Thursday, September 17, 2026
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NATIONAL : E20 पेट्रोल पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कार की टंकी खोलकर बोले – ‘दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली’

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E20 पेट्रोल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर दावा किया है कि E20 ईंधन से कार और स्कूटर प्रभावित हो रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम सफल है और इसे लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। करीब 53 सेकेंड के वीडियो में राहुल गांधी कार की पेट्रोल टंकी खोलकर E20 लिखे ढक्कन को दिखाते हैं और दावा करते हैं कि इस ईंधन से लोगों की कार और स्कूटर खराब हो रहे हैं।

दरअसल राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि आमतौर पर लोग कहते हैं कि ‘दाल में काला है’, लेकिन इस मामले में ‘पूरी दाल ही काली है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार की कई लाइनें लगी हुई हैं और E20 ईंधन भी उनमें से एक है। राहुल गांधी का कहना है कि इससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है क्योंकि वाहन खराब होने और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला?
हालांकि राहुल गांधी के इस बयान के पहले केंद्र सरकार की ओर से भी इस मामले पर जानकारी दी गई थी। दरअसल केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का बायोफ्यूल ब्लेंडिंग कार्यक्रम सफल रहा है और E20 को लेकर कुछ लोग बेवजह विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में मिलाया जा रहा एथेनॉल पूरी तरह घरेलू स्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का भी खंडन किया था, जिनमें अमेरिका से बड़े पैमाने पर एथेनॉल आयात किए जाने का दावा किया गया था। दूसरी ओर, E20 को लेकर कुछ वाहन मालिकों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। खासकर 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि इस मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज कम होने, इंजन के कुछ पार्ट्स जल्दी घिसने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी दिक्कतें महसूस हो रही हैं।

E20 ईंधन क्यों ला रही सरकार?
दरअसल सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने जैसे लक्ष्य पूरे करने की कोशिश की जा रही है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने भी E20 ईंधन के विरोध में देशभर में टाउन हॉल अभियान चलाने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह अलग-अलग राज्यों में वाहन मालिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और अनुभवों को सामने लाएगी। दुनिया में ब्राजील एथेनॉल के इस्तेमाल का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, जहां कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से वाहन और ईंधन व्यवस्था विकसित की गई।

NATIONAL : प्रयागराज से पूर्वांचल को साधेंगे, यूपी में आज चुनावी शंखनाद करेंगे राहुल गांधी

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प्रयागराज से कांग्रेस उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान की शुरुआत करने जा रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को केपी इंटर कॉलेज मैदान पर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। दो घंटे के इस कार्यक्रम में नीट, आरओ/एआरओ पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस इसे पूर्वांचल के युवाओं को साधने की बड़ी रणनीति के तौर पर देख रही है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से पूर्वांचल के युवाओं को साधेंगे। साथ ही यूपी में चुनावी शंखनाद भी करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान पर शाम को दो घंटे छात्रों से संवाद करेंगे। प्रयागराज प्रतियोगी छात्रों का शहर है। राजस्थान व उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के सफल समापन के साथ संगम को मथने लिए कांग्रेस ने प्रयागराज को चुना है। कांग्रेस के कई बड़े नेता पहुंच चुके हैं। शनिवार को यूपी के तकरीबन 25 जिलों के शहर व जिला अध्यक्ष समेत कांग्रेस के प्रदेश में सभी छह सांसद व कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे।

राहुल गांधी शाम 6:30 से 8:30 बजे तक केपी इंटर कॉलेज मैदान पर छात्रों से सीध संवाद करेंगे। वह नीट के साथ आरओ/आरआरओ व अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दे के साथ भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी, भर्तियों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी पर बात करेंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। राहुल छात्र संवाद में शामिल होने से पहले अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। वहां तकरीबन ढाई घंटे वह रहेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसद, विधायक और प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों एवं वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव से संबंधित तैयारियों को लेकर विचार-विमर्श भी करेंगे।

NATIONAL : मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सरकार का बड़ा दांव, FCRA बिल पर अमित शाह संभालेंगे मोर्चा; कांग्रेस ने भी जारी किया व्हिप

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मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में सरकार FCRA संशोधन बिल पेश कर उसे पास कराने की तैयारी में है। गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दे सकते हैं। एनडीए और कांग्रेस ने सांसदों को मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं डिलिमिटेशन बिल पर सरकार विपक्ष से बातचीत कर रही है और जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र की संभावना भी है।

अगला हफ्ता संसद के मॉनूसन सत्र का आखिर हफ्ता है और ये इसलिए अहम है क्योंकि सरकार इस हफ्ते FCRA बिल (विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक) लाने और इसे पास कराने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह खुद इस बिल पर जवाब दे सकते हैं। मॉनसून सत्र में अब तक विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है और गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर 20 जुलाई के प्रोटेस्ट में हुए लाठीचार्ज पर जवाब देने की मांग कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने बिल की तैयारी पूरी कर ली है। विपक्ष भले ही इसका विरोध कर रहा है लेकिन सरकार के सीनियर मंत्रियों ने इसे लेकर अलग अलग संगठनों से मीटिंग भी की है। शनिवार और रविवार को भी इस पर काम किया जाएगा। एनडीए ने अपने सभी सांसदों से सोमवार से लगातार सदन में मौजूद रहने को कहा है। कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है और अगले हफ्ते सदन में रहने को कहा है

कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
कांग्रेस ने विपक्ष के दूसरे दलों से भी कहा है कि वे भी अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करें। कांग्रेस ने अपने व्हिप में कहा है कि सभी सांसद सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें।

डिलिमिटेशन बिल पर विपक्ष से बातचीत कर रही सरकार
डिलिमिटेशन बिल को लेकर भी सरकार विपक्ष से बातचीत कर रही है। संसदीय कार्यमंत्री किरन रीजीजू तीन बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बात कर चुके हैं। सरकार के सूत्रों का दावा है ये बिल पास कराने के लिए हमारे पास पूरे नंबर हैं। साथ ही इसकी संभावना से भी इनकार नहीं किया कि डिलिमिटेशन बिल को पास कराने के लिए मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद 15 अगस्त के बाद स्पेशल सत्र बुलाया जा सकता है। संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और यह 13 अगस्त तक प्रस्तावित है।

NATIONAL : आईआईटी का 57वां दीक्षांत समारोह आज, पीएम मोदी जेन जी को देंगे डिग्रियां और मेधावी छात्रों को पदक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री जेन जी से लेकर 74 वर्षीय शोधार्थी सहित 3036 छात्रों को डिग्री प्रदान करेंगे।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह शनिवार को आयोजित होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री जेन जी से लेकर 74 वर्षीय शोधार्थी सहित 3036 छात्रों को डिग्री प्रदान करेंगे।

प्रधानमंत्री इस अवसर पर मेधावी छात्रों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक और अन्य प्रतिष्ठित पदक भी देंगे। वे आईआईटी दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित एआई संचालित उच्च-प्रदर्शन सुपरकंप्यूटिंग सुविधा परम प्रज्ञा का उद्घाटन भी करेंगे। आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने प्रेस वार्ता के दौरान ये बताया। कहा कि इस वर्ष 3036 छात्रों को डिग्री मिलेगी।

इनमें 587 पीएचडी, 567 एमटेक और 1049 बीटेक के छात्र शामिल हैं। संस्थान ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 600 करोड़ रुपये के प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य किया है। पिछले एक वर्ष में 196 नए पेटेंट दाखिल किए गए और 26 नए स्टार्टअप स्थापित हुए। आईआईटी दिल्ली ने देशभर के 18 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ शैक्षणिक और शोध सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रगति की है, जिसमें 30 देशों के साथ 88 सक्रिय समझौते शामिल हैं।

प्रशासनिक और छात्र कल्याण पहल
आईआईटी दिल्ली ने छात्र कल्याण के लिए कई नई पहल की हैं। प्लेसमेंट में चयनित पूर्व छात्रों को अंतिम वर्ष के छात्रों का मेंटर बनाया गया है। कॉल फॉर अ फ्रेंड कार्यक्रम छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान कर रहा है। संस्थान के उप निदेशक अरविंद नेमा ने बताया कि पिछले वर्ष अक्तूबर से सभी प्रशासनिक कार्य पेपरलेस हो गए हैं।

परिसर विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था
आईआईटी दिल्ली के सोनीपत और अबू धाबी परिसर में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। झज्जर स्थित परिसर के लिए मिली जमीन को मिट्टी की गुणवत्ता के कारण वापस लौटाया जा रहा है। आरकेपुरम में संकाय सदस्यों और छात्रों के लिए आवास की व्यवस्था की जाएगी। दीक्षांत समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कार्यक्रम स्थल पर मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा।

SPORTS : 2027 वनडे वर्ल्डकप क्वालिफायर 21 फरवरी से 23 मार्च तक: विजेता को मेन ड्रॉ में सीधी एंट्री; वेस्टइंडीज पर क्वालिफायर खेलने का खतरा

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 2027 आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के क्वालिफायर टूर्नामेंट की विंडो तय कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 टीमों वाला यह टूर्नामेंट 22 फरवरी से 23 मार्च 2027 तक खेला जाएगा। हालांकि, टूर्नामेंट की मेजबानी किस देश को मिलेगी, इसका फैसला अभी बाकी है।

मेजबान देश पर सस्पेंस बरकरार
रिपोर्ट के अनुसार, आईसीसी ने क्वालिफायर के कार्यक्रम को लगभग अंतिम रूप दे दिया है, लेकिन मेजबान देश पर अभी सहमति नहीं बनी है। यह टूर्नामेंट 2027 वनडे विश्व कप में जगह बनाने का आखिरी मौका होगा। 2027 विश्व कप का आयोजन चार अक्तूबर से 21 नवंबर के बीच दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होगा।

नया क्वालिफिकेशन फॉर्मेट लागू
आईसीसी ने जुलाई 2026 में 14 टीमों वाले विश्व कप के लिए नया क्वालिफिकेशन सिस्टम घोषित किया था। इसके तहत क्वालिफायर जीतने वाली टीम सीधे विश्व कप के 12 टीमों वाले मुख्य चरण में पहुंचेगी। वहीं, क्वालिफायर में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें नए सुपर सीरीज चरण में खेलेंगी। इस चरण के जरिए मुख्य ग्रुप स्टेज के लिए एक और टीम का फैसला होगा।

किन टीमों को मिलेगा मौका?
क्वालिफायर में कुल 10 टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें 30 सितंबर 2026 तक की आईसीसी वनडे रैंकिंग के आधार पर मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को छोड़कर सबसे निचली रैंकिंग वाली दो पूर्ण सदस्य टीमें शामिल होंगी। इसके अलावा आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप लीग दो की शीर्ष चार टीमें और  विश्व कप क्वालिफायर प्लेऑफ से क्वालिफाई करने वाली चार टीमें शामिल होंगी।

वेस्टइंडीज पर टिकी रहेंगी निगाहें
वनडे रैंकिंग की दौड़ में सबसे ज्यादा नजर वेस्टइंडीज पर रहेगी, जो फिलहाल 10वें स्थान पर है। कैरेबियाई टीम के पास 30 सितंबर की कट-ऑफ से पहले भारत के खिलाफ केवल दो वनडे मैच खेलने का मौका है। वेस्टइंडीज सीधे विश्व कप में जगह बना पाएगी या उसे क्वालिफायर खेलना पड़ेगा, इसका फैसला काफी हद तक अफगानिस्तान और आयरलैंड के बीच होने वाली वनडे सीरीज के नतीजों और रैंकिंग समीकरणों पर भी निर्भर करेगा।

NATIONAL : भालू के हमले में कांकेर में भाई-बहन की मौत, तीसरे की हालत गंभीर

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नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव मरकाटोला में मादा भालू ने 2 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. मादा भालू के हमले में 1 ग्रामीण की हालत गंभीर है. ग्रामीणों का कहना है कि भालू काफी देर तक दोनों शवों के पास बैठकर उनको नोचता-खसोटता रहा. गांव वालों ने बताया कि मंगलवार को भालू के बच्चे की मौत हो गई थी. बच्चे की मौत के बाद से मादा भालू लगातार इलाके में बच्चे के शव के पास बैठी रही. जिस जगह पर मादा भालू अपने बच्चे के शव के साथ बैठी थी वो स्कूल से सटा हुआ इलाका है.

भालू के हमले में 2 ग्रामीणों की मौत, 1 की हालत गंभीर

गांव वालों ने बताया कि आज सुबह एक ग्रामीण अपने बैल को चराने के लिए खेतों में गया तभी मादा भालू ने उसपर हमला बोल दिया. भाई को भालू से भिड़ते देख बहन भी मौके पर पहुंची लेकिन भालू ने उसपर भी हमला कर उसकी जान ले ली. दो लोगों की मौत के बाद से इलाके में दहशत का माहौल बन गया. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर स्थानीय विधायक गांव वालों के साथ पहुंचे. आनन-फानन में घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस की टीम को दी गई. पुलिस और वन विभाग की टीम ने काफी कोशिश की कि भालू के चंगुल से दोनों शवों को बाहर निकाला जा सके. लेकिन भालू लगातार शवों के पास बैठा रहा और शवों को नोचता रहा.

ट्रैक्यूलाइज भालू पर ग्रामीणों ने किया हमला

वन विभाग की टीम ने बड़ी मुश्किल से मादा भालू को ट्रैंक्यूलाइज किया. जैसे ही भालू बेहोश हुआ और वन विभाग की टीम उसे लेकर जाने लगी, तभी गांव वालों ने बेहोश भालू पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया. वन विभाग और पुलिस की टीम ने भी ग्रामीणों को रोकने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित ग्रामीण भालू पर हमला करने को अमादा दिखाई दिए. कड़ी मशक्कत के बाद बेहोश भालू और मृतकों के शवों को मौके से निकाला गया.

पीड़ित परिवार को मिली आर्थिक मदद

पीड़ित परिवारवालों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई है. वन विभाग और स्थानीय विधायक ने कहा है कि जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बाकी की राहत राशि भी परिवार को दे दी जाएगी.

BUSINESS : इस साल या 2027 में, हाथ में कब आएंगे प्लास्टिक के नोट? RBI गवर्नर ने दिया जवाब

पिछले कुछ दिनों से भारत में प्लास्टिक के नोटों (Plastic Notes) को लेकर बड़ी चर्चा है। लेकिन, सवाल है कि देश में प्लास्टिक के नोट आएंगे कब? इसका जवाब रिजर्व बैंक के गवर्नर ने दे दिया है। RBI मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद मीडिया से बात करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अगले फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में पॉलिमर नोट चलन में आ जाएंगे।”

पॉलिमर नोट मौजूदा कागज़ी नोटों के साथ ही चलन में लाए जाएंगे; कागज़ी करेंसी को बदलने की कोई योजना नहीं है। भारत में पिछले कुछ सालों में करेंसी का स्वरुप लगातार बदला है। नोट के डिजाइन से लेकर सिक्योरिटी तक भारत में मुद्रा पर काफी काम हुआ है, और अब इसी कड़ी में देश के अंदर प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले 2009 में प्रस्तावित एक पायलट प्रोजेक्ट को “तकनीकी दिक्कतों” के कारण रोक दिया गया था। अगर यह नया ट्रायल सफल रहता है, तो सेंट्रल बैंक ₹100 और ₹500 जैसे बड़े मूल्य के नोटों के लिए भी पॉलीमर नोट लाने पर विचार कर सकता है।कागजी नोट से कैसे बेहतर प्लास्टिक करेंसी?

कम कीमत वाले नोट चुनने से कामकाज में भी आसानी होती है। ज़्यादा कीमत वाले नोटों के उलट, ₹10 और ₹20 के नोट ज़्यादातर बैंक शाखाओं से बांटे जाते हैं, न कि ATM से। इससे RBI को कैश डिस्पेंसर और कैश रीसाइक्लर में तुरंत अपग्रेड किए बिना ही इन नोटों को टेस्ट करने का मौका मिलता है।

पॉलिमर बैंकनोट नमी, गंदगी और फटने के प्रति ज़्यादा मज़बूत होते हैं। ऐसे में कागज़ी नोटों की तुलना में इनकी उम्र ज़्यादा होगी।

₹10 और ₹20 के नोट चलन में मौजूद कुल नोटों की संख्या का लगभग 25% हिस्सा हैं, जबकि कुल वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 1.4% है।

चलन में इनकी ज़्यादा संख्या और कम मॉनेटरी वैल्यू इन्हें इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए सही डिनॉमिनेशन बनाती है, क्योंकि अगर कोई ऑपरेशनल दिक्कत आती है, तो इससे होने वाला फाइनेंशियल असर कम रहेगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट से RBI को पॉलीमर नोटों की टिकाऊपन, लोगों की स्वीकार्यता, छपाई की क्षमता और नकली नोट बनाने वालों द्वारा इनके डिज़ाइन और सुरक्षा फीचर्स की नकल करने की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलेगी।मौजूदा ATM पॉलीमर नोटों की पहचान करने के लिए नहीं बने हैं, और ज़्यादा कीमत वाले नोटों के लिए बड़े पैमाने पर इनके इस्तेमाल से पहले कैलिब्रेशन और सॉफ़्टवेयर में बदलाव की ज़रूरत पड़ सकती है।

WORLD : शेख हसीना का बांग्लादेश वापसी का ऐलान, नए अध्याय की शुरुआत या खेल रहीं बड़ा दांव

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बांग्लादेश में हिंसक छात्र आंदोलन के चलते 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, बल्कि उन्हें अपना देश भी छोड़कर भागना पड़ा था। तब से वे भारत में अज्ञात स्थान पर रह रही हैं। बुधवार को उस घटना के 2 साल पूरे होने पर शेख हसीना ने पहली बार मीडिया से बात की किया। वे इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली जुड़ी। इस दौरान कैमरा ऑफ था और वे ऑडियो लिंक के जरिए संवाद कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह दिसम्बर में बांग्लादेश जरूर लौटेंगी।

शेख हसीना बोलते-बोलते रो पड़ीं

अपने संबोधन के दौरान शेख हसीना भावुक हो गईं और रो पड़ीं। हसीना ने रूंधे गले से कहा कि वे दो सालों से अपने प्यारे बांग्लादेश को तकलीफ झेलते हुए देख रही हैं। हसीना ने कहा कि ये वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था। जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने बलिदान दिया था।बंद कैमरे पर 25 मिनट के संबोधन के दौरान हसीना ने कहा कि पिछले दो साल में बांग्लादेश के लोगो ने बहुत दर्द झेला है। हर तरफ डर फैला हुआ है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि वह इस साल दिसम्बर में बांग्लादेश लौटेंगी। फिर चाहे उनकी जान की क्यों न चली जाए। हसीना ने कहा कि वे मुझे फर्जी मुकदमों में फंसाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन झूठे मुकदमों, दिखावटी सुनवाई और मौत की सजा से नहीं डरेंगी।

एक्सपर्ट ने बताया हसीना का साहसिक कदम

एक्सपर्ट शेख हसीना के इस कदम को बहुत बोल्ड और साहसिक कदम के रूप में देख रहे हैं। खासतौर पर जिस तरह से उन्हें बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान देश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल से नरसंहार का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई है।

तारिक रहमान सरकार ने क्या कहा?

भारत में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार भड़की हुई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कहा कि यह देश की संप्रभुता और जुलाई आंदोलन में मारे गए लोगों को अपमान है। बांग्लादेश ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया और कहा कि इसे ऐसे समय में आयोजित किया गया जब 5 अगस्त को जुलाई आंदोलन के 2 साल पूरे हुए हैं। बांग्लादेश की तारिक सरकार इसे दूसरी बरसी के रूप में मना रही थी।

NATIONAL : रिजिजू बोले- सरकार परिसीमन बिल पर विशेष सत्र नहीं लाएगी, मानसून सत्र में ही लाने पर विचार, राहुल से समर्थन के लिए बात की

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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया है कि सरकार की मौजूदा मानसून सत्र को बढ़ाने या कोई विशेष सत्र बुलाने की कोई योजना नहीं है।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक के संबंध में संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।

हालांकि, रिजिजू ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

संविधान संशोधन के लिए सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हो पाने के कारण प्रस्तावित विधेयक अप्रैल में बजट सत्र के दौरान लोकसभा से पारित नहीं हो सका था।

अप्रैल में हुए मतदान के दौरान 528 सांसद उपस्थित थे, जिससे दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। सरकार को विधेयक के विरोध में पड़े 230 वोटों के मुकाबले 298 वोट मिले, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को 54 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। सरकार ने अब इस अंतर को काफी हद तक कम कर दिया है।सरकार इस विवादास्पद विधेयक को पारित कराने की कोशिश कर रही है क्योंकि उसे विश्वास है कि उसके पास पर्याप्त संख्या बल है: तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना से हुए दलबदल के कारण।

एनडीए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब भी पहुंच रहा है।

संसद के चल रहे मानसून सत्र में 20 जुलाई को मुख्य न्यायिक न्यायाधीश के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘पुलिस कार्रवाई’, अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित गबन विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर सदन की कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति की मांग के बीच लगातार स्थगन देखने को मिल रहा है।

सूत्रों ने बताया कि संसद भवन स्थित गांधी के कार्यालय में हुई यह बैठक सरकार की ओर से “विश्वास बढ़ाने का एक उपाय” थी।

पिछले 10 दिनों में रिजिजू की गांधीजी से यह दूसरी मुलाकात थी।

गांधी से मुलाकात के बाद, रिजिजू ने संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।

सूत्रों ने बताया कि रिजिजू गतिरोध को तोड़ने के प्रयास में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी दलों से भी संपर्क करेंगे।

20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से लोकसभा में प्रश्नकाल पूरा नहीं हो पाया है। हंगामे के बीच बिना चर्चा के पांच विधेयक पारित किए जा चुके हैं।

“सदन के अंदर हो या बाहर, नारेबाजी करना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। तख्तियां दिखाकर और नारेबाजी करके आप सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं,” अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से कहा।

बिरला ने कहा कि कई सदस्यों ने उनसे संपर्क करके कहा है कि महत्वपूर्ण प्रश्न सूचीबद्ध हैं, लेकिन चल रहे मानसून सत्र में विपक्ष द्वारा उत्पन्न व्यवधान के कारण सदन प्रश्नकाल शुरू करने में सक्षम नहीं है।

WORLD : होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की बातचीत में प्रगति, शिपिंग रूट पर बनी सहमति

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया और सुरक्षित शिपिंग रूट तय करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों देश ऐसे समुद्री मार्ग पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो न तो ईरान के तट से सटे मौजूदा उत्तरी मार्ग पर होगा और न ही ओमान के दक्षिणी मार्ग पर। प्रस्तावित रास्ता दोनों देशों के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करते हुए जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार भी करीबी नजर बनाए हुए है। भारत के अधिकारी ईरान और ओमान, दोनों के संपर्क में हैं और वार्ता की प्रगति पर लगातार नजर रख रहे हैं। हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से भारत के तेल और गैस आयात पर भी असर पड़ा था।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत पहले यह देखेगा कि दोनों देशों के बीच बातचीत किस नतीजे पर पहुंचती है। इसके बाद नए समुद्री मार्ग की सुरक्षा, स्थिरता और व्यावहारिक उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।

जानकारों के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग स्ट्रेट के मध्य हिस्से में या दोनों देशों के क्षेत्रीय जल के बीच ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (टीएसएस) के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे जहाजों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और दोनों देशों की निगरानी व नियंत्रण की भूमिका भी बनी रहेगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना तकनीकी रूप से संभव है। होर्मुज स्ट्रेट की चौड़ाई लगभग 21 से 33 समुद्री मील (लगभग 61 किमी) है, इसलिए बीच में सुरक्षित समुद्री गलियारा विकसित किया जा सकता है। फिलहाल दोनों देश संयुक्त कार्य समूह के जरिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि नए रूट से खाड़ी देशों और भारतीय बंदरगाहों के बीच कुल समुद्री दूरी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, क्योंकि स्ट्रेट का हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा है और अधिकांश यात्रा अरब सागर में होती है।

भारत का ईरान और ओमान के साथ संबंध

यदि नया मार्ग दोनों देशों की सहमति से सुरक्षित रूप से लागू होता है, तो जहाजों पर हमलों और नियंत्रण संबंधी विवादों का जोखिम कम होगा। इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थिर रहेगी और भारतीय तेल कंपनियों के लिए बीमा तथा मालभाड़े की लागत में भी कमी आ सकती है। भारत के ईरान और ओमान, दोनों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईरान बोला- नया रूट अलग, होर्मुज खोलने का सवाल अलग

ईरान ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर सहमति बनने का यह मतलब नहीं है कि समुद्री मार्ग पूरी तरह खोल दिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यह समझौता केवल सुरक्षित जहाज संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियों, नौसैनिक नाकेबंदी और क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण होर्मुज की स्थिति प्रभावित हुई है।

बघाई ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों पर किसी भी बाहरी दबाव या धमकी का असर नहीं पड़ने देगा। उनके अनुसार, ओमान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना एक अलग मुद्दा है।

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