Tuesday, September 15, 2026
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NATIONAL : एकतरफा प्यार में हैवान बना सीनियर, 11वीं की छात्रा का किया अपहरण: बोलेरो से जंगल ले गया, रातभर रखा

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गुमला में 11वीं की 18 वर्षीय छात्रा के अपहरण के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी बिरिया उरांव समेत पांच युवकों को गिरफ्तार किया. छात्रा को बोलेरो से अरंगी जंगल ले जाकर रातभर रखा गया था. पुलिस ने छात्रा को सुबह करीब 4 बजे सकुशल बरामद किया और बोलेरो जब्त की.

गुमला में स्कूल से घर लौट रही 11वीं कक्षा की 18 वर्षीय छात्रा को बोलेरो वाहन से एक तरफा प्यार में अगवा करने का मामला सामने आया है. सीनियर ने एकतरफा प्यार में खौफनाक कदम उठाया और पहले से प्लानिंग करके एक बोलेरो भी मंगवा लिया. स्कूल से छात्रा के निकलते ही उसे बोलेरो में बैठाकर अरंगी जंगल ले गया. वहां उसे रात भर रखा गया. आरोपी के साथ उसके अन्य साथी भी मौजूद थे.

दरअसल, जब छात्रा को अगवा किया गया, तब उसके दो दोस्त भी साथ थे. उन्होंने छात्रा के परिजनों को सूचना दी. इसके बाद परिजनों ने मामले की जानकारी सिसई थाना को दी.

घटना की सूचना मिलते ही सिसई पुलिस सक्रिय हुई और त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को सुबह करीब चार बजे अरंगी जंगल से सकुशल बरामद कर लिया. परिजन ने थाने को सूचना दी और लिखित रूप से मामला दर्ज कराया, जिसमें पुलिस ने मुख्य आरोपी बिरिया उरांव को गिरफ्तार किया.

उसकी निशानदेही पर घटना में शामिल चार अन्य युवकों को अरंगी कच्चापारा स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने अपहरण में प्रयुक्त बोलेरो भी जब्त की है. पुलिस के अनुसार, छात्रा नागफेनी-पोढ़ा के बीच से स्कूल से घर लौट रही थी. इसी दौरान बिरिया उरांव ने चार साथियों के साथ मिलकर उसे कथित रूप से बोलेरो में बैठाया और अरंगी जंगल ले गया, जहां उसे रातभर रखा गया.

गिरफ्तार आरोपियों में बिरिया उरांव, मुन्ना उरांव, बीरेंद्र उरांव, राजेश उरांव और आशीष लोहरा शामिल हैं. वहीं, थानेदार नीरज कुमार ने बताया कि मामला दर्ज किया गया है. मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया है. एक ही स्कूल के आरोपी और छात्रा थे. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.

WORLD : ट्रंप बोले- चुनाव के बाद ही गिरेंगे तेल के दाम; रिपब्लिकन खेमे की क्यों बढ़ी चिंता?

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ईरान युद्ध ने तेल बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार पहुंच गया है और अमेरिका में पेट्रोल-डीजल भी महंगा हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब संकेत दिया है कि राहत जल्दी नहीं मिलने वाली। क्या अमेरिकी मध्यावधि चुनाव तक जारी रहेगी महंगे तेल की मार? पढ़िए रिपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान युद्ध की वजह से बढ़े तेल के दाम जल्द नीचे आने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ही शुरू हो सकती है।

तेल के दाम कितने बढ़े?
बुधवार को तेल की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। जुलाई के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। इस्राइल और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध के बीच दोनों तरफ से हमले तेज हुए हैं।

ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने कहा, चुनाव के तुरंत बाद तेल की कीमतें तेजी से नीचे जाएंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इसमें मध्यावधि चुनाव से थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। ट्रंप यह बात डलास जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कह रहे थे। वह वहां मध्यावधि चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के सम्मेलन में जाने वाले थे।

युद्ध कब खत्म होगा?
ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका में अहम चुनाव होने के बाद ईरान आखिरकार पीछे हट जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान चाहता है कि चुनाव में कमजोर लोगों का एक समूह सत्ता में आए। इसके बाद ईरान को अकेला छोड़ दिया जाए और उसे परमाणु हथियार बनाने दिए जाएं। ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा, क्योंकि ईरान अब ज्यादा देर तक नहीं टिक सकता।

युद्ध कब तक चलने की उम्मीद थी?
युद्ध की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि यह कुछ हफ्तों तक चलेगा। लेकिन अब इस संघर्ष को सात महीने हो चुके हैं। अमेरिका और इस्राइल के ईरान के खिलाफ युद्ध से खाड़ी देशों से तेल की आवाजाही काफी धीमी हो गई है। युद्ध से पहले दुनिया का करीब 20 फीसदी पेट्रोलियम होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था।

तेल की कीमतों से ट्रंप पर दबाव क्यों?
ट्रंप की इस टिप्पणी से साफ हुआ है कि युद्ध की स्थिति को लेकर उनकी सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। युद्ध का अंत अभी नजर नहीं आ रहा है। वहीं, अमेरिका में पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं। महंगाई भी बढ़ रही है। इससे ट्रंप की रिपब्लिकन सरकार पर कीमतों को काबू करने का दबाव बढ़ गया है।

ट्रंप ने पिछले हफ्ते क्या कहा था?
ट्रंप ने पिछले हफ्ते युद्ध को ‘छोटी बात’ बताया था। लेकिन रिपब्लिकन नेताओं की चिंता बढ़ रही है। उन्हें डर है कि युद्ध का असर चुनाव में मतदाताओं पर पड़ सकता है। खासकर पेट्रोल के बढ़े दाम और महंगाई लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।

अमेरिका ने तेल का भंडार क्यों खोला?
अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल निकालना शुरू किया है। अगस्त की शुरुआत में इस भंडार में तेल की मात्रा 30 करोड़ बैरल से नीचे चली गई थी। 2026 की शुरुआत से इसमें 10 करोड़ बैरल से ज्यादा की कमी आ चुकी है।

मध्यावधि चुनाव कब हैं?
ट्रंप ने कहा है कि युद्ध 3 नवंबर के बाद ही खत्म हो सकता है। यह बात उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पिछले हफ्ते दिए बयान के बाद आई है। वेंस ने यह कहने से इनकार किया था कि युद्ध मध्यावधि चुनाव तक खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा था कि वह युद्ध खत्म होने के लिए ‘कृत्रिम समय सीमा’ तय नहीं करना चाहते।

वेंस ने युद्ध को लेकर क्या कहा?
वेंस ने कहा कि जब उनसे पूछा जाता है कि युद्ध कब खत्म होगा, तो यह पूछने जैसा है कि ईरानी जहाजों पर हमला करना कब बंद करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस सवाल का जवाब नहीं पता। वेंस के मुताबिक, इसका जवाब ईरान से ही पूछा जाना चाहिए।

अमेरिका में पेट्रोल कितना महंगा हुआ?
बुधवार को अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल थी। पेट्रोल की कीमत भी रातोंरात तेजी से बढ़ी। एएए के मुताबिक, सामान्य पेट्रोल की औसत कीमत 7 सेंट बढ़कर 4.22 डॉलर प्रति गैलन हो गई। यह पिछले साल इसी समय की कीमत से 1 डॉलर से ज्यादा महंगी है।

डीजल के दाम क्यों बढ़े?
डीजल की कीमतों का असर आम लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है। इसका इस्तेमाल सामान ढोने और उत्पादन में बड़े स्तर पर होता है। शुक्रवार को डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद भी कीमतें बढ़ती रहीं। एक गैलन डीजल की औसत कीमत रातोंरात 9 सेंट बढ़कर 5.94 डॉलर हो गई।

हवाई यात्रा भी महंगी हुई?
जेट ईंधन की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इसका असर अमेरिका और दूसरे देशों की एयरलाइंस पर पड़ा है। कई एयरलाइंस ने उड़ानों की संख्या कम कर दी है। साथ ही किराए और दूसरी फीस बढ़ा दी गई है।

तेल बाजार में फिर हलचल क्यों हुई?
अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने पांच ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया है। यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर मिसाइल हमले की कोशिश के जवाब में की गई। इसके अलावा ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले में सऊदी अरब की तेल सुविधाओं में आग लग गई। इन घटनाओं के बाद तेल बाजार में फिर बड़ी हलचल देखने को मिली।

NATIONAL : फोन पर ‘CM हिमंत’ की आवाज, नौकरी-ठेके का वादा… असम के अफसर ने रचा ऐसा खेल, घूम गया विजिलेंस का माथा

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असम में गिरफ्तार सिविल सेवा अधिकारी देबेश्वर बोरा पर लगे आरोपों ने जांच को चौंकाने वाला मोड़ दे दिया है. आरोप है कि नौकरी और सरकारी ठेके दिलाने के लिए लोगों को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और वरिष्ठ अधिकारियों जैसी आवाज में फोन कॉल कराए जाते थे. जांच में शक है कि इसके लिए एक मिमिक्री आर्टिस्ट का इस्तेमाल किया गया, ताकि लोगों को अधिकारी की सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच पर भरोसा हो सके.

किसी को अपनी पहुंच का यकीन दिलाना का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है कि सीधे मुख्यमंत्री से आपकी बात होती है और आप दूसरों की भी सीएम से डायरेक्ट बात करा सकते हैं. असम में जालसाजी का ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इस मामले में जांच एजेंसियों को जो सुराग मिले हैं, उसने इस पूरे खेल को और भी चौंकाने वाला बना दिया है. दरअसल असम के धेमाजी जिले के डेवलपमेंट कमिश्नर और 1999 बैच के असम सिविल सर्विस (ACS) अधिकारी देबेश्वर बोरा को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में विजिलेंस टीम की जांच अब एक ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई है, जिसमें नौकरी और सरकारी ठेके दिलाने के नाम पर लोगों को फंसाया जाता और फिर लाखों रुपये हड़प लिए जाते थे. आरोप है कि सामने वाले शख्स पर अपना प्रभाव जमाने के लिए बड़े अधिकारियों की आवाज की नकल कर फोन कॉल कराये जाते थे.

सीएम से बात कराने का झांसा
इंडिया टुडे में छपी जांच से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, देबेश्वर बोरा पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर लोगों को सरकारी नौकरी और ठेके दिलाने का भरोसा दिलाकर पैसे लिए. इस कथित खेल में एक बिचौलिए की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है, जिसे अलग-अलग लोगों की आवाज की नकल करने में महारत हासिल थी.

आरोप है कि नौकरी या ठेका चाहने वाले लोगों को फोन पर ऐसे शख्स से बात कराई जाती थी, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, मुख्य सचिव रवि कोटा या दूसरे वरिष्ठ अफसरों की आवाज में बातचीत करता था. उनका मकसद लोगों को यह भरोसा दिलाना था कि देबेश्वर बोरा की पहुंच सरकार में सबसे ऊपर तक है और उनके जरिए काम आसानी से हो सकता है.

GUJARAT : गांधीनगर में निर्माणाधीन बिल्डिंग का हिस्सा गिरा, 12 लोग घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

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गुजरात की राजधानी गांधीनगर के कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन ‘बोस्की एम्पायर’ इमारत की एक स्लैब अचानक से गिर गई। इस हादसे में 12 से ज्यादा मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। अब तक 11 लोगों को बाहर निकालकर गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गांधीनगर : गुजरात की राजधानी गांधीनगर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां कुडासन इलाके में बन रही इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे में 12 लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

कहां की है घटना?

जानकारी के अनुसार, कुडासन में एक निर्माणाधीन ‘बोस्की एम्पायर’ इमारत की दीवार गिर गई। बताया जा रहा है कि हादसे के समय साइट पर कई मजदूर काम कर रहे थे। दीवार गिरने से कई मजदूर मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही गांधीनगर फायर ब्रिगेड की टीमें और पुलिस मौके पर पहुंची। मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम तेजी से चल रहा है। घायलों को तुरंत गांधीनगर सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।

हादसे में 12 लोग जख्मी

बताया जा रहा है कि इस हादसे में करीब 12 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें सिविल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। हालांकि, अभी तक किसी की जान जाने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कुछ लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है, जिसके चलते बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौके पर पहुंचे।

बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश

उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने घायलों के समुचित इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया है। प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है, लेकिन हादसे के सही कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। प्रशासन ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

MAHARASHTRA : गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर बवाल क्यों? संजय राउत ने उठाए सवाल, बोले- मोहन भागवत से पूछिए

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महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान जांचने और मुसलमानों को गरबा-डांडिया में शामिल नहीं करने की बात कही है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने इस रुख पर सवाल उठाते हुए मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान का हवाला दिया है। आखिर वीएचपी ने ऐसे नियम क्यों बनाए और अब विवाद कितना बढ़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…

महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने मुसलमानों को गरबा और डांडिया कार्यक्रमों से दूर रखने की बात कही है। संगठन ने आयोजकों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें कार्यक्रम में आने वाले लोगों की पहचान जांचने और आधार कार्ड देखने जैसी बातें शामिल हैं। इस साल नवरात्रि 11 अक्तूबर से शुरू होगी।

वीएचपी ने आयोजकों से क्या करने को कहा?
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन ने नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी नहीं होने देने का फैसला किया है। उनका तर्क है कि नवरात्रि देवी की पूजा का पर्व है और इसमें धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियमों का पालन होना चाहिए। वीएचपी ने इसे किसी समुदाय के खिलाफ कदम नहीं, बल्कि हिंदू त्योहारों के सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय बताया है। संगठन ने प्रतिभागियों की पहचान की जांच और माथे पर तिलक लगाने का सुझाव भी दिया है।

संजय राउत ने मोहन भागवत का जिक्र क्यों किया?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने वीएचपी के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने भी भारत की आजादी और सांस्कृतिक संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राउत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया विदेश दौरे के दौरान दिए गए हिंदू-मुस्लिम संबंधों से जुड़े बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि एक तरफ ऐसी बातें कही जाती हैं और दूसरी तरफ उनके संगठन से जुड़े लोग इस तरह के नियम बना रहे हैं। राउत ने कहा कि मोहन भागवत को इस मामले पर बयान देना चाहिए।

वीएचपी ने भागवत के बयान पर क्या कहा?
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने सभी इंसानों की गरिमा और सभी रास्तों के एक ही लक्ष्य तक पहुंचने की बात कही थी। वीएचपी के श्रीराज नायर से जब उनके बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि संगठन इस पर टिप्पणी नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों की धार्मिक मान्यताएं नवरात्रि की पूजा पद्धति से अलग हैं, उनके लिए वीएचपी अपने दिशा-निर्देशों में बदलाव क्यों करे।

विपक्ष ने वीएचपी के नियमों पर क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने वीएचपी के कदम को असंवैधानिक बताया और कहा कि त्योहार सामाजिक मेल-जोल और सांप्रदायिक सद्भाव के अवसर होते हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी सद्भावना के तहत गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में बुलाया जाता है और दूसरी ओर ईद तथा रमजान के मौकों पर दूसरे समुदायों के लोगों को आमंत्रित किया जाता है।
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने भी दिशा-निर्देशों की आलोचना की और भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या वह वीएचपी को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्देश देने देगी।

महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक आयोजनों में मुसलमानों को सामूहिक रूप से बाहर करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कई संगठन मुसलमानों को भी ऐसे कार्यक्रमों में बुलाते हैं और त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं, बांटने का नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम में बुलाना या नहीं बुलाना आयोजक की इच्छा हो सकती है, लेकिन कोई व्यक्ति बिना बुलाए जबरन ऐसे कार्यक्रम में नहीं जाता। इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र में धार्मिक आयोजनों में भागीदारी, पहचान की जांच और सामाजिक सद्भाव को लेकर बहस तेज कर दी है।

NATIONAL : राजस्थान निकाय चुनाव में कस्बों ने मारी बाजी: बड़े शहर पिछड़े, 72% से ज्यादा मतदान ने बढ़ाई सियासी हलचल

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राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण में 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में कुल 72.09 फीसदी मतदान हुआ। प्रतापगढ़ के अरनोद में सबसे ज्यादा 91.98 फीसदी और चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में सबसे कम 61.49 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। आंकड़ों से छोटे कस्बों में बड़े शहरों की तुलना में ज्यादा मतदान का ट्रेंड सामने आया है।

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान बुधवार को पूरा हो गया। 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में हुए मतदान में कुल 72.09 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। कुल 57,52,280 मतदाताओं में से 41,46,667 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पहले चरण में पार्षद के 5,393 पदों के लिए 20,623 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक हुआ।

72 फीसदी से ज्यादा रहा कुल मतदान
राज्य में कुल मतदान प्रतिशत 72.09 फीसदी रहा। यानी हर 100 मतदाताओं में करीब 72 ने वोट डाला। कुल 57.52 लाख मतदाताओं में से 41.46 लाख से ज्यादा लोगों ने मतदान किया। यह आंकड़ा बताता है कि शहरी निकाय चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी काफी मजबूत रही।

सबसे ज्यादा मतदान प्रतापगढ़ के अरनोद में
पहले चरण में सबसे ज्यादा मतदान प्रतापगढ़ जिले की अरनोद नगर पालिका में हुआ। यहां 91.98 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला। यानी अरनोद में मतदान राज्य के औसत से करीब 20 प्रतिशत अंक ज्यादा रहा। इसके बाद भी कई छोटी नगरपालिकाओं में मतदान 90 फीसदी के आसपास या उससे ऊपर रहा। भीलवाड़ा की बिगोद नगरपालिका में 91.49 फीसदी, धौलपुर की सैंपऊ नगरपालिका में 90.77 फीसदी और डीग की पहाड़ी नगरपालिका में 90.32 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।

सबसे कम मतदान चित्तौड़गढ़ में
सबसे कम मतदान चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में हुआ। यहां सिर्फ 61.49 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला। इसके बाद भीलवाड़ा नगर निगम में 62.71 फीसदी, अलवर नगर निगम में 64.60 फीसदी और डूंगरपुर नगर परिषद में 65 फीसदी मतदान हुआ।

बड़े शहरों के मुकाबले छोटे कस्बों में ज्यादा मतदान
पहले चरण के आंकड़ों में एक स्पष्ट ट्रेंड दिखाई देता है। छोटी नगरपालिकाओं में मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहा, जबकि बड़े नगर निगमों और बड़े शहरों में वोटिंग अपेक्षाकृत कम रही। उदाहरण के तौर पर अरनोद, बिगोद, सैंपऊ और पहाड़ी जैसी छोटी नगरपालिकाओं में मतदान 90 फीसदी से ऊपर रहा। वहीं, पहले चरण में शामिल बड़े नगर निगमों में अलवर में 64.60 फीसदी, भीलवाड़ा में 62.71 फीसदी और बीकानेर में 68.20 फीसदी मतदान हुआ। भरतपुर नगर निगम में मतदान 73.13 फीसदी रहा। जयपुर जिले की 18 नगर निकायों में भी मतदान का पैटर्न इसी ट्रेंड को दिखाता है। यहां औसत मतदान करीब 72.66 फीसदी रहा। कानोता में 81.37 फीसदी और बस्सी में 79.05 फीसदी तक मतदान हुआ, जबकि सांभर में 62.92 फीसदी और फुलेरा में 65.76 फीसदी मतदान दर्ज किया गया।

चुनावी तस्वीर अब ईवीएम में बंद
पहले चरण में 20,623 प्रत्याशियों का चुनावी भविष्य EVM में बंद हो गया है। अब दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों के वोटों की गिनती 14 सितंबर को की जाएगी।पहले चरण के आंकड़ों से फिलहाल इतना साफ है कि शहरी राजस्थान में मतदान को लेकर कस्बाई इलाकों में ज्यादा उत्साह रहा, जबकि बड़े शहरों में मतदाता अपेक्षाकृत कम संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचे। अब 14 सितंबर को नतीजों के साथ यह भी साफ होगा कि ज्यादा मतदान वाले इलाकों का चुनावी परिणाम किस पार्टी के पक्ष में जाता है।

NATIONAL : क्या मानसून सत्र की औपचारिक समाप्ति की अधिसूचना जारी हुई? कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

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संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 27 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक इसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया है। कांग्रेस ने इस असामान्य देरी पर गंभीर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि पर्दे के पीछे कुछ संदिग्ध चल रहा है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए जुगाड़ की फिराक में है। क्या वाकई सत्र को जीवित रखकर कोई राजनीतिक रणनीति बनाई जा रही है?
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान यानी प्रोरोगेशन न किए जाने को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और आरोप लगाया है कि इस असामान्य देरी के पीछे ‘कुछ तो गड़बड़’ है।

संसद के दोनों सदन 13 अगस्त को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए थे, लेकिन करीब चार हफ्ते बीत जाने के बावजूद राष्ट्रपति की ओर से सत्र की औपचारिक समाप्ति की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की संदिग्ध कोशिशों में लगी हुई है।

सत्रावसान में देरी पर कांग्रेस ने क्या गंभीर सवाल उठाए?
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सरकार के इस कदम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर संसद के दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तीन से चार दिनों के भीतर सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इससे पहले साल 2015 में दोनों सदनों के स्थगित होने और सत्रावसान के बीच 28 दिनों का सबसे लंबा अंतर दर्ज किया गया था। इस बार मानसून सत्र के स्थगित हुए 27 दिन पूरे हो चुके हैं और जल्द ही यह पुराना रिकॉर्ड भी टूटने वाला है। जयराम रमेश ने आशंका जताई कि क्या सरकार पर्दे के पीछे कोई बड़ी साजिश रच रही है।

क्या दो-तिहाई बहुमत जुटाने के लिए पार्टियां तोड़ने की हो रही है कोशिश?
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में निश्चित रूप से कुछ बहुत ही संदिग्ध चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में ‘सुपर-टेंटेड’ यानी दागी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की लगातार कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि सरकार अन्य राजनीतिक दलों को तोड़ने में जुटी हुई है, लेकिन वह अपने इस लक्ष्य से अभी बहुत दूर है और उसके पास जरूरी संख्याबल नहीं है। रमेश ने दावा किया कि चाहे जो भी हथकंडे अपनाए जाएं, सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए यह संदिग्ध दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में कभी भी कामयाब नहीं हो पाएगी।

बजट सत्र में क्यों गिरा था परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक?
इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ें पिछले बजट सत्र से जुड़ी हुई हैं। बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को मोदी सरकार को लोकसभा में एक बड़ा झटका लगा था। तब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण को लागू करने के उद्देश्य से लाया गया परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में गिर गया था।

उस समय सदन में मतदान करने वाले कुल 528 सांसदों में से 298 सांसदों ने विधेयक के समर्थन में वोट दिया था, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया था। किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उस दिन सदन में कम से कम
सत्र का स्थगन… लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था।
सत्रावसान में बीता समय… सदनों के स्थगन के बाद 27 दिन बीत चुके हैं और 2015 के 28 दिनों के रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है।
सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया… आमतौर पर संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 3 से 4 दिनों में सत्रावसान हो जाता है।
पक्ष और विपक्ष के वोट… विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष में 230 सदस्यों ने मतदान किया था।
बहुमत के लिए जरूरी संख्या… दो-तिहाई विशेष बहुमत हासिल करने के लिए 352 वोटों की दरकार थी, जिसमें सरकार 54 वोटों से पिछड़ गई थी।

क्या सत्र को जीवित रखकर दोबारा बिल लाने की तैयारी है?
संसदीय परंपराओं और नियमों के मुताबिक जब तक किसी सत्र का विधिवत सत्रावसान नहीं होता, तब तक तकनीकी रूप से वह सत्र जीवित माना जाता है। ऐसे में सरकार किसी भी समय बहुत कम नोटिस पर दोबारा सदन की बैठक बुला सकती है। कांग्रेस इसी तकनीकी पहलू को लेकर आशंकित है कि सरकार नए सिरे से सत्र बुलाने की औपचारिकताओं से बचने और विपक्षी दलों में सेंध लगाकर विधेयक को फिर से सदन के पटल पर रखने की फिराक में है।

NATIONAL : क्या मानसून सत्र की औपचारिक समाप्ति की अधिसूचना जारी हुई? कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

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संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 27 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक इसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया है। कांग्रेस ने इस असामान्य देरी पर गंभीर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि पर्दे के पीछे कुछ संदिग्ध चल रहा है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए जुगाड़ की फिराक में है। क्या वाकई सत्र को जीवित रखकर कोई राजनीतिक रणनीति बनाई जा रही है?
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान यानी प्रोरोगेशन न किए जाने को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और आरोप लगाया है कि इस असामान्य देरी के पीछे ‘कुछ तो गड़बड़’ है।

संसद के दोनों सदन 13 अगस्त को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए थे, लेकिन करीब चार हफ्ते बीत जाने के बावजूद राष्ट्रपति की ओर से सत्र की औपचारिक समाप्ति की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की संदिग्ध कोशिशों में लगी हुई है।

सत्रावसान में देरी पर कांग्रेस ने क्या गंभीर सवाल उठाए?
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सरकार के इस कदम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर संसद के दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तीन से चार दिनों के भीतर सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इससे पहले साल 2015 में दोनों सदनों के स्थगित होने और सत्रावसान के बीच 28 दिनों का सबसे लंबा अंतर दर्ज किया गया था। इस बार मानसून सत्र के स्थगित हुए 27 दिन पूरे हो चुके हैं और जल्द ही यह पुराना रिकॉर्ड भी टूटने वाला है। जयराम रमेश ने आशंका जताई कि क्या सरकार पर्दे के पीछे कोई बड़ी साजिश रच रही है।

क्या दो-तिहाई बहुमत जुटाने के लिए पार्टियां तोड़ने की हो रही है कोशिश?
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में निश्चित रूप से कुछ बहुत ही संदिग्ध चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में ‘सुपर-टेंटेड’ यानी दागी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की लगातार कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि सरकार अन्य राजनीतिक दलों को तोड़ने में जुटी हुई है, लेकिन वह अपने इस लक्ष्य से अभी बहुत दूर है और उसके पास जरूरी संख्याबल नहीं है। रमेश ने दावा किया कि चाहे जो भी हथकंडे अपनाए जाएं, सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए यह संदिग्ध दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में कभी भी कामयाब नहीं हो पाएगी।

बजट सत्र में क्यों गिरा था परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक?
इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ें पिछले बजट सत्र से जुड़ी हुई हैं। बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को मोदी सरकार को लोकसभा में एक बड़ा झटका लगा था। तब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण को लागू करने के उद्देश्य से लाया गया परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में गिर गया था।
उस समय सदन में मतदान करने वाले कुल 528 सांसदों में से 298 सांसदों ने विधेयक के समर्थन में वोट दिया था, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया था। किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उस दिन सदन में कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार जरूरी आंकड़े से काफी पीछे रह गई थी।

मानसून सत्र के सत्रावसान और मतदान से जुड़े अहम आंकड़े
सत्र का स्थगन… लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था।
सत्रावसान में बीता समय… सदनों के स्थगन के बाद 27 दिन बीत चुके हैं और 2015 के 28 दिनों के रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है।
सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया… आमतौर पर संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 3 से 4 दिनों में सत्रावसान हो जाता है।
पक्ष और विपक्ष के वोट… विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष में 230 सदस्यों ने मतदान किया था।
बहुमत के लिए जरूरी संख्या… दो-तिहाई विशेष बहुमत हासिल करने के लिए 352 वोटों की दरकार थी, जिसमें सरकार 54 वोटों से पिछड़ गई थी।

क्या सत्र को जीवित रखकर दोबारा बिल लाने की तैयारी है?
संसदीय परंपराओं और नियमों के मुताबिक जब तक किसी सत्र का विधिवत सत्रावसान नहीं होता, तब तक तकनीकी रूप से वह सत्र जीवित माना जाता है। ऐसे में सरकार किसी भी समय बहुत कम नोटिस पर दोबारा सदन की बैठक बुला सकती है। कांग्रेस इसी तकनीकी पहलू को लेकर आशंकित है कि सरकार नए सिरे से सत्र बुलाने की औपचारिकताओं से बचने और विपक्षी दलों में सेंध लगाकर विधेयक को फिर से सदन के पटल पर रखने की फिराक में है।

NATIONAL : बीजेपी का साथ देने की सजा भुगत रहे व्यापारी, रायबरेली में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

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रायबरेली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं रायबरेली सांसद राहुल गांधी अपने दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को रायबरेली पहुंचे। इस दौरान कई स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। रायबरेली पहुंचने पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र की आर्थिक नीतियों का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ा है।

ने प्रधानमंत्री की हालिया आभूषण न खरीदने संबंधी अपील को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि मंदी और महंगाई से जूझ रहे व्यापारियों के लिए ऐसे बयानों से चिंता और बढ़ती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बीजेपी का समर्थन करने वाला व्यापारी वर्ग आज उसकी नीतियों से परेशान है और एक तरह से बीजेपी का साथ देने की सजा भुगत रहा है।

पहुंचे राहुल गांधी ने शहर और आसपास के इलाकों में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। प्रभु टाउन में सर्राफा व्यापारी फाना त्रिवेदी के आवास पर हुई बैठक में व्यापारियों ने सोना-चांदी के कारोबार में आई गिरावट, महंगाई और बाजार में घटती क्रयशक्ति का मुद्दा उठाया। समस्याएं सुनने के साथ ही राहुल ने कहा कि कांग्रेस उनकी आवाज सड़क से संसद तक उठाएगी।

केमिस्ट असोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मिले राहुल
वहीं, भुएमऊ गेस्ट हाउस में नेता प्रतिपक्ष केमिस्ट असोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मिले। दवा कारोबारियों ने उनसे ऑनलाइन माध्यम से बिना चिकित्सकीय पर्चे के हो रही दवा बिक्री और इससे पारंपरिक दवा कारोबार पर पड़ रहे असर की शिकायत की।

NATIONAL : राहुल गांधी के सवाल पर सांसद और योगी के मंत्री में नोकझोंक, जमकर चले तीखे शब्द बाण; ऐसे सुलझा मामला

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दिशा की बैठक के दौरान राहुल गांधी के सवाल पर सांसद और मंत्री में नोकझोंक हो गई। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के बजट को लेकर मंत्री ने कहा कि सांसद को जानकारी ही नहीं है।यूपी के रायबरेली में बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित बचत भवन में दिशा की बैठक हुई। इसमें ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के बजट को लेकर सवाल-जवाब के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।

राहुल गांधी ने योजना पर तंज कसते हुए कहा कि इसका प्रचार बहुत है, लेकिन जमीन पर इसका असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने जिले को मिले बजट की जानकारी मांगी। अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत 30 लाख रुपये मिले हैं। इसमें 10 प्रतिशत राशि प्रचार पर खर्च होती है। इस पर राहुल ने सवाल उठाया।

किसी भी योजना के बारे में सवाल पूछने का अधिकार
राहुल के सवालों के बीच प्रदेश के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह बोल पड़े कि यह आश्चर्य की बात है कि सांसद को केंद्रीय योजना के बारे में जानकारी नहीं है। इस पर अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सांसद को किसी भी योजना के बारे में सवाल पूछने का अधिकार है।

इसके बाद दोनों ओर से तीखे शब्द बाण चले। मामला बढ़ता देख राहुल गांधी ने हस्तक्षेप किया और दोनों को शांत कराया। उन्होंने मंत्री से कहा कि उनसे समझने में भूल हुई है। इसके बाद दिशा की बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ी।

उधर, दिशा की बैठक शुरू होने से पहले सपा विधायकों ने पोस्टर-बैनर लहराकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बछरावां विधायक श्याम सुंदर भारती और हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। मामला बढ़ता देख एएसपी आलोक सिंह ने पोस्टर-बैनर लेकर विधायकों से उन्हें छीन लिया। सपा विधायकों ने कहा कि जब समस्याएं जस की तस हैं तो दिशा बैठक का क्या औचित्य है। बछरावां विधायक ने कहा कि गुंडे-माफियाओं को सत्ता का संरक्षण है।

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