RBI MPC: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू, 6 अगस्त को गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे फैसलों का एलान

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RBI MPC: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फरवरी में ब्याज दरों में ढील देने का चक्र शुरू किया था और तब से अब तक तीन चरणों में अल्पकालिक उधार दर (रेपो) में 100 आधार अंकों की कटौती की है। गवर्नर मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय दर निर्धारण समिति- मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) – बुधवार (6 अगस्त) को अगली द्विमासिक नीति दर की घोषणा करने वाली है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली दर निर्धारण समिति की बैठक सोमवार को शुरू हो गई। तीन दिवसीय बैठक में द्विमासिक मौद्रिक नीति तय करने के लिए चर्चा होगी। जानकारों का मानना है कि अगस्त एमपीसी बैठक के दौरान ब्याज दरों में नरमी के चक्र के स्थिर रहने की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फरवरी में ब्याज दरों में ढील देने का चक्र शुरू किया था और तब से अब तक तीन चरणों में अल्पकालिक उधार दर (रेपो) में 100 आधार अंकों की कटौती की गई है। गवर्नर मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय दर निर्धारण समिति- मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)- बुधवार (6 अगस्त) को अगली द्विमासिक नीति दर की घोषणा करने वाली है।

अगस्त की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखती है आरबीआई एमपीसी
विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक इस बार यथास्थिति बनाए रख सकता है और अमेरिका की ओर से 7 अगस्त से भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद और अधिक मैक्रो डेटा का इंतजार कर सकता है। हालांकि, उद्योग जगत के एक वर्ग को बुधवार को ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि ऋण नीति जून के लिए कम मुद्रास्फीति और 25 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ के हालिया घटनाक्रम पर आधारित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जून में नीति में पहले से ही 26 प्रतिशत टैरिफ को शामिल कर लिया गया था, जो अप्रैल में स्थगित दर थी।
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टैरिएफ के एलान के बाद केंद्रीय बैंक विकास के आंकड़ों को कैसे देखता है, इस पर रहेगी नजर
सबनवीस ने कहा, “इसलिए, टैरिफ से वास्तव में विकास पर नजरिया नहीं बदलेगा, हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि आरबीआई इस आंकड़े को कैसे देखता है। वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान में 0.1-0.2 प्रतिशत की मामूली कमी हो सकती है, यानी 3.7 प्रतिशत के बजाय 3.5-3.6 प्रतिशत।”

हालांकि, वर्तमान संदर्भ में, अर्थव्यवस्था के लिए तेल की लागत भी एक विचारणीय बात होगी। उन्होंने कहा, “इसलिए, इस बार हमें रुख या नीतिगत दर में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है। लचीले विकास के मोर्चे पर कुछ राहत मिलने के साथ ही रुख अधिक सतर्क रहेगा।” केयरएज रेटिंग्स ने आगे कहा कि पिछली दरों में कटौती का अधूरा लाभ लोगों तक पहुंचाने के मद्देनजर, आरबीआई द्वारा आगे और कटौती नहीं करने की उम्मीद है, ताकि पहले के उपायों का पूरा प्रभाव दिखने के लिए समय मिल सके।

खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक की टॉलरेंस बैंड के भीतर
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी से 4 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। जून में यह 2.1 प्रतिशत थी। सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत पर बनी रहे, तथा दोनों तरफ 2 प्रतिशत का मार्जिन हो। सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत पर बनी रहे, और दोनों तरफ 2 प्रतिशत का मार्जिन हो।

वित्त वर्ष 2026 की औसत महंगाई अनुमान में कटौती कर सकती है एमपीसी
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि हाल के सीपीआई इस कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई के नरम रहने का संकेत देते हैं। एमपीसी वित्त वर्ष 2026 के लिए जून 2025 की बैठक में जताए गए अपने महंगाई अनुमान 3.7 प्रतिशत में कटौती कर सकती है।

नायर ने कहा, “इसके अलावा, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ जीडीपी वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा करेंगे, इससे रुपया भी स्थिर होगा। हमारे विचार में, अगस्त 2025 की नीति समीक्षा में 25 आधार अंकों की अंतिम दर कटौती की ओर संतुलन थोड़ा झुका हुआ है।” उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी से 4 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। जून में यह 2.1 प्रतिशत थी।

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