Tuesday, September 15, 2026
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NATIONAL : जंतर मंतर से संसद मार्चः छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द करने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट, पुलिस ज्यादती पर भी दिया बड़ा आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करेगा। अदालत बोल चुकी है कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए ऐसे नाबालिगों को भी रिहा किया जाए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने के पक्ष में है, लेकिन गंभीर अपराध में शामिल आरोपियों को राहत नहीं मिलेगी। परीक्षा पेपर लीक और अन्य कथित अनियमितताओं के खिलाफ पिछले महीने देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण संकेत दिए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह ऐसे छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, जिन्होंने पहले कोई गंभीर अपराध नहीं किया है। हालांकि, उन लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा, जिनका पहले से गंभीर आपराधिक इतिहास है और जो छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होकर हिंसा में लिप्त हुए। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह हजारों छात्रों के जीवन और उनके भविष्य से जुड़ा मामला है। CJI ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने के संवैधानिक अधिकार को भी ध्यान में रखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित किया जाएगा।

WORLD : पहले चिनफिंग से बात, फिर पीएम मोदी से मुलाकात; पुतिन की किन-किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। यूक्रेन के साथ पिछले साढ़े चार वर्षों से लगातार युद्ध कर रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर शांति का पाठ पढ़ाने की कोशिश की है।

किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में सोमवार को पुतिन के साथ हुई मुलाकात में पीएम मोदी ने कहा कि अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की तरफ बढ़ना ही होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसी तरह से सितंबर, 2022 में एससीओ शिखर सम्मेलन (समरकंद) के दौरान पुतिन से कहा था, ‘यह युद्ध का काल नहीं है।’ वैश्विक नेताओं ने इसे काफी साहसिक बयान माना था। लेकिन चार वर्ष बाद भी रूस और यूक्रेन में युद्ध जारी है और दोनों देश एक दूसरे के नागरिक ठिकानों पर भी हमला कर रहे हैं।

रूस व यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने को कोई गंभीर कोशिश भी नहीं हो रही है। ऐसे में पीएम मोदी की तरफ से मानवता की भलाई के लिए दिया गया बयान काफी मत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमने यूक्रेन के मुद्दे पर लगातार चर्चा की है। पिछली मुलाकात में आपने मुझे इस मामले के सभी पहलुओं से विस्तार से अवगत कराया था। जैसा कि आप जानते हैं, भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा।’

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘युद्ध में बीता हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम मानवता को नई उम्मीद और उत्साह से भर देता है। हमें अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना चाहिए। यह मानवता की भलाई के लिए जरूरी है। सभी मुद्दों का शीघ्र शांतिपूर्ण समाधान ही मानवता की पुकार है और यही भारत का संदेश है। गांधी की भूमि और बुद्ध की भूमि का एक ही संदेश है, शांति का मार्ग।’

एक कार से नोमाड स्पोर्ट्स आयोजन स्थल पहुंचे
वैसे पीएम मोदी और पुतिन के बीच जब भी मुलाकात होती है तो दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत रिश्तों की गर्मजोशी दिख ही जाती है। पिछले वर्ष चीन के शहर तियानजिन में एससीओ सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन एक ही कार में 40-45 मिनटों तक बातचीत करते रहे थे।

इसके बाद दिसंबर, 2025 में जब पुतिन नई दिल्ली आए थे तो मोदी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया था और अपनी गाड़ी में एक साथ अपने आवास तक आए थे। सोमवार को बिश्केक में भी द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों नेता एक ही कार से नोमाड खेल आयोजन समारोह में साथ-साथ पहुंचे।

सामरिक साझेदारी पर हुई बात
प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में इंटरनेट मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ व्यापक चर्चा हुई। भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी के पूरे दायरे पर बात हुई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखकर खुशी हुई है।

ऊर्जा, नवाचार, अंतरिक्ष, उर्वरक और लोगों के बीच संपर्क भारत-रूस मैत्री के प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत-रूस के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंधों की प्रशंसा की। उन्होंने रूस के विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या पर भी प्रसन्नता जताई।

पुतिन की चिनफिंग से वीजा मुक्त यात्रा पर बात
पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से भी मुलाकात की। प्रेट्र के अनुसार, उन्होंने दोनों देशों के बीच वीजा मुक्त यात्रा की व्यवस्था पर चर्चा की। साथ ही आपसी चिंता के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।

NATIONAL : भारत की आर्थिक शक्ति का प्रदर्शन: 7.8% की जीडीपी वृद्धि को पीएम मोदी ने बताया असाधारण उपलब्धि, जानिए क्या बोले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 फीसदी सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि को असाधारण उपलब्धि बताया। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की सामूहिक शक्ति ने यह वृद्धि सुनिश्चित की। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने 7.8 फीसदी की इस वृद्धि को एक असाधारण उपलब्धि बताया है। यह आंकड़ा देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि यह वृद्धि देश के लोगों की सामूहिक शक्ति का परिणाम है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में झटके और आपूर्ति शृंखला की समस्याओं के बावजूद भारत ने यह वृद्धि हासिल की। उन्होंने कहा कि निराशावादी विफल हुए और भारत एक बार फिर फला-फूला। यह वृद्धि दर कई विकसित देशों से बेहतर है।

यह वृद्धि दर असाधारण क्यों है?
यह उच्च वृद्धि ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं। तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति शृंखला में बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है। यह देश की आंतरिक मजबूती और सरकार की नीतियों का परिणाम है। यह आंकड़ा भारत के आर्थिक लचीलेपन को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री के ट्वीट का क्या संदेश है?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस वृद्धि को देश के लोगों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बताया है। उनका संदेश है कि विपरीत परिस्थितियों में भी भारत ने अपनी आर्थिक गति बनाए रखी है। उन्होंने निराशावादियों को जवाब देते हुए देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत दिया। यह ट्वीट देश की आर्थिक प्रगति पर गहरा विश्वास व्यक्त करता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी देश की जीडीपी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है। निर्मला सीतारमण ने इस मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का श्रेय एनडीए सरकार के सुधारों को दिया। उन्होंने अर्थव्यवस्था के चुस्त प्रबंधन को भी इसका एक प्रमुख कारण बताया। वित्त मंत्री के अनुसार, इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। यह वृद्धि दर मौजूदा आर्थिक नीतियों की सफलता को दर्शाती है। सरकार के नीतिगत निर्णय और उनका प्रभावी क्रियान्वयन आर्थिक प्रगति में सहायक सिद्ध हुए हैं। यह आंकड़ा देश की आर्थिक मजबूती का संकेत देता है।

BUSINESS : पीएम मोदी ने विदेश की धरती से विरोधियों पर कसा तंज, GDP Growth Rate के आंकड़े जारी होते ही बोले- निराशावादी लोगों की हार हुई

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पीएम मोदी ने विदेश की धरती से विरोधियों पर कसा तंज, GDP Growth Rate के आंकड़े जारी होते ही बोले- निराशावादी लोगों की हार हुई
PM Modi React On India GDP Growth Rate: ईरान युद्ध और ट्रंप की टैरिफ समेत तमाम वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने कमाल करके दिखाया है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8% दर्ज रहा। वहीं नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10.3% रही। शानदार जीडीपी ग्रोथ रेट पर पीएम नरेंद्र मोदी ने विदेश की धरती (किर्गिस्तान) से विरोधियों पर कसा तंज कसा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) का दुनिया में डंका बजा है। एक बार फिर निराशावादी लोगों की हार हुई है।

बता दें कि मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम (MoSPI) ने जीडीपी पर 31 अगस्त को आंकड़े जारी किए। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान युद्ध और ट्रंप की टैरिफ भी भारत की विकास की रफ्तार को नहीं रोक सके।पहली तिमाही में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8% रहा। खास बात ये है कि ये आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (7%) के अनुमानों से काफी बेहतर है। बैंकिंग/फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और अन्य बिजनेस सर्विसेज सेक्टर में 10% से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर GDP ग्रोथ पर नहीं पड़ा।

वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच भारत की शानदार जीडीपी पर पीएम मोदी ने प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- FY 2026-27 के Q1 में भारत की 7.8% की शानदार GDP ग्रोथ एक बहुत बड़ी कामयाबी है। हमारे लोगों की मिलकर की गई ताकत ने पक्का किया कि दुनिया भर में अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के बावजूद भारत ने ऐसी ग्रोथ की। बुरे सपने देखने वालों का अंत हो गया और भारत फिर से खिल उठा!

पीएम मोदी ने एक तरह से जीडीपी में शानदार ग्रोथ के बहाने विपक्ष को खासकर कांग्रेस पर तंज कसा है। बीते महीनों कांग्रेस की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब पीएम मोदी ने अपने अंदाज में उन्हें जवाब दिया है। पीएम ने लिखा, ‘निराशावादी लोग गलत साबित हुए और भारत ने एक बार फिर कामयाबी की नई ऊंचाई छुई!’

बता दें कि मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम (MoSPI) की रिपोर्ट के मुताबिक India GDP Growth Data पर नजर डालें, तो इकोनॉमी में 7.8% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के मुताबिक, FY2026-27 की पहली तिमाही में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है। जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नॉमिनल जीडीपी में 10.3% का इजाफा हुआ है। खास बात ये है कि India GDP Growth का ये आंकड़ा ऐसे चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में आया है, जबकि सप्लाई चेन से लेकर तेल-गैस संकट चरम पर रहा। मतलब साफ है टैरिफ का खौफ हो या, अन्य भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हों या वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता, हर माहौल में देश की जीडीपी की रफ्तार तेज रही। रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद बाजार में ग्राहकों की मांग कम नहीं हुई है। ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। पहली तिमाही में रियल जीवीए ग्रोथ 8.2% रही, जो पिछले साल 7.1% थी। वहीं, नॉमिनल जीवीए ग्रोथ 11.5% दर्ज की गई है। नॉमिनल जीडीपी भी 8.1% से बढ़कर 10.3% हो गई है।

BUSINESS : RBI के अनुमान से तेज दौड़ी भारतीय इकोनॉमी

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नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026 । भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7% के अनुमान से काफी अधिक है। इससे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव से बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत की इकोनॉमी RBI के अनुमान से ज्यादा मजबूत रही।

GDP इस साल की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% रही। RBI का अनुमान 7% था। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 6.9% की दर से बढ़ी थी।

बैंकिंग/फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और अन्य बिजनेस सर्विसेज सेक्टर में 10% से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर GDP ग्रोथ पर नहीं पड़ा।

सोमवार को यह आंकड़े केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग ने जारी किए।

आर्थिक वृद्धि को मजबूत घरेलू खपत, सरकारी पूंजीगत खर्च और निवेश के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की बेहतर गतिविधियों से समर्थन मिला। अप्रैल-जून तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग समेत कई प्रमुख क्षेत्रों ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि, पिछली तिमाही की संशोधित 8.6% GDP ग्रोथ के मुकाबले मौजूदा आंकड़ा थोड़ा कम है। इसके बावजूद RBI के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन ने वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक वृद्धि को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञ अब पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी पर विचार कर रहे हैं।

सिर्फ 2 करोड़ में बनी ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका

NATIONAL : ‘BJP को लगता है कि वह RSS से बड़ी है, उसे मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए’, CJP नेता अभिजीत दिपके ने दी सलाह

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सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगता है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी बड़ी हो गई है। हालांकि उसे संघ प्रमुख मोहन भागवत की बातों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह बात आरएसएस प्रमुख के न्यूयॉर्क में दिए गए उस बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही।

छत्रपति संभाजीनगर: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने रविवार को बीजेपी से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बात सुनने को कहा। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाया कि उसे लगता है कि वह संगठन से भी बड़ी हो गई है। दिपके का यह बयान तब आया जब न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए, उसे हिंदू नहीं माना जा सकता। दिपके ने विरोध कर रहे ‘जेन Z’ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कथित तौर पर दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल करने की भी आलोचना की।

अभिजीत दिपके ने कहा कि मैं शुरू से ही यह कह रहा हूं कि बीजेपी को मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए। 12 साल तक सत्ता में रहने और कई एजेंसियों के अपने नियंत्रण में होने के बाद बीजेपी को लग रहा है कि वह आरएसएस से भी बड़ी हो गई है। उन्होंने कहा कि भागवत पहले भी कह चुके हैं कि प्रदर्शन कर रहे जेन-जी युवाओं को देश विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए।

दिपके ने कहा कि लेकिन प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने एक नया शब्द ‘दिमागी नक्सल’ इस्तेमाल किया। इससे साफ पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोहन भागवत की बात नहीं सुन रहे। उन्होंने कहा कि जहां आरएसएस प्रमुख समाज में सभी को साथ लेकर चलने और बच्चों का अपमान नहीं करने की बात करते हैं, वहीं प्रधानमंत्री ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि यह अच्छा नहीं लगता।

दिपके ने कहा कि उन्हें कम से कम अपने मार्गदर्शक मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए। बीजेपी सत्ता में आरएसएस की वजह से है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक यूट्यूब चैनल को दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि उनका आकलन है कि सीजेपी के नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। वांगचुक की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनसे पूछा गया था कि क्या सौरव (दास) और आशुतोष (रांका) की कोई महत्वाकांक्षा है। वांगचुक ने कहा था कि हम प्रतिभाशाली और अच्छे नेता हैं तथा अब तक भ्रष्ट नहीं हुए हैं। हमने आंदोलन ईमानदारी से चलाया। दिपके ने कहा कि उन्होंने हमारे बारे में अच्छी बातें कही हैं। दरअसल वांगचुक ने साक्षात्कार में कहा था कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं है।

न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि अलग-अलग धर्म अलग-अलग रास्तों पर चल सकते हैं, लेकिन इंसानियत और सच्चाई एक ही है। RSS प्रमुख ने कहा कि हम ऐसे समाज से आते हैं जो मानता है कि इंसानियत एक है। अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही जगह ले जाते हैं। और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। इंसानों के बीच कोई अंतर नहीं है।

भागवत ने एकता बनाए रखते हुए विविधता की रक्षा करने की जरूरत पर भी जोर दिया। भागवत ने कहा कि मैं कोई धर्म-विशेषज्ञ या आप जैसा धार्मिक अधिकारी नहीं हूं, लेकिन मैं ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो पारंपरिक रूप से कहता है कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सच्चाई एक है, और इंसानियत उसी सच्चाई का नतीजा है। इसलिए इंसानियत एक है। उन्होंने कहा कि वह सच एक ही है, लेकिन बताने वाले के हिसाब से उसे कई तरह से बताया जाता है। क्योंकि इंसान के तौर पर, हम उस सॉफ़्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बना है।

BUSINESS : 20 Petrol पर 31 अगस्त को आएगा बड़ा फैसला? इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल की मात्रा बताने, वाहन-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस बनाने और पुराने वाहनों के लिए ट्रांजिशन प्लान की मांग की गई है।

नई दिल्ली: पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को अहम सुनवाई होने वाली है। याचिका में केंद्र और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल में मिले इथेनॉल की सटीक मात्रा की जानकारी अनिवार्य और एक समान तरीके से दी जाए। सुप्रीम कोर्ट की 31 अगस्त की कॉज लिस्ट के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ करेगी।

क्या है याचिका में मांग?
नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि पेट्रोल पंप के हर डिस्पेंसिंग नोजल पर साफ और आसानी से दिखाई देने वाला लेबल लगाया जाए। इसमें यह बताया जाए कि बेचे जा रहे पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ग्राहकों को दिए जाने वाले हर फ्यूल बिल पर भी इथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाए, ताकि उपभोक्ता को पेट्रोल खरीदते समय इसकी पूरी जानकारी मिल सके।

कौन सा इथेनॉल ब्लेंड सही?
याचिका में केंद्र से एक आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से सर्च की जा सकने वाली व्हीकल-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है। इसमें वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध हो कि कौन सी गाड़ी किस इथेनॉल ब्लेंड के लिए उपयुक्त है। इससे वाहन मालिकों को यह समझने में मदद मिल सकेगी कि उनकी गाड़ी E20 या दूसरे इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ कितनी अनुकूल है।

याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई है।
इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

यह समिति देश में मौजूद अलग-अलग वाहनों पर E20 पेट्रोल की वास्तविक स्थिति और उसके असर की जांच कर सार्वजनिक रिपोर्ट दे।
रिपोर्ट में ईंधन की माइलेज, इंजन की उम्र, मेंटेनेंस खर्च, वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस पर पड़ने वाले प्रभाव की भी जानकारी देने की मांग की गई है।
पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
याचिका में इथेनॉल ब्लेंडिंग के पर्यावरणीय प्रभाव की भी समीक्षा की मांग की गई है। इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, इथेनॉल उत्पादन में पानी की खपत और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई है।

इसके अलावा, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के ईंधन उत्पादन की ओर जाने से पशु चारे की उपलब्धता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी अध्ययन करने की मांग की गई है।

डॉक्यूमेंट सार्वजनिक करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि E20 ईंधन के अनिवार्य रोल-आउट का समर्थन करने वाली सभी नीतिगत फाइलों, तकनीकी अध्ययनों, सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक परामर्श के रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाए।

पुराने वाहनों के लिए भी ट्रांजिशन प्लान की मांग
याचिका में पुराने और E20 के साथ अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी ट्रांजिशन फ्रेमवर्क बनाने की मांग की गई है।

इसमें जहां तकनीकी, आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से संभव हो, वहां कम इथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता पर भी विचार करने की बात कही गई है। इसके लिए विशेषज्ञों की रिपोर्ट और सार्वजनिक परामर्श के आधार पर फैसला लेने की मांग की गई है।

WORLD : भागवत का कनाडा दौरा: ‘जरूरतमंदों की मदद भारत की परंपरा’; संघ प्रमुख महाशक्ति और विश्वगुरु अवधारणा पर भी बोले?

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अमेरिका के बाद कनाडा दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और संघ की कार्यप्रणाली को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा- भारत ने कभी किसी जरूरतमंद की मदद से इनकार नहीं किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। अमेरिका यात्रा के बाद कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया। भागवत ने कहा कि जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

बकौल मोहन भागवत, भारतीय परंपरा सिखाती है कि जीव-जगत और निर्जीव वस्तुओं को भी अपना माना जाए। भारत में विविधता को एकता के लिए चुनौती नहीं माना जाता, बल्कि विविधता को ही एकता का स्वरूप समझा जाता है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान रखने वाले लोग पूरी धरती को एक परिवार मानते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर, आकार और रंग-रूप में अंतर होने के बावजूद मूल रूप से सभी मनुष्य एक हैं। इसलिए दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है।

तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य की तरफ संकेत करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। उन्होंने भारत के प्राचीन यात्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मैक्सिको से साइबेरिया तक गए। उन्होंने हिमालय को पैदल पार किया और छोटी नावों से दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंचे, लेकिन किसी देश को जीतने के लिए नहीं गए। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यतागत मूल्यों को दुनिया तक पहुंचाया।

भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये सभी मानव जीवन की विविधताएं हैं और हिंदू सभी का सम्मान एवं स्वीकार करते हैं।उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी लोगों पर अत्याचार हुआ तो भारत ने उन्हें शरण दी। उनके मुताबिक, भारत में बाहर से आए अनेक लोग आज भी अपनी परंपराओं और विशिष्टताओं के साथ रहते हैं। ऐसे कई लोग भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिम, ईसाई और यहूदी समुदाय भी मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों के लोग भी यहां शरण लेते रहे हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन कनाडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) ने किया। कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों ने लोकगीत भी प्रस्तुत किए। यहां कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मंच पर मौजूद रहे। उन्होंने कनाडा और भारत के रिश्तों में नए उत्साह का स्वागत किया। केनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस साल के अंत में कनाडा की दूसरी यात्रा दोनों देशों के संबंधों में आई नई गति को दर्शाएगी। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।

भारतवंशियों ने क्या संदेश दिए?
मोहन भागवत की कनाडा यात्रा को लेकर रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स में पूर्व अधिकारी रहे कार्तिक त्रिवेदी ने कहा, उन्होंने 15 वर्षों तक कनाडा की सेवा की और हमेशा अपनी हिंदू पहचान पर गर्व किया। उन्होंने भागवत को के वक्तव्य और सुनने के अवसर को महत्वपूर्ण मौका बताया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद भारतीय मूल के एक अन्य शख्स पथिक शुक्ला ने कहा कि दुनिया में जारी युद्धों के बीच भागवत की यात्रा सकारात्मक संदेश देती है। वहीं, हिंदू सभा मंदिर के पुजारी राजिंदर प्रसाद ने भागवत की अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा यात्रा को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के जरिए भारतीय मूल्यों और संस्कृति को दुनिया के सामने रखने तथा शांति और मानवता का संदेश देने का प्रयास हो रहा है।

WORLD : कनाडा में भागवत बोले- मदद करना भारत की परंपरा:विविधता ही हमारे देश की खूबसूरती, ‘ये मेरा, वह तुम्हारा’ की सोच से ऊपर उठना होगा

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RSS प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि मुश्किल वक्त में दूसरों की मदद करना भारत की पुरानी परंपरा रही है। दुनिया में कहीं भी संकट आया और भारत से मदद मांगी गई तो भारत ने कभी पीछे हटकर इनकार नहीं किया। कई बार भारत ने बिना मदद मांगे भी दूसरों की सहायता की है।

भागवत ने कहा- भारत में विविधता एकता के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी खूबसूरती है। देश में अलग-अलग जाति, पंथ, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन ये सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि ‘ये मेरा, वो तुम्हारा’ जैसी सोच से ऊपर उठने की जरूरत है। अलग-अलग रूप और पहचान के बावजूद सभी में एक ही दिव्यता है। इसलिए दूसरों को अलग या पराया मानने के बजाय सभी के साथ भाईचारे और सेवा की भावना रखनी चाहिए।भागवत बोले- भारत ने मुस्लिम-ईसाई सभी को स्वीकार किया

भागवत ने कहा कि हिंदू सभी का सम्मान और स्वीकार करते हैं। दुनिया में कहीं किसी पर अत्याचार हुआ और उसने शरण मांगी, तो उसे भारत में जगह मिली। भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, पारसी और दूसरे समुदाय रहते हैं। लोग सिर्फ शरण लेने ही नहीं, बल्कि ज्ञान हासिल करने के लिए भी भारत आए।

उन्होंने कहा कि इंसान को फूल की तरह होना चाहिए। कली फूल बने और अपनी खुशबू पूरे वातावरण में फैलाए। इसी तरह व्यक्ति को विकसित होकर मानवता के लिए समर्पित होना चाहिए। एक हिंदू की सोच यह होनी चाहिए कि मुझे भी आगे बढ़ना है, मुझे सफल होना है, क्योंकि मुझे सेवा करनी है।

भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें

विविधता एकता की अभिव्यक्ति है: भागवत ने कहा कि भारत में विविधता कभी एकता के लिए समस्या नहीं रही। भारतीय परंपरा सिर्फ ‘विविधता में एकता’ की बात नहीं करती, बल्कि विविधता को ही एकता का हिस्सा मानती है। इसे स्वीकार करना, सम्मान देना और सेलिब्रेट करना चाहिए।
अलग-अलग हैं, लेकिन सब एक हैं: उन्होंने कहा कि भारत में कई जातियां, पंथ और भाषाएं हैं। सब कुछ अलग-अलग है, लेकिन हम यह नहीं कहते कि सभी एक जैसे हैं, हम कहते हैं कि सब एक हैं। विविधता प्रकृति का स्वभाव है, जबकि एकता वास्तविकता है।
हर चीज में दिव्यता है: भागवत ने कहा कि ईश्वर ने जो कुछ बनाया है, वह अलग-अलग रूप, आकार और रंगों में उसकी सुंदरता और पवित्रता को दिखाता है। हर चीज दिव्य है, इसलिए हर चीज एक है।

‘मेरा-तुम्हारा’ की सोच संकीर्णता है: उन्होंने कहा कि अगर हम सोचते हैं कि ‘यह मेरा है और वह तुम्हारा है’ तो यह सही नहीं है। दुनिया की हर चीज को अपना मानना चाहिए, लेकिन मालिक के तौर पर नहीं, भाई के तौर पर। शरीर, रंग और रूप अलग होने के बावजूद हर व्यक्ति की गरिमा और महत्व बराबर है।
दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है: भागवत ने कहा कि जब हम सभी को एक मानते हैं तो दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य बन जाता है। यह सोच इंसान को ऐसी खुशी और संतुष्टि देती है, जो स्थायी होती है। उन्होंने कहा कि भारत को मिला यह ज्ञान दुनिया के साथ साझा करना भी हमारा कर्तव्य है।
कार्यक्रम में 8 प्रांतों से पहुंचे 2,500 से ज्यादा लोग

टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम का आयोजन कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) ने किया था। कार्यक्रम में पूर्व कनाडाई रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मौजूद थे। आयोजकों के मुताबिक, कनाडा के आठ प्रांतों से 2,500 से ज्यादा लोग पहुंचे।

मोहन भागवत 17 दिनों के तीन देशों के विदेश दौरे पर हैं और कनाडा उनके दौरे का दूसरा पड़ाव है। वह 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। अमेरिका में कार्यक्रमों के बाद अब वे कनाडा पहुंचे हैं। दौरे में अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन भी शामिल हैF

भागवत बोले- मुसलमानों को भारत से निकालना हिंदुत्व नहीं:धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक; सभी रास्ते ईश्वर तक जाते हैं

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा, ‘अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। हिंदू होने का मतलब यह मानना है कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा एक समान है।’ उन्होंने यह बात शनिवार को न्यूयॉर्क के ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में कही। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम से पहले तिरंगे का अपमान, रिजिजू बोले- RSS या भाजपा की आलोचना करने की आजादी लेकिन देश का अपमान महंगा पड़ेगा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम स्थल के बाहर भारतीय झंडे के अपमान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- हमने हमेशा कहा है कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह बहुत महंगा पड़ेगा।

WORLD : PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की होगी आज बैंठक, S-400 से एनर्जी तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

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नई दिल्ली: भारत और रूस के रिश्तों के लिहाज से सोमवार का दिन काफी अहम है. किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है. यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी. माना जा रहा है कि बातचीत में ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा, व्यापार और भुगतान व्यवस्था जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं.

ऊर्जा और उर्वरक की सप्लाई पर होगी चर्चा
भारत के लिए रूस से मिलने वाला कच्चा तेल और उर्वरक काफी महत्वपूर्ण है. पश्चिम एशिया में तनाव और दुनियाभर में सप्लाई को लेकर बनी संदेह के बीच भारत चाहता है कि रूस से इन जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे.

मोदी और पुतिन की बातचीत में लंबे समय के तेल और उर्वरक समझौतों पर चर्चा हो सकती है. इसके साथ ही भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने के उपायों पर भी विचार संभव है.

S-400 और रक्षा सहयोग भी एजेंडे में
रक्षा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों का एक मजबूत आधार रहा है. ऐसे में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े मुद्दे भी बैठक में उठ सकते हैं. इसकी शेष डिलीवरी, अतिरिक्त मिसाइलों की उपलब्धता और सिस्टम के रखरखाव को लेकर दोनों पक्ष बातचीत कर सकते हैं.

भारत में रक्षा उपकरणों की मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादन और सह-निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

UPI और सुरक्षित पेमेंट सिस्टम पर नजर
रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के लिए सुरक्षित भुगतान व्यवस्था काफी जरूरी हो गई है. दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और डिजिटल भुगतान के दूसरे विकल्पों को मजबूत करने पर जोर दे सकते हैं. इसी संदर्भ में UPI जैसे भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम की संभावनाएं भी चर्चा में आ सकती हैं.

2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. भारत चाहता है कि रूस अपने बाजार में भारतीय फार्मा, आईटी, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों के लिए ज्यादा अवसर खोले. इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, हाईटेक तकनीक और उर्वरक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है.

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