Saturday, April 25, 2026
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BIHAR : पीठ पर घायल बेटी को लादकर भटकता रहा पिता, मूकदर्शक बना सासाराम हॉस्पिटल का स्टाफ

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रोहतास जिले के सदर अस्पताल सासाराम में स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है. नोखा थाना क्षेत्र के एक पिता को घायल बेटी के इलाज के दौरान व्हीलचेयर तक नहीं मिली. मजबूरी में उसे घंटों बेटी को पीठ पर लादकर अस्पताल के विभागों में भटकना पड़ा. इस घटना ने बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

रोहतास जिले के सदर अस्पताल सासाराम से स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है. नोखा थाना क्षेत्र के तेनुआं गांव से बुधवार को एक पिता अपनी घायल जवान बेटी के इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचा था. बेटी का पैर फ्रैक्चर था और वह चलने में असमर्थ थी, लेकिन अस्पताल में उसे व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई गई.

पीड़ित पिता ने बताया कि उसने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों से कई बार व्हीलचेयर देने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी. मजबूरी में उसे अपनी बेटी को पीठ पर लादकर कभी डॉक्टर के पास तो कभी एक्सरे जांच के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाना पड़ा. घंटों तक यह सिलसिला चलता रहा और वह अस्पताल परिसर में अपनी बेटी को उठाए भटकता रहा.

यह पूरी स्थिति अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के सामने होती रही, लेकिन किसी ने आगे बढ़कर मदद करना जरूरी नहीं समझा. जिले के सबसे बड़े अस्पताल में इस तरह की लापरवाही ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर मरीजों को व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है.

इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि आम लोगों को सरकारी अस्पतालों में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. एक घायल बेटी को कंधे पर उठाकर इलाज के लिए भटकता पिता स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाता है. इस मामले के बाद अब सदर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं.

NATIONAL : करनाल में नीरज चोपड़ा का शाही रिसेप्शन, आशीर्वाद देने पहुंचे CM सैनी समेत कई दिग्गज

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करनाल में गुरुवार को ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा और उनकी पत्नी हिमानी का रिसेप्शन आयोजित हुआ. निजी पैलेस में हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली और विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण शामिल हुए. नीरज क्रीम शेरवानी और हिमानी ग्रीन लहंगे में नजर आईं.

हरियाणा के करनाल में गुरुवार को ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा और उनकी पत्नी हिमानी का भव्य रिसेप्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह रिसेप्शन करनाल के एक निजी पैलेस में हो रहा है, जहां देश-प्रदेश की कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने पहुंचीं. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली और विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए.

वहीं, रिसेप्शन के दौरान नीरज चोपड़ा क्रीम कलर की शेरवानी में नजर आए, जबकि उनकी पत्नी हिमानी ने ग्रीन कलर का लहंगा पहन रखा था. दोनों की जोड़ी बेहद खूबसूरत लग रही थी और मेहमानों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही. बता दें कि नीरज और हिमानी की शादी 16 जनवरी 2025 को हिमाचल प्रदेश में हुई थी.

जानकारी के मुताबिक, नीरज चोपड़ा आज दो रिसेप्शन पार्टी दे रहे हैं. एक दिन के समय और दूसरी रात के समय आयोजित की गई है. रात के रिसेप्शन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई नेता शामिल हुए हैं. यह रात का कार्यक्रम करनाल के अमानी फार्म में आयोजित किया जा रहा है.

रिसेप्शन को पूरी तरह निजी रखा गया है. मीडिया को फिलहाल कार्यक्रम स्थल से दूर रखा गया है और कवरेज की अनुमति नहीं दी गई है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके.

बताते चलें कि ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने अपनी पत्नी हिमानी मोर के साथ मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की थी. इस खास मुलाकात की कुछ तस्वीरें प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा भी कीं. पीएम ने अपने पोस्ट में बताया कि इस दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत भी हुई.

मुलाकात के समय नीरज चोपड़ा आइवरी रंग की शेरवानी में नजर आए थे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काली धारियों वाले सफारी सूट में दिखाई दिए थे. वहीं, हिमानी मोर ने हरे रंग की वेलवेट जैकेट पहनी हुई थी और वह पूरी तरह पारंपरिक अंदाज में नजर आईं.

KANPUR : ‘मैम… मैंने पेन नहीं चुराया…’ नींद में बड़बड़ाने लगा 8 साल का बच्चा, तब खुला राज, क्या है कानपुर में स्कूल के टॉर्चर की कहानी?

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कानपुर में एक स्कूल से जुड़ी यह कहानी हैरान कर देने वाली है. कक्षा दो में पढ़ने वाला आठ साल का बच्चा अचानक बदलने लगा- कॉपी और दीवारों पर ‘HELP’ लिखने लगा और रात में नींद में बड़बड़ाता रहा, ‘मैम… मैंने पेन नहीं चुराया.’ जब मां ने वजह जानने की कोशिश की, तो सामने आया कि स्कूल में पेन चोरी के आरोप में बच्चे को इस कदर डराया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया कि वह खौफ में आ गया.

कानपुर के रमईपुर इलाके की एक सोसायटी… यहां रहने वाला आठ साल का मासूम रोज हंसते-खेलते स्कूल जाता था, उसका व्यवहार अचानक बदलने लगा. न उसकी आंखों में पहले जैसी चमक रही, न चेहरे पर मासूम मुस्कान.

यह कहानी है एक आठ साल के बच्चे की की, जो कानपुर के प्राइवेट स्कूल में दूसरी क्लास में पढ़ता है. मामला तब सामने आया, जब मां ने बेटे की कॉपी में एक ही शब्द बार-बार लिखा देखा- HELP… HELP… पहले तो उन्होंने इसे बच्चों की नादानी समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह एक डर से भरे बच्चे की चुपचाप लगाई गई गुहार है.

बच्चा सिर्फ कॉपी तक ही नहीं रुका. उसने घर की दीवारों पर भी ‘HELP’ लिखना शुरू कर दिया. मां-बाप समझ ही नहीं पा रहे थे कि उनका बच्चा अचानक ऐसा क्यों कर रहा है. सवाल पूछने पर वह चुप हो जाता, सहम जाता, जैसे किसी ने उसे बोलने से मना किया हो.लेकिन असली झटका तब लगा, जब एक रात आकाश अपनी मां के साथ सोते हुए नींद में बड़बड़ाने लगा- ‘मैम… मैंने पेन नहीं चुराया… मैम… पेन मैंने नहीं लिया…’ यह सुनते ही बच्चे की मां की नींद उड़ गई. एक मां के लिए इससे डरावना और क्या हो सकता है कि उसका बच्चा नींद में भी डरा हुआ हो?

मां ने बेटे को सीने से लगाया, प्यार से सहलाया और पूछा कि बेटा, क्या हुआ है? तब जो कहानी सामने आई, उसने मां के पैरों तले जमीन खिसका दी. बच्चे ने बताया कि स्कूल में एक डिजिटल पेन गायब हुआ था. उसी चोरी का आरोप उस पर लगा दिया गया. क्लास टीचर, प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ ने उसे डराया-धमकाया.
मासूम को कहा गया कि उसने पेन चुराया है और अब उसे कबूल करना होगा. आरोप यहीं नहीं रुके. बच्चे के अनुसार, उसे इतना डराया गया कि उसका कबूलनामा का वीडियो भी बनवाया गया. धमकी दी गई कि अगर उसने घर में कुछ बताया तो छत से फेंक देंगे.

च्चे ने मां से कहा कि मैंने इसलिए कुछ नहीं बताया, क्योंकि मैम ने मना किया था… आठ साल का बच्चा, जो ठीक से अपने डर को शब्दों में भी नहीं ढाल सकता, उसके मन पर यह खौफ किस कदर बैठा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इसी डर की वजह से वह मदद मांग रहा था- कॉपी में, दीवारों पर, सपनों में.
अगले ही दिन बच्चे की मां बेटे को लेकर स्कूल पहुंचीं. उन्होंने क्लास टीचर, प्रिंसिपल, टीचर और डायरेक्टर से बात की. मां ने साफ कहा कि जिस दिन की आप बात कर रहे हैं, उस दिन मेरा बच्चा स्कूल आया ही नहीं था. फिर चोरी कैसे कर सकता है लेकिन आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने उनकी बात सुनने के बजाय बदतमीजी की. उल्टा यह कहा गया कि बच्चे ने खुद कबूल किया है और वीडियो भी है.

बेटे की हालत देख मां परेशान थीं. उन्होंने कानपुर के सेन पश्चिम पारा थाने में स्कूल के डायरेक्टर, प्रिंसिपल, क्लास टीचर और सहयोगी शिक्षक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. उनका कहना है कि मेरे बच्चे को इस कदर डराया गया कि वह मानसिक रूप से टूट गया. वह आज भी सहमा रहता है.

बच्चे का कहना है कि मुझ पर पेन चोरी का झूठा आरोप लगाया गया. मेरा वीडियो बनाया गया. मुझे धमकाया गया, इसलिए मैंने घर में कुछ नहीं बताया. मैंने कॉपी में ‘HELP’ लिखा. एक मासूम की ये बातें कई सवाल खड़े करती हैं. क्या स्कूल बच्चों को सिखाने की जगह उन्हें डराने लगे हैं? क्या अनुशासन के नाम पर मानसिक प्रताड़ना सही है?

वहीं स्कूल प्रशासन का पक्ष बिल्कुल अलग है. स्कूल का कहना है कि एक इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल पेन गायब हुआ था. बच्चों से पूछताछ की गई, जिसमें इस बच्चे ने कथित तौर पर पेन उठाने की बात स्वीकार की और बताया कि पेन घर में कहां रखा है. स्कूल का दावा है कि बच्चे के माता-पिता स्कूल आए और नाराज होकर धमकी देने लगे, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. बच्चे का कबूलनामा का वीडियो है, जिसे जांच में पुलिस को सौंपा जाएगा.

कानपुर के डीसीपी डीएन चौधरी ने कहा कि बच्चे की मां की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है. सभी पक्षों को सुना जाएगा और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी.

सवाल है कि क्या आठ साल के बच्चे से इस तरह का ‘कबूलनामा’ लेना सही है? क्या डर और धमकी से सच निकलता है या सिर्फ खौफ पैदा होता है? लोगों ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि अगर स्कूल ही डर की जगह बन जाए, तो मासूम बच्चे कहां जाएं? शिक्षा का मतलब केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित और संरक्षित वातावरण भी होना चाहिए.

ENTERTAINMENT : धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ के लिए इमोशनल देओल परिवार, स्पेशल स्क्रीनिंग रखेंगे सनी-बॉबी!

श्रीराम राघवन की आने वाली फिल्म इक्कीस बहुत खास होने वाली है. यह दिवंगत एक्टर धर्मेंद्र की बड़े पर्दे पर आखिरी फिल्म होगी. इसी को सेलिब्रेट करने के लिए सनी देओल और बॉबी देओल फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग होस्ट करेंगे.

धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ 1 जनवरी, 2026 को रिलीज होने वाली है. अगस्त्य नंदा और सिमर भाटिया स्टारर ये फिल्म एक वॉर बायोपिक है, जिसे श्रीराम राघवन ने डायरेक्ट किया. देओल परिवार के लिए ये फिल्म काफी खास है क्योंकि ये धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है. ऐसे में परिवार ने एक स्पेशल प्लान किया है.बता दें कि देओल परिवार फिल्म इक्कीस को सक्रिय रूप से सपोर्ट कर रहा है और फैंस से इसे सिनेमाघरों में देखने का आग्रह कर रहा है. ‘इक्कीस’ में धर्मेंद्र अगस्त्य के पिता का किरदार निभा रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल और बॉबी देओल अपने दिवंगत पिता की याद में ‘इक्कीस’ की एक खास स्क्रीनिंग की प्लानिंग कर रहे हैं. ये कार्यक्रम अगले हफ्ते मुंबई में होगा. यह सनी और बॉबी के लिए एक इमोशनल पल होने वाला है, क्योंकि वो अपने पिता को आखिरी बार बड़े पर्दे पर एक्टिंग करते हुए देखेंगे.

ANI से बातचीत में फिल्म के डायरेक्टर श्रीराम ने बताया कि धर्मेंद्र ने बीमार होने के दौरान इक्कीस का पहला हाफ देखा था. उन्होंने कहा, ‘मैं अक्टूबर में उनसे मिलने गया था. उस समय वह ठीक थे, लेकिन उनकी सेहत बहुत अच्छी नहीं थी. उन्होंने पहला हाफ देख लिया था और दूसरे हाफ का इंतजार कर रहे थे. मैं चाहता था कि वह पूरी फिल्म देखें. दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं हुआ. वह अब उस काम का आनंद लेने के लिए यहां नहीं हैं जिसमें उन्होंने योगदान दिया और लोग उस काम को महत्व देते हैं. यह एक पछतावा है जो हम महसूस करते हैं.’

वहीं ‘इक्कीस’ के प्रोड्यूसर दिनेश विजान ने बताया कि धर्मेंद्र के परिवार के किसी भी सदस्य ने अभी तक फिल्म नहीं देखी है. मुझे लगता है कि वे सिर्फ आंसू बहाएंगे. मैं बस उम्मीद करता हूं कि हमारे बच्चे हमसे उतना ही प्यार करें जितना वे उनसे करते थे. उन्हें देखना दिल तोड़ने वाला था. फिर भी, यह खूबसूरत भी था. क्योंकि इसी तरह किसी को अपने पिता को प्यार करना चाहिए.’

बता दें कि इक्कीस फिल्म अरुण खेत्रपाल की जिंदगी से प्रेरित है. जो भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र पाने वालों में से एक थे. वो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 21 साल की उम्र में शहीद हो गए थे. ये फिल्म नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली है.

NATIONAL : पत्नी का कहीं अफेयर है… शक में किया झगड़ा, फिर गला दबाकर मार डाला, घर के पीछे दफना दी लाश

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गोरखपुर के बेलघाट क्षेत्र में पति ने मोबाइल को लेकर हुए विवाद में पत्नी की हत्या कर शव को घर के पीछे दफना दिया. चार दिन तक आरोपी पुलिस और परिजनों को गुमराह करता रहा. पिता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया. उसकी निशानदेही पर शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है.

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के बेलघाट थाना क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां एक युवक ने पत्नी के मोबाइल फोन को लेकर हुए विवाद के बाद उसकी हत्या कर दी और शव को घर के पीछे खाली पड़ी जमीन में करीब छह फीट गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया. आरोपी चार दिनों तक पुलिस और परिजनों को गुमराह करता रहा, लेकिन आखिरकार सच सामने आ ही गया.

घटना बेलघाट थाना क्षेत्र के बेइलीकुंड गांव की है. गांव निवासी 26 साल के अर्जुन की शादी करीब दो साल पहले 26 साल की खुशबू से हुई थी. अर्जुन लुधियाना में मजदूरी करता था और कुछ दिन पहले ही घर लौटा था. पुलिस के मुताबिक 21 दिसंबर की रात अर्जुन और खुशबू घर में अकेले थे. इसी दौरान खुशबू के पास एक मोबाइल फोन होने और किसी अन्य युवक से बात करने को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया.

आरोप है कि झगड़े के दौरान अर्जुन ने खुशबू की गला दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद उसने घर के पीछे खाली जमीन में गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया. हत्या के बाद अर्जुन ने घरवालों और आसपास के लोगों को बताया कि खुशबू बिना बताए कहीं चली गई है. इसके बाद मायके और ससुराल पक्ष के लोग उसकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.

चार-पांच दिन तक बहू का पता न चलने पर अर्जुन के पिता श्याम नारायण को पत्नी के गायब हो जाने की अपने बेटे की कहानी पर शक हुआ. गुरुवार सुबह वह बेलघाट थाने पहुंचे और अपने ही बेटे के खिलाफ तहरीर देते हुए बहू की हत्या की आशंका जताई. शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और घर पहुंचकर जांच शुरू की. अर्जुन को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.

पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. उसने कभी पत्नी के आत्महत्या करने और शव को नदी में बहा देने की बात कही, तो कभी अलग-अलग स्थानों पर पुलिस को लेकर गया. करीब दो घंटे तक पुलिस को इधर-उधर घुमाने के बाद जब सख्ती से पूछताछ हुई तो वह टूट गया और हत्या की बात कबूल कर ली.

आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने घर के पीछे खुदाई कराई, जहां से खुशबू का शव बरामद हुआ. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस के अनुसार अवैध संबंधों के शक और मोबाइल को लेकर हुए विवाद में हत्या की गई. मृतका के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है. घटना की सूचना पर उसका भाई और मायके पक्ष के लोग थाने पहुंच गए हैं. पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

NATIONAL : क्लब में घुसकर महिला को मारी गोली…शादी का प्रपोजल रिजेक्ट करने पर बौखलाया था युवक

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गुरुग्राम में शादी से इनकार करने पर 25 वर्षीय महिला पर गोली चलाने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पीड़िता क्लब में काम करती है. आरोपी दोस्ती के बाद शादी का दबाव बना रहा था. इनकार पर जानलेवा हमला किया गया. पुलिस ने दोनों को उत्तर प्रदेश के बड़ौत से पकड़ा, मामले की जांच जारी है.

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में शादी से इनकार करने पर 25 वर्षीय महिला दोस्त पर गोली चलाकर जानलेवा हमला करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह वारदात थाना डीएलएफ सेक्टर-29 क्षेत्र की है, जहां पीड़िता को गंभीर हालत में मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को उत्तर प्रदेश के बड़ौत से दबोच लिया.

पुलिस के अनुसार, 20 दिसंबर 2025 को पुलिस चौकी एमजी रोड को सूचना मिली कि एक युवती गोली लगने से घायल अवस्था में मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम में भर्ती है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और पीड़िता की मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) प्राप्त की. डॉक्टरों ने पीड़िता को बयान देने के लिए अस्वस्थ बताया. इस दौरान अस्पताल में मौजूद पीड़िता के पति ने पुलिस को लिखित शिकायत दी.

शिकायत में बताया गया कि पीड़िता कल्पना (25) निवासी नजफगढ़, दिल्ली है और गुरुग्राम के एक क्लब में नौकरी करती है. 19 दिसंबर की रात वह क्लब में ड्यूटी पर गई थी. देर रात करीब एक बजे उसने फोन कर बताया कि तुषार नामक युवक ने उसे गोली मार दी है और उसे अस्पताल लाया जा रहा है. शिकायतकर्ता के अनुसार, तुषार पहले भी उनके घर आकर झगड़ा कर चुका था और उसी रंजिश के चलते उसने यह हमला किया.

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी तुषार उर्फ जोंटी और उसका साथी शुभम उर्फ जॉनी वारदात के बाद फरार हो गए थे. उप-निरीक्षक ललित कुमार (अपराध शाखा सेक्टर-40) और उप-निरीक्षक मंगल सिंह (पुलिस चौकी एमजी रोड) की संयुक्त टीम ने 25 दिसंबर 2025 को दोनों आरोपियों को बड़ौत, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया.

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि तुषार की पीड़िता से करीब छह महीने पहले दोस्ती हुई थी और वह उससे शादी करना चाहता था. पीड़िता के बार-बार मना करने पर आरोपी नाराज था. पुलिस के मुताबिक, 19-20 दिसंबर की रात तुषार अपने साथी शुभम के साथ क्लब पहुंचा और फिर से शादी का दबाव बनाया. इनकार पर आरोपी ने जान से मारने की नीयत से गोली चला दी और दोनों वहां से फरार हो गए. पुलिस ने आरोपियों को नियमानुसार गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मामले में गहन पूछताछ जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है.

BHAKTI : लोहड़ी से लेकर गुरु नानक जयंती तक….यहां जानें 2026 में सिख त्योहारों की सभी डेट

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सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्व अब नानकशाही कैलेंडर के अनुसार स्थिर तिथियों पर मनाए जाते हैं, जिससे समुदाय में एकरूपता और स्थिरता आई है. तो आइए जानते हैं कि साल 2026 में कब कब सिख के त्योहार मनाए जाएंगे.

Sikh Festivals 2026 Calender: सिख धर्म दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा धर्म है. इसकी नींव एकता, भाईचारे और एक ओंकार की मान्यता पर आधारित है, जिसका अर्थ है ईश्वर एक है. लंबे समय तक सिख धर्म के धार्मिक पर्व विक्रम संवत (विक्रमी कैलेंडर) के अनुसार मनाए गए. इस वजह से गुरुपर्व और अन्य त्योहारों की तारीखें हर साल बदल जाती थीं, जिससे लोगों में भ्रम बना रहता था. इस समस्या को दूर करने के लिए साल 2003 में नानकशाही कैलेंडर को औपचारिक रूप से अपनाया गया. नानकशाही कैलेंडर लागू होने के बाद गुरुपर्व जैसे प्रमुख धार्मिक पर्व तय तारीखों पर मनाए जाने लगे. इससे सिख समुदाय के पर्वों को स्थिरता और एकरूपता मिली.

नानकशाही कैलेंडर का महत्व

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के नाम पर रखे गए नानकशाही कैलेंडर ने सिख समुदाय को एक अलग पहचान दी. इस कैलेंडर के जरिए दुनिया भर में सिख पर्वों को एक ही तारीख पर मनाने में आसानी हुई और धार्मिक आयोजनों में एकरूपता बनी. हालांकि, कुछ सिख पर्व जैसे दिवाली और होला मोहल्ला आज भी विक्रमी कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं, क्योंकि इनका संबंध हिंदू परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है.

सिख धर्म का एक प्रमुख पर्व लोहड़ी साल के पहले महीने में आता है, जिसे आमतौर पर 13 या 14 जनवरी को मनाया जाता है. इसके बाद में होला मोहल्ला, बैसाखी और गुरु नानक जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं. गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है. आइए अब जानते हैं साल 2026 में सिख धर्म के प्रमुख त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के बारे में विस्तार से.

साल 2026 में आने वाले सिक्ख धर्म के त्योहार

जनवरी 2026 पर्व

13 जनवरी 2026 (मंगलवार): लोहड़ी
31 जनवरी 2026 (शनिवार): गुरु हर राय जयंती

मार्च 2026 पर्व

4 मार्च 2026 (बुधवार): होला मोहल्ला की शुरुआत
6 मार्च 2026 (शुक्रवार): होला मोहल्ला का समापन
17 मार्च 2026 (मंगलवार): गुरु हर राय गुरुगद्दी
19 मार्च 2026 (गुरुवार): गुरु अमर दास गुरुगद्दी
22 मार्च 2026 (रविवार): गुरु अंगद देव ज्योति जोत
23 मार्च 2026 (सोमवार): गुरु हरगोबिंद सिंह ज्योति जोत

अप्रैल 2026 पर्व

1 अप्रैल 2026 (बुधवार): गुरु हरकृष्ण सिंह ज्योति जोत
1 अप्रैल 2026 (बुधवार): गुरु तेग बहादुर गुरुगद्दी
7 अप्रैल 2026 (मंगलवार): गुरु तेग बहादुर जयंती
9 अप्रैल 2026 (गुरुवार): गुरु अर्जन देव जयंती
14 अप्रैल 2026 (मंगलवार): बैसाखी
18 अप्रैल 2026 (शनिवार): गुरु अंगद देव जयंती
30 अप्रैल 2026 (गुरुवार): गुरु अमर दास जयंती

मई 2026 पर्व

10 मई 2026 (रविवार): गुरु हरगोबिंद सिंह गुरुगद्दी

जून 2026 पर्व

18 जून 2026 (गुरुवार): गुरु अर्जन देव ज्योति जोत
30 जून 2026 (मंगलवार): गुरु हरगोबिंद सिंह जयंती

अगस्त 2026 पर्व

7 अगस्त 2026 (शुक्रवार): गुरु हरकृष्ण सिंह जयंती

सितंबर 2026 पर्व

12 सितंबर 2026 (शनिवार): गुरु ग्रंथ साहिब जयंती
13 सितंबर 2026 (रविवार): गुरु अर्जन देव गुरुगद्दी
14 सितंबर 2026 (सोमवार): गुरु राम दास ज्योति जोत
24 सितंबर 2026 (गुरुवार): गुरु राम दास गुरुगद्दी
26 सितंबर 2026 (शनिवार): गुरु अमर दास ज्योति जोत

अक्टूबर 2026 पर्व

1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार): गुरु अंगद देव गुरुगद्दी
5 अक्टूबर 2026 (सोमवार): गुरु नानक देव ज्योति जोत
27 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): गुरु राम दास जयंती

नवंबर 2026 पर्व

3 नवंबर 2026 (मंगलवार): गुरु हरकृष्ण सिंह गुरुगद्दी
3 नवंबर 2026 (मंगलवार): गुरु हर राय ज्योति जोत
11 नवंबर 2026 (बुधवार): गुरु ग्रंथ साहिब गुरुगद्दी
14 नवंबर 2026 (शनिवार): गुरु गोबिंद सिंह ज्योति जोत
24 नवंबर 2026 (मंगलवार): गुरु नानक देव जयंती

दिसंबर 2026 पर्व

12 दिसंबर 2026 (शनिवार): गुरु गोबिंद सिंह गुरुगद्दी
14 दिसंबर 2026 (सोमवार): गुरु तेग बहादुर ज्योति जोत

NATIONAL : थाना सिटी कोतवाली राजनंदगांव की सराहनीय पहल: गुम हुए 20 मोबाइल फोन बरामद कर धारकों को सौंपे।

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थाना सिटी कोतवाली पुलिस द्वारा गुम हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए निरंतर की जा रही प्रभावी एवं तकनीकी कार्यवाही के अंतर्गत गुम मोबाइलों की पताशाजी कर उन्हें बरामद किया गया और आज कोतवाली पुलिस द्वारा गुम हुए 20 नग मोबाइल फोन, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹3,75,000/- है, को बरामद कर संबंधित आवेदकों को विधिवत सुपुर्द किया गया।

ये सभी मोबाइल फोन CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल की सहायता से तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से जिले से, जिले के बाहर सहित अन्य राज्यों से रिकवर किए गए।

यह उपलब्धि आम नागरिकों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ पुलिस की तकनीकी दक्षता को भी दर्शाती है।

थाना सिटी कोतवाली द्वारा भविष्य में भी आमजन की सुविधा, सुरक्षा एवं विश्वास को ध्यान में रखते हुए इसी प्रकार आधुनिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर कार्यवाही निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

हेमंत वर्मा, संवाददाता राजनांदगांव

HEALTH : शराब पीने वालों के लिए बुरी खबर! एक पेग से भी हो सकता है मुंह का कैंसर, इस रिसर्च में सामने आया डराने वाला सच

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देश में पुरुषों में होने वाले कैंसर में मुंह का कैंसर एक है. आमतौर पर मुंह का कैंसर होने की वजह तंबाकू मानी जाती है, लेकिन मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर की नई स्टडी आपके होश उड़ा देगी. इस स्टडी में बताया गया है कि भारत में मुंह के कैंसर के 62 पर्सेंट मामलों की वजह शराब है. वहीं, शराब के साथ तंबाकू का सेवन करने वालों के लिए खतरा बढ़ जाता है.

कब हुई थी यह स्टडी?

दिसंबर 2025 में BMJ Global Health जर्नल में पब्लिश स्टडी 2010 से 2021 के दौरान 3706 पुरुषों पर की गई. इनमें मुंह के कैंसर के 1803 मरीज और 1903 हेल्दी लोगों को शामिल किया गया. ये लोग टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई और ACTREC (खारघर) से लिए गए थे.

क्या कहती है यह रिसर्च?

  • शराब पीने से खतरा बहुत बढ़ जाता है: चाहे ब्रांडेड बियर, व्हिस्की, वाइन हो या देसी शराब जैसे महुआ, टॉडी, ठर्रा पीते हैं तो मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
  • एक भी पेग काफी है: दिन में सिर्फ 9 ग्राम शराब (यानी एक स्टैंडर्ड ड्रिंक) पीने से खतरा 50 पर्सेंट तक बढ़ जाता है. 2 ग्राम से कम बियर भी खतरा बढ़ाती है.  
  • शराब भी खतरनाक: मुंह के कैंसर के 17 पर्सेंट मामले सिर्फ शराब से होते हैं.  
  • तंबाकू कितनी खतरनाक? गुटखा, खैनी जैसी तंबाकू से मुंह के कैंसर के 37 पर्सेंट मामले सामने आते हैं.
  • दोनों साथ में: शराब और तंबाकू का सेवन एक साथ करने से 4-5 गुना खतरा बढ़ जाता है और 62 पर्सेंट मामले इससे होते हैं.
  • शराब से क्या पड़ता है असर?: शराब से शरीर में एसिटाल्डिहाइड बनता है, जिससे डीएनए को नुकसान होता है. भारत में ज्यादातर लोगों के जीन ऐसे हैं, जो शराब को धीरे-धीरे तोड़ते हैं. इसके चलते यह जहरीला पदार्थ ज्यादा देर तक शरीर में रहता है और कैंसर का खतरा बढ़ाता है.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर में मुंह-गले के कैंसर डिपार्टमेंट के हेड डॉ. पंकज चतुर्वेदी के मुताबिक, शराब को ग्रुप-1 कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है. भारत में तंबाकू पर पॉलिसी है, लेकिन शराब पर नहीं. सेलिब्रिटी विज्ञापन और सरोगेट विज्ञापन बंद होने चाहिए. थोड़ा पीना ठीक है वाली बात गलत है. शराब की कोई सेफ लिमिट नहीं है.

कैसे होते हैं मुंह के कैंसर के लक्षण?

  • मुंह में घाव या छाला, जो 2 हफ्ते तक बरकरार रहे
  • होंठ या मुंह में सफेद या लाल पैच  
  • मुंह में गांठ या सूजन  
  • निगलने या बोलने में दिक्कत
  • गर्दन में गांठ
  • मुंह से बदबू या खून आना.  

कैसे करें बचाव?

  • शराब और तंबाकू पूरी तरह बंद करें  
  • गुटखा, खैनी, पान मसाला, सुपारी से दूर रहें
  • मुंह की सफाई रखें, नियमित ब्रश और चेकअप  
  • हेल्दी डाइट लें, जिसमें फल-सब्जियां ज्यादा हो

TECHNOLOGY : हर काम के लिए यूज करते हैं AI तो तुरंत बदल लें आदत, वरना दिमाग हो जाएगा कमजोर

आजकल के युवा AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) पर काफी ज्यादा निर्भर हो चुके हैं. कई लोग तो इसका प्रयोग अपने अकेलापन को दूर करने के लिए भी करते हैं. एग्जाम, छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज से लेकर ऑफिस में कोई वर्क, इन सभी में लोग AI इस्तेमाल करते हैं. कुछ कामों में तो यह काफी यूजफुल हो जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे जितना सुविधाजनक उतना ही खतरनाक बताया किया है. उन्होंने उसके पीछे कई कारण दिए है.  

दिमाग पर असर

वैज्ञानिकों ने कई शोध करके साबित किया है कि AI टूल्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मस्तिष्क की सोचने की शक्ति और काम करने की शक्ति पर ज्यादा असर पड़ता है. एक स्टडी में 54 वॉलंटीयर्स का ग्रुप जिन में ज्यादातर लोग 18 से 19 वर्ष की आयु के थे, उन्हें निबंध लिखने को दिया गया. इन 54 लोगों में तीन लोगों का ग्रुप बनाया गया. एक ग्रुप को Chatgpt का यूज करने को कहा गया और दूसरे ग्रुप को google ai तीसरे ग्रुप को निंबध खुद से लिखने को दिया. वैज्ञानिकों ने इस दौरान ईईजी हेटसेट का प्रयोग करके मस्तिष्क की गतिविधि को ट्रेक किया. उन्होंने इसका इस्तेमाल इसलिए किया ताकि लोगों के दिमाग की गतिविधि पर नजर रख सके. 

सामने आए चौंकाने वाले नतीजे 

जब इसका परिणाम मिला तो वह काफी ज्यादा आश्चर्यजनक था. शिक्षकों ने उनके निबंध को चेक करते समय उनकी लिखावट में गहराई और भावनात्मकता की कमी पाई. इसके अलावा मस्तिष्क की उत्तेजना भी चैटजीपीटी प्रयोग करने वालों में कम पाई गई थी. गूगल का प्रयोग करके लिखने वाले लोगों में चैटजीपीटी यूज करने वाले लोगों के दिमाग से ज्यादा सक्रियता देखी गई थी. इसके अलावा टीचर का कहना था कि इन लोगों के निंबध में थोड़ी गहराई थी. वहीं, जिन लोगों ने खुद के दिमाग से निबंध को लिखा था. उनके निबंध से टीचर ने ज्यादा जुड़ाव महसूस किया था. इसके अलावा मानसिक गतिविधि भी उन लोगों में सबसे अच्छी और उच्चतम पाई गई थी. 
 
AI टूल्स पर कम निर्भर रहने के परिणाम

शोध के अनुसार, जो लोग इन AI टूल्स पर ज्यादा निर्भर होते हैं, उन के दिमाग में सबसे कम गतिविधि थी. साथ ही साथ उनकी याद्दाश्त भी काफी कमजोर हो गई थी. वह लोग जो शुरुआती सालों में जब दिमाग को ग्रोथ होता रहता है, उस समय इन टूल्स का प्रयोग करते हैं. उनका दिमाग शुरूआत से ही काफी कमजोर होता है. इसलिए AI के टूल्स का प्रयोग लिमिट के साथ करना चाहिए वरना दिमाग अपनी क्षमता को पूरी तरीके से खो देगा.  

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