Monday, June 29, 2026
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ENTERTAINMENT : ‘भाग गई वो, मैं उसे ढूंढने अजमेर आया हूं’, महाकुंभ की वायरल गर्ल के पति फरमान का सनसनीखेज वीडियो; मां बोली- मेरी बेटी को गायब कर दिया

खरगोन जिले की पर्यटन नगरी महेश्वर की महाकुंभ वायरल गर्ल को लेकर मामला विवादित होते जा रहा है. अब युवती के आरोपी पति फरमान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर सनसनी मचा दी.प्रयागराज महाकुंभ मेले के दौरान सुर्खियों में आई युवती को लेकर फिर सनसनीखेज वीडियो सामने आया है. वायरल गर्ल के पति फरमान ने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर दावा किया कि वह भाग गई. वायरल गर्ल की मां ने आरोप लगाया है कि बेटी को फरमान ने ही गायब किया है. ये सोची समझी साजिश है.

वीडियो में फरमान कहता नजर आया, ”मैं अजमेर पुष्कर आया हुआ हूं, मैं उसे (वायरल गर्ल) ढूंढने आया हूं. सो फ्रेंड्स उसका अजमेर में पता नहीं लग पाया. मैं जोधपुर जा रहा हूं. पता करेंगे. जोधपुर में हॉल्ट है तो आप किसी को पता चले तो मुझे बताएं.” इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद युवती के गृहनगर महेश्वर में फिर हड़कंप मच गया है.

जैसे ही युवती के परिवार को पता चला तो मां बेहाल हो गई. पिता कुछ कह नहीं पा रहे हैं. पूरे महेश्वर नगर में फिर से चर्चा जोरों पर है. घरवालों का कहना है कि पहले से ही अटकलें लगाई जा रही थी कि ये षड्यंत्र के तहत शादी की गई है और ज्यादा दबाव बढ़ाया जाएगा तो बेटी को गायब कर दिया जाएगा.
सिर्फ एक बार कराई थी बात
युवती की मां ने बताया, ”15 से 20 दिन पहले फरमान ने हमारी थोड़ी सी बात कराई थी. इसके बाद ना तो बेटी को फोन लगता है और ना ही फरमान बात कराता है.”

बता दें कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश पर युवती के वास्तविक जन्मतिथि का खुलासा हुआ और इसी आधार पर फरमान के खिलाफ महेश्वर थाने में FIR दर्ज की गई है.
क्यों खामोश है पुलिस?

युवती का मामला तीन स्टेट (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केरल) के बीच है और सुर्खियों में है. जब फरमान के खिलाफ FIR दर्ज हुई तो खरगोन पुलिस ने चुप्पी साध ली.

आरोपी फरमान के खिलाफ एफआईआर के मामले में जब महेश्वर थाना इंचार्ज जगदीश गोयल से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ”मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है.”

वहीं दूसरी ओर, मंडलेश्वर SDOP श्वेता शुक्ला का कहना है कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी ही कुछ कह सकते हैं.

वहीं, एडिशनल एसपी शकुंतला रूहल का कहना था कि मामला युवती के नाबालिग होने का है, इसलिए एसपी साहब ही कुछ बता पाएंगे.

जब इस मामले में खरगोन एसपी रवींद्र वर्मा से जानना चाहा तो उन्होंने चार-चार बार कॉल करने के बाद भी ना तो कॉल रिसीव किया और ना ही कोई जवाब देना मुनासिब समझा.

NATIONAL : सागर में महिला डांसर की बेरहमी से हत्या… बेड बॉक्स में सड़ी-गली मिली लाश, 5 अप्रैल से बंद था मोबाइल

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सागर के खुरई शहर में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक महिला की हत्या कर उसकी लाश को बेड बॉक्स के अंदर छिपा दिया गया. एक हफ्ते से लापता मां की तलाश में जब बच्चे घर पहुंचे, तो कमरे के अंदर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए.

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक महिला की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मृतका की पहचान 45 वर्षीय ममता अहिरवार के रूप में हुई है. ममता पिछले कई दिनों से लापता थी और उसका शव उसके अपने ही घर में रखे एक बेड बॉक्स से बरामद किया गया है.

खुरई थाना इलाके के सहोदरा राय वार्ड का यह मामला है. ममता के बेटे देव और बेटी मुस्कान पिछले 10 दिनों से विदिशा में अपनी बड़ी बहन के पास थे. वे वहां अपने जीजा के साथ मिलकर काम की तलाश कर रहे थे. बच्चों ने बताया कि 5 अप्रैल के बाद से उनकी मां से कोई बात नहीं हुई थी. लगातार फोन लगाने पर भी मोबाइल बंद आ रहा था.

अनहोनी की आशंका में जब दोनों रविवार को घर पहुंचे, तो मुख्य दरवाजे पर बाहर से ताला लगा था. पड़ोसियों की मदद से ताला तोड़कर जब वे अंदर घुसे, तो पूरे घर में असहनीय बदबू फैली हुई थी.

सूचना मिलते ही SDOP अस्थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया हत्या हालात को देखते हुए इसे साफ तौर पर हत्या का मामला माना जा रहा है. शव का पोस्टमॉर्टम करा लिया गया है. पुलिस को सोमवार शाम तक शॉर्ट पीएम रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जिससे मौत के सटीक समय और तरीके का पता चल सकेगा.

परिजनों ने बताया कि ममता एक डांस ग्रुप का हिस्सा थी और मेलों व शादियों में प्रस्तुति देकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी.

NATIONAL : 180 रुपये की जमीन पाने के लिए 47 साल लड़ा मुकदमा, खर्च कर दिए 16 लाख

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लखनऊ में महज 180 रुपये की जमीन के लिए एक किसान परिवार को 47 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े. फर्जी रजिस्ट्री के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार कोर्ट ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया. इस मामले ने जमीन विवादों और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को उजागर कर दिया.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 180 रुपये में खरीदी गई जमीन के लिए एक किसान परिवार को 47 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. गोसाईंगंज के बस्तिया गांव निवासी ब्रजेश वर्मा के मुताबिक, उनके पिता स्वर्गीय रामसागर ने साल 1965 में करीब पौने दो बिस्वा जमीन खरीदी थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद इस जमीन पर धोखाधड़ी कर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई.

बताया गया कि साल 1973 में सह-खरीदार शिवरानी ने कथित रूप से फर्जीवाड़ा करते हुए रामसागर की जगह किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली. इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब एक गवाह ने विवाद के बाद सच्चाई उजागर की. इसके बाद रामसागर ने 1978 में गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर न्याय की लड़ाई शुरू की.

मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा. इस दौरान 2003 में रामसागर का निधन हो गया, जबकि 2013 में शिवरानी की भी मौत हो गई. बावजूद इसके, दोनों पक्षों के वारिसों के बीच मुकदमा जारी रहा. आखिरकार दिसंबर 2025 में अदालत ने ब्रजेश वर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर दिया.

हालांकि, कोर्ट का फैसला आने के बाद भी जमीन पर कब्जा मिलने में तीन महीने का समय लग गया. इस लंबी कानूनी लड़ाई में वादी पक्ष को करीब 16 लाख रुपये खर्च करने पड़े. यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और जमीन विवादों की जटिलता को उजागर करता है.

GUJARAT : गुजरात में दर्दनाक हादसा! मंदिर जा रहे लोगों को ट्रक ने कुचला… 7 की मौत

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गुजरात के सुरेंद्रनगर में एक दर्दनाक हादसा हो गया. यहां एक तेज रफ्तार ट्रक ने मंदिर में पूजा करने जा रहे कई लोगों को कुचल दिया. जिससे 7 की मौत हो गई. जबकि कई अन्य घायल हो गए. जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले में सड़क किनारे चल रहे सात लोगों की तेज़ रफ़्तार ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. लखतर पुलिस इंस्पेक्टर योगेश पटेल ने बताया कि यह घटना लखतर-विरामगाम हाईवे पर रात करीब 1:30 बजे हुई, जब तीर्थयात्रियों का एक समूह राजकोट से बहुचराजी स्थित एक मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए एक जुलूस के रूप में पैदल जा रहा था.

ज़िले के लखतर तालुका में भास्करपारा गांव के बाहरी इलाके में लापरवाही से चलाए जा रहे एक ट्रक ने इन श्रद्धालुओं को कुचल दिया. उन्होंने बताया कि इस हादसे में छह तीर्थयात्रियों और सड़क किनारे खड़े एक डंपर के चालक की मौत हो गई. मृतकों में चार महिलाएं भी शामिल थीं.अधिकारी ने बताया कि घायलों की संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है. उन्होंने कहा, “तीर्थयात्री पैदल चल रहे थे, तभी यह हादसा हो गया. वे बहुचराजी स्थित एक मंदिर में पूजा करने के लिए पैदल निकले थे, तभी पीछे से पूरी रफ़्तार से आ रहे एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी.”

अधिकारी ने आगे बताया कि ट्रक चालक मौके से फ़रार हो गया और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं. एक्सीडेंट इतना गंभीर था कि मरने वालों के शव इधर-उधर बिखर गए. जब पुलिस को घटना की जानकारी मिली तो लखतर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और सड़क पर लगे ट्रैफिक जाम को खुलवाया और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए लखतर अस्पताल भेजा.

इस एक्सीडेंट में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और चार लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें 108 की मदद से तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया.

NATIOANL : पुणे में पीएचडी छात्रा ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में छेड़छाड़ और उत्पीड़न का जिक्र, रिसर्च गाइड गिरफ्तार

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पुणे में पीएचडी छात्रा की आत्महत्या के मामले में एक रिसर्च गाइड को गिरफ्तार किया गया है. छात्रा ने सुसाइड नोट में उसके साथ छेड़छाड़ किए जाने और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

महाराष्ट्र के पुणे शहर से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 30 वर्षीय पीएचडी छात्रा की मौत ने सबको झकझोर दिया है. यह घटना चिंचवड़ इलाके की है, जहां छात्रा ने अपने घर पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. इस मामले ने तब गंभीर मोड़ ले लिया, जब जांच में सामने आया कि छात्रा लंबे समय से मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी.

इस घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है. अब यह मामला न केवल आत्महत्या बल्कि यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से भी जुड़ गया है. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान डॉ. ए. बेन्नीमिन के रूप में हुई है, जो बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) के कोरेगांव पार्क स्थित कार्यालय के प्रमुख हैं.

आरोप है कि डॉ. ए. बेन्नीमिन मृतक छात्रा के रिसर्च गाइड थे और पिछले दो वर्षों से वह उनके अधीन पीएचडी कर रही थी. छात्रा के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया और आरोपी को हिरासत में लिया. इस गिरफ्तारी ने पूरे शैक्षणिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जांच के दौरान सबसे छात्रा का एक सुसाइड नोट सामने आया है, जो अहम सबूत माना जा रहा है. इस नोट में उसने अपने रिसर्च गाइड को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. परिवार का आरोप है कि अगस्त 2025 से ही छात्रा को लगातार परेशान किया जा रहा था. इसमें अनुचित व्यवहार, छेड़छाड़ और मानसिक दबाव जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. यह सुसाइड नोट अब जांच का आधार बन गया है.

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. इनमें आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment of suicide) और महिला के साथ मारपीट व छेड़छाड़ से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. जांच अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है.

पुलिस इंस्पेक्टर भोजराज मिसाल ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 15 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पूछताछ के दौरान आरोपी से कई अहम सवाल किए जा रहे हैं और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि छात्रा पर किस तरह का दबाव बनाया जा रहा था. साथ ही, आरोपी के खिलाफ अन्य संभावित शिकायतों की भी जांच की जा रही है.

यह मामला एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करता है. खासकर रिसर्च गाइड और छात्रों के बीच संबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है. फिलहाल, जांच पड़ताल जारी है और परिवार न्याय की मांग कर रहा है. यह घटना उन तमाम छात्रों के लिए चेतावनी है जो किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं.

ENTERTAINMENT : दादी आशा भोसले के अंतिम दर्शन में पोती जनाई की हालत हुई खराब, फूट-फूटकर रोती दिखीं

आशा भोसले के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो गई है। इसी दौरान उनकी पोती का एक रोने वाला वीडियो सामने आया है, जिसे देख किसी का भी दिल पसीज सकता है। उनकी इस हालत को देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अपनी दादी से बेइंतहा प्यार करती थीं।

सुरों की मल्लिका आशा भोसले आज अपनी अंतिम यात्रा पर निकलेंगी। रविवार को 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह देने वाली आशा ताई का अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे दादर स्थित शिवाजी पार्क के श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। जिस आवाज ने सात दशकों तक दुनिया को गुनगुनाने पर मजबूर किया, आज वह हमेशा के लिए शांत हो जाएगी, ऐसे में उनके आखिरी दर्शन करने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम संस्कार के कुछ वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। उसी में से एक हैं आशा भोसले की पोती जमाई भोसले का। जिसमें वह फूट-फूटकर रोती नजर आ रही हैं।

आशा जी का पार्थिव शरीर इस समय उनके लोअर परेल स्थित आवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया है। सुबह से ही उनके घर के बाहर फैंस और चाहने वालों का तांता लगा हुआ है। क्या आम और क्या खास, हर कोई अपनी प्रिय गायिका की एक आखिरी झलक पाने के लिए बेताब है। प्रशासन की तरफ से सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय आम जनता के दर्शन के लिए तय किया गया है। लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

इसी बीच आशा भोसले की पोती को भी एक वीडियो में देखा जा सकता है, जिसमें वह सफेद सूट पहने बेहद रोती हुईं नजर आ रही हैं। उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह अपने परिजनों के गले लगकर आंसू बहा रही हैं और अपनी दादी को याद कर रही हैं। उनकी हालत बेहद खराब नजर आ रही है। दादी आशी भोसले और पोती जनाई के बीच एक दोस्ती जैसा रिश्ता भी था। कई बार दोनों को साथ में एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। जनाई की इस हालत से साफ पता चलता है कि वह अपनी दादी से किय कदर प्यार करती थीं।

वहीं, शिवाजी पार्क स्थित ‘स्वर्गीय भागोजी बालूजी कीर हिंदू श्मशान भूमि’ में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्मशान घाट को सफेद फूलों से सजाया गया है, जो आशा जी की सादगी और उनकी पवित्र आवाज का प्रतीक लग रहे हैं। शाम को होने वाले इस संस्कार में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत महाराष्ट्र सरकार के कई मंत्री, बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार और संगीत जगत की नामी हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। बता दें कि कल शाम ही मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनके आवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

आशा भोसले पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। उनके बेटे आनंद भोसले ने मीडिया को बताया कि शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया (मल्टी-ऑर्गन फेलियर), और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

Baisakhi 2026 : फसल, आस्था और उत्सव का पर्व है बैसाखी, क्या आप जानते हैं धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

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बैसाखी देश की समृद्धि, किसानों की मेहनत, फसल की कटाई से जुड़ा आस्था के प्रतीक का दिन है. इस वर्ष बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी. बैसाखी पर लोग नाच-गाकर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं.विविधताओं वाला देश भारत, जहां के हरेक त्योहार में संस्कृति, परंपरा, आस्था और इतिहास की गहरी छाप समाहित है. ऐसे ही तमाम पर्वों में एक प्रमुख पर्व है बैसाखी, जिसे खासतौर पर सिख समुदाय के लोग मनाते हैं. विशेषकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है.

हालांकि बैसाखी पर्व केवल उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में बैसाखी को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन तमिल नया साल (पुथांडु) और बंगाली नया साल (पोईला बैसाख) के रूप में मनाया जाता है. हालांकि मूलभाव एक ही होता है-नई शुरुआत और समृद्धि की कामना.

सूर्य पंचांग के अनुसार, बैसाखी को सिख नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है. सूर्य का गोचर जब मेष राशि में होता है, यानी मेष संक्रांति के दिन बैसाखी का पर्व मनाया जाता है. इस वर्ष बैसाखी मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. बैसाखी पर्व का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी है. विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और ज्योतिष क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पंडित सुरेश श्रीमाली जी से जानते हैं बैसाखी पर्व का धार्मिक और ऐतिहास महत्व.

बैसाखी का त्योहार मुख्य रूप से फसल (रबी) की कटाई का पर्व है. इस समय रबी फसल पककर तैयार हो जाती है और किसान अपनी मेहनत का फल पाते हैं. खेतों में सुनहरी बालियां लहराती हैं. इसलिए बैसाखी को समृद्धि, खुशहाली और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग पारंपरिक नृत्य जैसे भांगड़ा और गिद्धा कर अपनी खुशी जाहिर करते हैं और ईश्वर का धन्यवाद करते हैं.

बैसाखी मुख्य रूप से सिख धर्म का त्योहार माना जाता है. मान्यता है कि, बैसाखी के दिन ही वर्ष 1699 में सिख धर्म के गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. यह घटना सिख इतिहास में एक क्रांतिकारी मोड़ मानी जाती है, जिसने सिखों को एक नई पहचान, साहस और एकता का संदेश दिया. इसलिए बैसाखी को खालसा पंथ के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और इस दिन से पंजाबी नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है. बैसाखी के दिन गुरुद्वारों में कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया जाता है. लोग गुरुद्वारे जाकर मत्था टेकते हैं और जगह-जगह नगर कीर्तन निकाले जाते हैं.

अगर इतिहास की बात करें तो, बैसाखी का दिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक दर्दनाक घटना से भी जुड़ा है. 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन ही जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre) हुआ था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस दिन हजारों लोग शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्र हुए थे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने उनपर गोलियां बसरा दीं. यह घटना भारतीय इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है और आज भी बैसाखी के दिन इसे याद किया जाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

KANPUR : कार से नाबालिग साली को भगाकर ले जा रहा था जीजा, रिश्तेदारों ने बाइक से दौड़ाया तो मार दी टक्कर, 3 की मौत

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कानपुर के कोरवा गांव के पास एक खौफनाक वारदात सामने आई है. अपनी नाबालिग साली को भगाकर ले जा रहे एक युवक ने पीछा कर रहे अपने ही रिश्तेदारों और उनके दोस्त पर कार चढ़ा दी. इस जानलेवा टक्कर में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.

कानपुर के बिंदकी थाना क्षेत्र में बांदा-कानपुर रोड पर रविवार रात दीपक सोनी नामक शख्स ने अपनी कार से मोटरसाइकिल सवार रिश्तेदारों को जानबूझकर टक्कर मार दी. आरोपी युवक अपनी नाबालिग साली को भगाकर ले जा रहा था, जिसका उसके परिजन विरोध कर रहे थे. जब परिजनों ने मोटरसाइकिल से पीछा कर कार को ओवरटेक किया, तो दीपक ने उन पर गाड़ी चढ़ा दी.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस हादसे में सत्यवान सोनी (26), मनोज सोनी (18) और उनके दोस्त अन्नू सोनकर (40) की मौत हो गई. घटना में एक अन्य राहगीर परिवार के चार सदस्य भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

पुलिस के अनुसार, यह पूरी घटना एक पारिवारिक विवाद का नतीजा थी. दीपक सोनी का अपने परिजनों से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद वह अपनी नाबालिग साली को लेकर भागने लगा. जब रिश्तेदारों ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने आव देखा न ताव और पीछा कर रहे लोगों को मौत के घाट उतार दिया. टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों मृतक सड़क से दूर जा गिरे. फिलहाल आरोपी कार चालक दीपक सोनी मौके से फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है.

दीपक की तेज रफ्तार कार ने न सिर्फ पीछा कर रहे लोगों को रौंदा, बल्कि रास्ते से गुजर रही एक अन्य मोटरसाइकिल को भी अपनी चपेट में ले लिया. इस दूसरी बाइक पर सवार सुरेंद्र कुमार (30), उनकी बहन ममता देवी (35) और उनके दो बच्चे पल्लवी (8) और अर्पित (10) गंभीर रूप से घायल हो गए. पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है. सीओ प्रगति यादव ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह जानबूझकर किया गया हमला मालूम हो रहा है.

ENTERTAINMENT : ‘ये आवाज नहीं चलेगी’, आशा भोसले और किशोर कुमार को झेलना पड़ा था रिजेक्शन, बासी वड़ा-चाय से मिटाई भूख, स्टेशन पर बिताया दिन

आशा भोसले बॉलीवुड की महान सिंगर थी. फिलहाल अब वो हमारे बीच नहीं हैं. उनका कल निधन हो गया. एक दौर एसा भी था, जब उन्हें अपने करियर के शुरुआती समय में रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था.

दिग्गज सिंगर आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं हैं. आशा भोसले का निधन हिंदी सिनेमा और संगीत जगत के लिए भारी क्षति है. करीब सात दशक में अपनी आवाज से देश दुनिया में एक अलग पहचान बनाने वाली आशा भोसले को करियर के शुरुआती समय में रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था.

रोमांटिक से लेकर इमोशनल गानों से दर्शकों को रोने पर मजबूर कर देने वाली आशा भोसले को करियर में शुरुआत और खासकर मुंबई आने के बाद काफी कुछ झेलना पड़ता था. सिंगर ने रिजेक्शन वाले दिन बासी बटाटा वड़ा और चाय पीकर पूरा दिन निकाला था.

दरअसल आशा भोसले ने मुंबई के ‘फेमस महालक्ष्मी स्टूडियो’ से 15 साल की उम्र में गाना गाना शुरू किया था. इस स्टूडियो में आशा और किशोर कुमार एक गाने की रिकॉर्डिंग करने पहुंचे थे, जहां गुलशन कुमार ने गाने की रिकॉर्डिंग में पहले ही देर कर दी थी और माइक इतने ऊंचे लगे थे कि दोनों को गाने में मुश्किल आ रही थी. ऐसे में स्टूडियो में दोनों सिंगर्स के लिए रिकॉर्ड करना मुश्किल हो रहा था.

अमृता राव के साथ एक पोडकास्ट में आशा भोसले ने बताया था कि रॉबिन चटर्जी रिकॉर्डिस्ट ने हमें गाते हुए देखा और चिल्लाने लगा. ये कैसी आवाज है, नहीं चलेगी, गीता को बुलाओ और उन्हें बाहर भेजो. यह सुनकर हम दोनों चुपचाप निकल गए. दोनों को बहुत बुरा लगा था, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी. मन के अंदर दुख भी था.

मैं और किशोर कुमार महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन पर आ पहुंचे और वहां बैठकर समय बिताया. भूख भी लगी थी, क्योंकि पूरा दिन कुछ खाया नहीं था तभी किशोर दा ने पास की दुकान से बासी बटाटा वड़ा और चाय ली और वो दिन का हमारा पहला खाना था.

आशा भोसले ने बताया कि गाने की रिकॉर्डिंग देर से शुरू हुई तो कुछ खाने का समय नहीं मिला और पूरा दिन ऐसे ही गुजर गया, लेकिन 4 साल बाद हम दोनों फेमस हो गए. किशोर कुमार अभिनेता और मैं सिंगर बन चुकी थी. हमें गाना रिकॉर्ड करने उसी स्टूडियो में आना था और रिकॉर्डिस्ट थे वही रॉबिन चटर्जी. किशोर कुमार ने साफ कर दिया कि वो इसके साथ गाना रिकॉर्ड नहीं करेंगे, लेकिन फिर हमने समझाया कि जो उसने किया, वो हम नहीं कर सकते. इस रिजेक्शन से पहले आशा और किशोर कुमार तीन गाने साथ में गा चुके थे और चौथा गाना गाने की तैयारी में थे.

NATIONAL : दिनदहाड़े काट दिया कॉलेज जाती लड़की का गला, बाइक पर आए थे हमलावर

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मंडी में कॉलेज जा रही 19 साल की छात्रा की दिनदहाड़े गला काटकर हत्या से सनसनी फैल गई है. गोपालपुर में हुई इस वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और दो बाइक सवार युवकों पर शक जताया जा रहा है. जल्द खुलासे की उम्मीद है.

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां दिनदहाड़े एक 19 साल की छात्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई. घटना सरकाघाट थाना क्षेत्र के गोपालपुर इलाके की है, जहां मंगलवार सुबह करीब 9:15 बजे कॉलेज जा रही युवती पर अज्ञात हमलावरों ने बीच .

सड़क हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि हमलावरों ने छात्रा का गला काटकर उसकी हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए.

इस वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद सरकाघाट थाना की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी. पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर आसपास के लोगों से पूछताछ भी की है.

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस हत्याकांड को दो बाइक सवार युवकों द्वारा अंजाम दिए जाने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, हत्या के पीछे की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा.

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी मंडी विनोद कुमार भी मौके के लिए रवाना हो गए. उन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के निर्देश दिए हैं. पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.

इस बीच, घटना के बाद इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है. लोग दिनदहाड़े हुई इस वारदात से सहमे हुए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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