Saturday, April 25, 2026
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LIFESTYLE : क्या रात-दिन स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं आप? आंखों से लेकर इन अंगों को खुद ही कर रहे खराब

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मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से कमर दर्द, गर्दन और कंधों में तनाव, स्पॉन्डिलाइटिस और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ रही हैं. इसे टेक नेक या स्मार्टफोन सिंड्रोम भी कहते हैं.

मोबाइल हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गया है. रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद ज्यादातर लोग मोबाइल के साथ समय बिताते हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया ने हमें जोड़ने का काम तो किया है, लेकिन इसने एक बड़ा साइड इफेक्ट हमारी सेहत पर भी डाला है. लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से न केवल हमारी आंखें थकती हैं, बल्कि शरीर के कई हिस्सों में गंभीर समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.

विज्ञान के अनुसार, मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से कमर दर्द, गर्दन और कंधों में तनाव, स्पॉन्डिलाइटिस और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ रही हैं. इसे ‘टेक नेक’ या ‘स्मार्टफोन सिंड्रोम’ भी कहा जाता है. जब हम लंबे समय तक फोन को झुककर देखते हैं, तो हमारी रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द और हड्डियों की कमजोरी तक हो सकती है.

स्पॉन्डिलाइटिस एक ऐसी समस्या है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में सूजन आ जाती है. मोबाइल फोन का लगातार झुककर इस्तेमाल करने से यह खतरा बढ़ता है. खासकर युवा और किशोर वर्ग में यह समस्या तेजी से फैल रही है. लोग लंबे समय तक मोबाइल पर गेम खेलते हैं, वीडियो देखते हैं या सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं. इस दौरान वे अपनी पीठ और कमर को सही मुद्रा में नहीं रखते, जिससे मांसपेशियों और हड्डियों पर लगातार दबाव पड़ता है. धीरे-धीरे यह स्थिति कमर और गर्दन के गंभीर दर्द में बदल सकती है.

मोबाइल फोन के लगातार उपयोग से केवल कमर या गर्दन ही नहीं, बल्कि हमारी आंखें भी प्रभावित होती हैं. मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी आंखों की रेटिना और रोशनी पर असर डाल सकती है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

मोबाइल का अत्यधिक उपयोग केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही नहीं प्रभावित करता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया की तुलना और ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में भाग लेने की आदत तनाव, चिंता और नींद की कमी का कारण बन सकती है. नींद की कमी से शरीर की ऊर्जा और मांसपेशियों की रिकवरी प्रभावित होती है, जिससे मानसिक रूप से भी थकान महसूस होती है.

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोबाइल का उपयोग सीमित समय के लिए करें और स्क्रीन को आंखों की ऊंचाई पर रखें. लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लें और स्ट्रेचिंग करें. सही मुद्रा में बैठना बहुत जरूरी है, पीठ सीधी और कंधे आराम से रखने चाहिए. इसके अलावा ब्लू लाइट को कम करने वाले ऐप्स या स्क्रीन फिल्टर्स का इस्तेमाल करना आंखों को सुरक्षित रखने में मदद करता है.

BUSINESS : छोटे लोन पर खतरे की घंटी! RBI ने माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को किया सतर्क, देश में एटीएम की संख्या घटी

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्त संस्थानों से अपने ऋण बही खाते में दबाव बनने पर नजर रखने को कहा है. आइए जानते हैं, क्या कहती है आरबीआई की रिपोर्ट?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्त संस्थानों से अपने ऋण बही खाते में दबाव बनने पर नजर रखने को कहा है. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ‘बैंकिंग में रुझान और प्रगति’ रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में दक्षिणी राज्यों में ऋण वितरण कम रहा.

इसके मुताबिक प्रदर्शन में सुधार के लिए उद्योग ने कई कदम उठाए हैं. साथ ही अगर आगे चलकर इस सेक्टर में दबाव बढ़ता है, तो विनियमित संस्थाओं को इस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत होगी.पिछली कुछ तिमाहियों में ऋणदाताओं को सूक्ष्म वित्त खंड में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. जिसके कारण उधारकर्ताओं पर अत्यधिक कर्ज का बोझ रहा. इसके चलते उद्योग ने मिलकर कुछ सुरक्षा उपाय अपनाए, जिनमें एक ही उधारकर्ता को दिए जाने वाले ऋणों की संख्या सीमित करना भी शामिल है.

पैसे की निकासी के लिए इस्तेमाल होने वाली एटीएम की संख्या में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान हल्की गिरावट आई. जबकि बैंक शाखाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आरबीआई की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में मार्च, 2025 तक कुल 2,51,057 एटीएम सक्रिय थे. जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 2,53,417 था. निजी क्षेत्र के बैंकों के एटीएम नेटवर्क में तुलनात्मक रूप से अधिक गिरावट आई है.

निजी बैंकों के एटीएम साल भर पहले के 79,884 से घटकर 77,117 रह गए. वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एटीएम 1,34,694 से घटकर 1,33,544 रह गए. रिपोर्ट कहती है, एटीएम की संख्या घटने के पीछे डिजिटलीकरण के बढ़ते कदम और दोनों तरह के बैंकों द्वारा एटीएम की बंदी मुख्य कारण रहे.हालांकि इसी दौरान स्वतंत्र रूप से संचालित व्हाइट लेबल एटीएम की संख्या बढ़कर 36,216 हो गई. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एटीएम ग्रामीण, कस्बाई, शहरी एवं महानगरीय क्षेत्रों में समान रूप से वितरित हैं जबकि निजी एवं विदेशी बैंकों का ध्यान मुख्य रूप से शहरी एवं महानगरीय क्षेत्रों पर केंद्रित है.

UP : सौतेले पिता की हैवानियत, कांस्टेबल मां की 13 साल की मासूम बेटी से किया रेप

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संतकबीरनगर में पिता-बेटी के रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. यहां एक 13 साल की बच्ची को उसके सौतेले पिता ने हवस का शिकार बनाया. लड़की की मां एक पुलिस कॉन्सटेबल है जिसने कोतवाली में मामले को लेकर तहरीर दी है.

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में पिता-बेटी के रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है.एक सौतेले पिता की हैवानियत का कारनामा ऐसा कि किसी की भी रूह कांप जाए. आरोप है कि उसने 13 साल की मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया . बच्ची की मां कांस्टेबल है और उसी ने अपने पति के खिलाफ महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. क्षेत्र में ये मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.

पांचवीं छात्रा अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहती है. कांस्टेबल मां ने पहली शादी के टूटने के दस वर्ष पूर्व दूसरी शादी की थी. रेप की शिकार हुई बच्ची मां के पहले पति की थी. मां की शादी के बाद कांस्टेबल मां बेटी को लेकर उसे सौतेला पिता के साथ रहती थी. आरोप है कि उसने दो दिन पूर्व बेटी के साथ रेप किया. पुरी घटना के बारे में मां को बताया उसने शनिवार को कोतवाली में तहरीर दी. जिसके बाद पुलिस ने आरोपी पति पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

वहीं मामले पर क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला द्वारा मामले की सूचना दी गई जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया और और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.

NATIONAL : UPSC ने बना दी जोड़ी! तैयारी के दौरान मिले और अब हो रही शादी, जानिए खुशबू ओबेरॉय और राहुल सांगवान की कहानी

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दिल्ली की 2023 बैच की IRS अधिकारी खुशबू ओबेरॉय और हरियाणा के भिवानी से ताल्लुक रखने वाले IRS अधिकारी राहुल सांगवान अब शादी करने जा रहे हैं. दोनों की मुलाकात यूपीएससी की तैयारी के दौरान हुई थी और समय के साथ उनकी दोस्ती एक मजबूत रिश्ते में बदल गई.

परिवार की जानकारी के अनुसार, 10 जनवरी को दिल्ली के एक होटल में रिंग सेरेमनी होगी जिसमें लगभग 100 करीबी लोग शामिल होंगे. शादी समारोह सादगीपूर्ण तरीके से होगा लेकिन पारिवारिक रखा जाएगा, ताकि दोनों परिवार के सदस्य सहज महसूस करें.

खुशबू ओबेरॉय नई दिल्ली की रहने वाली हैं और एक बिजनेस परिवार से आती हैं. उनके पिता संजीव ओबेरॉय दिल्ली में होटल, बैंक्वेट हॉल और मैरिज गार्डन का व्यवसाय करते हैं. खुशबू ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज से होम साइंस में बीएससी की पढ़ाई की है. वर्तमान में वह आईआरएस (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) में प्रोबेशनर के रूप में सेवाएं दे रही हैं. चयन के समय उन्हें IPS का विकल्प भी मिला था, लेकिन उन्होंने IRS को चुना.

राहुल सांगवान का परिवार हरियाणा के भिवानी जिले के मिताथल गांव में रहता है, जबकि उनका मूल गांव चरखी दादरी जिले का चरखी गांव है. उनके पिता नीर सांगवान गांव में एक स्कूल का संचालन करते हैं और शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं, जबकि उनकी मां उर्मिला आंगनवाड़ी वर्कर हैं.

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई की और अपनी स्कूली शिक्षा भिवानी से पूरी की. उन्होंने यूपीएससी में 508वीं रैंक प्राप्त कर आईआरएस चुना और इससे पहले हरियाणा सिविल सर्विस परीक्षा में 27वीं रैंक हासिल की.

दोनों अधिकारी दिल्ली की एक ही बैच के हैं और फिलहाल अपनी सेवाएं दिल्ली में ही दे रहे हैं. यूपीएससी की तैयारी के दौरान मिलने वाले इस जोड़े की कहानी प्रेरणादायक है क्योंकि दोस्ती, मेहनत और समान पेशे ने उन्हें न केवल करीब लाया, बल्कि जीवनसाथी के रूप में भी जोड़ दिया. उनकी शादी का कार्यक्रम पारिवारिक माहौल में होगा और यह जोड़ी अब अपने करियर और निजी जीवन में नया अध्याय शुरू करने जा रही है.

PUNJAB : 7 रुपए खर्च कर 10000000 करोड़ रुपए जीत गया किसान, रातोंरात पलट गई किस्मत

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पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के किसान ने 7 रुपए के लॉटरी टिकट से 1 करोड़ रुपये का इनाम जीता है. व्यक्ति पिछले लगभग 10 सालों से इसी स्टॉल से लॉटरी टिकट खरीद रहे हैं

पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में किसान ने 7 रुपये की लॉटरी टिकट से 1 करोड़ रुपये का इनाम जीता है. किसान बलकार सिंह ने 24 दिसंबर को सरहिंद के बिट्टू लॉटरी स्टॉल से सिक्किम स्टेट लॉटरी का टिकट खरीदा था. लॉटरी का नतीजा उसी दिन घोषित हो गया था, लेकिन कई दिनों तक इस बड़े इनाम की जानकारी सामने नहीं आ सकी.

बलकार सिंह पिछले लगभग 10 सालों से इसी स्टॉल से लॉटरी टिकट खरीदते आ रहे हैं. उन्हें पहले भी छोटे-मोटे इनाम मिले हैं, जिसमें एक बार 90 हजार रुपये का इनाम भी शामिल है. माजरी सोधियां गांव के रहने वाले बलकार अपनी परिवार की खेती-बाड़ी से पालन करते हैं.

लॉटरी स्टॉल के मालिक मुकेश कुमार बिट्टू ने बताया कि वह 45 सालों से लॉटरी बिजनेस में हैं. उनके स्टॉल से पहले 10 लाख रुपये तक के इनाम निकले हैं, लेकिन 1 करोड़ रुपये का इनाम पहली बार लगा.

मालिक ने बताया कि 24 दिसंबर को लॉटरी पाई थी और नतीजा भी उसी दिन आ गया था. हालांकि, फतेहगढ़ साहिब की शहीदी सभा के दौरान वह लगातार तीन दिन लंगर सेवा में व्यस्त थे, जिस कारण उनका कारोबार बंद रहा और उन्हें जानकारी नहीं मिल सकी. मुकेश कुमार बिट्टू ने बताया कि जानकारी मिलने पर उन्होंने तुरंत बलकार सिंह को सूचित किया कि उनके टिकट पर 1 करोड़ रुपये का इनाम लगा है.

बलकार सिंह ने अपनी जीत को गुरु साहब की कृपा बताया. उन्होंने कहा कि वह इस पैसे का इस्तेमाल अपने खेती कार्य को आगे बढ़ाने के लिए करेंगे. इसके साथ ही, उन्होंने जरूरतमंदों की मदद के लिए इनाम की लगभग 10 प्रतिशत राशि खर्च करने की भी बात कही.

बताना जरूरी है कि सिक्किम स्टेट लॉटरी रोजाना निकलती है. लॉटरी कारोबारी मुकेश कुमार के मुताबिक, इस लॉटरी के तहत दिन में तीन बार ड्रा निकाला जाता है. पहला ड्रा दोपहर 1 बजे. दूसरा ड्रा शाम 6 बजे. तीसरा ड्रा रात 8 बजे निकलता है. इस लॉटरी की एक टिकट की कीमत 7 रुपये होती है. कई लोग पूरी लॉटरी बुक भी खरीदते हैं, जिसकी कीमत लगभग 140 रुपये होती है.

ENTERTAINMENT : ‘जो तकलीफ थी, डर था वो निकल चुका है’, गोविंदा ने कंफर्म किया कमैबक, बोले- हीरो नंबर वन आ रहा है

गोविंदा के सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान से कमबैक करने की खबरें चर्चा मेें बनी हैं. अब एक्टर ने अपने कमबैक को लेकर रिएक्ट किया है.एक्टर गोविंदा सालों से फिल्मों से दूर हैं. फैंस उन्हें स्क्रीन पर देखने के लिए बेसब्र हैं. अब गोविंदा के सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान में कैमियो रोल करने को लेकर खबरें चर्चा में हैं. गोविंदा ने हाल ही में एक इवेंट में इसे लेकर रिएक्ट किया. गोविंदा ने बताया कि वो जल्द ही कमबैक करने जा रहे हैं.

गोविंदा ने जय श्रीराम के नारे लगाए. फिर उन्होंने कमबैक को लेकर बात की. गोविंदा ने कहा, ‘आप लोगों के साथ मैं वो कहने जा रहा हूं जो इससे पहले कभी नहीं कहा. जो तकलीफ थी, जो भय था वो निकल चुका है. और अब आपका हीरो, हीरो से निकलकर जो हीरो नंबर वन हुआ है वो आ रहा है. आप लोगों का प्रेम हमेशा ऐसे ही साथ रखना.’

आगे गोविंदा ने कहा, ‘मैं आप लोगों की सेवा में हूं. मैं वो गोविंदा जो गरीबी के दौर से आया. जिसकी कभी किसी तरह की प्लानिंग नहीं हुई, सिर्फ ऊपरवाले ने और मेरे मां-बाप आशीर्वाद ने मुझे गोविंद से गोविंदा तैयार किया. आप लोगों के प्यार ने किया. वो गोविंदा अब फिर से आ रहा है. हनुमान दी कृपा करें.’

बता दें कि गोविंदा पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में हैं. गोविंदा के कुछ समय पहले पत्नी सुनत आहूजा संग अनबन की खबरें सामने आई थीं. हालांकि, सुनीता ने खुद इन खबरों को नकार दिया था. वहीं गोविंदा के एक एक्ट्रेस संग अफेयर की खबरें भी चर्चा में थीं. सुनीता आहूजा ने इन खबरों को भी नकारा था और कहा था कि एक्ट्रेस के साथ गोविंदा का अफेयर नहीं है. एक्ट्रेस ऐसे गंदे काम नहीं करती हैं.

RAJASTHAN : नए साल पर खाटू श्याम के VIP दर्शन संभव नहीं! 5 जनवरी तक प्रतिबंध, सभी के लिए होगी सामान्य कतार

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राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर में भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से 5 जनवरी तक वीआईपी दर्शन बंद कर दिए गए हैं. नववर्ष, एकादशी और पांच दिवसीय मेले के संयोग के चलते यहां एक हफ्ते में 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.

प्रशासन, पुलिस और श्याम मंदिर कमेटी ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि दर्शन सुचारू और सुरक्षित तरीके से कराए जा सकें. सभी श्रद्धालुओं को अब आम भक्तों की तरह ही निर्धारित कतारों में लगकर बाबा श्याम के दर्शन करने होंगे, जिससे समान व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखा जा सके.हारे के सहारे बाबा श्याम की नगरी खाटूधाम में पांच दिवसीय नववर्ष मेले का आगाज हो चुका है, जो 2 जनवरी तक चलेगा, जिस वजह से मंदिर में श्रद्धालुओं के भारी संख्या में आने की उम्मीद है. इसी को ध्यान में रखते हुए दर्शन व्यवस्था फाल्गुन मेले की तर्ज पर की गई है.

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की वीआईपी सुविधा लागू नहीं होगी. सभी भक्त एक ही प्रणाली के तहत दर्शन करेंगे. इससे न केवल भीड़ नियंत्रण आसान होगा, बल्कि किसी तरह के भेदभाव की स्थिति भी नहीं बनेगी. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं.रींगस से पैदल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विस्तृत और नियंत्रित मार्ग तय किए गए हैं. रींगस रोड, मेला डायवर्जन, पुराना बिजली ग्रिड, खटीकान मोहल्ला, होटल खाटूश्यामजी पैलेस, कैरपुरा तिराहा, चारण खेत, लखदातार मैदान और कुमावत कृषि फार्म से होते हुए श्रद्धालु मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचेंगे.

यहां 75 फीट चौड़े मुख्य मेला मैदान में बनाई गई 14 कतारों से गुजरने के बाद बाबा श्याम के दर्शन कराए जाएंगे. श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को देखते हुए खाटूश्यामजी क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है.पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं. 5 दिवसीय मेले के दौरान रींगस से आने वाले वाहनों को 52 बीघा सरकारी पार्किंग में खड़ा किया जाएगा, जिनका निकास मंढा मार्ग से होगा. पलसाना या जीणमाता से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन सांवलपुरा किसान गौशाला के पास रोके जाएंगे और वहां से पैदल प्रवेश कराया जाएगा.

दांता मार्ग से आने वालों के लिए श्याम पाठशाला के पास पार्किंग तय की गई है. श्याम मंदिर कमेटी के अनुसार 30 दिसंबर को एकादशी पर बाबा श्याम का दरबार सुगंधित फूलों और आर्टिफिशियल सामग्री से सजाया जाएगा.

UP : 5 साल कैद, भूख और जुल्म की कहानी… कंकाल जैसी बन गई जवान बेटी, रिटायर्ड सीनियर क्लर्क की मौत

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यूपी के महोबा में एक नौकर दंपति ने रेलवे से रिटायर्ड सीनियर क्लर्क ओमप्रकाश सिंह राठौर और उनकी मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटी को पांच साल तक कैद में रखा. भूख और प्रताड़ना से बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि बेटी कंकाल जैसी हालत में मिली. मामला सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुटी है और परिजन सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

यूपी के महोबा जिले में संपत्ति के लालच में एक नौकर दंपति ने रेलवे से रिटायर्ड बुजुर्ग और उनकी मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को करीब पांच साल तक कैद में रखकर ऐसा जुल्म ढाया, जिसकी कल्पना भर से रूह कांप जाए. इस खौफनाक वारदात में रेलवे में सीनियर क्लर्क के पद से रिटायर्ड 70 वर्षीय ओमप्रकाश सिंह की मौत हो गई और उनकी 26-27 साल की बेटी जिंदा कंकाल जैसी हो गई. बस किसी तरह उसकी सांसें चल रही थीं

ओमप्रकाश सिंह राठौर कभी सम्मानित जीवन जीते थे. सूट-टाई पहनकर दफ्तर जाने वाले ओमप्रकाश की जिंदगी का अंत इस तरह होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था. उनकी 27 वर्षीय बेटी रश्मि मानसिक रूप से विक्षिप्त थी और पिता ही उसके एकमात्र सहारे थे. लेकिन इसी बेबसी का फायदा उठाकर घर में काम करने वाले नौकर दंपति ने दोनों को धीरे-धीरे मौत के हवाले कर दिया. परिजनों के मुताबिक, वर्ष 2016 में ओमप्रकाश की पत्नी का निधन हो गया था. इसके बाद वह अपनी बेटी रश्मि के साथ अलग मकान में रहने लगे. बेटी की हालत को देखते हुए उन्होंने चरखारी निवासी रामप्रकाश कुशवाहा और उसकी पत्नी रामदेवी को देखभाल के लिए घर में रखा. शुरुआत में सब सामान्य लगा, लेकिन धीरे-धीरे नौकर दंपति की नीयत बदलने लगी. आरोप है कि कुछ ही समय बाद उन्होंने पूरे मकान पर कब्जा कर लिया और ओमप्रकाश व उनकी बेटी को घर के नीचे के कमरों में सीमित कर दिया.

बताया जा रहा है कि नौकर दंपति खुद ऊपर के कमरों में आराम से रहते थे, जबकि बुजुर्ग पिता और उसकी बेटी अंधेरे, गंदे और संकरे कमरों में बंद पड़े रहते थे. उन्हें न भरपेट भोजन दिया जाता था, न ही इलाज की कोई व्यवस्था की गई. कई बार तो दिन-दिन भर खाना तक नसीब नहीं होता था. भूख और कमजोरी से ओमप्रकाश धीरे-धीरे टूटते चले गए, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगने दी गई. परिजनों का आरोप है कि जब भी कोई मिलने आता, नौकर बहाना बना देता था कि ओमप्रकाश किसी से मिलना नहीं चाहते या तबीयत ठीक नहीं है. सामाजिक कटाव का यह जाल इतना मजबूत था कि किसी को अंदर की सच्चाई का अंदाजा नहीं हो सका. इसी दौरान नौकर दंपति ने कथित तौर पर मकान और बैंक बैलेंस पर भी नजरें गड़ा ली थीं. आरोप है कि संपत्ति हड़पने की नीयत से ही दोनों बाप-बेटी को सुनियोजित तरीके से कैद में रखा गया.

सोमवार को जब ओमप्रकाश की मौत की खबर परिजनों तक पहुंची, तो वे दौड़ते हुए घर पहुंचे. जैसे ही घर का दरवाजा खुला, अंदर का मंजर देखकर हर कोई सन्न रह गया. ओमप्रकाश का शव जमीन पर पड़ा था. शरीर इतना सूख चुका था कि मानो केवल चमड़ी और हड्डियों का ढांचा रह गया हो. भूख, बीमारी और जुल्म ने उनकी जान ले ली थी.

लेकिन इससे भी ज्यादा भयावह दृश्य पास के कमरे में था, जहां उनकी बेटी रश्मि मिली. 26-27 साल की युवती उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़ी दिख रही थी. वह नग्न अवस्था में अंधेरे कमरे में पड़ी थी. शरीर में मांस का नामोनिशान नहीं था. पसलियां बाहर निकली हुई थीं, आंखें गड्ढों में धंसी थीं. ऐसा लग रहा था जैसे जिंदा कंकाल हो, जिसमें बस किसी तरह सांसें चल रही हों. जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें भर आईं. परिजनों का कहना है कि रश्मि की हालत किसी 80 साल की बुजुर्ग महिला से भी बदतर थी. मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह खुद कुछ कहने या मदद मांगने की स्थिति में भी नहीं थी. यही उसकी सबसे बड़ी मजबूरी बन गई. पिता के मरने के बाद भी उसे भूखा और बेसहारा छोड़ दिया गया था.

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया. ओमप्रकाश को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर नवीन चौहान के अनुसार, बुजुर्ग को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके. इस पूरे मामले ने पड़ोसियों को भी झकझोर दिया है. लोगों का कहना है कि वे कभी-कभी घर में नौकर दंपति को आते-जाते देखते थे, लेकिन अंदर इतनी बड़ी क्रूरता चल रही है, इसका किसी को अंदाजा नहीं था. पड़ोसियों के मुताबिक, ओमप्रकाश कभी मिलनसार व्यक्ति हुआ करते थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से उन्हें किसी ने खुले में नहीं देखा.

फिलहाल, मृतक के परिजन रश्मि की देखभाल में जुट गए हैं. उसका इलाज कराया जा रहा है और उसे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटाने की कोशिश की जा रही है. परिजन दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि वर्षों तक चला अमानवीय अत्याचार है, जिसके लिए कड़ी सजा जरूरी है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नौकर दंपति से पूछताछ की जा रही है. प्रारंभिक जांच में संपत्ति विवाद और लालच की बात सामने आ रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जाएगी और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाई जाएगी.

NATIONAL : लखनऊ के लुलु मॉल पर बड़ा एक्शन, इनकम टैक्स विभाग ने सीज किया अकाउंट, जानें मामला

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लखनऊ के लुलु मॉल पर इनकम टैक्स विभाग ने कार्रवाई की है. आयकर विभाग ने 27 करोड़ की टैक्स चोरी मामले में कार्रवाई करते हुए मॉल के अकाउंट का सीज कर दिया है. इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

राजधानी लखनऊ के लुलु मॉल के खिलाफ इनकम टैक्स विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. सूत्रों के मुताबिक आईटी विभाग ने लुलु मॉल के अकाउंट को सीज कर दिया है. बताया जा रहा है कि 27 करोड़ की रकम पर टैक्स नहीं जमा करने की वजह से आयकर विभाग ने ये कार्रवाई की है.

लुलु बैंक का अकाउंट लखनऊ के बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं. मॉल पर करोड़ों के टैक्स की चोरी का आरोप है, 2025 के टैक्स का निरीक्षण करने के बाद आयकर विभाग ने ये कार्रवाई की है. इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया हैं. इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

जब से ये लुलु मॉल खुला है तभी से कई बार ये विवादों में भी रहा है. कभी मॉल में नमाज़ पढ़ने तो कभी हलाल की मीट और धर्मांतरण जैसी खबरों को लेकर भी लुलु मॉल सुर्खियों में रहा है. साल 2022 में मॉल में नमाज पढ़ने का मामला सामने आया था जिसके बाद हिन्दू संगठनों ने आपत्ति जताई और मॉल में विशेष धर्म के लोगों को नौकरी में वरीयता देने का आरोप लगाया.

इसी साल जुलाई में लुलु मॉल के कैश सुपरवाइजर को सहकर्मी के साथ रेप के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. आरोपी ने पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया और उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाया व जान से मारने की धमकी दी. इस घटना के बाद भी लोगों में खासी नाराजगी देखने को मिली थी.

बता दें कि लखनऊ का लुलु मॉल देश के सबसे बड़े मॉल में से एक है, इस मॉल का उद्घाटन सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था. ये मॉल करीब 22 लाख वर्ग फ़ीट में फैला हुआ हैं जिसे क़रीब दो हज़ार करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. इस मॉल के लगभग हर तरह का सामान मिलता हैं. जिनमें लोकल ब्रांड से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कई बड़े ब्रांड के शोरूम हैं. इस मॉल में 22 मीटर का कॉरिडोर भी है जो इसे बेहद खास बनाता है.

SPORTS : कप्तानी की चौखट पर ठहरा यशस्वी का सपना! राजस्थान रॉयल्स में जडेजा-पराग की जंग, युवा सितारा इंतजार में

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आईपीएल 2025 में जब संजू सैमसन टीम से बाहर रहे, तो रियान पराग के कंधों पर राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी की जिम्मेदारी आई. यह उसके लिए महज एक अस्थायी भूमिका नहीं थी, बल्कि मैनेजमेंट के भरोसे और उसके नेतृत्व कौशल की कड़ी परीक्षा थी. दूसरी ओर रवींद्र जडेजा का राजस्थान आना सिर्फ एक साधारण ट्रेड नहीं माना जा रहा…

राजस्थान रॉयल्स (RR) के खेमे में इस वक्त सवाल सिर्फ टीम कॉम्बिनेशन का नहीं है, बल्कि उस फैसले का है जो आने वाले वक्त में कई करियर की दिशा तय कर सकता है. टीम इंडिया के युवा सितारे यशस्वी जायसवाल, जिनके बल्ले से भविष्य की उम्मीदें जुड़ी हैं, फिलहाल राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी से एक कदम दूर खड़े दिखाई देते हैं.

पूर्व भारतीय बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा की राय इस कहानी को और गहराई देती है. उनका मानना है कि यशस्वी को अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि कप्तानी की दौड़ फिलहाल अनुभव और भरोसे के इर्द-गिर्द घूम रही है. संजू सैमसन के चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) चले जाने के बाद राजस्थान की पहचान, उसका नेतृत्व और उसका भविष्य- तीनों सवालों के घेरे में हैं.

आईपीएल 2025 में जब संजू सैमसन टीम से बाहर रहे, तो रियान पराग के कंधों पर राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी की जिम्मेदारी आई. यह उसके लिए महज़ एक अस्थायी भूमिका नहीं थी, बल्कि मैनेजमेंट के भरोसे और उसके नेतृत्व कौशल की कड़ी परीक्षा थी. दूसरी ओर रवींद्र जडेजा का राजस्थान आना सिर्फ एक साधारण ट्रेड नहीं माना जा रहा, क्योंकि वह अपने साथ अनुभव, दबाव झेलने की क्षमता और कप्तानी की एक पूरी विरासत लेकर आए हैं. चेन्नई में 18 करोड़ की फीस छोड़कर 14. करोड़ रु. में राजस्थान से जुड़ना भी कई सवाल खड़े करता है- क्या यह सिर्फ एक आर्थिक समझौता था, या फिर कप्तानी की ओर बढ़ाया गया सोचा-समझा कदम?

लेकिन जडेजा की कप्तानी की यादें भी टीम मैनेजमेंट को सोचने पर मजबूर करती हैं. 2022 में चेन्नई में अधूरी रह गई उनकी कप्तानी और एमएस धोनी की वापसी अब भी क्रिकेट प्रेमियों के जहन में ताजा है. यही वजह है कि राजस्थान के लिए यह फैसला आसान नहीं.इस बीच यशस्वी जायसवाल की कहानी चुपचाप आगे बढ़ती है. वह खिलाड़ी, जिसने अपने खेल से करोड़ों दिल जीते, अब शायद धैर्य की सबसे कठिन पारी खेलने को मजबूर है. टीम की जरूरतें, मैनेजमेंट की रणनीति और अनुभव की मांग- इन सबके बीच यशस्वी का नाम फिलहाल भविष्य की सूची में रखा गया है, वर्तमान की नहीं.

अनिल कुंबले की बात इस पूरे संदर्भ को एक भावुक मोड़ देती है. उनके मुताबिक कप्तानी ही वह धुरी है, जिस पर पूरी टीम का संतुलन टिका है. अगर संजू सैमसन जैसी शख्सियत की तलाश है, तो ध्रुव जुरेल उस खालीपन के सबसे करीब नजर आते हैं. यह बयान बताता है कि राजस्थान सिर्फ कप्तान नहीं, एक चेहरा ढूंढ रहा है.

राजस्थान रॉयल्स की टीम कागज पर मजबूत दिखती है- तेज गेंदबाजों की फौज, जडेजा-बिश्नोई जैसे स्पिनर, और गहराई से भरी बल्लेबाजी, लेकिन क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, भावनाओं और फैसलों का भी खेल है.

2008 की यादों से 2022 के अधूरे सपने तक, राजस्थान रॉयल्स एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी है, जहां एक सही फैसला इतिहास रच सकता है और एक गलत फैसला सालों तक चुभ सकता है. सवाल यही है—क्या यह इंतजार यशस्वी जायसवाल को और मज़बूत बनाएगा, या यह मौका किसी और की किस्मत लिख देगा?

राजस्थान रॉयल्स (25 खिलाड़ी): यशस्वी जायसवाल, रियान पराग, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, शुभम दुबे, युद्धवीर सिंह, संदीप शर्मा, तुषार देशपांडे, शिमरॉन हेटमायर, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, जोफ्रा आर्चर, क्वेना मफाका, नांद्रे बर्गर, रवींद्र जडेजा (चेन्नई से ट्रेड), सैम करन (चेन्नई से ट्रेड), डोनोवन फरेरा (दिल्ली से ट्रेड), रवि बिश्नोई, सुशांत मिश्रा, यश राज पुंजा, विग्नेश पुथुर, रवि सिंह, अमन राव, ब्रिजेश शर्मा, एडम मिल्ने और कुलदीप सेन.

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