दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली यूनिवर्सिटी साउथ कैंपस के पास हुए हादसे में रेस्क्यू जारी, सीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई। ये इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास है, जहां बहुत सारे छात्र रहते हैं। इमारत पीजी यानी पेइंग गेस्ट अकॉमडेशन के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। हादसा रविवार दोपहर को हुआ। रात के ऑपरेशन के दौरान एक और शव मिला, जिससे मौतों की संख्या छह हो गई। रेस्क्यू टीमें अभी भी मलबा हटा रही हैं और फंसे हुए लोगों को खोज रही हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और दूसरी एजेंसियों की टीमें मौके पर काम कर रही हैं। भारी मलबा हटाने का काम चल रहा है। हादसे ने पीजी इमारतों की सुरक्षा और निर्माण तथा फायर सेफ्टी नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये इलाका घनी आबादी वाला है।
सरकार की कार्रवाई दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर जाकर समीक्षा के बाद मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है। इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया है। सीएमओ के मुताबिक जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा और कानून के सख्त प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी।
अवैध इमारतों को सील करने का आदेश दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने चार या उससे ज्यादा मंजिल वाली सभी अवैध इमारतों को तुरंत सील करने का आदेश दिया है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तत्काल बर्खास्तगी की चेतावनी भी दी गई है। ये आदेश तुरंत लागू होंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं कांग्रेस नेता और एआईसीसी उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने छात्र सुरक्षा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चे भविष्य बनाने की उम्मीद लेकर दिल्ली आते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कोचिंग सेंटर की पुरानी घटना का भी जिक्र किया। पूर्व दिल्ली मुख्य सचिव उमेश सैगल ने कहा कि ये अकेला मामला नहीं है। दिल्ली के कुछ इलाकों में हर पांच में से एक इमारत अनधिकृत है। या तो ब्लूप्रिंट मंजूर नहीं होते, या बाद में मंजिलें बढ़ा दी जाती हैं, या निर्माण कमजोर होता है। उन्होंने भीड़भाड़ वाले इलाकों में नई निर्माण मंजूरी रोकने की बात कही।
एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू जारी है और कई छात्र बाहर निकाले गए तो मृत पाए गए। उन्होंने तीन छात्रों को बचाने का दावा किया और समय पर मदद न पहुंचने की बात कही। दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष रजत चौधरी ने कहा कि स्थिति गंभीर है। एंबुलेंस और डॉक्टर पर्याप्त संख्या में हैं। उन्होंने जल्दी रेस्क्यू की अपील की और पार्टियों से राजनीति न करने को कहा। उन्होंने प्रभावित परिवारों और रेस्क्यू टीमों के साथ खड़े होने की बात कही।
राजनाथ सिंह का कोलंबो दौरा भारत-श्रीलंका के रक्षा संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत करेगा, जिसमें समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर मुख्य मुद्दा होगा.
नई दिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आगामी श्रीलंका यात्रा उनके रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दक्षिणी पड़ोसी के साथ भारत के जुड़ाव में एक ऐतिहासिक पल है, क्योंकि दशकों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की इस द्वीप राष्ट्र की यह पहली आधिकारिक यात्रा है. यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक उच्च-स्तरीय मुलाकात से कहीं बढ़कर है.
8 से 10 सितंबर तक होने वाला यह दौरा हिंद महासागर में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों देशों के रिश्तों में रक्षा और समुद्री सुरक्षा को मुख्य केंद्र में रखने के नई दिल्ली के इरादे को दर्शाता है. रविवार को रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे. कोलंबो में भारतीय प्रवासियों से भी बातचीत करेंगे. राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.
भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध और एक बहुआयामी साझेदारी है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा, आर्थिक व व्यापार सहयोग और मजबूत जन-संबंधों पर आधारित है. दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को तब और गति मिली जब भारत ने आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका की मदद की और 2025 में श्रीलंका में आए चक्रवात डिटवा के बाद सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देशों में से एक रहा. इसने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महासागर’ (MAHASAGAR – क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) के दृष्टिकोण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.
मंत्रालय ने कहा कि सिंह की श्रीलंका यात्रा “एक मजबूत समुद्री और रक्षा साझेदारी सहित पारस्परिक रूप से लाभकारी क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मजबूत और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगी.”
इस यात्रा का समय विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है. श्रीलंका हिंद महासागर में कुछ सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बीच एक बेहद अहम स्थान पर है, जबकि भारत अपनी ‘पड़ोसी पहले’ की नीति और मोदी के ‘महासागर’ (MAHASAGAR) दृष्टिकोण के तहत पूरे क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारियों के अपने नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है. इसलिए, सिंह की यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से श्रीलंका का रणनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है.
दशकों में किसी भी भारतीय रक्षा मंत्री ने श्रीलंका का दौरा नहीं किया है. श्रीलंका के गृहयुद्ध के अंतिम वर्षों के दौरान, जब द्वीप पर हो रहे घटनाक्रमों से भारत के सुरक्षा और राजनीतिक हित सीधे जुड़े थे, तब 2008 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी की यात्रा पर विचार किए जाने की खबर थी. हालांकि, एंटनी ने श्रीलंका की यात्रा नहीं की थी. इसके बजाय, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश सचिव और रक्षा सचिव ने कोलंबो का दौरा किया था.
इसलिए, राजनाथ सिंह की यह यात्रा एक लंबे अंतराल के बाद रक्षा-मंत्री स्तर के राजनीतिक जुड़ाव की बहाली को दर्शाती है. यह भी ध्यान देने योग्य है कि सिंह सितंबर 2023 में श्रीलंका की यात्रा पर जाने वाले थे, लेकिन बाद में उस यात्रा को स्थगित कर दिया गया था.
जब श्रीलंका ईंधन, भोजन, दवाओं और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहा था, तब भारत ने उसे बड़े पैमाने पर आर्थिक और मानवीय सहायता प्रदान की थी. उस सहायता ने नई दिल्ली के प्रति एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सद्भावना स्थापित करने में मदद की और अपने निकटतम पड़ोस में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देश के रूप में भारत की छवि को और मजबूत किया.
इसके बाद दोनों देशों के संबंधों को एक मजबूत रणनीतिक आयाम मिला. रक्षा और समुद्री सहयोग द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से बन गए हैं, जिसमें भारत प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता, सैन्य अभ्यास, उपकरण और संस्थागत आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
राजनाथ सिंह की चर्चाओं में शामिल होने वाले सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक अप्रैल 2025 में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित भारत-श्रीलंका रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) का कार्यान्वयन होने की संभावना है.
यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक व्यापक संस्थागत ढांचा प्रदान करता है. इसका महत्व द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को व्यक्तिगत अभ्यासों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उपकरण सहायता से आगे बढ़ाकर एक अधिक संरचित साझेदारी की ओर ले जाने में है.
दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच रक्षा बलों के प्रमुखों के दौरों के माध्यम से उच्च स्तरीय रक्षा जुड़ाव नियमित रहा है. इसके अलावा, द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा करने और उसे गति देने के लिए हर साल रक्षा सचिवों के बीच एक वार्षिक रक्षा वार्ता आयोजित की जाती है.
भारत से श्रीलंका के लिए लगातार नौसैनिक बातचीत और जहाजों व पनडुब्बियों के दौरे होते रहे हैं. बहुपक्षीय अभ्यासों के अलावा, द्विपक्षीय अभ्यास स्लिनेक्स (SLINEX – नौसेना अभ्यास) और मित्र शक्ति (MITRA SHAKTI – थलसेना अभ्यास) हर साल बारी-बारी से भारत और श्रीलंका में आयोजित किए जाते हैं.
क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) के मामले में, 6 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता से स्थापित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र को जून 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की श्रीलंका यात्रा के दौरान शुरू किया गया था.
आतंकवाद विरोधी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा सहयोग भी दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है. कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव, जो हाल के समय में क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों से निपटने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में उभरा है, अगस्त 2024 में इसके संस्थापक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने से और मजबूत हुआ.
श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति उसे भारत की हिंद महासागर रणनीति में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण स्थान देती है. यह द्वीप प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के करीब है और भारत की दक्षिणी तटरेखा के पास स्थित है. इसलिए, श्रीलंका के समुद्री बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों, निगरानी क्षमताओं या बाहरी सुरक्षा साझेदारियों को प्रभावित करने वाले किसी भी घटनाक्रम का भारत के रणनीतिक माहौल पर सीधा असर पड़ता है.
नई दिल्ली के लिए, अपने आसपास के पानी की निगरानी करने की श्रीलंका की क्षमता को मजबूत करने से कई उद्देश्य पूरे होते हैं. जैसे, मादक पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी और अवैध मछली पकड़ने का मुकाबला करना, समुद्री आपात स्थितियों का जवाब देना, निगरानी में सुधार करना और उत्तरी हिंद महासागर की समग्र सुरक्षा को मजबूत करना.
भारत पहले ही समुद्री सुरक्षा क्षमताएं बनाने में श्रीलंका की मदद कर चुका है. दोनों देशों ने अपनी नौसेनाओं और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी सहयोग विकसित किया है.
इस यात्रा के भू-राजनीतिक महत्व को हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी से अलग करके नहीं देखा जा सकता. श्रीलंका के रणनीतिक बंदरगाहों और उसकी भौगोलिक स्थिति ने चीन के बड़े आर्थिक और बुनियादी ढांचे के जुड़ाव को आकर्षित किया है. भारत के लिए, यह बात इस द्वीप को हिंद महासागर में प्रभाव और रणनीतिक पहुंच बनाने की व्यापक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है.
हालांकि, नई दिल्ली का दृष्टिकोण तेजी से इस बात पर केंद्रित रहा है कि वह कोलंबो के साथ अपने संबंधों को भारत और चीन के बीच किसी एक को चुनने वाले विकल्प के रूप में पेश करने से बचे. इसके बजाय, भारत ने क्षमताएं, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा सहयोग प्रदान करके श्रीलंका के मुख्य सुरक्षा भागीदार के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया है.
राजनाथ सिंह की आगामी यात्रा इसी दृष्टिकोण के बिल्कुल अनुकूल है. इसका उद्देश्य श्रीलंका से यह मांग करने के बजाय कि वह किसी अन्य शक्ति के मुकाबले भारत को चुने, इस बात को सुनिश्चित करना अधिक है कि श्रीलंका के सुरक्षा ढांचे के लिए भारत हमेशा अपरिहार्य बना रहे.
श्रीलंकाई मीडिया ने रविवार को रिपोर्ट दी कि सिंह की यात्रा के दौरान रक्षा से जुड़े तीन नए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. ‘संडे टाइम्स’ न्यूज वेबसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इनके तहत भारतीय एयर-डिफेंस गन, दोनों देशों के कैडेट कोर के बीच बेहतर संबंध और श्रीलंका डिफेंस कॉलेज व भारतीय रक्षा संस्थानों के बीच अधिक सहयोग को शामिल किया जाएगा.
रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘महासागर’ (MAHASAGAR) का स्पष्ट रूप से जिक्र किया जाना बेहद महत्वपूर्ण है. यह अवधारणा समुद्री सुरक्षा को आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता से जोड़ने के भारत के प्रयास को दर्शाती है. श्रीलंका इस दृष्टिकोण के लिए एक स्वाभाविक भागीदार है क्योंकि वहां भारत के हित पारंपरिक रक्षा सहयोग से कहीं आगे तक फैले हुए हैं.
बंदरगाह, शिपिंग, ऊर्जा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, मत्स्य पालन, कनेक्टिविटी और समुद्री निगरानी इस रिश्ते के आपस में जुड़े हुए तत्व हैं. इसलिए, राजनाथ सिंह की इस यात्रा को अपने निकटतम समुद्री पड़ोस में ‘महासागर’ दृष्टिकोण को अधिक रणनीतिक और संस्थागत मजबूती देने के भारत के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है.
लिहाजा, राजनाथ सिंह की इस यात्रा का वास्तविक महत्व केवल रक्षा-मंत्री स्तर के जुड़ाव में दशकों पुराने अंतराल को समाप्त करने में नहीं है, बल्कि इस बात में है कि कोलंबो की यह वापसी क्या दर्शाती है: एक अधिक संस्थागत, समुद्री-केंद्रित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-श्रीलंका रक्षा साझेदारी का उभरना.
पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग हुई। इसमें रेलवे के आठ मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर कुल ₹20 हजार करोड़ खर्च होंगे।इन प्रोजेक्ट्स के तहत से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 20 जिलों में करीब 1,200km रेल लाइनें बढ़ाई जाएंगीं। इससे 6,900 गांवों के एक करोड़ लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई होगी
इन परियोजनाओं से हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे उद्योगों तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार माल को बाजार तक ले जाने में मदद मिलेगी। साथ ही, माल परिवहन की लागत कम करने में भी फायदा हो सकता है।
तेल आयात और कार्बन उत्सर्जन घटेगा
सरकार ने रेलवे को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर और ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम बताया है। नई रेल लाइनों से माल और यात्रियों के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सरकार के अनुमान के अनुसार, इन परियोजनाओं से हर साल करीब 12 करोड़ लीटर तेल की बचत हो सकती है। इसके अलावा 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।
सरकार ने इस कमी को करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया है। इससे देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मोदी कैबिनेट ने रेलवे को लेकर एक अहम फैसला लिया है. भारतीय रेलवे नेटवर्क को अब फोर-लेन करने का फैसला किया गया है. अभी इसके लिए 7 रेलवे रूट को मंजूरी दी गई है. इसमें दिल्ली-मुंबई रूट भी शामिल है.
मोदी कैबिनेट में एक बड़ा फैसला लिया गया है. अब ट्रेनों की संख्या और आवागमन को बेहतर बनाने के लिए कैबिनेट ने 4 लेन रूट बिछाने की मंजूरी दे दी है. कैबिनेट ने इसके तहत 7 नए प्रोजक्ट को मंजूरी दी है. यह सात प्रोजेक्ट्स अलग-अलग रूटों पर काम करेंगे यानी कि सात रूटों को 4-लेन करने का काम किया जाएगा.
दिल्ली-मुंबई को भी फोर लेन करने की भी मंजूरी दी गई है. रेलवे का कहना है कि इन रूटों पर ज्यादा भीड़ होने के कारण इन्हें फोर-लेन किया जा रहा है. इससे यात्रियों का आवागमन तो बेहतर होगा ही. साथ ही कनेक्टिविटी ज्यादा फास्ट होगी. 4 लेन होने से ट्रेनों के लेट होने की संभावना कम हो जाएगी. साथ पहले से ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकती है. त्योहारों में घर जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक बड़ी राहत होगी.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगर हम सबसे अहम रेलवे कॉरिडोर पर नजर डालें तो यह 11,000 किलोमीटर लंबे, 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं. इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को 4-लेन का बनाया जा रहा है और कई दूसरे कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है. ये आने वाले समय में बहुत ज्यादा ट्रैफिक संभालेंगे.
दिल्ली से मुंबई, मुंबई से चेन्नई, चेन्नई से कोलकाता और कोलकाता से मुंबई – यह ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ है. ये 7 कॉरिडोर रेलवे के कुल ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं. इन कॉरिडोर में से लगभग 2,000 किलोमीटर पहले ही 4-लेन का हो चुका है. लगभग 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है और बाकी 4,000 किलोमीटर के लिए अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है.
3-मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को भी मंजूरी 4 लेन प्रोजेकट के अलावा, कैबिनेट ने 5 राज्यों के 14 ज़िलों में फैले 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है. इस प्रोजेकट से भारतीय रेलवे में लगभग 656 km नेटवर्क फैलेगा. इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत ₹10,783 करोड़ है और इन्हें 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
5 नए प्रोजेक्ट की भी मंजूरी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 जिलों में 5 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है. इन प्रोजेक्ट्स से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 540 किलोमीटर बढ़ जाएगा. इन प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है.
INDIA गठबंधन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर विवाद बढ़ गया है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल में पूरे 3 मिनट 10 सेकेंड तक राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े रहे. इसे लेकर कांग्रेस ने उनपर निशाना साधा था. अब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के वीडियो शेयर कर कांग्रेस के विरोध का जवाब दिया है.
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर तकरार बढ़ गई है. श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राष्ट्रगीत के सम्मान में पूरे 3 मिनट 10 सेकेंड तक खड़े थे, जिसे लेकर अब नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता तनवीर सादिक ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कर्नाटक और तेलंगाना के कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं. इनमें वो भी वंदे मातरम के पूरे वर्जन के दौरान सम्मान में खड़े नजर आ रहे हैं.
दरअसल कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला के पूरे राष्ट्रगीत को गाए जाने पर ऐतराज जताया था. इसके जवाब में तनवीर सादिक ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के वे वीडियो पोस्ट किए हैं. वीडियो में दोनों नेता वंदे मातरम के पूरे वर्जन के दौरान सम्मान में खड़े दिखे. तनवीर सादिक ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा. उन्होंने लिखा, ‘जनाब तारिक कर्रा साहब, प्लीज अपने कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों को देखें और अपने मूल्यवान विचार सभी के साथ शेयर करें. थैंक्यू.’
इससे पहले, कांग्रेस नेता तारिक हमीद ने उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘राष्ट्रीय प्रतीक, गीत और परंपराएं हर भारतीय के दिल में एक खास जगह रखते हैं. इनकी असली ताकत हमारे जैसे विविधतापूर्ण देश को एक सूत्र में बांधने की क्षमता में है. इसलिए ये चिंता की बात है कि हमारे गठबंधन सहयोगियों ने पूरा वर्जन गाने का विकल्प चुना.’
वहीं, कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने उमर अब्दुल्ला का वीडियो शेयर करते हुए कहा था, ‘वंदे मातरम का पूरा वर्जन उस साझा और बहुलवादी संस्कृति के साथ मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी. हमारे लिए महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मौलाना आजाद का फैसला सबसे ऊपर है.’
वेणुगोपाल ने आगे कहा, ‘हम सम्मान के साथ अपने सहयोगियों से अपील करते हैं कि वो स्वतंत्रता सेनानियों की समझ का सम्मान करें और उसी वर्जन के साथ खड़े हों जिसे उन्होंने अपनाया था.’
बता दें कि कांग्रेस का तर्क है कि 1937 में वंदे मातरम के चुनिंदा हिस्सों को इसलिए अपनाया गया था ताकि इसका सांप्रदायिकीकरण न हो सके. हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस के कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के वीडियो सामने लाए जाने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर दिख रही है.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला छात्र युवराज दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहा था. यहां सत्य निकेतन हादसे में युवराज की जान चली गई. वह परिवार का इकलौता बेटा था. रक्षाबंधन पर घर पहुंचा था और बहन से राखी बंधवाई थी. अब युवराज के पिता के परिजन बेटे को याद कर फफक पड़ते हैं.
कुछ दिन पहले इस घर में रौनक थी. रक्षाबंधन का त्योहार था. घर का इकलौता बेटा दिल्ली से आया था. मां-बाप खुश थे कि बेटा घर आया है. बहन भी खुश थी. उसने भाई की कलाई पर राखी बांधी. भाई ने बहन को प्यार दिया और फिर कुछ दिन बाद अपने सपनों को पूरा करने के लिए वापस दिल्ली चला गया. परिवार को क्या पता था कि जिस बेटे को वे पढ़ाई के लिए दिल्ली विदा कर रहे हैं, वह अगली बार अपने पैरों पर चलकर नहीं, बल्कि उसका पार्थिव शरीर लौटेगा.
ये कहानी छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले युवराज सोनी की है. दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे ने एक परिवार से उसका इकलौता बेटा छीन लिया. जिस बेटे के भविष्य को लेकर माता-पिता ने न जाने कितने सपने देखे थे, वह अब इस दुनिया में नहीं है.
हादसे के दो दिन बाद जब युवराज का पार्थिव शरीर दिल्ली से दुर्ग पहुंचा तो घर के बाहर लोगों की भीड़ थी. लेकिन घर के अंदर एक ऐसा सन्नाटा था, जिसे किसी शब्द में बयान करना मुश्किल था. परिजनों की आंखों में बेटे की यादें थीं. कुछ ही समय पहले युवराज रक्षाबंधन पर घर आया था. वह परिवार से मिला था. अपनी बहन से राखी बंधवाई थी. मां-बाप के साथ समय बिताया था. फिर पढ़ाई के लिए दिल्ली लौट गया.
घरवालों के मुताबिक, युवराज ने बताया था कि उसकी पढ़ाई अच्छी चल रही है. परिवार को भी बेटे पर भरोसा था. वह पढ़ रहा था, आगे बढ़ रहा था और अपने भविष्य को बनाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि घर से उसकी विदाई इतनी जल्दी आखिरी विदाई में बदल जाएगी. अब बहन के सामने सबसे दर्दनाक सवाल यही है कि जिस भाई की कलाई पर उसने राखी बांधी थी, उसे वह दोबारा कभी राखी नहीं बांध पाएगी. रक्षाबंधन पर भाई के आने का इंतजार था. अब उसकी यादें हैं.
Advertisement माता-पिता का इकलौता बेटा था युवराज
युवराज सिर्फ एक छात्र नहीं था. वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. उसके साथ पूरे परिवार के सपने जुड़े हुए थे. दिल्ली में पढ़ाई करने गया युवराज दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बी.कॉम का छात्र था. पूर्व महापौर धीरज बाकलीबाल के मुताबिक, युवराज पढ़ाई के साथ आईएएस की तैयारी भी कर रहा था.
दुर्ग से दिल्ली तक का सफर सिर्फ डिग्री लेने का नहीं था. वह अपने भविष्य के लिए निकला था. एक बेहतर जिंदगी के लिए निकला था. माता-पिता ने भी शायद यही सोचा होगा कि बेटा पढ़-लिखकर कुछ बनेगा. घर का नाम रोशन करेगा. लेकिन 6 सितंबर को आई एक खबर ने इन सारे सपनों को एक झटके में तोड़ दिया.
सत्य निकेतन में हादसा और फिर घर में बेचैनी
6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक तीन मंजिला इमारत गिरने की खबर सामने आई. हादसे की खबर जैसे-जैसे फैलने लगी, वैसे-वैसे उन परिवारों की धड़कनें बढ़ने लगीं, जिनके बच्चे उस इलाके में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. इन्हीं परिवारों में एक परिवार दुर्ग का भी था. युवराज के परिजनों को जैसे ही हादसे की जानकारी मिली, वे बेचैन हो गए. उन्हें उम्मीद थी. डर भी था. और फिर वह खबर आई, जिसने पूरे परिवार को तोड़ दिया. हादसे में युवराज की मौत हो गई थी.
जिस बेटे से कुछ समय पहले पढ़ाई और भविष्य की बातें हुई थीं, वह अब कभी फोन नहीं करेगा. कभी घर नहीं आएगा. कभी मां-बाप से नहीं कहेगा कि पढ़ाई ठीक चल रही है. हादसे के बाद दो दिन का इंतजार. फिर दिल्ली से शव वाहन दुर्ग पहुंचा. जिस गाड़ी का परिवार शायद कभी इंतजार नहीं करना चाहता था, आज वही गाड़ी उनके घर के सामने आकर रुकी. युवराज का पार्थिव शरीर बाहर निकाला गया. और इसके साथ ही परिवार का सब्र टूट गया.
माता-पिता अपने बेटे के शव को पकड़कर रोते रहे. जिस बेटे को उन्होंने बचपन से बड़ा होते देखा था, आज वह उनके सामने खामोश था. मां बिलख रही थी. पिता बदहवास थे. और बहन… वह अपने भाई को देखकर लगातार रो रही थी. वह भाई, जो कुछ दिन पहले उसके सामने बैठा था. जिसकी कलाई पर उसने राखी बांधी थी.
घर के बाहर भीड़, भीतर टूट चुका था परिवार
युवराज के पार्थिव शरीर के दुर्ग पहुंचने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, परिचित और रिश्तेदार उसके घर पहुंचने लगे. लोग परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिनके सामने शब्द छोटे पड़ जाते हैं. एक मां के सामने उसका बेटा था. एक पिता के सामने उसका इकलौता चिराग बुझ चुका था. और एक बहन के सामने उसका भाई हमेशा के लिए खामोश था.
पूर्व महापौर धीरज बाकलीबाल ने भी युवराज की मौत को बेहद दुखद बताया. उन्होंने कहा कि युवराज हजारों सपने लेकर दिल्ली पढ़ने गया था और उसके माता-पिता ने भी उसके भविष्य को लेकर कई सपने देखे थे. लेकिन एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया.
बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में युवराज का अंतिम संस्कार किया गया. लोगों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी. दुर्ग ने एक युवा छात्र को खो दिया. एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा. और एक बहन ने अपना भाई. युवराज दिल्ली पढ़ने गया था. उसके पास सपने थे. उसके माता-पिता के पास उम्मीदें थीं. घर से विदा होते वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि अगली बार उसे इस तरह वापस आना पड़ेगा.
उज्जैन की खड़े हनुमान प्रतिमा को शिफ्ट करने का काम लगातार चौथे दिन भी जारी है, लेकिन प्रशासन को इसमें कोई सफलता नहीं मिली है. इसपर मंदिर के पुजारी ने कहा कि केवल हनुमान जी की इच्छा से सफलता मिलेगी.
उज्जैन की खड़े हनुमान प्रतिमा इन दिनों काफी चर्चा में है. यहां सड़क चौड़ीकरण के तहत मंदिर भवन को तो हटाया जा चुका है लेकिन दावा किया जा रहा है कि हनुमान प्रतिमा एक इंच नहीं हिली है. फिलहाल प्रतिमा को बारिश और अन्य संभावित नुकसान से बचाने के लिए कैनोपी लगा दी गई है. अब इस मामले पर जब मंदिर के पुजारी से बात की गई तो उन्होंने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.
उन्होंने कहा कि अब केवल हनुमान जी की इच्छा से ही मूर्ति को हटाया जा सकता है. ABP न्यूज से बातचीत में मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा कि पहले मेरे बस में था, लेकिन अब मेरे बस में नहीं है. अब केवल हनुमान जी की इच्छा से ही मूर्ति को हटाया जा सकता है.
मंदिर के पुजारी ने और क्या कहा? पुजारी महेश बैरागी ने कहा, “अब मेरे बस में भी नहीं है. पहले हटाने को तैयार था और स्थान परिवर्तन की बात हो गई थी, लेकिन अब श्रद्धालुओं की भीड़ और उनकी भावनाओं को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब केवल बजरंगबली की इच्छा से ही फैसला होगा.”
उन्होंने खड़े हनुमान मंदिर की लोकप्रियता के कई कारण भी बताए. उन्होंने कहा कि खड़े हनुमान को डॉक्टर हनुमान भी कहा जाता है, यहां पर छोटे बच्चों की बीमारी भी पूजा और प्रसाद से दूर हो जाती है. मशीनों से मूर्ति नहीं हटाने की बात सुनने के बाद मंदिर पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है.
‘बिना जानकारी दिए प्रतिमा को हटाने आये लोग’ पुजारी ने आगे बताया कि बहुत जरूरी होने पर ही मंदिर को शिफ्ट किया जाए और ऐसा करने से पहले उनकी कुछ शर्तें थीं, जिनमें से केवल एक ही मांग को माना गया है. वो शर्त थी कि जहां मंदिर शिफ्ट होगा उसके पेपर दिया जाए लेकिन अभी तक पेपर पूरा नहीं दिया. मेरी शर्त ये थी कि आने से पहले उन्हें लिखित में जानकारी दी जाए लेकिन अचानक आकर प्रतिमा को हटाने का काम शुरू कर दिया और स्थिति बिगड़ गई.
क्या है पूरा मामला? दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है. इसके तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक के बीच सड़क चौड़ीकरण जारी है. चौड़ीकरण के तहतल ही सती गेट के पास स्थित करीब 170 साल पुराने ऐतिहासिक ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को शिफ्ट (विस्थापित) करने का कार्य पिछले 4 दिनों से जारी है, लेकिन प्रशासन को सफलता नहीं मिल सकी. दावा किया जा रहा है कि नगर निगम और जिला प्रशासन ने भारी-भरकम क्रेन, जेसीबी और अन्य आधुनिक मशीनों की मदद से प्रतिमा को उठाने के प्रयास भी किये लेकिन खड़े हनुमान की प्रतिमा नहीं हिली.
उज्जैन की खड़े हनुमान प्रतिमा को शिफ्ट करने का काम लगातार चौथे दिन भी जारी है, लेकिन प्रशासन को इसमें कोई सफलता नहीं मिली है. इसपर मंदिर के पुजारी ने कहा कि केवल हनुमान जी की इच्छा से सफलता मिलेगी.
उज्जैन की खड़े हनुमान प्रतिमा इन दिनों काफी चर्चा में है. यहां सड़क चौड़ीकरण के तहत मंदिर भवन को तो हटाया जा चुका है लेकिन दावा किया जा रहा है कि हनुमान प्रतिमा एक इंच नहीं हिली है. फिलहाल प्रतिमा को बारिश और अन्य संभावित नुकसान से बचाने के लिए कैनोपी लगा दी गई है. अब इस मामले पर जब मंदिर के पुजारी से बात की गई तो उन्होंने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.
उन्होंने कहा कि अब केवल हनुमान जी की इच्छा से ही मूर्ति को हटाया जा सकता है. ABP न्यूज से बातचीत में मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा कि पहले मेरे बस में था, लेकिन अब मेरे बस में नहीं है. अब केवल हनुमान जी की इच्छा से ही मूर्ति को हटाया जा सकता है.
मंदिर के पुजारी ने और क्या कहा? पुजारी महेश बैरागी ने कहा, “अब मेरे बस में भी नहीं है. पहले हटाने को तैयार था और स्थान परिवर्तन की बात हो गई थी, लेकिन अब श्रद्धालुओं की भीड़ और उनकी भावनाओं को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब केवल बजरंगबली की इच्छा से ही फैसला होगा.”
उन्होंने खड़े हनुमान मंदिर की लोकप्रियता के कई कारण भी बताए. उन्होंने कहा कि खड़े हनुमान को डॉक्टर हनुमान भी कहा जाता है, यहां पर छोटे बच्चों की बीमारी भी पूजा और प्रसाद से दूर हो जाती है. मशीनों से मूर्ति नहीं हटाने की बात सुनने के बाद मंदिर पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है.
‘बिना जानकारी दिए प्रतिमा को हटाने आये लोग’ पुजारी ने आगे बताया कि बहुत जरूरी होने पर ही मंदिर को शिफ्ट किया जाए और ऐसा करने से पहले उनकी कुछ शर्तें थीं, जिनमें से केवल एक ही मांग को माना गया है. वो शर्त थी कि जहां मंदिर शिफ्ट होगा उसके पेपर दिया जाए लेकिन अभी तक पेपर पूरा नहीं दिया. मेरी शर्त ये थी कि आने से पहले उन्हें लिखित में जानकारी दी जाए लेकिन अचानक आकर प्रतिमा को हटाने का काम शुरू कर दिया और स्थिति बिगड़ गई.
क्या है पूरा मामला? दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है. इसके तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक के बीच सड़क चौड़ीकरण जारी है. चौड़ीकरण के तहतल ही सती गेट के पास स्थित करीब 170 साल पुराने ऐतिहासिक ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को शिफ्ट (विस्थापित) करने का कार्य पिछले 4 दिनों से जारी है, लेकिन प्रशासन को सफलता नहीं मिल सकी. दावा किया जा रहा है कि नगर निगम और जिला प्रशासन ने भारी-भरकम क्रेन, जेसीबी और अन्य आधुनिक मशीनों की मदद से प्रतिमा को उठाने के प्रयास भी किये लेकिन खड़े हनुमान की प्रतिमा नहीं हिली.
चीन पागलों की तरह सोना खरीदते जा रहा है. पिछले 22 महीनों से लगातार उसकी सोने की खरीद जारी है. इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि चीन शायद दुनिया में सोना बचने ही नहीं देगा.
सोने के लिए चीन की दीवानगी कम होती नजर नहीं आ रही है. गोल्ड रिजर्व का होना किसी भी देश के लिए अच्छी बात है. भारत और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाएं भी पिछले कुछ सालों से लगातार सोना खरीद रही हैं. इस बीच, भारत की खरीद में बेशक कुछ कमी आई है, लेकिन चीन टस से मस नहीं हो रहा है. चीन अपने सोने का भंडार लगातार बढ़ाता ही जा रहा है.
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अगस्त 2026 में अपने सोने के भंडार में 6,50,000 औंस (लगभग 20.2 टन) सोना शामिल किया है, जो अक्टूबर 2023 के बाद से महीने भर में की गई सबसे बड़ी खरीद है. यह खरीदारी इसलिए भी सबसे खास है क्योंकि अगस्त के दौरान वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में लगभग 10% का जोरदार उछाल देखा गया था. आमतौर जब सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो केंद्रीय बैंक खरीदारी धीमी कर देते हैं, लेकिन चीन ने बढ़ती कीमतों की परवाह न करते हुए अपनी आक्रामक खरीदारी जारी रखी.
सोमवार को पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) के जारी आंकड़ों से पता चला कि अगस्त में उसके सोने का भंडार 6,50,000 औंस बढ़ा है. 20.2 टन की इस नई खरीद के साथ चीन का कुल आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर अब रिकॉर्ड 2,386.6 टन (76.73 मिलियन औंस) पर पहुंच गया है. चीन के सोना खरीदने का यह ट्रेंड लगातार 22 महीनों से बना हुआ है.
चीन के केंद्रीय बैंक का लगातार सोना खरीदने का सिलसिला अब 22वें महीने में प्रवेश कर चुका है. डॉलर की वैल्यू के हिसाब से देखें, तो चीन के पास अगस्त के अंत तक सोने की मात्रा 350.08 बिलियन डॉलर की रही, जो जुलाई के 306.35 बिलियन डॉलर के मुकाबले ज्यादा है.
चीन क्यों कर रहा ऐसा? फाइनेंशियल एनालिस्ट और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन किसी शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य का सोचकर अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहा है. यह उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक कदम का हिस्सा है.
अगस्त 2026 में अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड के बायबैक को दोगुना करने का अप्रत्याशित फैसला लिया गया, जिससे डॉलर में कमजोरी और वैश्विक स्तर पर मुद्रा अवमूल्यन (Debasement Trade) को लेकर चिंताएं बढ़ीं. इसके विकल्प के रूप में चीन ने सोने में निवेश को और तेज किया.
रूस से ली सबक यूक्रेन में जंग के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों को देखते हुए चीन यह समझ चुका है कि डॉलर और यूरो जैसी फॉरेन करेंसीज को किसी भी वक्त फ्रीज किया जा सकता है.
आसान भाषा में कहे तो अमेरिकी डॉलर या डिजिटल बॉन्ड्स के रूप में विदेशी मुद्रा भंडार रखने से वह पैसा अमेरिका के बैंकिंग सिस्टम (जैसे SWIFT) के जरिए ही घूमता है. ऐसे में अगर कभी भविष्य में चीन और अमेरिका के बीच राजनीतिक या सैन्य तनाव का माहौल बनता है, तो अमेरिका एक झटके में चीन के अरबों-खरबों डॉलर को फ्रीज (जब्त) कर सकता है. उसने रूस के साथ भी यही किया है. लेकिन सोने के साथ ऐसा नहीं है.
फिजिकल गोल्ड पर अमेरिका या किसी भी पश्चिमी देश का कोई नियंत्रण नहीं रह जाता. इसे न तो कोई हैक कर सकता है, न डिजिटली ब्लॉक कर सकता है और न ही जब्त कर सकता है. ऐसे में संकट के समय चीन इस सोने का इस्तेमाल अपनी जरूरत के लिए कर सकता है.
Duleep Trophy 2026 के खिताबी मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी दूसरी पारी में सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए। ईस्ट जोन की टीम पहली पारी में 372 रन की बढ़त हासिल कर चुकी है और अब खिताब जीतने की दहलीज पर खड़ी है।
दलीप ट्रॉफी 2026 के खिताबी मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी दूसरी पारी में भी सस्ते में आउट हो गए हैं। सूर्यवंशी 16 गेंदों का सामना करने के बाद सिर्फ 8 रन बना पाए और त्रिपुराणा विजय की गेंद पर स्टंप आउट हो गए। उनकी गेंद पर छक्का लगाने की कोशिश में बीट हुए और विकेटकीपर एन जगदीशन ने बिना कोई गलती किए उन्हें स्टंप कर दिया। सूर्यवंशी पहली पारी में भी सिर्फ 44 रन बना पाए थे। उनके आउट होने की वजह से ईस्ट जोन को 13 रन के स्कोर पर ही डबल झटका लगा।
इससे पहले अभिमन्यु ईश्वरन भी 13 रन के स्कोर पर पवेलियन लौटे थे। उन्हें मोहम्मद सिराज ने देवदत्त पडिक्कल के हाथों कैच कराया था। ईश्वरन ने पहली पारी में शतक लगाया था, लेकिन दूसरी पारी में वह कमाल नहीं दिखा पाए। हालांकि, ईस्ट जोन इस मुकाबले में जीत की दहलीज पर खड़ा है। पहली पारी में ईस्ट जोन ने 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसमें ईशान किशन ने 270 रन की विशाल पारी खेली थी, तो कुमार कुशाग्र ने 101 रन बनाए थे। इसके अलावा अभिमन्यु ईश्वरन ने 72, तो शिखर मोहन ने 85 रन की पारी खेली थी।
336 रन पर ढेर हुई साउथ जोन जवाब में साउथ जोन की टीम सिर्फ 336 रन बना सकी और ईस्ट जोन ने पहली पारी के आधार पर 372 रन की बढ़त हासिल कर ली। आपको बता दें कि नियम के अनुसार, अगर मल्टी-डे मुकाबला किसी भी वजह से ड्रॉ हो जाता है, तो पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित कर दिया जाता है।
372 रन की बढ़त हासिल करने के बावजूद ईस्ट जोन ने दोबारा बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन इस बार उन्हें 13 रन के स्कोर पर ही दो झटके लगे। हालांकि, इसके बाद शिखर मोहन और ईशान किशन ने मोर्चा संभाल लिया।
डिफेंडिंग चैंपियन को हरा चुकी है ईस्ट जोन ईस्ट जोन ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। पहले क्वार्टर फाइनल में उन्होंने नॉर्थ ईस्ट जोन को एकतरफा मुकाबले में रौंदा, तो सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने डिफेंडिंग चैंपियन सेंट्रल जोन को मात दी। इसके बाद खिताबी मुकाबले में साउथ जोन भी उनके सामने अब तक टिक नहीं पाई है। ऐसे में ईशान किशन अपनी कप्तानी में दूसरा खिताब जीतने की दहलीज पर खड़े हैं। यहां से अब या तो ईस्ट जोन मुकाबला जीतेगी या मैच ड्रॉ होगा और दोनों ही कंडीशन में ईस्ट जोन के पास ट्रॉफी आ जाएगी।
Qazi Touqeer Bigg Boss 20: बिग बॉस 20 के कंटेस्टेंट काजी तौकीर ने अपनी अजीब हरकतों से दर्शकों का मनोरंजन किया, उनकी इन एक्टिविटीज में देर रात किया गया एक ऐसा एक्ट भी शामिल था जिसने घरवालों को चौंका दिया और उनकी नीदें उड़ा दीं।
सिंगर और ‘फेम गुरुकुल’ से मशहूर हुए काजी तौकीर बिग बॉस 20 के सबसे मनोरंजक कंटेस्टेंट्स में से एक के तौर पर सामने आ रहे हैं। शो और लाइव फीड से उनकी हरकतों के क्लिप्स ऑनलाइन वायरल हो रहे हैं, और उनके हालिया एक्ट ने पूरे घर को परेशान कर दिया। हाल के एपिसोड में, काजी ने आधी रात को कुछ अलौकिक चीज देखने का नाटक किया, जिससे उनके साथी घरवाले डर गए, लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि यह सब दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए किया गया एक एक्ट था।
काजी तौकीर ने बिग बॉस 20 के घरवालों को डराया हाल के एपिसोड में, काजी ने एक ऐसा स्टंट किया जिससे बिग बॉस 20 के घरवाले डर गए और उनकी नींद खराब हो गई। जब सब सो रहे थे, काजी ने ऐसा नाटक करना शुरू किया जैसे उन्होंने कोई सुपरनैचुरल चीज देखी हो और वो उससे बुरी तरह प्रभावित हुए हों। उन्होंने अपना नाटक जारी रखा, जिससे अरिशफा खान और घर के बाकी सदस्य डर गए।
घरवाले बेडरूम से बाहर निकल आए और तब तक बाहर खड़े रहे जब तक काजी शांत नहीं हो गए। हालांकि, बाद में काजी को कैमरे के सामने ये कहते हुए देखा गया कि ये पूरा एपिसोड दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए किया गया एक एक्ट था। उन्होंने कहा, “मैं अपनी हंसी रोक रहा हूं। मैं ऑस्कर-लेवल की परफॉर्मेंस दे रहा हूं। मैं भारत के 100 करोड़ लोगों का मनोरंजन कर रहा हूं। यह बहुत बढ़िया है। इन लोगों को लगता है कि मैं पागल हूं।”
बाद में, जब घरवालों ने काजी तौकीर से पूछा कि क्या वो ठीक हैं, तो उन्होंने अपना नाटक जारी रखते हुए कहा, “वह चाहती थी कि मैं हंसूं,” और ऐसा नाटक किया जैसे उन्होंने किसी लड़की को देखा हो और बस उसके निर्देशों का पालन कर रहे हों। जबकि घरवालों को यकीन हो गया था कि काजी सच में परेशान हैं, असल में वो अपने आस-पास के सभी लोगों को बेवकूफ बना रहे थे।
अगली सुबह, घरवालों ने काजी से कहा कि उनके देर रात के स्टंट की वजह से वो सिर्फ चार घंटे ही सो पाए और तब काजी ने कहा, ‘मैं नॉर्मल इंसान नहीं हूं।’
एक और क्लिप में, काजी को अरिशफा से बात करते हुए और एक और अजीब दावा करते हुए देखा गया। उन्होंने कहा, “मैं कोई आम इंसान नहीं हूं। सोचिए, मैं 3 दिनों में सिर्फ 1 घंटा सोया हूं, फिर भी एनर्जेटिक हूं।”
काजी तौकीर ने बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट तान्या मित्तल की याद दिला दी उनकी बातों और बड़े-बड़े दावों ने दर्शकों को बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट तान्या मित्तल की याद दिला दी, जो अपनी आलीशान लाइफ़स्टाइल के बारे में बातें करने और घर के दूसरे सदस्यों को परेशान करने के लिए जानी जाती थीं।
कई फैंस ने दोनों कंटेस्टेंट्स की तुलना की। एक फैन ने लिखा, “काजी, तान्या मित्तल का मेल वर्जन हैं।” दूसरे ने कमेंट किया, “आप तान्या मित्तल हैं।” एक और कमेंट था, “तान्या मित्तल का भतीजा।” हालांकि, कुछ दर्शक काजी की हरकतों का मजा भी ले रहे हैं। एक फैन ने लिखा, “वह भरपूर एंटरटेनमेंट दे रहे हैं। मुझे वो बहुत पसंद हैं।”
काजी तौकीर के बारे में बता दें कि साल 2005 में कश्मीर के इस सिंगर को देशभर में पहचान मिली थी। उन्होंने रूपरेखा बनर्जी के साथ रियलिटी सिंगिंग शो ‘फेम गुरुकुल’ जीता था। इस जीत के बाद वो टीवी के मशहूर चेहरों में शामिल हो गए। इसी शो में अरिजीत सिंह भी कंटेस्टेंट के तौर पर नजर आए थे। ‘फेम गुरुकुल’ के बाद काजी तौकीर ने एक्टिंग और म्यूजिक इंडस्ट्री में भी काम किया। सैफ अली खान और कैटरीना कैफ स्टारर फिल्म ‘फैंटम’ के चर्चित गाने ‘अफगान जलेबी’ को काजी ने ही गया है।