Sunday, September 20, 2026
Home Blog Page 90

NATIONAL : MGNREGA खत्म, ‘जी राम जी’ शुरू: 125 दिन के काम की गारंटी; लेकिन राज्यों की जेब पर भारी नया कानून, जानें सबकुछ

0

MGNREGA vs VB-G RAM G: मनरेगा (MGNREGA) की जगह अब नया ‘जी राम जी’ (VB-G RAM G) कानून लागू है। इसमें 125 दिन की रोजगार की गारंटी तो दी गई है, लेकिन राज्यों पर 40% मजदूरी का भारी बोझ भी डाला गया है। जानिए नए ग्रामीण रोजगार मिशन के 7 बड़े बदलाव और आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा।

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिहाज से 21 दिसंबर, 2025 का दिन एक बड़े ‘टर्निंग पॉइंट’ के रूप में दर्ज हो गई। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ यानी VB-G RAM G (जी राम जी) अब देश का कानून बन चुका है।

यह केवल एक योजना का नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना-महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)- का बुनियादी ढांचा बदलने जैसा है। 20 साल पुराने ‘मांग आधारित अधिकार’ (Right based) मॉडल को अब ‘बजट-सीमित अवसंरचना मिशन’ (Budget-capped Infrastructure Mission) में तब्दील कर दिया गया है।

आइए सवाल-जवाब से समझें कि क्या नया कानून पुराने मनरेगा से आर्थिक और व्यावहारिक तौर पर कितना अलग है और इसका आपकी जेब व राज्य के खजाने पर क्या असर होगा।

सवाल: सबसे बुनियादी बदलाव क्या है? क्या काम के दिन बढ़े हैं या घटे हैं?

जवाब: कागज पर देखें तो गारंटी बढ़ी है, लेकिन शर्तों के साथ।

पुराना (MGNREGA 2005): इसमें 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी। सबसे अहम बात यह थी कि यह ‘मांग आधारित’ (Demand Driven) था। यानी अगर मजदूर काम मांगे, तो सरकार को काम देना ही होगा।

नया (VB-G RAM G 2025): इसमें वैधानिक गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। लेकिन, अब यह मांग पर नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा तय “नॉर्मेटिव एलोकेशन” (Normative Allocation) पर निर्भर करेगा। यानी काम उतना ही मिलेगा जितना बजट पहले से आवंटित है।

सवाल: राज्यों के वित्त (State Finances) पर इसका क्या असर होगा? सबसे बड़ा विवाद क्यों है?

जवाब: यह इस कानून का सबसे बड़ा ‘पेच’ है। केंद्र ने मजदूरी का बड़ा बोझ राज्यों पर डाल दिया है।

पुराना नियम: अकुशल मजदूरी (Unskilled Wages) का 100% पैसा केंद्र सरकार देती थी। राज्यों पर मजदूरी का कोई बोझ नहीं था।
नया नियम: अब यह 60:40 का फॉर्मूला है। मजदूरी का 60% केंद्र देगा और 40% राज्य सरकार को देना होगा।

अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, नई योजना की कुल सालाना लागत लगभग ₹1.51 लाख करोड़ होगी। इसमें से राज्यों को अब हर साल ₹55,000 करोड़ से अधिक का इंतजाम करना होगा, जो पहले शून्य था। यह राज्य के बजट पर सीधा और भारी झटका है।

सवाल: अगर सूखे या संकट के समय काम की मांग अचानक बढ़ गई, तो पैसा कौन देगा?

उत्तर: नए कानून ने ‘ओपन-एंडेड’ फंडिंग (असीमित निधि) का रास्ता बंद कर दिया है।

पुराना नियम: मनरेगा ‘ओपन-एंडेड’ थी। अगर सूखा पड़ा और मांग बढ़ी, तो केंद्र को कानूनी रूप से अतिरिक्त पैसा जारी करना पड़ता था।
नया नियम (अतिरिक्त व्यय प्रावधान): अब साल की शुरुआत में ही ‘लिमिट’ तय होगी। अगर किसी राज्य में मांग, केंद्र द्वारा तय आवंटन (Normative Allocation) से ज्यादा होती है, तो उस अतिरिक्त खर्च का 100% भुगतान राज्य को खुद करना होगा। केंद्र एक पैसा ज्यादा नहीं देगा।

सवाल: क्या मजदूरों को अब साल भर काम मिल सकेगा?

उत्तर: नहीं, नए कानून में ‘अनिवार्य छुट्टी’ का प्रावधान है।

पुराना नियम: यह एक सुरक्षा जाल था, साल भर काम उपलब्ध रहता था।
नया नियम: कटाई और बुवाई के पीक सीजन (Peak Season) के दौरान 60 दिनों का अनिवार्य विराम (Mandatory Break) लागू किया गया है।

तर्क: सरकार का कहना है कि इससे खेती के समय किसानों/जमींदारों को मजदूरों की कमी नहीं होगी। आलोचकों का कहना है कि यह भूमिहीन मजदूरों की आय सुरक्षा को खतरे में डालता है।

सवाल: गांव में कौन सा काम होगा, यह फैसला अब कौन लेगा?

उत्तर: सत्ता का विकेंद्रीकरण (Decentralization) खत्म होकर केंद्रीकरण (Centralization) की ओर बढ़ गया है।

पुराना नियम: ग्राम सभा सुप्रीम थी। गांव के लोग तय करते थे कि उन्हें तालाब चाहिए या सड़क।
नया नियम: ग्राम पंचायतें योजना बनाएंगी, लेकिन उसे “विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक” के हिसाब से होना चाहिए।

यह स्टैक चार क्षेत्रों पर फोकस करता है- जल सुरक्षा, कोर इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका और जलवायु। साथ ही, सभी योजनाओं को ‘पीएम गति शक्ति’ के GIS प्लेटफॉर्म से मैप करना अनिवार्य होगा।

NATIONAL : केंद्र का बड़ा फैसला, 40 से ज्यादा पेट्रोकेमिकल्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत

0

केंद्र सरकार ने पेट्रोकेमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी राहत दी है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते पेट्रोकेमिकल्स से लेकर तमाम चीजों की ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित है। इसकी वजह से भारतीय उद्योगों पर पड़ रहे असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की समिति ने पेट्रोकेमिकल्स और पॉलिमर्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को अस्थायी रूप से खत्म कर दिया है। यह छूट 2 अप्रैल से 30 जून तक लागू रहेगी, जिससे घरेलू उद्योगों की लागत घटेगी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा।

40 से ज्यादा केमिकल्स पर जीरो ड्यूटी
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक 40 से अधिक केमिकल प्रोडक्ट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को तीन महीने के लिए शून्य कर दिया गया है। इसमें एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, मेथनॉल और विनाइल क्लोराइड जैसे अहम केमिकल्स शामिल हैं, जो कई इंडस्ट्रीज की बैकबोन माने जाते हैं।

प्रोडक्ट पहले BCD (%) कैटेगरी
एनहाइड्रस अमोनिया 6.5% बेसिक केमिकल
टोल्यून (Toluene) 6.5% एरोमैटिक केमिकल
स्टाइरीन (Styrene) 6.5% मोनोमर
डाइक्लोरोमीथेन 6.5% सॉल्वेंट
विनाइल क्लोराइड मोनोमर (VCM) 6.5% मोनोमर
मेथनॉल 6.5% फीडस्टॉक केमिकल
आइसोप्रोपाइल अल्कोहल (IPA) 6.5% इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट
मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) 6.5% इंटरमीडिएट
प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) 6.5% पॉलिएस्टर रॉ मैटेरियल
फिनॉल 6.5% इंडस्ट्रियल केमिकल
एसीटिक एसिड 6.5% इंटरमीडिएट
टोल्यून डायआइसोसाइनेट (TDI) 7.5% पॉलियूरीथेन फीडस्टॉक
पॉलीओल्स 7.5% पॉलियूरीथेन इंटरमीडिएट
ABS 7.5% पॉलिमर
PVC 10% पॉलिमर
PET 10% पॉलिमर
पॉलीयूरीथेन 7.5% पॉलिमर
एपॉक्सी रेजिन 7.5% स्पेशलिटी केमिकल

किन सेक्टर्स को मिलेगा सीधा फायदा
इस फैसले का सबसे बड़ा असर कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर पड़ेगा। पॉलिमर्स और रेजिन जैसे ABS, PVC, PET और पॉलीयूरीथेन की लागत घटने से इन इंडस्ट्रीज के लिए इनपुट कॉस्ट कम होगी और मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।

इंपोर्ट लागत घटेगी, लेकिन चुनौतियां बरकरार
ड्यूटी हटने से इंपोर्ट की लैंडेड कॉस्ट कम होगी, खासकर उन केमिकल्स में जहां भारत आयात पर ज्यादा निर्भर है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि सप्लाई टाइटनेस और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं इस राहत के असर को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी जारी रहेगी
सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से एंटी-डंपिंग और सेफगार्ड ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी जहां पहले से ये ड्यूटी लागू है, वहां वह जारी रहेगी।

FTA देशों का एडवांटेज घटेगा
इस कदम से FTA और CEPA के तहत मिलने वाला टैरिफ एडवांटेज अस्थायी रूप से कम हो सकता है। क्योंकि अब सभी देशों के लिए बेसिक ड्यूटी समान रूप से शून्य हो गई है, जिससे कीमतों का अंतर कम हो जाएगा।

BUSINESS : जून-तिमाही में घरों की बिक्री जनवरी-2023 के बाद सबसे कम:ईरान युद्ध और सप्लाई चेन संकट से सेंटीमेंट बिगड़ा; टॉप-7 शहरों में 90,715 घर बिके

देश में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान रेसिडेंशियल घरों की बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। यह जनवरी 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस बात की जानकारी रियल एस्टेट कंसलटेंट फर्म एनरॉक ने दी।ईरान युद्ध के कारण बनी अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से देश भर में बायर्स का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। वित्त-वर्ष 2026 में कुल 4,04,005 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जो FY23 के बाद सबसे कम है।

घरों की बिक्री 6% घटी, पुणे में सबसे ज्यादा 15% गिरावट

एनरॉक के डेटा के अनुसार, इस तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6% घटकर 90,715 यूनिट्स रह गई है, जबकि Q2 2025 में 96,285 यूनिट्स बिकी थीं।तिमाही-दर-तिमाही आधार पर देखें तो हाउसिंग सेल्स में 11% की गिरावट आई है। टॉप 7 शहरों में से केवल कोलकाता में 10%, हैदराबाद में 2% और बेंगलुरु में 1% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है।

दूसरी तरफ पुणे में इस तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा 15% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट, जीसीसी आधारित रोजगार केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर में अभी भी सबसे ज्यादा सेल्स ग्रोथ है।

एमएमआर और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही

देश के टॉप-7 शहरों की कुल बिक्री में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही है। Q2 2026 में इन दोनों शहरों में कुल मिलाकर लगभग 43,995 यूनिट्स की बिक्री हुई है।

एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि ये आंकड़े अनुमान के मुताबिक ही हैं, क्योंकि पूरे सेक्टर पर मिडल ईस्ट वॉर का असर साफ दिख रहा था।

इसके अलावा युद्ध के कारण पैदा हुई रुकावटों और आईटी/आईटीईएस सेक्टर में एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं ने बायर्स को फिलहाल इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है।

नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग सालाना 7% बढ़ी

मार्केट में नए घरों की लॉन्चिंग में सालाना आधार पर 7% की बढ़ोतरी हुई है। यह Q2 2025 के 98,625 यूनिट्स से बढ़कर Q2 2026 में 1,06,000 यूनिट्स पर पहुंच गई।

नए सप्लाई में एमएमआर और बेंगलुरु का दबदबा रहा, जो कुल नई इन्वेंट्री का 53% है। कुल नई लॉन्चिंग में एमएमआर, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 81% रही।

बेंगलुरु: यहां Q2 2026 में नई सप्लाई में सालाना आधार पर 41% की भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन तिमाही आधार पर 11% की गिरावट आई।
एमएमआर: यहां नए सप्लाई में सालाना 23% की बढ़ोतरी हुई, जबकि तिमाही आधार पर 14% की गिरावट रही।
तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी

अनुज पुरी ने बताया कि बड़े और लिस्टेड डेवलपर्स ने 2025 में खरीदे गए बड़े लैंड पार्सल पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए, जिससे सालाना आधार पर नए लॉन्च मजबूत रहे।

हालांकि, तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी है, क्योंकि कमजोर बायर्स सेंटीमेंट के कारण कई डेवलपर्स ने नए सप्लाई की रफ्तार धीमी कर दी है।

WORLD : जून-तिमाही में घरों की बिक्री जनवरी-2023 के बाद सबसे कम:ईरान युद्ध और सप्लाई चेन संकट से सेंटीमेंट बिगड़ा; टॉप-7 शहरों में 90,715 घर बिके

0

देश में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान रेसिडेंशियल घरों की बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। यह जनवरी 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस बात की जानकारी रियल एस्टेट कंसलटेंट फर्म एनरॉक ने दी।

ईरान युद्ध के कारण बनी अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से देश भर में बायर्स का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। वित्त-वर्ष 2026 में कुल 4,04,005 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जो FY23 के बाद सबसे कम है।

घरों की बिक्री 6% घटी, पुणे में सबसे ज्यादा 15% गिरावट

एनरॉक के डेटा के अनुसार, इस तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6% घटकर 90,715 यूनिट्स रह गई है, जबकि Q2 2025 में 96,285 यूनिट्स बिकी थीं।

तिमाही-दर-तिमाही आधार पर देखें तो हाउसिंग सेल्स में 11% की गिरावट आई है। टॉप 7 शहरों में से केवल कोलकाता में 10%, हैदराबाद में 2% और बेंगलुरु में 1% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है।

दूसरी तरफ पुणे में इस तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा 15% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट, जीसीसी आधारित रोजगार केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर में अभी भी सबसे ज्यादा सेल्स ग्रोथ है।

एमएमआर और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही

देश के टॉप-7 शहरों की कुल बिक्री में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही है। Q2 2026 में इन दोनों शहरों में कुल मिलाकर लगभग 43,995 यूनिट्स की बिक्री हुई है।

एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि ये आंकड़े अनुमान के मुताबिक ही हैं, क्योंकि पूरे सेक्टर पर मिडल ईस्ट वॉर का असर साफ दिख रहा था।

इसके अलावा युद्ध के कारण पैदा हुई रुकावटों और आईटी/आईटीईएस सेक्टर में एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं ने बायर्स को फिलहाल इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है।

नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग सालाना 7% बढ़ी

मार्केट में नए घरों की लॉन्चिंग में सालाना आधार पर 7% की बढ़ोतरी हुई है। यह Q2 2025 के 98,625 यूनिट्स से बढ़कर Q2 2026 में 1,06,000 यूनिट्स पर पहुंच गई।

नए सप्लाई में एमएमआर और बेंगलुरु का दबदबा रहा, जो कुल नई इन्वेंट्री का 53% है। कुल नई लॉन्चिंग में एमएमआर, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 81% रही।

बेंगलुरु: यहां Q2 2026 में नई सप्लाई में सालाना आधार पर 41% की भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन तिमाही आधार पर 11% की गिरावट आई।
एमएमआर: यहां नए सप्लाई में सालाना 23% की बढ़ोतरी हुई, जबकि तिमाही आधार पर 14% की गिरावट रही।
तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी

अनुज पुरी ने बताया कि बड़े और लिस्टेड डेवलपर्स ने 2025 में खरीदे गए बड़े लैंड पार्सल पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए, जिससे सालाना आधार पर नए लॉन्च मजबूत रहे।

हालांकि, तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी है, क्योंकि कमजोर बायर्स सेंटीमेंट के कारण कई डेवलपर्स ने नए सप्लाई की रफ्तार धीमी कर दी है।

घरों की औसत कीमतों में 7% की सालाना बढ़ोतरी, NCR में सबसे ज्यादा उछाल

टॉप-7 शहरों में औसत रेसिडेंशियल कीमतों में तिमाही आधार पर 1% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन सालाना आधार पर यह 7% बढ़ी है। पिछले साल देखी गई डबल-डिजिट ग्रोथ के मुकाबले इस तिमाही में सालाना ग्रोथ रेट कम हुआ है।
दिल्ली-एनसीआर में Q2 2026 के दौरान सालाना आधार पर सबसे ज्यादा 13% की कीमत ग्रोथ देखी गई, जबकि तिमाही आधार पर यह ग्रोथ 2% रही। इसके बाद बेंगलुरु 8% की सालाना कीमत बढ़ोतरी के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
टॉप 7 शहरों में उपलब्ध कुल इन्वेंट्री (बिना बिके घर) Q2 2026 के अंत तक बढ़कर 6.16 लाख यूनिट्स से ज्यादा हो गई है। Q2 2025 के अंत में यह आंकड़ा 5.62 लाख यूनिट्स था, जिसमें सालाना 10% की बढ़ोतरी हुई है।
बेंगलुरु में इन्वेंट्री में सबसे ज्यादा 34% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। यहाँ इन्वेंट्री Q2 2025 के अंत में लगभग 58,890 यूनिट्स थी, जो Q2 2026 के अंत तक बढ़कर लगभग 79,180 यूनिट्स हो गई है।
क्या होती है इन्वेंट्री?

रियल एस्टेट भाषा में ‘इन्वेंट्री’ का मतलब उन तैयार या निर्माणाधीन घरों से होता है जो डेवलपर्स के पास बेचने के लिए उपलब्ध हैं लेकिन अभी तक बिके नहीं हैं।

मार्केट सेंटीमेंट बिगड़ने के मुख्य कारण

मिडल ईस्ट में चल रहा युद्ध, ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें और आईटी सेक्टर में एआई के कारण पैदा हुई नौकरियों की अनिश्चितता।

WORLD : मुर्दाघरों में जगह नहीं, AC के लिए भगदड़: यूरोप में कहर बरपा रही गर्मी, आग बुझाने वाली गाड़ियां बरसा रहीं पानी

0

यूरोप में पिघलती सड़कें, ठंडी हवा के लिए हाहाकार…यह जलती हुई धरती की वो हकीकत है जिसने यूरोप को ओवन बना दिया है। जब लाशों को रखने के लिए मुर्दाघर छोटे पड़ जाएं और एक सांस भर ठंडी हवा के लिए सड़कों पर दंगे होने लगें, तो समझ लीजिए पानी सिर से ऊपर जा चुका है। क्या हम अपनी ही गलतियों से अपनी कब्र खोद रहे हैं?

लंदन, पेरिस, मैड्रिड…पूरा यूरोप इन दिनों आग की भट्टी बना हुआ है। सड़कें पिघल रही हैं, ट्रेनें रुक गई हैं और अस्पतालों में मरीजों की लाइन लगी है। लेकिन सबसे दर्दनाक हालात मौत के बाद दिख रहे हैं। मुर्दाघरों में लाशें रखने की जगह नहीं बची है।

शवों को रखने के लिए अतिरिक्त ठंडे कमरे और अस्थायी मोर्ग बनाए जा रहे हैं, फिर भी जगह कम पड़ रही है। कुछ जगहों पर शवों को बाहर की तरफ भी रखना पड़ रहा है। परिवार वाले रो-रोकर अपने स्वजनों के शव लेने आ रहे हैं, लेकिन जगह न होने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। यह नजारा देखकर हर कोई सिहर उठता है। गर्मी ने सिर्फ जिंदा लोगों को ही नहीं, मरने के बाद भी लोगों को परेशान कर रखा है।

आसमान से बरस रही आग
विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आंकड़े बेहद डरावने हैं। 21 जून से अब तक पूरे यूरोप में 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इसमें से अकेले फ्रांस में लगभग 1,000 लोगों की जान गई है। स्पेन, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन भी इस जानलेवा गर्मी से बुरी तरह जूझ रहे हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, ये मौतें सिर्फ सीधे लू लगने से नहीं हो रही हैं। अत्यधिक गर्मी की वजह से दिल का दौरा, भयंकर डिहाइड्रेशन और सांस की बीमारियां अचानक बढ़ गई हैं। बुजुर्ग और बच्चे इसका सबसे पहला शिकार बन रहे हैं। फ्रांस में एक 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला की घर के अंदर ही बेहोश होने से मौत हो गई। मौतों का आंकड़ा इतनी तेजी से बढ़ा है कि प्रशासन को शवों के लिए अस्थायी मुर्दाघर बनाने पड़ रहे हैं।

इस भीषण संकट की पांच बड़ी बातें
पूरे यूरोप में 21 जून से अब तक 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें हुईं।
अकेले फ्रांस में गर्मी के कारण लगभग 1,000 लोगों ने जान गंवाई।
अत्यधिक तापमान से डामर की सड़कें पिघल रही हैं और रेल लाइनें मुड़ गई हैं।
हर घर में कूलर-एसी चलने के कारण कई शहरों में पावर कट हो रहा है।
भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में भयंकर आग सुलग रही है।

ठंडी हवा के लिए दुकानों पर झड़पें, पुलिस तैनात
आम जनता के बीच इस समय ठंडी हवा पाने की अंधी होड़ मची है। इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों से एयर कंडीशनर और कूलरों का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। लोग पुराने और कबाड़ हो चुके पंखों को भी मुंहमांगे दामों पर खरीद रहे हैं। दुकानों के बाहर ग्राहकों के बीच होने वाली हिंसक झड़पों को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। लोग राहत पाने के लिए दिनभर शॉपिंग मॉल्स में बैठे रहते हैं और रातें पार्कों या समंदर के किनारे गुजार रहे हैं।

FIFA WC: फीफा विश्वकप का सबसे बड़ा उलटफेर! पराग्वे ने 4 बार की चैंपियन जर्मनी को हराकर टूर्नामेंट से किया बाहर

0

चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी का फीफा विश्व कप 2026 अभियान राउंड ऑफ 32 में समाप्त हो गया। 120 मिनट तक 1-1 की बराबरी के बाद पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से जीत दर्ज कर प्री क्वार्टर फाइनल यानी अंतिम-16 में जगह बना ली। जर्मनी की टीम चार बार की चैंपियन रह चुकी है। उसने 1954, 1974, 1990 और 2014 में खिताब जीता था।

गुस्तावो अल्फारो की टीम ने पूरे मैच में शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन किया और जर्मनी के आक्रामक खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। गेंद पर अधिकांश समय जर्मनी का कब्जा रहा, लेकिन लेरॉय साने, फ्लोरियन विर्ट्ज और काई हैवर्ट्ज लगातार पराग्वे की मजबूत डिफेंस और गोलकीपर ऑरलैंडो गिल के सामने बेअसर रहे।

पहले हाफ में एनसिसो ने दिलाई बढ़त
पहले हाफ के अंतिम मिनटों में पराग्वे ने अपने गिने-चुने कॉर्नर में से एक का बेहतरीन फायदा उठाया। कॉर्नर पर मैनुअल नोयर ने गेंद को मुक्का मारकर दूर किया, लेकिन पराग्वे ने दोबारा गेंद पर कब्जा जमा लिया। इसके बाद मटियास गलार्सा ने शानदार क्रॉस दिया, जिस पर बिना किसी दबाव के मौजूद जूलियो एनसिसो ने शानदार हेडर लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी।

हैवर्ट्ज ने कराई वापसी, लेकिन जर्मनी जीत नहीं दिला सका
दूसरे हाफ में जर्मनी कहीं अधिक आक्रामक अंदाज में उतरा और 54वें मिनट में बराबरी हासिल कर ली। फ्लोरियन विर्ट्ज के बाएं फ्लैंक से आए सटीक क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने हेडर लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद जर्मनी लगातार विजयी गोल की तलाश में हमले करता रहा, जबकि पराग्वे धीरे-धीरे अपनी पूरी टीम को रक्षात्मक मोर्चे पर ले आया और जवाबी हमले के मौके का इंतजार करता रहा। हालांकि, उसे ऐसा कोई बड़ा मौका नहीं मिला।

रद्द हुआ जर्मनी का विजयी गोल, मुकाबला पहुंचा पेनल्टी तक
जर्मनी के कोच जूलियन नागेल्समान ने पेनल्टी से बचने के लिए अपने सभी आक्रामक खिलाड़ियों को मैदान पर उतार दिया। अतिरिक्त समय में जोनाथन ताह ने गोल भी कर दिया था, लेकिन वॉल्डेमार एंटोन द्वारा ऑरलैंडो गिल पर फाउल किए जाने के कारण रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। 120 मिनट के बाद भी स्कोर 1-1 रहा और मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ।

पेनल्टी शूटआउट में पराग्वे ने दिखाई मजबूती
जर्मनी ने अपने घरेलू समर्थकों के सामने पहले पेनल्टी लेने का फैसला किया, लेकिन शुरुआत ही खराब रही। पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने काई हैवर्ट्ज की पहली पेनल्टी बचा ली। इसके बाद दोनों टीमों के बीच गोल और चूक का सिलसिला चलता रहा। आखिर में जोसे कनाले ने बेहद शांत अंदाज में निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर पराग्वे को 4-3 से ऐतिहासिक जीत दिला दी। अब दक्षिण अमेरिकी टीम चार जुलाई को राउंड ऑफ-16 में फिलाडेल्फिया में फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता से भिड़ेगी।

पेनल्टी शूटआउट (पराग्वे 4-3 से जीता)

जर्मनी ने लिया था पहला किक

राउंड जर्मनी परिणाम पराग्वे परिणाम
1 काई हैवर्ट्ज मिस मौरिसियो गोल
2 जोशुआ किमिच गोल गुस्तावो गोमेज गोल
3 जमाल मुसियाला गोल मटियास गलार्सा गोल
4 निक वोल्टेमाडे मिस एंटोनियो सनाब्रिया मिस
5 नादीम अमीरी गोल फाबियन बालबुएना मिस
6 जोनाथन ताह मिस जोसे कनाले गोल

मैच के बाद क्या बोले खिलाड़ी और कोच?

गुस्तावो गोमेज (पराग्वे): इस एहसास को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मुझे अपने साथियों और पूरी टीम पर गर्व है। मैंने पिछले इंटरव्यू में भी कहा था कि यह टीम एक और मैच खेलने की हकदार है। हमने जितनी मुश्किल परिस्थितियां देखी हैं, उनमें हमारी एकजुटता सबसे बड़ी ताकत रही है। जर्मनी जानता था कि हमें हराने के लिए उसे असाधारण मेहनत करनी पड़ेगी।

ऑरलैंडो गिल (पराग्वे गोलकीपर): यह अविश्वसनीय खुशी का पल है। मुकाबला बेहद कठिन था। हमने पहले बढ़त बनाई, फिर उन्होंने बराबरी की, लेकिन उसके बाद हमने खुद को संभाले रखा। हमने हर पेनल्टी लेने वाले खिलाड़ी और हर छोटी-बड़ी चीज का पहले से विश्लेषण किया था। भगवान का शुक्र है कि मैं दो पेनल्टी बचा सका। किसी विश्व चैंपियन को बाहर करना हमारे लिए सम्मान की बात है। यह जीत पूरे पराग्वे के लोगों को समर्पित है।
जूलियन नागेल्समान (जर्मनी के मुख्य कोच): ड्रेसिंग रूम में गहरी निराशा है। फुटबॉल कभी-कभी ऐसा ही होता है। कुछ टीमें बेहद साधारण तरीके से भी जीत हासिल कर लेती हैं और आपको पूरे मैच में उन परिस्थितियों से बचना होता है। हमने अपने प्रतिद्वंद्वी को दबाव में डालने में बहुत देर कर दी। हमें गेंद को बॉक्स में ज्यादा बार पहुंचाना चाहिए था। मुकाबले का फैसला पेनल्टी तक नहीं जाना चाहिए था। हमारी बिल्ड-अप प्ले काफी धीमी रही।
काई हैवर्ट्ज (जर्मनी): मेरे पास शब्द नहीं हैं। यह मेरा दूसरा विश्व कप है और दोनों बार नतीजा निराशाजनक रहा। मैं सिर्फ माफी मांग सकता हूं। पिछले कुछ बड़े टूर्नामेंटों में हमने खराब फुटबॉल नहीं खेली, लेकिन हर बार कुछ न कुछ कमी रह गई। आज भी वही हुआ। हमें, खासकर खिलाड़ियों को, खुद का गंभीरता से आकलन करना होगा। मैं इसमें कोच को जिम्मेदार नहीं ठहराऊंगा।

NATIONAL : इंडिगो की अहमदाबाद-मुंबई फ्लाइट की सूरत में इमरजेंसी लैंडिंग:उड़ान के दौरान 3 साल का बच्चा बेहोश हुआ, समय पर इलाज मिलने से बची जान

0

अहमदाबाद से मुंबई जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-7018 में सोमवार शाम 3 साल का बच्चा बेहोश हो गया। उसकी हालत बिगड़ने पर पायलट ने मेडिकल इमरजेंसी घोषित की। फ्लाइट की सूरत एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बच्चे को सूरत के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

बच्चे की पहचान सौरभ के रूप में हुई है। फ्लाइट में मौजूद दो डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक इलाज देने की कोशिश की, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क कर सूरत एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति मांगी

मेडिकल इमरजेंसी की सूचना मिलते ही सूरत एयरपोर्ट को अलर्ट कर दिया गया। CISF, एयरपोर्ट की मेडिकल टीम और इंडिगो की ग्राउंड टीम ने पहले से तैयारी कर ली। विमान के उतरते ही डॉक्टर अंदर पहुंचे। बच्चे को प्राथमिक इलाज देने के बाद एम्बुलेंस से प्राइवेट हॉस्पिटल भेज दिया गया।

बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन और इंडिगो ने जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद फ्लाइट मुंबई के लिए रवाना हो गई। एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, इस इमरजेंसी लैंडिंग का दूसरी उड़ानों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा।

दिल्ली से मुंबई जा रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट में एक पैसेंजर की तबीयत बिगड़ गई। पैसेंजर की स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत मेडिकल इमरजेंसी घोषित की और जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराने का फैसला लिया।

दरअसल, इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-322 दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान एक पैसेंजर की तबीयत खराब हो गई। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स ने प्राथमिक स्तर पर पैसेंजर को सहायता उपलब्ध कराई, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति में सुधार नहीं होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क कर नजदीकी एयरपोर्ट पर लैंडिंग की अनुमति मांगी गई।

NATIONAL : राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आठों आरोपित जेल भेजे गए, सोमवार को फिर होगी पेशी; पुलिस करेगी रिमांड की मांग

0

 राम मंदिर में चढ़ावा चोरी में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद अयोध्या कोतवाली में गुरुवार को एफआईआर के बाद पुलिस ने आठ आरोपितों को जेल भेज दिया। चढ़ावा चोरी में गिरफ्तार आठों आरोपितों को पुलिस ने आज कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

फैजाबाद कोर्ट में सभी की स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की कोर्ट में पेशी हुई। पुलिस ने अभी आरोपियों की रिमांड नहीं ली है। मोहर्रम के अवकाश के कारण इन आठों की स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशी हुई। इन सभी की सोमवार को फिर कोर्ट में पेशी होगी और पुलिस कस्टडी डिमांड लेने का प्रयास करेगी।

एसआइटी की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने कल अयोध्या कोतवाली में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया। आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआइआर दर्ज कराई गई थी। मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू के अलावा ट्रस्ट कर्मी अनुकल्प मिश्र, इसका बहनोई लवकुश मिश्र, टिन्नू का भतीजा मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल व रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव के नाम एफआइआर में हैं। इनको जेल भेजा गया है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी आशुतोष त्रिपाठी इस मामले की विवेचना कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार तीन दिन की न्यायिक हिरासत के बाद आरोपितों को एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस इनकी रिमांड की मांग करेगी।

सबसे पहले टिन्नू भेजा गया जेल
चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग लेवल पर जांच की जा रही है। इनमें टिन्नू यादव का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि वह ट्रस्ट से जुड़े असरदार लोगों का करीबी बताया जाता है।

बैंक-गणना कर्मियों को नौकरी दिलाने वालों पर कसेगा शिकंजा

चढ़ावा चोरी मामले में एफआर के बाद अब उन लोगों पर पुलिस की विवेचना में शिकंजा कसेगा जिन लोगों ने आरोपितों की मदद की थी। किन लोगों की सिफारिश पर गणनाकर्मियों की भर्ती की गई, बैंक कर्मियों व अफसरों की क्या भूमिका थी और चूंकि गणना का पूरा कार्य बैंक के ही भरोसे था, इसलिए जवाबदेही तय होगी। पुलिस आरोपितों से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश करेगी। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन ने कल इस मामले में एफआइआर दर्ज कराई थी।

NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी में पूछताछ: चंपत राय का बयान दर्ज, डॉ. अनिल मिश्रा समेत 80 अन्य को नोटिस

0

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में करीब 140 गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी है। वहीं, बैंकिंग प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसले भी जांच के घेरे में हैं। जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं, गोपाल राव समेत 70-80 लोगों को नोटिस जारी किया गया है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय का बयान दर्ज किया। इसके साथ ही ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और अन्य संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया है। इस दौरान पुलिस ने चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा, बैंक में जमा कराने और निगरानी की पूरी व्यवस्था से संबंधित पड़ताल की है।

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की भूमिका तक सीमित रहने के बजाय पुलिस पूरे प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र की पड़ताल कर रही है। इसी मंशा के तहत पुलिस ने करीब 70 से 80 लोगों को नोटिस भेजा है, जिनमें ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 140 गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी है, ताकि घटनाक्रम की पूरी शृंखला स्थापित की जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने चंपत राय से प्रशासनिक निर्णयों, चढ़ावा प्रबंधन, कर्मचारियों की जवाबदेही और शिकायतों के निस्तारण से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल पूछे। उनके बयान का मिलान अन्य गवाहों और उपलब्ध दस्तावेजों से किया जाएगा। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर उनसे दोबारा पूछताछ की जा सकती है। हालांकि, पूछताछ में सामने आए तथ्यों को तो पुलिस ने उजागर नहीं किया।

नियुक्ति प्रक्रिया भी जुटाई जानकारी
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने मंदिर से जुड़े कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी जुटाई है। कई लोगों के सीडीआर खंगाले गए हैं, जिनसे भी कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फिलहाल किसी भी व्यक्ति की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष देने से बच रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों के बयान, दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

NATIONAL : नितिन नवीन का कांग्रेस पर हमला, सुनाई नेहरू-गांधी परिवार की ‘कॉम्प्रोमाइज’ वाली कहानी, ‘एक समय था जब…’

0

नितिन नवीन ने कहा कि 1954 में नेहरू ने किस प्रकार से बिना किसी रिवार्ड के तिब्बत में भारत के अधिकार को चीन को सौंप दिया ये हम जानते हैं. पढ़िए बीजेपी अध्यक्ष ने और क्या कहा है.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर जमकर हमला किया है. बुधवार (25 फरवरी, 2026) को पटना में एक कार्यक्रम को वे संबोधित कर रहे थे. उन्होंने नेहरू और गांधी परिवार की कॉम्प्रोमाइज वाली कहानी सुनाई. कहा, “एक समय था जब नेहरू जी ने खुद कहा था ये 45 करोड़ जनता देयता है. इतिहास गवाह है कि नेहरू जी का कार्यालय कैसे CIA व अन्य विदेशी एजेंसियों के लिए खुली किताब की तरह था.”

नितिन नवीन ने कहा कि 1954 में नेहरू ने किस प्रकार से बिना किसी रिवार्ड के तिब्बत में भारत के अधिकार को चीन को सौंप दिया ये हम जानते हैं. पंचशील की आड़ में किस प्रकार से अक्साई चीन का कब्जा मान लिया गया. यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल में किस प्रकार से पत्र लिखकर चीन को स्थायी सदस्यता देने की वकालत की गई वो भी हमने देखा है.

‘आखिर किस कॉम्प्रोमाइज मिशन के तहत…’
आगे कहा, “इंदिरा गांधी, जिन्होंने बड़ी छवि बनाई थी लेकिन हमें ध्यान है कि अमेरिकी राजदूत ने माना था कि CIA ने कांग्रेस को चुनाव में प्रचार करने के लिए पैसा दिया. शिमला समझौता के तहत 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को बिना कब्जा लिए हुए छोड़ देना. आखिर किस कॉम्प्रोमाइज मिशन के तहत ये किया गया? राजनीतिक रूप से कच्चातिवु जो श्रीलंका से है उसे किस प्रकार से श्रीलंका को दे देना इंदिरा गांधी के समझौता मिशन को दिखाता है…”

‘सुपर प्रधानमंत्री बनकर समानांतर सरकार का संचालन किया’
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, “हम लोगों ने देखा है कि कैसे भोपाल गैस कांड में हजारों भारतीयों के हत्यारे वारेन एंडरसन राजकीय विमान से सुरक्षित देश से बाहर किया गया. सोनिया गांधी ने अपने पूरे राजनीतिक कार्यकाल में, यानी 2004 से 2014 के बीच नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के माध्यम से ‘सुपर प्रधानमंत्री’ बनकर समानांतर सरकार और कैबिनेट का संचालन किया गया… राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन की सरकार और जॉर्ज सोरेस से फंडिंग करवाना… निश्चित रूप से ये उनके कॉम्प्रोमाइज मिशन की झलक को दिखाता है… राहुल गांधी ने 247 से अधिक विदेशी यात्राएं की हैं लेकिन उससे आधे से अधिक यात्राओं की सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी नहीं देना आखिर किस कॉम्प्रोमाइज मिशन के तहत हो रहा था?…”

- Advertisement -

News of the Day