WORLD : बच्चों की मौत का लेंगे बदला… युद्ध किस ओर जाएगा ईरान के सुप्रीम लीडर ने दिए 5 संकेत

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ईरान अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने देश के नाम संदेश में ये क्लियर कर दिया. जाहिर है अगर बात अस्तित्व की हो और लड़ने के लिए लोग तैयार हों तो कोई युद्ध तब तक नहीं समाप्त हो सकता, जब तक दुश्मन हार न मान ले.

पिता और पत्नी सहित अपनों की मौत के तुरंत बाद युद्ध के दौरान ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनने वाले अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने आज देश के नाम पहला संदेश जारी किया. संदेश क्लियर था ‘बदला’. बदला ईरान के एक स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों की मौत का, सेना और शासन से जुड़े अधिकारियों की मौत का, अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का. मुजतबा की लिस्ट लंबी है और जाहिर है इसीलिए उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक बदला पूरा नहीं हो जाता, ये युद्ध नहीं रुकने वाला. ये ईरान के अस्तित्व की लड़ाई है.

दूसरा मैसेज-एकजुटता
मुजतबा खामेनेई के भाषण के संकेतों को समझने की कोशिश करें तो वो ‘अपनों’ को खोने के बाद भी खुद को पूरी तरह संतुलित कर चुके हैं. इसका साफ संकेत उनके भाषण में ईरान के लोगों की एकता पर जोर बताता है. अयातुल्ला अली खामेनेई के जिंदा रहते और मौत से कुछ दिनों पहले ही ईरान में धरने-प्रदर्शन हो रहे थे. मगर आज जब मुजतबा ने भाषण दिया तो उन्होंने ईरानी लोगों की एकता पर जोर दिया. मैसेज क्लियर था कि आपस के विवाद चाहे कोई भी हों, वो बाद में सुलझा लिए जाएंगे. अभी समय दुश्मन से एकजुट होकर लड़ने का है. क्योंकि ये ईरान के होने और कई टुकड़ों में बंटने का सवाल है.

तीसरा मैसेज-मुआवजा लेंगे
नये सुप्रीम लीडर खामेनेई ने ये भी साफ-साफ बता दिया कि ईरान को इस युद्ध में जितना भी नुकसान होगा, उसका मुआवजा दुश्मन से ही वसूला जाएगा. इससे ईरान की जनता में लड़ने का नया जज्बा पैदा करने की कोशिश की गई है. अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं. खासकर तेल सप्लाई वाले बुनियादी ढांचे को. मुजतबा ने मुआवजे की बात कहकर अपनी जनता के साथ दुश्मनों के साथ दुनिया को भी संदेश दिया है कि बदला पूरा होने के बाद भी बगैर मुआवजा दिए युद्ध समाप्त नहीं होने वाला.

चौथा मैसेज-लड़ाकों की तारीफ
मुजतबा ने सेना के साथ लड़ाकों का जिक्र किया. इसका साफ मतलब था कि वो हिजबुल्लाह और हुती विद्रोहियों का जिक्र कर रहे थे. मुजतबा ने कहा कि इस युद्ध में लड़ाकों ने बहुत अच्छा काम किया है. इसके जरिए मुजतबा ने क्लियर मैसेज दिया कि वो भी अपने पिता की तरह हिजबुल्लाह और हुती विद्रोहियों का सपोर्ट करते रहेंगे और हौसला बढ़ाकर उनका मनोबल भी बढ़ा दिया.

पांचवा मैसेज-होर्मुज और खाड़ी
इसके साथ ही एक लीडर के रूप में मुजतबा ने रणनीति भी तय कर दी. उन्होंने साफ किया कि युद्ध समाप्त होने तक होर्मुज बंद रहेगा. उन्होंने इसको बंद रखने और इसका फायदा उठाने का भी सेना और लड़ाकों को विजय मंत्र दे दिया. इसके साथ ही उन्होंने अरब देशों पर तब तक हमले जारी रखने का निर्देश दे दिया जब तक वे अपने अमेरिकी सैन्य अड्डे बंद नहीं करते हैं.

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