Tuesday, June 30, 2026
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NATIONAL : रात में ब्रेजा कार से आए चोर, 5 बकरे लेकर हो गए फरार, घटना CCTV में कैद

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चोरों ने फिल्मी अंदाज में ब्रेजा कार से धावा बोला और लाखों रुपये के बकरे चुराकर फरार हो गए. यह पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई.यूपी के बागपत में बकरीद से ठीक पहले चोरी का एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसे देखकर हर कोई हैरान है. दरअसल, चोरों ने फिल्मी अंदाज में ब्रेजा कार से धावा बोला और लाखों रुपये के बकरे चुराकर फरार हो गए. यह पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

वीडियो में चोरों की बेखौफ हरकत और चोरी का तरीका देखकर लोग दंग हैं. वहीं, बागपत पुलिस जांच-पड़ताल कर कार्रवाई का भरोसा दे रही है. जबकि, कुछ लोग सुरक्षा-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं. चोरी गए बकरों की कीमत लगभग दो लाख रुपये के करीब बताई जा रही है.

सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कैसे रात के सन्नाटे में ब्रेजा कार आकर एक घर के बाहर आकर रुकती है. उसमें से उतरे चोर पहले ताला तोड़ते हैं, फिर बकरों को खींचकर गाड़ी में डालते हैं. ये सब इतनी सफाई से किया गया कि किसी को भनक तक नहीं लगी. बकरों को गाड़ी में भरने के बाद चोर मौके से नौ दो ग्यारह हो जाते हैं.

फिलहाल, बकरा चोरी का वीडियो वायरल होने के बाद बागपत पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि थाना कोतवाली बागपत में मामले की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की तलाश तेज कर दी है और इलाके में गश्त बढ़ा दी है. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही चोरों को पकड़ लिया जाएगा और उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

NATIONAL : जूता चुराई में दूल्हे की साली का पकड़ा हाथ, हुआ हंगामा तो बिना दुल्हन के लौटी बारात

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कासगंज में एक बारात आई थी. खाने-पीने से लेकर निकाह तक की सारी रस्में अच्छे से पूरी हुईं. जैसे ही जूता चुराई शुरू हुई, मामला बिगड़ गया. दुल्हन की बहन ने दूल्हे से 1000 रुपये मांगे, लेकिन दूल्हे ने सिर्फ 200 रुपये देने की बात कही. इस पर बहस शुरू हो गई. बात तब और बिगड़ गई जब दूल्हे के पिता ने लड़की का हाथ पकड़कर कहा जूता पैरों में पहनाओ, तभी पैसे मिलेंगे.

जहां शादियों में हंसी-मजाक और रस्में रिश्तों को मजबूत करती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में एक हल्की-फुल्की रस्म ने ऐसा तूल पकड़ा कि दूल्हे को दुल्हन के बिना ही लौटना पड़ा. बात शुरू हुई मजाक में, लेकिन देखते ही देखते इतना तनाव बढ़ गया कि पुलिस तक बुलानी पड़ी और पूरी रात पंचायत चलती रही.

मामला कासगंज जिले के थाना राजा का रामपुर क्षेत्र के गांव लुहारी गवी का है. यहां विटोना गांव से एक बारात आई थी. शादी की सभी तैयारियां धूमधाम से हुई थीं. खाने-पीने से लेकर निकाह तक की सारी रस्में अच्छे से पूरी हुईं. शादी में सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जैसे ही जूता चुराई शुरू हुई, मामला बिगड़ गया. इस रस्म में दुल्हन की बहन ने मजाक में दूल्हे से 1000 रुपये मांगे, लेकिन दूल्हे ने सिर्फ 200 रुपये देने की बात कही. इस पर बहस शुरू हो गई. बात उस वक्त और बिगड़ गई जब दूल्हे के पिता शाकिब खान ने लड़की का हाथ पकड़कर कहा जूता पैरों में पहनाओ, तभी पैसे मिलेंगे.

लड़की की मां रिहाना और पिता लाल मुहम्मद ने बताया कि उन्होंने अपनी हैसियत से बढ़कर शादी की और सभी रस्में निभाईं. लेकिन उनकी बेटी को इस तरह सबके सामने अपमानित किया गया, जिससे वे आहत हो गए और विदाई रोक दी. इतना ही नहीं, लड़की पक्ष ने आरोप लगाया कि लड़के की मां ने कहा कि लड़की को डिग्गी में डालकर ले जाएंगे, और दूल्हे की बहन ने कहा कि घर ले जाकर काट देंगे. इन बातों से डरकर हमने बेटी को भेजने से मना कर दिया.

जब बात ज्यादा बिगड़ी, तो पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों में सुलह कराने की कोशिश की. रातभर पंचायत चलती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. दोपहर करीब 2 बजे, दूल्हा और उसके परिवार के लोग बिना दुल्हन के लौट गए. दूल्हे के पिता शाकिब खान ने माना कि उनसे गलती हुई. उन्होंने कहा कि हमने हाथ जोड़ लिए, माफी भी मांगी, लेकिन लड़की वाले एक ही बात पर अड़े रहे कि विदाई नहीं करेंगे. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत और सुलह की कोशिशें चल रही हैं. गांव में लोग इस घटना की चर्चा कर रहे हैं कि एक मामूली सी रस्म ने इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा कर दिया.

UP : शादी घर के गेट पर दूल्हे के भाई से हुई छिनैती, पैसों से भरा बैग लेकर भागा उचक्का…….

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सुल्तानपुर में कोतवाली देहात थाना अंतर्गत उतरी इलाके में स्थित निजी मैरिज लॉन में एक उचक्के ने दूल्हे के भाई से लाख रुपये से भरा बैग छीन लिया. घटना 11 मई दिन सोमवार की रात की बताई जा रही है. जिसका एक सीसीटीवी सोशल मीडिया पर वायरल है.

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में कोतवाली देहात थाना अंतर्गत उतरी इलाके में स्थित निजी मैरिज लॉन में एक उचक्के ने दूल्हे के भाई से लाख रुपये से भरा बैग छीन लिया. घटना 11 मई दिन सोमवार की रात की बताई जा रही है. जिसका एक सीसीटीवी सोशल मीडिया पर वायरल है.

दरसअल, कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में स्थित मैरिज लॉन में पीड़ित नीरज पाण्डेय अपने भाई की बारात लेकर पहुंचे थे.जहां अचानक आया एक उचक्का उनके हाथ से पैसों से भरा बैग लेकर फरार हो गया.ये पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी में कैद हो गयी.पीड़ित नीरज पाण्डेय ने प्रतापगंज चौकी में मामले शिकायत दर्ज कराई है.

नीरज ग्राम कुतुबपुर के रहने वाले हैं. वह अपने भाई की शादी में बारात लेकर उतरी इलाके में स्थित सूर्या मैरिज लॉन आए थे. द्वार पूजा के समय वह मैरिज लॉन के गेट पर खड़े थे. इसी दौरान एक उचक्के ने उनके हाथ से पैसों वाला बैग छीन लिया और प्रयागराज हाइवे की तरफ भाग गया. यह पूरी घटना मैरिज लॉन के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है.

फिलहाल पुलिस इस मामले की पड़ताल में जुट गयी है.आपको बताते चले कि इससे पहले भी जनपद में इसी तरह की एक घटना हुई थी. कुछ दिन पहले ही पूर्व सीएमओ के बेटे की शादी समारोह में चोरों ने कई लाख की ज्वैलरी और नगदी से भरा बैग मैरिज लॉन के भीतर से घुसकर चुरा लिया था. इन घटनाओं से स्पष्ट है कि क्षेत्र में चोरों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और वे अब सीधा शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों को अपना निशाना बना रहे हैं.

NATIONAL : ‘सरेंडर करो, नहीं तो मारे जाआगे…’, नक्सलियों को मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव की सीधी चेतावनी

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CM मोहन यादव ने कहा कि नक्सली आत्मसमर्पण कर दें, नहीं तो उनका सफाया कर दिया जाएगा. जो लोग अन्याय करते हैं, निर्दोषों का खून बहाते हैं और लाल सलाम का नारा लगाते हैं, उन्हें जीने का अधिकार नहीं है. आपको इस धरती पर जीने नहीं दिया जाएगा.

नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में बोलते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि नक्सली आत्मसमर्पण कर दें, नहीं तो उनका सफाया कर दिया जाएगा. प्रदेश की धरती पर नक्सल का खूनी खेल अब नहीं चलेगा.CM यादव ने कहा, “नक्सली आत्मसमर्पण कर दें, नहीं तो उनका सफाया कर दिया जाएगा…जो लोग अन्याय करते हैं, निर्दोषों का खून बहाते हैं और लाल सलाम का नारा लगाते हैं, उन्हें जीने का अधिकार नहीं है. आपको इस धरती पर जीने नहीं दिया जाएगा.”

यादव बालाघाट की लांझी तहसील के रानी अवंतीबाई स्टेडियम में एक समारोह में बोल रहे थे, जहां 64 पुलिसकर्मियों को क्रम पूर्व पदोन्नति दी गई. ये पुलिसकर्मी उस ऑपरेशन में शामिल थे, जिसमें 19 फरवरी को बालाघाट में चार महिला नक्सलियों को मार गिराया गया था.

मुख्यमंत्री ने कहा, “आप हमारे मासूम लोगों के बीच झूठ और गलत सूचना फैलाते हैं. आप कायरतापूर्ण तरीके से काम करते हैं. सरकार ऐसे तत्वों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है.”उन्होंने कहा कि पूर्वी मध्य प्रदेश का बालाघाट कभी देश के 12 सबसे अधिक नक्सल प्रभावित जिलों में से एक था, लेकिन अब यह उस सूची में नहीं आता. सरकार की मंशा और पुलिस के परिश्रम से अब केंद्र सरकार ने बालाघाट को गंभीर समस्या वाली श्रेणी से बाहर कर अन्य श्रेणी में रखा है. बालाघाट में नक्सल गतिविधियों में गिरावट प्रशंसनीय है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में साल 2026 तक देशभर से नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लिया गया है. इसे पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार भी केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है. सीएम यादव ने कहा, “सरकार को हमारे पुलिसकर्मियों द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस पर गर्व है. समाज की सेवा करने वाले अधिकारियों को सलाम.”

पदोन्नत किए गए पुलिसकर्मियों में विशेष नक्सल विरोधी हॉक फोर्स के 62, जिला पुलिस का एक और एमपी पुलिस बल की 36वीं बटालियन का एक पुलिसकर्मी शामिल है. एमपी के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने पुलिसकर्मियों की वर्दी पर सितारे लगाए. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में पुलिस बल में 8500 कर्मियों की भर्ती की जाएगी.

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NATIONAL : राफेल पर फ्रांस के बयान से हिल जाएगा पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर को इन देशों का मिला सपोर्ट

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पाकिस्तानी सेना से लेकर मंत्री और प्रधानमंत्री तक जिस तरह एक के बाद एक झूठ बोल रहे हैं, उसमें उनकी बौखलाहट साफ नजर आ रही है. भारत के साथ 3-4 दिन चली इस तनातनी में पाकिस्तान से सारे देशों ने पल्ला झाड़ लिया, यहां तक की उसका जिगरी दोस्त चीन भी साथ खड़ा नजर नहीं आया. जहां इजरायल, रूस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे बड़े-बड़े मुल्कों ने भारत का साथ दिया तो वहीं अमेरिका और चीन ने भले खुलकर कुछ न कहा हो, लेकिन उनका कोई भी बयान न तो पाकिस्तान के हक में था और न ही भारत के विरोध में.

डच सांसद गीर्ट विलडर्स ने न सिर्फ भारत के पक्ष में बात की. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘आई लव इंडिया, 100 परसेंट कश्मीर भारत का है.’ इसके साथ उन्होंने हैशटैग लिखा- पाकिस्तान बिहाइंड पहलगाम टेरर अटैक यानी पहलगाम आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान है.

इतिहास गवाह है कि रूस हमेशा भारत के साथ एक सच्चे दोस्त की तरह खड़ा नजर आया है और उसने इस बार भी उसने दोस्ती साबित की. पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए लॉन्च किए गए ऑपरेशन सिंदूर का रूस ने भी सपोर्ट किया. ऑपरेशन सिंदूर से एक दिन पहले ही 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात हुई थी. पुतिन ने पहलगाम आतंकी हमले पर बेहद दुख जताया था और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को फुल सपोर्ट की बात कही थी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पहलगाम जैसे जघन्य अपराध के दोषियों और उनके मददगारों को न्याय के कटघरे में लाना चाहिए. वहां के विदेश मंत्री ने भी अपने बयान में कहा था कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है. ये दिखाता है कि रूस भारत के साथ है.

इजरायल ने भी भारत को सिर्फ हथियार नहीं दिए, बल्कि खुलकर भारत के लिए डिप्लोमैटिक स्टैंड भी लिया. हारूप और बराक 8 जैसे इजरायली हथियारों को भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किया, जिससे उसका दम निकल गया. भारत में इजरायली राजदूत रुवेन अजर ने 7 मई को ट्वीट में लिखा, ‘इजरायल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है. आतंकवादियों को पता होना चहिए कि निर्दोषों के खिलाफ जघन्य अपराधों के बाद उनके पास छिपने की कोई जगह नहीं है.’

भारत के साथ खड़े होने वालों में फ्रांस भी है. फ्रांस ने राफेल को लेकर झूठ फैलाने वालों को जवाब दिया और बताया कि उसके पास इसकी कोई जानकारी नहीं है कि कोई राफेल गिराया गया है. उन्होंने कहा कि भारत का ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ है और यह समर्थन के लायक है.

अमेरिका ने भले ही सीधे शब्दों में बयान न दिया हो, लेकिन उसका एक ट्वीट वायरल हो रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट में कहा था कि अमेरिका पाकिस्तान की ढाल नहीं बनेगा. इंटरनेशनल मोनेट्री फंड (IMF) में पाकिस्तान के लिए सिर्फ सिफारिश करने बावजूद अमेरिका का भारत के खिलाफ कोई स्टैंड न लेना. भारत के लिए कूटनीतिक जीत है.

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और ब्रिटिश सांसदों ने भारत के एक्शन को सही ठहराते हुए कहा था कि कोई भी देश आतंकवाद बर्दाश्त नहीं कर सकता है. पाकिस्तानी लॉबी को जवाब देते हुए ब्रिटिश सांसदों ने भारत की कार्रवाई को उचित ठहराया. पाकिस्तान के जिगरी दोस्त चीन की बात करें तो उसने कहा कि वह भारत के हमले को सही नहीं मानता, लेकिन आतंकवाद को भी सपोर्ट नहीं करता. यानी न पाकिस्तान का सपोर्ट किया और न ही भारत की आलोचना की.

WORLD : अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर पर लगा ब्रेक,115 प्रतिशत यूएस ने की टैरिफ में कटौती

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अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर अब खत्म हो चुका है. दोनों देशों ने जेनेवा में दो दिनों की लंबी बैठक के बाद इस समौझते पर मुहर लगाई. दुनिया की दो आर्थिक शक्तियों की तरफ से जारी साझा बयान में बताया गया है कि वर्तमान टैरिफ पर 90 दिनों का ब्रेक लगाया गया है. यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दोनों देशों ने न सिर्फ वर्तमान टैरिफ को रोकने पर सहमति जताई है बल्कि इसे घटाने पर भी सहमति बनी है.

बेसेंट के मुताबिक, दोनों देशों की ओर से एक दूसरे पर लगाए जाने वाले टैरिफ में करीब 115 फीसदी की कटौती की गई है. इन 90 दिनों में चीनी सामानों के ऊपर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 145 प्रतिशत को 30 प्रतिशत किया जाएगा. दूसरी तरफ, चीन भी इसी तरह अमेरिकी सामानों पर टैरिफ को 125 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करेगा.

चीन-अमेरिका में टैरिफ कटौती पर सहमति

बेसेंट ने कहा कि चीन के अधिकारियों के साथ बातचीत को बेहद साकारात्मक बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों ने एक दूसरे को सम्मान दिया है. यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर का कहना है कि ये समझना महत्वपूर्ण है कि हमने कैसे इतनी जल्दी समझौते को अमलीजामा को आखिरी रुप दे दिया. ये इस बात को जाहिर करता है कि हमारे बीच मतभेद शायद बहुत ज्यादा नहीं थे.

उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य लक्ष्य चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना है, जो पिछले साल बढ़कर रिकॉर्ड 263 बिलियन डॉलर हो गया था. ग्रीर ने आगे कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जो चीनी साझेदार के साथ समझौते हुए हैं, उससे उन्हें मदद मिलेगी और राष्ट्रीय आपातकाल से उबरने में मदद मिलेगी.

कम होगा अब तनाव

गौरतलब है कि ट्रंप के टैरिफ के ऐलान और चीन के साथ ट्रेड वॉर की वजह से ग्लोबल मार्केट में एक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी. निवेशकों में भय का माहौल बना हुआ था. वे लगातार निवेश के लिए सबसे मुफीद सोने को मान रहे थे. ऐसे में चीन-अमेरिका के इस व्यापारिक समझौते ने वैश्विक अनिश्चितता पर विराम लगा दिया है.

TECHNOLOGY : अब AI बता रहा दहेज में मिलना चाहिए घर, कार या गोल्ड, क्या है माजरा, जानिए

आज के समय में जब लगभग हर काम ऑनलाइन होने लगा है, ऐसे में अब शादी से जुड़ी एक नई ऑनलाइन सर्विस लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है. इस सर्विस का नाम है DownAI, इसका नाम सुनते ही भले ही आपके जहन में कोई हाईटेक ऐप आ रहा होगा, जो लोगों बताएगा कि लड़के को शादी में कितना दहेज मिलना चाहिए. लेकिन रुकिए… माजरा कुछ और ही है और यह जानकर आप चौंक जाएंगे.

दरअसल, यह सर्विस Shadi.org नाम की वेबसाइट पर शुरू की गई है, जो लोकप्रिय मेट्रिमोनियल साइट Shadi.com की एक पहल है. शुरुआत में यह एक आम ऑनलाइन टूल ही नजर आती है, जिसमें आप अपनी उम्र, नौकरी, तनख्वाह और पढ़ाई जैसी जानकारी भरते हैं और उम्मीद करते हैं कि अगली स्क्रीन पर आपको कोई आंकड़ा मिलेगा जैसे घर, कार या सोना!

लेकिन जैसे ही आप ‘कैल्क्युलेट’ बटन दबाते हैं, आपके सामने जो आता है वो हैरान कर देने वाला सच.

असली मकसद, समाज को झकझोरने वाला मैसेज

जैसे ही आप उम्मीद करते हैं कि आपको बताया जाएगा कि ‘आपकी कीमत कितनी है’, वैसे ही सामने आता है एक मैसेज, जिसमें लिखा होता है पिछले 10 सालों में दहेज के चलते हुई मौतों का आंकड़ा, और उसके नीचे एक और गहरा सवाल, ‘अपनी कीमत जानने से पहले यह सोचिए कि लड़की की जिंदगी की क्या कीमत है?’

ये लाइनें सीधे दिल पर असर करती हैं और इस डिजिटल चालाकी के जरिए ये वेबसाइट एक अहम सामाजिक मुद्दे ‘दहेज प्रथा’ पर लोगों को सोचने पर मजबूर करती है.

AI का नाम लेकर पेश की गई सोशल मुहिम

DownAI नाम पहली नजर में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल जैसा लगता है. खास बात यह है कि ‘दहेज’ को Dowry की जगह DowrAI लिखकर इसे AI सर्विस जैसा रूप दिया गया है. यही चालाकी लोगों को इस प्लेटफॉर्म की ओर खींचती है और फिर जब सच्चाई सामने आती है, तो झटका लगता है ऐसा झटका जो सोचने पर मजबूर करता है.

क्यों है ये पहल खास?

भारत में आज भी दहेज एक बड़ी सामाजिक समस्या है. चाहे कानून बन चुके हों या जागरूकता फैल रही हो, लेकिन इस कुप्रथा की जड़ें आज भी मजबूत हैं. ऐसे में अगर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इस तरह की सोच को चुनौती देने के लिए किया जाए, तो यह वाकई एक काबिल-ए-तारीफ कोशिश है.

NATIONAL : सीएम योगी आदित्यनाथ का आज से दो दिवसीय वाराणसी दौरा

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज से दो दिवसीय वाराणसी दौरे पर रहेंगे. इस दौरान प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करने के अलावा व वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचेंगे. देर शाम सीएम योगी वाराणसी पहुंचने के बाद विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए भी जा सकते हैं. इसके अलावा रात्रि विश्राम करने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अगले दिन वाराणसी से लखनऊ के लिए रवाना होंगे.

जानकारी के अनुसार यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ आज शाम तकरीबन 4:00 बजे वाराणसी पहुंचेंगे. सबसे पहले उनका हेलीकॉप्टर पुलिस लाइन पर पहुंचेगा. इसके बाद वह जनपद के सर्किट हाउस पहुंचेंगे, जहां पर विभागीय व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था व विकास परियोजनाओं को लेकर अहम बैठक करेंगे. इसके बाद वह जनपद में चल रहे अलग-अलग विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पहुंच सकते हैं.

दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे सीएम योगी
देर शाम को सीएम योगी बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी और संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करेंगे. सीएम योगी का ये दो दिवसीय वाराणसी दौरा है. इस दौरान वह वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और श्री काल भैरव मंदिर में भी दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचेंगे. उनके साथ वाराणसी जनपद के विधायक व स्थानीय नेता भी मौजूद रहेंगे.

इसके बाद वह वाराणसी में ही रात्रि विश्राम करने के बाद अगले दिन सुबह लखनऊ के लिए रवाना होंगे. सीएम योगी आगमन को लेकर प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां की गई है. मुख्यमंत्री के रूट पर भारी संख्या मं पुलिस बल को तैनात किया गया है. इसके साथ ही आसपास के इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है. सीएम योगी के दौरे को देखते हुए लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसे देखते हुए ट्रैफिक का भी डायवर्जन किया गया है.

HEALTH : भारत-पाकिस्तान तनाव: डर और सोशल मीडिया से आपकी मेंटल हेल्थ हो रही प्रभावित! ये हैं कारण

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सात साल की हेजल के लिए इस हफ्ते की शुरुआत तक पाकिस्तान सिर्फ एक नाम था. अब दरवाजे पर हर दस्तक के साथ वह सशंकित हो जाती है और किसी आसन्न खतरे के बारे में सोचकर परेशान हो जाती है. अन्नू मैथ्यू को अपनी बेटी हेजल को यह समझाने में मुश्किल हो रही है कि वह केरल के त्रिवेंद्रम में किसी सीधे खतरे की जद में नहीं है.

किस तथ्य पर विश्वास करें और किस पर नहीं?

मैथ्यू ने कहा, ‘‘यह सब तब शुरू हुआ, जब उसके स्कूल में जागरूकता सत्र था और फिर उसने क्लास में अपने दोस्तों से कुछ बातें सुनीं. अब वह चाहती है कि मैं दरवाजा खोलने से पहले सावधान रहूं. वह कहती है कि पाकिस्तान हम पर हमला करेगा और हर कोई मर जाएगा.’’ हेजल अकेली नहीं है. सैकड़ों मील दूर दिल्ली में 36 साल महेंद्र अवस्थी ने कहा कि उन्हें नींद नहीं आती. बच्ची अपने आस-पास की बातचीत से परेशान है, तो युवा सोशल मीडिया का सहारा ले रहे, जिन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि किस तथ्य पर विश्वास करें और किस पर नहीं.

शनिवार शाम को पाकिस्तान और भारत के बीच सैन्य टकराव रोकने पर बनी सहमति के बावजूद लोग सहमे हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव रोकने पर सहमति बन गई है. राहत की यह भावना जल्द ही नयी चिंता में बदल गई, जब पाकिस्तान के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में विस्फोटों और ‘ब्लैकआउट’ के साथ उस समझौते का उल्लंघन करने की खबरें आईं.

तनाव से मेंटल हेल्थ पर पड़ता है बुरा प्रभाव

इसकी शुरुआत छह-सात मई की रात को हुई, जब भारत ने पहलगाम में हुए हमले के प्रतिशोध में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी अड्डों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया. अगले दिनों में, दोनों देशों ने सीमा से लगे प्रमुख शहरों में गोलाबारी की. इन सबका मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है.

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य तनाव, सूचनाओं की बाढ़, तथा झूठी और सच्ची खबरों में अंतर करने में असमर्थता, व्यक्तियों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है.

क्लीनिकल ​​मनोवैज्ञानिक श्वेता शर्मा के मुताबिक, संभावित युद्ध की निरंतर चर्चा लोगों में ‘‘प्रतिकूल आघात’’ प्रतिक्रिया को जन्म दे सकती है, यहां तक ​​कि उन लोगों में भी जो संघर्ष क्षेत्रों से दूर रहते हैं. शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘लगातार मीडिया कवरेज, सोशल मीडिया और भावनात्मक विषय वस्तु मस्तिष्क के तनाव विनियमन तंत्र को प्रभावित कर सकती है. युद्ध से संबंधित भय अक्सर अनिश्चितता से उत्पन्न होते हैं-यह कितना आगे तक जाएगा, कौन प्रभावित होगा और इसके दीर्घकालिक परिणाम क्या होंगे?’’

लोगों के लिए ये है बहुत ही चिंताजनक स्थिति

सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर खबरों और गलत सूचनाओं के भंवर में डूबे अवस्थी ने कहा कि वह लगातार भय की भावना से भरे हुए हैं, इस हद तक कि वह कभी-कभी अपने दिल की धड़कन को तेजी से धड़कते हुए सुन सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोशल मीडिया पर स्क्रॉल नहीं करना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि मैं कुछ जरूरी खबरों से चूक जाऊंगा. अगर दिल्ली अगला निशाना बन गई, तो मुझे अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए, क्या हम कल जागेंगे?’’

सुरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए, नागरिकों या सैनिकों की पीड़ा को देखना अपराधबोध और बेबसी का भाव पैदा कर सकता है. शर्मा ने कहा, ‘‘युवा दिमाग बहुत जल्दी प्रभावित होते हैं. युद्ध की बातें डर पैदा कर सकती हैं, रूढ़िवादिता को मजबूत कर सकती हैं और उनकी सुरक्षा की भावना को बाधित कर सकती हैं.’’

ऐसे समय में जागरूक रहना है जरूरी

ऐसे समय में जागरूक रहना महत्वपूर्ण है, लेकिन सूचनाओं के लिए विश्वसनीय स्रोतों का चयन करना और निरंतर कवरेज से ब्रेक लेना भी जरूरी है. शर्मा ने कहा कि जब बात बच्चों की आती है, तो उन्हें उम्र के हिसाब से हालात के बारे में समझाना उचित है. उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाएं और ऑनलाइन प्रसारित हो रही सूचना पर ध्यान देने के बजाय खुली बातचीत के लिए प्रोत्साहित करें.’’

मैथ्यू ने अपनी बेटी को आश्वस्त करने के लिए एक योजना बनाई है. वह हेजल को बालकनी में ले जाती हैं और आसमान की ओर इशारा करते हुए उससे पूछती हैं कि क्या वह कोई विस्फोट या गोलीबारी देख रही है, जिससे वह डरती है. मैथ्यू ने कहा, ‘‘जब वह देखती है कि ऐसी कोई चीज यहां नहीं हो रही है, तो वह शांत हो जाती है.’’ आघात अलग-अलग रूप ले सकता है.

‘ब्लैकआउट’ जैसी घटनाओं से होती है चिंता

युद्ध के खतरे के चलते अज्ञात स्थिति के बारे में चिंतित होना एक बात है, लेकिन किसी भी अप्रिय परिणाम के लिए तैयार रहना भी चिंता का कारण बन सकता है. वरिष्ठ चिकित्सक मैत्री चंद ने कहा कि सायरन, ‘ब्लैकआउट’ अभ्यास और आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करने पर ध्यान देना लोगों को तैयार होने का एहसास दिला सकता है और साथ ही चिंता भी पैदा कर सकता है.

चंद ने कहा, ‘‘यह ऐसी रस्सी है, जिस पर चलना मुश्किल है, जहां हमें अपना संतुलन खुद ही बनाना होता है. शांत और संयमित रहना मुश्किल है, खासकर तब जब आपके आस-पास के ज़्यादातर लोग चिंता और डर से प्रेरित उन्मादी माहौल में हों.’’

ऐसी परिस्थितियों में, लोगों को खुद को ‘‘सकारात्मक विचारों’’ के साथ शांत रहने का प्रयास करना चाहिए कि वे इससे बाहर निकल आएंगे और समय आने पर अपने प्रियजनों की देखभाल करने में सक्षम होंगे. चंद ने शांत रहने के लिए लोगों को योग, ध्यान करने की भी सलाह दी.

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