Sunday, September 27, 2026
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Bollywood : हाथों में मेंहदी, आंखों में प्यार, रश्मिका-विजय ने दिखाई मेंहदी रस्म की झलक, फैंस ने लुटाया प्यार

स्टार कपल रश्मिका मंदाना ने विजय देवरकोंडा से शादी के बाद अब हाल ही में मेहंदी की तस्वीरें शेयर की हैं, जो सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. फैंस कपल पर खूब प्यार लुटा रहे हैं. हाल ही में कपल विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने मेहंदी और प्रधानम सेरेमरी की झलकियां फैंस के साथ शेयर की हैं.

रश्मिका और विजय की मेहंदी की ये तस्वीरें जैसे ही सामने आईं, सोशल मीडिया पर छा गईं. फैंस दोंनो पर खूब प्यार लुटा रहे हैं. रश्मिका ने डिजाइनर करण तोरानी के लेबल तोरानी इंडिया की डिजाइन की साड़ी पहनी थी. इस खूबूसरत मल्टीकलर साड़ी के पल्लू पर देवी लक्ष्मी की फोटो अंकित की हुई थी. वहीं विजय देवरकोंडा भी काफी हैंडसम दिख रहे थे. उन्होंने कुर्ते और धोती के साथ एक चमकीली कढ़ाई वाली जैकेट पहनी थी.

कुछ तस्वीरें में कपल रोमांटिक होते हुए भी नजर आए. इस फोटो में दोनों एक साथ डांस करते हुए दिख रहे हैं. कुछ तस्वीरें में कपल रोमांटिक होते हुए भी नजर आए. इस फोटो में दोनों एक साथ डांस करते हुए दिख रहे हैं. रश्मिका ने अपने हाथों पर खूबसूरत मेहंदी लगवाई, जिसकी झलक उन्होंने अपनी तस्वीर में दिखाई है. सोशल मीडिया पर रश्मिका और विजय ये तस्वीरें जमकर वायरल हो रही है. यूजर्स इनपर भर भर कर कमेंट्स कर रहे हैं.

Sports : टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद ट्रेन से मुंबई पहुंचे शिवम दुबे, छुपकर किया सफर! जानिए वजह

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टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद शिवम दुबे फ्लाइट नहीं मिलने पर ट्रेन से मुंबई पहुंचे. ऑलराउंडर ने 3rd AC में कैप और मास्क पहनकर सफर किया ताकि फैंस उन्हें पहचान न सकें.

भारत के ऑलराउंडर शिवम दुबे ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. हालांकि फाइनल जीतने के बाद उनका मुंबई लौटने का तरीका काफी दिलचस्प रहा. अहमदाबाद के लिए फ्लाइट टिकट नहीं मिलने के कारण दुबे को अहमदाबाद से मुंबई तक ट्रेन से ट्रेवल करना पड़ा. घर वापस लौटने के लिए उन्होंने 3rd AC कोच में सफर किया.

Top news : यूपी में जमीन के मुकदमों में आएगी भारी कमी! योगी सरकार कानून में जोड़ेगी नई धाराएं, रजिस्ट्री नियमों में होंगे बदलाव

यूपी सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था के लागू होने से विवादित या अवैध संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लग सकेगी और आम लोगों को अनावश्यक मुकदमों और परेशानियों से राहत मिलेगी. उत्तर प्रदेश सरकार संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन की तैयारी कर रही है. प्रस्ताव के अनुसार अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े अन्य अभिलेखों का अवलोकन और परीक्षण किया जाएगा.

वर्तमान समय में कई मामलों में संपत्ति का विक्रय ऐसे लोगों द्वारा किया जा रहा है जिनका उस संपत्ति पर अधिकार नहीं होता. इसके अलावा निषेधित या प्रतिबंधित संपत्तियों का विक्रय, किसी व्यक्ति द्वारा अपने अधिकार से अधिक भूमि का विक्रय, कुर्क की गई संपत्तियों की बिक्री और केंद्र या राज्य सरकार की संपत्तियों के विक्रय विलेख का पंजीकरण भी कर लिया जाता है. इससे कई तरह के विवाद सामने आते हैं और आम लोगों को मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

सरकार का कहना है कि रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 और उससे संबंधित नियमावली के तहत उपनिबंधक को किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इनकार करने के सीमित अधिकार प्राप्त हैं. अधिनियम की धारा 35 के तहत ही पंजीकरण से इनकार किया जा सकता है, जिसके कारण कई विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री भी हो जाती है. इन समस्याओं को देखते हुए अन्य राज्यों में समय-समय पर रजिस्ट्रीकरण अधिनियम और नियमावली में संशोधन कर नियंत्रण के प्रयास किए गए हैं. इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है.

प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में धारा 22 और 35 के बाद नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ी जाएंगी. प्रस्तावित धारा 22-ए के तहत कुछ विनिर्दिष्ट श्रेणियों के दस्तावेजों को पंजीकरण के लिए प्रतिबंधित किया जा सकेगा. धारा 22-बी में पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान से संबंधित प्रावधान किए गए हैं. वहीं धारा 35-ए के तहत यह व्यवस्था होगी कि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, वैध कब्जे या अंतरण से जुड़े वे सभी दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित करेगी. यदि ऐसे दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे तो पंजीकरण अधिकारी को पंजीकरण से इनकार करने का अधिकार होगा.

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से विवादित या अवैध संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लग सकेगी और आम लोगों को अनावश्यक मुकदमों और परेशानियों से राहत मिलेगी.
प्रस्तावित संशोधन भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 6 के अंतर्गत लाया जा रहा है. मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विधेयक को विधानमंडल में पेश कर उसकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी.

General knowledge : क्या पायलट भी मारते हैं हवाई जहाज के शीशे पर कपड़ा, जानिए कैसे साफ होता है प्लेन का कांच?

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विमान के शीशे साफ करने के लिए ग्राउंड स्टाफ खास लिक्विड का उपयोग करता है. विमान में बेहद मजबूत वाइपर, हाइड्रोफोबिक कोटिंग और हीटिंग सिस्टम होता है, जो पायलट को हर मौसम में साफ रास्ता दिखाते हैं. जब कोई विमान 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है, तो उसकी विंडशील्ड पर धूल, कीड़े और बारिश की बूंदों का जमना एक बड़ी चुनौती होती है. पायलट के लिए साफ दिखना सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या प्लेन में भी कार की तरह साधारण वाइपर होते हैं या पायलट को खुद खिड़की खोलकर सफाई करनी पड़ती है? असलियत यह है कि विमान के शीशे साफ करने के पीछे एक हाई-टेक इंजीनियरिंग और ग्राउंड स्टाफ की कड़ी मेहनत छिपी होती है.

हवाई जहाज के शीशों की सफाई का असली काम रनवे पर ही शुरू हो जाता है. मेंटेनेंस टीम एक विशेष प्रक्रिया का पालन करती है. इसके लिए साधारण साबुन का नहीं, बल्कि ‘नॉन-एब्रेसिव’ (बिना खरोंच वाला) लिक्विड और माइक्रोफाइबर कपड़ों का उपयोग किया जाता है. टीम का मुख्य लक्ष्य शीशे से तेल के दाग, पक्षियों के अवशेष और धूल को हटाना होता है. यदि ये दाग रह जाएं, तो लैंडिंग के समय रनवे की लाइटें ‘ग्लेयर’ पैदा कर सकती हैं, जो पायलट को अंधा कर सकती हैं.

ज्यादातर कमर्शियल विमानों में वाइपर लगे होते हैं. इनका डिजाइन कार के वाइपर जैसा ही दिखता है, लेकिन ये कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं. कार के वाइपर जहां प्लास्टिक या हल्की धातु के होते हैं, वहीं प्लेन के वाइपर क्रोमियम-स्टील और सख्त रबड़ से बने होते हैं. विमान में आमतौर पर दो स्वतंत्र वाइपर सिस्टम होते हैं- पायलट और को-पायलट के लिए अलग-अलग. इन्हें कॉकपिट से अलग-अलग गति (Low/High) पर चलाया जा सकता है.

जब विमान अपनी क्रूजिंग स्पीड (तेज रफ्तार) पर होता है, तो हवा का दबाव इतना अधिक होता है कि वह खुद ही पानी और गंदगी को शीशे से हटा देता है. 30,000 फीट की ऊंचाई पर हवा का घर्षण किसी भी चीज को शीशे पर टिकने नहीं देता है. इसलिए, ऊंचाई पर पायलटों को वाइपर चलाने की जरूरत बहुत कम पड़ती है. वाइपर का मुख्य उपयोग तब होता है जब विमान धीमी गति पर हो, यानी टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान जब भारी बारिश हो रही हो. आधुनिक विमानों (जैसे बोइंग 787) में वाइपर की जगह या उनके साथ ‘हाइड्रोफोबिक कोटिंग’ का इस्तेमाल होता है. यह एक अदृश्य रासायनिक परत होती है जो पानी को शीशे पर फैलने से रोकती है.

जैसे ही बारिश की बूंद इस पर गिरती है, वह मोती बनकर हवा के झोंके के साथ पीछे की ओर भाग जाती है. इसके अलावा, पुराने जहाजों में एक ‘रेन रिपेलेंट’ बटन होता है, जिसे दबाने पर शीशे पर एक खास केमिकल स्प्रे होता है जो पानी को तुरंत हटा देता है.

Braking news : ईरान के नए सुप्रीम लीडर जख्मी! जंग के पहले दिन मुज्तबा खामेनेई के साथ हुआ था हादसा, चौंकाने वाला खुलासा

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई घायल हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जंग के पहले दिन ही उनके साथ हादसा हुआ था. गौरतलब है कि इजरायल ने नए लीडर को मारने की धमकी दी थी. ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग के बीच बड़ा खुलासा हुआ है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई जंग के पहले दिन यानी 28 फरवरी 2026 को ही घायल हो गए थे. उनके पैरों में चोट लगी है, लेकिन चोट की पूरी डिटेल्स और गंभीरता अभी साफ नहीं है. ईरानी और इजरायली अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है.

जंग शुरू होने के साथ ही US-इजरायल ने तेहरान में सुप्रीम लीडर के कंपाउंड पर एयरस्ट्राइक की थी. इसमें मुज्तबा के पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. उसी हमले में उनकी मां, पत्नी, एक बेटा और कई टॉप डिफेंस अधिकारी भी मारे गए. मुज्तबा खामेनेई भी उसी हमले में घायल हुए, लेकिन वो जिंदा बचे और अब एक हाई-सिक्योर जगह पर छिपे हुए हैं, जहां कम्युनिकेशन बहुत लिमिटेड है.

तीन ईरानी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दो दिनों में उन्हें ऊपरी स्तर से जानकारी मिली कि मोजतबा के पैर घायल हैं, लेकिन वो होश में हैं. इजरायली मिलिट्री के दो अधिकारियों ने भी कन्फर्म किया कि इंटेलिजेंस से पता चला है कि 28 फरवरी को मोजतबा के पैरों में चोट लगी थी. ये जानकारी उन्हें नए लीडर चुने जाने से पहले ही मिल गई थी. मुज्तबा खामेनेई को उनके पिता की मौत के बाद यानी 8 मार्च को सुप्रीम लीडर चुना गया. लेकिन तब से वो न वीडियो में दिखे, न पब्लिक में आए और न कोई लिखित बयान दिया. ईरानी स्टेट टीवी और न्यूज एजेंसी IRNA ने उन्हें ‘घायल जंग का वेटरन’ कहा है. एक सरकारी चैरिटी कमिटी इमदाद ने भी उन्हें ‘जंगबाज जंग’ कहकर बधाई दी.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई से जब पूछा गया कि क्या मुज्तबा अब कमांडर-इन-चीफ की भूमिका निभा रहे हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया. बस इतना कहा, ‘जिन्हें मैसेज मिलना था, उन्हें मिल गया है.’ मुज्तबा खामेनेई लंबे समय से IRGC के साथ गहरे रिश्ते रखते हैं. वो अपने पिता के ऑफिस में सिक्योरिटी और मिलिट्री अफेयर्स कोऑर्डिनेट करते थे, लेकिन उनकी पर्सनैलिटी और प्लान्स के बारे में बहुत कम जानकारी है. वो पब्लिक में कभी-कभार ही दिखते थे. अब तेहरान में उनकी तस्वीरों वाले बड़े बैनर और म्यूरल लग गए हैं, जहां उनके पिता उन्हें ईरान का झंडा सौंपते दिखाए गए हैं.

Bollywood : मामूली बजट, ना कोई बड़ा स्टार, फिर भी इस फिल्म ने हिला डाला बॉक्स ऑफिस, छप्परफाड़ है 12 दिनों की कमाई

इस तमिल फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाया हुआ है. महज 9 करोड़ के बजट में बनी ‘थाई किझावी’ ने 12 दिनों में बमफाड़ कमाई कर डाली है. राधिका सरथकुमार की लीड रोल वाली रूरल कॉमेडी ड्रामा ‘थाई किझावी’ से किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी कि ये बॉक्स ऑफिस को हिला डालेगी. कम बजट और बिना बड़े स्टार कास्ट वाली ये फिल्म दर्शकों का दिल जीत रही है और इसी के साथ ये थिएटर्स में अपने दूसरे हफ्ते में भी लगातार अच्छा परफॉर्म कर रही है. यहां तक कि इसने सिनेमाघरों में मौजूद साउथ से लेकर बॉलीवुड तक की कई फिल्मों को धूल चटा दी है और कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिये हैं. चलिए यहां जानते हैं ‘थाई किझावी’ ने रिलीज के 12वें दिन यानी दूसरे मंगलवार को कितने नोट छापे हैं?

साल की शुरुआत से तमिल फिल्म इंडस्ट्री की कोई बड़ी ब्लॉकबस्टर नहीं आई है. ऐसे में डायरेक्टर शिवकुमार मुरुगेसन की फिल्म थाई किझावी न केवल दर्शकों की फेवरेट बन गई है वहीं ये खूब कमाई भी कर रही है. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में कोई बड़ा मेल स्टार नहीं हैं. राधिका सरथकुमार स्टारर ये फिल्म आम कमर्शियल तमिल फिल्मों की कैटेगरी में भी नहीं आती. फिर भी हर तरफ से पॉजिटिव रिव्यू मिलने के बाद, थाई किझावी बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा परफॉर्म कर रही है.

इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने अब तक दुनिया भर में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है. 27 फरवरी को भारत में 2.65 करोड़ रुपये के अच्छे नेट कलेक्शन के साथ ओपनिंग करने के बाद, फिल्म ने वीकेंड में अपनी कमाई में अचानक उछाल देखा और अपने पहले शनिवार और रविवार को एक के बाद एक 5 करोड़ रुपये और 6.15 करोड़ रुपये कमाए. अगले वीकडेज़ में भी, फिल्म का कलेक्शन 1.7 करोड़ रुपये से कम नहीं हुआ.

शिवकुमार मुरुगेसन ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म को लिखा भी है. थाई किझावी को सुधन सुंदरम और शिवकार्तिकेयन ने पैशन स्टूडियोज़ और शिवकार्तिकेयन प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया है. फिल्म में राधिका सरथकुमार सेंट्रल रोल में हैं, जबकि सिंगमपुली, अरुलडोस, मुनीशकांत, बाला सरवनन और इलावरसु सपोर्टिंग रोल में हैं. फिल्म की कहानी बेटों के एक ग्रुप के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पैरालाइज्ड मां की मौत के बाद शुरू में विरासत में पैसा पाने की उम्मीद करते हैं। हालांकि, जब उन्हें पता चलता है कि मां के पास एक कीमती खजाना है, तो उनकी प्रायोरिटी बदल जाती है, जिससे वे उसे जिंदा रखने की कोशिश करते हैं. कहानी एक डार्क कॉमेडी फैमिली ड्रामा के तौर पर सामने आती है.

Trending news : युवक ने बना डाले सिगरेट के पकौड़े, यह देख यूजर्स ने पकड़ लिया माथा

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शख्स अपने किचन में बैठा पकोड़े की हत्या को अंजाम दे रहा है. पकोड़े का वजूद, पकोड़े की इज्जत और न जाने किस किस से खिलवाड़ करता दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसने पकौड़े की परिभाषा ही बदल दी है. वीडियो ने फूड लवर्स के दिलों पर जिस तरह के जख्म किए हैं अब उनका भरना लगभग नामुमकिन सा लग रहा है. सोशल मीडिया के गलियारों में इस वक्त केवल एक ही विषय पर चर्चा हो रही है और वो है सिगरेट के पकौड़े. जी हां, एक महान पुरोद्धा ने पकौड़ों के साथ ऐसी ज्यादती कर डाली है कि न तो भुलाए निकल रही है और न रुलाए।

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक शख्स अपने किचन में बैठा पकोड़े की हत्या को अंजाम दे रहा है. पकोड़े का वजूद, पकोड़े की इज्जत और न जाने किस किस से खिलवाड़ करता दिखाई दे रहा है. वीडियो में शख्स एक बर्तन में बेसन का घोल करता है और उसे अच्छे से मिलकर उसमें कुछ सिगरेट डाल देता है और बस यहीं से शुरू होता है मौत का खेल.

शख्स गैस पर एक कड़ाही चढ़ाता है और उसमें तेल गर्म करने लगता है, तेल गर्म करने की शुरूआत से ही पकोड़ों को अपनी मौत की आहट होने लग जाती है. इसके बाद वही होता है जिसका डर था. शख्स सिगरेट को बेसन के घोल में डालता है और उन्हें इसमें डूबोकर गर्म तेल में तल देता है और बाहर निकलकर आते हैं सिगरेट के पकोड़े. वीडियो देखकर फूड लवर्स ने खून की उल्टियां करना शुरू कर दिया है. एक यूजर ने लिखा.भाई इसे खाना है या फूंकना है. एक और यूजर ने लिखा. मुझे तो खून की उल्टियां हो रही हैं. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा.ये कयामत लाकर मानेगा.

World : छुट्टे पैसे को लेकर अब दुकानदार से नहीं होगी झिकझिक, जल्द ATM से निकलेंगे 10-20 और 50 रुपये के नोट

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मार्केट में छोटे नोटो की कमी को देखते हुए सरकार अब ATM से भी 10-20 और 50 रुपये के नोट निकालने की योजना बना रही है. डिजिटलाइजेशन के इस नए दौर में बिल पेमेंट से लेकर रिचार्ज तक सबकुछ ऑनलाइन हो रहा है. कई बार अगर हम 100 या 500 रुपये का नोट लेकर बाजार जाते हैं, तो दुकानदारों का यही कहना रहता है कि ‘भाई साहब! छुट्टे नहीं है.’ ऑनलाइन पेमेंट के इस जमाने में छोटे नोटों की कमी अब खलने लगी है, जिनकी जरूरत ऑटो-रिक्शा का किराया चुकाने से लेकर छोटे-मोटे सामान की खरीदारी करते वक्त पड़ती है. । हालांकि, सरकार का कहना है कि मार्केट में छोटे नोटों की कोई कमी नहीं है. अब योजना ATM से भी छोटे नोट निकालने की है.

बीते मंगलवार को केंद्र सरकार की तरफ से संसद में बताया गया कि देश में छोटे नोटों की कोई कमी नहीं है. एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि 10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये के नोट पहले से ही काफी संख्या में चलन में हैं. हालांकि, ATM से कैश विदड्रॉल के दौरान हमें अकसर 500 रुपये के ही नोट मिलते हैं. कभी-कभार100 या 200 रुपये के भी नोट निकल जाते हैं. ऐसे में 500 के नोट का छुट्टा मिलना कई बार मुश्किल हो जाता है.

इस दुविधा पर बात करते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पुराने ATM छोटे नोट बांटने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं. हालांकि, इस समस्या को हल करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. इस पहल के तहत, खास ‘छोटे मूल्य वाले डिस्पेंसर’ की टेस्टिंग की जा रही है. इन मशीनों से लोग सीधे 10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये के नोट निकाल सकेंगे. इस तरह, लोग ATM से कैश निकालते समय छुट्टे पैसे भी पा सकेंगे.

सरकार ने छोटे नोटों की सप्लाई का डेटा भी शेयर किया. मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (26 फरवरी तक) में रिजर्व बैंक (RBI) ने 439.4 करोड़ रुपये के 10 रुपये के नोट, 193.7 करोड़ रुपये के 20 रुपये के नोट और 130.3 करोड़ रुपये के 50 रुपये के नोटों की सप्लाई की. इसी तरह से पिछले कारोबारी साल 2025 में 180 करोड़ रुपये के 10 रुपये के नोट, 150 करोड़ रुपये के 20 करोड़ के नोट और 300 करोड़ रुपये के 50 रुपये के नोट सप्लाई की गई.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) नियमित तौर पर अलग-अलग डिनॉमिनेशन की डिमांड का रिव्यू करता है और बताता है कि कितने नोट छापे जाने चाहिए. सरकार के मुताबिक, कम वैल्यू वाले कैश की डिमांड बैंक नोट और सिक्कों को मिलाकर पूरी की जाती है. साथ ही, डिजिटल पेमेंट अब कम वैल्यू वाले पेमेंट सहित ट्रांजैक्शन का एक बड़ा हिस्सा है.

Bihar news : सुपौल में भी गैस को लेकर भारी परेशानी, 10 दिन पर भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

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प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे लगातार गैस एजेंसी का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. बाजार में कालाबाजारी हो रही है. 1500 में गैस मिल रहा. एक तरफ इजरायल-ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा है तो दूसरी ओर भारत में एलपीजी को लेकर लोगों को समस्या हो रही है. बिहार के कई जिलों में गैस की दिक्कत हो रही है. सरकार की ओर से भले दावा किया जा रहा है कि सब ठीक है लेकिन लोग परेशानी से जूझ रहे हैं. सुपौल में तो लोगों को एक सप्ताह से 10-10 दिन तक गैस नहीं मिल रहा है.

जिले में एलपीजी की कमी से परेशान उपभोक्ताओं का गुस्सा बुधवार (11 मार्च, 2026) को फूट पड़ा. गैस नहीं मिलने से नाराज लोगों ने बुधवार की सुबह त्रिवेणीगंज-पिपरा सड़क मार्ग को जाम कर दिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया.

मामला त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के बघला के पास NH-327E का है, जहां बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने सड़क जाम कर हंगामा किया. प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि पिछले एक सप्ताह से लेकर दस दिनों तक गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. वे लगातार गैस एजेंसी का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
प्रदर्शनकारियों ने गैस एजेंसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी में गैस नहीं होने की बात कही जा रही है, जबकि बाजार में कालाबाजारी हो रही है. गैस सिलेंडर 1500 रुपये तक में बेचा जा रहा है. लोगों का एजेंसी पर ही आरोप है कि यहीं से बड़े पैमाने पर सिलेंडर की कालाबाजारी की जा रही है. इसके कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है. जिनके पास 1000 नहीं होता वे 1500 और 2000 कहां से लाएंगे.

सड़क जाम की सूचना मिलने के बाद त्रिवेणीगंज थाना की पुलिस मौके पर पहुंची. प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाया. इसके बाद लोग शांत हुए और NH-327E पर परिचालन शुरू हुआ. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गैस आपूर्ति व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करने और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके.

Technology : LPG महंगा हुआ तो भी नो टेंशन, बस 1,500 रुपये में खत्म हो जाएगी सारी परेशानी, जानिए कैसे

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इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई के कारण LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है. इसके चलते लोग अब इंडक्शन चूल्हे खरीद रहे हैं. इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर अब आम आदमी की रसोई पर पहुंच गया है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से LPG सप्लाई में रुकावटें भी आ रही हैं, जिससे LPG की शॉर्टेज हो सकती है. हाल ही में सरकार ने LPG सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए हैं और कई जगहों पर सिलेंडर बुकिंग का टाइम भी बढ़ा है. हालांकि, आपको इन चीजों की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. सिलेंडर महंगा होने या खत्म होने पर आप 1,000 रुपये से भी कम में सारी परेशानी दूर कर सकते हैं.

पिछले कुछ दिनों से LPG के दाम और इसके उपलब्धता को लेकर फैली अनिश्चितता के बीच लोग अब इंडक्शन चूल्हा खरीदने लगे हैं. ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर बिजली से चलने वाले इन चूल्हों की बिक्री कई गुना बढ़ गई है. अगर आप भी गैस की टेंशन को लेकर परेशान हैं तो इंडक्शन चूल्हा खरीद सकते हैं. ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर आपको 1,500 रुपये से भी कम में अच्छा चूल्हा मिल जाएगा. इसे खरीदने के बाद आप सारे काम कर सकेंगे और गैस की भी टेंशन नहीं लेनी पड़ेगी.

इंडक्शन चूल्हे के एक साथ कई फायदे हैं. यह गैस सिलेंडर की तुलना में अधिक पोर्टेबल है. इसे आप किचन के साथ-साथ घर के किसी भी कमरे में यूज कर सकते हैं. यह बिजली से चलता है तो इसमें गैस लीक होने का डर नहीं रहता. यह बहुत तेजी से गर्म होता है और कुछ ही मिनटों में आपका खाना तैयार कर देता है. इसे यूज करने के साथ-साथ साफ करना भी एकदम आसान है. साथ ही इसमें सिलेंडर की तरह गैस खत्म होने की टेंशन नहीं रहती.

ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स में 1,500 रुपये से भी कम में इंडक्शन चूल्हों की कीमत शुरू हो जाती है. 1,500 रुपये तक आपको अच्छी क्वालिटी का इंडक्शन चूल्हा मिल जाएगा. आप चाहें तो इससे महंगी कीमत वाले चूल्हे भी खरीद सकते हैं.

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