Thursday, September 17, 2026
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NATIONAL : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अब ‘रक्तदान’ का संकल्प, रक्षा मंत्री राजनाथ बोले- जवानों के लिए खून की कमी नहीं होने देंगे

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राजधानी दिल्ली में ‘सिंदूर आर्मी महा ब्लड डोनेशन यात्रा’ के दूसरे वर्ष के अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया और रक्तदान को सैनिकों के प्रति देश की जिम्मेदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने जहां भारत के पराक्रम को दिखाया, वहीं यह रक्तदान अभियान देश की करुणा और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ शौर्य, रक्तदान करुणा का प्रतीक
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर वीरता के एक आयाम का प्रतीक था, जबकि सिंदूर रक्तदान अभियान करुणा का दूसरा आयाम दिखाता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हैं, उसी तरह नागरिक भी रक्तदान के जरिए घायल जवानों की मदद कर सकते हैं।

सीमा पार दुश्मनों को दिया जवाब
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने सीमा पार जाकर उन लोगों को करारा जवाब दिया, जिन्होंने देश के बच्चों पर हाथ उठाने की हिम्मत की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने साहस और पराक्रम का परिचय दिया। अब देश के भीतर रक्तदान के जरिए सैनिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का समय है।

‘एक भी जवान को खून की कमी से जूझना न पड़े’
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की सेवा करते हुए घायल होने वाला कोई भी सैनिक खून की कमी के कारण परेशानी में न पड़े। उन्होंने रक्तदान को सैनिकों के प्रति सम्मान और सेवा का माध्यम बताया। उनका कहना था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के लिए नागरिकों का यह योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

NATIONAL : आज FCRA बिल पर बोल सकते हैं शाह; लोकसभा में 15 दिन से प्रश्नकाल पूरा नहीं, आगे क्या करेगी सरकार?

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सरकार आज संसद में विदेशी चंदे से जुड़ा विधेयक (FCRA बिल) पेश कर सकती है। हालांकि, हंगामे और शोर-शराबे के बीच चिंता की बात ये है कि बीते 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में लोकसभा का एक भी प्रश्नकाल गत 15 दिन से पूरा नहीं हुआ है। नजरें इस बात पर है कि गतिरोध दूर करने के लिए सरकार क्या करेगी?

एनजीओ के विदेशी चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाने, कानूनी खामियों को दूर करने के लिए लोकसभा में बृहस्पतिवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 पेश कर सकती है। इस बिल को मार्च में बजट सत्र के दौरान पेश किया गया था लेकिन लोकसभा से पास नहीं हो सका था। सूत्रों का कहना है कि जब यह बिल पेश किया जाएगा तब शाह संसद में बोलेंगे।

एफसीआरए खास क्यों है?
दरअसल, ये विधेयक इस साल 25 मार्च को भी लोकसभा में पेश किया गया था। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता लाना, कानूनी कमियों को दूर करना और विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों का प्रबंधन करना है।

राहुल गांधी ने किरेन रिजिजू के सामने क्या शर्तें रखीं?
इससे पहले संसद में जारी गतिरोध खत्म करने की कोशिशों के तहत संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बुधवार को मुलाकात की। उन्होंने मानसून सत्र के बाकी अवधि के दौरान सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए उनका सहयोग मांगा। लेकिन राहुल ने गतिरोध दूर करने के लिए सदन में गृह मंत्री अमित शाह के बयान और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा की शर्त रखी। उन्होंने साफ कहा कि माने बिना वह सरकार से कोई सहयोग नहीं करेंगे।

छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस के बलप्रयोग पर अमित शाह के बयान की मांग
सूत्रों ने बताया कि संसद परिसर में राहुल के कार्यालय में नेता प्रतिपक्ष और रिजिजू के बीच करीब 50 मिनट चली बैठक में गतिरोध खत्म करने पर बात हुई। इस दौरान प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। राहुल ने रिजिजू से कहा कि नीट पेपर लीक मामले में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हिंसा पर गृह मंत्री अमित शाह का बयान और अयोध्या में राम मंदिर में दान की गई राशि की कथित चोरी पर चर्चा सदन चलाने के लिए बेहद जरूरी शर्तें हैं। विपक्ष सदन की कार्यवाही से शाह की गैरमौजूदगी पर सवाल उठा रहा है। पिछले 10 दिनों में रिजिजू की गांधी के साथ यह दूसरी मुलाकात है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर क्या हैं विचार
मुलाकात के दौरान रिजिजू ने महिला आरक्षण और लोकसभा-विधानसभा की सीटों के परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन बिल पर नेता प्रतिपक्ष के विचार जानने का प्रयास किया। राहुल ने सहयोगी दलों से बातचीत के बाद कोई जानकारी देने की बात कही। सूत्रों ने बताया कि इस दौरान रिजिजू ने मानसून सत्र के विस्तार या कोई विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा।

संसद सत्र के विस्तार और विशेष सत्र पर क्या बोली सरकार?
राहुल संग मुलाकात के बाद रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गृह मंत्री शाह से अलग-अलग मुलाकात की और उन्हें राहुल के साथ हुई चर्चा की जानकारी दी। इसके बाद दिनभर चली सत्र विस्तार या विशेष सत्र की अटकलों को खारिज करते हुए देर शाम रिजिजू ने कहा कि संसद सत्र की तारीखें बढ़ाने या विशेष सत्र का कोई प्रस्ताव नहीं है।

सरकार की योजना पर सूत्रों के हवाले से क्या दावे?
इससे पहले सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक सरकार की योजना मौजूदा मानसून सत्र को 13 अगस्त को स्थगित न कर 17 से तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन बिल पेश करने और पारित कराने की है।हालांकि सरकार ने इस संदर्भ में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार का मकसद विधेयक को 17 अगस्त को लोकसभा में पेश करने का है। इसके बाद इसे 18 को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार पहले व्यापक आम सहमति बनाने की कोशिश करेगी। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल, एल मुरुगन इसी सप्ताह सपा समेत अन्य विपक्षी दलों से संपर्क साधेंगे।

1973 में संविधान संशोधन के जरिये लोकसभा व विधानसभाओं की सीटों की संख्या फ्रीज कर दी गई। 2002 में 84वां संशोधन विधेयक लाया गया तो उसमें सीट बढ़ाने पर चर्चा तो हुई लेकिन सहमति नहीं बन पाई और इसे 2026 तक के लिए टाल दिया गया। परिसीमन में सीटों की संख्या बढ़ाने पर लगे प्रतिबंध की सीमा इसी साल खत्म हो रही है। ऐसे में सरकार को इसी साल या तो सीटों की संख्या बढ़ाने पर प्रतिबंध जारी रखने के लिए नया कानून लागू करना होगा या प्रतिबंध को खत्म करने के लिए नया कानून लाना होगा। अगर सरकार प्रतिबंध जारी रखती है तो महिला आरक्षण लागू नहीं होगा। इसके कारण सरकार को सियासी घाटे का डर है।

NATIONAL : ‘हर घर तिरंगा’ अभियान: पीएम मोदी बोले- हमारा तिरंगा हमारा गौरव है, देश के लिए सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा

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‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज राष्ट्रप्रेम और जनभागीदारी का एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। इस साल 9 से 17 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संस्कृति मंत्रालय की एक पोस्ट को रिपोस्ट भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हमारा तिरंगा हमारा गौरव है और देश के लिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की निरंतर प्रेरणा है। आइए, हम ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लें और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं। खुशी है कि इस वर्ष के प्रयास ‘वंदे मातरम’ को समर्पित हैं, और वह भी ऐसे समय में जब हम इसकी 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।

वहीं, संस्कृति मंत्रालय ने अभियान के वेबसाइट ‘हर घर तिरंगा डॉट कॉम’ लॉन्च करते हुए कहा कि पिछले 150 वर्षों से ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष ने देश की आत्मा को झकझोरा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर, जब भारत ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत तिरंगा यात्राओं, रैलियों, संगीत कार्यक्रमों और सामूहिक गायन के लिए एकजुट हो रहा है, तो आइए वही भावना हर गली और हर घर तक पहुंचाएं।

भारतीय जनता पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश में 10 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा-तिरंगा यात्रा’ अभियान को बड़े जनसंपर्क अभियान के रूप में चलाने का फैसला किया है। पार्टी ने बूथ स्तर तक अभियान को पहुंचाने की रणनीति बनाते हुए कार्यकर्ताओं से प्रत्येक बूथ पर कम से कम 50 परिवारों को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य दिया है। इसके साथ ही प्रदेशभर में तिरंगा यात्राएं, शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों का सम्मान, स्वच्छता अभियान तथा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी प्रदेशवासियों से खास अपील की है। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, तिरंगा हमारे राष्ट्र की अस्मिता, एकता और गौरव का सर्वोच्च प्रतीक है। यह प्रत्येक भारतीय के ह्रदय में देशभक्ति, कर्तव्य और राष्ट्र प्रथम की भावना को और प्रबल करती है। आप सभी प्रदेशवासियों से आग्रह है कि 9 अगस्त से 17 अगस्त तक आयोजित होने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत अपने घर, प्रतिष्ठान और संस्थान पर पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रध्वज तिरंगा अवश्य फहराएं। साथ ही, अपनी एक सेल्फी लेकर ‘हर घर तिरंगा’ वेबसाइट पर अपलोड करें और इस जनभागीदारी अभियान से जुड़कर राष्ट्र के प्रति अपने सम्मान और गौरव को अभिव्यक्त करें।

SPORTS : कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन पर भारतीय खिलाड़ियों को PM मोदी का संदेश

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो चुका है, जहां भारत 39 मेडल जीतकर पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा. भारतीय एथलीटों ने 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीते. इस बार कॉमनवेल्थ खेलों में केवल 10 खेल खेले गए, फिर भी भारत की झोली में 39 मेडल आए. भारत के इस प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमकर तारीफ की है.

नीरज चोपड़ा से लेकर मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन तक, कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के कुल 38 एथलीटों ने पदक जीता है. गुलवीर सिंह अकेले भारतीय रहे, जिन्होंने 2 अलग-अलग मेडल जीते. गुलवीर ने पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर और 5 हजार मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल जीता.

सोशल मीडिया पर PM मोदी ने भारतीय एथलीटों पर गर्व जताते हुए कहा, “ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलीटों के प्रदर्शन पर गर्व है. मुझे खुशी है कि भारत ने 13 गोल्ड सहित 39 मेडल जीते. सभी पदक विजेताओं को बधाई.”

पीएम मोदी ने अपने संदेश में आगे लिखा, “कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान हमारे प्रतिभावान खिलाड़ियों ने अद्भुत कौशल, दृढ़ संकल्प और समर्पण दिखाया. उनकी मेहनत युवाओं को प्रेरित करती रहेगी. आने वाले इवेंट्स के लिए भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं. आशा है कि खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देकर देश का मान बढ़ाते रहेंगे.”

आपको याद दिला दें कि 2022 बर्मिंघम गेम्स में भारत के 210 एथलीटों ने भाग लिया था. उसके मुकाबले 2026 के खेलों में केवल 122 एथलीट ग्लासगो रवाना हुए थे. इसके बावजूद भारत ने पदक तालिका में अपना चौथा स्थान सुरक्षित रखा है. भारत ने 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीते.

NATIONAL : भारी बारिश का रेड अलर्ट, दिल्ली-NCR, यूपी और उत्तराखंड में अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम? जानिए ताजा अपडेट

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शनिवार को दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में जमकर बारिश हुई। सड़कों में घंटों तक पानी जमा रहा। रविवार और सोमवार को मौसम कैसा रहने वाला है? मौसम विभाग ने इसकी जानकारी दी है।

देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। सड़कों में पानी जमा हुआ है। पहाड़ों में लैंडस्लाइडिंग और बादल फटने का डर लगातार बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों (10-11 अगस्त 2025) के लिए दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड और हिमाचल के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली-एनसीआर में दो दिन बारिश का है अनुमान
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को जमकर बारिश हुई। सुबह से बारिश का दौर शुरू हो गया, जो शनिवार शाम तक चलता रहा। दिल्ली की सड़कों में पानी जमा हो गया। दिल्ली एनसीआर में आज भी बारिश होने की संभावना जताई गई है। आसमान में काले बादल छाए हुए हैं। रविवार और सोमवार यानी दो दिन बारिश होने का अनुमान है। इस बीच दिल्ली का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27.5 डिग्री सेल्सियस रहने का भी अनुमान है।

यूपी के इन जिलों में होगी बारिश
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने लखनऊ, बाराबंकी, गोरखपुर और बहराइच में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी यूपी में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। तापमान 30 डिग्री से नीचे रह सकता है।

बिहार में भी भारी बारिश का अलर्ट
बिहार में मानसून ने जोर पकड़ लिया है। बांका, भागलपुर, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। रविवार और सोमवार को बिहार के कई जिलों में बारिश होने का अनुमान है। इस बीच तापमान 30-34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, लेकिन उमस भरी गर्मी बनी रहेगी।

हरियाणा के मानेसर, झज्जर, रेवारी और नूंह जैसे क्षेत्रों में रविवार और सोमवार को हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना है। इस दौरान 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश का रेड अलर्ट
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश दोनों ही पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड के कई जिलों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। हिमाचल में भी भारी बारिश के कारण सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। अगले 48 घंटों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है।

WORLD : ‘शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की कोई भूमिका नहीं’, बांग्लादेश की आपत्ति के बाद नई दिल्ली का दो टूक जवाब

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और हसीना द्वारा बांग्लादेश सरकार को लेकर दिए गए बयानों का समर्थन नहीं किया जाता।

नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली का स्टैंड क्लियर कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और वहां दिए गए बयानों का सरकार समर्थन नहीं करती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ‘भारत किसी भी ऐसे मंच पर कही गई बातों का समर्थन नहीं करता, खासकर उन टिप्पणियों का जो बांग्लादेश की मौजूदा सरकार को लेकर की गई हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

नेतन्याहू के साथ बातचीत पर भी विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
वहीं, विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन पर बातचीत की भी जानकारी दी। जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इसके अलावा पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी बातचीत हुई।

बांग्लादेश ने जताई थी आपत्ति
दरअसल, शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई है।

WORLD : चीन को भारत का करारा जवाब, अरुणाचल प्रदेश के 27 ऐतिहासिक स्थानों को आधिकारिक नक्शे में किया शामिल

चीन द्वारा बार-बार नाम बदलने की चालबाज़ियों को जवाब देते हुए भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया है।

नई दिल्ली: चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बार-बार बदले जाने के बीच भारत ने शुक्रवार को राज्य के 27 स्थानों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र में शामिल किया। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर इन्हें औपचारिक रूप से चिह्नित करने का उद्देश्य, इनकी सटीक पहचान को सुगम बनाना और जन-सामान्य के बीच बेहतर जागरूकता पैदा करना है

अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को ‘‘निरर्थक और बेतुका’’ बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस ‘‘अटल’’ सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश ‘‘हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।

आधिकारिक नक्शे में लोंग जू भी शामिल

भारत के आधिकारिक मानचित्र में शामिल किए गए 27 स्थानों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित लोंग जू भी शामिल है। यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती टकराव वाले स्थानों में से एक था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था।

लोंग जू के पास बना ये गांव भी चिह्नित
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के पास स्थित माजा गांव को भी मानचित्र में चिह्नित किया गया है। इस सूची में बिसा गांव के अलावा क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला को भी शामिल किया गया है।

जहां से शुरू हुआ था 1962 का युद्ध वो इलाका भी शामिल
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई वाले दर्रों में से एक थाग ला को भी आधिकारिक मानचित्र में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के शुरुआती संघर्षों में से एक इसी क्षेत्र में हुआ था। जयरामपुर को भी इसमें शामिल किया गया है। यह चांगलांग जिले का एक महत्वपूर्ण रसद केंद्र है, जिसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमा सीमा क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रदेश के ये इलाके भी शामिल
इस सूची में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश स्थित शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन और छोटा कुंडुन भी शामिल हैं। इसके अलावा धन बाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर, तवांग रोड पर स्थित रामनगर जसवंतगढ़ (जहां भारतीय शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक है), सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांवों को भी शामिल किया गया है। इस सूची में 1962 के युद्ध के नायक त्रिलोक सिंह थापा की याद में बनाए गए शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक और बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग अभयारण्य के पास स्थित कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर भी शामिल हैं।

चीन के गलत दावों पर क्या है भारत का कहना
चीन की ओर से भारतीय क्षेत्रों को ‘‘काल्पनिक नाम’’ देने के प्रयासों को भारत लगातार खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि इस तरह ‘‘बेबुनियाद विमर्श’’ गढ़ने की कोशिशें ‘‘अटल सच्चाई’’ को नहीं बदल सकतीं और इससे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

चीन ने कई नकली लिस्ट की जारी
चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में जांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों के नामों वाली दूसरी सूची जारी की गई और 2023 में 11 अन्य स्थानों के नामों की एक और सूची जारी की गई। चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है।

BUSINESS : भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, रूस से कच्चा तेल खरीदना होगा मुश्किल

रॉयटर, वाशिंगटन। अमेरिका में सीनेट ने लंबे समय से लंबित रूस की तेल और गैस बिक्री पर लगने वाले प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक (बिल) को मंजूरी दे दी है।

इस विधेयक से संबंधित कानून लागू होने का सर्वाधिक असर भारत, चीन, जापान और यूरोप के कुछ देशों पर पड़ सकता है। इन देशों के माल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप 100 प्रतिशत तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकेंगे।इस विधेयक के प्रस्तावकों में रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज सांसद दिवंगत लिंडसे ग्राहम भी शामिल थे। इस विधेयक को सितंबर में प्रतिनिधि सभा में पेश किए जाने की संभावना है।

वहां से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा और उनके हस्ताक्षर के बाद ये प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। ग्राहम यूक्रेन के कट्टर समर्थक अमेरिकी नेता थे।इस विधेयक के जरिये रूस पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य साढ़े चार वर्ष से यूक्रेन से युद्ध लड़ रहे रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है जिससे वह समझौते के लिए बाध्य हो।

रूस पर प्रतिबंध के समर्थन में 86 वोट और विरोध में 11 वोट पड़े। इस प्रतिबंध के लागू होने का व्यापक असर रूस के साथ ही भारत और चीन पर पड़ेगा।भारत यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात कर रहा है। यह आयात प्रतिदिन 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल का है। ईरान युद्ध छिड़ने के बाद भारत रूस से गैस का भी आयात कर रहा है।

NATIONAL : थरूर बोले- RSS की मूल विचारधारा अब भी वही, लेकिन भागवत के बयानों में दिख रहा बदलाव

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा को लेकर कहा है कि संगठन का मूल उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है और इस विचार में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनके बोलने के तरीके और नई पीढ़ी को लेकर उनके नजरिए में बदलाव दिखाई देता है।

थरूर ने यह बात मुंबई में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के कार्यक्रम में कही। इसी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं से बातचीत की थी। भागवत ने युवाओं को लेकर कहा था कि नई पीढ़ी को केवल निर्देश देने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए और उनसे संवाद किया जाना जरूरी है।

थरूर ने कहा कि वह करीब एक दशक से संघ प्रमुख के बयानों पर नजर रखते आए हैं। उनके मुताबिक, भागवत के हालिया वक्तव्यों में संवाद और नई पीढ़ी को समझने पर जिस तरह जोर दिया जा रहा है, वह पहले के मुकाबले अलग दिखाई देता है। हालांकि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि इसे RSS की मूल विचारधारा में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी संगठन की विचारधारा और उसके नेताओं के संवाद के तरीके में अंतर हो सकता है। उनके अनुसार, RSS का हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र से जुड़ा मूल नजरिया अभी भी मौजूद है, लेकिन भागवत जिस तरह युवाओं के सवालों को सुनने और उनसे बातचीत करने की बात कर रहे हैं, वह लोकतांत्रिक संवाद के लिहाज से एक अच्छा संकेत है।

Also Read: महंगी बिजली के खिलाफ कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन, 3 अगस्त को सीएम हाउस घेराव का ऐलान
थरूर ने अलग-अलग विचारधारा वाले लोगों के साथ बातचीत को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम में किसी ऐसे व्यक्ति के साथ मंच साझा करना, जिसकी विचारधारा अलग है, इसका मतलब यह नहीं कि दोनों के विचार एक हो गए। लोकतंत्र में असहमति के बावजूद बातचीत की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए। उन्होंने उन लोगों पर भी प्रतिक्रिया दी जो भागवत के साथ एक ही मंच पर जाने को लेकर उनकी आलोचना कर रहे हैं।

कांग्रेस सांसद ने बदलती राजनीति में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में Gen-Z देश का सबसे बड़ा वोटिंग समूह बनने जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाताओं के सवालों और उनकी अपेक्षाओं को समझना जरूरी होगा। उनका कहना था कि राजनीति पुराने तौर-तरीकों के सहारे लंबे समय तक नहीं चल सकती।

थरूर ने कहा कि दक्षिण एशिया की राजनीतिक पार्टियों को भी बदलते समय के साथ अपनी कार्यशैली में बदलाव करना होगा। युवा अब सवाल पूछते हैं, जानकारी हासिल करते हैं और राजनीतिक दलों से सीधे जवाब चाहते हैं। ऐसे में केवल भाषण देने या आदेश देने के बजाय संवाद की जरूरत है।

उन्होंने कांग्रेस के भीतर अपनी स्थिति को लेकर भी बात रखी। थरूर ने कहा कि वह ऐसी पार्टी का हिस्सा हैं जिसकी विचारधारा उन्हें अपने विचारों के सबसे करीब लगती है। उन्होंने कांग्रेस को लोकतांत्रिक ढांचे में असहमति की गुंजाइश रखने वाली पार्टी बताया। उनका कहना था कि राजनीतिक दल के भीतर अलग राय रखना लोकतंत्र का हिस्सा है।

युवा आंदोलनों और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी थरूर ने आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीतिक दल किसी मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन उन्हें जनता से वैसा समर्थन नहीं मिल पाता जैसा बाद में किसी आंदोलन को मिल जाता है। ऐसे मामलों में सिर्फ जनता को दोष देने के बजाय राजनीतिक दलों को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उनके संदेश और लोगों की वास्तविक चिंताओं के बीच दूरी कहां रह गई।

थरूर ने यह भी कहा कि कांग्रेस को लोगों की नब्ज बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है। युवाओं के बीच बेरोजगारी, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और अवसर जैसे मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। राजनीतिक दल अगर इन सवालों पर युवाओं से सीधे संवाद नहीं करेंगे तो उनके लिए नई पीढ़ी से जुड़ना मुश्किल हो सकता है।

इससे पहले मोहन भागवत ने युवाओं से संवाद के दौरान Gen-Z को लेकर कहा था कि नई पीढ़ी को एंटी-नेशनल समझना सही नहीं है। उन्होंने कहा था कि जब उनकी पीढ़ी Gen-Z की उम्र में थी, तब बड़े लोगों की बात को आम तौर पर मान लिया जाता था और सवाल कम पूछे जाते थे। आज की पीढ़ी सवाल करती है और अपनी बात खुलकर रखना चाहती है।

भागवत ने यह भी कहा था कि नई पीढ़ी से आदेश के रूप में बात करने के बजाय संवाद किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अगर युवाओं से बातचीत नहीं होगी तो उनके भीतर मौजूद सवाल और असंतोष अलग-अलग रूपों में सामने आ सकते हैं।

थरूर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाता लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन राजनीतिक संवाद ने युवाओं की भागीदारी का तरीका भी बदल दिया है। ऐसे माहौल में RSS और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक संगठनों के सामने चुनौती यही है कि वे नई पीढ़ी के सवालों को किस तरह समझते और उनका जवाब देते हैं।

थरूर ने भागवत के बयान को इसी बदलते राजनीतिक माहौल में एक संकेत के तौर पर देखा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि संवाद की भाषा में बदलाव को RSS की मूल विचारधारा में बदलाव मानना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि आने वाले समय में राजनीतिक संगठन युवाओं से कितनी गंभीरता से बातचीत करते हैं और उनके सवालों को अपनी राजनीति में कितनी जगह देते हैं।

WORLD : सरकार बोली- विदेशी फंडिंग से जुड़ा बिल आंतरिक मामला:दूसरे देश कमेंट न करें; अमेरिकी सांसद ने कहा था- ये बिल ईसाइयों पर सीधा हमला

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सरकार ने FCRA (विदेशी फंडिंग विनियमन) संशोधन विधेयक पर साफ कर दिया कि यह भारत का आतंरिक मामला है। किसी दूसरे देश को इस पर कमेंट करने का अधिकार नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों जिनमें अमेरिका भी शामिल है। वहां विदेशी फंड और विदेशी अंशदान को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं।

दरअसल भारत ने अमेरिकी सांसद रिले मूर की टिप्पणी का जवाब दिया है। मूर ने 4 अगस्त को X पर लिखा था कि FCRA बिल ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है।

FCRA संशोधन विधेयक इसी साल बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। मानसून सत्र में इस पर चर्चा होनी है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह चर्चा का जवाब दे सकते हैं।

4 अगस्त को अमेरिकी सांसद का पोस्ट, लिखा- बिल आया तो संबंध बिगड़ेंगे

अमेरिकी सांसद रिले एम मूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ईसाई धर्म भारत में तब से मौजूद है। जब प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ दशकों बाद संत थॉमस मलाबार तट पर पहुंचे थे।

लेकिन ईसाई धर्म के इस लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन) कानून में ऐसा संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की अनुमति मिल सकती है।

यह ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है। यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।

FCRA क्या है, कानून क्यों बना, 2026 में क्या बदलाव, 3 सवाल-जवाब…

सवाल-1: FCRA कानून में सरकार क्या बदलाव करना चाहती है और क्यों?

जवाब: 1976 में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, यानी FCRA बनाया। मकसद- विदेशी ताकतें NGOs, शिक्षण संस्थानों और ट्रस्टों को पैसा देकर भारत के अंदरूनी मामलों को प्रभावित न कर सकें।

2010 में मनमोहन सिंह सरकार और 2020 में मोदी सरकार ने इसे और सख्त किया। जैसे- NGOs अब सिर्फ 20% विदेशी पैसा प्रशासनिक खर्च में लगा सकते हैं, पहले 50% की लिमिट थी। यह पैसा सिर्फ दिल्ली की एक तय SBI ब्रांच के खाते में ही आ सकता है। सब-ग्रांट पर भी रोक लगा दी गई, यानी बड़ी एनजीओ छोटी एनजीओं को फंड नहीं दे सकतीं।

अब 2026 में सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए…

  1. संस्थाओं को अपना काम और इलाका साफ बताना होगा: विदेशी पैसा किस खास काम के लिए और किस राज्य या UT में इस्तेमाल होगा। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखा जाएगा। पहले सामाजिक, धार्मिक जैसी ब्रॉडर कैटेगरी लिख दी जाती थी। ये नियम जून 2026 में लागू हो चुका है।
  2. विदेशी चंदे से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगाः धार्मिक गतिविधियों की लिस्ट में कई काम जैसे- पूजा स्थल बनवाना, धार्मिक शिक्षा, सत्संग वगैरह करवाने की अनुमति है, लेकिन अब विदेशी पैसे से दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ये नियम भी जून 2026 में लागू हो चुका है।
  3. रजिस्ट्रेशन नहीं, तो प्रॉपर्टी अथॉरिटी मैनेज करेगीः अगर किसी संस्था के FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म हो जाए, रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाए या रद्द हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी प्रॉपर्टीज की सुरक्षा, मैनेजमेंट और रखरखाव सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी करेगी। यही वो मुख्य प्रावधान है, जिसे FCRA संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश हुआ था और अभी संसद में पास होना बाकी है।

सरकार ने संशोधन विधेयक पेश करते हुए तर्क दिया था कि ये बदलाव FCRA के ऑपरेशनल गैप भरने के लिए किए जा रहे हैं। अब तक कोई साफ कानून नहीं था कि जब किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द या खत्म हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी संपत्ति और बचा पैसा किसके पास जाएगा? डेजिग्नेटेड अथॉरिटी इसी खाली जगह को भरती है। सरकार ने बताया कि उसका मकसद पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही व राष्ट्रीय सुरक्षा है।

जवाब: संशोधन विधेयक को लेकर 3 चिंताएं हैं…

  1. सालों पुरानी जमीन खोने का डर

अगर NGO रजिस्ट्रेशन रिन्यू करवाने के लिए समय पर आवेदन नहीं भेजते हैं या गृह मंत्रालय से उनका आवेदन खारिज हो जाता है, तो संपत्ति सरकार की तरफ से नामित अधिकारी के पास चली जाएगी। NGO को डर है कि इससे सालों में तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर उनके हाथ से निकल जाएगा।

कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने गृह मंत्री अमित शाह को विधेयक से जुड़ी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि NGO के कामकाज से जुड़े फॉर्म भरने में कुछ छोटी-मोटी गलतियां हो जाती है। ऐसी गलतियों पर लाइसेंस रद्द करने या संपत्ति जब्त करने जैसा सख्त एक्शन न लिया जाए। सिर्फ देश-विरोधी गतिविधियों पर ऐसा एक्शन हो।

यह भी आशंका जताई जा रही है कि जिनका लाइसेंस बरसों पहले ही खत्म हो चुका, उन पर भी नियम लागू होगा। हालांकि गृह मंत्री शाह ने साफ कहा कि ये संशोधन रेट्रोस्पेक्टिव नहीं होंगे, यानी पुराने मामलों पर लागू नहीं होंगे।

गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के सदस्यों से मिलकर आश्वासन दिया था कि FCRA संशोधन विधेयक ईसाइयों के खिलाफ नहीं है।
गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के सदस्यों से मिलकर आश्वासन दिया था कि FCRA संशोधन विधेयक ईसाइयों के खिलाफ नहीं है।
सवाल-3: क्या सरकार इसे पारित करा पाएगी?

जवाब: FCRA संशोधन बिल एक सामान्य विधेयक है। इसे पास कराने के लिए सदन में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों का सिर्फ साधारण बहुमत, यानी 50%+1 की जरूरत है।

लोकसभा में 543 सदस्य हैं। 3 सीटें खाली हैं। अगर सभी सदस्य मौजूद रहते हैं, तो बहुमत के लिए चाहिए 271 वोट। NDA के पास अभी 318 सीटें हैं।

राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 123 वोट चाहिए। NDA के पास 152 है। यानी दोनों सदनों में बिल पारित कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल है।

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