Thursday, September 17, 2026
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WORLD : ट्रंप की जान पर बन आई, पैसेंजर प्लेन से टकराने से बचा अमेरिकी राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने हेलीकॉप्टर मरीन वन से उड़ान भर रहे थे. तभी कुछ ऐसा हुआ कि पूरे एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की जान हलक में अटक गई. राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर मरीन वन एक यात्री विमान से टकराने से बच गया. हेलीकॉप्टर यात्री विमान के बेहद करीब पहुंच गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी तरह की गलती के कारण जनवरी 2025 में 67 लोगों की जान ले चुकी है. उस हादसे के बाद कई नियम बनाए गए, लेकिन लगता है कि कोई भी सबक हासिल नहीं किया गया है. अब पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है. अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बताया कि मंगलवार को मरीन वन और रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भर रहे एक कमर्शियल जेट के बीच कुछ समय के लिए तय न्यूनतम दूरी नहीं रह गई. हालांकि एजेंसी ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी खतरे में नहीं थे और दोनों विमान सुरक्षित अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच गए. FAA ने कहा कि शुरुआती सुरक्षा समीक्षा में कुछ समय का ‘लॉस ऑफ सेपरेशन’ पाया गया, जिसके बाद दोनों विमान एक-दूसरे से दूर चले गए.


67 मौतों के बाद भी नहीं सीखा सिस्टम
इस घटना ने इसलिए ज्यादा चिंता बढ़ा दी है क्योंकि जनवरी 2025 में इसी एयरपोर्ट के पास एक सैन्य हेलीकॉप्टर और एक कमर्शियल जेट की हवा में टक्कर हो गई थी. उस हादसे में 67 लोगों की मौत हुई थी. उस दुर्घटना के बाद FAA ने रीगन एयरपोर्ट के आसपास हेलीकॉप्टर और यात्री विमानों के एक साथ संचालन पर स्थायी रोक लगा दी थी. मार्च में हेलीकॉप्टर ट्रैफिक संभालने के कुछ पुराने तरीकों पर भी रोक लगा दी गई थी. अब सवाल उठ रहा है कि जब नियम पहले से लागू थे तो वही स्थिति दोबारा कैसे बन गई.


ट्रंप की सुरक्षा में भी बड़ी चूक?
FAA के नियमों के मुताबिक एयरपोर्ट के आसपास उड़ रहे दो विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील यानी 2.4 किलोमीटर की दूरी और 500 फीट की ऊंचाई की दूरी होना अनिवार्य है. लेकिन इस घटना में यह न्यूनतम दूरी टूट गई. यही वजह है कि अब सिर्फ आम हवाई सुरक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

WORLD : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: 48 घंटे में स्थिति होगी साफ

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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने खुद अमेरिका से संपर्क किया है और दोनों देशों के बीच बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगले 48 घंटे बेहद अहम होंगे और इसी दौरान साफ हो जाएगा कि दोनों देशों के बीच समझौता होता है या नहीं।

ट्रंप ने यह बयान लॉस एंजिल्स से लास वेगास जाते समय पत्रकारों से बातचीत में दिया। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे लगातार बातचीत चल रही है और हालात सही दिशा में बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के लिए समझौता करना ही सबसे अच्छा विकल्प होगा।


क्या ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद अमेरिका से संपर्क किया है और बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है और अब अगले दो दिन पूरी दुनिया के लिए अहम साबित हो सकते हैं। ट्रंप का दावा है कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। बताया जा रहा है कि जुलाई में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 14 सूत्रीय समझौता टूटने के बाद इस समुद्री मार्ग को लेकर तनाव काफी बढ़ गया था। अब अमेरिका, ईरान और ओमान मिलकर एक अंतरिम समझौते पर काम कर रहे हैं ताकि इस समुद्री रास्ते को फिर से सुरक्षित तरीके से खोला जा सके।
ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?
बातचीत की संभावना जताने के साथ-साथ ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। ट्रंप ने कहा कि जल्द ही इस बात को औपचारिक समझौते का हिस्सा बनाया जाएगा कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समुद्री मार्ग हर हाल में खोला जाएगा। अगर ईरान सहयोग करता है तो शांति से समाधान निकलेगा, लेकिन यदि उसने अड़चन पैदा की तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

NATIONAL : अभिजीत दीपके बोले- पॉलिटिकल पार्टी नहीं बनाएंगे, कॉकरोच जनता पार्टी प्रेशर ग्रुप की तरह काम करेगी, देश को जन-आंदोलन की जरूरत

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने बुधवार को अपनी रणनीति के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उनका संगठन एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेगा. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर-मंतर आंदोलन के बाद देशभर में युवाओं के मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति बनाने के लिए दो दिवसीय कोर कमेटी की बैठक बुलाई है. बैठक से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “फिलहाल, सीजेपी एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेगा.”

उन्होंने कहा, “पहले आंदोलन की सफलता के बाद हमसे लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं. इसके साथ ही हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. जंतर-मंतर का आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश के युवाओं का आंदोलन बन गया. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के बाद संगठन की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए दो दिनों तक देशभर में युवाओं के लिए किस तरह काम किया जाए और आगे की रणनीति क्या हो, इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी.”

राजनीति में आने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में अभिजीत दीपके ने कहा कि आज जनता का राजनीति, मीडिया और सरकार जैसी संस्थाओं पर भरोसा कम हुआ है. उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में दोबारा विश्वास कायम करने के लिए जनआंदोलन और जनदबाव की जरूरत है. उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से लोग निराश हैं और इसी वजह से युवाओं ने देशभर में अपना आक्रोश दिखाया है. जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब आगे भी जारी रहेगा.

NATIONAL : ‘मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर न चलाएं सियासत’, राहुल गांधी पर बीजेपी नेता संबित पात्रा का तीखा हमला

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बुधवार को मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर छात्र आंदोलन को लेकर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी को बताया बेबुनियाद
बीजेपी की प्रतिक्रिया राहुल गांधी की उस मीडिया वार्ता के तुरंत बाद आई, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों के साथ संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने का दावा किया था। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उनको बेबुनियाद और झूठा करार दिया।
संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान नहीं हुई कोई फायरिंग
उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उनके साथ कुछ बच्चे भी थे, जिन्होंने दिल्ली प्रोटेस्ट में भाग लिया, लेकिन बच्चे तो बच्चे होते हैं, मासूम होते हैं…और ये बच्चे पूरे देश के बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी इस मंच पर संसद के अंदर और संसद के बाहर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कहा था कि 20 जुलाई को दिल्ली में ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान कोई फायरिंग नहीं हुई थी।

बीजेपी ने फिर दोहराई अपनी बात
उन्होंने कहा कि उस समय भी हमने कहा था और आज भी हम कर रहे हैं, क्योंकि यह बहुत संवेदनशील विषय है, कहीं भटकाव न हो और कहीं लोगों को इसमें कुछ सच न लगे, इसलिए बहुत ठहराव और पूरी जिम्मेदारी के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि 20 जुलाई को दिल्ली में ‘संसद चलो’ आंदोलन के दौरान कोई गोली नहीं चली।
स्कूल कॉलेज के दौरान हमनें भी आंदोलनों में लिया भाग
उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक गलत परंपरा है। कभी भी राजनीति में मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर सियासत करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। बच्चों का कोई दोष नहीं है। हमने भी स्कूल-कॉलेज के दौरान आंदोलनों में भाग लिया। जो बच्चे आज राहुल गांधी के साथ थे, मैं उनको कहना चाहता हूं कि बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप हमारे बच्चे हैं, हम सब आपके साथ खड़े हैं…प्रधानमंत्री भी आपके साथ हैं।
सबके सामने लाना चाहता है विपक्ष का प्रोपेगंडा
बीजेपी नेता ने कहा कि हम विपक्ष और राहुल गांधी के झूठे प्रोपेगंडा को उजागर करना चाहते हैं। देश के सब बच्चे हमारे बच्चे हैं, इसलिए जीवन में कभी आंदोलनों से घबराना नहीं चाहिए, लेकिन झारखंड के बच्चे भी तो बच्चे ही हैं। झारखंड के बच्चों से भी तो राहुल गांधी का सामना होना चाहिए, ताकि नेता विपक्ष उनके भी दर्द को जानें।

बीजेपी नेता ने दिया आर्टिकल का हवाला
एक समाचार पत्र में छपे आर्टिकल का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी पेपर धांधली ने एक गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा को मानसिक रोगी बना दिया है, लेकिन राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं जा रहे हैं? शायद इसलिए क्योंकि झारखंड में इंडी गठबंधन की सरकार है।

SPORTS : बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पेट्रोल बम से हमला, शेख हसीना के कार्यक्रम में हुए थे शामिल

बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान शाकिब अल हसन के घर पर हमला हुआ है. बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने उनके घर में तोड़फोड़ की. इसके अलावा पेट्रोल बम फेंककर आग लगाने की कोशिश की. यह घटना बुधवार को उस समय हुई, जब शाकिब नई दिल्ली में शेख हसीना के मीडिया कार्यक्रम में शामिल हुए थे. घटना के बाद पूरे मामले को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है.

बताया जा रहा है कि बुधवार रात मगुरा शहर के केशब मोड़ इलाके में कुछ लोग शाकिब अल हसन के घर पहुंचे. उन्होंने पहले ईंट-पत्थर फेंककर खिड़कियों के शीशे तोड़े. इसके बाद घर में आग लगाने की कोशिश की गई. घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. फिलहाल हमले के पीछे कौन लोग थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.

शेख हसीना के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरी बात तब सामने आई, जब शाकिब अल हसन बुधवार को नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम में पहुंचे. इस कार्यक्रम को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संबोधित किया था. कार्यक्रम खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद मागुरा स्थित उनके घर पर हमला होने का दावा किया गया.

शाकिब मागुरा-1 सीट से अवामी लीग के सांसद रह चुके हैं, जिसकी वजह से इस घटना को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, इस हमले के पीछे की असली वजह क्या थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है
अवामी लीग ने लगाया पेट्रोल बम हमले का आरोप

घटना के बाद अवामी लीग ने बयान जारी किया. पार्टी ने दावा किया कि शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला किया गया. पार्टी का कहना है कि शेख हसीना के कार्यक्रम में शामिल होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया. अवामी लीग ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम से पहले कुछ राजनीतिक दलों ने मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी थी. पार्टी ने इसे विरोधियों की सुनियोजित कार्रवाई बताया.

अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक घर में तोड़फोड़ और आग लगाने की कोशिश की बात कही गई है. वहीं, पेट्रोल बम इस्तेमाल होने का दावा अवामी लीग ने किया है. इसकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

फिलहाल इस घटना को लेकर कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं. हमले के पीछे की वजह और इसमें शामिल लोगों को लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी साफ नहीं है. जांच आगे बढ़ने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी..

NATIONAL : सरकार ने बताया हाईवे पर थमा मौतों का तांडव, कोरोना के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटना के आंकड़ों में 4.1% दर्ज हुई गिरावट

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कॉविड-19 महामारी के बाद पहली बार भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पर होने वाली मौतों में गिरावट देखने को मिली है. लोकसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली मौतों में 4.1 प्रतिशत के गिरावट देखने को मिली है. यह 2024 में 64,772 से घटकर 2025 में 62,122 हो गई है. यह सुधार कई सालों से बढ़ती सड़क मौतों के बाद आया है और इसका पूरा श्रय सख्त प्रवर्तन, बेहतर राजमार्ग इंजीनियरिंग और तेज आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया को दिया जा रहा है.

राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली मौतों में गिरावट 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान यातायात की मात्रा में तेजी से गिरावट देखने को मिली थी. इस वजह से दुर्घटनाएं कम हुई थी. लेकिन जो दुर्घटनाएं हुईं वे अक्सर काफी ज्यादा गंभीर थीं. ऐसा इसलिए ‌क्योंकि खाली सड़कें ओवर स्पीडिंग को बढ़ावा देती थीं. महामारी के बाद जैसे-जैसे यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा पूरे भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि जारी रही.

हालांकि नए सरकारी आंकड़े एक बड़ा बदलाव दिखाते हैं. महामारी के बाद पहली बार राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पर मृत्यु दर में गिरावट देखने को मिली है.
उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा सुधार

उत्तर प्रदेश ने सबसे ज्यादा सुधार दर्ज किया है. यहां राजमार्ग पर होने वाली मौतों की संख्या 2024 में 9,560 से घटकर 2025 में 7,573 हो गई है. हालांकि राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर सड़क दुर्घटना में होने वाली मौत की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की जा रही है. लेकिन यह गिरावट राजमार्ग सुरक्षा में एक बड़े सुधार को दर्शाती है.

मध्य प्रदेश में भी काफी कमी देखने को मिली है. मृत्यु दर 4,644 से घटकर 3,610 हो गया है. इसी के साथ पंजाब में 1,562 से घटकर 1,022 मौत दर्ज की गई हैं.

दूसरी तरफ तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात सहित राज्यों में राजमार्ग दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में बढ़ोतरी देखने को मिली है. तमिलनाडु में 71,387 मामलों के साथ देश में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं. लक्षद्वीप 2022 के बाद से शून्य राष्ट्रीय राजमार्ग मृत्यु रिपोर्ट करने वाला एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश बना हुआ है
.राजमार्ग पर होने वाली मौतों में कमी कैसे आ रही है?

मौत में गिरावट को पिछले कुछ सालों में लागू किए गए कई नीतिगत उपायों से जोड़ा जा रहा है. सबसे जरूरी पहलुओं में से एक है ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार करना. ब्लैक स्पॉट वह जगह होती है जहां पर खराब सड़क डिजाइन या फिर खतरनाक स्थिति की वजह से बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं. सरकार ने जंक्शन को फिर से डिजाइन करके, सड़कों को चौड़ा करके, साइनेज में सुधार करके और सुरक्षा बाधाओं को मजबूत करके ऐसे दुर्घटनाग्रस्त हिस्सों को सुधारने के लिए लगभग 40,000 करोड़ के बजट का आवंटन किया है.

इसी के साथ टेक्नोलॉजी ने भी एक बड़ी भूमिका निभाई है. राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी अब स्पीड कैमरे, रडार सिस्टम और स्वचालित यातायात प्रवर्तन के जरिए से की जाती है. इससे ड्राइवर के लिए दंड का सामना किए बिना रफ्तार सीमा का उल्लंघन करना मुश्किल हो जाता है.

तेज आपातकालीन देखभाल

मृत्यु दर में गिरावट का एक दूसरा कारण प्रधानमंत्री राहत पहल के तहत आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया का विस्तार है. यह योजना गोल्डन आवर के दौरान कैशलेस उपचार प्रदान करती है. गोल्डन ऑवर सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा होता है. इस दौरान तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप से जीवित रहने की संभावना में काफी सुधार हो सकता है. तेज एंबुलेंस सेवा, तुरंत अस्पताल तक पहुंच और तत्काल आघात देखभाल ने उन मौतों को कम करने में मदद की है जो पहले उपचार में देरी की वजह से होती थी.

NATIONAL : लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर नहीं लगेगा टोल, बार-बार धंसने के बाद NHAI ने लिया बड़ा फैसला- जानें पूरा मामला

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हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बुधवार को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल की वसूली को अस्थाई रूप से बंद करने का फैसला किया है। NHAI ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के बार-बार धंसने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए ये फैसला किया है। अथॉरिटी ने कहा कि फिलहाल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से गुजरने वाली गाड़ियों से टोल नहीं लिया जाएगा, जब तक कि रिपेयरिंग का पूरा काम नहीं हो जाता।

रियायतग्राही के खिलाफ कार्रवाई शुरू

एनएचएआई ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के संबंध में रियायतग्राही (Concessionaire), इंडिपेंडेंट इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की है। प्रभावित हिस्से को जल्द से जल्द शुरू करने और क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम को और मजबूत करने के लिए तत्काल जरूरी सुधारात्मक उपाय भी शुरू कर दिए गए हैं। फिलहाल, एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्से पर ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया है और यातायात बिना किसी समस्या के सामान्य गति से चल रहा है।

26 जुलाई को एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 64 के पास देखा गया था धंसाव 

बताते चलें कि पिछले महीने 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 64 के पास धंसाव देखा गया था। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एनएचएआई ने बहाली का काम शुरू किया और प्रभावित हिस्से की टेक्निकल टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन और पर्यवेक्षण में पाई गई कमियों के लिए जिम्मेदार सभी संबंधित पक्षों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

रियायतग्राही को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने के लिए नोटिस जारी

एनएचएआई ने इस पूरे मामले में रियायतग्राही M/s पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित किए जाने का प्रस्ताव करते हुए नोटिस जारी किया है। इसके तहत रियायतग्राही भविष्य में एनएचएआई प्रोजेक्ट के टेंडर में हिस्सा नहीं ले पाएगा। इसके साथ ही, रियायतग्राही को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही अन्य कार्रवाई भी की जा रही है।

  • रियायतग्राही पर परफॉर्मेंस सिक्यॉरिटी का 2% के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा।
  • हेड ऑफ पेवमेंट/हाईवे और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अधिकतम 3 साल तक के लिए प्रतिबंध की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
  • रियायतग्राही की रेटिंग (पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स) को डाउनग्रेड किया जाएगा।

रियायतग्राही को अपने पैसों से करना होगा मरम्मत का सारा काम

इसके अलावा, NHAI ने रियायतग्राही को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस पर अभी तक के प्रभावित हिस्से का लगभग 3 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरा सुधार कार्य करने के निर्देश दिए हैं। इसका पूरा खर्च रियायतग्राही खुद उठाएगा। सुधार कार्य का काम पूरा होने तक लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों से टोल नहीं लिया जाएगा। टोल रेवेन्यू में होने वाले पूरे नुकसान की वसूली रियायतग्राही से की जाएगी।

लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ एनएचएआई की कार्रवाई

एनएचएआई ने प्रोजेक्ट की निगरानी और सुपरविजन में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। कंस्ट्रक्शन एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को प्रोजेक्ट से हटा दिया गया है। इसके साथ ही, उन्हें 2 साल अवधि के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), एनएचएआई और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के किसी भी प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

इसके अलावा, मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापिस भेज दिया गया है। इसके साथ ही, प्रोजेक्ट के पूर्व डायरेक्टर सौरभ चौरसिया, जिनके कार्यकाल के दौरान प्रोजेक्ट का ज्यादातर काम हुआ और मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा के खिलाफ अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में लापरवाही बरतने के संबंध में आरोप-पत्र जारी किया जा रहा है।

M/s थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को डिबारमेंट नोटिस जारी

एनएचएआई ने प्रोजेक्ट के इंडीपेंडेंट इंजीनियर M/s थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी भविष्य में एनएचएआई प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव करते हुए डिबारमेंट नोटिस जारी किया जा रहा है।

लेजर प्रोफिलोमीटर आधारित मूल्यांकन और विशेषज्ञ जांच

व्यापक सुधारात्मक उपायों के अंतर्गत एनएचएआई प्रोजेक्ट के पूरे हिस्से में पेवमेंट की स्थिति का विस्तृत आकलन करने के लिए लेजर प्रोफिलोमीटर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के. एस. रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट एक्सपर्ट्स की एक टीम को विस्तृत टेक्निकल जांच करने के लिए नियुक्त किया गया है। एक्सपर्ट कमेटी घटना के मूल कारणों का परीक्षण करेगी और उपयुक्त सुधारात्मक उपायों की अनुशंसा करेगी।

NATIONAL : रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत को झारखंड सरकार तैयार, CM हेमंत ने बनाई 4 मंत्रियों की कमिटी

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झारखंड में JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी है. पांच और प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. सरकार ने बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई, लेकिन छात्रों ने साफ कहा कि वे केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ही बात करेंगे. छात्र परीक्षा रद्द करने, JPSC-JSSC में सुधार और मामले की CBI या स्वतंत्र समिति से जांच की मांग कर रहे हैं.
ख़बरेंझारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. आंदोलन अब 11वें दिन में पहुंच गया है. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है. इसलिए वे परीक्षा रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही छात्र झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में भी सुधार की मांग कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि वे 25 जुलाई से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया. उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहिए. छात्र सीधे मुख्यमंत्री से बात करना चाह रहे हैं.

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र पिछले कई दिनों से धरना दे रहे हैं. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य देवेंद्र नाथ महतो भी लगातार अनशन पर बैठे हैं. बुधवार को उनके अनशन का चौथा दिन था. इसी बीच पांच और प्रदर्शनकारी भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. अब अनशन करने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई हैसीधे सीएम से करेंगे बात
आंदोलन तेज होने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है. रांची के उप-संभागीय अधिकारी कुमार रजत और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट धनंजय कुमार प्रदर्शन स्थल पहुंचे. उन्होंने छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत के लिए बुलाया. हालांकि छात्रों ने यह प्रस्ताव तुरंत स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे बात करना चाहते हैं. छात्र नेताओं का कहना है कि बातचीत बंद कमरे में नहीं होनी चाहिए. अगर बैठक होती है तो उसका सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे. एक छात्र नेता प्रेम सागर ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद ‘सरकार आपके द्वार’ अभियान चलाते हैं. ऐसे में उन्हें खुद आंदोलन स्थल पर आकर छात्रों की बात सुननी चाहिए.

क्या बोले सीएम
उधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ झारखंड की समस्या नहीं है. यह पूरे देश के युवाओं के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार छात्रों की हर चिंता को गंभीरता से ले रही है. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि छात्रों को स्थायी समाधान देना है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार के दरवाजे सभी छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए खुले हैं. कोई भी अपनी बात सरकार के सामने रख सकता है और हर सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. हेमंत सोरेन ने यह भी बताया कि उन्होंने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर उन्हें छात्रों के आंदोलन और राज्य की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी है.

NATIONAL : मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी, डीपफेक और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट पर घिरे

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मेटा और भारत सरकार के बीच खड़ा हुआ विवाद खत्म होता दिख रहा है. मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक कंटेंट को लेकर सरकार को माफीनामा भेजा है. उन्होंने CSAM (बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री) डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों पर माफी मांगी है. सूत्रों के मुताबिक, Meta ने स्वीकार किया कि कुछ तरह के कंटेंट को बढ़ावा (बूस्ट) देने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने Meta को साफ शब्दों में कहा कि वह केवल ‘इंटरमीडियरी’ की परिभाषा में नहीं आता क्योंकि कंपनी तय करती है कि कौन-सा कंटेंट किस तक पहुंचेगा. सरकार का कहना है कि ऐसे में IT Act के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण Meta पर लागू नहीं होगा. सरकारी सूत्रों के अनुसार Meta ने इस पूरे मामले में अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद जताया और माफी मांगी.

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग पर जताई चिंता

सरकार ने Meta से साफ कहा कि भारत के कानून का हर हाल में पालन करना होगा. सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई. इससे पहले , प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट हटाए जाने के मामले को भी सरकार ने उठाया था. प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और अभद्र कंटेंट का मुद्दा भी भारत सरकार ने उठाया. Meta ने जवाब दिया कि हमारे यहां सख्त आंतरिक नियम लागू हैं. Meta ने कहा प्लेटफॉर्म का जानबूझकर दुरुपयोग किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है.

सरकार ने मेटा के अफसरों को किया तलब

इससे पहले मेटा की ग्लोबल टीम ने बुधवार (5 अगस्त) को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय के सीनियर अफसरों के साथ मुलाकात की थी. केंद्र सरकार ने कंपनी के अफसरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट हटाए जाने के मामले में तलब किया था. मीटिंग में महत्वपूर्ण पोस्ट पर की गई गलत कार्रवाई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण एवं उत्पीड़न सामग्री (CSAM) पर प्रभावी रोक में चूक और अन्य नियामकीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी.

मेटा के सीनियर अफसरों की टीम ने आज ही इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात की. मंत्री के साथ यह मुलाकात लगभग आधे घंटे तक चली. यह मीटिंग इसलिए अहम रही, क्योंकि पीएम मोदी के हालिया फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने के बाद सरकार ने मेटा के टॉप ग्लोबल अफसरों को तलब किया था. प्रधानमंत्री की इस पोस्ट में युवाओं को संबोधित करते हुए प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। अमेरिकी कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी थी और कहा था कि पोस्ट गलती से हट गई थी, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया था.

NATIONAL : झारखंड में SIR के बाद वोटर ल‍िस्‍ट से कट गए 43 लाख से ज्‍यादा लोगों के नाम, 7 अक्‍टूबर को जारी होगी फाइनल मतदाता सूच‍ी

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झारखंड में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत गिनती का काम पूरा होने के बाद बुधवार को चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की. इसमें 43.61 लाख से ज्‍यादा लोगों के नाम हटा दिए गए. झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि राज्य में SIR के तहत गिनती का चरण शुरू होने से पहले 2.64 करोड़ मतदाता थे. गिनती का चरण पूरा होने के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.21 करोड़ वोटर शामिल हैं, जिनमें 1.12 करोड़ पुरुष, 1.08 करोड़ महिलाएं और 260 थर्ड जेंडर वोटर हैं.

उन्‍होंने बताया क‍ि 29 जुलाई तक कुल 2,64,63,236 मतदाताओं में से 2,21,01,249 (83.51 प्रतिशत) मतदाताओं ने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर दिए हैं, जो SIR के एन्यूमरेशन चरण में भारी भागीदारी को दर्शाता है.” 

30 जून को शुरू हुआ था ग‍िनती का काम

बता दें, वोटर लिस्ट के SIR के लिए गिनती का काम 30 जून को शुरू हुआ और 29 जुलाई तक चला. इस दौरान बीएलओ ने गिनती वाले फॉर्म बांटने, इकट्ठा करने और उनकी जांच करने के लिए घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया. ASDD (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट) सूची में आने वाले कुल 43,61,987 मतदाताओं को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. सीईओ ने बताया कि 43.61 लाख वोटरों में से लगभग 7.63 लाख की मौत हो गई, 15.92 लाख लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए, 14.50 लाख का पता नहीं चल सका या वे इस प्रक्रिया के दौरान मौजूद नहीं थे. 4.38 लाख लोगों के नाम कई जगहों पर वोटर के तौर पर दर्ज पाए गए. उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा लगभग 1.16 लाख मतदाताओं ने गिनती वाले फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और गिनती के चरण के दौरान बूथ-लेवल अधिकारियों (BLOs) को अपने फॉर्म वापस नहीं किए.

उन्‍होंने कहा, “कोई भी योग्य वोटर, जिसका नाम 2026 की वोटर लिस्ट में था, लेकिन जिसने एन्यूमरेशन फ़ॉर्म जमा नहीं किया था, वह 5 अगस्त से 4 सितंबर के बीच ‘दावे और आपत्ति’ के समय फॉर्म-6 और एक डिक्लेरेशन फॉर्म जमा करके वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकता है.

 8, 9, 22 और 23 अगस्त को लगेंगे स्पेशल कैंप

1 अक्टूबर 2026 को 18 साल के हो चुके या 1 अक्टूबर 2026 तक 18 साल के होने वाले युवा वोटरों को फ़ॉर्म 6 में अपना आवेदन भरने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, “ऐसे युवा वोटरों को रजिस्टर करने के लिए झारखंड भर में 8, 9, 22 और 23 अगस्त को स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे, ताकि भारत के सभी योग्य नागरिकों का नाम लिस्ट में शामिल किया जा सके और कोई भी छूट न जाए.” सुनवाई और वेरिफिकेशन के लिए नोटिस का दौर 3 अक्टूबर को खत्म होगा. फाइनल वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी. 

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