Sunday, July 5, 2026
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NATIONAL : फारूक अब्दुल्ला का पहलगाम हमले पर बड़ा बयान,धर्म पूछकर गोली मारी वो इंसान नहीं

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम के आतंकियों को दरिंदा बताया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकियों के खिलाफ जो भी एक्शन लेंगे, वो उनके साथ हैं.

 

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ”जो खूबसूरती को देखने गए, आराम के लिए गए, उनको खड़ा करके, धर्म पूछकर गोली मारी गई. वो इंसान नहीं, दरिंदे हैं. उनके साथ वो करना चाहिए जो पहले कभी नहीं हुआ, दुनिया में इसकी निंदा की गई. ये नहीं होना चाहिए था. ये बंद होना चाहिए.”

पाकिस्तान की तरफ फारूक अब्दुल्ला का इशारा

उन्होंने न्यूज़ 18 से बातचीत में कहा, ”मैं एक नागरिक होने के नाते, मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ हूं. जो भी वो फैसला लेंगे मैं उसके साथ हूं. सभी चाहते हैं कि आतंकवाद का खात्मा हो. जो भी उसके पीछे है, कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वो कोई वतन ही क्यों नहीं हो. करगिल में उसने कहा कि मैं नहीं हूं. मुंबई हमले के बाद भी कहा कि मैं नहीं हूं. आप ही बंदूक दे रहे हैं. हमने मसूद अजहर को छोड़ दिया, मैंने उस समय विरोध किया.”

आतंकवाद की फैक्ट्री खत्म करनी होगी- फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ”आतंकवाद की फैक्ट्री खत्म करनी होगी. जब भी आक्रमण हुआ है, उनकी (पाकिस्तान) तरफ से हुआ है. हमने शुरू नहीं किया. उसने शुरू किया. फिर हमने कार्रवाई की. हम इंसानियत के पक्षधर हैं. ये महात्मा गांधी का देश है.”

पाकिस्तान से बातचीत के सवाल पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैं अफसोस करता हूं कि मैं इसकी बात करता था. वो टेबल पर आना ही नहीं चाहते हैं. क्या कश्मीर उनके साथ जा सकता है. कभी नहीं. जिनको पाकिस्तान जाना था, वो काफी पहले जा चुके हैं.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक कदम उठाए हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती है.

NATIONAL : बैसरन घाटी से कितनी दूर है बेताब घाटी, जहां आतंकियों ने छिपाए थे AK-47 जैसे हथियार

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कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अब पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग हो रही है. ऐसे में भारत की तरफ से भी तैयारियां तेज है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए लगातार पाकिस्तान के खिलाफ सबूत जुटा रही है. वहीं ये भी पता लगाया जा रहा है कि आतंकी कैसे और कहां छिपे थे. इसी बीच बताया गया है कि आतंकियों ने अपने हथियार बैसरन घाटी में नहीं बल्कि बेताब घाटी में छिपाए थे. ऐसे में चलिए जानते हैं कि बैसरन घाटी से बेताब वैली की दूरी कितनी है.

 

पहलगाम में ही है बेताब घाटी
पहलगाम घूमने वाले लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि बेताब घाटी कहां पड़ती है. पहलगाम पहुंचते ही टूरिट्स्ट को पांच जगहों के नाम बताए जाते हैं, जो घूमने के लिए परफेक्ट हैं. इनमें बैसरन घाटी और बेताब घाटी का नाम भी शामिल होता है. हालांकि बेताब घाटी से ज्यादा भीड़ बैसरन घाटी में देखी जाती है.

कितनी है दूरी?
पहलगाम की बैसरन घाटी और बेताब घाटी के बीच की दूरी की बात करें तो ये लगभग 40 किमी है. बेताब घाटी को हजन घाटी के नाम से भी जाना जाता है. ये घाटी पहलगाम से करीब 15 किमी की दूरी पर स्थित है. इसी घाटी में आतंकियों ने अपने खतरनाक हथियार छिपाए थे, जिनसे उन्होंने बाद में बैसरन घाटी में कत्लेआम मचा दिया. इन आतंकियों की संख्या करीब चार बताई जा रही है, जिनमें से दो आतंकी सीमा पार कर आए थे. इन आतंकियों का कनेक्शन अब आईएसआई और पाकिस्तानी सेना से भी जुड़ रहा है.

कहां से आए हथियार?
अब सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जानकारी भी जुटा रही हैं कि इन आतंकियों को हथियार किसने मुहैया करवाए थे. साथ ही उन हैंडलर्स की भी जांच हो रही है, जिन्होंने कश्मीर में इनकी मदद की थी. फिलहाल कई लोग एनआईए की हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है. फिलहाल माना जा रहा है कि सीमा पार से ही आतंकी ये हथियार अपने साथ लेकर आए थे.

बता दें कि पहलगाम हमले में 26 निर्दोष लोगों को आतंकियों ने गोली मार दी, जिसके बाद वहां करीब आधे घंटे तक चीख पुकार मची रही. आतंकियों ने पुरुषों को ही अपना निशाना बनाया और इस हमले को अंजाम देने के बाद जंगल की तरफ भाग गए. फिलहाल इन आतंकियों को ठिकाने लगाने के लिए स्पेशल फोर्सेस का ऑपरेशन लगातार चल रहा है.

HEALTH : जोड़ों से यूरिक एसिड का सफाया कर देगी ये 1 ड्रिंक,बाहर हो जाएगी सारी गंदगी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल की वजह से शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या आम हो गई है. जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक मात्रा में बनने लगता है और किडनी उसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह जोड़ों में जमा होकर गठिया का रूप ले लेती है, जिसकी वजह से सूजन और दर्द जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में एक प्राकृतिक और असरदार उपाय है, जिससे यूरिक एसिड को कम किया जा सकता है. इस प्राकृतिक उपाय में आप एक खास तरह के ड्रिंक का सेवन कर सकते है. आइए जानते हैं इस खास ड्रिंक के बारे में-

नींबू-अदरक-सेब का सिरका ड्रिंक ड्रिंक से कंट्रोल करें यूरिक एसिड

आवश्यक सामग्री

  • गुनगुना पानी – 1 गिलास
  • नींबू का रस – 1 चम्मच
  • सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar) – 1 चम्मच
  • अदरक का रस – आधा चम्मच
  • हल्दी  – 1 चुटकी

बनाने की विधि

एक गिलास गुनगुने पानी में सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं. इसे खाली पेट सुबह-सुबह पिएं. आप चाहें तो दिन में 1 बार और भोजन से 30 मिनट पहले ले सकते हैं.

कैसे करता है यह ड्रिंक काम?

नींबू का रस  विटामिन C से भरपूर होता है, जो शरीर को डिटॉक्स करता है और यूरिक एसिड को घुलनशील बनाकर बाहर निकालने में मदद करता है. वहीं, सेब का सिरके में मौजूद एसीटिक एसिड शरीर के pH बैलेंस को सुधारता है और किडनी को यूरिक एसिड फिल्टर करने में मदद करता है.

इसके साथ ही अदरक में एक नैचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है, जो जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करता है. हल्दी का इस्तेमाल अगर आप करते हैं, तो इसमें करक्यूमिन नामक तत्व होता है, जो सूजन और दर्द में राहत दिलाने के लिए जाना जाता है.

इस ड्रिंक को पीने के फायदे

नियमित रूप से अगर आप इस ड्रिंक का सेवन करते हैं, तो इससे काफई हद तक जोड़ों की सूजन और दर्द में राहत मिल सकती है.  यह शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में प्रभावी हो सकता है. वहीं, यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित करता है

इसके सेवन से पाचन में सुधार किया जा सकता है और वजन को घटाने में मदद मिल सकती है. यह ड्रिंक आपकी कमजोर इम्यून सिस्टम मजबूत करने में काफी हद तक असरदार है.

HEALTH : 40 की उम्र के बाद अपनी डाइट में जरूर शामिल करें ये फल

 उम्र 40 के पार होते ही शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं. स्किन ढीली लगने लगती है, चेहरे की चमक कम होने लगती है और हड्डियां भी पहले जैसी मजबूत नहीं रहती हैं. इसका एक बड़ा कारण है कोलेजन (Collagen) की कमी. जैसे-जैसे शरीर की उम्र बढ़ती है, कोलेजन घटने लगता है और कई दिक्कतें होने लगती हैं.

खासकर स्किन पहले जैसी जवां नहीं रह जाती हैं. ऐसे में अगर आप अपनी डाइट में कुछ फलों को शामिल कर लें तो बॉडी में कोलेजन की कमी नहीं होगी. इससे आपकी स्किन खूबसूरत और टाइट बनी रहेगी. इन फलों के रोजाना सेवन से स्किन और सेहत दोनों दमकती रहेंगी, चाहे उम्र कुछ भी हो.

1. संतरा (Orange)

संतरा  विटामिन C का राजा होता है. इसमें भरपूर मात्रा में ये विटामिन पाया जाता है, जो कोलेजन बनाने के लिए सबसे जरूरी है. यह स्किन को टाइट, ग्लोइंग और यंग बनाता है. रोजाना एक संतरा खाने से आप फाइन लाइंस और झुर्रियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

2. अमरूद (Guava)

अमरूद सस्ता लेकिन सुपरफूड फल है. इसमें भी भरपूर विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. यह शरीर में कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ाता है और इम्यून सिस्टम को भी स्ट्रॉन्ग बनाता है. इसे सुबह या शाम के स्नैक में शामिल करें.

3. बेरीज (Berries)

ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, जामुन जैसी बेरीज को एंटी-एजिंग फ्रूट्स कहा जाता है. इनमें एलाजिक एसिड और एंथोसायनिन होते हैं, जो स्किन (Skin) को डैमेज से बचाते हैं और कोलेजन की सुरक्षा करते हैं.

4. पपीता (Papaya)

पपीता झुर्रियों का दुश्मन होता है. इसमें विटामिन A, C, और E होते हैं, जो स्किन रिपेयर में मदद करते हैं. यह फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और कोलेजन टूटने से बचाता है. रोज सुबह थोड़ा पपीता खाना स्किन के लिए वरदान से कम नहीं है.

5. कीवी (Kiwi)

कीवी एक ऐसा सुपरफ्रूट है जो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि हेल्थ के लिए भी कमाल है. इसमें विटामिन C की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. यह स्किन को यंग बनाए रखने में और कोलेजन प्रोडक्शन में बेहद कारगर है. इन फलों के अलावा कोलेजन के लिए हाइड्रेशन भी जरूरी है. इसलिए खूब पानी पिएं ताकि स्किन हाइड्रेटेड रहे और कोलेजन अच्छी तरह काम  कर सके.

BOLLYWOOD : जब पूरी फिल्म में शाहरुख खान को स्कर्ट पहनाना चाहते थे टॉप डायरेक्टर

बॉलीवुड आइकन शाहरुख खान ने 2024 में दुनिया को अपनी स्टार पावर की याद दिला दी थी. सुपरस्टार ने बड़े पर्दे से तीन साल के ब्रेक के बाद तीन बड़ी हिट- पठान, जवान और डंकी के साथ वापसी की थी. वहीं वेव्स 2025 में शाहरुख ने स्वीकार किया कि जब उनकी फिल्में अच्छा परफॉर्म नहीं करतीं तो उन्हें निराशा तो होती है, लेकिन उन्होंने कभी भी वास्तव में हार का अहसास नहीं किया है. बातचीत के दौरान होस्ट करण जौहर ने पूछा कि क्या शाहरुख ने कभी अपने करियर से पीछे हटने के बारे में सोचा है. इस पर किंग खान ने मजेदार किस्सा शेयर किया.

जब शाहरुख खान को फिल्म में पहननी थी स्कर्ट
दरअसल शाहरुख खान ने कहा, “कुछ साल पहले, मैं घर पर बैठा था, और करण जौहर एक स्क्रिप्ट लेकर मेरे घर आए थे. मैं स्क्रिप्ट का नाम नहीं बताऊंगा, लेकिन इसमें मुझे पूरी फिल्म में स्कर्ट पहने रहना था. वह वास्तव में एकमात्र ऐसा समय था जब मैंने पीछे हटना चाहा. मैंने सोचा, ऐसा तो नहीं होगा यार.” शाहरुख ने आगे कहा, “यह पुराने समय की उन फिल्मों में से एक थी जिसमें आदमी स्कर्ट पहनते थे. लेकिन ‘आदमी’ स्कर्ट पहनते थे. मेरे जैसे आदमी नहीं!”

बता दें कि शाहरुख खान और करण जौहर ने साथ में कई हिट फिल्में दी हैं.

फिल्मों के फ्लॉप होने पर कैसा होता है शाहरुख खान का रिएक्शन
शाहरुख खान ने आगे बताया कि वह अपनी फिल्मों की असफलता को कितनी गंभीरता से लेते हैं और उन्होंने माना कि इंडस्ट्री में दशकों बाद भी इसका असर उन पर पड़ता है. उन्होंने कहा, “जब भी मैं असफल हुआ हूं, मुझे असफलता का अहसास दोगुना हुआ है, क्योंकि मुझे लगता है कि मैंने कई लोगों को निराश किया है. मैं दुनिया भर में इतने सारे लोगों को निराश करने का दुख महसूस करता हूं.”

शाहरुख ने आगे कहा कि उन्हें पता है कि दुनिया भर में फैंस एंजॉय करने और एंटरटेनमेंट के लिए 35 सालों से उनकी फिल्में देखते आ रहे हैं. उन्होंने कहा, “क्योंकि मैं जानता हूं कि ये लोग पिछले 35 वर्षों से मेरी फिल्में देखकर खुश होते हैं और मनोरंजन पाते हैं. जब कोई फिल्म सफल नहीं होती तो ऐसा लगता है कि मैंने अपने फैंस के विश्वास का अपमान किया है.”

किंग खान ने आगे कहा, “फिर मेरे पास एक तरीका होता है. मैं दो दिनों तक बाथरूम में रोता हूं और दुखी और उदास रहता हूं, लेकिन बस इतना ही. मुझे कभी नहीं लगा कि ‘मैं अब हार गया हूं.’ मुझे कभी नहीं लगा कि मैं अपने पैरों पर वापस नहीं खड़ा हो सकता. जब मैं असफल होता हूं तो मुझे दुख और गुस्सा जैसी भावनाएं महसूस होती हैं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी. मैं हार को खुद पर हावी नहीं होने देता. मैं हार जाता हूं, गिर जाता हूं, लेकिन फिर मैं वापस बाउंस करता हूं. मुझे बुरा लगता है, लेकिन मैं कभी हार नहीं मानता.”

शाहरुख ने अंत में कहा, “मैं अपना ही डायलॉग दोहराता हूं, मैं दुनिया के राजा जैसा महसूस कर रहा हूं.”

BUSINESS : डॉलर के सामने अब भारतीय रुपये ने दिखाया दम, पिछले 7 महीने हुआ सबसे मजबूत

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Rupee Strong Against Dollar: अमेरिकी डॉलर के मूल्यों में लगातार आ रही गिरावट की वजह से भारतीय करेंसी अब अपना दम दिखा रही है. शुक्रवार को रुपया पिछले करीब 7 महीने में सबसे ऊपर चढ़कर 84.09 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और इसके बाद रुपया 0.85 पैसा और मजबूती के साथ 83.78 के स्तर पर पहुंच गया. साल 2024 के अक्टूबर के बाद ऐसा पहली बार है जब रुपया प्रति डॉलर 84 के स्तर पर पहुंचा है.

7 महीने में सबसे मजबूत रुपया

रुपये में इस बढ़त के पीछे साप्ताहिक लाभ समेत कई फैक्टर है. रुपये ने इस हफ्ते लगभग 2% की बढ़त हासिल की है. इसके अलावा भारतीय इक्विटी में लगातार तेजी देखी गई. ट्रम्प प्रशासन के तहत अमेरिका और भारत के बीच जल्द होने वाले व्यापार समझौते ने जहां उम्मीदों को और बढ़ाया तो वहीं विदेशी बैंकों की ओर से भारी डॉलर की बिकवाली (संभवतः विदेशी ग्राहकों की ओर से) और मंदी की स्थिति का कम होना भी रुपये के लिए टॉनिक का काम किया है.

पिछले लगातार 11 सत्रों से विदेश संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी के खरीदार रहे हैं, जो पिछले दो साल में इस तरह का सबसे लंबा सिलसिला है. इसकी वजह से भी रुपये का मजबूती में जरदस्त समर्थन मिला है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर रिसर्च दिलीप परमार का कहना है, नवंबर 2022 के बाद भारतीय रुपये में एक दिन में सबसे ज्यादा उछाल है. भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अन्य एशियाई करेंसी में बढ़तर ने भी भारतीय रुपये की मजबूती में मदद की है.

रुपये के पक्ष में कई फैक्टर

रुपये में हाल में आयी मजबूती के बाद बाजार के कई जानकारों को अपनी भविष्यवाणियों पर फिर से विचार कर रहे हैं. जापान का बैंक MUFG अब ये उम्मीद कह रहा है कि 2025 के आखिर तक रुपये 84 के स्तर पर आ जाएगा, जो उसका पूर्वानुमान 87 का था. बैंक ने कहा कि हम ये उम्मीद करते हैं कि डॉलर की कमजोरी और ट्रंप 2.0 की सरकार में भारत के लिए अनुकूल टैरिफ की वजह से अन्य एशियाई करेंसी के मुकाबलेभारतीय रुपया बेहतर प्रदर्शन करेगा. विदेशी बैंकों से लगातार डॉलर की सप्लाई ने भी रुपये को दौड़ लगाने में मदद की है.

SPORTS : हार्दिक पांड्या की आंख के ऊपर लगे 7 टांके, चोट के बावजूद खेली तूफानी पारी

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मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच से पहले गंभीर चोट लग गई थी. उनकी आंख बाल-बाल बची. आंख के ऊपर लगी चोट के बाद उनके 7 टांके लगाए गए थे, बावजूद इसके कप्तान ने गजब का जज्बा दिखाया और मैदान पर उतरे.

मुंबई इंडियंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 217 रनों का बड़ा स्कोर बनाया था. रयान रिकेल्टन और रोहित शर्मा ने ताबड़तोड़ शुरुआत दिलाई, दोनों ने पहले विकेट के लिए 116 रनों की साझेदारी की. रिकेल्टन 38 गेंदों में 61 रन बनाकर आउट हुए, इस पारी में उन्होंने 3 छक्के और 7 चौके जड़े.

रोहित शर्मा ने 36 गेंदों में 9 चौकों की मदद से 53 रन बनाए. रोहित के आउट होने के बाद सूर्यकुमार यादव और हार्दिक पांड्या ने नाबाद 94 रनों की साझेदारी की. सूर्या और हार्दिक ने 48-48 रन बनाए, दोनों नाबाद रहे और दोनों ने ही 23-23 गेंदें खेली.

मैच से पहले हार्दिक पांड्या को आए 7 टांके

टॉस में जब हार्दिक पांड्या आए तब उनकी आंख के ऊपर पट्टी बंधी हुई थी और उन्होंने एक चश्मा भी पहना हुआ था. तब पता चला कि मैच से पहले उनकी आंख के ऊपर चोट लगी थी और उन्हें 7 टांके आए, बावजूद उन्होंने आराम नहीं किया बल्कि महत्वपूर्ण मैच में मैदान पर उतरे.

हार्दिक पांड्या ने तूफानी पारी खेली, 23 गेंदों में उन्होंने 1 छक्का और 6 चौकों की मदद से 48 रन बनाए. लक्ष्य का पीछा करते हुए राजस्थान रॉयल्स की पूरी टीम 117 रनों पर सिमट गई और मुंबई इंडियंस ने 100 रनों से बड़ी जीत दर्ज की. शानदार बल्लेबाजी के बाद कप्तान ने 1 विकेट भी चटकाया. उन्होंने 1 ही ओवर डाला, जिसमें मात्र 2 रन देकर इम्पैक्ट प्लेयर बनकर आए शुभम दुबे को आउट किया.

IPL 2025 अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंची मुंबई इंडियंस

शुरूआती 5 मैचों में लड़खड़ाई नजर आ रही मुंबई इंडियंस अब जीत के रथ पर सवार हो चुकी है. उसने लगातार 6 मैचों में जीत दर्ज की है. ये उसकी IPL 2025 में 11 मैचों में 7वीं जीत है. 14 अंकों के साथ टीम अंक तालिका में पहले नंबर पर पहुंच गई है. अब अगर वह एक मैच और जीत लेगी तो उसकी प्लेऑफ में जगह लगभग पक्की हो जाएगी.

WORLD : सिर्फ 1 महीने में इस मुस्लिम देश ने 33 को फांसी पर लटकाया!

ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में बलूच जातीय समूह के साथ हो रहा संगठित मानवाधिकार उल्लंघन अब दुनिया के सामने उजागर हो चुके हैं. सिर्फ अप्रैल महीने में 33 बलूच कैदियों को फांसी पर लटकाया गया, जिनमें से अधिकांश को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के सजा दी गई.

ईरान ने 33 बलूच कैदियों को 10 अलग-अलग जेलों में फांसी दी गई. इनमें से 24 पर ड्रग्स से जुड़े आरोप, 4 पर राजनीतिक अपराध के मामले हैं. कई फांसी के मामलों में तो परिवारों को सूचना तक नहीं दी गई. हैरानी की बात यह है कि 33 के अलावा 85 और बलूच कैदी को फांसी पर लटकाने की तैयारी की जा रही है. ये सभी के सभी जाहिदान जेल में बंद है. यह घटनाक्रम न केवल ईरान की न्यायिक प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि इसे एक सांप्रदायिक व राजनीतिक दमन भी मानता है.

क्या यह न्याय है या सजा देने की राजनीति?
बलूच एक्टिविस्ट्स कैंपेन की रिपोर्ट के अनुसार, इन फांसी के पीछे का उद्देश्य न्याय से अधिक राजनीतिक दबाव और दमन प्रतीत होता है. आरोप है कि इन लोगों को राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों के तहत फंसाया गया. मानवाधिकार संगठन का कहना है कि बलूच कैदियों को पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया के बिना फांसी देना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है.

ईरान में मौत की सजा देने से जुड़ी जरूरी बात
ईरान में अब तक 33 बलूच लोगों को मौत की सजा दे दी गई है. इस संबंध में कई ऐसी बातें है, जो काफी चौंकाने वाली है. अभी तक जितने लोगों को फांसी दी गई है, उन सभी को बिना किसी सबूत के ही सजा दे दी गई. कैदियों को वकील नहीं दिया गया. फास्ट-ट्रैक सुनवाई में मौत की सजा सुना दी गई. कैदियों के परिवार वालों को भी जानकारी नहीं दी गई.

बलूच कैदियों को कहां रखता ईरान?
ईरान बलूच कैदियों को जाहिदान जेल में रखता है. यहां देश के अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा बलूच कैदी रहते हैं. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक जाहिदान जेल की गिनती सबसे बदनाम जेलों में होती है. यहां कैदियों को शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती है. जबरन उसने अपराध कबूलने के लिए मजबूर किया जाता है. यह जेल बलूच दमन के प्रतीक के रूप में उभर रही है.

ईरान में बलूच समुदाय का इतिहास,
ईरान की कुल आबादी का केवल 5% बलूच हैं, लेकिन फांसी की सजा पाने वालों में इनकी संख्या 10% से अधिक है. इससे साफ है कि यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि संवैधानिक अन्याय की कहानी है. ईरान में बलूच आर्थिक रूप से कमजोर है. उन्हें सरकारी नौकरियों में भर्ती नहीं दिया जाता है. बलूचों को धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. बता दें कि बलूच सुन्नी हैं, जबकि ईरान शिया-बहुल है.

NATIONAL : राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री को लगाया फोन, खोल दी पाकिस्तान की पूरी पोल-पट्टी

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राजनाथ सिंह ने कहा कि वैश्विक समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह आतंकवाद के ऐसे जघन्य कृत्यों की स्पष्ट रूप से और एक स्वर में निंदा करे और उनका विरोध करे

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहलगाम आतंकवादी हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से  फोन पर बात की. हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका भारत के आत्मरक्षा के अधिकार और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करता है.

राजनाथ सिंह ने हेगसेथ से कहा कि पाकिस्तान एक दुष्ट देश के रूप में बेनकाब हो गया है जो वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रक्षा मंत्री ने बातचीत के दौरान कहा कि दुनिया अब आतंकवाद के प्रति आंखें मूंद कर नहीं रह सकती.

राजनाथ सिंह के कार्यालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एकजुटता से खड़ा है और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है. पोस्ट में कहा गया, ‘उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अमेरिकी सरकार के मजबूत समर्थन को दोहराया.’

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘रक्षा मंत्री ने अमेरिकी रक्षा मंत्री को बताया कि पाकिस्तान का आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तपोषण देने का इतिहास रहा है.’ मंत्रालय ने राजनाथ सिंह के हवाले से कहा, ‘पाकिस्तान एक दुष्ट देश के रूप में बेनकाब हो गया है, जो वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है. दुनिया अब आतंकवाद के प्रति आंखें मूंद कर नहीं रह सकती.’

उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह आतंकवाद के ऐसे जघन्य कृत्यों की स्पष्ट रूप से और एक स्वर में निंदा करे और उनका विरोध करे. मंत्रालय ने कहा कि हेगसेथ ने राजनाथ सिंह को फोन कर नृशंस पहलगाम आतंकवादी हमले में निर्दोष नागरिकों की मौत पर अपनी सहानुभूति और संवेदना व्यक्त की.

हेगसेथ और राजनाथ सिंह ने ये चर्चा विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बात होने के एक दिन बात की है. अमेरिकी वक्तव्य के अनुसार, रुबियो ने जयशंकर को आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ सहयोग के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता से अवगत कराया और साथ ही भारत को दक्षिण एशिया में तनाव कम करने और शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया.

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में सीमा पार संबंधों का हवाला देते हुए भारत ने हमले में शामिल लोगों को कड़ी सजा देने का वादा किया है. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे.

NATIONAL : अचानक गोलीबारी हो तो कैसे बचाएं जान? जम्मू में बॉर्डर इलाके में स्कूली बच्चों को ट्रेनिंग

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स्कूल के शिक्षक ने बताया कि आठ-दस सालों से फायरिंग होती रही है. पिछले दो सालों से ऐसा नहीं हो रहा. लेकिन स्थिति को देखते हुए ट्रेनिंग दी जा रही है.पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास वाले इलाकों में स्कूली बच्चों को शेलिंग (गोलीबारी) से बचने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. अरनिया के आखिरी गांव त्रैवा से एबीपी न्यूज़ ने ग्राउंड रिपोर्ट की है. पहलगाम हमने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बिगड़ रहे रिश्तों के चलते स्कूली बच्चों को ट्रेन किया जा रहा है.

तनाव के बीच जम्मू में सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग अपने बचाव के तरीके भी अपना रहे हैं. चाहे वह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बंकरों की सफाई हो या फिर सीमा पर लगे खेतों में फसल काटना.

स्कूली बच्चों को शिक्षक यह सीख रहे हैं कि अगर पाकिस्तान अचानक किसी हिमाकत पर उतर आता है और वो स्कूल में हैं तो अपनी जान कैसे बचाएं. स्कूल प्रशासन इस बाबत एक मॉक ड्रिल भी करवा रहा है ताकि स्कूली बच्चों को अपनी जान बचाने के तरीके आसानी से समझाया जा सके. इन स्कूली बच्चों को फायरिंग के वक्त अपनी जान बचाने के लिए स्कूल में लगे डेस्क के नीचे छिपने की ट्रेनिंग दी जा रही है और अगर गोलीबारी ज्यादा होती है तो स्कूल में ही बने बंकर में छिपने की भी ट्रेनिंग दी जा रही है.

स्कूल के शिक्षकों के मुताबिक की ट्रेनिंग बहुत जरूरी है क्योंकि जिस तरह की हिमाकत पाकिस्तान ने की है उसको उसका जवाब दिया जाना चाहिए. वे मानते हैं कि पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता और अगर पाकिस्तान किसी तरीके के दुस्साहस पर उतर आता है बच्चों को जान बचाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. स्कूली बच्चों का दावा है कि वे पाकिस्तान की फायरिंग से अक्सर प्रभावित होते हैं और इस तरह की ट्रेनिंग उन्हें मुश्किल समय में जान बचाने के लिए मददगार साबित हो सकती है

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