NATIONAL : विधि विश्वविद्यालयों की पहली राष्ट्रीय बैठक: पेपर लीक-कोचिंग कल्चर पर CJI चिंतित, CLAT में बड़े सुधार की जरूरत

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना खत्म हो और पूरी प्रक्रिया तकनीकी व प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाई जाए। उन्होंने इस दिशा में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।

भोपाल में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पहली बार देशभर के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) के कुलपति और कुलाधिपति एक मंच पर जुटे। बैठक की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की। इस दौरान उन्होंने क्लैट परीक्षा को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और छात्रों के लिए समान अवसर वाला बनाने पर जोर दिया। सीजेआई ने कहा कि प्रवेश परीक्षाओं का स्वरूप ऐसा होना चाहिए कि 12वीं पास छात्र बिना किसी महंगी कोचिंग के भी परीक्षा दे सकें और सफल हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र इस तरह तैयार किए जाएं, जिनके लिए पहले से कानून की विशेष पढ़ाई या कोचिंग जरूरी न हो। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि वर्तमान समय में कई कोचिंग संस्थान क्लैट की तैयारी के नाम पर छात्रों से लाखों रुपये वसूल रहे हैं। कुछ संस्थान छह महीने के कोर्स के लिए दो से ढाई लाख रुपये तक फीस लेते हैं।

केंद्र को भेजा जाएगा विस्तृत प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जा सकता है। बैठक में यूजीसी चेयरमैन विनीत जोशी भी मौजूद रहे। मुख्य न्यायाधीश ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से विधि विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और प्रशासनिक सुधारों के लिए ठोस व्यवस्था बनाने को कहा।
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पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना खत्म हो और पूरी प्रक्रिया तकनीकी व प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाई जाए। उन्होंने इस दिशा में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। एक राष्ट्रीय विधि के कुलपति ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि अगर क्लैट परीक्षा में प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो इससे परीक्षा प्रणाली अधिक निष्पक्ष हो सकती है और छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

विधि विश्वविद्यालयों के वित्तीय संकट पर भी चर्चा
इस बैठक में देशभर के कई विधि विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। कुलपतियों ने बताया कि कई संस्थान गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी है, जबकि कुछ जगहों पर वेतन भुगतान तक में दिक्कत आ रही है। अभी देश के अधिकांश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज राज्य सरकारों के अधीन संचालित होते हैं। बैठक में इन्हें आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर केंद्रीय ढांचे के तहत लाने का प्रस्ताव भी सामने आया।

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