Sunday, September 20, 2026
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UP : यूपी का बांदा लगातार 8वें दिन 47°C पार:देश में सबसे गर्म शहर; ; मानसून अटका

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देश के उत्तर-पश्चिम में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर में दिल्ली-हिमाचल, यूपी, दक्षिण-पश्चिम में ओडिशा और तेलंगाना भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। पश्चिम में गुजरात, महाराष्ट्र और सेंट्रल इंडिया में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के एमपी से लगा हिस्सा और छत्तीसगढ़ में गर्मी का सबसे खतरनाक दौर चल रहा है।भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को यूपी के बांदा और विदर्भ का ब्रह्मपुरी में सबसे ज्यादा गर्म रहे। यहां लगातार 8वें दिन 47°C से ज्यादा तापमान दर्ज किया गया।

छतरपुर का खजुराहो 47.2°C के साथ तीसरे नंबर पर और नौगांव 46.8°C के साथ चौथा सबसे गर्म शहर रहा।बढ़ती गर्मी के कारण पंजाब सरकार ने सरकारी दफ्तरों और स्कूलों का समय बदल दिया है। सरकारी स्कूल और दफ्तर सुबह साढ़े 7 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक खुलेंगे। चंडीगढ़ के स्कूलों में समर कैंपों में आउटडोर एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई है। मानसून तो यह पिछले तीन दिन से केरल के तट से 30-35 किमी दूर अटका है। केरल के तटीय इलाके, तमिलनाडु और कर्नाटक में बारिश हो रही है। लेकिन, मानसून आने की सभी शर्तें पूरी नहीं हो पा रहीं।

WORLD : 75 साल की दोस्ती पर चीन-पाकिस्तान का खुला ऐलानः “हर मुश्किल में एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे

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China और Pakistan ने अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने साझा भविष्य, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कई अहम समझौतों पर सहमति बनाई।

पाकिस्तान-चीन ने साझा भविष्य के निर्माण के लिए मिलकर काम करते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों की “दृढ़तापूर्वक रक्षा” करने और उन्हें विकसित करने पर सहमति व्यक्त की। मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गयी। यह बयान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की 23 से 26 मई तक चीन की आधिकारिक यात्रा के समापन पर आया, जो उन्होंने प्रधानमंत्री ली क्विंग के निमंत्रण पर की थी। शरीफ की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग संबंधी कई दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की और दोनों पक्षों ने चीन-पाकिस्तान सर्वकालिक रणनीतिक सहयोग साझेदारी को और गहरा करने तथा पारस्परिक हित के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर एक नई व्यापक समझ पर सहमति व्यक्त की।

शरीफ ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भी भाग लिया और झेजियांग प्रांत के हांगझोऊ का सफल दौरा किया। बयान में कहा गया, “75 वर्षों के राजनयिक संबंधों के दौरान, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय परिस्थितियों में आए बदलावों के बावजूद यह मित्रता अटूट बनी रही है, और दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे पर भरोसा, सम्मान और समर्थन किया है तथा कठिनाइयों और चुनौतियों के समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।” इसमें आगे कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान “नए युग में साझा भविष्य वाले चीन-पाकिस्तान समुदाय” के निर्माण में और अधिक तेजी लाने पर सहमत हुए हैं, जो चीन और उसके पड़ोसी देशों को जोड़ने वाले साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के प्रयास के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा।

पाकिस्तान ने एक-चीन सिद्धांत के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय एकीकरण के लिए चीन द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन करता है और “ताइवान की स्वतंत्रता” के किसी भी रूप का कड़ा विरोध करता है। चीन ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपने अटूट समर्थन को दोहराया और पाकिस्तान द्वारा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थिरता, विकास और समृद्धि की रक्षा के प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन किया। दोनों पक्षों ने किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध दोहराते हुए दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व की पुनः पुष्टि की तथा सभी लंबित विवादों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया।

NATIONAL : सिद्धारमैया ने 28 मई को बुलाई कैबिनेट की ब्रेकफास्ट मीटिंग, CM पद से दे सकते हैं इस्तीफा

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सिद्धारमैया 28 मई को अपने आवास पर कैबिनेट के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग की मेजबानी करेंगे. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बुधवार को बेंगलुरु पहुंचेंगे. इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सुरजेवाला पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ मीटिंग कर सकते हैं.

कर्नाटक में सियासी उथल-पुथल पर विराम लगता नजर आ रहा है. खबर है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई यानी गुरुवार को पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इससे पहले आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की बैठक हुई थी.अब कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. वह इससे पहले बुधवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे.

सिद्धारमैया 28 मई को अपने आवास पर कैबिनेट के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग की मेजबानी करेंगे. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बुधवार को बेंगलुरु पहुंचेंगे. इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सुरजेवाला पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ मीटिंग कर सकते हैं.

इससे पहले आज दिल्ली में कई घंटे चली मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि आज की मैराथन बैठकों में आगामी राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव पर ही चर्चा हुई है. आप लोग मुख्यमंत्री बदलने की जो अटकलें लगा रहे हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है.

वेणुगोपाल ने कहा था कि आज हमारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ विस्तृत बैठक हुई. सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, कर्नाटक के पार्टी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और मैं इस बैठक का हिस्सा थे. पूरी बातचीत आगामी राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव पर केंद्रित थी. आप लोग जो भी अटकलें लगा रहे हैं, उनमें कोई दम नहीं है. कोई वास्तविकता नहीं है. आज की बैठक में बस यही तय हुआ है.

लेकिन इस बयान के बाद सूत्रों के हवाले से खबर आई कि बैठक में कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इस्तीफा देने को कहा था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा भेजने की बात कही थी और दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी का आश्वासन दिया था लेकिन सिद्धारमैया इसके लिए तैयार नहीं हुए. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सिद्धारमैया पार्टी के प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर उभरें. राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सामाजिक न्याय और जातिगत प्रतिनिधित्व की रणनीति को और मजबूत कर रहे हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की इन मैराथन बैठकों के दौरान बताया गया कि पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी वोटों को मजबूत करने के लिए दिल्ली में सिद्धारमैया की जरूरत है. सिद्धारमैया का राजनीतिक कद कांग्रेस की चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाएगा. सूत्रों ने यह भी बताया कि अगर सिद्धारमैया पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा के ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो पार्टी नेतृत्व उन्हें आश्वासन देता है कि उनकी बाकी सभी चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. कुछ देर बाद खबर आई कि सिद्धारमैया पद से इस्तीफा दे सकते हैं. लेकिन देर रात खबर आई कि सिद्धारमैया गुरुवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर सत्ता साझेदारी की अटकलें बार-बार लगती रही हैं. डीके शिवकुमार के समर्थकों का कहना है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया गया था. कांग्रेस नेतृत्व ने कर्नाटक में किसी संभावित नेतृत्व परिवर्तन पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.

WORLD : चीन-पाकिस्तान की ‘कश्मीर चाल’ पर भारत का करारा जवाब, MEA ने सुना दी खरी-खरी

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भारत ने सिर्फ कश्मीर के जिक्र पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC परियोजनाओं को लेकर भी अपना विरोध दोहराया।

भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर किसी भी दूसरे देश की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। चीन और पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे “बिल्कुल बेवजह और अनुचित” बताया है।

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हाल ही में चीन के दौरे पर गए थे। इस दौरान चीन और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में दोनों देशों ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया और इसे “इतिहास से जुड़ा हुआ लंबित मुद्दा” बताया। इसी बयान पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत का जम्मू-कश्मीर को लेकर रुख हमेशा से साफ और स्थिर रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने यह भी कहा कि किसी दूसरे देश को इस मामले पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा कि भारत चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी संदर्भों को पूरी तरह खारिज करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न सिर्फ अनुचित हैं बल्कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ भी हैं।

भारत ने सिर्फ कश्मीर के जिक्र पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC परियोजनाओं को लेकर भी अपना विरोध दोहराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस परियोजना के कुछ हिस्से भारत के उस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया हुआ है। ऐसे में भारत किसी भी ऐसी गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा जो पाकिस्तान के कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश करे।

भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत के कुछ हिस्सों पर गैरकानूनी और जबरन कब्जा कर रखा है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की निर्माण परियोजना या निवेश भारत की संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा। यही वजह है कि भारत पहले भी कई बार CPEC का विरोध करता रहा है और अब फिर से उसने अपना रुख दोहराया है।

विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के बीच हुए तथाकथित “सीमा पार जल संसाधन सहयोग” पर भी सवाल उठाए। रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच ऐसी किसी सीमा का अस्तित्व ही नहीं है, जिसके आधार पर “ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन” जैसी बात की जा सके। भारत ने इसे भी भ्रामक और तथ्यों से परे बताया।

भारत ने इस दौरान 1963 में हुए चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने उस समय अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र का एक हिस्सा चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत आज भी स्वीकार नहीं करता।

गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान अक्सर कश्मीर मुद्दे पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। लेकिन भारत लगातार यह कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इस पर किसी तीसरे देश को बोलने का अधिकार नहीं है। भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान को सबसे पहले सीमा पार आतंकवाद बंद करना चाहिए।

इस पूरे मामले में भारत ने एक बार फिर बेहद स्पष्ट और सख्त संदेश देने की कोशिश की है। सरकार ने साफ कर दिया है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की बाहरी टिप्पणी या दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत का रुख पहले जैसा ही मजबूत और अडिग बना हुआ है।

वैश्विक व्यापार के विस्तार के लिए यह जरूरी है कि समुद्री क्षेत्र पूरी तरह खुले एवं स्वतंत्र हों। विश्व की मौजूदा व्यवस्था में हर देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर काफी हद तक निर्भर करती है। ऐसे में अगर किसी समुद्री क्षेत्र पर एक देश का कब्जा हो जाए, तो वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला बाधित होने से अन्य देशों के हित स्वाभाविक रूप से प्रभावित होंगे, जैसा कि होर्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध करने से दुनिया भर में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है।

WORLD : कनाडा में “अपने ही” लूट रहे भारतीय कारोबारियों को: हिंसक अपराधों वाले गैंग के 17 पंजाबी युवक गिरफ्तार, डिपोर्टेशन की लटकी तलवार

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कनाडा में पंजाबी व्यापारियों और साउथ एशियन कारोबारियों से जबरन वसूली करने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय गैंग पर बड़ी कार्रवाई हुई है। पील रीजनल पुलिस ने 17 भारतीय मूल के युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह गोलीबारी, आगजनी और धमकियों के जरिए…

कनाडा में साउथ एशियन समुदाय, खासकर पंजाबी कारोबारियों को निशाना बनाकर कथित तौर पर जबरन वसूली करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। Peel Regional Police ने 17 पंजाबी युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह ग्रेटर टोरंटो एरिया में रेस्टोरेंट मालिकों, ट्रकिंग कंपनियों और अन्य व्यापारियों को धमकाकर पैसे वसूलता था। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी कथित तौर पर “Four Brothers” नामक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़े थे। यह नेटवर्क ब्रैम्पटन, मिसिसॉगा, कैलेडन और ब्रिटिश कोलंबिया के कई हिस्सों में सक्रिय था। पुलिस ने यह भी कहा कि गिरोह के तार अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया तक जुड़े हुए थे।

पुलिस के अनुसार जिन लोगों ने कथित वसूली की रकम देने से इनकार किया, उन्हें हिंसक हमलों का सामना करना पड़ा। जांच में 24 घटनाओं को आरोपियों से जोड़ा गया है, जिनमें 16 हिंसक अपराध शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन घटनाओं में कम से कम 324 राउंड गोलियां चलाई गईं। एक मामले में कैलेडन स्थित एक घर पर कथित गोलीबारी और आगजनी हुई, जिसके कुछ मिनट बाद ब्रैम्पटन में एक बिजनेस स्थल पर भी फायरिंग की गई। Nishan Duraiappah ने कहा कि जबरन वसूली अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रही, बल्कि इसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए विभिन्न देशों और एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग बेहद जरूरी है।उन्होंने यह भी माना कि दक्षिण एशियाई समुदाय में डर का माहौल पैदा हुआ है, लेकिन पुलिस समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जांच के दौरान पुलिस ने 6 हथियार, अवैध ड्रग्स, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी पहचान दस्तावेज जब्त किए। इस मामले में कुल 106 आपराधिक आरोप लगाए गए हैं।कनाडाई अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों को आपराधिक मुकदमा पूरा होने के बाद कनाडा से निर्वासित भी किया जा सकता है। Canada Border Services Agency ने 6 लोगों को इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के आधार पर हिरासत में लिया है। हालांकि अधिकारियों ने साफ कहा है कि अदालत में अभी किसी भी आरोपी का दोष साबित नहीं हुआ है और सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान ब्रैम्पटन के 25 वर्षीय इकबाल सिंह भगरिया, नॉरवल के 24 वर्षीय आकाशदीप सिंह, सरे के 25 वर्षीय रविंदर सिंह, 25 वर्षीय जशनबीर सिंह, ब्रैम्पटन के 26 वर्षीय दिलावरप्रीत सिंह, 21 वर्षीय मंदीप सिंह, 22 प्रभदीप सोहल, 22 वर्षीय प्रतापबीर घुमन, 29 वर्षीय अजयदीप सिंह, 29 वर्षीय नवरूप सिंह, राजन सिंह, अमृतजोत सिंह, जशनप्रीत सिंह, सुखविंदर सिंह, मोहिंदर सिंह और गौतम गिरफ्तार किया गया है।

WORLD : होर्मुज स्ट्रेट पर टोल नहीं दिया तो क्या अटके रहेंगे भारत के शिप, क्या हैं इसके नियम?

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ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौरान होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर से वैश्विक ध्यान का केंद्र बन चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने यहां नियंत्रण कड़ा कर दिया है और इसके लिए उसने पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी नाम का एक नया निकाय स्थापित किया है. इसे स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही की निगरानी का काम सौंपा गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या टोल न चुकाने पर भारतीय जहाजों को भी रोका जाएगा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान के प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांडी ने कहा है कि होर्मुज टोल सभी के लिए है. यह संसद और सरकार तय करेंगी कि कितना टोल वसूला जाना है.‌ इसी के साथ सभी देशों को ईरान की नई प्रक्रिया प्रणाली का पालन करना भी जरूरी है.

नए घोषित संप्रभु शासन के तहत स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को पारगमन से पहले पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को ईमेल के जरिए से पहचान विवरण जमा करना होगा. इसमें पिछले जहाज के नाम और पंजीकरण की जानकारी शामिल है.

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून क्या कहता है?

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के तहत होर्मुज स्ट्रेट को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है. यहां पारगमन मार्ग का सिद्धांत लागू होता है. इसका मतलब है कि सभी देशों के जहाज को आमतौर पर स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के गुजरने की अनुमति है और किसी भी देश को मनमाने ढंग से समुद्री यातायात को रोकने या फिर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है. भारत ने भी ईरान द्वारा उठाए गए इस कदम का विरोध किया है.

क्या है ईरान का तर्क

ईरान लगातार यह तर्क देता रहा है कि स्ट्रेट के आसपास का पानी उसके क्षेत्रीय और संप्रभु नियंत्रण में आता है. खासकर उन मामलों में जिनमें विरोधी या फिर प्रतिद्वंदी देश शामिल हों.

क्या भारतीय जहाजों को कोई परेशानी हो रही है?

फिलहाल भारतीय जहाज फंसे हुए नहीं दिख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें टोल से जुड़े किसी भी टकराव के बिना एक तय सुरक्षित गलियारे से गुजरने की अनुमति दी जा रही है. हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि स्थिति अभी भी काफी ज्यादा संवेदनशील है. खाड़ी में तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग ऑपरेशंस पर तेजी से असर पड़ सकता है.

NATIOANL :ट्विशा शर्मा मौत मामलाः रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंची सीबीआई, की पूछताछ

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भोपाल, 26 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई की टीम मंगलवार को ट्विशा की सास सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंची और उनसे पूछताछ की।

दिल्ली से आई टीम सीबीआई ने मामले की जांच तेज करते हुए मंगलवार को कई अहम लोगों के बयान दर्ज किए। दोपहर में सीबीआई टीम ने गिरिबाला सिंह के घर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। सीबीआई अधिकारियों ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से शादी के बाद हुए विवाद, ट्विशा और उसके मायके पक्ष के साथ संबंधों और पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ कर उनका बयान लिया। इसके बाद टीम तीन ईएमई सेंटर पहुंची, जहां ट्विशा के परिजनों से मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। वहीं, सीबीआई की दूसरी टीम पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के कार्यालय पहुंची और उनसे मुलाकात कर केस की विस्तृत जानकारी मांगी।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एसआईटी से मामले की केस डायरी भी तलब की। प्रारंभिक जांच में डायरी अधूरी पाए जाने पर सीबीआई ने उसे पूरा कर सौंपने के निर्देश दिए हैं। देर रात एसआईटी ने आवश्यक जानकारी जोड़कर पूरी केस डायरी सीबीआई को सौंप दी। मामले में सीबीआई की कार्रवाई के बाद जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि सीबीआई की टीम सोमवार की रात भोपाल पहुंची थी। केन्द्रीय जांच एजेंसी ने कटारा हिल्स थाने में पहले दर्ज एफआईआर को री-रजिस्टर कर ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस जांच में 20 लाख रुपये अतिरिक्त मांगने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर सीबीआई ने दहेज मृत्यु का मामला दर्ज किया है।

इधर, ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर मंगलवार को भोपाल के जिला न्यायालय में दायर अलग-अलग आवेदनों पर सुनवाई हुई। इस दौरान ट्विशा के परिवार की ओर से दायर सीडीआर सुरक्षित रखने की अर्जी पर एसआईटी ने अपना जवाब कोर्ट में पेश किया। न्यायमूर्ति आकांक्षा कुमार की अदालत में एसआईटी ने बताया कि 12 से 20 मई तक की पूरी सीडीआर सुरक्षित रखने के लिए संबंधित सिम कंपनियों को पत्र भेज दिए गए हैं। कंपनियों से जानकारी मिलते ही उसे केस डायरी का हिस्सा बनाकर अदालत में पेश किया जाएगा।

उधर, ट्विशा के जिस जिमनास्टिक बेल्ट से कथित तौर पर फांसी लगाने का दावा किया जा रहा है, वह बेल्ट दोनों बार पोस्टमॉर्टम करने वाली मेडिकल टीम को नहीं दिखाई जा सकी। इसे लेकर सवाल उठे तो डीसीपी विकास कुमार शहवाल ने कहा कि उस बेल्ट को पुलिस ने जब्त कर लिया था। पहले पोस्टमॉर्टम के बाद बेल्ट डॉक्टर को परीक्षण के लिए सौंपा गया था। परीक्षण के बाद एसआईटी ने इसे सुरक्षित रख लिया था। बेल्ट को सात दिन पहले सागर की फोरेंसिक लैब भेजा गया था। दिल्ली एम्स की मांग के बाद भोपाल पुलिस ने एफएसएल और साइबर सेल को इस बारे में पत्र लिखा है।

इसी बीच एसआईटी की ओर से पति और मुख्य आरोपी समर्थ सिंह से पूछताछ में नए खुलासे सामने आए। एसआईटी की टीम समर्थ सिंह के बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित घर पहुंची थी, जहां यहां समर्थ और गिरिबाला सिंह से करीब ढाई घंटे पूछताछ हुई। इस दौरान समर्थ ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि ट्विशा गर्भपात के बाद “तनाव” में थी। उसने यह दावा भी दोहराया कि शादी के दौरान उसने और उसके परिवार ने ट्विशा को 7 लाख रुपये दिए थे।

बता दें कि ट्विशा ने 12 मई की रात 10:20 बजे कथित रूप से फांसी लगाई थी। एम्स से 13 मई की सुबह 5 बजे मामला दर्ज कराया गया। ट्विशा के परिजन आरोप लगा रहे थे कि केस को प्रभावित करने की नीयत से गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ने समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी। समर्थ अस्पताल में ट्विशा की मौत की पुष्टि के बाद घर लौट आया था। ट्विशा के परिजन का आरोप था कि इस दौरान समर्थ ने साक्ष्यों को प्रभावित किया। परिजन ने आशंका जताई थी कि क्रिमिनल लॉयर होने के कारण उसने क्राइम सीन पर हेरफेर किया। इस बात की पुष्टि सीबीआई की एफआईआर में भी हुई है। पुलिस को सूचना देने में अतिरिक्त देरी की गई थी। अब सीबीआई इस बात की जांच करेगी कि पुलिस तक सूचना देरी से क्यों पहुंचाई गई। सीबीआई मामला नोट करने वाले डॉक्टर से भी पूछताछ करेगी।

NATIONAL : धर्मशाला का मैदान मारने वाली टीम को मिलेगी सीधे फाइनल में एंट्री, गुजरात के सामने होगी बड़ी मुसीबत

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धर्मशाला में आईपीएल 2026 के क्वालिफायर-1 में आरसीबी और गुजरात टाइटंस मंगलवार शाम आमने-सामने होंगी, जिसमें विजेता टीम सीधे फाइनल में प्रवेश करेगी।

नीरज व्यास, जागरण धर्मशाला। धौलाधार की गोद में स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में आईपीएल 2026 के क्वालिफायर-1 को लेकर रोमांच चरम पर है। जब मंगलवार शाम 7:30 बजे आरसीबी और गुजरात टाइटंस आमने-सामने होंगी तब पूरे देश के क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें खूबसूरत एचपीसीए स्टेडियम पर लगी होंगी। दोनों ही टीमों में से जीतने वाली टीम आइपीएल-2026 के फाइनल में प्रवेश कर जाएगी।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास धर्मशाला में खेलने का अच्छा अनुभव है। इसी मैदान पर हाल ही में आरसीबी ने पंजाब किंग्स को हराकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान पक्का कर लिया था। जाहिर है इस टीम के खिलाड़ियों को यहां के हालात की अच्छी जानकारी है। वहीं, दूसरी ओर गुजरात टाइटंस पहली बार एचपीसीए स्टेडियम में आइपीएल मुकाबला खेलेगी।

आईपीएल 2026 के इस बड़े मुकाबले में जो टीम दबाव को बेहतर तरीके से झेलेगी वही बाजी मारेगी, यह तय है। गुजरात टाइटंस की ओर से इस सत्र में युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन और कप्तान शुभमन गिल अच्छा खेल रहे हैं, जो आरसीबी के गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती होंगे। दूसरी ओर, धर्मशाला की इस तेज और उछाल भरी पिच पर आरसीबी के विराट कोहली का अनुभव बेंगलुरु के लिए प्लस पाइंट साबित होने वाला है।

मौजूदा आईपीएल में गुजरात के लिए गेंदबाजी बड़ी ताकत रही है। सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले शीर्ष 10 गेंदबाजों में गुजरात के तीन नाम है रबाडा, राशिद और सिराज। आरसीबी के लिए भुवनेश्वर के 24 विकेट हैं लेकिन उसके बाद शीर्ष-10 में टीम का कोई गेंदबाज नहीं है लेकिन धर्मशाला में पंजाब किंग्स के विरुद्ध पिछले मुकाबले में भुवनेश्वर को शुरू के ओवर में पिच से मदद मिली थी और उन्होंने पंजाब के दोनों प्रारंभिक बल्लेबाजों को सस्ते में पवेलियन भेज आरसीबी को जीत के ट्रैक पर डाल दिया था। इसलिए गुजरात को इस गेंदबाज से बच के रहना होगा।

आरसीबी की बल्लेबाजी में गहराई
गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी उसके तीन बल्लेबाज शुभमन गिल, साई सुदर्शन और जोस बटलर पर निर्भर है। वहीं, आरसीबी की बात करें तो टीम के पास बल्लेबाजों की कमी नहीं। फिल सॉल्ट फिट होकर आ चुके हैं। विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार, जितेश शर्मा, टिम डेविड और रोमारियो शेफर्ड के अलावा क्रुणाल पांड्या बल्लेबाजी को गहराई देते हैं।

टॉस पर होगा अहम
धर्मशाला की पिच आईपीएल के इस सत्र में पूरी तरह से बल्लेबाजी के अनुकूल साबित हुई है। आईपीएल 2026 सत्र के दौरान यहां हुए तीनों मैचों की पांच पारियों में 200 से ऊपर रन बने हैं। यहां अकसर टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है ताकि बाद में रनों का पीछा किया जा सके, जो इस मैदान पर आसान रहा है। तेज गेंदबाजों को अकसर यहां अतिरिक्त उछाल मिलती है।

इस प्रकार हैं दोनों टीमें
गुजरात टाइटंस: शुभमन गिल (कप्तान), अनुज रावत (विकेटकीपर), अरशद खान, अशोक शर्मा, जोस बटलर (विकेटकीपर), कानर एस्टरहुइजन, गुरनूर बरार, जेसन होल्डर, कुलवंत खेजरोलिया, कुमार कुशाग्र, मोहम्मद सिराज, ग्लेन फिलिप्स, प्रसिद्ध कृष्णा, कगिसो रबाडा, राशिद खान, साई किशोर, साई सुदर्शन, शाहरुख खान, इशांत शर्मा, निशांत सिंधु, मानव सुथार, राहुल तेवतिया, वॉशिंगटन सुंदर, ल्यूक वुड और जयंत यादव।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: रजत पाटीदार (कप्तान), टिम डेविड, विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, फिलिप सॉल्ट, जितेश शर्मा, जैकब बेथेल, क्रुणाल पांड्या, रोमारियो शेफर्ड, अभिनंदन सिंह, जोश हेजलवुड, रसिख सलाम डार, भुवनेश्वर कुमार, सुयश शर्मा, स्वप्निल सिंह, नुवान तुषारा, वेंकटेश अय्यर, जैकब डफी, मंगेश यादव, जॉर्डन कॉक्स, विक्की ओस्तवाल, विहान मल्होत्रा, कनिष्क चौहान और सात्विक देसवाल।

SPORTS : IPL 2026 सीजन बना रनों की सुनामी, 61 बार 200 का स्कोर, रिकॉर्ड सबसे ज्यादा छक्के लगे

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नई दिल्ली. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का मौजूदा 2026 सीजन क्रिकेट इतिहास की तमाम किताबों को दोबारा लिखने पर आमादा है। लीग स्टेज के खत्म होने के साथ ही यह साफ हो गया है कि रनों, छक्कों और रिकॉर्ड्स के लिहाज से ऐसा आईपीएल आज तक कभी नहीं देखा गया। इस सीजन ने टी-20 क्रिकेट की पूरी परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है। गेंदबाज बेबस नजर आ रहे हैं और बल्लेबाज हर मैच में चौके-छक्कों की सुनामी ला रहे हैं। आईपीएल 2026 अब तक का सबसे बड़ा, सबसे तेज और सबसे विस्फोटक सीजन बन चुका है।

यहाँ जानिए वे 5 बड़े ट्रेंड्स और रिकॉर्ड्स जो साबित करते हैं कि यह सीजन क्यों अब तक का सबसे अनोखा आईपीएल है:

  1. शुरुआती 9 सीजन पर भारी पड़ा अकेले 2026
    इस सीजन में बल्लेबाजी की आक्रामकता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि सिर्फ 70 लीग मैचों के भीतर ही 61 बार 200 या इससे ज्यादा का स्कोर (200+ Score) बन चुका है। दिलचस्प बात यह है कि आईपीएल के शुरुआती 9 सीजनों (साल 2008 से 2016 तक) में हुए कुल 538 मैचों को मिलाकर भी सिर्फ 57 बार 200+ का स्कोर बना था। यानी जो कारनामा करने में पहले 9 साल लगे थे, उसे आईपीएल 2026 ने महज कुछ हफ्तों में पीछे छोड़ दिया।
  2. इतिहास का सबसे तेज रनरेट
    आईपीएल 2026 का ओवरऑल रनरेट 9.85 दर्ज किया गया है, जो इस टूर्नामेंट के 18 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा है। साल 2008 के पहले सीजन में रनरेट 8.30 था, जिसका मतलब है कि करीब दो दशकों में बल्लेबाजी की रफ्तार प्रति ओवर लगभग डेढ़ रन बढ़ चुकी है।

ग्रैफिक नोट: साल 2022 तक आईपीएल के इतिहास में कभी भी किसी भी सीजन का ओवरऑल रनरेट 9 के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था, लेकिन पिछले तीन सालों में गेम पूरी तरह बदल गया है।

  1. पहली बार लगे 1300+ छक्के
    इस सीजन में बाउंड्री की चौड़ाई छोटी लगने लगी है। आईपीएल इतिहास में पहली बार किसी एक सीजन में 1300 से अधिक छक्के (Sixes) जड़े जा चुके हैं। इम्पैक्ट प्लेयर नियम के आने और बल्लेबाजों के निडर रवैये के कारण अब हर मैच में औसतन 18-20 छक्के लगना आम बात हो गई है।
  2. 200+ और 220+ का रनचेज हुआ बेहद आसान
    अब कोई भी टोटल सुरक्षित नहीं रह गया है। इस सीजन में सिर्फ बड़े स्कोर बने ही नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक चेज भी किया गया है। आईपीएल 2026 में 16 बार 200+ का टारगेट चेज हुआ, जिसने 2025 के रिकॉर्ड (9 बार) को आसानी से तोड़ दिया। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस सीजन 9 बार 220 या उससे ज्यादा का स्कोर चेज हुआ है, जबकि आईपीएल के पिछले 18 सीजनों को मिलाकर ऐसा सिर्फ 5 बार ही संभव हो पाया था।
  3. सनराइजर्स और पंजाब किंग्स का महा-रिकॉर्ड
    इस रनोत्सव में फ्रेंचाइजियों की बात करें तो सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और पंजाब किंग्स (PBKS) सबसे आगे रहीं। इन दोनों ही टीमों ने इस सीजन में 9-9 बार 200 से अधिक का स्कोर खड़ा किया। दुनिया के किसी भी टी-20 टूर्नामेंट या लीग में किसी एक टीम द्वारा एक सीजन में इतनी बार 200 का आंकड़ा छूने का यह अपने आप में एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

NATIONAL : ट्विशा केस की जांच CBI ने संभाली… वो 7 सवाल जिनके जवाब मिलने अब तक बाकी, क्या गिरिबाला सिंह की होगी गिरफ्तारी

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सोमवार को FIR दर्ज कर जांच अपने हाथों में ले ली है. एजेंसी की एक विशेष क्राइम यूनिट ने जरूरी दस्तावेज और सूबत एकत्र करने के लिए तुरंत भोपाल का रुख किया है, ताकि 12 मई को कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फंदे से लटकी मिली 33 वर्षीय ट्विशा की मौत के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके.

भोपाल में 12 मई को अपनी ससुराल में फंदे से झूलती हुई मिली ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच की कमान संभाल ली है. सोमवार को CBI ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली और राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली. इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान संभालते हुए सीबीआई अब उन 7 मुख्य अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशेगी, जिनमें मौत का असली कारण, शरीर पर चोट के निशान, अंतिम समय की परिस्थितियां और गिरिबाला द्वारा जांच को प्रभावित करने के गंभीर आरोप शामिल हैं.

CBI की स्पेशल क्राइम यूनिट ने सोमवार को भोपाल पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है. एजेंसी ने राज्य पुलिस द्वारा पहले दर्ज FIR को फिर से दर्ज कर लिया है. इसमें ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है. CBI ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85, 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं को भी मामले में शामिल किया है.

दर्ज एफआईआर के अनुसार, घटना की रात ट्विशा ने 9 बजकर 41 मिनट पर अपनी मां से फोन पर बात की थी. उस बातचीत के दौरान पृष्ठभूमि में उनके पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज साफ सुनी गई थी और फिर फोन अचानक कट गया. इसके बाद जब परिवार ने बार-बार फोन किया तो सास गिरिबाला सिंह ने फोन उठाकर सिर्फ इतना कहा कि वह अब दुनिया में नहीं रही और कॉल काट दी. अब सीबीआई को इस आखिरी वक्त के घटनाक्रम और झगड़े के मुख्य कारण का सच पता लगाना है.

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सबसे बड़ा सवाल उनके शरीर पर मिले जख्मों को लेकर है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये साफ कहा गया है कि मौत का कारण फंदे से लटकने (हैंगिंग) की वजह से हुआ है, लेकिन इसके साथ ही उनके शरीर के अन्य हिस्सों पर ‘कई चोटों के निशान’ भी पाए गए हैं. जो मौत से पहले लगी थीं. रिपोर्ट के मुताबिक ये चोटें किसी भोथरी चीज या भारी दबाव (ब्लंट फोर्स) के कारण लगी हो सकती हैं, जो गहरी साजिश की ओर इशारा करती हैं.

ट्विशा के परिवार वालों ने पुलिस को दिए अपने बयानों में आरोप लगाया है कि 9 दिसंबर 2025 को हुई शादी के बाद से ही ससुराल वाले दिए गए दहेज से संतुष्ट नहीं थे. इसी वजह से 33 वर्षीय ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का शिकार बनाया जा रहा था, जिससे तंग आकर उन्हें ये आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा. परिवार का आरोप है कि पैसों के अवैध लेन-देन के चलते भी विवाद चल रहा था.

मामले में सबसे बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में बाधा डाल रही थीं और क्या इस काम में उनकी कोई मदद कर रहा था. पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही वो लगातार विभिन्न टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रही हैं, जिसमें उन्होंने ट्विशा के कथित इलाज और उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसे पीड़ित पक्ष ने जांच भटकाने की कोशिश बताया है.

घटना वाले दिन ट्विशा के पति समर्थ उन्हें रात 10 बजकर 20 मिनट पर एम्स (AIIMS) भोपाल लेकर पहुंचे थे, जहां एम्स के डॉक्टरों 13 मई को रात 12 बजकर 5 मिनट पर उन्हें मृत घोषित (ब्रॉट डेड) कर पुलिस को सूचित किया कि उसे मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था और पीएमएलसी (प्राइवेट मेलिंग ट्रायल) दर्ज की गई थी. इसके बाद भोपाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में पूरे दो दिन की देरी की और 15 मई को मामला दर्ज किया. सीबीआई अब इस पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल संदिग्धों की भूमिका की बारीकी से जांच करेगी.
वहीं, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा मौत मामले से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि वे एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करेंगे. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम पीड़ित और आरोपी दोनों के परिवार वालों से ये अपील करना चाहेंगे कि वह सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय, जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं, ताकि चल रही जांच निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया पर कोई बुरा असर न पड़े.

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