Tuesday, September 15, 2026
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NATIONAL : पांच साल में 27 हजार सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट 936 बढ़ गए

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देश में बीते पांच सालों में सरकारी स्कूल कम हुए हैं और प्राइवेट स्कूल बढ़े हैं। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी भी घटे हैं, लेकिन शिक्षकों की संख्या बढ़ी है। ये आंकड़े सरकार के हैं। ये आंकड़े शिक्षा की कैसी तस्वीर दिखाते हैं, डालते हैं एक नजर:

देश में कुल 14.67 लाख स्कूल हैं। इनमें से सरकारी स्कूलों की संख्या 10.05 लाख है। पढ़ने वाले कुल बच्चे 24.72 करोड़ हैं, लेकिन इनमें से लगभग आधे बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। शिक्षकों की कुल संख्या 1.02 करोड़ है। यानि शिक्षक और बच्चों का अनुपात 1:24 का है। पांच साल में सरकारी स्कूलों की संख्या 26804 कम हो गई, जबकि इस बीच प्राइवेट स्कूल 936 बढ़ गए। बीते पांच सालों में शिक्षा जगत की तस्वीर कैसे बदली है, इसे इस टेबल में दिए आंकड़ों से समझा जा सकता है।

विवरण UDISE+ रिपोर्ट 2025-26 UDISE+ रिपोर्ट 2020-21
बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट स्कूलों की संख्या 3,41,689 3,40,753
बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 9,88,63,908 9,51,57,082
बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 41,07,232 36,47,674
सरकारी स्कूलों की संख्या 10,05,245 10,32,049
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 11,89,03,585 13,49,04,560
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 51,34,623 49,27,099


शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ रिपोर्ट (2025-26) के मुताबिक देश में बिना सरकारी मदद के चलने वाले प्राइवेट स्कूलों की संख्या 341689 है। इनमें प्री-प्राइमरी से हायर सेकंडरी तक के 98863908 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या 4107232 है।

सरकारी स्कूलों की बात की जाए तो इनकी संख्या 1005245 (केंद्र सरकार के 2194) है। इनमें 5134623 शिक्षक प्री-प्राइमरी से हायर सेकंडरी तक के 118903585 बच्चों को पढ़ाते हैं।

2020-21 की UDISE+ रिपोर्ट के मुताबिक बिना सरकारी मदद के, अपने दम पर चलने वाले प्राइवेट स्कूलों की संख्या 340753 थी। इनमें प्री-प्राइमरी से हायर सेकंडरी तक के 95157082 बच्चे थे। इन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या 3647674 थी। पांच साल पहले प्राइमरी से हायर सेकंडरी तक पढ़ाने वाले सरकारी स्कूलों की संख्या 1032049 थी, जिनमें 4927099 शिक्षक और 134904560 बच्चे थे।

ये आंकड़े UDISE+ के हवाले से हैं। UDISE+ या Unified District Information System for Education Plus स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग (DoSE&L) द्वारा सूकली शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी सभी जानकारी जुटाने और व्यवस्थित करने के लिए शुरू किया गया प्लैटफ़ार्म है।

सरकारी स्कूलों में 20 साल में करीब 20 प्रतिशत कम हुए बच्चे
कुछ साल पहले ‘स्टेट ऑफ द सेक्टर रिपोर्ट: प्राइवेट स्कूल्स इन इंडिया’ नाम से आई सेंटर स्क्वायर फ़ाउंडेशन की एक रिपोर्ट में Omidyar Network India की मैनेजिंग डाइरेक्टर रूपा कुदवा ने लिखा था कि केवल 20 वर्षों में भारत में सरकारी स्कूलों में जाने वाले बच्चों की संख्या 71 से गिर कर 52 प्रतिशत रह गई। उनका यह भी कहना था कि इनमें से करीब 40 फीसदी बच्चे कम आय वर्ग के हैं। यह आंकड़ा सीधे तौर पर सरकारी स्कूलों में लोगों के कम होते भरोसे को दिखाता है।

निजी स्कूलों को केवल एक फ़र्म ने दस साल में दिया 4200 करोड़ का लोन
निजी स्कूल खोलना देश में एक बड़ा कारोबार बनता जा रहा है। इनकी फीस सरकारी स्कूलों की तुलना में कई गुणा ज्यादा होती है, फिर भी मां-बाप अपने बच्चों के लिए इन्हीं को तरजीह देते हैं। 2013 में साउथ कैलिफोर्निया के स्टीव हार्डग्रेव ने अपने पुराने सहयोगी बजेश मिश्रा के साथ मिल कर वर्तना फ़ाइनेंस के नाम से बेंगलुरु में एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफ़सी) की शुरुआत की थी। इस फर्म का मकसद निजी स्कूल खोलने के लिए कर्ज उपलब्ध करवाना है। 2024 में हार्डग्रेव के हवाले से ‘द हिन्दू’ ने बताया था कि उनकी कंपनी भारत के 15 राज्यों में 13000 स्कूलों को 4200 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दे चुकी थी। इनमें से 90 फीसदी स्कूल छोटे (टियर 2 और 3) शहरों में हैं। तब इनकी सालाना फीस 50000 रुपये से कम हुआ करती थी। निजी सेक्टर में ऐसे स्कूलों को ‘किफायती’ माना जाता है। जबकि, सरकारी स्कूलों की सालाना फीस दस हजार रुपये भी नहीं होती।

सरकारी स्कूलों में शिक्षक बढ्ने और बच्चों के घटने से छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-teacher ratio या PTR) में सुधार जरूर हुआ है। 2018-19 में यह 27 हुआ करता था, जो अब 19 पर आ गया है। मतलब, प्रति शिक्षक छात्रों की औसत संख्या 19 है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में तय मानक के अनुसार यह संख्या 30 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

NATIONAL : रील देखने को लेकर झगड़ा इतना बढ़ा कि उजड़ गया परिवार, बेंगलुरु में पत्नी की हत्या के बाद पति ने भी दी जान

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बेंगलुरु में रील देखने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद के बाद दोनों की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, पति ने पत्नी पर हमला करने के बाद आत्महत्या कर ली। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पति-पत्नी के बीच हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों की जान चली गई। विभूतीपुरा इलाके में 38 साल के ऑटो ड्राइवर राघवेंद्र ने कथित तौर पर अपनी 30 वर्षीय पत्नी श्रुति राघवेंद्र पर हमला कर दिया। इसके बाद उसने भी अपनी जान दे दी। बेंगलुरु पुलिस की शुरुआती जांच में मोबाइल पर रील देखने को लेकर विवाद की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस अभी इसे घटना की पक्की वजह नहीं मान रही है।

रील देखने को लेकर हुई थी बहस
यह घटना मंगलवार देर रात HAL थाना क्षेत्र के विभूतीपुरा इलाके में हुई। पुलिस के मुताबिक, राघवेंद्र और श्रुति के बीच मोबाइल फोन पर रील देखने को लेकर पहले भी बहस होती थी। मंगलवार रात भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि विवाद बढ़ने के बाद राघवेंद्र ने कथित तौर पर बीयर की बोतल से श्रुति पर हमला किया और फिर उस पर धारदार चीज से वार किया। श्रुति की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद राघवेंद्र ने घर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

घटना के समय घर में पति-पत्नी के अलावा कोई और नहीं था। दोनों के दो बच्चे हैं। घटना के वक्त बच्चे दावणगेरे में अपने नाना-नानी के पास रह रहे थे। इस वजह से वे घटना के समय घर पर मौजूद नहीं थे।

राघवेंद्र और श्रुति एक-दूसरे को करीब 18 साल से जानते थे। बताया जाता है कि दोनों की मुलाकात पढ़ाई के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ता बना और बाद में परिवार की सहमति से दोनों ने शादी कर ली।

शादी के बाद दोनों दावणगेरे से बेंगलुरु आ गए थे। उन्होंने विभूतीपुरा में अपना घर भी खरीदा था। श्रुति एक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में काम करती थी, जबकि राघवेंद्र ऑटो चलाता था।

पुलिस खंगाल रही पूरी कहानी
घटना की जानकारी मिलने के बाद HAL पुलिस मौके पर पहुंची और घर की जांच की। दोनों शवों को जरूरी कानूनी प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मंगलवार रात दोनों के बीच किस बात को लेकर विवाद शुरू हुआ और कुछ ही समय में मामला इतना गंभीर कैसे हो गया। घर से जुड़े हालात और दूसरी जानकारी भी जांच का हिस्सा हैं।

पुलिस का कहना है कि रील देखने को लेकर विवाद घटना की शुरुआती वजह हो सकती है, लेकिन अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के पीछे असल वजह क्या थी।

ENTERTAINMENT : 500 करोड़ में बनी ‘टॉक्सिक’ के फ्लॉप होने पर यश का पहला बयान, डबिंग सुपरवाइजर ने सुनाया फोन कॉल का किस्सा

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सुपरस्टार यश की 500 करोड़ी फिल्म ‘टॉक्सिक’ के बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। डबिंग सुपरवाइजर जयदेव मोहन ने बताया कि वह यश का दर्द साफ समझ पा रहे थे।

पैन-इंडिया सुपरस्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ अगस्त के महीने में भारी-भरकम बजट और जबरदस्त हाइप के बीच सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। हालांकि, रिलीज के बाद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। 500 करोड़ के भारी भरकम बजट में बनी ये फिल्म थिएटर में दर्शकों के लिए तरस गई। अब इसके फ्लॉप होने पर यश ने क्या रिएक्शन दिया वो सामने आ गया है। जो खुद फिल्म के डबिंग सुपरवाइजर जयदेव मोहन ने बताया है।

टॉक्सिक के फ्लॉप पर क्या बोले यश?
जयदेव मोहन ने प्रजावाणी के यूट्यूब चैनल संग खास बातचीत की। इंटरव्यू में जयदेव मोहन ने फिल्म टॉक्सिक के फ्लॉप होने पर बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म की असफलता के बाद उनकी यश से फोन पर दो बार बात हुई थी। यश वैसे तो हिम्मत वाले हैं लेकिन उनका दर्द में समझ सकता हूं।

जयदेव ने बात करते हुए कहा, “रिलीज के दिन नेगेटिव रिव्यू देखकर मैं काफी भावुक हो गया था। तभी मुझे यश सर का फोन आया। उन्होंने मुझसे कहा- ‘ज्यादा चिंता मत करो। इसे दर्शकों पर छोड़ देते हैं। यह उनकी इच्छा है। अभी आगे बहुत काम करना बाकी है। वह बेहद शांत थे, लेकिन मैं उनके अंदर के दर्द को साफ महसूस कर सकता था।”

जयदेव ने आगे कहा कि किसी फिल्म को बनाने में सालों की मेहनत लगती है, लेकिन आखिर दर्शक ही ‘महाप्रभु’ हैं। अगर उन्हें फिल्म पसंद नहीं आई तो स्वीकार करना पड़ता है। आप यह बहाना नहीं बना सकते कि फिल्म अच्छी थी लेकिन दर्शकों को समझ नहीं आई। जयदेव ने यह भी दावा किया कि रिलीज के बाद से अब तक फिल्म के 3 लाख से अधिक पायरेसी लिंक हटाए जा चुके हैं।

500 करोड़ के बजट में बनी है टॉक्सिक
गीतु मोहनदास द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद सह-लेखन का श्रेय खुद यश को भी दिया गया था। KVN प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के बैनर तले लगभग 500 करोड़ से अधिक के बजट में बनी इस फिल्म में कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों ने अहम भूमिका निभाई है।

Sacnilk के आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म ने भारत में 247.25 करोड़ का नेट कलेक्शन किया, जबकि दुनिया भर में इसका ग्रॉस कलेक्शन 338.50 करोड़ के आसपास ही सिमट गया। 500 करोड़ के बजट के मुकाबले यह कमाई काफी कम मानी जा रही है।

यश के पास है ‘डिफेंस मैकेनिज्म’
जयदेव से आगे जब पूछा गया कि क्या इंडस्ट्री में कुछ लोग यश के स्टारडम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि यश के पास अपना एक मजबूत डिफेंस मैकेनिज्म तैयार है। उन्हें इतनी आसानी से पछाड़ा नहीं जा सकता और वह जल्द ही नए और धमाकेदार प्रोजेक्ट के साथ वापसी करेंगे।

NATIONAL : कोटा में 3 साल की मासूम बच्ची से गलत हरकत का मामला, स्कूल स्टॉफ के लिए गए DNA सैंपल

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कोटा में तीन साल की मासूम से गलत हरकत का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। तबीयत बिगड़ने पर परिजन जब बच्ची को डॉक्टर के पास ले गए तो नाजुक अंग में सूजन और दर्द देखकर चिकित्सक ने गलत हरकत की आशंका जताई।

कोटा जिले में तीन साल की मासूम बालिका से गलत हरकत का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बालिका की कम उम्र के कारण वह घटना के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ बता नहीं पा रही है। पुलिस अब मेडिकल जांच, डीएनए सैंपल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

डॉक्टर की जांच में सामने आया मामला
मामला उस समय सामने आया, जब तबीयत खराब होने पर परिजन मासूम को बाल रोग विशेषज्ञ के पास इलाज के लिए लेकर पहुंचे। जांच के दौरान डॉक्टर को बालिका के कमर के नजदीक और नाजुक अंग में दर्द-सूजन जैसी समस्या दिखाई दी। चिकित्सक ने गलत हरकत की आशंका जताते हुए परिजनों को इसकी जानकारी दी। डॉक्टर की बात सुनकर परिजन घबरा गए और उन्होंने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

NATIONAL : गौरव भाटिया के मानहानि केस के बाद आशुतोष रांका का पलटवार, बोले- PM CARES Fund से ले लीजिए पैसे

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गौरव भाटिया की ओर से CJP नेताओं के खिलाफ 2 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दर्ज कराने के बाद विवाद और गरमा गया है। CJP नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए PM CARES Fund को लेकर भाटिया पर तंज कसा।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ 2 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दर्ज कराने के बाद सियासी तकरार और तेज हो गई है। मामले में CJP नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भाटिया पर तंज कसा है। रांका ने एक्स पर लिखा कि पीएम केयर्स फंड से ही ले लीजिए, हमें वहीं से पैसा आ रहा है। रांका की यह टिप्पणी गौरव भाटिया की ओर से मानहानि की कानूनी कार्रवाई किए जाने के बाद सामने आई है।

AI से फर्जी ग्राफिक बनाने का आरोप
विवाद की शुरुआत CJP के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से एक्स पर एक कथित फर्जी ग्राफिक साझा किए जाने से हुई। भाटिया का आरोप है कि ग्राफिक में एक मीडिया संस्थान के नाम और उनकी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए उनके नाम से फर्जी बयान प्रसारित किया गया। इस कथित पोस्ट में स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी भाटिया के हवाले से लिखी गई थी। भाटिया ने इसे फर्जी और AI की मदद से तैयार किया गया ग्राफिक बताया था।

24 घंटे का दिया था अल्टीमेटम
पोस्ट सामने आने के बाद भाटिया ने सौरव दास को इसे हटाने और बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। दास ने पोस्ट हटा दी, लेकिन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी। इसके बाद भाटिया ने सौरव दास, अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका के खिलाफ 2 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दायर किया।

भाटिया बोले- सोशल मीडिया ट्रायल नहीं, कानून से होगा फैसला
कानूनी कार्रवाई के बाद गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया पर कहा कि अब मामला सोशल मीडिया बहस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अदालत में तथ्य और सबूत के आधार पर तय होगा। उन्होंने कहा कि जब आरोप अपनी सीमा लांघते हैं तो कानून अपनी लकीर खींचता है। भाटिया ने यह भी कहा कि अदालत में ठोस दलीलें रखी जाएंगी और कानून के जरिए झूठ का जवाब दिया जाएगा।

BUSINESS : दिवाली-छठ पर घर जाना पड़ेगा महंगा: ट्रेनें हुईं पैक, हवाई किराया आसमान पर; जानें इन शहरों का भाड़ा

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दिवाली और छठ में दिल्ली, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से लोग बड़ी संख्या में यूपी और बिहार के लिए सफर करेंगे। लेकिन त्योहारों का सीजन शुरू होते ही यात्रियों के लिए यात्रा करना बड़ी चुनौती बन गया है। नियमित ट्रेनों में टिकट कई हफ्ते पहले ही फुल हो गई है। जबकि फ्लाइट की टिकट की कीमतें आसमान छू रही हैं।

देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो चुकी है। दो अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को दिवाली और 28 अक्टूबर को छठ पूजा होगी। ऐसे में बड़ी संख्या में कामकाजी लोग इन पर्वों को मनाने के लिए अपने घर जाएंगे। खासतौर पर दिवाली और छठ में दिल्ली, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से लोग बड़ी संख्या में यूपी और बिहार के लिए सफर करेंगे। लेकिन त्योहारों का सीजन शुरू होते ही यात्रियों के लिए यात्रा करना बड़ी चुनौती बन गया है। नियमित ट्रेनों में टिकट कई हफ्ते पहले ही फुल हो गई है। जबकि फ्लाइट का किराया भी आसमान पर पहुंच गया है।

दीपावली और छठ के समय देश के अलग-अलग हिस्सों से बिहार के पटना पहुंचने का फ्लाइट टिकट 22 हजार रुपये को पार कर गया है। इंडिगो एयरलाइन दिवाली से पहले के शनिवार-रविवार यानी 18-19 अक्टूबर के लिए मुंबई से पटना के फ्लाइट टिकट का 28,000 रुपये दाम ले रही है। वहीं, छठ के बाद पटना से बेंगलुरु जाने का फ्लाइट टिकट करीब 35,000 रुपये पर पहुंच गया है। दिल्ली से पटना और मुंबई से पटना के फ्लाइट टिकट के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। दिवाली और छठ के दौरान मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और बेंगलुरु से बिहार आने-जाने वाली नियमित ट्रेनों में ही नहीं, बल्कि पूजा स्पेशल ट्रेनों में भी सीट नहीं मिल रही है।

इसके अलावा दिल्ली से कोलकाता रूट पर भी किराया बढ़ गया है। पिछले साल किराया 5200 रुपये था, जबकि इस बार 80 प्रतिशत बढ़कर करीब 9350 रुपये हो गया है। जबकि मुंबई-देहरादून रूट पर फेयर बढ़ा हुआ है। 7200 रुपये से बढ़कर 94 प्रतिशत ज्यादा, यानी लगभग दोगुना 14000 रुपये तक हो गया है। मुंबई-दिल्ली रूट पर भी किराया बढ़ाकर 9500 से 12 हजार रुपये तक पहुंच गया है। जबकि मुंबई-जयपुर रूट पर किराया 6500 से बढ़कर 10500 से 1200 हजार रुपए तक पहुंच गया है। इसके अलावा बेंगलुरु से कोलकाता रूट पर किराया 6320 रुपये से बढ़कर 9495 से 12 हजार रुपये तक हो गया है। जबकि चेन्नई-कोलकाता रूट पर अभी से 5600 रुपये से 7800 से 10 हजार रुपए तक किराया हो गया है। हैदराबाद-दिल्ली रूट पर किराया 7645 से 10 हजार रुपए तक गया है। दिल्ली से इंदौर के बीच किराया भी बढ़ा हुआ दिख रहा हैं। यह किराया 4 हजार से 8 से 10 हजार तक पहुंच गया है।

सबसे ज्यादा असर दरभंगा से मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु हवाई मार्ग पर दिखाई दे रहा है। मुंबई से दरभंगा आने के लिए 26 और 27 अक्टूबर को स्पाइसजेट कंपनी के दोनों विमान में सीटें फुल हो गई है। जबकि 26 से 28 अक्टूबर को दरभंगा और बेंगलुरु हवाई मार्ग पर सभी सीटें फुल हैं। 20 से 28 अक्टूबर के बीच मुंबई से आने वाले यात्रियों को स्पाइसजेट कंपनी के विमान में एक टिकट खरीदने पर 12,709 से लेकर 34,445 रुपए लिया जा रहा है। वहीं, दिल्ली से दरभंगा आने पर स्पाइसजेट की फ्लाइट में एक टिकट खरीदने पर छह हजार से 22,265 रुपये के बीच देना पड़ रहा है। इंडिगो में एक टिकट की कीमत छह से 15 हजार के बीच है। अकासा में एक टिकट छह हजार से 18,620 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। वापसी के लिए स्पाइसजेट में एक टिकट खरीदने पर 5,013 से 21,025 रुपये लग रहा है। इंडिगो में 5,382 से 17,951 रुपये है। अकासा में 4,800 से 17,747 रुपये लग रहा है। बेंगलुरु से दरभंगा आने वाले यात्रियों से स्पाइसजेट में एक टिकट की कीमत 20,678 से 25,718 रुपये है। वापसी के एक टिकट पर 6,969 रुपये लग रहा है।

इस तरह से किराया बढ़ोतरी है एयरलाइन कंपनियां
अमर उजाला डिजिटल से चर्चा में ट्रेवल कंसल्टेंट मुकेश ठाकुर बताते है कि, आमतौर पर हर फेस्टिव सीजन और लंबी छुट्टियों के दिनों में यात्री यह शिकायत करते हुए नजर आते है कि एयरलाइन कंपनी मनमाने दाम एयर टिकट के लिए वसूल करती है। आम यात्रियों की यह पीड़ा बहुत जायज है। क्योंकि एयरलाइन कंपनियां डिमांड और सप्लाई के फार्मूले को ध्यान में रखते हुए टिकट बढ़ोतरी करती है। लेकिन बढ़ोतरी कितनी होगी इसका कोई फिक्स पैमाना भी नहीं है। कई बार ये बढोत्तरी 200 प्रतिशत तक देखी गई है। 90 के दशक में केवल बिजनेस क्लास और इकोनॉमी क्लास दो तरह के फेयर होते थे। लेकिन जैसे जैसे एयरलाइन कंपनियों में प्रतिस्पर्धा शुरू हुई। हर बड़े छोटे शहरों से फ्लाइट शुरू हुई तो किराए को भी कई श्रेणियों में बांट दिया गया है। बिजनेस,इकोनॉमी क्लास के अलावा आज इकोनॉमी श्रेणी में प्रीमियम क्लास और पॉइंट टू पॉइंट फेयर और अपेक्स फेयर शामिल होते है। एयरलाइन कंपनियों के फेयर में कई तरह के फैक्टर काम करते है। इनमें रिफंड पॉलिसी के अलावा यात्री ने सफर से कितने दिन पहले टिकट बुकिंग की है। इसके अलावा किराए पर छूट में कुछ विशेष कूपन भी शामिल होते है।

ठाकुर बताते है कि, यात्री किराए को लेकर सभी एयरलाइन कंपनियां एक इकोसिस्टम बना हुआ है। हर शहरों को देखते हुए अलग अलग किराया तय किया गया है। इनमें कंपनियां डिमांड-सप्लाई के अलावा मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किराया तय करती है। हालांकि भारत सरकार की डीजीसीए और सीसीआई एयरलाइन कंपनियों के फेयर पर नजर रखने का काम करती है। लेकिन इन दोनों का कोई सीधा कंट्रोल तय नहीं होता है। क्योंकि 1994 में आए नियमों के मुताबिक सभी एयरलाइंस कंपनियों को किराए तय करने की छूट प्रदान की गई है। फेस्टिव सीजन और छुट्टियों के दिनों में हवाई किराया कहां जाकर रुकेगा इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।

उड्डयन मंत्री ने बताई थी किराए महंगे होने की ये वजह
देश में हवाई किराए के महंगे होने का मुद्दा संसद में भी जोर शोर के साथ उठा था। इसके बाद केंद्र सरकार ने देश में बढ़ते हवाई किराए पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर वैट कम करने के लिए सभी राज्यों को पत्र लिखा है। नागरिक उड्डयन मंत्री के.राममोहन नायडू ने संसद में एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि,हवाई किराए का 45 प्रतिशत हिस्सा एटीएफ की लागत से प्रभावित होता है। हवाई किराया मांग पर आधारित और गतिशील होता है। सरकार टिकटों की कीमतें तय नहीं करती, लेकिन एटीएफ पर ऊंचा वैट किराए में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण है। केंद्र ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संपर्क कर एटीएफ पर वैट कम करने का आग्रह किया है। अगर राज्य सरकारें इस दिशा में सहयोग करें, तो हवाई किराए को यात्रियों की पहुंच में लाया जा सकता है।

NATIONAL : गुवाहाटी में पत्नी का सिर काटकर फ्रिज में रखा

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असम के गुवाहाटी स्थित हाटीगांव इलाके स्थित बसिष्ठपुर बाइलेन में एक 25 वर्षीय महिला की नृशंस हत्या का रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। मृतका की पहचान नूनमती निवासी रिया तालुकदार के रूप में हुई है, जो फैंसी बाजार के एक बुटीक में काम करती थी। पुलिस को आशंका है कि उसके पति रामानुजन गोस्वामी ने ही इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है। घटना के बाद से आरोपी फरार है।

हत्या का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार को पड़ोसियों को बंद मकान से तेज दुर्गंध आने लगी और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम जब घर के अंदर दाखिल हुई तो नजारा देखकर दंग रह गई। महिला की हत्या बेहद बेरहमी से की गई थी। हत्यारे ने शव से सिर काटकर उसे काले पॉलीथीन में लपेटकर फ्रिज के भीतर छिपा रखा था। इसके अलावा मृतका की उंगलियां भी कटी हुई पाई गईं।

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, वारदात शव बरामद होने से करीब 24 से 48 घंटे पहले की गई होगी। परिजनों व पड़ोसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार को पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद रामानुजन रात करीब 8 बजे घर से निकल गया था। रिया के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है और परिवार में उसका केवल एक भाई है।

हाटीगांव थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेज दिया है। पुलिस मामले के हर संभावित पहलू और हत्या के कारणों की गहराई से जांच कर रही है। आरोपी पति की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे के अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

NATIONAL : ‘Dr’, ‘Prof’ की तरह टीचर्स लगा सकते हैं नाम के आगे ‘Tr’ टाइटल, इस राज्य में नई परंपरा का आदेश जारी

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शिक्षकों के सम्मान में कर्नाटक सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने शिक्षकों को अपने नाम के आगे ‘Tr’ लगाने की छूट दे दी है। जैसे डॉक्टर्स अपने नाम के आगे ‘Dr’ और प्रोफेसर ‘Prof’ लिखते हैं, वैसे ही राज्य के टीचर्स अपने नाम के आगे ‘Tr’ लगा सकते हैं।

भारत में शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों का सम्मान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशभर के 48 शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (Natinal Teacher Award 2026) से सम्मानित किया गया। लेकिन कर्नाटक सरकार ने शिक्षकों के सम्मान में नई परंपरा शुरू करने का फैसला लिया है।

सीएम ने कहा कि जिस भी व्यक्ति ने देश का निर्माण किया, उसके पीछे कोई न कोई ऐसा व्यक्ति जरूर था जिसने उसे गढ़ा और वे शिक्षक ही हैं। भारत में एक करोड़ से ज्यादा शिक्षक, जिनमें कर्नाटक के लगभग 4.5 लाख शिक्षक शामिल हैं, रोज बच्चों को पढ़ाते हैं। वे बच्चों के मन, व्यक्तित्व और भविष्य को संवारते हैं। चाहे वे बीमारियां ठीक करने वाले डॉक्टर हों, सर्जरी करने वाले सर्जन हों, या सेवाएं देने वाले लोग हों, चाहे अधिकारी हों, इनोवेशन लाने वाले उद्यमी हों या समाज का नेतृत्व करने वाले नेता, हर किसी के पीछे किसी शिक्षक की कड़ी मेहनत होती है।

BUSINESS : LPG सिलेंडर नियम में बदलाव, ग्रामीण इलाकों में 45 दिन में मिलेगा सिलेंडर, सरकार ने लिया फैसला

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LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत में LPG सिलेंडर से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया गया है। सरकार की ओर से ग्रामीण इलाकों में सिलेंडर रिफिल करने का समय बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। पहले ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता 25 दिन के भीतर ही अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे।

LPG Crisis: एलपीजी सिलेंडर को लेकर ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। अब गांवों में एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग का समय बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। पहले ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता 25 दिन के भीतर ही अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे। मिली जानकारी के मुताबिक यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि सिलेंडर की अनावश्यक जल्दबाजी में बुकिंग को रोका जा सके और सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके। हाल के दिनों में कई जगहों पर अफवाहों के कारण लोग जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक करा रहे थे।

सूत्रों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में औसतन एक परिवार साल में करीब पांच एलपीजी सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है। ऐसे में बार-बार जल्दी बुकिंग की जरूरत नहीं होती है। इसी वजह से बुकिंग के बीच का समय बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। हालांकि शहरी इलाकों में नियम पहले जैसा ही रहेगा। शहरों में उपभोक्ता अभी भी 25 दिन के अंदर अगला सिलेंडर बुक कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से सिलेंडर की सप्लाई बेहतर तरीके से संतुलित रहेगी और अफवाहों की वजह से होने वाली अतिरिक्त बुकिंग पर भी रोक लगेगी।

15 दिन में लोग बुक करा रहे थे सिलेंडर
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से यह फैसला लिया गया है। कहा जा रहा है कि घरेलू गैस के लिए लोग सिर्फ 15 दिनों के अंतराल के बाद एलपीजी सिलेंडर बुक करा रहे थे। वहीं यह बुकिंग करीब 55 दिनों का होता था। यह बात सामने आई कि जो लोग पहले 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, वो अब 15 दिनों में सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिए। कुल मिलाकर, ग्रामीण इलाकों के लिए किया गया यह बदलाव एलपीजी सप्लाई को स्थिर रखने और घबराहट में होने वाली बुकिंग को रोकने के मकसद से लागू किया गया है।

होटल-रेस्टोरेंट को कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies – OMCs) ने साफ निर्देश दिए हैं कि कमर्शियल गैस सिलेंडर सिर्फ अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों को ही दिए जाएंगे। होटल, ढाबों और रेस्तरां के लिए सप्लाई पूरी तरह रोक दी जाए। दिल्ली-एनसीआर में करीब पांच लाख से अधिक कमर्शियल एलपीजी कनेक्शन हैं, जिनमें से तीन लाख से ज्यादा सिर्फ दिल्ली में हैं। एलपीजी गैस डीलर एसोसिएशन का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई में कमी देखी जा रही है। नॉन-डोमेस्टिक सिलेंडर (कमर्शियल) सिर्फ़ हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड शामिल हैं।

सिलेंडर की लोडिंग-बिलिंग लगी रोक
कमर्शियल सिलेंडरों की लोडिंग और बिलिंग पर भी रोक दी गई है। जब तक LPG की नई खेप आने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक सप्लाई शुरू नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल बॉटलिंग प्लांट्स में मौजूद LPG स्टॉक घरेलू सिलेंडरों की भराई के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। कमर्शियल सिलेंडर केवल आपात सेवाओं जैसे अस्पतालों के लिए सीमित रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे।

WhatsApp से बुक करें गैस सिलेंडर
आप WhatsApp से भी सिलेंडर बुकिंग कराने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी गैस कंपनी से उनके WhatsApp पर संपर्क करना होगा। इसके लिए:

Indane के ग्राहक अपने रजिस्टर्ड नंबर से 7588888824 पर ‘REFILL’ लिखकर मैसेज कर सकते हैं।
वहीं HP Gas के ग्राहक 9222201122 पर ‘Hi’ या ‘Book’ लिखकर मैसेज कर सकते हैं।
Bharat Gas के ग्राहक 1800224344 पर ‘Hi’ या ‘Book’ लिखकर मैसेज कर सकते हैं।
मिस्ड कॉल से बुक करें गैस सिलेंडर
आप अपनी गैस कंपनी के नंबर पर मिस कॉल देकर भी सिलेंडर बुक कर सकते हैं। ध्यान रहे कि कॉल रजिस्टर्ड नंबर से ही करें। इसके लिए:

Indane के ग्राहक 8454955555 पर एक मिस्ड कॉल दें।
HP Gas के ग्राहक 9493602222 पर मिस्ड कॉल दें।
SMS से बुक करें गैस सिलेंडर
आप SMS भेजकर भी सिलेंडर बुक कर सकते हैं। इसके लिए Indane के ग्राहक 7718955555 पर ‘REFILL’ लिखकर SMS भेज सकते हैं। वहीं Bharat Gas के ग्राहक 7715012345 या 7718012345 पर ‘LPG’ लिखकर SMS कर सकते हैं। ध्यान रखें कि यह SMS आपको अपने रजिस्टर्ड नंबर से करना होगा।

सिलेंडर न मिले तो यहां करें शिकायत
अगर सिलेंडर बुक होने के बाद भी डिलीवर न हो, तो आप कई तरीकों से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आप टोल फ्री नंबर पर कॉल कर सकते हैं। Indane Gas के ग्राहक 1800-2333-555 पर, Bharat Gas के ग्राहक 1800-22-4344 पर और HP Gas के ग्राहक 1800-2333-555 पर कॉल कर सकते हैं।

इसके अलावा आप अपनी गैस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए Indane के ग्राहक iocl.com पर जाकर ‘Feedback’ सेक्शन में अपनी बात लिख सकते हैं। वहीं HP Gas के ग्राहक myhpgas.in पर ‘Grievance Redressal’ का ऑप्शन चुन सकते हैं। इसके अलावा Bharat Gas के ग्राहक my.ebharatgas.com पर ‘Feedback/Complaint’ लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
सरकारी ऐप UMANG के जरिए भी अपनी गैस कंपनी चुनकर डिलीवरी न होने की शिकायत कर सकते हैं। यहां आपको शिकायत का एक रेफरेंस नंबर भी मिलता है, जिससे आप शिकायत के स्टेटस को भी ट्रैक कर सकते हैं। इन तमाम तरीकों के अलावा आप X या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी गैस कंपनी को टैग कर शिकायत को पोस्ट भी कर सकते हैं।

NATIONAL : निकाय चुनाव के लिए मुख्यमंत्री का रोड शो करना भाजपा सरकार की विफलता का प्रमाण: गहलोत

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जयपुर, छह सितंबर (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो कोई उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की ‘सबसे बड़ी विफलता’ को दर्शाते हैं।

गहलोत ने कहा कि उनकी जानकारी में यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका चुनावों के लिए रोड शो कर रहा है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, “मुख्यमंत्री को रोड शो करने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा? यह उनके लिए कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी विफलता है।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ढाई साल के कार्यकाल के बाद सरकार को जनता की नाराजगी की चिंता सताने लगी है और रोड शो इसी का संकेत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि टूटी सड़कों और खराब सीवरेज व्यवस्था के कारण शहरों की स्थिति खराब है तथा कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है।

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने ‘प्रशासन शहरों के संग’ अभियान चलाया था, जिसका लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था और इस अभियान के तहत 12 लाख पट्टे वितरित किए गए थे।

उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल किया कि करीब तीन साल के कार्यकाल में उसने कितने पट्टे वितरित किए हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि ‘शायद एक लाख भी पट्टे नहीं’ दिए गए हैं।

गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा के मंत्री और दिल्ली, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के वरिष्ठ नेता राजस्थान आ रहे हैं क्योंकि पार्टी को जनता की नाराजगी का एहसास हो गया है।

उन्होंने मतदाताओं से ‘गुमराह नहीं होने’ और स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को हराने की अपील की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार ने ‘सारी हदें पार कर दी हैं’।

उन्होंने कहा कि चुनाव में भाजपा को झटका मिलने से सरकार को सड़कें सुधारने, पट्टे वितरित करने और विकास कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। गहलोत ने निकाय चुनाव के नतीजों को अगले विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा की हार से उसे यह संदेश मिलेगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी उसका ‘खेल खत्म’ है।

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