इन तीनों में से किसी एक ने पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, तब मामला तूल पकड़ गया. वीडियो वायरल होते ही स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैल गया और पुलिस भी तुरंत हरकत में आई. बिल्हौर के एसीपी अमरनाथ यादव ने बताया कि यह वीडियो करीब 20 दिन पुराना है, लेकिन वायरल होने के बाद पुलिस ने पहचान के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी. वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर दो युवकों कुलदीप और अरुण को गिरफ्तार कर लिया गया है. तीसरा आरोपी शिवम फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश जारी है.

पुलिस का कहना है कि पीड़ित प्रेमी और लड़की अब तक सामने नहीं आए हैं. दोनों की पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है क्योंकि घटना के बाद वे वहां से चले गए थे और पुलिस में कोई तहरीर नहीं दी गई. पुलिस अब वीडियो फुटेज और चश्मदीदों की मदद से दोनों की पहचान करने में जुटी है, ताकि बयान लेकर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके.

पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि कोई व्यक्ति चाहे किसी भी स्थिति में क्यों न हो, कानून को अपने हाथ में लेना पूरी तरह अपराध है. किसी के व्यक्तिगत संबंध या जीवनशैली को लेकर सार्वजनिक स्थान पर हिंसा करना या धमकी देना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता. एसीपी अमरनाथ यादव ने कहा कि चाहे लोग किसी की हरकत से असहमति रखते हों, उन्हें पुलिस को सूचित करना चाहिए न कि खुद न्याय करने निकल पड़ें.

NATIONAL : खाना खाते ही बिगड़ी परिवार की हालत, पिता और दो बेटियों की मौत, मां समेत दो बच्चों की हालत गंभीर

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रायचूर में फूड प्वाइजनिंग का एक डरा देने वाला मामला सामने आया है. यहां घर का खाना खाने के बाद एक शख्स और उसकी दो बेटियों की मौत हो गई. वहीं रमेश की पत्नी और दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

कर्नाटक के रायचूर में फूड प्वाइजनिंग का एक डरा देने वाला मामला सामने आया है. यहां घर का खाना खाने के बाद रमेश नाम के एक शख्स और उसकी 8 साल की बेटी नगमा और 6 साल की बेटी दीपा की मौत हो गई. वहीं रमेश की पत्नी पद्मावती और 11 और 10 साल के दो बच्चे कृष्णा और चित्रा की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

परिवार ने कथिक तौर पर डिनर में ग्वार फली की सब्जी, रोटी, चावल, सांबर खाया था. खाना खाने के बाद परिवार के सभी 6 लोगों को पेट में दर्द की शिकायत हुई और सुबह चार बजे उन सभी को लिंगसुगर अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में इलाज शुरू होने से पहले ही नगमा और रमेश की मौत हो गई. वहीं रिम्स अस्पताल रायचूर ले जाते समय दीपा की मौत हो गई. घटना से गांव में दहशत का माहौल है. कवितल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी है.

हालांकि, भोजन विषिक्तता के कई मामले सामने आते हैं. फिर भी आम तौर पर बड़े समूह के लिए खाना बनते समय इस तरह की लापरवाही और फूड प्वाजनिंग जैसी चीजें सामने आती हैं. लेकिन घर के भीतर बने खाने से फूड प्वाइजनिंग का ये मामला दुलर्भ है.

 

RAJASTHAN : अलवर में स्कूटी सवार की टक्कर से कांवड़ खंडित, भड़के कांवड़ियों ने सड़क जाम कर किया हंगामा

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राजगढ़ में स्कूटी सवार की टक्कर से आक्रोशित कांवड़ियों ने सड़क जाम कर दिया. करीब एक घंटे तक चले इस हंगामे के बाद प्रशासन ने नई कांवड़ की व्यवस्था कर मामला शांत कराया.श्रावण माह के चलते कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और आमजन के बीच मंगलवार को अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में एक अप्रिय घटना सामने आई। राजगढ़-बांदीकुई मार्ग पर स्थित सूरेर गांव के पास स्कूटी सवार एक युवक ने कांवड़ लेकर जा रहे कांवड़िए को टक्कर मार दी। इस टक्कर में उसकी कांवड़ खंडित हो गई, जिससे नाराज कांवड़ियों ने मौके पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना मंगलवार सुबह की है जब बांदीकुई से कांवड़ लेकर निकले श्रद्धालु सूरेर गांव के पास से गुजर रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार स्कूटी सवार ने एक कांवड़िए को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कांवड़ का पवित्र घड़ा टूट गया। धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला होने के कारण कांवड़ियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने तुरंत वहीं सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया।

सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। मौके पर नीमला के पूर्व सरपंच तुलसीदास के साथ-साथ पुलिस प्रशासन भी पहुंचा। उन्होंने कांवड़ियों को समझाइश देने का प्रयास किया, लेकिन श्रद्धालु टूटे हुए कांवड़ को लेकर बेहद आहत और गुस्से में थे। लगभग एक घंटे तक यह रास्ता पूरी तरह से जाम रहा, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पूर्व सरपंच तुलसीदास ने जानकारी देते हुए बताया कि कांवड़िए सोमवार रात गोठ की चौकी पर लगे शिविर में रुके हुए थे और मंगलवार सुबह बांदीकुई के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान यह हादसा हुआ। हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने तत्काल एक नई कांवड़ की व्यवस्था करवाई और श्रद्धालुओं से यात्रा दोबारा शुरू करने की अपील की।अधिकारियों की समझाइश और नई कांवड़ मिलने के बाद मामला शांत हुआ और कांवड़ियों ने जाम हटाया। इस दौरान पुलिस ने स्कूटी सवार युवक की पहचान कर ली है और उससे पूछताछ की जा रही है।

 

WORLD : आग की लपटों में घिरा कॉलेज, जान बचाने को भागते दिखे लोग, चारों ओर मची चीख-पुकार…

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बांग्लादेश वायुसेना ने बताया कि चीन निर्मित F-7 BGI फाइटर जेट ने दोपहर 1:06 बजे उड़ान भरी थी और कुछ ही देर में तेज धमाके के साथ गिरकर आग की चपेट में आ गया.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सोमवार (21, जुलाई 2025) को माइलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज पर एयरफोर्स का F-7 BGI फाइटर जेट गिर गया, जिसमें 16 छात्रों, 3 शिक्षकों और पायलट की मौत हो गई. 100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है. ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है.इस हादसे के कई वीडियो भी सामने आए हैं. हादसे के बाद स्कूल परिसर में भगदड़ मच गई. वीडियो में चीखों और आग की लपटों के बीच घबराए छात्र, शिक्षक और अभिभावक दौड़ते नजर आए. एक वीडियो में एक छात्र का शव खून से सना दिखा, जबकि एक पुलिसकर्मी मलबे की ओर दौड़ता दिखाई दिया.

माइलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज में जब यह हादसा हुआ, तब छात्र या तो परीक्षा दे रहे थे या नियमित कक्षाओं में थे. बांग्लादेश वायुसेना ने बताया कि चीन निर्मित F-7 BGI फाइटर जेट ने दोपहर 1:06 बजे उड़ान भरी थी और कुछ ही देर में तेज धमाके के साथ गिरकर आग की चपेट में आ गया.ढाका प्रशासन की ओर से जारी बयान के अनुसार, 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 83 का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है. कई की हालत गंभीर बताई जा रही है. घायलों को सेना अस्पताल समेत कई चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कराया गया है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने लिखा, ‘यह देश के लिए अत्यंत पीड़ा का क्षण है. एयरफोर्स, छात्रों, शिक्षकों और परिवारों की क्षति अपूरणीय है.’सरकार ने मंगलवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है. यह हादसा बांग्लादेश के हाल के इतिहास में सबसे भीषण विमान दुर्घटना माना जा रहा है. इससे पहले 1984 में चटगांव से ढाका आते वक्त एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें 49 लोगों की मौत हुई थी.

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