WORLD : ‘हम युद्ध नहीं चाहते, पर न्यूक्लियर हमारा अधिकार’ ट्रंप की दनादन धमकियों पर ईरानी राष्ट्रपति की दहाड़

0
21

ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध के बीच जो बड़ा अपडेट है, वो ये कि एक बार फिर दोनों देश पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता के लिए बैठ सकते हैं. हालांकि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकियां दी हैं और अब इस पर ईरानी राष्ट्रपति ने कहा है कि युद्ध वो भी नहीं चाहते लेकिन आत्मरक्षा उनका अधिकार है.

तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया है कि उनका देश किसी भी तरह के युद्ध का पक्षधर नहीं है और मौजूदा हालात में केवल आत्मरक्षा के तहत कदम उठा रहा है. ईरानी स्टूडेंट न्यूज एजेंसी के मुताबिक पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया है और न ही उसका ऐसा कोई इरादा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना तेहरान की प्राथमिकता है.


राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों देशों ने नागरिक ढांचे को निशाना बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. उन्होंने इसे मानवाधिकारों पर दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया. पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की, उन्होंने कहा कि ट्रंप के पास ईरान को उसके परमाणु अधिकारों से वंचित करने का कोई ठोस कारण नहीं है.


‘न्यूक्लियर हमारा अधिकार है, कोई नहीं छीन सकता’

मसूद पेजेश्कियन सवाल उठाते हुए कहा –

‘ट्रंप कहते हैं कि ईरान अपने न्यूक्लियर अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन वह यह नहीं बताते कि किस जुर्म के लिए. वह कौन होते हैं किसी देश को उसके अधिकारों से वंचित करने वाले?
संबंधित खबरें

रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर तनाव बना हुआ है. इसी बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि देश अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा.
वार्ता के प्रतिनिध कालिबाफ ने कहा- स्थायी शांति दो

वहीं ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कालिबफ ने भी कहा कि उनका देश स्थायी शांति चाहता है. एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि ईरान की नीयत स्पष्ट है और वह ऐसी स्थिति चाहता है, जहां भविष्य में युद्ध की आशंका न रहे. उन्होंने कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका पर भरोसे की कमी है, लेकिन हम स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं. आपको बता दें कि इस्लामाबाद में पहले दौर की वार्ता के वक्त भी ऐसा ही हुआ था और ईरान ने कहा था कि उसे अमेरिका की बातों पर विश्वास नहीं है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here