Monday, November 2, 2026
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NATIONAL : ‘यह मेरी आखिरी मुलाकात हो सकती है’: मुंबई मार्च से पहले भावुक हुए मनोज जरांगे; अपील करते हुए क्या-क्या कहा?

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मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन के 17वें दिन कहा कि सलाइन और पानी बंद करने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ रही है। मुंबई रवाना होने से पहले उन्होंने इसे महाराष्ट्र के लोगों से अपनी आखिरी मुलाकात तक बताया। उन्होंने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में-

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपने अनशन के 17वें दिन बेहद भावुक अपील की। पाटिल ने बताया कि उन्होंने सलाइन और अन्य चिकित्सा सहायता लेना बंद कर दिया है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मुंबई की उनकी आगामी यात्रा महाराष्ट्र के लोगों के साथ उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।

मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, आज मेरे अनशन का 17वां दिन है। सलाइन हटाने के बाद पेट में फिर से जलन शुरू हो गई है। मैं मुंबई के लिए लगभग अकेला निकलूंगा, मेरे साथ केवल चार-पांच साथी होंगे। मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा हूं, इसलिए रास्ते में मेरे स्वागत के कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं। अगर मुझमें ताकत होगी तो मैं लोगों से बात करूंगा। आप मुझसे मिलने आ सकते हैं। यह शायद हमारी आखिरी मुलाकात हो सकती है। सड़कों पर आकर मुझे आशीर्वाद दें, लेकिन अभी मुंबई मार्च में शामिल न हों। यह गोदावरी क्षेत्र और महाराष्ट्र से मेरी आखिरी विदाई भी हो सकती है।

जरांगे ने क्या अपील की?
उन्होंने मराठा समाज से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय को किसी भी हाल में हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा शरीर जहां गिरे, गिर जाए, लेकिन मराठा समाज इतनी मजबूती से लड़ाई लड़े कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कहें कि वह मर गया, लेकिन झुका नहीं। मैं यूं ही मरना नहीं चाहता, बल्कि अपने समाज को उसका अधिकार दिलाते हुए मरना चाहता हूं। समाज की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए।

मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाया?
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। समुदाय को सरकार की हर चाल का जवाब देना होगा। मराठा आंदोलन को बदनाम करने और उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समाज को संगठित रहना चाहिए।

मराठा समाज के नेतृत्व पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मराठा समाज में नेतृत्व की कोई कमी नहीं है। यदि एक नेता नहीं रहेगा तो दूसरा सामने आएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे उसी व्यक्ति या दल का समर्थन करें जो आरक्षण दिलाने में मदद करे। केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद से समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। जरांगे पाटिल ने दावा किया कि 5.5 करोड़ मेहनतकश मराठा किसी भी समय मुंबई को रोक सकते हैं, जबकि राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली वर्ग आबादी का एक छोटा हिस्सा है।

उपचार लेने से क्यों किया इनकार?
उन्होंने बताया कि सरकार और समाज की अपील पर उन्होंने कुछ समय के लिए चिकित्सा सहायता स्वीकार की थी, लेकिन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण दोबारा इलाज लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात-आठ दिनों तक सलाइन की वजह से उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब सलाइन और पानी बंद करने के बाद शरीर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं।

मुंबई के लिए बिना औपचारिक पुलिस अनुमति के रवाना होने की तैयारी कर रहे जरांगे पाटिल ने अपने समर्थकों से कहा कि वे उनके स्वागत में माला या शॉल न पहनाएं, क्योंकि इससे संक्रमण और रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने लंबे मंच बनाने के बजाय रास्ते में छोटे विश्राम केंद्र बनाने की सलाह दी, जहां वे यात्रा के दौरान कुछ समय आराम कर सकें।

उन्होंने समर्थकों से यह भी अपील की कि वे अभी उनसे मिलने के लिए पैसे खर्च न करें। इसके बजाय अंतिम और बड़े मुंबई मार्च के लिए धन और वाहनों की व्यवस्था बचाकर रखें।

NATIONAL : ‘यह मेरी आखिरी मुलाकात हो सकती है’: मुंबई मार्च से पहले भावुक हुए मनोज जरांगे; अपील करते हुए क्या-क्या कहा?

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मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन के 17वें दिन कहा कि सलाइन और पानी बंद करने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ रही है। मुंबई रवाना होने से पहले उन्होंने इसे महाराष्ट्र के लोगों से अपनी आखिरी मुलाकात तक बताया। उन्होंने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए क्या कहा?
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपने अनशन के 17वें दिन बेहद भावुक अपील की। पाटिल ने बताया कि उन्होंने सलाइन और अन्य चिकित्सा सहायता लेना बंद कर दिया है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मुंबई की उनकी आगामी यात्रा महाराष्ट्र के लोगों के साथ उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।

मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, आज मेरे अनशन का 17वां दिन है। सलाइन हटाने के बाद पेट में फिर से जलन शुरू हो गई है। मैं मुंबई के लिए लगभग अकेला निकलूंगा, मेरे साथ केवल चार-पांच साथी होंगे। मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा हूं, इसलिए रास्ते में मेरे स्वागत के कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं। अगर मुझमें ताकत होगी तो मैं लोगों से बात करूंगा। आप मुझसे मिलने आ सकते हैं। यह शायद हमारी आखिरी मुलाकात हो सकती है। सड़कों पर आकर मुझे आशीर्वाद दें, लेकिन अभी मुंबई मार्च में शामिल न हों। यह गोदावरी क्षेत्र और महाराष्ट्र से मेरी आखिरी विदाई भी हो सकती है।

जरांगे ने क्या अपील की?
उन्होंने मराठा समाज से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय को किसी भी हाल में हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा शरीर जहां गिरे, गिर जाए, लेकिन मराठा समाज इतनी मजबूती से लड़ाई लड़े कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कहें कि वह मर गया, लेकिन झुका नहीं। मैं यूं ही मरना नहीं चाहता, बल्कि अपने समाज को उसका अधिकार दिलाते हुए मरना चाहता हूं। समाज की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए।

मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाया?
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। समुदाय को सरकार की हर चाल का जवाब देना होगा। मराठा आंदोलन को बदनाम करने और उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समाज को संगठित रहना चाहिए।

मराठा समाज के नेतृत्व पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मराठा समाज में नेतृत्व की कोई कमी नहीं है। यदि एक नेता नहीं रहेगा तो दूसरा सामने आएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे उसी व्यक्ति या दल का समर्थन करें जो आरक्षण दिलाने में मदद करे। केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद से समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। जरांगे पाटिल ने दावा किया कि 5.5 करोड़ मेहनतकश मराठा किसी भी समय मुंबई को रोक सकते हैं, जबकि राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली वर्ग आबादी का एक छोटा हिस्सा है।

उपचार लेने से क्यों किया इनकार?
उन्होंने बताया कि सरकार और समाज की अपील पर उन्होंने कुछ समय के लिए चिकित्सा सहायता स्वीकार की थी, लेकिन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण दोबारा इलाज लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात-आठ दिनों तक सलाइन की वजह से उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब सलाइन और पानी बंद करने के बाद शरीर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं।

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मुंबई के लिए बिना औपचारिक पुलिस अनुमति के रवाना होने की तैयारी कर रहे जरांगे पाटिल ने अपने समर्थकों से कहा कि वे उनके स्वागत में माला या शॉल न पहनाएं, क्योंकि इससे संक्रमण और रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने लंबे मंच बनाने के बजाय रास्ते में छोटे विश्राम केंद्र बनाने की सलाह दी, जहां वे यात्रा के दौरान कुछ समय आराम कर सकें।

उन्होंने समर्थकों से यह भी अपील की कि वे अभी उनसे मिलने के लिए पैसे खर्च न करें। इसके बजाय अंतिम और बड़े मुंबई मार्च के लिए धन और वाहनों की व्यवस्था बचाकर रखें।

NATIONAL : बीजेपी के गढ़ अजमेर में बड़ा उलटफेर: 36 साल बाद कांग्रेस ने भाजपा को दी मात, 37 वार्ड जीते; 32 पर सिमटी भाजपा

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अजमेर नगर निगम चुनाव में करीब 36 साल बाद कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ते हुए 37 वार्ड जीते। भाजपा को 32 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिलीं। कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है। अब निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम होगी।

अजमेर नगर निगम के चुनाव परिणाम ने शहर की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। करीब 36 साल बाद कांग्रेस ने नगर निगम में भाजपा को पछाड़ दिया है। 80 वार्डों के नतीजों में कांग्रेस ने 37 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 32 वार्ड मिले। 11 निर्दलीय प्रत्याशी भी जीतने में सफल रहे। यानी कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से सिर्फ चार सीट दूर है, जबकि भाजपा उससे पांच सीट पीछे रह गई है।

अजमेर का यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शहर में भाजपा का राजनीतिक और संगठनात्मक नेटवर्क कांग्रेस की तुलना में मजबूत माना जाता रहा है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत, विधायक अनीता भदेल, शंकर सिंह रावत, शत्रुघ्न गौतम, वीरेंद्र सिंह और रामस्वरूप लांबा जैसे बड़े चेहरे भाजपा के साथ हैं। दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ओंकार सिंह लखावत का भी अजमेर से राजनीतिक जुड़ाव है।

इसके अलावा उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी अजमेर की प्रभारी मंत्री हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का अजमेर लोकसभा क्षेत्र से संबंध है। सबसे अहम बात यह है कि आरएसएस के चित्तौड़गढ़ प्रांत का मुख्यालय भी अजमेर में है। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं था, बल्कि उसके संगठन और स्थानीय नेतृत्व की भी परीक्षा थी।

फिर कहां पिछड़ गई भाजपा?
भाजपा के मजबूत राजनीतिक नेटवर्क के बावजूद कांग्रेस का 37 वार्डों तक पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। चुनाव परिणाम संकेत दे रहा है कि स्थानीय निकाय की राजनीति में केवल बड़े नेताओं की मौजूदगी पर्याप्त नहीं रही। वार्ड स्तर पर प्रत्याशी की पकड़, स्थानीय समीकरण और संगठन की सक्रियता ने इस बार ज्यादा असर डाला

कांग्रेस ने इस चुनाव में स्थानीय स्तर पर मुकाबले को मजबूती से संभालने के लिए आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को कमान दी थी। राठौड़ ने अजमेर में कांग्रेस के चुनाव अभियान और संगठन को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाई। कांग्रेस के लिए यह रणनीति काम करती दिखी और पार्टी ने भाजपा के मजबूत नेटवर्क के बावजूद बढ़त बना ली।

अनीता भदेल के वार्ड में भी भाजपा को झटका
भाजपा के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका वरिष्ठ विधायक अनीता भदेल के वार्ड में पार्टी की हार रही। यह नतीजा बताता है कि बड़े नेताओं का प्रभाव भी हर वार्ड में पार्टी उम्मीदवार के लिए जीत की गारंटी नहीं बन पाया। अजमेर में भाजपा के कई बड़े नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर थी। ऐसे में कांग्रेस की बढ़त को स्थानीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ बने माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।

बहुमत के लिए निर्दलीय बनेंगे अहम?
कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन 80 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षदों की जरूरत होगी। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है। भाजपा भी 32 सीटों के साथ कांग्रेस से पांच सीट पीछे है। यहीं 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। कांग्रेस यदि निर्दलीयों में से कम से कम चार का समर्थन जुटा लेती है तो बोर्ड बनाने की स्थिति में आ जाएगी। भाजपा के लिए भी सत्ता की दौड़ पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन उसे कांग्रेस की बढ़त को पलटने के लिए निर्दलीयों के बड़े हिस्से को अपने साथ लाना होगा।

NATIONAL : इधर UCC पर अमित शाह का ऐलान, उधर BJP के अपने ही 3 सहयोगियों ने किया सावधान; सियासी घमासान तय

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के सभी 21 भाजपा और एनडीए (NDA) शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी। लेकिन उनते इस ऐलान के बाद से बीजेपी के ही सहयोगी दलों ने सतर्क करना शुरू कर दिया है।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC पर ऐलान के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष तो छोड़िए अपने ही सहयोगी दलों ने सावधान करना शुरू कर दिया है। आंध्र प्रदेश में सत्ता में मौजूद तेलुगु देशम पार्टी ( TDP ) के संसदीय दल के नेता लावू श्री कृष्ण देवरायालु ने साफ-साफ कह दिया है कि अभी तो इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है, लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेंगे।

जेडीयू ने अभी नहीं दी हरी झंडी
वहीं, बिहार में BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा रही JD(U) ने कहा कि वह शाह से बात करेगी। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि मैं गृह मंत्री अमित शाह से मिलूंगा और इस मुद्दे पर चर्चा करूंगा।

चिराग पासवान ने भी किया सावधान
इधर बीजेपी के एक और सहयोगी, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के चिराग पासवान ने भी सावधानी बरतते हुए कहा कि उनकी पार्टी एकरूपता और विविधता के लिए प्रतिबद्ध है और संविधान ने अलग-अलग समुदायों की विभिन्न परंपराओं और रीति-रिवाजों को मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और अनुच्छेदों के तहत अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि UCC का प्रस्ताव सार्वजनिक किया जाना चाहिए, इससे जुड़े लोगों के हितों पर विचार किया जाना चाहिए और व्यापक बातचीत होनी चाहिए; साथ ही उन्होंने कहा कि इसके बाद उनकी पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी।

JDU और TDP का अलग स्टैंड लेने का रहा है इतिहास
2014 से ही तेलुगु देशम पार्टी और जेडीयू दोनों का BJP के कुछ अहम वैचारिक मुद्दों पर अपना अलग स्टैंड लेने का इतिहास रहा है। इस दौरान दोनों पार्टियां एनडीए में शामिल होती और बाहर निकलती रही हैं, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में वे बीजेपी के ज्यादा करीब नजर आ रही हैं। बीजेपी की सहयोगी पार्टी होने के बावजूद, 2019 में संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने के पक्ष में JD(U) के सांसदों ने वोट नहीं दिया था और वे सदन से बाहर चले गए थे।

NATIONAL : ‘मोदी के भारत की मजबूत “कन्वेनिंग पावर”‘, ब्रिक्स समिट की सफलता पर बोले जयशंकर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि यह भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के भारत का कमाल है. इसकी सफलता को पूरी दुनिया ने देखा है.

ब्रिक्स समिट की सफलता पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि पूरे देश और दुनिया ने कल ब्रिक्स इंडिया समिट 2026 की सफलता देखी. इसमें 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए. 11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश, 4 रिजनल ऑर्गेनाइजेशन और 7 इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन शामिल हुए थे.

विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘सबसे पहली और अहम बात मोदी के भारत की मजबूत ‘कन्वेनिंग पावर’ है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख स्तर पर किया गया था. यह समझना जरूरी है कि यह BRICS समिट एक ऐसी दुनिया में हो रही थी जो बहुत बंटी हुई है, जहां दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं. गहरी दूरियां हैं. लोगों की राय और हित बहुत अलग-अलग और मजबूत हैं. और हमने क्या किया?’

ऐसे माहौल में भी हमने सहमति बनाई

विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘इस बंटवारे के माहौल के बावजूद, हमने एक आम सहमति बनाई कि हम उस मुद्दे पर बात करेंगे जो उस समय का सबसे मुश्किल मुद्दा था. वेस्ट एशिया या मिडिल ईस्ट का संघर्ष। हम एक ऐसा बयान जारी करने में सफल रहे जिस पर सभी सहमत थे. एक ऐसा बयान जिसमें शांति, सुरक्षा, स्थिरता, लंबे समय की समझ, ग्लोबल ट्रेड (वैश्विक व्यापार) के सुचारू प्रवाह, सप्लाई चेन, ऊर्जा और नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का आग्रह किया गया था.’

विदेश मंत्री ने बताया, ‘अब, बात सिर्फ इतनी नहीं थी कि हम बंटी हुई दुनिया में आपसी समझ बनाने में कामयाब रहे. असल में, समिट का पूरा माहौल, उसका मिजाज और भावना ऐसी थी कि बातचीत बहुत खुली और सहज रही. ऐसे नेता भी मिले जो शायद दूसरे हालात में नहीं मिलते, लेकिन इस समिट के दौरान वे मिले. इसका नतीजा यह हुआ कि आज हमने अहम मुद्दों पर ग्लोबल बातचीत में बड़ा योगदान दिया.’

आतंकवाद के मुद्दे पर क्या बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर?
इसके अलावा विदेश मंत्री ने कहा, ‘मैं एक और बात कहना चाहता हूं, जिस पर बनी सहमति बहुत अहम थी. वह मुद्दा था आतंकवाद. ब्रिक्स का रुख बिल्कुल साफ था कि आतंकवाद का कोई भी काम आपराधिक है, और असल में, उसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले को पूरी तरह से अस्वीकार्य माना. उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की निंदा की, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है. आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस पर जोर दिया और इससे निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज किया. तो कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि यह समिट ऐसी थी जहां प्रधानमंत्री के बातचीत, कूटनीति और विकास के संदेश की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी.’

उन्होंने कहा,’उस संदेश पर कैसी प्रतिक्रिया मिली, यह हमने तब देखा जब दुनिया भर के नेता ब्रिक्स के लिए आए. तो मैं अपनी बात यहीं खत्म करता हूं. बहुत से लोगों ने कहा था कि ऐसा नहीं होगा. लेकिन ऐसा हुआ. यह नई दिल्ली में हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ.’

NATIONAL : राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का जलवा, 4,179 वार्डों में जीत के साथ कई नगर निगमों पर जमाया कब्जा, कांग्रेस 3,613 वार्ड तक सिमटी

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राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजों में भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाते हुए सबसे ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज की है, हालांकि कई शहरों में निर्दलीयों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में भाजपा ने बहुमत हासिल किया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने बाजी मारी और जोधपुर में दोनों दल बराबरी पर रहे।

Rajasthan Urban Local Body Election Results 2026: राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कांग्रेस पर बढ़त बनाते हुए 4,179 वार्ड में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। भाजपा ने राज्य के 10 नगर निगमों में से चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत हासिल किया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ नगर परिषद में भी उसने उल्लेखनीय जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए राज्य में 2,273 वार्ड जीते।

भाजपा 20 और कांग्रेस सात वार्ड पर विजयी रहे
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर चुनाव परिणाम में बड़ी भूमिका निभाई। भाजपा 20 और कांग्रेस सात वार्ड पर विजयी रहे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने एक-एक वार्ड में जीत दर्ज की। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मतगणना वाले 10,244 वार्ड में से रात साढ़े आठ बजे तक 10,235 के परिणाम घोषित किए जा चुके थे। भाजपा के 4,179 और कांग्रेस के 3,613 वार्ड के अलावा आरएलपी ने 63, आम आदमी पार्टी (आप) ने 42, माकपा ने 38, बसपा ने 19 और भारत आदिवासी पार्टी ने आठ वार्ड जीते। भाजपा ने जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा नगर निगमों में बहुमत का आंकड़ा पार किया, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर में बहुमत हासिल किया।

जयपुर से अजमेर तक ऐसा रहा हाल
जयपुर नगर निगम के 150 वार्ड में भाजपा ने 78, कांग्रेस ने 53 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते। चार वार्ड के परिणाम अभी घोषित नहीं हुए थे। उदयपुर के 80 वार्ड में भाजपा ने 53 और कांग्रेस ने 23 वार्ड जीते। तीन वार्ड निर्दलीयों और एक वार्ड माकपा के खाते में गया। भीलवाड़ा के 70 वार्ड में भाजपा ने 45, कांग्रेस ने 10 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते।

कोटा नगर निगम के 100 वार्ड में भाजपा ने 55 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। बीकानेर के 80 वार्ड में कांग्रेस ने 42, भाजपा ने 27 और निर्दलीयों ने 10 वार्ड जीते, जबकि एक वार्ड आरएलपी के खाते में गया। जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा। 100 सदस्यीय नगर निगम में दोनों दलों ने 44-44 वार्ड जीते। निर्दलीयों ने 10 और आरएलपी ने एक वार्ड जीता, जबकि एक वार्ड का परिणाम बाकी था। अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। भाजपा ने 32 और निर्दलीयों ने 11 वार्ड जीते। यहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

सीएम भजनलाल शर्मा ने बताया ऐतिहासिक जीत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह शहर पाली के 65 वार्ड में कांग्रेस ने 29, भाजपा ने 21 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते। अलवर में भाजपा 28 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी रही। कांग्रेस ने 23, निर्दलीयों ने 13 और बसपा ने एक वार्ड जीता। झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्ड में कांग्रेस ने 29, भाजपा ने 13, निर्दलीयों ने दो और आम आदमी पार्टी ने एक वार्ड जीता। हालांकि, झालरापाटन नगरपालिका में भाजपा का दबदबा बरकरार रहा।

भाजपा ने 35 में से 22 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस ने आठ और आम आदमी पार्टी ने पांच वार्ड जीते। वसुंधरा राजे झालरापाटन से भाजपा विधायक हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भाजपा के प्रदर्शन को ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि यह जनता के पार्टी और उसके विकास मॉडल में विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर भरोसा जताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए परिणामों को पार्टी की ऐतिहासिक जीत बताया।

गोविंद सिंह डोटासरा ने साधा भाजपा पर निशाना
वहीं, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि चुनाव परिणामों ने भाजपा सरकार के खराब प्रदर्शन को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कांग्रेस पर मत प्रतिशत की बढ़त एक प्रतिशत से भी कम है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि वार्ड के परिसीमन में अनियमितताओं से भाजपा को लाभ मिला और चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशियों के आगे होने के बावजूद परिणाम घोषित करने में जानबूझकर देरी की गई। उन्होंने बीकानेर, अजमेर और पाली में कांग्रेस के प्रदर्शन के साथ ही भरतपुर तथा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति का जिक्र किया।

दो चरणों में हुए मतदान
राज्य में 309 शहरी निकायों- 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाओं के लिए चुनाव हुए। 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुए मतदान में 1.44 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र थे। इससे पहले 2019-21 के निकाय चुनावों में राज्य में 196 शहरी निकाय और 7,500 वार्ड थे। महापौर और सभापति के चुनाव के बाद कांग्रेस ने 123 निकायों, भाजपा ने 64 और निर्दलीय एवं अन्य दलों ने नौ निकायों पर नियंत्रण हासिल किया था। नवनिर्वाचित नगर निकायों के महापौर और सभापति का चुनाव 21 सितंबर को होगा, जबकि उप महापौर, उप सभापति और नगरपालिका उपाध्यक्षों का चुनाव 22 सितंबर को होगा।

NATIONAL : राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा की जीत पर पीएम मोदी बोले- झूठ की गूंज के सामने सत्य की विजय

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता का आभार जताया। उन्होंने जनादेश को सत्य की विजय बताते हुए कहा कि इससे डबल इंजन सरकार की सुशासन और विकास की नीतियों को जनता का समर्थन मिला है। पीएम ने विजयी प्रत्याशियों और भाजपा कार्यकर्ताओं को भी बधाई दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जीत पर जनता का आभार जताते हुए इसे झूठ की गूंज के सामने सत्य की विजय का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता के इस जनादेश ने एक बार फिर डबल इंजन सरकार की सुशासन एवं विकास की नीतियों को अपना पूरा समर्थन दिया है। बता दें कि निकाय चुनाव में भाजपा ने 4,178 वार्डों में जीत दर्ज कर बढ़त बना ली है।

डबल इंजन सरकार की नीतियों पर जताया भरोसा
पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान की जनता के जनादेश से यह एक बार फिर साफ हो गया है कि डबल इंजन सरकार की सुशासन एवं विकास की नीतियों को उनका पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि यह जनादेश राज्य के विकास को लेकर सरकार के संकल्प को और मजबूती देगा।

विकास और खुशहाली का संकल्प होगा मजबूत
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जनादेश से राज्य को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ ही जन-जन के जीवन में खुशहाली लाने का उनका संकल्प भी और सशक्त होगा। उन्होंने निकाय चुनाव के परिणाम को भाजपा की नीतियों और सरकार के कामकाज पर जनता के भरोसे के रूप में पेश किया।

विजयी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को बधाई
पीएम मोदी ने राजस्थान नगर निकाय चुनाव में जीत हासिल करने वाले सभी प्रत्याशियों को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के समर्पित और परिश्रमी कार्यकर्ताओं के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने विजयी प्रत्याशियों के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं को अपनी शुभकामनाएं दीं।

राजस्थान चुनाव में अब तक का गणित क्या है?
राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने 4,178 वार्डों में जीत दर्ज कर बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस 3,612 वार्डों में विजयी रही। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 2,273 वार्डों में जीत हासिल की। चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

16 को इन जगहों पर फिर से होगी वोटिंग
मतगणना के दौरान ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण चार निकायों के कुछ वार्डों के नतीजे अटक गए। इसके चलते जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के साथ सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव आगामी आदेश तक स्थगित कर दिए गए हैं। अब जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के 10 मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान होगा। इसकी मतगणना 17 सितंबर को की जाएगी।
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NATIONAL : पीयूष गोयल के आवास पहुंचे पीएम मोदी, गणपति बप्पा की उतारी आरती; लिया विघ्नहर्ता का आशीर्वाद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के आवास पर पहुंचकर गणेश चतुर्थी के अवसर पर विघ्नहर्ता की पूजा-अर्चना की। देशभर में गणेश चतुर्थी धार्मिक उत्साह और भव्य आयोजनों के साथ मनाई जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर देशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के आवास पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। दोनों ने सभी के कल्याण की कामना की।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर तस्वीरों के साथ पोस्ट किया, ‘केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के आवास पर गणपति के दर्शन के लिए गया। भगवान श्री गणेश सभी को आशीर्वाद दें।’ राधाकृष्णन ने भी गोयल के आवास पर भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना की।

देशभर में उत्साह से मनाया जा रहा गणेश चतुर्थी का त्योहार
गणेश चतुर्थी के मौके पर सोमवार को देशभर में धार्मिक उत्साह और उमंग का माहौल रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रमुख पंडालों और मंदिरों में पहुंचे। भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस पर्व पर पारंपरिक रीति-रिवाजों, पूजा-पाठ और सामुदायिक आयोजनों के साथ उत्सव मनाया जा रहा है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर अलग-अलग दलों के राजनीतिक नेताओं ने भी पूजा और आरती की। उन्होंने पार्टी मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में खुशहाली और उत्साह की कामना की।

पीएम मोदी ने दीं देशवासियों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने देशवासियों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पवित्र पर्व लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आएगा। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, ‘मेरे सभी देशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं। दर्शन और पूजा के इस पवित्र पर्व से विघ्नों को दूर करने वाले भगवान गणेश सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नया उत्साह भरें। उनके दिव्य आशीर्वाद से सभी प्रयास सफल हों और देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे, यही मेरी प्रार्थना है।’

NATIONAL : ‘न्यायपालिका को भ्रष्टाचार और आलोचना जैसे मुद्दों से नहीं भागना चाहिए’, आम जनता के भरोसे पर CJI सूर्यकांत बोले- फैसला पसंद आए ये जरूरी नहीं

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका पर जनता का भरोसा, लोगों की मंजूरी से अलग है। उन्होंने कहा कि लोगों की पसंद के फैसले देने से भरोसा नहीं बनता बल्कि निष्पक्ष तरीके से न्याय करने से जनता का विश्वास कायम होता है। CJI ने यह भी कहा कि अदालतों को जांच, सवाल और जरूरत पड़ने पर आलोचना के लिए तैयार रहना चाहिए।

आपको बता दें कि CJI सूर्यकांत सोमवार को दिल्ली में आयोजित छठे राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर में मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का विषय था- Justice seen to be done: Transparency and public trust as pillars of the legal system.

कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और महेश जेठमलानी ने न्यायपालिका में प्रशासनिक सुधारों की जरूरत पर चिंता जताई। उन्होंने जजों की नियुक्ति समेत न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर CJI ने कहा कि सुधार व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए और कोई भी संस्था स्थिर रहकर लंबे समय तक ना तो टिक सकती है और ना ही इस बात पर गर्व कर सकती है कि उसमें कोई बदलाव नहीं हो रहा।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ ऐसे मुद्दे भी होते हैं जिन पर सार्वजनिक मंच से जवाब देना उचित नहीं होता। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम कैसे बना और अब तक किस तरह काम करता रहा है, इन सवालों के उनके पास कानूनी और ऐतिहासिक जवाब हैं।

उन्होंने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशों पर केंद्र सरकार की ओर से जजों की नियुक्ति में आमतौर पर कोई बड़ी रुकावट नहीं आती। उनके मुताबिक, यह खुद बताता है कि कॉलेजियम में किस तरह चर्चा होती है और आखिर में सिफारिशें कैसे तय की जाती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुधार का स्वागत होना चाहिए।

जजों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए प्रशासनिक सुधारों पर CJI ने कहा, ”मुख्य न्यायाधीश के तौर पर मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने जो व्यवस्था बनाई है, वह मजबूत, जवाबदेह और समय पर कार्रवाई करने वाली है।”

शिकायतों पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत का मत
उन्होंने शिकायतों के गलत इस्तेमाल की आशंका भी जताई। CJI ने कहा कि अगर हर फैसले पर शिकायत की अनुमति हो तो कोई भी न्यायिक अधिकारी जब अंतरिम आदेश देता है, किसी मामले की सुनवाई टालता है या अंतिम फैसला सुनाता है तो हर चरण पर शिकायत हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह गंभीर चर्चा का विषय है कि क्या हर शिकायत को सार्वजनिक मंच या वेबसाइट पर डालना चाहिए। या फिर इसके लिए एक मजबूत आंतरिक व्यवस्था होनी चाहिए जो पूरी निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ शिकायतों पर फैसला करे। CJI ने कहा कि ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है। लेकिन उसमें भी समय-समय पर सुधार और बेहतर काम करने की गुंजाइश हमेशा रहती है।

कोर्ट में पारदर्शिता का मतलब क्या?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत में पारदर्शिता का मतलब सिर्फ खुले दरवाजे और सार्वजनिक सुनवाई नहीं है। हालांकि ये भी इसका हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता का असली मतलब यह है कि अदालत के फैसले के पीछे क्या वजह है, इसे कोई भी व्यक्ति समझ और जांच सकता है। इसमें वह पक्ष भी शामिल है जिसके खिलाफ फैसला आया है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई अदालत सिर्फ अपना फैसला सुनाती है। लेकिन उसके पीछे की वजह नहीं बताती तो उसे पूरी तरह पारदर्शी नहीं कहा जा सकता।

जनता का भरोसा और जनता की मंजूरी एक जैसी चीज नहीं है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि दोनों के बीच का अंतर बहुत मायने रखता है।

उन्होंने कहा, ”अदालत लोगों की पसंद बनकर या उनकी इच्छा के मुताबिक फैसला देकर भरोसा हासिल नहीं करती। अदालत का भरोसा तब बनता है जब जिस व्यक्ति के खिलाफ फैसला आया हो और जो बिल्कुल अलग नतीजा चाहता था, वह भी यह मानकर जाए कि उसके मामले में निष्पक्ष तरीके से फैसला हुआ है। भरोसा हासिल करना मंजूरी पाने से कहीं ज्यादा मुश्किल और ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

CJI सूर्यकांत ने दिवंगत जस्टिस कृष्ण अय्यर का जिक्र करते हुए कहा कि वह जानते थे कि संस्थाएं जांच-पड़ताल से बचाकर रखने से साफ-सुथरी नहीं रहतीं। बल्कि वे लगातार जांच के दायरे में आने और उस जांच का सामना करने से मजबूत और विश्वसनीय बनी रहती हैं।

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर क्या बोले CJI
‘CJI ने NCERT की एक किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही का भी जिक्र किया। इस किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक अध्याय था। उन्होंने कहा कि इस मामले में यह सवाल भी सामने आया कि उचित आलोचना और न्यायपालिका पर जनता के भरोसे के बीच क्या संबंध है।

उन्होंने कहा, ”हमने अपने आदेश में दोहराया कि एक संस्था के तौर पर न्यायपालिका आलोचना से न तो बच सकती है और न ही बचनी चाहिए। पारदर्शिता की असली भावना भी यही है। अदालत जनता का भरोसा हासिल करने के लिए खुद को जांच से ऊपर नहीं रख सकती। उसे जांच, सवाल और जरूरत पड़ने पर आलोचना का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।”

CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका के लिए जनता का भरोसा कोई दिखावे की चीज नहीं है। यही वह आधार है जिस पर न्यायपालिका की पूरी ताकत और अधिकार टिके हैं।

उन्होंने कहा, ”पारदर्शिता इसलिए जरूरी है क्योंकि उसी से भरोसा पैदा होता है। ‘न्याय होता हुआ दिखना’ सिर्फ खुले में निष्पक्ष सुनवाई होने तक सीमित नहीं है। इसका मतलब यह भी है कि न्याय व्यवस्था बार-बार इस सवाल का सामना करने के लिए तैयार रहे कि क्या उसने अपने वादे और जिम्मेदारी को सही तरीके से निभाया है।”

NATIONAL : BRICS 2026 पर सवाल उठाने वाले चिदंबरम को BJP का जवाब- ‘नाराज फूफा’

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पी. चिदंबरम ने पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को हुए ठोस लाभ पर सवाल उठाए. भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसके रवैये की तुलना ‘नाराज फूफा’ से की.

भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन 2026 से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम के बयान पर सियासत गरमा गई है. चिदंबरम ने हाल के BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस लाभ पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पिछले दो-तीन सम्मेलनों से कोई महत्वपूर्ण या ठोस नतीजा नजर नहीं आया.

आगामी BRICS सम्मेलन के संदर्भ में चिदंबरम ने कहा कि भारत कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है. इनमें BRICS के अलावा शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और QUAD शामिल हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि इन संगठनों से भारत को आखिर क्या ठोस फायदा मिल रहा है.चिदंबरम के बयान पर BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है.

BJP ने ‘नाराज फूफा’ कहकर कांग्रेस पर साधा निशाना

चिदंबरम के बयान पर BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कांग्रेस के रवैये की तुलना ‘नाराज फूफा’ से की. भंडारी ने कहा कि यह ऐसा रवैया है, जिसमें व्यक्ति हमेशा नाराज रहता है. उन्होंने कहा कि जब भारत में BRICS शिखर सम्मेलन हो रहा है, तब कांग्रेस उसी ‘नाराज फूफा’ की तरह इसका विरोध कर रही है. उनके मुताबिक, कांग्रेस जानती है कि जब भी देश तरक्की करता है और भारत का गौरव बढ़ाने वाली कोई बात होती है, कांग्रेस उसका विरोध करती है.

‘कांग्रेस को राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद नहीं’

प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को अब यह एहसास होने लगा है कि शायद वे अपनी जिंदगी में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनते नहीं देख पाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को कभी BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने का मौका नहीं मिलेगा. भंडारी ने कहा कि कांग्रेस को FOMO यानी Fear Of Missing Out हो रहा है. उनके मुताबिक, पी. चिदंबरम का बयान राहुल गांधी के कहने पर ‘नाराज फूफा’ वाला रवैया दिखाता है.

BJP बोली- इसी सोच ने कांग्रेस को विपक्ष में रखा

BJP प्रवक्ता ने कहा कि यही सोच कांग्रेस को विपक्ष में रखने का कारण बनी हुई है और आगे भी उसे विपक्ष में बनाए रखेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत की उपलब्धियों और देश का गौरव बढ़ाने वाले आयोजनों का समर्थन करने के बजाय उनका विरोध कर रही है.

चिदंबरम ने BRICS के फायदे पर उठाए सवाल

इससे पहले चिदंबरम ने हाल के BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस लाभ पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पिछले दो-तीन सम्मेलनों से कोई महत्वपूर्ण या ठोस नतीजा नजर नहीं आया. आगामी BRICS सम्मेलन के संदर्भ में चिदंबरम ने कहा कि भारत कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है. इनमें BRICS के अलावा शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और QUAD शामिल हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि इन संगठनों से भारत को आखिर क्या ठोस फायदा मिल रहा है.

‘पिछले दो-तीन सम्मेलनों से ठोस फायदा नहीं दिखा’

चिदंबरम ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, “मुझे नहीं पता कि कितने राष्ट्रपति और कितने प्रधानमंत्री आ रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से कोई ठोस लाभ या ठोस नतीजे मिले हैं.” उन्होंने आगे कहा कि भारत BRICS, SCO, G20 और QUAD का हिस्सा है, लेकिन इन संगठनों से देश को क्या लाभ मिल रहा है, यह उन्हें दिखाई नहीं देता. चिदंबरम के मुताबिक, पिछले दो-तीन सम्मेलनों में उन्हें कोई खास फायदा नजर नहीं आया, जबकि इससे पहले हुए BRICS सम्मेलनों से कुछ ठोस लाभ मिले थे.

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