पाकिस्तान ने शुक्रवार को चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अपनी पहली स्वदेशी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO-1) सैटेलाइट लॉन्च की। इसे लेकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर सैटेलाइट की तस्वीर साझा करते हुए लिखा: “ऊंची उड़ान भरते हुए! देश के लिए गर्व का लम्हा, जब पाकिस्तान ने चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अपनी पहली स्वदेशी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO-1) सैटेलाइट को फख्र के साथ लॉन्च किया।”उन्होंने आगे कहा कि यह सैटेलाइट अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में पाकिस्तान की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। शरीफ ने सैटेलाइट को विकसित करने वाली संस्था SUPARCO (Space & Upper Atmosphere Research Commission) और उसके वैज्ञानिकों को उनकी कड़ी मेहनत के लिए बधाई दी।

सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोलिंग की बाढ़
पाकिस्तान सरकार ने इसे गर्व का क्षण बताया, वहीं सोशल मीडिया पर लोगों ने इसकी आलोचना और मजाक किया। कुछ लोगों का मानना है कि सैटेलाइट की डिजाइन और इसके लॉन्च के पीछे चीन की मदद, पाकिस्तान की स्वदेशी क्षमता को लेकर सवाल खड़े करती है।
हालांकि, जैसे ही प्रधानमंत्री ने यह पोस्ट की, नेटिज़ेंस ने सैटेलाइट के डिजाइन और पाकिस्तान की उपलब्धि का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर लोग इसे पानी की टंकी, फर्श साफ करने के सॉल्यूशन की बोतल और अन्य अजीबोगरीब चीजों से तुलना करने लगे।

एक यूजर ने बाढ़ वाले इलाके का एडिट किया हुआ वीडियो शेयर करते हुए लिखा: “हेलो भाई, मोटर बंद करो, अब भर गया पानी पूरे पड़ोस तक आ रहा है।” एक अन्य ने सफेद पानी की टंकी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा:”सेम टू सेम।” किसी ने फ्लोर-क्लीनिंग सॉल्यूशन की बोतल की तस्वीर डालकर इसे सैटेलाइट से तुलना कर दी। एक और यूजर ने लिखा: “अब किसकी पानी की टंकी चुरा लिए हो बे?”

सैटेलाइट की तकनीकी विशेषताएं
ईओ-1 सैटेलाइट पाकिस्तान के कृषि, शहरी विकास, और जल संसाधनों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मदद करेगा। इसके जरिए फसलों की उत्पादकता का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा और शहरीकरण पर नजर रखी जा सकेगी। यह अंतरिक्ष क्षेत्र में पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ईओ-1 सैटेलाइट का लॉन्च पाकिस्तान के लिए तकनीकी प्रगति का प्रतीक हो सकता है, लेकिन इस उपलब्धि को लेकर होने वाली ट्रोलिंग ने इसे सोशल मीडिया पर एक अलग ही दिशा में चर्चा का विषय बना दिया है।







क्या है स्वामित्व योजना?
मौनी बाबा ने संकल्प लिया है कि जिस तरीके से अयोध्या में राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ है। उसी तरीके से काशी और मथुरा में भी मंदिर का निर्माण हो। इसके लिए वह अनोखी साधना में मग्न रहते हैं। ऐसे में बाबा ने पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक दो लाख से अधिक दीप दान का भी संकल्प लिया है। इस शिविर में 12 बड़ी शिवलिंग भी हैं। जिसको 5 करोड़ 51 लाख से अधिक रुद्राक्ष के दानों से ढका गया है। । इस शिविर में अनोखी एक और खास बात यह है कि इस शिविर में 4 तरीके के अलग-अलग रंग के त्रिशूल भी हैं। जो आकर्षण का केंद्र बने हैं। देश में आतंकी हमला ना हो, देश में शांति बनी रहे , देश की अर्थव्यवस्था दुरुस्त रहे और महंगाई और वैश्विक महामारी न फैले इसके लिए लगाए गए हैं। हर रोज मौनी बाबा पूजा के दौरान अनोखे अंदाज से पूरे शिविर की परिक्रमा खास पूजा और लेट करके हैं। शिविर में कई कुंड भी बनाए गए हैं। जहां पर मौनी बाबा हर दिन हवन पूजा करते हैं। इस दौरान हर रोज भारी संख्या में कल्पवासी या कहें कि श्रद्धालु उनकी इस साधना के गवाह भी बनते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मौनी बाबा द्वारा की जा रही इस अनोखी साधना या कहें कि पूजा पाठ से सभी काफी प्रभावित हैं।

क्या है विवाद?