पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे में भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच सहयोग को रक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक समीकरणों में बदलाव के बीच हो रही है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के अलावा इस दौरे का एक उद्देश्य भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच आपसी रणनीतिक तालमेल गहरा करना भी है।
दरअसल भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को एक सक्रिय साझेदार के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साझा मंच कवॉड में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को अगले स्तर पर ले जाना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

त्रिपक्षीय साझेदारी: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की अनिश्चितता ने समान विचार वाले देशों के बीच सहयोग की जरूरत बढ़ाई है। यह देखा जा सकता है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक लचीलेपन और तकनीकी सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह सहयोग एक औपचारिक सैन्य गठबंधन की दिशा में जाने की बजाय क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्र संबंधी कानून के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने का प्रयास है।

