Thursday, July 2, 2026
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NATIONAL : राहुल गांधी की नागरिकता का मामला, हाई कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते में जवाब देने को कहा

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यह याचिका बेंगलुरु निवासी विग्नेश नामक व्यक्ति की ओर से दाखिल की गई थी. याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी भारत के नागरिक नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने ब्रिटेन में अपनी एक कंपनी के दस्तावेजों में अपनी नागरिकता ‘ब्रिटिश’ दर्ज कराई है. जब वह दूसरे देश के नागरिक हैं तो भारत के नागरिक के रूप में रायबरेली से सांसद कैसे हो सकते हैं.

कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर दाखिल एक याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर राहुल गांधी की नागरिकता पर निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को सूचित करे.यह आदेश जस्टिस ए.आर. मसूदी और जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने जारी किया है. कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया है लेकिन सरकार को तय समयसीमा में निर्णय लेने को कहा है. बता दें कि यह याचिका बेंगलुरु निवासी विग्नेश नामक व्यक्ति की ओर से दाखिल की गई थी.

याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी भारत के नागरिक नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने ब्रिटेन में अपनी एक कंपनी के दस्तावेजों में अपनी नागरिकता ‘ब्रिटिश’ दर्ज कराई है. जब वह दूसरे देश के नागरिक हैं तो भारत के नागरिक के रूप में रायबरेली से सांसद कैसे हो सकते हैं.कर्नाटक के रहने वाले एस विग्नेश ने 12 सितंबर को एक जनहित याचिका दायर की थी. उन्होंने रायबरेली से सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के यूनाइटेड किंगडम (यूके) का नागरिक होने दावा किया था.

शिशिर ने दावा किया कि उन्होंने मामले की गहन जांच की और कहा कि उन्हें जो गोपनीय जानकारी मिली है, उससे पता चला है कि गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता है. एस विग्नेश शिशिर ने सीबीआई जांच की मांग के साथ ही राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता के आधार पर उनकी भारतीय नागरिकता रद्द करने की भी मांग की थी.

NATIONAL : पूर्वा चौधरी के OBC सर्टिफिकेट पर विवाद, RAS ऑफिसर पिता ने ये नियम बताते हुए दी सफाई

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पूर्वा चौधरी के पिता ओमप्रकाश सहारण एक RAS अधिकारी हैं और फिलहाल कोटपूतली में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. यूपीएससी में ओबीसी सर्टिफिकेट के गलत इस्तेमाल वाले आरोपों पर पूर्वा के पिता ने अपनी सफाई दी है और नियमों का हवाला देते हुए इन आरोपों को गलत बताया है.

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा, देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठीन परीक्षाओं में से एक है. हनुमानगढ़ जिले की संगरिया विधानसभा क्षेत्र के गांव बोलावाली की रहने वाली पूर्वा चौधरी ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 533वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया. हालांकि, उनकी इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है. कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि पूर्वा ने ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) सर्टिफिकेट का गलत इस्तेमाल किया, जबकि उनके पिता ओमप्रकाश सहारण राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी हैं.

पूर्वा चौधरी ने ओबीसी कैटेगरी से यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास की है. उन्हें लिखित परीक्षा में 771 नंबर और साक्षात्कार में 165 नंबर यानी कुल 936 नंबर के आधार पर मेरिट लिस्ट में 533वां स्थान मिला है. पूर्वा चौधरी के पिता ओमप्रकाश सहारण एक RAS अधिकारी हैं और फिलहाल कोटपूतली में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. यूपीएससी में ओबीसी सर्टिफिकेट के गलत इस्तेमाल वाले आरोपों पर पूर्वा के पिता ने अपनी सफाई दी है और नियमों का हवाला देते हुए इन आरोपों को गलत बताया है.

पूर्वा की सफलता की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर उनके OBC-NCL सर्टिफिकेट को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके पिता ओमप्रकाश सहारण एक सीनियर RAS अधिकारी हैं, ऐसे में उनकी बेटी को OBC-NCL का लाभ लेना गलत है. सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि पूर्वा के पास महंगे हैंडबैग और कार हैं, जिसके आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि ऊंची पहुंच वाले लोग इस तरह के हथकंडे अपनाकर गरीबों का हक छीनते हैं.

इस विवाद पर पूर्वा के पिता ओमप्रकाश सहारण ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप गलत और आधारहीन हैं. उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि OBC-NCL सर्टिफिकेट के लिए नियम कहता है कि अगर कोई व्यक्ति 40 वर्ष की आयु से पहले डायरेक्ट क्लास-1 (ग्रुप A) या RAS जैसे पद पर भर्ती होता है, तो उसका परिवार OBC-NCL लाभ से वंचित हो जाता है. ओमप्रकाश सहारण ने बताया कि वे 44 वर्ष की आयु में RAS बने थे, इसलिए उनकी बेटी पूर्वा को OBC-NCL लाभ लेने का पूरा अधिकार है.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति 40 वर्ष से पहले क्लास-1 में भर्ती हो या प्रोमोशन पाए, तभी लाभ नहीं मिलता. उनके मामले में ऐसा नहीं है. ओमप्रकाश ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को भेड़चाल करार दिया और कहा कि लोगों को इस विषय में पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में एक लॉबी है जो इस तरह की अफवाहें फैलाने का काम करती है. साथ ही, कुछ लोग अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने के लिए ऐसी बातें फैला रहे हैं.

OBC-NCL सर्टिफिकेट के लिए नियमों के अनुसार, उम्मीदवार के माता-पिता की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. साथ ही, अगर माता-पिता क्लास-1 (ग्रुप A) या क्लास-2 (ग्रुप B) में 40 वर्ष की आयु से पहले डायरेक्ट भर्ती या प्रोमोशन के जरिए पहुंचे हों, तो उम्मीदवार को OBC-NCL लाभ नहीं मिलता. ओमप्रकाश सहारण का कहना है कि वे इन नियमों के दायरे में नहीं आते, इसलिए उनकी बेटी ने कोई गलत कार्य नहीं किया.

इस मामले ने एक बार फिर UPSC की चयन प्रक्रिया और आरक्षण नियमों पर बहस छेड़ दी है. पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां उम्मीदवारों पर OBC, EWS या PwBD कोटे के दुरुपयोग का आरोप लगा. इनमें सबसे चर्चित मामला 2022 बैच की पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेड़कर का है. उनके खिलाफ OBC-NCL और PwBD कोटे के दुरुपयोग के आरोप लगे और जांच चल रही है.

विशेषज्ञों का कहना है कि UPSC को अपनी सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत है ताकि इस तरह के विवादों से बचा जा सके. पूर्वा चौधरी और उनके परिवार का कहना है कि वे नियमों के अनुसार ही आगे बढ़े हैं और उनकी बेटी की सफलता उनकी मेहनत का नतीजा है. इस बीच, सोशल मीडिया पर चल रही बहस ने इस मामले को और तूल दे दिया है.

NATIONAL : पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश, आंधी और भारी वर्षा की चेतावनी, यूपी में अलर्ट जारी

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मई के पहले सप्ताह में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, और देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, धूल भरी आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि जैसी मौसमी गतिविधियों की संभावना जताई गई है.

मई के पहले सप्ताह में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, और देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, धूल भरी आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि जैसी मौसमी गतिविधियों की संभावना जताई गई है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वरिष्ठ वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बताया कि लगभग पूरे भारत में मौसम की गतिविधियां सक्रिय हैं. इसलिए कई हिस्सों में रेड और येलो अलर्ट जारी किए गए हैं, .

उन्होंने बताया कि खासकर उत्तर-पश्चिम भारत, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं, में धूल भरी आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना है. इसके अलावा, गुजरात और राजस्थान में भारी वर्षा की चेतावनी भी जारी की गई है. दिल्ली-एनसीआर में भी अगले दो दिनों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है, जिनकी गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है.

IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम की गतिविधियां विशेष रूप से सक्रिय रहेंगी. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में धूल भरी आंधी और वज्रपात की स्थिति बन रही है. इन राज्यों में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जो स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती है. मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि तेज हवाएं और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

उत्तर प्रदेश में भी कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में. कुछ जगहों पर भारी वर्षा और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है.राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-NCR) में भी मौसम का मिजाज बदलने वाला है. IMD वैज्ञानिक ने बताया कि अगले दो दिनों में दिल्ली और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. इसके साथ ही तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिनकी गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है.

IMD के अनुसार, इस समय देश में मौसम की ये गतिविधियां पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय स्तर पर बन रही निम्न दबाव की प्रणालियों के कारण हो रही हैं. पश्चिमी विक्षोभ, जो आमतौर पर सर्दियों में सक्रिय होता है, इस बार मई में भी प्रभावी है. इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी ने भी बारिश की संभावना को बढ़ा दिया है.

 

MP : इस चीज का लाइसेंस हासिल करने के लिए शख्स ने लड़ी 8 साल लंबी लड़ाई, राज्य का पहला मामला!

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इंदौर के तकनीकी एजुकेशन इन्स्ट्रक्टर ने आठ साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद धारदार हथियार का लाइसेंस लेने में कामयाबी हासिल की है. वह 2028 तक इंदौर जिले की सीमा में धारदार हथियार रख सकेंगे.

मध्य प्रदेश के इंदौर के एक तकनीकी एजुकेशन इन्स्ट्रक्टर ने 8 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जिला प्रशासन से धारदार हथियार का लाइसेंस लेने में कामयाबी हासिल की है. आमतौर पर लोग बंदूक सरीखे आग्नेय अस्त्रों के लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन धारदार हथियार रखने के लिए लाइसेंस का अपनी तरह का यह पहला मामला है.

जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्थानीय निवासी 57 साल के सुभाष सिंह तोमर को तीन साल तक धारदार हथियार रखने का लाइसेंस दिया गया है. उन्होंने लाइसेंस के ब्यौरे के हवाले से बताया कि तोमर आठ अप्रैल 2028 तक इंदौर जिले की सीमा में अपने पास तलवार, खुखरी और कटार में से कोई एक धारदार हथियार रख सकेंगे.

तोमर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह लाइसेंस हासिल करने के लिए उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, जिसकी शुरुआत 2017 में उस समय हुई, जब उन्होंने शस्त्र अधिनियम 1959 का रिसर्च करके सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत सरकारी दस्तावेज और कानूनी ब्यौरा जुटाना आरंभ किया.

उन्होंने दावा किया, ‘‘देश में पहली बार मुझे ऐसा शस्त्र लाइसेंस मिला है, जिसके तहत मुझे तय क्षेत्र में अपने साथ धारदार हथियार लेकर चलने की अनुमति दी गई है.’’ तोमर पेशे से तकनीकी एजुकेशन इन्स्ट्रक्टर हैं और उनका कहना है कि यह लाइसेंस हासिल करने के लिए उनके संघर्ष का मकसद अपने साथ धारदार हथियार लेकर चलना नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता चला कि पश्चिमी मध्यप्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ धारदार हथियार रखने के आरोप में शस्त्र अधिनियम के तहत बड़ी तादाद में आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, जबकि वे ऐसे हथियारों का इस्तेमाल खेती-किसानी और घास काटने में भी करते हैं.”

तोमर ने कहा, ”मैं इन आदिवासियों को अनुचित कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए जागरूकता फैलाना चाहता हूं. मैं लोगों को बताना चाहता हूं कि धारदार हथियार का लाइसेंस भी कानूनन लिया जा सकता है.” तोमर के मुताबिक शुरुआत में जिला प्रशासन ने धारदार हथियार के लाइसेंस के लिए उनकी अर्जी बिना कोई तार्किक कारण बताए खारिज कर दी थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर करके कानूनी लड़ाई जारी रखने का फैसला किया.

उन्होंने कहा, ”एक वक्त वह भी था, जब कुछ सरकारी अफसर यह कहकर मुझ पर हंसते थे कि भला धारदार हथियार का भी कोई लाइसेंस जारी किया जाता है?” अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम) रोशन राय ने बताया कि तोमर को हाई कोर्ट के निर्देश पर धारदार हथियार का लाइसेंस जारी किया गया है.

यह पूछे जाने पर कि क्या इस तरह का लाइसेंस देश में पहली बार जारी किया गया है, एडीएम ने जवाब दिया,‘‘फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है कि देश के अन्य हिस्सों में ऐसा कोई लाइसेंस जारी किया गया है या नहीं, लेकिन इंदौर में इससे पहले दो-तीन लोगों को इस तरह का शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया है.’’

एडीएम ने हालांकि इसका विशिष्ट ब्योरा नहीं दिया कि इंदौर में अन्य लोगों को किस तरह के धारदार हथियार का लाइसेंस दिया गया था और इसकी क्या शर्तें थीं. हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने इस साल 27 फरवरी को जिला प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह इंदौर संभाग के आयुक्त (राजस्व) के 12 सितंबर 2024 के आदेश का पालन करते हुए तीन हफ्ते के भीतर तोमर को धारदार हथियार का लाइसेंस जारी करे.

तोमर के वकील विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि हाई कोर्ट के इस निर्देश का पालन नहीं होने पर तकनीकी एजुकेशन इन्स्ट्रक्टर ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की, लेकिन इस पर सुनवाई होने से पहले ही प्रशासन ने उनके मुवक्किल के नाम धारदार हथियार का लाइसेंस जारी कर दिया. उन्होंने कहा,‘‘तोमर के नाम धारदार हथियार का लाइसेंस जारी किया जाना कानूनी जगत का एक ऐतिहासिक मामला है.’ श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि देश के आम जन मानस में धारदार हथियारों के लाइसेंस की प्रक्रिया को लेकर जागरूकता का अभाव है और सरकार को स्पष्ट नीति घोषित करके यह कमी दूर करनी चाहिए.

 

NATIONAL : ‘…तो वरमाला नहीं डालूंगा’, जबरा फैन ने कार्ड पर छपवाई लालू यादव की तस्वीर, कर दी ये बड़ी मांग

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लालू यादव का जबरा फैन बिहार के नालंदा का रहने वाला है. उसने कहा कि लालू यादव समाजवादी नेता हैं. नीतीश कुमार अब समाजवादी नेता नहीं रहे.आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के एक से बढ़कर एक चाहने वाले हैं. कई बार यह दिखा भी है कि जब लालू परिवार में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तो कोई कार्यकर्ता या चाहने वाला मछली लेकर पहुंच जाता है तो कोई केला लेकर राबड़ी आवास पहुंच जाता है. इन सबके बीच आरजेडी सुप्रीमो का एक ऐसा फैन सामने आया है जिसका कहना है कि अगर लालू यादव या उनके परिवार का कोई भी सदस्य उसकी शादी में नहीं पहुंचता है तो वह वरमाला नहीं डालेगा. इस जबरा फैन का नाम रविश है.

सोमवार (05 मई, 2025) को रविश पटना स्थिति आरजेडी कार्यालय पहुंचा. वह नालंदा का रहने वाला है. आरजेडी कार्यालय पहुंचा तो उसके हाथों में उसकी शादी का कार्ड था. कार्ड पर लालू यादव की तस्वीर छपी थी. कार्ड पर राष्ट्रीय जनता दल का चुनावी सिंबल लालटेन भी था. कार्ड पर लिखा हुआ था, “तेज-तेजस्वी जिंदाबाद, लालू-राबड़ी जिंदाबाद.”

रविश ने बताया कि लालू यादव समाजवादी नेता हैं. नीतीश कुमार अब समाजवादी नेता नहीं रहे. लालू यादव ने बहुजनो को आवाज दी है. उसने कहा, “हमने भगवान गणेश की जगह लालू प्रसाद यादव की तस्वीर इसलिए लगाई है क्योंकि लालू यादव युगपुरुष हैं.”

आरजेडी सुप्रीमो का फैन इतने पर ही नहीं रुका. रविश ने बताया, “अभी मेरा कार्ड लालू यादव तक नहीं पहुंचा है, लेकिन हमने तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव को कार्ड दे दिया है. हम चाहते हैं कि लालू परिवार का कोई एक सदस्य मेरे शादी में जरूर आए. उसने साफ कहा कि अगर लालू परिवार से कोई सदस्य मेरी शादी में नहीं आता है तो मैं वरमाला नहीं डालूंगा. फिलहाल इस युवक और इसकी शादी के कार्ड की चर्चा खूब हो रही है. बता दें कि युवक की शादी एक जून 2026 को है.

 

UP: बर्खास्त हुई मेरठ की लेडी सब-इंस्पेक्टर, घूस लेने पर कोर्ट ने सुनाई थी सात साल की सजा

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यूपी के मेरठ में रिश्वत लेने के मामले में एक महिला सब इंस्पेक्टर पर गाज गिरी है. उसे पुलिस विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. मेरठ में तैनाती के दौरान एक मामले से गंभीर धाराएं हटाने के बदले 20,000 की रिश्वत लेने का आरोप लगा था. सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 5 सितंबर 2024 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.

यूपी के मेरठ में भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में दोषी पाई गई महिला सब इंस्पेक्टर अमृता यादव को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी. 4 मई को उसका टर्मिनेशन लेटर जारी किया गया है.

उन्होंने बताया कि अमृता यादव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद सेवा से हटाया गया है. न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमृता यादव पर 2017 में कोतवाली थाना, मेरठ में तैनाती के दौरान एक मामले से गंभीर धाराएं हटाने के बदले 20,000 की रिश्वत लेने का आरोप लगा था.
बताया जा रहा है कि वह एक मामले में हस्तक्षेप कर रही थीं और इसके बदले पैसे की मांग की थी. इस शिकायत के बाद एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें बुढ़ाना गेट पुलिस चौकी पर रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था. घटना के बाद अमृता यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था और विस्तृत जांच के बाद मामला कोर्ट में भेजा गया.

करीब सात साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, 5 सितंबर 2024 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई. साथ ही 75,000 का जुर्माना भी लगाया गया. डीआईजी कलानिधि नैथानी ने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराध में लिप्त किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो. उन्होंने इसे विभाग की साख और जनविश्वास की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया.

NATIONAL : बाहर जॉब करता था पति, घर में अकेली थीं बेटी और पत्नी, तभी नौकर ने किया ऐसा कांड, मच गया हड़कंप

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ओडिशा के बडागड़ा में नौकर सरोज कुमार बेहरा ने मालिक की पत्नी और नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न किया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

ओडिशा में एक दिल दहलाने वाली घटना हुई है. एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की जिंदगी नर्क बन गई थी और महिला के पति को कानों-कान खबर तक नहीं हुई. दरअसल, उनकी जिंदगी खराब करने वाला कोई और नहीं बल्कि उनके घर में काम करने वाला नौकर था. जब महिला के पति को इसके बारे में पता चला तो उसके होश ही उड़ गए थे. उसने तुरंत अपने नौकर के खिलाफ केस दर्ज करवाई. पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार करते हुए आगे की जांच शुरू कर दी.

पुलिस ने नौकर को मालिक की पत्नी और नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. महिला ने शनिवार को बडागड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. आरोपी की पहचान जाजपुर जिले के सरोज कुमार बेहरा के रूप में हुई है. पुलिस ने बताया कि वह नौकर काम करते समय मर्यादा की सारी सीमाओं को लांघ गया था. उसने न केवल महिला का रेप किया बल्कि उसने उसकी नाबालिग बेटी की तस्वीरें और वीडियो बना लिए. उनको ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. इसके बल पर उसने कई बार दोनों का बलात्कार किया.

महिला ने बताया कि उसने कथित तौर पर उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पिछले कुछ हफ्तों में कई मौकों पर उनके साथ बलात्कार किया. अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध कबूल कर लिया. पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि जाजपुर थाने में आरोपी के नाम पर पहले से ही एक मामला दर्ज है. पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच चल रही है. उसे बीएनएस, आईटी एक्ट और पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है.

RECIPE : बची हुई रोटियों से बनाएं टेस्टी नूडल्स, आसान है इसको बनाने का तरीका, जल्दी नोट कर लें

बची हुई रोटियों से टेस्टी “रोटी नूडल्स” बनाएं. प्याज़, शिमला मिर्च, गाजर, टमाटर और सॉस डालकर 10-15 मिनट में तैयार करें. बच्चों को पसंद आएगा और हेल्दी स्नैक है.

Food, लगभग सभी घरों में खाना बनाने के बाद अक्सर थोड़ा-बहुत खाना बच ही जाता है. जिसमें रोटियां भी शामिल होती हैं. लेकिन आज हम आपको बची हुई रोटियों का यूज करना बताएंगे, जिससे बची हुई रोटियों से आप झटपट और टेस्टी “रोटी नूडल्स” बना सकते हैं. इसको बनाना एक शानदार तरीका है बासी रोटियों को स्वादिष्ट और हेल्दी स्नैक में बदलने का. यह डिश बच्चों को भी बहुत पसंद आती है और बनाने में बेहद आसान है. तो आइए बनाते हैं, ये टेस्टी रेसिपी.

रोटी नूडल्स बनाने की रेसिपी (4 रोटियों के लिए)

बनाने की सामग्री:

3–4 बची हुई रोटियां
1 छोटा प्याज़ (बारीक कटा)
1 छोटा शिमला मिर्च (बारीक कटी)
1 गाजर (बारीक कटी)
2–3 हरी मिर्च (वैकल्पिक, बच्चों के लिए कम करें)
1 टमाटर (बारीक कटा)
1 चम्मच सोया सॉस
1 चम्मच टॉमेटो सॉस (बच्चों के लिए ज़रूरी स्वाद)
1/2 चम्मच चिली सॉस (वैकल्पिक)
नमक स्वादानुसार
1/2 चम्मच काली मिर्च
थोड़ा सा नींबू रस
हरा धनिया (गार्निश के लिए)
1-2 चम्मच तेल

बनाने की विधि:

1. रोटियों को काटें:
रोटियों को रोल करें और पतली-पतली स्ट्रिप्स में काट लें, जैसे नूडल्स.

2. सब्ज़ियों को भूनें:
कड़ाही में तेल गर्म करें. उसमें प्याज़ डालें और हल्का सुनहरा होने तक भूनें.
फिर बाकी सब्ज़ियां डालें (गाजर, शिमला मिर्च, टमाटर) और 2–3 मिनट तक तेज़ आंच पर भूनें.

3. मसाले और सॉस डालें:
अब इसमें सोया सॉस, टॉमेटो सॉस, चिली सॉस, नमक, काली मिर्च डालें और अच्छे से मिक्स करें.

4. रोटी नूडल्स डालें:
अब कटे हुए रोटी स्ट्रिप्स डालें और 2 मिनट तेज़ आंच पर चलाते हुए पकाएं, ताकि सारे फ्लेवर मिक्स हो जाएं.

5. गार्निश करें और परोसें:
ऊपर से हरा धनिया और थोड़ा नींबू रस डालें. गरमा गरम परोसें.

इसके फायदे:
1. बासी रोटियों का क्रिएटिव इस्तेमाल.
2. ज्यादा तेल नहीं होता, हेल्दी स्नैक.
3. बच्चे भी मज़े से खा लेते हैं.
4. झटपट बनता है, 10–15 मिनट में तैयार.

तो आप इन तरीकों को अपनाकर एक बेस्ट रेसिपी तैयार कर सकते हैं.

 

RAJASTHAN : राजस्थान में वक्फ बोर्ड के पास हैं इतनी हजार संपत्तियां, आमदनी से ज्यादा होता है खर्च

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वक्फ कानून में हुए बदलाव के बीच राजस्थान के वक्फ बोर्ड ने राज्य में अपनी संपत्तियों को लेकर जो लिस्ट तैयार की है, उसकी कॉपी एक्सक्लूसिव तौर पर एबीपी न्यूज के पास है.वक्फ कानून में संशोधन पर सोमवार (5 मई) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस बीच राजस्थान के बोर्ड ने राज्य में अपनी संपत्तियों की सूची तैयार की है. सूची के मुताबिक राजस्थान में वक्फ की 19044 संपत्तियां हैं. इनकी अनुमानित कीमत अरबों में हैं.

हालांकि वक्फ की कुछ पर दूसरों का कब्जा है. कुछ के मामले अदालतों में है. कई का किराया बाजारू कीमत के मुकाबले दस फीसदी से भी कम है. बहरहाल राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली भी कानून में बदलाव के खिलाफ हैं. बोर्ड से जुड़े हुए कई लोगों ने कानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है.

वक्फ कानून में संसद में हुए बदलाव के बीच राजस्थान के वक्फ बोर्ड ने राज्य में अपनी संपत्तियों को लेकर जो लिस्ट तैयार की है, उसकी कॉपी एक्सक्लूसिव तौर पर एबीपी न्यूज के पास है. इस लिस्ट के मुताबिक मौजूदा समय में राजस्थान में वक्फ बोर्ड के पास जो 19044 संपत्तियां हैं, उनमें से 17415 गजेटेड है और 1629 को गजट के बाद दर्ज किया गया है. वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक 5057 नई संपत्तियां सर्वेक्षण के दौरान मौके पर पाई गई. राजस्थान में 186 वक्फ प्रॉपर्टीज बतौर अलल औलाद रजिस्टर्ड है. यानी उनके केयरटेकर हमेशा वक्फ करने वालों के परिवार के लोग ही रहेंगे.

एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक राजस्थान में वक्फ बोर्ड के पास जो संपत्तिया हैं, उनमें से सात मामलों में हाईकोर्ट ने स्टे कर रखा है. एक मामला वक्फ अधिकरण जयपुर में पेंडिंग है. 17 मामले एसडीएम स्तर के अधिकारियों की कोर्ट में कब्ज हासिल करने को लेकर पेंडिंग है. अतिक्रमण हटाने के 17 मामले तहसीलदारों के यहां लंबित है, जबकि 10 मामलों में अतिक्रमण से कब्जा पाना बाकी है.

राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली के मुताबिक राज्य में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट के लिए 292 कमेटियां गठित की गई है. इनमें से 177 की सालाना आमदनी एक लाख रुपये से ज्यादा है. राजस्थान में वक्फ संपत्तियों की संख्या भले ही हजारों में हो, लेकिन साल 2022-23 में यहां सिर्फ 79 और 2023-24 में 54 वक्फ प्रॉपर्टी का ही अकाउंट ऑडिट किया गया था.

एबीपी न्यूज के पास मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक राजस्थान वक्फ बोर्ड की सालाना आमदनी साल 2020-21 में 2.22 करोड़ थी जबकि खर्च 4.20 करोड़ रुपये हुए थे. साल 2021-22 में आमदनी घटकर 1.45 करोड़ रुपये रह गई जबकि खर्च 3.52 करोड़ रुपये हुए थे. साल 2022-23 में 3.10 करोड़ की आमदनी हुई जबकि खर्च 4.00 रुपये हुए. साल 2023 24 में 3.23 करोड़ की आमदनी हुई जबकि खर्च घटकर 3.35 करोड़ रुपये किए गए.

बीते वित्तीय वर्ष के शुरुआती 9 महीनो में 2.11 करोड़ रुपये की आमदनी हुई जबकि खर्च 2.61 करोड़ रुपये किए गए. साल 2020-21 और 2021-22 में राज्य सरकार ने ढाई ढाई करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया था. राजस्थान के मौजूदा वक्फ बोर्ड का गठन 31 दिसंबर 2021 को किया गया था. इसके चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली हैं. बोर्ड में सदस्यों की संख्या 9 है जबकि इसका कार्यकाल पांच सालों का है.

राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली के मुताबिक वक्फ कानून को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है. सरकार सिर्फ सियासी फायदे के लिए इसमें बदलाव कर रही है. बदलाव से आम मुसलमानो को काफी नुकसान होने की आशंका है. मौजूदा सरकार ने हर साल मिलने वाले अनुदान को भी बंद कर दिया है. वक्फ बोर्ड को और मजबूत व प्रभावशाली बनाए जाने की जरूरत थी, ताकि इसका फायदा आम लोगों तक पहुंच सके, लेकिन सरकार इसे कमजोर करने में लगी हुई है.

उन्होंने बताया कि राजस्थान वक्फ बोर्ड से जुड़े हुए कुछ लोग कानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए हुए हैं. उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है और इस बात का भी यकीन है कि अदालत का फैसला उनके हक में ही आएगा.

NATIONAL : हिमाचल के चंबा में बारिश से तबाही, एक व्यक्ति की मौत, 150 मवेशी बहे

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हिमाचल के चंबा जिले में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ ने एक व्यक्ति की जान ले ली और लगभग 150 मवेशियों को बहा ले गई. सबसे अधिक वर्षा नेरी में 44.5 मिमी रही, इसके बाद जौट में 37 मिमी, नागरोटा सुरियां में 24.8 मिमी, नरकंडा में 25 मिमी, भरमौर में 22 मिमी, सुजानपुर टीरा में 21.6 मिमी, मंडी में 20.4 मिमी और रोहरू में 20 मिमी वर्षा दर्ज की गई. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने डोंडरा नाला में एक व्यक्ति की मौत पर शोक व्यक्त किया और मृतक के परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया.

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ ने एक व्यक्ति की जान ले ली और लगभग 150 मवेशियों को बहा ले गई. मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार शाम 5 बजे से रविवार शाम 5 बजे तक राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक वर्षा नेरी में 44.5 मिमी रही, इसके बाद जौट में 37 मिमी, नागरोटा सुरियां में 24.8 मिमी, नरकंडा में 25 मिमी, भरमौर में 22 मिमी, सुजानपुर टीरा में 21.6 मिमी, मंडी में 20.4 मिमी और रोहरू में 20 मिमी वर्षा दर्ज की गई.पर्यटन स्थलों कुफरी, शिमला, चंबा, कांगड़ा, डलहौज़ी, मनाली और धर्मशाला में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने डोंडरा नाला (चेली गांव के पास) में एक व्यक्ति की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतक के परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया.

शिमला और आसपास के क्षेत्रों में रविवार को तेज ओलावृष्टि देखने को मिली, जो कुछ मिनटों तक चली. ओलों के साथ तेज बारिश और गरज के साथ तूफान भी आया. रिकांगपिओ, बिलासपुर और नेरी में तेज हवाएं चलीं, जबकि कोटगढ़ और ऊपरी शिमला के अन्य हिस्सों में ओलावृष्टि की खबर है. कांगड़ा, पालमपुर, बैजनाथ, जुब्बड़हट्टी, जौट और सुंदरनगर में गरज के साथ बारिश दर्ज की गई है.

मौसम विभाग ने राज्य में 8 मई तक के लिए ‘ऑरेंज’ और ‘येलो’ अलर्ट जारी किया है, जिसमें 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने, गरज-चमक और हल्के से मध्यम तूफान की चेतावनी दी गई है. लाहौल-स्पीति ज़िले के केलांग में न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा. वहीं ऊना 35.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सबसे गर्म रहा.

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