Saturday, March 21, 2026
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World : गर्मी से इंदौर एयरपोर्ट के रनवे की सतह पिघली, जानें कितनी तेज धूप में होता है ऐसा?

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इंदौर में भीषण गर्मी के कारण एयरपोर्ट रनवे का डामर पिघल गया, जिससे उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा. आइए जानें कि आखिर कितनी तेज धूप में ऐसा होता है और डामर क्यों पिघलने लगता है. मध्य प्रदेश के इंदौर में पड़ रही भीषण गर्मी ने न केवल आम जनजीवन को बेहाल किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी चुनौती दे दी है. हाल ही में इंदौर एयरपोर्ट के रनवे की सतह पिघलने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. इस वजह से उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा और यात्री घंटों परेशान रहे. यह महज एक गड़बड़ी नहीं, बल्कि बढ़ते तापमान का वह खतरनाक संकेत है जिसे ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ के दौर में समझना बेहद जरूरी है. आइए जानें कि आखिर कितनी तेज धूप में सड़कें पिघलने लगती हैं.

भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के कारण इंदौर एयरपोर्ट के रनवे का एक हिस्सा नरम पड़ गया और वहां लगा बिटुमेन (डामर) पिघलने लगा. रनवे की सतह ढीली होने के कारण विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था. ऐसे में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ने तुरंत मरम्मत का काम शुरू किया. इस दौरान दिल्ली और रायपुर से आ रही इंडिगो की दो उड़ानों को भोपाल डायवर्ट करना पड़ा. हालांकि, इंजीनियरों की मुस्तैद टीम ने करीब 20 मिनट के भीतर डामर की जरूरी मरम्मत कर दी, जिसके बाद परिचालन फिर से सामान्य हो पाया.

अक्सर लोग सोचते हैं कि जब मौसम विभाग तापमान 40 डिग्री सेल्सियस बताता है, तो सड़क का तापमान भी उतना ही होगा, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. डामर की सड़कें और रनवे काले रंग के होते हैं, और काला रंग सूर्य की ऊष्मा को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है. विज्ञान के अनुसार, जब हवा का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस होता है, तो सड़क की सतह का तापमान उससे 20 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा यानी 60 डिग्री तक पहुंच सकता है. यही वह बिंदु है जहां डामर अपनी मजबूती खोने लगता है.

सड़कों और रनवे को बनाने में ‘बिटुमेन’ या तारकोल का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक चिपचिपा और काला पदार्थ है. जब सतह का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो बिटुमेन नरम होने लगता है. उच्च तापमान पर यह तरल की तरह व्यवहार करने लगता है, जिससे सड़क की ऊपरी परत अपनी पकड़ छोड़ देती है. इसी स्थिति को बोलचाल की भाषा में सड़क का पिघलना कहा जाता है. इंदौर में भी रनवे की ऊपरी परत इसी प्रक्रिया के तहत ढीली हो गई थी, जिससे विमानों के टायर फंसने का डर था.

रनवे या सड़क के पिघलने के पीछे केवल गर्मी ही एकमात्र कारण नहीं होती है. कई बार पुराने निर्माण या डामर की घटिया गुणवत्ता भी इसके लिए जिम्मेदार होती है. समय के साथ डामर अपनी लचीलापन खो देता है और अत्यधिक तापमान सहने की उसकी क्षमता कम हो जाती है. इसके अलावा, अगर डामर का मिश्रण उस इलाके के औसत अधिकतम तापमान के हिसाब से तैयार नहीं किया गया हो, तो वह जल्दी पिघलने लगता है. यही वजह है कि अब आधुनिक निर्माणों में ‘पॉलिमर मॉडिफाइड बिटुमेन’ का उपयोग किया जा रहा है जो अधिक तापमान सह सके. जब रनवे या सड़क की सतह नरम हो जाती है, तो उस पर भारी वाहनों या विमानों के पहियों के निशान पड़ जाते हैं. इसे तकनीकी भाषा में रटिंग कहा जाता है. इससे सतह ऊपर-नीचे हो सकती है या उसमें दरारें आ सकती हैं. विमानों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि तेज रफ्तार में लैंडिंग के समय संतुलन बिगड़ सकता है. वहीं सड़कों पर चलने वाले ड्राइवरों के लिए यह ‘बकलिंग’ का खतरा पैदा करती है, जिससे गाड़ियां अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकती हैं.

Bollywood : तूफान बनी साउथ की ये मामूली बजट में बनी फिल्म, 11 दिनों में कमा डाला 300 फीसदी से ज्यादा मुनाफा

राधिका सारथकुमार की थाई किझावी ने बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ाया हुआ है. इस फिल्म ने रिलीज के 11वें दिन शानदार कलेक्शन किया है. सिनेमाघरों में जहां द केरल स्टोरी दबदबा बनाए हुए है तो वहीं इस फिल्म को साउथ की एक बिना बड़े स्टार कास्ट वाली फिल्म बराबर की टक्कर दे रही है. दरअसल हम बात कर रहे हैं राधिका सरथकुमार स्टारर थाई किझावी की. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस रिलीज के बाद से बवाल काट रही है और ऐसे-ऐसे रिकॉर्ड बना रही है कि हर कोई हैरान रह गया है. जानते हैं इस फिल्म ने 11वें दिन यानी दूसरे सोमवार को कितने नोट छापे हैं?

अपने दूसरे सोमवार को थाई किझावी ने कोईमोई के आंकड़ों के मुताबिक 2.5 करोड़ रुपये और कमाए. वहीं आंकड़ों के मुताबिक शिवकुमार मुरुगेसन के डायरेक्शन में बनी इस तमिल कॉमेडी ड्रामा ने पहले हफ्ते में 23.25 करोड़ का कलेक्शन कर डाला था. इसके बाद इसने दूसरे फ्राइडे को 2.55 करोड़, दूसरे शनिवार को 4.6 करोड़ और दूसरे संडे को 5 करोड़ का कलेक्शन किया. इसी के साथ इसकी 11 दिनों की कुल कमाई 37.9 करोड़ रुपये हो गई. जबकि इसका ग्रॉस कलेक्शन 44.72 करोड़ हो गया है. फिल्म की रफ़्तार को देखते हुए, ये आसानी से भारत में 50 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी.

बता दे कि थाई किझावी का बजट 9 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. इस लागत के मुकाबले, इसने अब तक 37.9 करोड़ नेट कमाए हैं, इस तरह 28.9 करोड़ का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) मिला है जोकि 321.11% रिटर्न के बराबर है. फिल्म को सुपर डुपर हिट के टैग के लिए 100 करोड़ नेट कमाने होंगे, जो इसकी पहुंच से बाहर है. हालांकि 321.11% रिटर्न के साथ, थाई किझावी 2026 की दूसरी तमिल फिल्म बन गई है जिसने अभिशन जीविंथ और अनस्वरा राजन की विद लव के बाद इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 300% रिटर्न कमाया है.

कॉलीवुड कॉमेडी ड्रामा को शिवकुमार मुरुगेसन ने डायरेक्ट किया है और इसे सुधन सुंदरम और शिवकार्तिकेयन ने पैशन स्टूडियो और शिवकार्तिकेयन प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया है. इसमें सिंगमपुली, अरुलदोस, मुनीशकांत और बाला सरवनन भी अहम रोल में हैं. यह 27 फरवरी को थिएटर में रिलीज़ हुई थी.

Technology : iPhone 17e की बिक्री भी शुरू नहीं हुई और ऐप्पल ने कर ली iPhone 18e की तैयारी, मिलेंगे ये धाकड़ फीचर्स

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ऐप्पल ने अपने एंट्री-लेवल आईफोन के नेक्स्ट जनरेशन वेरिएंट iPhone 18e की तैयारी शुरू कर दी है. इसमे डायनामिक आईलैंड और A20 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. पिछले हफ्ते लॉन्च हुए iPhone 17e की अभी फर्स्ट सेल भी शुरू नहीं हुई है और ऐप्पल ने इसके नेक्स्ट जनरेशन वेरिएंट iPhone 18e की तैयारी शुरू कर दी है. iPhone 17e की बिक्री 11 मार्च से शुरू होगी, लेकिन ताजा लीक्स के मुताबिक, उससे पहले ही ऐप्पल ने iPhone 18e के लिए अपनी प्लानिंग को फाइनल कर लिया है. साथ ही यह जानकारी भी आ गई है कि इस एंट्री-लेवल आईफोन में क्या-क्या मिलने वाला है. आइए जानते हैं कि यह कब लॉन्च होगा और इसमें क्या-क्या फीचर्स होंगे.

e सीरीज में ऐप्पल किफायती कीमत वाले आईफोन लॉन्च करती है, लेकिन इनमें स्टैंडर्ड मॉडल वाले कई फीचर्स मिलते हैं. iPhone 18e को लेकर जानकारी मिल रही है कि इसमें डायनामिक आईलैंड का इंतजार खत्म हो सकता है. iPhone 17e में भी यह फीचर मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन ऐप्पल ने इसे पुराने नॉच डिजाइन के साथ ही लॉन्च किया है. इसके अलावा 18e के प्रोसेसर की जानकारी भी सामने आई है. उम्मीद की जा रही है इस आईफोन में कंपनी आईफोन 18 में मिलने वाला अपना सबसे एडवांस A20 चिपसेट देगी.

iPhone 18e को अगले साल मार्च में आईफोन 18 स्टैंडर्ड और iPhone Air 2 मॉडल के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इस साल से ऐप्पल अपने लॉन्च शेड्यूल में बदलाव कर रही है. इस साल सितंबर में आईफोन 18 प्रो मॉडल्स और फोल्डेबल आईफोन iPhone Ultra को लॉन्च किया जाएगा, वहीं अगले साल मार्च में सीरीज के बाकी तीन मॉडल्स एक साथ लॉन्च किए जाएंगे. iPhone 18e की कीमत को लेकर ऑफिशियल जानकारी नहीं आई है, लेकिन इसे पूरी सीरीज की तुलना में सस्ती कीमत पर लॉन्च किया जाएगा.

iPhone 17e में 6.1 इंच का सुपर रेटिना XDR OLED डिस्प्ले लगा है, जो 1200 निट्स की पीक HDR ब्राइटनेस और प्रोटेक्शन के लिए Ceramic Shield 2 के साथ आता है. इसमें आईफोन 17 वाला A19 चिपसेट दिया है, जो एडवांस्ड 3nm टेक्नोलॉजी पर बना है. इसके रियर में 48MP का सिंगल फ्यूज कैमरा सिस्टम लगा है. ऐप्पल ने इसकी बेस स्टोरेज को बढ़ाकर 256GB कर दिया है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स से लैस इस आईफोन को भारत में 64,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर खरीदा जा सकता है.

National : दोस्त समझकर इस देश को अमेरिका ने दिए थे F-16 जैसे फाइटर जेट, लेकिन अब है कट्टर दुश्मन

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वेनेजुएला और अमेरिका एक समय में काफी करीबी दोस्त थे. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि दोनों देशों के बीच दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. आइए जानते हैं क्या है इसकी वजह. अमेरिका कभी इस देश पर इतना भरोसा करता था कि उसने इसे अपना करीबी स्ट्रैटेजिक पार्टनर मानते हुए एडवांस F-16 फाइटर जेट दिए थे. लेकिन आज के हालात काफी अलग हैं. उसी देश को अब अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक माना जाता है. वह देश है वेनेजुएला. पिछले कुछ दशकों में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते काफी बदल गए हैं.

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में सत्ता में आए हैं यूएस की फॉरेन पॉलिसी और भी ज्यादा एग्रेसिव हो चुकी है. दूसरे टर्म में ट्रंप ने कनाडा, पनामा, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड, ईरान और क्यूबा समेत कई देशों को खुलेआम धमकी दी है. जनवरी में अमेरिकी सेना ने ट्रंप के डायरेक्शन में वेनेजुएला में एक ऑपरेशन शुरू किया. इस ऑपरेशन के नतीजे में प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया गया. इसके तुरंत बाद सत्ता में आए वेनेजुएला के नए नेताओं ने ट्रंप को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. इसके बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच डायनामिक्स बदल गए.

हालांकि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते हमेशा उतार चढ़ाव से भर रहे हैं. एक समय में काफी करीबी सहयोगी थे लेकिन आज वे ग्लोबल पॉलिटिक्स में अलग-अलग तरफ खड़े हैं. 1980 के दशक में यूनाइटेड स्टेट्स और वेनेजुएला के बीच रिश्ते काफी मजबूत थे. वेनेजुएला में अमेरिका के सपोर्ट में सरकार थी और कोल्ड वॉर के दौरान लैटिन अमेरिका में उसे एक अहम सहयोगी के तौर पर देखा जाता था. इस स्ट्रैटेजिक दोस्ती की वजह से यूनाइटेड स्टेट्स ने 1983 में वेनेजुएला को करीब 24 F-16 फाइटर फाल्कन जेट बेचे. उस समय वेनेजुएला इन एडवांस्ड अमेरिकन फाइटर जेट्स को ऑपरेट करने वाला पहला लैटिन अमेरिकन देश था.

1999 में जब ह्यूगो शावेज वेनेजुएला में पावर में आए तो रिश्ते बिगड़ने लगे. शावेज ने मजबूत एंटी अमेरिकन पॉलिसी को अपनाया और इस इलाके में यूनाइटेड स्टेट्स के असर को चैलेंज करना शुरू कर दिया. उन्होंने रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी वेनेजुएला के रिश्ते मजबूत किए. इससे अमेरिका और भी ज्यादा परेशान हो गया. 2006 में हालात और खराब हो गए. यूनाइटेड स्टेट्स ने वेनेजुएला पर आर्म्स एम्बार्गो लगा दिया. इस वजह से वेनेजुएला को अपने अमेरिका में बने हथियारों के लिए स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड या फिर टेक्निकल मेंटेनेंस लेने की इजाजत नहीं थी. इस फैसले ने वेनेजुएला के F-16 फ्लीट पर काफी बुरा असर डाला .

इसके बाद वेनेजुएला ने कथित तौर पर अपने एयरक्राफ्ट को ऑपरेशनल रखने के लिए दूसरे तरीके खोजे. रिपोर्ट के मुताबिक देश ने जेट्स को मेंटेन करने के लिए ईरान से मदद मांगी या फिर रूस और चीन को एयरक्राफ्ट की टेक्नोलॉजी को स्टडी करने की इजाजत दी. ऐसी संभावनाओं से यूनाइटेड स्टेट्स काफी नाराज था. उसे डर था कि सेंसिटिव मिलिट्री टेक्नोलॉजी को रिवर्स इंजीनियर किया जा सकता है.

समय के साथ पुराने हो रहे अमेरिकी जेट्स को मेंटेन करना और भी मुश्किल होता गया. जैसे-जैसे अमेरिका के साथ रिश्ते खराब होते गए वेनेजुएला ने रूसी मिलट्री इक्विपमेंट की तरफ रुख किया. पुराने अमेरिकी जेट्स की जगह रूसी सुखोई Su-30 फाइटर जैट ने ले ली.

Bollywood : ‘लव एंड वॉर’ को लेकर आया बड़ा अपडेट, स्टारकास्ट के सीन हुए रीशूट, बढ़ गया फिल्म का बजट

फिल्म लव एंड वॉर को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट देखने मिल रहा है.अब फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट आया है. खबरें हैं कि फिल्म के कुछ सीन्स दुबारा शूट किए जा रहे है. फिल्म ‘लव एंड वॉर’ संजय लीला भंसाली की आने वाली बड़ी फिल्म है. इस फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल एक साथ नजर आने वाले हैं. फैंस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड है और बेसब्री से इसकी रिलीज का इंतजार कर रहे हैं. वहीं अब फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है.

‘लव एंड वॉर’ को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के कुछ अहम सीन दोबारा शूट किए जा रहे हैं. खबर है कि संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को पहले इसी साल अगस्त में रिलीज करने का प्लान था, लेकिन अब कुछ सीन के रीशूट होने की वजह से इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है.

बताया जा रहा है कि भंसाली अपनी फिल्म में परफेक्शन चाहते हैं, इसलिए कुछ अहम सीन फिर से शूट किए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सीन के रीशूट की वजह से फिल्म का बजट भी बढ़ गया है. वहीं, लगातार हो रहे इस रीवर्क के कारण फिल्म की रिलीज डेट फिलहाल तय नहीं है. ‘लव एंड वॉर’ अब संजय लीला भंसाली के सबसे महंगे प्रोजेक्ट्स में से एक बन चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की रिलीज में देरी की एक बड़ी वजह इसका भव्य पैमाना बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि फिल्म में बड़े एरियल एक्शन सीक्वेंस दिखाए जाएंगे, जिन पर वीएफएक्स का काम होना है. इन जटिल सीन को तैयार करने में काफी समय लग सकता है, इसलिए फिल्म की रिलीज आगे खिसकने की संभावना भी जताई जा रही है.

इससे पहले एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान रणबीर कपूर ने खुद कन्फर्म किया था कि ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज आगे बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि यह फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ के बाद रिलीज होगी, जो अक्टूबर में सिनेमाघरों में आने वाली है.

Life style : 30 की उम्र में भूलने लगे हैं छोटी-छोटी बातें, कहीं आपके दिमाग पर ‘ब्रेन फॉग’ तो नहीं छा रहा? आइए जाने

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उम्र का एक पड़ाव होता है, जिसमें इंसान चीजों को भूलने लगता है. हालांकि, 30 साल की उम्र में इस तरह की दिक्कत नहीं होती है. अगर आपको हो रही है, तो सावधान होने की जरूरत है.
तीस की उम्र में याददाश्त कम होना आम बात नहीं है. लेकिन कई लोग एक अलग तरह की परेशानी महसूस कर रहे हैं जैसे कि दिमाग में धुंध-सा छाया रहना, सोचने की रफ्तार धीमी पड़ जाना, मीटिंग में ध्यान न टिक पाना, या बात करते-करते साधारण शब्द भूल जाना. जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, अब बोझ जैसे लगते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह किन कारणों के चलते हो रहा है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने TOI को बताया कि यह डिमेंशिया नहीं, बल्कि ‘ब्रेन फॉग’ है. इसमें मेंटल थकान, उलझन और एकाग्रता में कमी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है. एक्सपर्ट के अनुसार, लगातार तनाव, नींद की कमी, पोषण की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और कुछ मामलों में कोविड के बाद की रिकवरी इसकी बड़ी वजहें हैं. यानी दिमाग जवाब नहीं दे रहा, वह संकेत दे रहा है कि उसे संभालने की जरूरत है. ब्रेन फॉग कोई आधिकारिक बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का मेल है जिसमें मानसिक सुस्ती, छोटी-छोटी बातें भूलना, मल्टीटास्किंग में दिक्कत और दोपहर तक थकावट शामिल होती है. दिमाग शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इस्तेमाल करता है. जब नींद अधूरी हो, तनाव ज्यादा हो या पोषण कम मिले, तो सबसे पहले सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है. ब्रेन बंद नहीं होता, बस लो पावर मोड में चला जाता है.

तीस की उम्र बॉयोलॉजिकल रूप से मेंटल क्षमता का अच्छा दौर माना जाता है, लेकिन लाइफस्टाइल बदल चुकी है. काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश, सोशल मीडिया की तुलना और लगातार डिजिटल एक्सपोजर तनाव बढ़ाते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन बताते हैं कि लंबी कार्य अवधि और कम नींद ध्यान और वर्किंग मेमोरी को कमजोर करती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एक तिहाई एडल्ट पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जबकि नींद के दौरान ही दिमाग खुद को रिपेयर करता है.

पोषक तत्वों की कमी भी अहम कारण हो सकती है. विटामिन B12, विटामिन D3 और आयरन की कमी से एकाग्रता और एनर्जी घटती है. इसके साथ में थकान, झुनझुनी, बाल झड़ना या पीली त्वचा जैसे संकेत मिलें तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. नींद, नियमित व्यायाम और पानी की पर्याप्त मात्रा, ये तीन चीजें अक्सर नजरअंदाज होती हैं. रोज 30 मिनट हल्का-फुल्का एक्सराइज ब्लड फ्लो बढ़ाता है और ध्यान सुधारता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी फोकस बिगाड़ सकता है. संतुलित आहार और स्क्रीन से दूरी भी मददगार है. अगर भूलने की समस्या रोजमर्रा के काम या नौकरी को प्रभावित करे, या अचानक भ्रम, तेज सिरदर्द, बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

National : मिडिल ईस्ट की जंग में ईरान के खिलाफ कूदा तुर्किए, जानें उसकी मिलिट्री पॉवर

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तुर्किए ने इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया है. आइए जानते हैं कितनी ताकतवर है तुर्किए की मिलिट्री सेना. तुर्किए ने अब इजरायल और ईरान के बीच चल रहे मिडल ईस्ट झगड़े में ईरान के खिलाफ एक्टिव रूप से शामिल होने का अपना इरादा जाहिर किया है. यह स्थिति तब और बिगड़ गई जब तुर्किए की सेना ने कथित तौर पर भूमध्य सागर में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया. इससे अंकारा को झगड़े में ज्यादा सीधा रुख अपनाने पर मजबूर होना पड़ा. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान की तुलना में तुर्किए की सेना कितनी ताकतवर है.

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 के मुताबिक तुर्किए अभी दुनिया की नौंवी सबसे ताकतवर सेना है. बीते 10 सालों में अंकारा ने अपनी सेना को मॉडर्न बनाने में भारी इन्वेस्ट किया है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, देसी हथियार बनाने और मजबूत एयरफोर्स पर फोकस किया गया है. मॉडर्नाइजेशन और स्ट्रैटेजिक एलाइंस के इस कॉम्बिनेशन ने तुर्किए को मिडिल ईस्ट और यूरोप की सबसे असरदार मिलिट्री ताकतों में से एक बना दिया है.

तुर्किए के सबसे बड़े फायदे में से एक उसकी एयर पावर है. देश मॉडर्न F-16 फाइटर जेट का एक बड़ा बेड़ा चलाता है. यह इसकी एयरफोर्स की रीढ़ है. ये एयरक्राफ्ट सटीक हमले, एयर सुपीरियोरिटी मिशन और लंबी दूरी के ऑपरेशन करने में सक्षम हैं. फाइटर जेट के अलावा तुर्किए ने अपनी ड्रोन वाॅरफेयर क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया है. एडवांस्ड कॉम्बैट ड्रोन जैसे स्वदेशी अनमैन्ड सिस्टम ने सीरिया, लीबिया और कॉकेशस में संघर्षों में एक बड़ी भूमिका निभाई है.
तुर्किए के पास एक जबरदस्त जमीनी सेना भी है. देश के पास लगभग 2284 टैंक हैं. इनमें एडवांस्ड लेपर्ड 2 टैंक और देश में ही डेवलप किया गया अल्टे मेन बैटल टैंक शामिल हैं. इन आर्मर्ड यूनिट्स को मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी सिस्टम और एडवांस्ड बैटलफील्ड कम्युनिकेशन नेटवर्क का सपोर्ट मिलता है.

तुर्किए की आर्म्ड फोर्स में लगभग 3,55,000 एक्टिव सैनिक हैं. यह इसे इस इलाके की सबसे बड़ी प्रोफेशनल मिलिट्री में से एक बनाता है. तुर्किए के सैनिक काफी ज्यादा ट्रेंड और अनुभवी माने जाते हैं. यह सीरिया, इराक और दूसरे रीजनल कॉन्फिलक्ट जोन में कई ऑपरेशन में शामिल रहे हैं.
इसी के साथ तुर्किए की मिलिट्री ताकत के पीछे एक और बड़ा फैक्टर नाटो में उसकी मेंबरशिप है. नाटो मेंबर होने के नाते तुर्किए को आर्टिकल 5 के तहत कलेक्टिव डिफेंस अरेंजमेंट का फायदा मिलता है.

सैनिकों की संख्या के मामले में ईरान को साफ फायदा है. ईरान के पास 6,10,000 एक्टिव लोग हैं. यह तुर्किए से दोगुनी ताकत है. लेकिन जब टेक्नोलॉजी, एयर पावर और वेस्टर्न डिफेंस सिस्टम की बात होती है तो तुर्किए को बड़े पैमाने पर आगे माना जाता है.

Business : ईरान वॉर से बढ़ा वैश्विक संकट, अब रूस के प्रसिडेंट व्लादमीर पुतिन के इस बयान ने और बढ़ाई टेंशन

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पुतिन ने यह भी कहा कि Russia दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक और सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में से एक है. ऐसे में मौजूदा हालात से मॉस्को को फायदा मिल सकता है. ईरान पर United States और Israel के संयुक्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है. ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के साथ-साथ अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है. इस बढ़ते संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है. इसी कड़ी में Vladimir Putin ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.

रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) कहा कि आने वाले कुछ हफ्तों में Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर European Union इच्छुक हो तो रूस लंबे समय तक ऊर्जा सहयोग के लिए तैयार है. सीनियर सरकारी अधिकारियों और रूस की प्रमुख तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ टेलीविजन बैठक में पुतिन ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बिगड़ती स्थिति के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव बन गया है. इससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

इस तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो साल 2022 के बाद पहली बार इतना ऊंचा स्तर है. तेल की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से Strait of Hormuz से आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण देखी जा रही है. यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.

पुतिन ने यह भी कहा कि Russia दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक और सबसे बड़े गैस भंडार वाले देशों में से एक है. ऐसे में मौजूदा हालात से मॉस्को को फायदा मिल सकता है. उन्होंने रूस की ऊर्जा कंपनियों से कहा कि वे बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहें.

Technology : क्या इंटरनेट पर आपकी पहचान सच में गुप्त है? रिसर्च में हुआ खुलासा, जानें कैसे AI लगा सकता है आप के असली नाम का पता

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इंटरनेट पर कई लोग अपनी पहचान छिपाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि अब AI की मदद से गुमनाम यूजर्स की असली पहचान तक पहुंचना आसान हो सकता है. इंटरनेट पर कई लोग अपनी पहचान छिपाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसे गुमनाम यूजर्स की असली पहचान तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक AI सिस्टम अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद छोटी-छोटी जानकारी को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि किसी अनाम अकाउंट के पीछे असल में कौन व्यक्ति है.

इस अध्ययन में AI शोधकर्ता साइमन लेर्मन और डैनियल पालेका ने यह जांचने की कोशिश की कि क्या बड़े भाषा मॉडल (LLMs) किसी गुमनाम ऑनलाइन प्रोफाइल को वास्तविक पहचान से जोड़ सकते हैं. उन्होंने एक प्रयोग में कुछ अनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ी जानकारी AI सिस्टम को दी और उसे निर्देश दिया कि इंटरनेट पर उपलब्ध बाकी स्रोतों से संबंधित जानकारी ढूंढे. प्रयोग के दौरान एक काल्पनिक उदाहरण लिया गया जिसमें एक अनाम यूजर ने अपने पोस्ट में स्कूल की परेशानियों का जिक्र किया था और यह भी बताया था कि वह अपने कुत्ते बिस्किट को डोलोरेस पार्क में घुमाने ले जाता है.

AI ने इन संकेतों के आधार पर दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद पोस्ट और जानकारी खोजी और अंत में उस अनाम प्रोफाइल को एक वास्तविक व्यक्ति से काफी हद तक जोड़ने में सफल रहा. शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले इस तरह की पहचान उजागर करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती थी. लेकिन अब इंटरनेट कनेक्शन और सार्वजनिक AI टूल्स की मदद से ऐसे प्रयास करना काफी आसान और सस्ता हो गया है. इस वजह से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि इंटरनेट पर वास्तव में कौन-सी जानकारी निजी मानी जा सकती है और कौन-सी नहीं.

हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि AI कोई जादुई समाधान नहीं है. कई बार उपलब्ध जानकारी इतनी कम होती है कि सिस्टम किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता. कुछ मामलों में संभावित लोगों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि सही पहचान तय करना मुश्किल हो जाता है. फिर भी कई परिस्थितियों में यह तकनीक किसी व्यक्ति की गुमनामी को कमजोर कर सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कई तरीकों से किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, सरकारें गुमनाम कार्यकर्ताओं या विरोध करने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए AI का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके अलावा साइबर अपराधी भी इसका फायदा उठाकर बहुत ही व्यक्तिगत और भरोसेमंद दिखने वाले स्कैम तैयार कर सकते हैं. शोधकर्ताओं ने खासतौर पर स्पीयर-फिशिंग जैसे हमलों का जिक्र किया जिसमें हैकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति का रूप लेकर पीड़ित को खतरनाक लिंक पर क्लिक करने के लिए धोखा देते हैं.

इस खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को सबसे पहले अपने प्लेटफॉर्म पर डेटा एक्सेस को नियंत्रित करना चाहिए. उदाहरण के तौर पर, यूजर डेटा डाउनलोड करने की सीमा तय करना, ऑटोमेटेड स्क्रैपिंग बॉट्स की पहचान करना और बड़ी मात्रा में डेटा एक्सपोर्ट को रोकना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

वहीं आम यूजर्स को भी सावधानी बरतनी होगी. इंटरनेट पर पोस्ट करते समय व्यक्तिगत जानकारी, लोकेशन या ऐसे विवरण साझा करने से बचना चाहिए जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म की जानकारी को जोड़कर किसी की असली पहचान उजागर कर सकते हैं.

Rajasthan news : राजस्थान से गुजरात तक झुलसाने लगी गर्मी, इस बार मार्च में ही मंडराने लगा हीटवेव का खतरा

राजस्थान समेत गुजरात के कई इलाकों में अगले कई दिनों तक गर्म हवाओं के चलने की उम्मीद है. वहीं हिमाचल में मौसम विभाग की तरफ से हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है. देशभर में मौसम ने इस बार मार्च के महीने में ही अपनी तल्ख तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं. ऐसे राजस्थान से गुजरात तक पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना दुश्वार कर रखा है. इसी के साथ उत्तर और पश्चिम में जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे-वैसे लू चलने की स्थिति बनती हुई दिख रही है.

राजस्थान समेत गुजरात के कई इलाकों में अगले कई दिनों तक गर्म हवाओं के चलने की उम्मीद है. वहीं हिमाचल में मौसम विभाग की तरफ से हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है. इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार मार्च के महीने से देश के अलग-अलग राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल और दिल्ली-एनसीआर में गर्मी ने हैरान कर दिया है.

इस बार गर्मी अपने चरम पर है. वहीं दिल्ली- एनसीआर में धूप भी रिकॉर्ड तोड़ रही है. अलग-अलग राज्यों में इस बार अभी से जून-जुलाई की धूप निकलना शुरू हो गई है. दरअसल मार्च के महीने के तापमान में गिरावट रहती है, लेकिन इस बार गर्मी ने जल्दी अपनी दस्तक दे दी है. वहीं कई राज्यों में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा जाता हुआ दिख रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक कुछ राज्यों में लू चल सकती है. वहीं हिमाचल प्रदेश के इलाकों में भी लू चलने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के मुताबिक कुछ दिनों के भीतर पश्चिम राजस्थान, उत्तर गुजरात के साथ दक्षिण गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ, विदर्भ के अलावा मराठावाड़ा में गर्म हवाएं चलने की आशंका जताई गई है. इन इलाकों में तापमान में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. तापमान सामान्य से कई ज्यादा जा सकता है.

ज्यादा तापमान जाने की वजह से हीटवेव की स्थिति ज्यादा बन सकती है. भारत की पूर्वी हिस्सों में बादल बनने और आंधी तुफान के आने की उम्मीद है. वहीं बिहार-झारखंड, में तेज हवाओं के साथ चमक-गरज के अलावा हल्की बारिश होने का अनुमान है.

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