सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करेगा। अदालत बोल चुकी है कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए ऐसे नाबालिगों को भी रिहा किया जाए।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने के पक्ष में है, लेकिन गंभीर अपराध में शामिल आरोपियों को राहत नहीं मिलेगी। परीक्षा पेपर लीक और अन्य कथित अनियमितताओं के खिलाफ पिछले महीने देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण संकेत दिए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, जिन्होंने पहले कोई गंभीर अपराध नहीं किया है। हालांकि, उन लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा, जिनका पहले से गंभीर आपराधिक इतिहास है और जो छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होकर हिंसा में लिप्त हुए। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह हजारों छात्रों के जीवन और उनके भविष्य से जुड़ा मामला है। CJI ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने के संवैधानिक अधिकार को भी ध्यान में रखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित किया जाएगा।

