Mann Ki Baat: एथलीट्स के रिकॉर्ड बनाने से मनोरमा नदी को बचाने के अभियान तक, पीएम ने किया किन मुद्दों का जिक्र

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे पूरे ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) और सरकार के आधिकारिक डिजिटल चैनलों पर प्रसारित किया जाएगा। मन की बात कार्यक्रम से जुड़ी हर अपडेट के लिए अमर उजाला के साथ जुड़े रहें…

सैनिकों के लिए गिरिजा अम्मा ने छात्रों के साथ मिलकर जुटाए 40 लाख : पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, साथियों, पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है। इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूं। तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई। करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था। मैं बात कर रहा हूं, गिरिजा अम्मा जी की। इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा छात्र भी उनके साथ थे। गिरिजा अम्मा जी करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपये जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा जी ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि मां भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है। पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिन्दू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं। देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटनर्क की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उन छात्रों की भी विशेष सराहना करता हूं, जिन्होंने अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया।

मनोरमा नदी बचाने वाले आकाश गुप्ता का पीएम मोदी ने किया जिक्र
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, साथियों, ऐसी ही यादों को बचाने की एक प्रेरक गाथा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई है। बस्ती के आकाश गुप्ता अपने गांव की मनोरमा नदी को देखकर बहुत दुखी होते थे, क्योंकि जिस नदी को उन्होंने बचपन में साफ और जीवंत देखा था। समय के साथ उस नदी में प्लास्टिक जमा होने लगा था। गंदगी बढ़ती चली जा रही थी। आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे। शिकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया। उन्होंने अपने दोस्तों को साथ लिया। सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी, कुछ बदलने का संकल्प। ये युवा नदी में उतरते थे, जलकुंभी निकालते थे। प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते थे। कई बार एक दिन में 50-60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया। धीरे-धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से साफ दिखने लगा। आसपास के लोगों का ध्यान भी इस काम की तरफ गया। लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरुकता बढ़ी।

उन्होंने कहा, साथियों, ऐसी ही एक प्रेरक कहानी गोवा से भी सामने आई है। गोवा के बालकृष्ण अड़या जी सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। लेकिन समाज के लिए काम करने का उनका उत्साह आज भी वैसा ही है। उन्हें मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की समस्या बहुत परेशान करती थी। उन्होंने भी समाधान के लिए काम शुरु किया। बालकृष्ण जी ने पाइपलाइन बिछाने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे कई घरों तक पानी पहुंचा। जिन परिवारों को पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता था, उनके लिए यह बहुत बड़ी राहत बनी।

पीएम मोदी ने कहा, साथियों, ‘मन की बात’ कार्यक्रम को जो लोग टीवी पर देख रहे हैं, मैं उनसे कहूंगा – एक वीडियो जरूर देखिएगा। ये वीडियो पिछले दिनों बहुत चर्चा में रहा। इसमें कुछ लोग बहुत धैर्य से, बहुत सावधानी से एक गंगा डॉल्फिन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा, इस पूरे प्रयास में करीब 13 घंटे लगे और आखिरकार वो डॉल्फिन बच गई। उन्होंने कहा, साथियों, इसमें बहुत बड़ी भूमिका रही – भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस की। ये घटना उत्तर प्रदेश की है। वहां एक गंगा डॉल्फिन नहर में फंस गई थी | ऐसे समय में ‘नमामि गंगे अभियान’ के तहत बनी ये एंबुलेंस उसके लिए उम्मीद बनकर पहुंची। फिर बहुत सावधानी से उसे बाहर निकाला गया | उसकी जांच की गई, उसका इलाज किया गया और उसके बाद उसे सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। एक तरह से कहें, तो एक जीवन, फिर अपने घर लौट गया।

युवाओं में एस्ट्रोनॉमी को लेकर काफी उत्साह : पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, साथियों, हम भारतीयों में खगोल विज्ञान यानी एस्ट्रोनॉमी को लेकर हमेशा विशेष आकर्षण रहा है। हमारे देश में आज भी सदियों पुरानी वेधशालाएं मौजूद हैं। यहां अद्भुत गणितीय खोज हुई हैं | नेविगेशन हो, पंचांग हो, या हमारे पर्व-त्योहार, इन सबका संबंध आकाश और तारों से रहा है। हमारे यहां एस्ट्रोनॉमी ने हर पीढ़ी में कौतूहल जगाया है। उसे अन्वेषण के लिए प्रेरित किया है और आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई देता है।

उन्होंने कहा, आजकल आप भी देखते होंगे, देशभर में एस्ट्रोनॉमी क्लब्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, स्कूलों से लेकर पार्कों तक इनकी गतिविधियां दिखाई देती हैं। मुझे बंगलूरू एस्ट्रोनॉमिकल सोसइटी के बारे में जानकारी मिली। यहां ऑब्जर्वेशनल सेशंस आयोजित किए जाते हैं | इस संस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में एस्ट्रोनॉमी को लोकप्रिय बनाने का मिशन भी शुरू किया है। ‘खगोल मण्डल’ नाम की एक टीम ने 30 घंटे का एक बहुत इनोवेटिव कोर्स शुरु किया है।

नीदरलैंड्स ने लौटाईं चोला काल की ताम्र पट्टिकाएं
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा, मेरे प्यारे देशवासियों, बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड्स जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई बैठक में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे | इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है।

उन्होंने कहा, साथियों, इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है। इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं। ये मुख्य रुप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है। इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है।

देशभर के आमों की किस्मों का किया जिक्र
पीएम मोदी ने कहा, ”साथियो, गर्मी आते ही एक और चर्चा हर घर में शुरु हो जाती है और वो है आम। आम, आम चर्चा का विषय होता है, भारत में शायद ही कोई घर होगा जहां गर्मियों में आम की बात न होती हो। हर इलाके का अपना आम, अपना स्वाद, अपनी खुशबू। महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, अलफांसो, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है, उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। वैसे, लंगड़ा आम की एक खास बात होती है – पकने के बाद भी उसका रंग कई बार हरा ही रहता है। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा – हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं।”

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरखा। यानी, जगह बदलती है, आम का रूप-रंग और उसका स्वाद भी बदल जाता है। साथियो आम की ये यात्रा, अब गांव से, ग्लोबल मार्केट तक भी पहुंच रही है | आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं आम की पैदावार से जुड़े अपने किसान भाई-बहनों की प्रशंसा करूंगा | आप देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आम किसान नहीं बहुत विशेष हैं। ऐसे ही छाए रहिए।

देश में बढ़ती गर्मी को लेकर पीएम मोदी ने दोहराई अपील
पीएम मोदी ने देश में पड़ रही गर्मी को देखते हुए एक बार फिर से अपनी अपील को दोहराया। उन्होंने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियों, इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप, गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के भिन्न-भिन्न विभाग ने जो गाइडलाइंस जारी की है वो भी भूलियेगा नहीं।

पीएम मोदी ने कहा, साथियों, हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है। आपने भी देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं – और फिर शुरु होता है देसी पेय का दौर।

उन्होंने कहा, देसी पेय से आप भी परिचित हैं, अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद, और गर्मी से राहत भी। पंजाब-हरियाणा जाइए तो लस्सी मिल जाएगी, बड़े गिलास वाली लस्सी। राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात ही क्या है पेट भी भरे, ताकत भी दे। कोंकण और गोवा में कोकम शरबत, सोल कढ़ी। दक्षिण भारत में पानकम, नीर मोर, सम्बारम और ओडिशा में बेल पना, वो सिर्फ पेय नहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है।

पीएम मोदी ने कहा, इसमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना की झलक भी मिलती है। एक बात जरूर ध्यान रखियेगा, इनमें से ज्यादातर चीजें हमारी अपनी रसोई से निकली हैं, हमारे खेत खलिहान से निकली हैं। कोई बड़ी ब्रांडिंग नहीं है। लेकिन पीढ़ियों का अनुभव उनमें समाया हुआ है। आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए।
11:12 AM, 31-May-2026
अनिमेष कुजूर ने साझा किए अपने विचार
एथलीट अनिमेष कुजूर ने पीएम मोदी के कार्यक्रम में कहा, “नमस्ते सर, मेरा नाम अनिमेष कुजूर। मैं 200 मीटर और 400 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हूं और मैं छत्तीसगढ़ से आता हूं। अभी मैं उड़ीसा से खेलता हूं। मैं पिछले साल एशियन मेडल और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स मेडल लेकर आया। मैं एथलेटिक्स 2021 से चालू किया जब मैं स्कूल से पास हुआ।”
11:10 AM, 31-May-2026
एथलीट गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर से की बात
पीएम मोदी ने कहा कि हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी, लेकिन चुनौती में अब जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले। बड़ा रोचक विषय रहा है आपका। मैं चाहता हूं कि ‘मन की बात’ के श्रोताओं को पता चले कि आप लोग के विषय में उनको जानकारी हो। आपने जो पराक्रम किया है उसका पता चले।

11:08 AM, 31-May-2026
100 मीटर रेस में तीन बार टूटा नेशनल रिकॉर्ड : पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा, ”साथियों, एक इवेंट जिसकी देशभर में बहुत चर्चा हो रही है, वह है – 100 मीटर रेस, सौ मीटर की दौड़। महज दो दिनों के भीतर 100 मीटर रेस के पुरुष वर्ग में नेशनल रिकॉर्ड तीन बार टूटा | जिन दो एशलीट्स ने ये कमाल दिखाया है वे हैं – गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर।

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