Monday, November 2, 2026
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NATIONAL : भ्रष्टाचार के ‘कुबेर’ पर कस गया शिकंजा, भुसावर JEN गोविन्द प्रसाद के ठिकाने से जमीनों का अंबार, नोटों की गड्डियां और चांदी की सिल्लियां जब्त

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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई में पंचायत समिति भुसावर का सहायक अभियंता रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया, लेकिन जब उसके घर की तलाशी ली गई तो मामला कहीं ज्यादा बड़ा सामने आया। एसीबी को आरोपी के रिहायशी मकान से 43 लाख 38 हजार 500 रुपए नकद और करीब 20 किलो चांदी की सिल्लियां मिलीं। इसके साथ ही कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर भरतपुर एसीबी चौकी की टीम ने 14 सितम्बर को पंचायत समिति भुसावर के तत्कालीन/हाल सहायक अभियंता गोविन्द प्रसाद को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। ट्रैप कार्रवाई के बाद एसीबी ने आरोपी के रिहायशी मकान की नियमानुसार खानातलाशी ली।

खानातलाशी एसीबी रेंज भरतपुर के उप महानिरीक्षक पुलिस ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सिंह के नेतृत्व में की गई। तलाशी के दौरान घर से बड़ी मात्रा में नकदी और चांदी मिलने पर एसीबी भी हरकत में आ गई।

घर में नकदी का ‘खजाना’, चांदी की सिल्लियां

तलाशी में 43,38,500 रुपए नकद बरामद हुए। इसके अलावा करीब 20 किलोग्राम चांदी की सिल्लियां भी मिलीं। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती धातु मिलने के बाद एसीबी अब इनके स्रोत और स्वामित्व की जांच में जुट गई है।

हिंडौन में दो दुकानें, मानसरोवर में मकान के दस्तावेज

तलाशी के दौरान एसीबी को कस्बा हिंडौन में स्थित दो दुकानों, जयपुर के मानसरोवर में हाउसिंग बोर्ड के एक मकान तथा अन्य भू-संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। अब जांच एजेंसी इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और आरोपी की आय के ज्ञात स्रोतों से इनके संबंध की पड़ताल कर रही है।

रिश्वत के ट्रैप से खुला संपत्ति का राज

एसीबी के अनुसार बरामद नकदी, चांदी और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों के स्रोत, स्वामित्व तथा आय के ज्ञात स्रोतों से संबंध की जांच की जा रही है। खानातलाशी रिपोर्ट और बरामद दस्तावेजों के आधार पर प्रकरण में आगे अनुसंधान किया जाएगा। एसीबी ने स्पष्ट किया है कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अग्रिम अनुसंधान और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

NATIONAL : मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या; फार्महाउस भी जलाए

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मणिपुर में एक बार फिर हिंसा की खबर सामने आई है। यहां उग्रवादियों द्वारा दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं फार्महाउस में भी आग लगा दी गई।

मणिपुर के तामेंगलांग जिले में मंगलवार को हिंसा की एक और घटना सामने आई। संदिग्ध उग्रवादियों ने जंगल से लकड़ी लेने गईं दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद कुछ कच्चे फार्महाउसों में आग लगा दी गई। दोनों मृतक महिलाएं कुकी समुदाय से थीं।

अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना लेइसांगफाई गांव के बाहरी इलाके में एक सुनसान खेत के पास हुई। 60 वर्षीय चोंगा सिटल्हू और 30 वर्षीय किम्बोई सिंगसोन लकड़ी लेने गई थीं। इसी दौरान हथियारबंद हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। दोनों के शव खेत में बरामद किए गए हैं,जिन पर गोली लगने के निशान थे। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि हमले के बाद कई ग्रामीणों का पता नहीं चल रहा है। हमलावरों ने इलाके में बने कुछ कच्चे फार्महाउसों को भी आग के हवाले कर दिया।

दो दिन पहले भी हुई थी चार लोगों की हत्या
ये घटना तब सामने आई है जब दो दिन पहले ही तामेंगलांग और नोनी जिलों में 13 सितंबर को भी हिंसा हुई थी। तामेंगलांग के टोलेन कुकी गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने एक महिला और उसके पति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमले में उनका नवजात बेटा भी घायल हुआ था। इसी दिन नोनी जिले के लॉन्गपी गांव में एक महिला और एक पुरुष की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

कुकी संगठन ने सरकार पर उठाए सवाल
चुराचांदपुर स्थित प्रमुख कुकी संगठन कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने ताजा हत्याओं की निंदा की है। संगठन ने कहा कि मंगलवार को मारी गई दोनों महिलाओं के शव तब तक परिजन स्वीकार नहीं करेंगे,जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुकी-जो समुदाय के नागरिकों पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे।

2023 से जारी है जातीय संघर्ष
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में शुरू हुआ जातीय संघर्ष अब तक कम से कम 306 लोगों की जान ले चुका है। करीब 49 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

NATIONAL : दारा सिंह की सजा में छूट पर ओडिशा करे फैसला, ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के दोषी रविंद्र पाल उर्फ दारा सिंह ने जुलाई 2024 सुप्रीम कोर्ट में माफी याचिका डाली थी। याचिका में था कि वह जेल में 25 साल से ज्यादा वक्त गुजार चुका है और उसे अपने किए पर पछतावा है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या मामले में उम्रकैद काट रहे रविंद्र पाल उर्फ दारा सिंह की सजा में छूट की याचिका पर फैसला लेने में देरी को लेकर मंगलवार को ओडिशा सरकार को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को इस तरह लंबित नहीं रख सकती और उसे याचिका पर निर्णय लेकर अदालत को इसकी जानकारी देनी होगी।

पीठ ने इस पर नाराजगी जताई कि राज्य सरकार यह तक बताने की स्थिति में नहीं है कि दारा सिंह की रेमिशन याचिका पर कोई फैसला लिया गया है या नहीं। अदालत ने कहा कि आप इसे खारिज करना चाहते हैं तो कर दीजिए। हां या ना, फैसला लीजिए। हम उस पर विचार करेंगे। दो साल से आप मामले में देरी कर रहे हैं। आप इसे इस तरह लंबित नहीं रख सकते।


राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मामले में स्थगन की मांग वाला पत्र भेजा गया है, क्योंकि एडवोकेट ऑन रेकॉर्ड अस्वस्थ हैं। इस पर अदालत ने 19 अगस्त को पारित अपने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड को दारा सिंह की याचिका पर फैसला लेने और अदालत को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया था।

अधिकारी को करेंगे तलब
राज्य सरकार के वकील ने मामले को 17 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि हम अगली तारीख पर इसे स्थगित नहीं करने वाले हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि राज्य सरकार फैसला लेकर उसे सूचित करे, अन्यथा संबंधित अधिकारी को अदालत में तलब किया जाएगा।

ईसाई क्या सोचेंगे?
सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के दोषी रविंद्र पाल उर्फ दारा सिंह ने जुलाई 2024 सुप्रीम कोर्ट में माफी याचिका डाली थी। याचिका में था कि वह जेल में 25 साल से ज्यादा वक्त गुजार चुका है और उसे अपने किए पर पछतावा है। इस पर पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को निर्णय लेने को कहा, लेकिन अभी तक राज्य सरकार कुछ पेपरवर्क बाकी होने की बात कहकर इसे टालती आई है। असल में, दारा सिंह को रिहा करने का देश के 3 करोड़ ईसाइयों के बीच गलत संदेश जा सकता है।

NATIONAL : दिल्ली के 99% पीजी आवासों के पास फायर एनओसी नहीं, क़रीब एक-तिहाई के नक्शे भी मंज़ूर नहीं

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दिल्ली में पीजी आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर एमसीडी ने के 2,453 पीजी के सर्वेक्षण में सामने आया है कि इनमें से सिर्फ 1.2% के पास फायर एनओसी थी, और 30% से भी कम के भवन नक्शे मंज़ूर हैं. एमसीडी के दक्षिण ज़ोन, जहां डीयू का साउथ कैंपस, आईआईटी और जेएनयू जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, वहां 390 पीजी आवास में से किसी के पास भी ज़रूरी सर्टिफिकेट या नियमानुसार दस्तावेज़ नहीं पाए गए.

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंज़िला छात्रावास की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के एक सप्ताह बाद दिल्ली में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है.इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के राजधानी के 2,453 पीजी आवासों के सर्वेक्षण में सामने आया है कि इनमें से सिर्फ 31 यानी 1.2% के पास दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है.

सर्वेक्षण में शामिल 2,453 इमारतों में से सिर्फ 726 यानी 30% से भी कम के भवन नक्शे मंज़ूर पाए गए. वहीं, महज़ आठ इमारतों के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र है.

यह सर्वेक्षण एमसीडी के सभी 12 ज़ोन में किया गया. सत्य निकेतन की इमारत गिरने के एक दिन बाद, 7 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी के बाद एमसीडी ने अवैध निर्माण के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करते हुए यह सर्वे कराया था.

सर्वेक्षण में भवनों की संरचनात्मक स्थिरता, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसीसी), भवन नक्शे की मंज़ूरी और मास्टर प्लान फॉर दिल्ली (एमपीडी) के तहत पीजी चलाने की अनुमति समेत कई नियामकीय पहलुओं की जांच की गई.

ज़ोन के हिसाब से स्थिति

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस वाले सिविल लाइंस ज़ोन में 12 एमसीडी ज़ोन में सबसे अधिक 608 पीजी आवास मिले. इनमें से 364 के भवन नक्शे ही मंज़ूर हैं. सिर्फ 28 के पास फायर एनओसी और 27 के पास नियमितीकरण की मंज़ूरी है. किसी भी पीजी के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र नहीं मिला है.

इसके अलावा केशवपुरम ज़ोन में 410 पीजी आवास दर्ज किए गए, जो सभी ज़ोन में दूसरे सबसे अधिक हैं. इनमें सिर्फ 54 के भवन नक्शे मंज़ूर हैं. दो के पास फायर एनओसी और दो के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र हैं. किसी भी पीजी के पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं है.

दक्षिण ज़ोन में दिल्ली विश्वविद्यालय का साउथ कैंपस, आईआईटी दिल्ली और जेएनयू जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं. यहां सर्वे में 390 पीजी आवास मिले. इनमें से किसी के पास भी डीएफएस की मंज़ूरी, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र, मंज़ूर भवन नक्शा या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं है. इनमें से किसी भी संपत्ति में मास्टर प्लान के तहत पीजी गतिविधि की अनुमति दर्ज नहीं है.

सुरक्षा मानकों पर सवाल

हाईकोर्ट द्वारा तय सर्वेक्षण की समयसीमा रविवार को खत्म हो गई. हालांकि, एमसीडी ने 10 सितंबर तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा था. अधिकारियों के मुताबिक, इसे कम से कम एक दिन और जारी रखा जाएगा.

नियमों के मुताबिक, पीजी चलाने वाली इमारतों के लिए नगर निकाय से लेआउट प्लान मंज़ूर कराना जरूरी है. एमसीडी की वेबसाइट के अनुसार, यह प्लान मास्टरप्लान फॉर दिल्ली और भवन उपनियमों के अनुरूप होना चाहिए.

इसी तरह, फायर एनओसी यह सुनिश्चित करती है कि इमारत अपने इस्तेमाल के मुताबिक अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करती है. दिल्ली अग्निशमन सेवा आवश्यक सुरक्षा उपायों की जांच के बाद फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करती है. इसमें आपात स्थिति में बाहर निकलने और प्रवेश के रास्तों को बाधामुक्त रखना, लोगों और कर्मचारियों को आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने की जानकारी होना और अग्निशमन उपकरणों को काम करने की स्थिति में रखना शामिल है.

मालूम हो कि सत्य निकेतन में गिरी इमारत में कथित तौर पर बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक रास्ता था.

संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र से यह सुनिश्चित किया जाता है कि इमारत अपने निर्माण और इस्तेमाल के दौरान पड़ने वाले भार और दबाव को सुरक्षित रूप से सहन कर सकती है.

वहीं, इमारत बनने के बाद ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट अगला महत्वपूर्ण चरण है. इसके लिए एमसीडी वास्तविक निर्माण को दर्शाने वाले पूर्णता नक्शे, प्लॉट का आकार और क्षेत्रफल, सेटबैक, पूरी हो चुकी इमारत की तस्वीरें और अन्य जरूरी दस्तावेज़ मांगता है.

एमसीडी के अनुसार, नियमितीकरण वह प्रक्रिया है जिसके तहत कुछ मौजूदा अनधिकृत निर्माण या विकास को संबंधित नियमों और नियमितीकरण नीति के तहत वैध किया जाता है. इसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान भी करना होता है.

गौरतलब है कि सर्वेक्षण के शुरुआती आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब राजधानी में पीजी और छात्रावासों में रहने वाले बड़ी संख्या में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी की कार्रवाई ने यह भी सामने ला दिया है कि राजधानी में बड़ी संख्या में पीजी आवास बुनियादी नियामकीय मंज़ूरियों के बिना चल रहे हैं.

WORLD : होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराए दो तेल टैंकर, परखच्चे उड़े, ईरान की IRGC ने क्या बताया?

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होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग से टकराने से दो तेल टैंकरों में भयावह विस्फोट हुआ है। ईरान की आईआरजीसी ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। आईआरजीसी ने कहा है कि अमेरिकी सेना जानबूझकर तेल टैंकरों को बारूदी सुरंग वाले रास्तों पर भेज रही है। इस घटना से भारत की टेंशन बढ़ने की आशंका है।

तेहरान: ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने बताया है कि शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के गुजरने वाले दो तेल टैंकर बारूदी सुरंग से टकरा गए। इससे दोनों जहाजों में भयानक विस्फोट हुआ और अफरा-तफरी मच गई। इन जहाजों के पीछे मौजूद टैंकर अपनी-अपनी जगहों पर ठहर गए और कुछ वापस लौट गए हैं। यह घटना तब हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। अमेरिका लगातार ईरान पर हमले कर रहा है। ईरान ने भी इसके जवाब में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हवाई हमले किए हैं। होर्मुज के बंद होने से ऊर्जा आयात के लिए अत्याधिक निर्भर भारत की टेंशन बढ़ सकती है।

IRGC ने होर्मुज में बारूदी सुरंग फटने पर क्या कहा?

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुज़रने की कोशिश के दौरान दो तेल टैंकरों में विस्फोट हुआ और उनमें आग लग गई। IRGC ने इस घटना के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उसने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इन जहाजों को धोखे से खतरनाक रास्ते पर भेज दिया था। दुनिया अब ईरान के खिलाफ अमेरिकी आक्रामकता के नतीजे साफ तौर पर देख रही है।

IRGC ने होर्मुज को बताया पूरी तरह बंद

IRGC की नौसेना ने फिर कहा कि अमेरिकी आक्रामकता के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य “पूरी तरह से बंद” है और जहाजों को चेतावनी दी कि वे बारूदी सुरंगों वाले रास्तों में न जाएं।
बयान में कहा गया, “जब तक अपराधी अमेरिका की आक्रामकता खत्म नहीं होती, तब तक इस क्षेत्र से रासायनिक उर्वरक या तेल और गैस की एक बूंद भी निर्यात करने की कोई संभावना नहीं है।”

भारत की बढ़ेगी टेंशन

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर लड़ाई छिड़ने से भारत की परेशानी बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इनमें से आधे से अधिक ऊर्जा आयात होर्मुज के रास्ते होता है। 28 फरवरी के बाद से होर्मुज के बंद होने से भारत ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। कई इलाकों में रसोई गैस की किल्लत भी महसूस की जा रही है। कुछ दिनों पहले अमेरिका-ईरान समझौते के तहत होर्मुज के खुलने से राहत महसूस की जा रही थी, लेकिन इसके फिर से बंद होने से परेशानी बढ़ सकती है।

NATIONAL : बच्चों के यौन शोषण के मामलों की डीटेल शेयर करेगा META, जांच एजेंसियों की मदद को तैयार

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आखिरकार बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट से जुड़े मामले में मेटा कंपनी जांच एजेंसियों के साथ डीटेल शेयर के लिए सहमत हो गई है। बता दें कि भारत सरकार ने पिछले कुछ समय से इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपना रखा था।

नई दिल्ली: मेटा बच्चों के यौन शोषण के मामलों की जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देने पर सहमत हो गया है। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार हानिकारक जानकारी को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ लगातार बातचीत कर रही है। भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी सिद्धांत है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

बच्चों के लिए सुरक्षित हों प्लेटफॉर्म
सरकार का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में पहला कदम है और अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सरकार ऐसे कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रही है। सरकार उन प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाते हैं।

सरकार की सख्ती से पहले ढुलमुल था रवैया
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार Meta के अलावा भी दूसरे सोशल मीडिा प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती कर रही है। मोदी सरकार का कहना है कि भारत में काम करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री यानी (Child Sexual Abuse Material) के खिलाफ कार्रवाई सख्त एक्शन लेना होगा। भारत सरकार ने इसके पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट हटाने को लेकर ढुलमुल रवैया अपनाने की बात कही थी।

सरकार और अधिकारियों ने दी थी चेतावनी
भारत सरकार के अधिकारियों के अलावा बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी सोशल मीडिया कंपनियों को चेताया था कि उन्हें बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। अगर कंपनियां इससे पीछे हटती हैं तो उन्हें भारत में मिली ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। सरकार की चेतावनी के बाद ही कंपनियों ने इस तरह के कंटेंट के खिलाफ सख्ती दिखानी शुरू की है।

NATIONAL : कर्नाटक में फ्रिज में ब्लास्ट के बाद घर में लगी भीषण आग, परिवार की चार महिलाओं की मौत, दो की हालत गंभीर

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Karnataka Refrigerator Blast: कर्नाटक के बेलगावी में मंगलवार तड़के एक घर में फ्रिज में धमाका होने के बाद भीषण आग लग गई, जिसमें एक ही परिवार की चार महिलाओं की झुलसने से मौत हो गई। हादसे में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें एक व्यक्ति करीब 80 प्रतिशत और उसका बेटा करीब 40 प्रतिशत झुलसा है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आग लगने की सही वजह का पता एफएसएल जांच के बाद ही चलेगा।

कर्नाटक के बेलगावी में मंगलवार तड़के एक घर में अचानक आग लगने से एक ही परिवार की चार महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घर में फ्रिज में धमाका होने के बाद आग भड़की और कुछ ही देर में पूरे मकान में फैल गई। हादसे में परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

4 महिलाओं की झुलसकर मौत
यह घटना बेलगावी के चावत गली इलाके में करीब रात 2:30 बजे हुई। पुलिस के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि घर में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। हादसे में गंगा डामोने (25), शारदा डामोने (45), प्रिया डामोने (28) और भारती डामोने (50) की मौके पर ही झुलसने से मौत हो गई।

शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की बात सामने आई
हादसे में 65 वर्षीय गजानन डामोने और उनके 21 वर्षीय बेटे रोशन डामोने को भी गंभीर चोटें आई हैं। दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस के मुताबिक गजानन करीब 80 प्रतिशत और रोशन लगभग 40 प्रतिशत तक झुलसे हैं। यह आग मार्केट पुलिस थाना क्षेत्र में लगी। बेलगावी के पुलिस आयुक्त प्रकाश निकम ने बताया कि शुरुआती जानकारी के आधार पर आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है। हादसे में बचे रोशन ने भी पुलिस को बताया कि उसने शॉर्ट सर्किट जैसी आवाज सुनी थी।

हालांकि, पुलिस अभी किसी एक वजह को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं मान रही है। फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम और हुबली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (HESCOM) के अधिकारी मौके पर पहुंचकर घटना की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि फ्रिज में वास्तव में किस वजह से विस्फोट हुआ और आग कैसे लगी। चारों मृतकों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

NATIONAL : नंदीग्राम में भाजपा का बड़ा दांव, शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत पीए की मां को उतारा मैदान में, रेजीनगर से शाखारव सरकार उम्मीदवार

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नंदीग्राम से भाजपा ने सीएम शुभेंदु के दिवंगत पीए की मां को बनाया उम्मीदवार।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले दो विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर भाजपा ने अपने प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया है।

पार्टी ने पूर्व मेदिनीपुर जिले की हाईप्रोफाइल नंदीग्राम सीट से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की मां हासीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से शाखारव सरकार को मैदान में उतारा गया है।

उपचुनाव के लिए मतदान छह अक्टूबर को होगा
भाजपा प्रत्याशी हासीरानी रथ मंगलवार को समर्थकों के साथ विशाल जुलूस निकालकर नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। नामांकन के जरिए भाजपा नंदीग्राम में बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है। दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान छह अक्टूबर को होगा, जबकि नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है।

चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हुई थी हत्या
चंद्रनाथ रथ की मई में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी के नौ मई को शपथ लेने से दो दिन पहले उनके निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई थी।

1998 से सक्रिय राजनीति में हैं हासीरानी रथ
भाजपा की नंदीग्राम प्रत्याशी हासीरानी रथ लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। वह वर्ष 1998 से सक्रिय राजनीति में हैं। वह दो बार पंचायत सदस्य और तीन बार पंचायत समिति की सदस्य रह चुकी हैं। नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के कारण हो रहा है।

कुछ माह पहले हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि वह दोनों सीटों से एक साथ विधायक नहीं रह सकते थे।

प्रत्याशियों के एलान के बाद मुकाबला हुआ हाईवोल्टेज
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के अलावा वाममोर्चा और कांग्रेस भी अपने प्रत्याशियों की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। अब भाजपा ने हासीरानी रथ को मैदान में उतारकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में नामांकन और प्रस्तावित शक्ति प्रदर्शन के कारण नंदीग्राम का उपचुनाव हाईवोल्टेज मुकाबले में बदलता नजर आ रहा है।

NATIONAL : कांग्रेस का दावा- नंदीग्राम सीट छोड़ने के लिए तैयार थीं ममता बनर्जी, तृणमूल ने किया इनकार

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पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (कालीघाट गुट) नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार थीं. पार्टी ने मंगलवार को कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी ने कांग्रेस हाईकमान से संपर्क किया था. उसने कहा था कि वह 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार है. हालांकि, तृणमूल ने इस दावे को खारिज कर दिया है. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में गठबंधन के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है.

‘बंगाल में टीएमसी अकेले कर सकती है भाजपा का मुकाबला’
इस दावे को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. टीएमसी वर्षों से कहती रही है कि वह पश्चिम बंगाल में अकेले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने में सक्षम है. टीएमसी राज्य में चुनावी तालमेल के लिए कांग्रेस की ओर से किये गये प्रयासों को हर बार खारिज करती रही है.

15 दिन पहले दिल्ली में कांग्रेस से संपर्क का दावा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे ने करीब 15 दिन पहले नयी दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से संपर्क किया था. उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि नंदीग्राम उपचुनाव कांग्रेस लड़े, जबकि रेजीनगर सीट पर तृणमूल चुनाव लड़े.

प्रस्ताव यह था कि तृणमूल कांग्रेस रेजीनगर से चुनाव लड़ेगी और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देगी. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर समय मांगा और बाद में प्रदेश के नेताओं से इस प्रस्ताव पर चर्चा की. प्रदेश नेतृत्व का मानना था कि गठबंधन के लिए यह सही समय नहीं है. उचित समय आने पर इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी नहीं. -प्रदीप भट्टाचार्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने भी कहा कि यह प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस की ओर से आया था. उन्होंने कहा- जब तृणमूल सत्ता में थी, तब उसने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया, जब भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना थी. अब जब वह अकेली और पराजित है, तो ऐसा लगता है कि उसे कांग्रेस के महत्व का एहसास हुआ है.

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने दावा किया कि नंदीग्राम अब भी तृणमूल के लिए कड़े मुकाबले वाली सीट है. उन्होंने सुझाव दिया कि सीट छोड़ने का प्रस्ताव देना खुद इस बात को दर्शाता है कि पार्टी इस चुनावी चुनौती को किस तरह देख रही है. कांग्रेस नेता ने कहा- नंदीग्राम एक कठिन सीट है. तृणमूल को पूरा भरोसा है कि वह यहां हार जायेगी. इसलिए वह यह सीट कांग्रेस को देने की पेशकश कर रही है.

कुणाल घोष ने प्रदीप के दावे को नकारा
तृणमूल कांग्रेस के इस कथित प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कांग्रेस के इस दावे को नकार दिया. तृणमूल के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने इस दावे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई कदम राज्य में केवल भाजपा के लिए फायदेमंद होगा.

बंगाल में बिखर गया विपक्षी समीकरण
कांग्रेस और तृणमूल के अलग-अलग दावों ने पश्चिम बंगाल में पहले से बिखरे विपक्षी समीकरणों को और उलझा दिया है. राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल, कांग्रेस और वाम दल विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक हैं, लेकिन राज्य के चुनावों में वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं.

‘टीएमसी को अब हुआ कांग्रेस के महत्व का अहसास’
प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल के संगठनात्मक संकट और विधानसभा चुनाव में मिली हार ने राजनीतिक समीकरण बदल दिया है. भाजपा के हाथों विधानसभा चुनाव में हार और अब तृणमूल के तीन हिस्सों में बंट जाने के बाद ऐसा लगता है कि उसे पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के महत्व काअएहसास हुआ है.

सबसे पहले 11 सितंबर को कांग्रेस ने उतारा उम्मीदवार
प्रमुख विपक्षी दलों में कांग्रेस ने सबसे पहले उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की. 11 सितंबर को उसने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कैफी को उम्मीदवार बनाया. इसके बाद वाम दलों ने अपने उम्मीदवार घोषित किये. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल ने बाद में नंदीग्राम से संचिता प्रधान दे को उम्मीदवार बनाया. रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल धड़े ने भी उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतार दिये हैं. भाजपा ने हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है.

शुभेंदु के इस्तीफे से खाली हुई नंदीग्राम सीट
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की. बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया, जिससे वहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है.

नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव, 9 को काउंटिंग
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को वोटिंग होगी. इसके बाद 9 अक्टूबर को काउंटिंग होगी. नंदीग्राम सीट पर अब तक 10 नामांकन दाखिल हो चुके हैं. तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार ने अभी नामांकन नहीं किया है. भाजपा की हसीरानी रथ और कांग्रेस के मिलन प्रधान ने मंगलवार को नामांकन दाखिल किया.

ENTERTAINMENT : CJI बोले- राजपाल यादव एक्टिंग में माहिर, भरोसा करना मुश्किल:चेक बाउंस मामले में आखिरी मौका दिया; कोर्ट से 14 बार आदेश, राजपाल ने नहीं माना

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सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आखिरी बार 2 हफ्ते का समय दिया है। यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। यह मामला वित्तीय विवाद से जुड़ा है।

कोर्ट ने अभिनेता को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके पुराने रवैये को देखते हुए भरोसा जताने में भी संदेह जाहिर किया।CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘उनके पुराने रवैये को देखते हुए। कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं। कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।’

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

अदालतों में अब तक 15 सुनवाई, 14 बार आदेश नहीं माना

राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामले में पिछले 3 सालों में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 15 बार सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने कभी भुगतान करने और कभी समझौते की बात कही। लेकिन हर बार राजपाल ने बात नहीं मानी। इससे पहले ट्रॉयल कोर्ट में भी मामला 6 साल चला। निचली अदालत ने राजपाल को दोषी ठहराया था और जुर्माना लगाया। हालांकि तब उनसे भुगतान करने की बात नहीं की गई थी।

कोर्ट रूम LIVE: भुगतान के लिए प्रपोजल बनाकर लाएं

सुप्रीम कोर्ट: राजपाल पैसे के भुगतान के लिए प्रस्ताव लेकर आएं। कम से कम ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करें।

राजपाल यादव के वकील पीएस पाटवालिया: राजपाल यादव और उनकी मां के पास कुछ प्रॉपर्टी है, जिसे बेचकर वे रुपए इकट्ठा कर लेंगे। दो हफ्ते की मोहलत दे दी जाए। अभी उनके पास पैसे नहीं हैं, पर वे पैसे देना चाहते हैं।

CJI सूर्यकांत: राजपाल अभिनेता हैं और उम्मीद है कि वह यहां भी एक्टिंग नहीं कर रहे होंगे उनका पिछला आचरण भरोसा पैदा नहीं करता।

विवाद 2010 का, राजपाल ने करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था

यह विवाद 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था।

इस फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ था। कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।

रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म इतनी कमाई नहीं कर पाई कि उसका खर्च निकल सके। इसके बाद राजपाल यादव को लोन चुकाने में दिक्कत हुई।

ब्याज और दूसरे चार्ज जुड़ने से बकाया रकम कई साल में बढ़ती गई। यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपए हो गई।

राजपाल यादव के वकील पीएस पाटवालिया ने मंगलवार को अदालत से कहा कि राजपाल यादव और उनकी मां के पास कुछ प्रॉपर्टी है, जिसे बेचकर वे रुपए इकट्ठा कर लेंगे। दो हफ्ते की मोहलत दे दी जाए। अभी उनके पास पैसे नहीं हैं, पर वे पैसे देना चाहते हैं।

2012 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था

विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया था। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं।

यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे।

यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुरली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया।

सुप्रीम कोर्ट में यादव ने कहा कि बाद के समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है और नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है।

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