Sunday, June 28, 2026
Home Blog Page 91

NATIONAL : महिला आरक्षण व परिसीमन पर संसद में टकराव के आसार; सरकार ऐतिहासिक कदम बता रही, विपक्ष पर सवाल उठा रहा

0

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस शुरू हो गई है, जिसमें विपक्ष ने संघीय ढांचे और राज्यों के हितों पर असर को लेकर आपत्ति जताई है। दक्षिणी राज्यों ने परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक असंतुलन बढ़ाने वाला बताया है और कई मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रणनीति की बात कही है। वहीं, विपक्ष की बैठक और संसद में जरूरी बहुमत के अभाव के चलते इन विधेयकों पर सहमति बनना अभी अनिश्चित बना हुआ है।

संसद के विशेष सत्र में इस सप्ताह महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई। केंद्र सरकार जहां इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत चालाकी भरी है। वहीं, दक्षिण भारत के कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचा या उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन होगा।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का बंटवारा करने से संघीय संतुलन बिगड़ सकता है और दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। रेड्डी ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखकर इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि बिना राज्यों की सहमति के कोई भी फैसला व्यापक विरोध को जन्म देगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, यदि इस प्रक्रिया से तमिलनाडु को नुकसान हुआ या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति असंतुलित रूप से बढ़ाई गई, तो राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य का हर परिवार सड़कों पर उतरेगा और उनके नेतृत्व में एक विशाल जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। यह मत सोचिए कि चुनाव के समय ध्यान कहीं और है और आप दिल्ली में चुपचाप परिसीमन कर लेंगे। अगर तमिलनाडु के साथ अन्याय हुआ, तो पूरा देश इसे महसूस करेगा। स्टालिन ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीयता में लिपटी हुई है। न तो उनकी पार्टी डीएमके और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल या राज्य से इस पर कोई परामर्श किया गया है। उन्होंने कहा, हमें यह तक नहीं बताया गया है कि यह परिसीमन कैसे किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की आशंका सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा, संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने से दक्षिणी राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी।

रिजिजू ने जोर देकर कहा, संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित, सुविचारित है और प्रत्येक समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा। इसलिए इसकी आलोचना की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर कोई नीतियों और कार्यक्रमों के संदर्भ में इसकी आलोचना करता है, तो राजनीतिक क्षेत्र में यह पूरी तरह से समझ में आता है। लेकिन विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कोई भी दल विरोध नहीं कर रहा है। मंत्री ने कहा, यह केवल सरकार का विधेयक नहीं है, बल्कि यह सभी राजनीतिक दलों और पूरे देश का किसी न किसी रूप में विधेयक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी दल एकजुट होकर महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य का समर्थन करेंगे।

यदि कांग्रेस ने सरकार का साथ नहीं दिया तो उसे इन विधेयकों को पारित कराना मुश्किल होगा क्योंकि नियमत: किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में मौजूद सदस्यों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत है। सरकार के पास अपने दम पर लोकसभा या राज्यसभा, कहीं भी यह बहुमत नहीं है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत की संख्या 362 है जबकि एनडीए के पास कुल 292 सदस्य ही है। इसी तरह राज्यसभा में दो तिहाई का आंकड़ा 163 का है जबकि सरकार के पास 141 सदस्य ही हैं।

महिला आरक्षण विधेयक और लोकसभा-विधानसभा सीटों के परिसीमन पर विचार करने के लिए कांग्रेस समेत विपक्ष के सभी दल बुधवार को बैठक करेंगे। दक्षिण के राज्यों के विरोध को देखते हुए यह माना जा रहा है कि कांग्रेस इन बदलावों का समर्थन करने से हाथ खींच ले।

Indian Army: थिएटर कमान पर बनी सहमति, CDS अनिल चौहान बोले- ऑपरेशन तिरंगा के तहत जल्द सरकार को जाएगा प्रस्ताव

0

देश के सैन्य ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने बताया कि थिएटर कमान गठन पर तीनों सेनाओं में सहमति बन चुकी है। ‘ऑपरेशन तिरंगा’ के तहत तैयार प्रस्ताव 1-2 हफ्तों में सरकार को सौंपा जाएगा, जिससे सेना की ताकत और समन्वय और मजबूत होगा।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने देश के सैन्य ढांचे में बड़े बदलाव को लेकर अहम जानकारी दी है। बंगलूरू में आयोजित ‘रण संवाद-2026’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि थिएटर कमान के गठन को लेकर तीनों सेनाओं के बीच चर्चा पूरी हो चुकी है और एक से दो सप्ताह के भीतर इसका प्रस्ताव सरकार को सौंप दिया जाएगा। जनरल चौहान ने बताया कि थिएटर कमानों के गठन की पूरी प्रक्रिया को ‘ऑपरेशन तिरंगा’ नाम दिया गया है।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने का काम अंतिम चरण में है और सेना की ओर से आवश्यक कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों सेनाएं इस पर सहमत हैं और आपसी चर्चा समाप्त हो चुकी है। हालांकि अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव को औपचारिक रूप से सरकार तक पहुंचने में करीब दो सप्ताह का समय लग सकता है। इसके बाद इसे रक्षा मंत्री और फिर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सीडीएस ने कहा कि थिएटर कमान के दो प्रमुख पहलू हैं अवधारणा और कार्यान्वयन।

वर्तमान में सेना, नौसेना और वायुसेना की कुल 17 अलग-अलग कमानें हैं। थिएटर कमान का उद्देश्य इन तीनों सेनाओं की ताकत और संसाधनों को एक भौगोलिक क्षेत्र के तहत एक ही कमांडर के अधीन लाना है, ताकि युद्ध की स्थिति में एकीकृत रणनीति के तहत कार्रवाई हो सके।

आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन या हवा तक सीमित नहीं रह गए हैं। अंतरिक्ष, साइबर और सूचना क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच अलग-अलग कमान के तहत काम करना कठिन हो गया है। एकीकृत कमान बनने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, सैन्य खर्च में कमी आएगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में सीडीएस पद के गठन के साथ ही थिएटर कमान की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

NATIONAL : सम्राट का चुनावी करियर: RJD से जीता पहला चुनाव, फिर लगातार तीन हार; BJP में आने के नौ साल में ही बनेंगे CM

0

बिहार को बुधवार (15 अप्रैल) को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और सीएम पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को मंगलवार को नेता चुना गया। बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने इस बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा। कुशवाहा जाति से ताल्लुक रखने वाले सम्राट चौधरी दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के बेटे हैं।

कौन हैं सम्राट चौधरी?

16 नवंबर, 1968 में जन्मे सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी अलग-अलग पार्टियों से कई बार विधायक, सांसद और मंत्री रहे हैं। समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शकुनी चौधरी भी एक हैं। बिहार में कुशवाहा समाज के बड़े नेताओं में शकुनी चौधरी शुमार किए जाते हैं। अब सम्राट चौधरी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

साल 1990 में सक्रिय राजनीति में उतरने वाले सम्राट चौधरी ने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी। हालांकि, बाद में वे जदयू से होते हुए हम और भाजपा तक आए। एक तरह से देखा जाए तो सम्राट चौधरी का चुनावी और राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव वाला और कई दलों से जुड़ा रहा है। आखिरकार इन बदलावों के बाद अब वे बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

  1. शुरुआती राजनीतिक दौर और राजद में भूमिका

उन्होंने 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और शुरुआती दिनों में समता पार्टी से भी जुड़े रहे। मई 1999 में वे राबड़ी देवी की राजद सरकार में कृषि मंत्री बने, लेकिन कम उम्र से जुड़े विवाद के कारण उन्हें उस पद से इस्तीफा देना पड़ा।

2000: चुनाव में मिली पहली जीत
साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में बिहार में बहुत कुछ बदल चुका था। राज्य की सत्ता पर काबिज पार्टी का नाम और मुख्यमंत्री भी बदल चुका था। उस दौर में बिहार के सबसे कद्दावर नेता लालू प्रसाद यादव घोटाले के आरोप में जेल आ जा रहे थे। उनकी जगह उनकी पत्नी राबड़ी देवी राज्य की सत्ता पर काबिज थीं। इन सबके बीच हुए चुनाव में परबत्ता सीट पर लालू की राजद से राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) ने जीत दर्ज की। सम्राट चौधरी ने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे रामानंद प्रसाद सिंह को 12,777 वोट से हरा दिया था। इस तरह वे राजद के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। हालांकि, एक बार फिर उनकी उम्र को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उनका निर्वाचन रद्द कर दिया गया।

2004: नहीं कायम रख पाए परबत्ता की सीट

2004 में राकेश कुमार का निर्वाचन रद्द होने के बाद परबत्ता सीट पर उपचुनाव कराए गए। उप चुनाव में जदयू के रामानंद प्रसाद सिंह ने राजद के राकेश कुमार यानी सम्राट चौधरी को 11,134 वोट से हरा दिया।

2005: एक ही साल में लगातार दो हार

2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहली बार फरवरी में और दूसरी बार अक्तूबर में राज्य की जनता ने वोट डाला। बिहार में ऐसा पहली बार हुआ था जब एक ही साल में दो बार चुनाव हुए थे। फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में जदयू के रामानंद प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने राजद के राकेश कुमार यानी सम्राट चौधरी को 1,918 वोट से हराया था।

इसके बाद अक्तूबर में नए सिरे से हुए चुनाव में भी परबत्ता सीट से रामानंद प्रसाद ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। एक बार फिर उन्होंने पूर्व विधायक राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी को हराया। हालांकि, इस बार राकेश कुमार राजद के टिकट पर नहीं बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे।

  1. फिर शुरू हुआ जदयू में सफर

साल 2014 में उन्होंने राजद के 13 विधायकों को अलग कर जदयू में शामिल होने की रणनीति बनाई। इसके बाद 2014 में ही जीतन राम मांझी की सरकार में उन्हें नगर विकास और आवास मंत्री बनाया गया। 2015 में जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार बगावत की। मांझी ने जब हम बनाई तो सम्राट के पिता शकुनी चौधरी भी इसके सक्रिय सदस्य बने। यहां तक की हम के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान सम्राट पर हम के कार्यक्रमों में भाग लेने। 2015 के विधानसभा चुनाव में हम उम्मीदवार पिता और भाई के लिए प्रचार करने का आरोप लगा। मामला विधान परिषद तक पहुंचा। यहां तक कि जनवरी 2016 में उनकी विधान परिषद सदस्यता रद्द कर दी गई। जबकि उनका कार्यकाल 23 मई 2020 तक का था।

  1. भाजपा में सफर और विधान परिषद सदस्य

जून 2017 में सम्राट चौधरी भाजपा में शामिल हो गए और 2018 में पार्टी की बिहार इकाई के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। 2020 में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) चुने गए और 2021 में एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री बने।

  1. प्रमुख पदों पर नियुक्ति

2022 में उन्हें बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चुना गया। इसके बाद, मार्च 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिस पद पर वे 26 जुलाई 2024 तक रहे।

  1. भाजपा और जदयू के साथ आने के बाद बने उपमुख्यमंत्री

जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की, तो सम्राट चौधरी को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया और उन्हें वित्त व स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए।

2025 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने तारापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और राजद के प्रत्याशी अरुण कुमार को 45,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराया। 2025 में एनडीए की जीत के बाद वे फिर से भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए और उन्हें लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ बिहार का गृह मंत्री भी बनाया गया।

उस जीत के महज एक साल बाद ही नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री पद से दूर राज्यसभा जा चुके हैं। इसी के साथ भाजपा ने अब इस राज्य की कमान सम्राट चौधरी को सौंपी है।

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों की बहुत अहमियत है। सम्राट चौधरी कुशवाहा जाति से ताल्लुक रखते हैं और बिहार में इस जाति का आधार करीब 7-9 प्रतिशत है। बिहार में यादव जाति के बाद सबसे ज्यादा वोटर कुशवाहा जाति के ही हैं। बिहार में हुए जातीय सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग 27 प्रतिशत, अति-पिछड़ा वर्ग 36 प्रतिशत है, जो राज्य की कुल आबादी का 63 प्रतिशत हो जाते हैं। यही वजह है कि बिहार की जातीय राजनीति को साधने में सम्राट कुशवाहा भाजपा के लिए अहम हैं।

NATIONAL : लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने के लिए संसद में होगा बिल पेश, परिसीमन और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की तैयारी

0

केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा कर दिया है। यह महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य शामिल होंगे। बिल के गुरुवार को लोकसभा में पास होने की संभावना है।

केंद्र सरकार भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों के पुनर्समायोजन, निर्वाचन क्षेत्रों के नए परिसीमन और महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ करने की कोशिश की गई है। इसके तहत लोकसभा की सीटें 850 तक करने का प्रस्ताव है। इसके लिए लोकसभा में गुरुवार को बिल पेश होने वाला है।

यह प्रस्ताव सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसंख्या की संवैधानिक परिभाषा बदलने, परिसीमन पर लगी पुरानी रोक हटाने और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी नए ढांचे को लागू करने का व्यापक प्रयास है। सरकार के मुताबिक, 1971 की जनगणना के आधार पर लंबे समय से जमी हुई सीट व्यवस्था अब देश की मौजूदा जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती।

पिछले दशकों में शहरीकरण, आंतरिक माइग्रेशन, आबादी का असमान विस्तार और नए सामाजिक-राजनीतिक संतुलन ने प्रतिनिधित्व के सवाल को और अहम बना दिया है। ऐसे में यह विधेयक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधेयक का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे असरदार प्रावधान लोकसभा की सदस्य संख्या में वृद्धि से जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है कि राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 से अधिक नहीं होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकतम 35 सदस्य हो सकेंगे।

इस बदलाव का मतलब यह है कि भविष्य में लोकसभा की कुल क्षमता मौजूदा संख्या से काफी अधिक हो सकती है और वह 850 तक हो सकती है। सरकार का तर्क है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का आधार जनसंख्या और क्षेत्रीय संतुलन होना चाहिए।

यदि किसी राज्य या क्षेत्र की आबादी में भारी वृद्धि हुई है, तो वहां के मतदाताओं को उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यही वजह है कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव सिर्फ तकनीकी संशोधन नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के पुनर्गठन का संकेत माना जा रहा है। इस प्रस्ताव का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

विधेयक का दूसरा अहम हिस्सा परिसीमन की प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करना है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 में मौजूद उस प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव है, जिसके कारण 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने तक सीटों का नया पुनर्समायोजन नहीं किया जा सकता था। इस रोक को हटाकर सरकार नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन का रास्ता खोलना चाहती है।

परिसीमन विधेयक, 2026 के तहत केंद्र सरकार एक नए परिसीमन आयोग का गठन करेगी। इस आयोग की संरचना भी स्पष्ट की गई है। आयोग के अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य होंगे। आयोग का मुख्य काम नवीनतम जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या तय करना, उनका पुनर्समायोजन करना और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करना होगा।

प्रक्रिया के तहत आयोग अपने प्रारूप प्रस्ताव राजपत्र में प्रकाशित करेगा। इसके बाद सार्वजनिक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। एक बार अंतिम आदेश आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हो जाने के बाद उन्हें कानून का दर्जा मिल जाएगा और उन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

परिसीमन के दौरान यह भी ध्यान रखा जाएगा कि निर्वाचन क्षेत्र भौगोलिक रूप से सुगठित हों, प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं का सम्मान हो और जनसुविधाओं तथा स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। इसका उद्देश्य सिर्फ जनसंख्या के आधार पर गणितीय विभाजन करना नहीं, बल्कि व्यावहारिक और प्रशासनिक रूप से सक्षम निर्वाचन क्षेत्र बनाना है।

विधेयक में जनसंख्या की परिभाषा भी बदली जा रही है। अनुच्छेद 55, 81, 170, 330 और 332 में “जनसंख्या” का अर्थ अब उस जनगणना से होगा जिसे संसद कानून द्वारा निर्धारित करे और जिसके प्रासंगिक आंकड़े प्रकाशित हो चुके हों। इससे भविष्य में परिसीमन और सीट आवंटन के लिए अधिक लचीला और अपडेट आधार उपलब्ध होगा।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व को लेकर भी विधेयक में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में एसटी समुदायों के लिए सीटों के पुनर्समायोजन और आरक्षण अनुपात को लेकर स्पष्टता दी गई है, ताकि परिसीमन के बाद भी उनका प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो।

इस पूरे विधायी पैकेज का सबसे चर्चित पहलू महिलाओं के लिए आरक्षण को जल्द प्रभावी बनाना है। 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन उसके लागू होने को परिसीमन और जनगणना से जोड़ा गया था।

इसी वजह से इसके अमल में समय लगने की आशंका थी। अब नया विधेयक अनुच्छेद 334A को बदलाव का प्रस्ताव करता है, ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण “लेटेस्ट प्रकाशित जनगणना” के आधार पर किए जाने वाले परिसीमन के तुरंत बाद लागू किया जा सके।

इसका मतलब यह है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना का लंबा इंतजार जरूरी नहीं रहेगा, बल्कि उपलब्ध लेटेस्ट प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। यह आरक्षण लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली, पुडुचेरी तथा जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं पर लागू होगा।

महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर आवंटित की जाएंगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए उप-आरक्षण लागू होगा।

इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ संख्या के स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक विविधता के स्तर पर भी बढ़ेगी। विधेयक के अनुसार यह आरक्षण प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए लागू रहेगा। संसद चाहे तो कानून बनाकर इसकी अवधि आगे भी बढ़ा सकती है।

संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए तीन प्रमुख कानूनों में बदलाव प्रस्तावित हैं—केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम, 1963; राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991; और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019। पुडुचेरी में विधानसभा की सदस्य संख्या अब परिसीमन आयोग तय करेगा और यह संख्या 30 से कम नहीं होगी।

केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पांच की जाएगी, जिनमें दो महिलाएं होंगी। दिल्ली के मामले में विधानसभा की सदस्य संख्या परिसीमन आयोग तय करेगा और यह 70 से कम नहीं होगी। नए परिसीमन के लागू होने तक चुनाव मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर कराए जा सकेंगे। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 114 से कम नहीं होगी।

पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र के लिए 24 सीटें रिक्त रखी जाएंगी और उन्हें कुल सदस्य संख्या की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। उपराज्यपाल द्वारा महिलाओं और कश्मीरी प्रवासियों के प्रतिनिधित्व के लिए मनोनीत सदस्यों की संख्या परिसीमन के बाद बढ़ाकर तीन की जा सकेगी।

सरकार का कहना है कि 1971 की जनगणना पर आधारित सीट फ्रीज अब अपने उद्देश्य से आगे निकल चुका है। उस समय परिवार नियोजन को बढ़ावा देने और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की गई थी। लेकिन अब देश की आबादी, बसावट, शहरी विस्तार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जरूरतें बदल चुकी हैं। महिला रिजर्वेशन प्रावधान को महिला राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी संरचनात्मक रूप से बढ़ेगी।

पांच मुख्य बातें

लोकसभा की कुल सदस्य संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव, जिसमें राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की अधिकतम संख्या 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 तक हो सकती है।

जनसंख्या की नई परिभाषा तय की जाएगी, जो संसद द्वारा निर्धारित और प्रकाशित नवीनतम जनगणना पर आधारित होगी।

परिसीमन पर लगी पुरानी संवैधानिक रोक हटेगी जिससे लेटेस्ट जनगणना के आधार पर सीटों और सीमाओं का पुनर्निर्धारण संभव होगा।

महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता ताकि लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण परिसीमन के तुरंत बाद लागू हो सके।

WORLD : ट्रम्प बोले-ईरान से 2 दिन में बातचीत हो सकती है:आसिम मुनीर का काम बेहतर, इसलिए पाकिस्तान में मीटिंग होने की संभावन

0

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत अगले 2 दिनों में फिर से शुरू हो सकती है और इसके लिए पाकिस्तान सबसे ज्यादा संभावित जगह है।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि हालात तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए बातचीत जल्द शुरू हो सकती है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अच्छा काम कर रहे हैं, इसलिए वहां बातचीत होने की संभावना बढ़ गई है।

इससे पहले ईरान और अमेरिका के बीच 11 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 21 घंटे सीजफायर वार्ता हुई थी। हालांकि यह वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।

WORLD : ट्रंप ने पीएम मोदी को किया फोन, 40 मिनट हुई बातचीत, होर्मुज जलमार्ग को लेकर की अहम चर्चा

0

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके पश्चिम एशिया संकट के बारे में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने होर्मुज जलमार्ग को खुला और सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। ट्रंप के साथ फोन पर हुई लगभग 40 मिनट की बातचीत के बाद मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने और अमेरिकी राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष सभी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मुझे मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया था। हमने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति का जायजा लिया। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने लिखा, “हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज जलमार्ग को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया।”

ट्रंप-मोदी की बातचीत के बाद अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच आने वाले दिनों में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुछ बड़े सौदे होने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने इन सौदों के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। यह अमेरिकी राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच इस साल फोन पर हुई तीसरी बातचीत थी। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हाल में हुई शांति वार्ता के बाद यह दोनों नेताओं की पहली बातचीत है। ट्रंप और पीएम मोदी ने 2 फरवरी को एक व्यापार समझौते में हुई प्रगति की घोषणा करने और 24 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करने के लिए फोन पर बातचीत की थी।

गोर के मुताबिक, बातचीत के अंत में ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा, “मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सब आपसे प्यार करते हैं।” अमेरिकी राजदूत ने कहा, “कुछ बड़े सौदे हैं, जिनकी घोषणा अगले कुछ दिनों या हफ्तों में की जाएगी। हमारे रिश्ते मजबूत स्थिति में हैं, कुछ बहुत ही दिलचस्प और रोमांचक होगा।”

अमेरिकी राजदूत ने कहा, “तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी का केवल एक ही कारण है और वह यह है कि कोई (ईरान) इस क्षेत्र को बंधक बनाए हुए है।” उन्होंने कहा, “जाहिर है कि अमेरिका इस जलमार्ग को खोलना चाहता है और इसलिए मुझे लगता है कि इससे भारत सहित पूरी दुनिया को फायदा होगा।” गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी पर भी चर्चा की।

सर्जियो गोर ने इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच नयी बातचीत की संभावनाओं से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “भविष्य में होने वाली किसी भी वार्ता की घोषणा करना मेरा काम नहीं है। उन्होंने नाकेबंदी और होर्मुज जलमार्ग जल्द से जल्द फिर से खोलने के महत्व पर चर्चा की। सच कहूं तो, इस वजह से पूरा क्षेत्र, पूरी दुनिया पीड़ित है।”

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत नाकाम रहने का एक प्रमुख कारण यह था कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद गहरे अविश्वास को दूर करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। अमेरिका और ईरान के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं जिनमें राजनीतिक, सामरिक और वैचारिक मतभेद गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में पहले पर्दे के पीछे से कूटनीतिक और छोटे-छोटे समझौते पर आगे बढ़ने की जरूरत थी लेकिन सीधे औपचारिक वार्ता शुरू कर दी गई। यही कारण था कि लंबी वार्ता के बावजूद संवाद सकारात्मक दिशा में आगे नहीं बढ़ पाया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

NATIONAL : सोने-चांदी-हीरे के खुफिया चैम्बर, रत्न भंडार से आती आवाजें! जगन्नाथ मंदिर के पुजारियों का खुलासा

0

जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार को 48 साल में पहली बार खोला गया है. इसके अंदर मौजूद सोने-चांदी और हीरे जैसी मूल्यवान धातुओं को गिना जा रहा है. इस मंदिर परिसर में कई और खुफिया चैम्बर होने का दावा भी किया जाता है जिसमें बड़ा खजाना छिपा हो सकता है.

ओडिशा के पुरी स्थितजगन्नाथ मंदिर में 48 साल बाद भीतरी रत्न भंडार खोला गया है. इसके साथ ही अंदर मौजूद बहुमूल्य आभूषणों को गिनने का काम किया जा रहा है. ऐसा कहा जाता है कि इस रत्न भंडार में सोने-चांदी का अथाह भंडार है. मंदिर के प्रांगण में आज भी ऐसे न जाने कितने खुफिया चैम्बर मौजूद हैं जहां खजाना होने का दावा किया जाता है. साथ ही, मंदिर में एक खुफिया सुरंग का जिक्र भी पुजारियों के वंशज करते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर इस सुरंग का राज क्या है और यहां जिस खजाने का दावा किया जाता है, वो कैसे सदियों से सुरक्षित है.

बात साल 2018 की है. जब कुछ लोग अंधेरे रास्ते से होते हुए एक खुफिया तहखाने तक पहुंचे थे. इस गुप्त तहखाने का दरवाजा कई दशकों से खोला नहीं गया था. इसी दरवाजे के पीछे प्राचीन खजाने का भंडार बताया जाता है. उस वक्त दरवाजा तो मिला, लेकिन चाबी नहीं मिल सकी. उस दिन शुरू हुई वो तलाश साल जुलाई 2024 में पूरी हुई. जब उस खुफिया चैम्बर का दरवाजा खोल दिया गया. हालांकि उस वक्त भी मंदिर के रत्न भंडार का अंदरूनी चैम्बर तो खुल गया, लेकिन उसके अंदर से क्या निकला, इस पर आज तक सस्पेंस बना हुआ है.

सदियों से जिन परिवारों की पीढ़ियां जगन्नाथ मंदिर में सेवा पूजा करती आई हैं. उनके सदस्य मंदिर के खजाने को लेकर हैरान करने वाली बातें बताते हैं. जगन्नाथ मंदिर के पुजारी बासुदेव इस रहस्यमयी खजाने का श्रेय कुछ पुराने राजाओं को देते हैं. वही राजा अपना जीता हुआ सामान इस रत्न भंडार में रखते थे. सोने-चांदी के मुकुट, सिंहासन, हीरे, जेवरात आदि सब इसी में रखे जाते थे.

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जगन्नाथ मंदिर के खजाने में इतनी प्रचुर मात्रा में सोना-चांदी और बहुमूल्य रत्न मौजूद थे कि हर 100 साल में एक बार होने वाले रघुनाथ श्रृंगार में पूरी झांकी सोने और रत्नों से पट जाती थी. शायद इसी सोने और रत्नों की चमक विदेशी आक्रांताओं को बार-बार पूरी की ओर खींच लाती थी.
इतिहास में जिक्र मिलता है कि जिस तरह सोमनाथ मंदिर को विदेशी आक्रमणकारियों ने 17 बार लूटा था. ठीक उसी तरह जगन्नाथ मंदिर को लूटने का प्रयास भी 18 बार किया गया था. हर बार मंदिर के प्रतिहारियों ने ही ठाकुर जी की प्रतिमा को उन आक्रमणकारियों से बचाया था. जब-जब आक्रमण होता था तब-तब प्रतिहारी प्रतिमा को लेकर किसी अज्ञात स्थान पर छिप जाते थे और ठाकुर जी के स्वरूप को सुरक्षित रखते थे. उन्हीं प्रतिहारियों के वंशज बताते हैं कि ठाकुर जी की प्रतिमा को लेकर उनके पूर्वज मंदिर के भीतर बनी गुप्त सुरंग में चले जाते थे. कहते हैं कि उस सुरंग में आज भी अथाह संपदा मौजूद है.

जगन्नाथ मंदिर के पुजारी पंडित सोमनाथ इस बात को दोहराते हैं कि मंदिर पर 18 बार आक्रमण हुआ. उन्होंने बताया कि भारत का सबसे बड़ा और धनी मंदिर है.

बता दें कि जगन्नाथ मंदिर में भगवान की इन मूर्तियों को हर 12 साल में एक बार बदलने की परंपरा भी है. जब मूर्तियां बदली जाती हैं तो उस दौरान मंदिर को बंद कर दिया जाता है. शहर की लाइट काट दी जाती है. पुजारी आंखों पर पट्टी बांधकर यह काम करते हैं. पुजारी बताते हैं कि उस दौरान रत्न भंडार से कई रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं.

पुजारी बासुदेव कहते हैं कि हमने इससे जुड़ी कई कहानियां सुनी हैं. उसके अंदर सांपों का गर्जन सुनाई देता है. वहां एक अन्न की हांडी भी रखी जाती है. आज तक पता नहीं चल पाया कि उसे कौन खा जाता है. हम लोग 15 दिन अनवसर में रत्न भंडार के सामने ही काम करते हैं. तब जगन्नाथ जी की लाइट भी काट दी जाती है. घना अंधेरा रहता है. तब बहुत सारी आवाजें सुनाई देती हैं.

भगवान जगन्नाथ के वर्तमान मंदिर का स्वरूप सातवीं शताब्दी का बताया जाता है. सदियों से इस दिव्य मंदिर का अपना एक कठिन अनुशासन है. परंपराएं हैं और उससे बढ़कर ऐसे तमाम रहस्य हैं जो दुनिया के लिए सदा से कौतूहल का विषय रहे हैं. लेकिन दुनिया भर के भक्त पूरी आस्था के साथ मंदिर से जुड़ी परंपराओं और रहस्यों का सम्मान करते हैं.

ENTERTAINMENT : पिता के निधन के बाद भी सेट पर आकर कॉमेडी करते थे राजपाल यादव, सभी से मिला बहुत सारा सपोर्ट

कॉमेडी के दिग्गज एक्टर राजपाल यादव 9 करोड़ के चेक बाउंस मामले में फंसे हैं, जहां कोर्ट ने अगली सुनवाई तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है. वहीं, एक्टर इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म भूत-बंगला के प्रमोशन में भी जुटे हैं, जो तीन दिन बाद 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के साथ एक्टर की इमोशनल यादें जुड़ी हैं और इसी फिल्म के दौरान उन्हें बड़ा झटका भी लगा था.

भूत-बंगला राजपाल यादव (Rajpal Yadav Bhooth Bangla) के लिए बहुत खास फिल्म है क्योंकि सालों बाद उन्हें अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन के साथ काम करने का मौका मिला, लेकिन उसी फिल्म की शूटिंग के समय वे इमोशनली कमजोर महसूस करने लगे थे. ऐसा इसलिए क्योंकि भूत-बंगला की शूटिंग के दौरान उन्होंने अपने पिताजी को बीमारी से गुजरते हुए देखा और फिर उनका निधन हो गया.

उन्होंने अपने हालिया यूट्यूब व्लॉग में खुलासा किया कि अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन के साथ शूटिंग करना ऐसा है कि भूख मिटती नहीं है बल्कि बढ़ जाती है. इसी फिल्म के दौरान मेरे पिता अस्पताल में भर्ती हुए थे. उनकी तबीयत बहुत गंभीर थी और दूसरी तरफ फिल्म की शूटिंग चल रही थी.

उन्होंने आगे बताया, कुछ दिनों बाद पिताजी का निधन हो गया लेकिन फिर दोबारा शूटिंग पर आकर हंसी का माहौल और शूटिंग की. सेट पर कभी महसूस नहीं हुआ कि ऐसा कुछ हुआ है, क्योंकि सालों बाद अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन के साथ काम करने का मौका मिला था.

इससे पहले राजपाल यादव खुद खुलासा कर चुके हैं कि प्रियदर्शन ने पहली ही मुलाकात में उनके कपड़े फाड़ दिए थे. उन्होंने बताया था कि फिल्म जंगल के बाद प्रियदर्शन ने पहली बार मिलने के लिए बुलाया था, लेकिन उस वक्त लगा था कि इतना बड़ा डायरेक्टर क्यों बुलाएगा, लेकिन फिर उन्होंने अपने ऑफिस बुलाया और शर्ट को आगे पकड़ा और फाड़ दिया. उन्होंने कहा कि प्लेन की तरह दोनों हाथ फैलाकर दौड़ें. पहले अजीब लगा लेकिन असल में वहीं मेरा किरदार था.

बता दें, राजपाल यादव चेक बाउंस मामला 2010 का है, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ रुयये का लोन लिया था. फिल्म फ्लॉप होने के कारण चेक बाउंस हो गए, और ये लोन ब्याज के साथ बढ़कर लगभग 9 करोड़ तक पहुंच गया, जिसके चलते उन पर कानूनी कार्यवाही हुई. उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

ENTERTAINMENT : दीपिका कक्कड़ के लिवर में 1.3cm की गांठ, एक्टिंग-व्लॉगिंग छोड़ पत्नी की सेवा में बिजी शोएब, हुई एंग्जाइटी

एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ की जिंदगी में पिछले साल से उथल-पुथल चल रही है. वो खराब मेडिकल सिचुएशन से गुजर रही हैं. पत्नी दीपिका को दर्द में देखकर उनके पति शोएब को एंग्जाइटी होने लगी है.

टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ इब्राहिम पिछले साल मई से लिवर कैंसर का ट्रीटमेंट ले रही हैं. लेकिन उनकी मु्श्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. एक्ट्रेस को हाल ही में लिवर में 1.3cm की गांठ होने का पता चला था. फरवरी में उनकी सर्जरी हुई थी. तबसे वो रिकवरी फेज में हैं. उनके पति शोएब इब्राहिम का यूट्यूब व्लॉग में दर्द छलका है.

शोएब ने बताया कि पत्नी दीपिका की हेल्थ कंडीशन को लेकर वो टेंशन में हैं. वो दूसरे अस्पतालों से सेकंड ओपिनियन ले रहे हैं. एक्टर ने बताया कैसे पिछले कुछ हफ्ते उनके हॉस्पिटल का चक्कर लगाते हुए कटे हैं. इन्हीं वजहों से वो व्लॉग नहीं बना पाएं. वो दीपिका की मेडिकल कंडीशन को लेकर टाटा मेमोरियल अस्पताल सेकंड ओपिनियन लेने गए थे. डॉक्टर्स ने उन्हें कुछ और टेस्ट और MRI कराने की सलाह दी है. एक्टर ने कबूला कि वो दीपिका को लेकर परेशान हैं.

शोएब ने कहा- पिछले 10-12 दिनों से मैं ज्यादा व्लॉग नहीं कर पा रहा हूं. इसके दो कारण हैं. अभी दीपिका का 3 दिन पहले सिटी स्कैन हुआ, सब ठीक है. रिस्क नहीं है लेकिन मॉनिटर करना पड़ेगा. बस यही सब चल रहा है. हर दिन अस्पताल जाना, ओपिनियन लेना, टेस्ट कराना, ऐसे में रोज व्लॉग बनाकर आपको क्या ही बोर करना. मैंने सोचा एक बार में सब बता दूंगा.

शोएब ने कबूला कि उन्हें दीपिका के लिए हेल्थ एंग्जाइटी होने लगी है. वो कहते हैं- मैं हमेशा परेशान सा रहता हूं. अगर कोई छोटी बात भी होती है, तो दीपिका से ज्यादा मैं परेशान होने लगता हूं. ये सब बातें मैं दीपिका को बताता नहीं हूं, आज कह रहा हूं. जब ये रात में सो रही होती है, इसके अगर पैरों में दर्द होता है, तो दीपिका से ज्यादा मुझे डर लगने लगता है. इसलिए मैंने जिम जाना शुरू कर दिया है, ताकि खुद की हेल्थ को ठीक करूं. इस दौरान दीपिका इमोशनल नजर आईं. एक्ट्रेस ने कहा कि जो इंसान मरीज के साथ रहता है. वो मरीज से ज्यादा मुश्किल वक्त में रहता है.

दीपिका को मुश्किल वक्त में फैंस का साथ मिल रहा है. पिछले साल एक्ट्रेस ने स्टेज 2 लिवर कैंसर होने की जानकारी दी थी. जून 2025 में ट्यूमर को हटाने के लिए उनकी सर्जरी हुई थी. एक्ट्रेस ने फैंस के साथ कीमोथेरेपी का एक्सपीरियंस शेयर किया है. लाइफ में चल रही इस उथल-पुथल पर बात करते हुए वो इमोशनल हो जाती हैं.

ENTERTAINMENT : ‘इंडस्ट्री में सब मर्जी से होता है’, डिजाइनर का दावा, बताया कंट्रोवर्सी कैसे होती है क्र‍िएट

फैशन डिजाइनर रोहित वर्मा ने कास्टिंग काउच और ड्रग्स जैसे आरोपों पर बड़ी बात कह दी है. उन्होंने कास्टिंग काउट और ड्रग्स यूज की बातों को खारिज करते हुए कहा कि इंडस्ट्री में सब कुछ रजामंदी से होता है. उनके इस बयान ने नई बहस छेड़ दी है.

फिल्म इंडस्ट्री हो या फैशन इंडस्ट्री- अक्सर यहां सेलेब्स पर कास्टिंग काउच जैसे आरोप लगते रहे हैं. कई मॉडल्स और एक्ट्रेसेज ने फायदा उठाए जाने पर खुलकर बात की है. लेकिन फेमस डिजाइनर रोहित वर्मा की सोच इससे अलग है. उनका कहना है कि फैशन इंडस्ट्री पर उंगली उठाना आसान है, क्योंकि यहां कैमरे हैं. एक शॉकिंग बयान देते हुए उन्होंने ये तक कह दिया कि- यहां कोई किसी से जबरदस्ती नहीं करता. सब अपनी मर्जी से जाते हैं.

इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर्स या प्रोड्यूसर्स पर अक्सर हीरोइनों का फायदा उठाने के आरोप लगे हैं. वहीं पार्टीज में ड्रग्स के इस्तेमाल पर भी कई सवाल उठाए गए हैं. इन सब पर रिएक्ट करते रोहित ने कहा कि- सब बातें बनाई जाती हैं. फैशन इंडस्ट्री भी वैसे ही काम करती है जैसे कॉर्पोरेट, बस यहां ग्लैम ज्यादा है तो उंगली उठाना आसान हो जाता है.

फिल्मीज्ञान से रोहित ने कहा- मैं बहुत प्राउडली कहता हूं कि मैं फैशन इंडस्ट्री का क्वीन हूं और ये जितने भी आरोप लगते हैं- सब बहुत बुलशिट बातें हैं. कोई किसी का यहां पर रेप नहीं करता. सब कुछ यहां रजामंदी से होता है. फैशन इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा उंगली इसलिए उठती हैं, क्योंकि हम लोग ज्यादा ग्लैमरस होते हैं. कैमरा यहां ज्यादा होते हैं. वरना कास्टिंग काउच तो कोर्पोरेट इंडस्ट्री में भी होता है. बाकी इंडस्ट्रीज में भी होता है. आप कहते हैं सिर्फ फैशन ही ड्रग्स वगैरह को इतना बढ़ावा देता है- ये सब बकवास है.

‘मुझे लगता है अगर आपके अंदर टैलेंट है तो कोई आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता. आपमें हुनर है, आपके ऊपर आपकी मां का आशीर्वाद है, आपकी नीयत साफ है तो आपको कोई स्टार बनने से नहीं रोक सकता. तो ये गलत बात है कि कोई किसी को यहां पर किसी चीज के लिए फोर्स करता है. जैसे मेरे एक दोस्त ने मुझपर मीटू का आरोप लगा दिया था क्योंकि उन्हें बिग बॉस में जाना था. तो मैंने उनके साथ की सारी चैट सोशल मीडिया पर डाल दी थी. आपके पास भी ऑप्शन हैं.’

रोहित ने आगे समझाया कि सब इस फील्ड में अपनी मर्जी से आते हैं, अपनी समझदारी से फैसले लेते हैं. फिर शिकायत करते हैं. वो बोले- देखो यहां कोई दूध का धुला नहीं है, यहां पर सबकी अपनी-अपनी सोच होती है. पर ये जो लोग कहते हैं हमारे साथ जबरदस्ती की- तो ये गलत है. हम सब अपनी मर्जी से कहीं भी जाते हैं. अब अगर आप रात 12 बजे मेरे घर की घंटी बजा रहे हैं, तो आप अपनी मर्जी से आए हैं. किसी के ड्रॉइंग रूम में बैठकर अगर आप कॉफी पी रहे हैं, और वो आपको बेडरूम में बुला रहा है तो वो 10 कदम आप खुद चलकर जा रहे हैं. तो परमिशन आप दे रहे हैं. आप मना कर सकते हैं, वहां से जा सकते हैं. आपको अपनी जिम्मेदारी खुद लेनी होगी.

रोहित बिग बॉस का भी हिस्सा रह चुके हैं, उन्होंने हाल ही में अपने नए कलेक्शन को लॉन्च किया था. इसमें बिपाशा बसु ने लंबे समय बाद रैम्प पर जलवा बिखेरा था.

- Advertisement -

News of the Day