Sunday, May 3, 2026
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RAJASTHAN : शाही परंपरा… केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जैसे ही शमी के पौधे में लगाई तलवार, पत्तियां लूटने दौड़े लोग

दशहरे के पावन अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर शहर की मांढरे वाली माता स्थित दशहरा पार्क में शमी पूजन किया. इस दौरान सिंधिया परंपरा अनुसार राजसी पोशाक में नजर आए.

भले ही रियासतें समाप्त हो गई हों, लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रियासतकालीन परंपराओं का निर्वहन आज भी जारी है. इसका उदाहरण है सिंधिया राजवंश. दशहरे के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजसी पोशाक में शमी पूजन किया और अपने महल में राजशाही अंदाज में दरबार लगाया. इस मौके पर उन्होंने सभी को दशहरे की शुभकामनाएं दीं.

शमी पूजन का यह दृश्य ग्वालियर के मांढरे की माता स्थित दशहरा पार्क का है. यहां सिंधिया राजवंश की आठवीं पीढ़ी का नेतृत्व करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया परंपरागत वेशभूषा में शमी पूजन स्थल पहुंचे. लोगों से मिलने के बाद उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा की.

जैसे ही उन्होंने म्यान से तलवार निकालकर शमी वृक्ष पर प्रहार किया, हजारों की संख्या में मौजूद लोग पत्तियां लूटने के लिए टूट पड़े. इन पत्तियों को सोने के प्रतीक के रूप में महाराज को परंपरा के अनुसार भेंट करते हैं और अपने साथ भी ले जाते हैं.सिंधिया परिवार की दशहरे पर ‘शमी पूजन’ की परंपरा सदियों पुरानी है. उस समय महाराजा अपने लाव-लश्कर और सरदारों के साथ महल से निकलते थे. सवारी गोरखी पहुंचती थी, जहां देव दर्शन के बाद शस्त्रों की पूजा होती थी. यह सिलसिला दोपहर तक चलता था.

दरअसल, मान्यता है कि भगवान श्री राम लंका पर विजय हासिल कर लौटे तो उनकी सेना सोना भी साथ ले आई. उस सोने का अयोध्यावासियों में बांट दिया गया. इसी परंपरा से प्रेरित होकर ग्वालियर के राजपरिवार में शमी को सोने का प्रतीक मानकर इसकी पत्तियां महाराज को भेंट की जाती हैं. यह परंपरा दशहरे पर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान का हिस्सा है.

महाराज बग्घी पर सवार होकर आते थे और लौटते समय हाथी के हौदे पर बैठकर जाते थे. शाम को शमी वृक्ष की पूजा के बाद वे गोरखी में देव दर्शन के लिए जाते थे. यह परंपरा आज भी निर्बाध जारी है.

NATIONAL : बच्चों पर अब और ज्यादा खतरा? 9.2% बढ़ा क्राइम, डरा देगी NCRB की ताजा रिपोर्ट

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2023 की रिपोर्ट में बच्चों पर अपराधों में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें किडनैपिंग और पोक्सो एक्ट से जुड़े मामले प्रमुख हैं. कुल अपराध दर में 7.2% की बढ़ोतरी हुई है, और कुल 62,41,569 संज्ञेय मामले दर्ज हुए हैं.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों पर अपराध बढ़ने का प्रतिशत बढ़ा है. पिछले वर्ष 2022 की NCRB की रिपोर्ट की तुलना में बच्चों पर बड़े अपराधों में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में बच्चों से जुड़े अपराध के 1.77 लाख मामले दर्ज हुए. उनमें से आधे से ज्यादा मामले किडनैपिंग के हैं जबकि पोक्सो एक्ट से जुड़े मामले 38.2% हैं.

देश में सभी तरीके के अपराध की बात करें तो क्राइम रेट 7.2% बड़ा है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अपराधों में तीव्र वृद्धि देखी गई है और 2023 में कुल 62,41,569 संज्ञेय मामले दर्ज किए गए हैं. इस आंकड़े में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत 37,63,102 मामले और विशेष एवं स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत 24,78,467 मामले शामिल हैं, जबकि 2022 में यह संख्या 58,24,946 थी. यह 2022 (58,24,946 मामले) की तुलना में दर्ज मामलों में 4,16,623 (7.2 प्रतिशत) की वृद्धि दर्शाता है.

एनसीआरबी की ‘भारत में अपराध – 2023’ रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध दर 2022 में 422.2 से बढ़कर 2023 में 448.3 हो गई. इसमें आगे बताया गया है कि आईपीसी के तहत पंजीकरण में 5.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एसएलएल (स्पेशल लोकल लॉ) मामलों में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. आईपीसी अपराध कुल मामलों का 60.3 प्रतिशत थे, जबकि एसएलएल 39.7 प्रतिशत थे.

सार्वजनिक मार्ग में बाधा डालने के मामलों (आईपीसी की धारा 283) में तीव्र वृद्धि देखी गई, जो 2022 में 93,548 मामलों से बढ़कर 2023 में 1,51,469 हो गए, जैसा कि आंकड़े में बताया गया है. साथ ही, ‘चोरी के दर्ज मामलों में भी वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष के 6,52,731 की तुलना में 2023 में 6,89,580 तक पहुंच गए.’

रिपोर्ट के अनुसार, एसएलएल के तहत सबसे ज्यादा वृद्धि मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघनों में हुई, जो 2022 में 94,450 मामलों से लगभग दोगुनी होकर 2023 में 1,91,828 हो गई, यानी 97,378 मामलों की वृद्धि. जांच के मोर्चे पर, पुलिस ने 2023 में 53,61,518 आईपीसी मामलों का निपटारा किया, जिनमें पिछले वर्षों के लंबित और फिर से खोले गए मामले भी शामिल हैं. इनमें से 37,85,839 मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें 27,53,235 मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किए गए, जो 72.7 प्रतिशत की आरोप-पत्र दर को दर्शाता है.

RAJASTHAN : कफ सिरप पीकर सोया और कभी नहीं उठा मासूम, फ्री दवा ने ली एक और बच्चे की जान

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राजस्थान में सरकारी अस्पताल की मुफ्त दवाई योजना के तहत मिलने वाली खांसी सिरप से बच्चों की हालत बिगड़ने और मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. सीकर और भरतपुर में पहले हुए मामलों के बाद अब भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में 2 साल के बच्चे की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल से दी गई खांसी सिरप पीने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और जयपुर के जेके लोन अस्पताल में उसकी मौत हो गई.

राजस्थान में सरकारी अस्पताल की फ्री दवा योजना के तहत मिलने वाली खांसी सिरप पर विवाद गहराता जा रहा है. सीकर और भरतपुर में पहले ही बच्चों की हालत बिगड़ने के मामले सामने आ चुके थे. अब भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र में एक और नया मामला सामने आया है, जहां खांसी सिरप पीने के बाद 2 साल के बच्चे की मौत हो गई.

यह मामला वैर तहसील के लुहासा गांव का है. मृतक बच्चे के पिता निहाल सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे हैं. बड़ा बेटा थान सिंह (5 साल) और छोटा बेटा तीर्थराज 2 साल का था. 23 सितंबर को दोनों बच्चों को खांसी-जुकाम की शिकायत के बाद वैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. वहां डॉ. बबलू मुद्गल ने दवाइयों के साथ खांसी की सिरप लिखी थी. परिजन बच्चों को घर लेकर आए और छोटे बेटे तीर्थराज को सिरप पिला दी. सिरप पीने के बाद बच्चा सो गया लेकिन 4 घंटे तक भी होश में नहीं आया.

स्थिति गंभीर होने पर बच्चे को वैर उपजिला अस्पताल ले जाया गया और फिर भरतपुर अस्पताल रेफर किया गया. हालत में सुधार न होने पर 24 सितंबर की शाम को उसे जयपुर के जेके लोन अस्पताल भेजा गया, जहां 27 सितंबर की सुबह डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया.वैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. बीपी शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बच्चे को एंटीबायोटिक टैबलेट और खांसी सिरप दी गई थी. मीडिया में आए समाचारों के बाद इस सिरप का वितरण रोक दिया गया है और मामले की जांच जारी है.

परिजनों का आरोप है कि सिरप पिलाने के बाद ही बच्चे की तबीयत बिगड़ी. उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में खांसी सिरप से बच्चों की तबीयत खराब होने और मौत की खबरें आईं तभी उन्हें समझ आया कि उनके बच्चे की हालत भी इसी वजह से बिगड़ी थी.

यह मामला राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग और सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. लगातार सामने आ रहे मामलों ने ग्रामीणों और मरीजों में भय पैदा कर दिया है. परिजन अब दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और इस सिरप की पूरी जांच की मांग कर रहे हैं.

BIHAR : पूर्णिया में वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आए कई लोग, तीन की मौके पर मौत

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पूर्णिया के कसबा में कुछ लोगों के ट्रेन की चपेट में आ जाने से बड़ा हादसा हुआ है. जोगबनी से पाटलिपुत्र जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस ने कुछ युवकों को टक्कर मार दी जिससे तीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ लोग घायल बताए जा रहे हैं. घायलों को जीएमसीएच अस्पताल भेजा गया है. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. हादसे के कारणों को लेकर अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

पूर्णिया के कसबा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ है जिसने पूरे इलाके को दहला दिया. जोगबनी से पाटलिपुत्र जा रही हाई-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई. हादसा कसबा रेलवे गुमटी के पास तड़के पांच बजे हुआ. सभी मृतक की उम्र 18 से 25 साल है.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन की रफ्तार काफी तेज थी और तभी कुछ युवक रेलवे गुमटी पार करने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान वो ट्रेन की चपेट में आ गए और हादसा हो गया. घटना इतनी भीषण थी कि तीनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य लोग घायल हो गए. घायलों को तत्काल जीएमसीएच अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंच गई. शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस ने कहा कि घटना के कारणों की जांच की जा रही है. फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि हादसा गुमटी कर्मचारी की लापरवाही से हुआ है या युवकों ने तेज रफ्तार ट्रेन की अनदेखी कर पटरियां पार करने की कोशिश की थी.

ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे गुमटी पर पर्याप्त सतर्कता और अलर्ट सिस्टम की कमी है. वहीं रेलवे पुलिस का कहना है कि वंदे भारत हाई-स्पीड ट्रेन है और लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए. इस हादसे के बाद इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गुमटी पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे टाले जा सकें. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.

ENTERTAINMENT : आदित्य चोपड़ा संग अपनी शादी की तस्वीरें कब दिखाएंगी रानी मुखर्जी? बोलीं- मैं हमेशा से…

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एक्टर रानी मुखर्जी और डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा ने सालों पहले शादी की थी. लेकिन आज तक अपनी शादी की तस्वीरें शेयर नहीं की है. अब एक्ट्रेस ने इसके पीछे का कारण बताया है. रानी ने कहा कि आदित्य एक प्राइवेट इंसान हैं और वे अपनी शादी को प्राइवेट रखना चाहते हैं.

एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा से साल 2014 में शादी की थी. दोनों ने हमेशा अपनी प्राइवेट जिंदगी को गोपनीय रखा है. कपल ने कभी भी अपनी शादी की तस्वीरें शेयर नहीं कीं. हाल ही में एक इंटरव्यू में रानी ने खुलासा किया कि शायद वे कभी ऐसा न करें. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे आदित्य ने उन्हें 2018 की फिल्म ‘हिचकी’ करने के लिए प्रोत्साहित किया था.

एक एजेंसी के साथ बातचीत के दौरान, रानी से मजाक में पूछा गया कि क्या वह आदित्य के साथ अपनी शादी की सिल्वर जुबली पर शादी की तस्वीरें पब्लिश करेंगी. इसपर रानी ने जवाब दिया, ‘शायद, यह एक बहुत अच्छा ख्याल है. मेरे पति बहुत प्राइवेट इंसान हैं और वे चाहते थे कि शादी बहुत प्राइवेट हो. जाहिर तौर पर, मुझे नहीं लगता कि वे कभी चाहेंगे कि शादी की तस्वीरें बाहर आएं.’

रानी मुखर्जी खुद अपनी निजी जिंदगी को सुर्खियों से दूर रखना पसंद करती हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा से प्राइवेट रही हूं, क्योंकि मेरा काम और निजी जिंदगी अलग-अलग हैं. अगर आपने मुझे इन सालों में देखा है, तो मैं केवल तभी सामने आती हूं जब इसके लिए कोई कारण हो. यह हमेशा, हर समय नहीं होता. मेरा मानना है कि कुछ चीजें आपको अपने पास रखनी चाहिए. आपको अपने परिवेश को थोड़ा सुरक्षित रखना चाहिए. सब कुछ सभी के लिए नहीं हो सकता, क्योंकि हम पहले से ही बहुत एक्सपोज्ड हैं, और वह एक्सपोज होना काफी है. कुछ चीजें निजी रखनी चाहिए, जैसे आप कहां जा रहे हैं, आप क्या कर रहे हैं, और आप अपने परिवार के साथ क्या कर रहे हैं.’

रानी ने आगे कहा, ‘मैं इन्हें नियम के रूप में नहीं देखती. मैं इसे जीवन जीने का तरीका मानती हूं. नियम अक्सर ऐसा कुछ माना जाता है जो दूसरों ने हमारे ऊपर थोपा हो और जिसका अंधा अनुसरण करना पड़े. यह सही नहीं है, क्योंकि आदित्य एक बहुत स्वतंत्र व्यक्ति हैं और उन्हें महिलाओं के लिए बहुत सम्मान है. यश अंकल और पैम आंटी ने उन्हें इसी तरह पाला है.’

‘मर्दानी’ एक्ट्रेस ने आगे बताया कि आदित्य चोपड़ा ने अपने माता-पिता, यश चोपड़ा और पामेला चोपड़ा से इस तरह के जीवन के सबक सीखे. उन्होंने कहा, ‘जब आप यश अंकल की फिल्में देखते हैं, तो उनमें महिला किरदारों को बहुत महत्व दिया गया है. पैम आंटी, यश अंकल के पेशेवर और निजी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण इंसान थीं. आदित्य इसका अनुसरण करते हैं, क्योंकि यही रोल मॉडल उन्होंने बड़े होते हुए देखे. जिस तरह से वह मेरे साथ व्यवहार करते हैं, उसमें बहुत सम्मान है. वह मुझसे यह नहीं कहते कि आपको कोई खास चीज करनी चाहिए, यह मेरा चुनाव है. वह मुझसे कहते हैं कि मुझे और बाहर जाना चाहिए.’

इसके अलावा रानी मुखर्जी ने यह भी खुलासा किया कि आदित्य ने उन्हें फिल्म ‘हिचकी’ साइन करने के लिए प्रोत्साहित किया था. तब वह अपनी बेटी आदिरा की परवरिश पर बहुत ध्यान दे रही थीं. उन्होंने कहा, ‘मुझे अपने पति से हिचकी करने के लिए बहुत प्रोत्साहन मिला, क्योंकि उन्होंने मुझे मां की भूमिका को बहुत गंभीरता से लेते हुए देखा. उन्होंने कहा, ‘आप रानी मुखर्जी हैं, आप अपने प्रशंसकों के साथ ऐसा नहीं कर सकतीं, आपको फिर से सुर्खियों में वापस जाना होगा.’ तभी मैंने वह फिल्म की. एक पति के रूप में, वह मेरे लिए वह हवा थे जिसने मुझे यह कहकर प्रेरित किया कि जाओ और अपनी जिंदगी जियो. आप सिर्फ घर पर रहकर एक ही भूमिका नहीं निभा सकतीं, आपके पास और भी भूमिकाएं हैं.’

NATIONAL : ऊपर देखा, हाथ पकड़ा और खींच लिया… तीन साल के बच्चे ने 5 सेकंड में बचाई अपनी मां की जिंदगी…

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कभी-कभी जिंदगी के सबसे बड़े हादसे सिर्फ चंद सेकंड दूर होते हैं और उसी पल एक छोटी-सी सूझबूझ किसी का पूरा जीवन बचा लेती है. बिहार के किशनगंज में ऐसा ही चमत्कार देखने को मिला, जब महज तीन साल के बच्चे ने अपनी मां का हाथ पकड़कर उन्हें खींच लिया. ठीक उसी क्षण ऊपर से 11 हजार वोल्ट का तार आ गिरा. यह पूरा मंजर सीसीटीवी में कैद हो गया है.

अक्सर कहते हैं, ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोई…’ लेकिन यह कहावत एक छोटे से बच्चे की सूझबूझ और बहादुरी से पूरी तरह सच साबित हुई. यह चमत्कार जैसी घटना बिहार के किशनगंज के सौदागर पट्टी इलाके की है. यहां एक कपड़े की दुकान के बाहर एक महिला अपने 3 साल के बच्चे के साथ खड़ी थी. बच्चे ने ऊपर की ओर देखा और तुरंत मां का हाथ पकड़कर वहां से दूसरी जगह खींच ले गया. इसके कुछ ही सेकंड में वहां हाईटेंशन लाइन का तार आ गिरा. इस घटना का वीडियो सामने आया है.

दरअसल, गुरुवार की दोपहर तीन साल का बच्चा अपनी मां के साथ दुकान के बाहर खड़ा था. उसकी नन्हीं आंखें दुकानों और राहगीरों की ओर देख रही थीं. वह खेल-खेल में अपने चारों ओर का मिजाज देख रहा था, लेकिन शायद उसने इसी दौरान किसी अनहोनी का संकेत महसूस कर लिया था.

बच्चे की नजर ऊपर लटक रहे बिजली के तारों पर पड़ी. कुछ स्पार्किंग सी हो रही थी. बच्चे तुरंत अपनी मां का हाथ मजबूती से पकड़ लिया और उन्हें अंदर की ओर खींच ले गया. यह सबकुछ महज कुछ सेकंड में हुआ. इसी के बाद 11 हजार वोल्ट का तार ठीक उसी जगह पर आ गिरा, जहां बच्चा अपनी मां के साथ खड़ा था. अगर बच्चा खुद और अपनी मां को वहां से इतनी जल्दी नहीं हटाया होता तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि क्या हो सकता था.

स्थानीय दुकानदार और आसपास के लोग इस घटना को देखते रह गए. कई लोगों ने सीसीटीवी फुटेज को देखकर हैरानी जताई कि कैसे एक इतना छोटा बच्चा इतनी तेजी और सूझबूझ से अपनी मां को खतरे से बचा सका. यह घटना केवल पांच सेकंड में हुई. वह पल महिला को जिंदगीभर याद रहेगा.

मासूम बच्चे की सूझबूझ ने न केवल उसकी मां की जान बचाई, बल्कि पूरे इलाके के लोगों को भी चौकन्ना कर दिया. लोगों का कहना है कि ऐसे छोटे-छोटे चमत्कार ही हमें याद दिलाते हैं कि जीवन में कभी-कभी सबसे अनपेक्षित हीरो सामने आ जाते हैं. लोगों ने कहा कि सचमुच, यह घटना उस कहावत की जिंदा मिसाल है – जाको राखे साइयां, मार सके न कोई. कभी-कभी जीवन में सबसे छोटी जानें ही सबसे बड़े संकट से हमें बचा सकती हैं.

MP : ‘हैलो पुलिस अंकल, मुझे मम्मी ने पीटा है, जल्दी आइये’, कुरकुरे की जिद में मासूम ने पुलिस को मिला दिया फोन

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मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक मासूम की अनोखी शिकायत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बच्चे ने मां और बहन द्वारा पिटाई करने की शिकायत डायल 112 पर कर दी. मामला खुटार चौकी के चितरवई कला गांव का है. मासूम की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चे की मां को समझाया. पुलिस ने आगे से बच्चे को न पीटने की हिदायत भी दी.

मध्य प्रदेश के सिंगरौली में इंसानियत और संवेदनशीलता से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है. खुटार चौकी के चितरवई कला गांव में एक मासूम बच्चे ने मां और बहन के हाथों पिटाई होने के बाद सीधे डायल 112 पर फोन कर शिकायत दर्ज कराई. बच्चे की इस मासूमियत भरी शिकायत का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

जानकारी के अनुसार, बच्चा अपनी मां और बहन से कुरकुरे के लिए 20 रुपये मांग रहा था. इसी बात पर उसकी मां और बहन ने उसे रस्सी से बांधकर पिटाई कर दी. बच्चे ने रोते हुए डायल 112 पर पुलिस को फोन लगा दिया. फोन पर उसने कहा कि उसे उसकी मां और बहन मारती हैं. यह सुनकर पुलिसकर्मियों ने बच्चे को बेहद प्यार से समझाया और जल्द ही मौके पर पहुंचने का भरोसा दिलाया.

डायल 112 में पदस्थ पुलिसकर्मी उमेश विश्वकर्मा तुरंत गांव पहुंचे. वहां उन्होंने बच्चे और उसकी मां को बुलाया और दोनों को समझाया. पुलिस ने मां को सख्त हिदायत दी कि बच्चे की आगे से पिटाई न करें और उसे प्यार से समझाएं. साथ ही बच्चे को कुरकुरे दिलाकर उसका मन भी बहलाया.

बच्चे की मासूम शिकायत और पुलिस के इस संवेदनशील रवैये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. लोग इस वीडियो को देखकर पुलिस की सराहना कर रहे हैं. अक्सर पुलिस को सख्ती और कठोरता के लिए जाना जाता है, लेकिन इस घटना ने पुलिस के मानवीय चेहरे को सामने ला दिया.इस घटना के बाद से गांव में भी चर्चा का माहौल है. यह घटना न केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है बल्कि लोगों को यह भी संदेश दे रही है कि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी पुलिस से मदद ली जा सकती है और पुलिस संवेदनशीलता के साथ आम लोगों के बीच खड़ी है.

NATIONAL : रास्ते में पड़ा पटाखा उठाकर मुंह में रखा… तुरंत हो गया ब्लास्ट, 7 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत

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बांदा के बड़ोखर खुर्द में देवी विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा हुआ. 7 साल के मासूम ने अधजला पटाखा मुंह में डाल लिया, जो फट गया और उसकी मौके पर मौत हो गई. उसका बड़ा भाई भी झुलसकर गंभीर रूप से घायल हो गया. परिजनों ने दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां छोटे को मृत घोषित किया गया. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम भेजकर जांच शुरू की है.

उत्तर प्रदेश के बांदा में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां पटाखा फटने से दो सगे भाई बुरी तरह झुलस गए. इनमें से एक की मौत हो गयी, वही दूसरे की हालत गंभीर है. परिजनों ने बताया कि दोनो भाई देवी विसर्जन में गए थे, जहां पटाखा पड़ा हुआ था. दोनों में से एक मासूम ने उसे मुंह में उठा लिया और खिलवाड़ करने लगा.

इसके बाद अचानक पटाखे में विस्फोट हो गया, जिससे मृतक के मुंह के चीथड़े उड़ गए. आनन फानन में परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. वहीं उसके बचाने की कोशिश में झुलसे दूसरे भाई को भर्ती करके उसका इलाज शुरू कर दिया गया है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

मामला शहर कोतवाली के बड़ोखर खुर्द का है. जहां 10 वर्ष और 7 वर्ष के दो सगे भाई घर से देवी का विसर्जन देखने गए थे. वे रास्ते में एक अधजला पटाखा देख खिलवाड़ करने लगे. छोटे ने पटाखे को मुंह मे डाल लिया, जिस पर अचानक पटाखे में विस्फोट हो गया और उसके मुंह के चिथड़े उड़ गए. बचाने गया बड़ा भाई भी झुलस गया. परिजनों ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने देखते ही छोटे भाई को मृत घोषित कर दिया.इसके बाद परिजनों में हाहाकार मच गया. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है.

SP पलाश बंसल के मीडिया सेल ने जानकारी देते हुए बताया है कि कोतवाली क्षेत्र में 10 वर्ष और 07 वर्ष उम्र के सगे भाई पटाखा जला रहे थे. मुंह में पटाखा डालकर जलाते समय पटाखा फटने से हादसा हुआ जिसमें 07 वर्षीय बालक की दुःखद मृत्यु हो गई. शव को पोस्टमॉर्टम हेतु भेजा गया है, अन्य विधिक जांच की जा रही है.

NATIONAL : क्या उद्धव ठाकरे से बनेगी बात? निकाय चुनाव से पहले बड़ा फैसले लेने वाले हैं राज ठाकरे, आज जरूरी बैठक

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे ने आज (3 अक्टूबर) एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. यह बैठक लगभग सुबह 11 बजे शिवतीर्थ में आयोजित की जाएगी और इसमें मुख्य रूप से मुंबई शहराध्यक्ष और उपाध्यक्ष शामिल होंगे. 

बताया जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर रणनीति तय करना है. महाराष्ट्र में निकाय चुनाव और बीएमसी के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, ऐसे में राज ठाकरे की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

MNS के साथ गठबंधन पर शिवसेना UBT का जवाब

बीते दिन, 2 अक्टूबर को दशहरा रैली के दौरान शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा कि लोगों के मन में यह सवाल है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ आएंगे या नहीं, लेकिन उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हम साथ हैं और साथ रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मराठी और हिंदुत्व के मुद्दों पर BJP को MNS के एजेंडे में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उद्धव ठाकरे ने 2014 में शुरू हुई “चाय पर चर्चा” का उदाहरण देते हुए भ्रष्टाचार पर चर्चा करने पर जोर दिया.

गठबंधन पर क्या फैसला लेंगे राज ठाकरे?

अब सबकी नजरें राज ठाकरे के निर्णय पर टिकी हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि बैठक में मुंबई महानगरपालिका चुनाव में गठबंधन या उम्मीदवारों के नाम तय हो सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि MNS की रणनीति से बीएमसी चुनाव की दिशा और परिणाम प्रभावित हो सकते हैं. यह बैठक यह भी साफ करेगी कि MNS आगामी चुनाव में किस राजनीतिक गठबंधन को प्राथमिकता देगी और कैसे अपनी स्थिति को मजबूत बनाएगी.

राज ठाकरे की बैठक के बाद मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है. अगर MNS किसी बड़े कदम का ऐलान करती है तो यह चुनावी समीकरण बदल सकता है. बीएमसी चुनाव के अलावा, यह बैठक MNS के राजनीतिक इरादों और रणनीति का स्पष्ट संकेत देगी और आगामी चुनाव में मनसे की स्थिति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.

NATIONAL : चुनौतियों के बीच 8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य, निर्मला ने बताई 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लिए स्ट्रैटजी

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केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के दौरान कहा कि आज हमारे सामने केवल वैश्विक अनिश्चितताओं को संभालने की चुनौती नहीं है, बल्कि व्यापार (Trade), वित्त (Finance) और ऊर्जा (Energy) से जुड़ी असंतुलन की गहराई से जड़ जमाई समस्याओं का सामना करना भी आवश्यक है. हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत आठ प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ हासिल करने के लक्ष्य पर अपना फोकस कर रखा है. वित्त मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था की नींव बदल रही है और यह केवल अस्थायी व्यवधान नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी भारत की क्षमता बाहरी झटकों को सहने और उनसे उबरने की मजबूत स्थिति में है.

वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण जी-20

निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस तरह के सम्मेलनों ने भारत की नीतिगत सोच और रणनीति को दिशा दी है, और इसका असर वैश्विक मंचों पर भी दिखा है. उन्होंने 2023 के जी-20 शिखर सम्मेलन को भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया.

केन्द्रीय वित्त मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की समृद्धि को हासिल करने के लिए दो-ट्रैक दृष्टिकोण रखा है. पहला, वर्ष 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य; और दूसरा, आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) के जरिए उस लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग.

वित्त मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया गहरे असंतुलनों से जूझ रही है- व्यापार असंतुलन ने कुछ देशों में उद्योगों को खोखला कर दिया है, वित्तीय असंतुलन ने असली अर्थव्यवस्था को निवेश से वंचित कर दिया है और ऊर्जा असंतुलन ने कुछ समाजों को महंगे आयात पर निर्भर बना दिया है. ये असंतुलन अब वैश्विक व्यवस्था की स्थायी वास्तविकता बन चुके हैं. ऐसे में चुनौती केवल अनिश्चितताओं को संभालने की नहीं, बल्कि इन असंतुलनों का डटकर सामना करने की है.

बढ़ाया गया पूंजीगत खर्च

उन्होंने कहा कि भारत में निजी क्षेत्र के निवेश के अवसर दिखने लगे हैं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में फिर से रुचि बढ़ रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले पांच वर्षों में सार्वजनिक व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और सरकार पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक गति बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाया. पूंजीगत व्यय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता सिर्फ बढ़ी ही नहीं है, बल्कि अब स्थिर भी हो गई है. सीतारमण ने कहा कि सरकार ने 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के लिए कुल पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 11.21 लाख करोड़ रुपये रखा है. चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में पूंजीगत व्यय सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है.

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