NATIONAL : दिल्ली दंगा 2020 केस: ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपी IB अफसर की हत्या के दोषी करार, 6 बरी

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अदालत के भीतर यह मामला लंबे समय तक कानूनी दांव-पेचों से गुजरा. आरोपियों की तरफ से कई बार जमानत याचिकाएं दाखिल की गईं. हाल ही में, सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया था कि यह एक युवा खुफिया अधिकारी की बर्बर हत्या का बेहद चौंकाने वाला मामला है, जिसमें जमानत का कोई आधार नहीं बनता.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा के मर्डर केस में दोषी करार दिया गया है. इस केस में कड़कड़डूमा कोर्ट ने कुल पांच लोगों को दोषी करार दिया है.वहीं 6 आरोपियों को बरी कर दिया है.कोर्ट ने 302, 165, 188,153A, 147, 148 सेक्शन के तहत सभी 5 लोगों को दोषी को ठहराया है.दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान अंकित शर्मा मारे गए थे. इस मामले में ताहिर हुसैन समेत 11 लोग आरोपी बनाए गए थे. 6 सालों के बाद अंकित शर्मा के परिवार को न्याय मिला है. यह वाकया 25 फरवरी 2020 का है, जब अंकित शर्मा ऑफिस से घर आए थे. किसी काम से वह फिर निकले तो वापस घर नहीं लौटे थे. इसके बाद परिवार ने उनकी तलाश की तो उनका शव पाया गया. उनका शव चांद बाग पुलिया इलाके में स्थित मस्जिद के पास एक नाले से मिला था.

यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं था, बल्कि दंगों के बीच रची गई एक गहरी और खौफनाक साजिश का हिस्सा था, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता दोनों को हिलाकर रख दिया था. ​आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि आखिर 25 फरवरी 2020 की उस काली शाम को क्या हुआ था, पुलिस ने जांच में क्या पाया और अदालत के भीतर अब तक क्या-क्या कानूनी मोर्चेबंदी हुई.

​नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध और समर्थन को लेकर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली सुलग रही थी. चांद बाग, खजूरी खास, और मुस्तफाबाद जैसे इलाके हिंसा की आग में झुलस रहे थे. पथराव, आगजनी और गोलियों की आवाज के बीच चारों तरफ चीख-पुकार मची थी.​इसी खौफ के बीच, 26 साल के अंकित शर्मा, जो आईबी में तैनात थे, 25 फरवरी की शाम को अपने दफ्तर से घर लौटे थे. घर के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण था. स्थानीय चश्मदीदों और पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, अंकित शर्मा गली में हिंसक भीड़ को शांत कराने और लोगों को समझाने-बुझाने के उद्देश्य से घर से बाहर निकले थे. वे चांद बाग पुलिया के पास पहुंचे थे, जहां उपद्रवियों का तांडव चल रहा था.​शाम के वक्त अचानक चांद बाग पुलिया के पास स्थित एक मस्जिद और ताहिर हुसैन के घर के पास सक्रिय हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ हिंदू-हिंदू चिल्लाते हुए आगे बढ़ी. अंकित शर्मा ने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बेरहमी से घसीटते हुए ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाया गया. वहां उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए गए और हत्या के बाद उनकी लाश को पास के ही खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया.

​लाश मिलने पर खुली क्रूरता की परतें
​अगले दिन, यानी 26 फरवरी 2020 को अंकित के पिता रविंदर कुमार जो खुद पुलिस में रहे हैं ने दयालपुर थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. खोजबीन के दौरान स्थानीय लड़कों ने बताया कि एक युवक को मारकर नाले में फेंका गया है. जब पुलिस ने गोताखोरों की मदद से खजूरी खास नाले से अंकित का शव निकाला, तो पूरा देश दहल गया.

​पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए, वे इंसानियत को शर्मसार करने वाले थे. ​अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू और अन्य धारदार हथियारों से किए गए 51 गहरे चोटों के निशान थे. ​डॉक्टरों के मुताबिक, उनके फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार किए गए थे कि अत्यधिक खून बहने के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी. ​ पहचान मिटाने और सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से शव को गंदे नाले के कीचड़ में धकेल दिया गया था.

​ताहिर हुसैन और अन्य 10 आरोपी
​दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले की जांच की और चार्जशीट दाखिल की. पुलिस ने अपनी जांच में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को इस पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड बताया. पुलिस का दावा था कि ताहिर हुसैन का घर दंगाइयों का ठिकाना बना हुआ था, जहां से तेजाब की बोतलें, गुलेल और पत्थर बरामद हुए थे. ​मार्च 2023 में अदालत ने ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से हत्या, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश की धाराएं तय की थीं.

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