NATIONAL : ‘हमें नहीं पता जांच में क्या हो रहा, अगर लीपापोती की कोशिश हुई तो…’, चंदा चोरी को लेकर भड़का VHP

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अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक फिर दोहराया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच में क्या-क्या हो रहा है इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमारा भी सरकार से आग्रह है कि जो-जो आरोप लगे हैं सबकी जांच होनी चाहिए. जिसके भी खिलाफ आरोप लगे हैं उसकी जांच हो. अगर लीपापोती करने की कोशिश हुई तो हिंदू समाज कभी माफ नहीं करेगा.

आलोक कुमार ने कहा, ‘चंपत राय को उनके खिलाफ हो रहे क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन को पूरा करने तक जनता के सामने आना है कि नहीं आना है ये उनका निर्णय है और इसलिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि वे कैमरे को फेस करें. कुछ लोगों ने कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट से करा लीजिए. मैं कांग्रेस के एक सांसद का पत्र भी देखा जो उन्होंने पीएम मोदी को लिखा था. इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने का फैसला प्रधानमंत्री नहीं कर सकते. वो इसका आदेश नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट ये आदेश दे सकता है.’

इस पूरे विवाद के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने सफाई देते हुए कई अहम बातें कही हैं. ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि दान की रकम की गिनती ट्रस्ट के कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि बैंक की ओर से नियुक्त आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से की जाती थी. ऐसे में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट की नहीं बल्कि बैंक और उसकी व्यवस्था की बनती है. उनके अनुसार, कई बार बिना ठोस आधार के भी आरोप लगाए जाते हैं, खासकर तब जब कोई संगठन या संस्था बड़े धार्मिक या सार्वजनिक कार्यों से जुड़ी हो.

उन्होंने आरोप लगाने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग पहले से ही ट्रस्ट के विरोध में रहे हैं, वे इस तरह के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं.प्रकाश गुप्ता ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ना अपने आप में अच्छी बात है क्योंकि इससे पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह तय करना होगा कि वे किस समय से जांच शुरू करें, क्या यह जांच ट्रस्ट के गठन से शुरू होगी या किसी विशेष अवधि से. यह पूरी तरह जांच एजेंसी यानी एसआईटी पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में जांच को आगे बढ़ाती है.

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