Thursday, September 17, 2026
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BUSINESS : 54000 करोड़ की डिजिटल धोखाधड़ी सरासर डकैती, कोर्ट ने कहा- पूरे देश में लागू हो एसओपी

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर बड़ा आदेश देते हुए केंद्र सरकार को आरबीआई की एसओपी को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ₹54,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी और डकैती के समान है।

देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए इसे डकैती या लूट करार दिया है। अदालत ने कहा कि अब तक ₹54,000 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगी के जरिए निकाली जा चुकी है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को पूरे देश में औपचारिक रूप से लागू किया जाए, ताकि डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों की लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और बैंकों से कहा कि वे ऐसे मामलों में समय पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। सुनवाई के दौरान अदालत ने बताया कि आरबीआई ने पहले ही एक एसओपी तैयार किया है, जिसके तहत साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर अस्थायी रूप से डेबिट कार्ड को होल्ड पर डालने जैसी त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को तुरंत रोकना है।

अंतर-विभागीय समन्वय के लिए बड़ा आदेश
डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अंतर-विभागीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए चार सप्ताह के भीतर एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) तैयार किया जाए। अदालत ने साफ शब्दों में कहा हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह आरबीआई की एसओपी को औपचारिक रूप से अपनाए और पूरे भारत में लागू करे, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो सके। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह देशभर में सामने आए डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान करे और उनसे जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जाए।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और दिल्ली सरकारों से कहा है कि जिन मामलों की पहचान की जाए, उनमें जांच के लिए आवश्यक मंजूरी (सैंक्शन) बिना देरी के प्रदान की जाए, ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरबीआई, दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य संबंधित एजेंसियां आपस में समन्वय कर एक संयुक्त बैठक आयोजित करें। इस बैठक का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी ढांचा तैयार करना होगा।

पीड़ितों के प्रति उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देते समय तकनीकी जटिलताओं में उलझने के बजाय एक व्यावहारिक और उदार रवैया अपनाया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसे अपराधों में आम नागरिक मानसिक और आर्थिक रूप से गहरा नुकसान झेलता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

WhatsApp Under Review: बिना चेतावनी बंद हुए कई WhatsApp अकाउंट, फूटा यूजर्स का गुस्सा; जानें कंपनी ने क्या कहा

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मेटा के स्वामित्व वाले मोबाइल मैसेजिंग एप- व्हाट्सएप के कई यूजर्स के खाते बंद किए जाने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को बिना किसी चेतावनी के भारत सहित कई देशों के यूजर के अकाउंट अचानक बंद कर दिए। कंपनी ने इन सभी अकाउंट को 24 घंटे के लिए समीक्षा के तहत डाल दिए।

क्या यूजर की सुरक्षा के लिए अकाउंट बैन?
व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने कहा कि हम हमेशा अपनी सेवा का दुरुपयोग करने वालों से आगे रहने और अन्य यूजर को सुरक्षित रखने के लिए अकाउंट को बैन करने की दिशा में काम करते हैं। कभी-कभी हमसे गलती हो जाती है, और यदि ऐसा होता है, तो हम लोगों को वापस चैट करने में सक्षम बनाने के लिए इसे जल्द से जल्द ठीक करने का प्रयास करते हैं।

कंपनी को अकाउंट गतिविधियों और डिवाइस की क्या जानकारी चाहिए?
यह समस्या रात लगभग 8 बजे के आसपास सामने आई। एप खोलने के बाद स्क्रीन पर यह संदेश दिखाई दे रहा था, अकाउंट समीक्षा में है। अनुरोध की तारीख 3 अगस्त 2026। आपकी अकाउंट गतिविधियों और डिवाइस की जानकारी की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह हमारी सेवा की शर्तों का पालन करता है। हम आमतौर पर 24 घंटे के भीतर आपको परिणाम की सूचना देंगे।

सोशल मीडिया पर यूजर्स का फूटा गुस्सा
बिना किसी गलती या चेतावनी के अकाउंट ब्लॉक होने पर यूजर्स ने एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने अपना गुस्सा निकाला और व्हाट्सएप से तुरंत मदद मांगी:

एक यूजर ने लिखा कि मेरा WhatsApp अकाउंट बिना किसी वजह के डिसेबल कर दिया गया है। मैंने अपील कर दी है, लेकिन रिव्यू पेज पर सिर्फ एक आम मैसेज दिख रहा है कि 24 घंटे के अंदर समीक्षा होगी। मेरी तुरंत मदद करें।वहीं एक्स पर पर सलोनी नाम की यूजर ने पोस्ट किया कि मेरा व्हाट्सएप अकाउंट बिना किसी वॉर्निंग के अचानक डिसेबल कर दिया गया। मैं सिर्फ ऑफिशियल एप ही इस्तेमाल करती हूं और मेरा पूरा काम व्हाट्सएप पर निर्भर करता है। प्लीज मेरी मदद करें।

अब आगे क्या होगा?
कंपनी के आधिकारिक बयान से यह साफ है कि अगर आपका अकाउंट किसी तकनीकी गड़बड़ी या सिस्टम की गलती की वजह से समीक्षा में गया है, तो समीक्षा प्रक्रिया पूरी होते ही 24 घंटे के भीतर आपका व्हाट्सएप अकाउंट अपने आप रिस्टोर कर दिया जाएगा।

NATIONAL : कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द संभव: शिवकुमार सरकार में 20 पद हैं खाली, मंत्री के बयान से क्या संकेत?

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कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने संकेत दिए हैं कि राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र से पहले नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पास करीब 20 विभागों का अतिरिक्त प्रभार है।

कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द हो सकता है। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने रविवार को संकेत दिए कि अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र से पहले नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। मीडिया से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार कभी भी और जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र अगस्त में प्रस्तावित है और उससे पहले पूरी मंत्रिपरिषद का गठन होना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पास करीब 20 विभागों का अतिरिक्त प्रभार है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सभी विभागों की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रियों को सौंप दी जाए, ताकि विधानसभा सत्र के दौरान कामकाज बेहतर ढंग से चल सके।

अभी केवल 14 मंत्री, जबकि 34 तक हो सकते हैं
वर्तमान में कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। नियमों के अनुसार राज्य में अधिकतम 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी अभी मंत्रिमंडल में कई पद खाली हैं, जिन्हें जल्द भरा जा सकता है।

NATIONAL : पहाड़ों में सावन का पहला सोमवार: केदारनाथ से लेकर हरिद्वार तक उमड़ी भक्तों की भीड़, भारी बारिश में उत्साह

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सावन के सोमवार पर शिव मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। भारी बारिश के बीच भी आज मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा हुआ है। केदारनाथ मंदिर में भी बारिश के बीच श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कांवड़ियों के साथ ही सुबह से ही भक्त बाबा केदार के दर्शनों के लिए कतार में लगे हुए हैं। भारी बारिश के बीच भक्तों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

बता दें कि पहाड़ों में सावन का पहला सोमवार आज है। मैदानी इलाकों में पक्ष के हिसाब से जबकि पहाड़ों में हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास शुरू होने के बाद पहले सोमवार को ही सावन मास का पहला सोमवार गिना जाता है। 4 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार पड़ेगा। ऐसे में आज पहाड़ों में शिव मंदिरों में सुबह से ही भारी भीड़ जुट रही है।

सावन माह के सोमवार के अवसर पर केदारनाथ में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। कांवड़ियों के साथ ही सुबह से ही भक्त बाबा केदार के दर्शनों के लिए कतार में लगे हुए हैं। भारी बारिश के बीच भक्तों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बारिश के बावजूद भी तड़के सुबह से ही शिव भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। सुबह 4 बजे से मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस बीच पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

सावन का महीना शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और तपस्या का प्रतीक है। बागेश्वर स्थित बाबा बागनाथ मंदिर में आज सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने पवित्र सरयू और गोमती नदियों के संगम में स्नान कर भोलेनाथ को गंगाजल, बेलपत्र और दूध अर्पित किया। हर तरफ ‘बम बम भोले’ के जयकारों की गूंज थी और भक्तगण जलाभिषेक के लिए कतारबद्ध नजर आए।

इस अवसर पर विशेष रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और श्रृंगार पूजन किया गया। पंडित कैलाश उपाध्याय ने बताया कि बाबा बागनाथ का यह मंदिर पौराणिक काल से श्रद्धा का केंद्र रहा है। मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने यहां व्याघ्र रूप में तप किया था, इसलिए इन्हें व्याग्रेश्वर महादेव कहा जाता है। समय के साथ यही नाम बागनाथ और फिर पूरे क्षेत्र का नाम बागेश्वर पड़ा।

हरिद्वार के शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। हरिद्वार में भी कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। अब तक करीब ढाई करोड़ कांवड़ियां जल भरकर अपने गंतव्य को पहुंच चुके हैं।हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही शिव भक्त लाइन में लगे दिखाई दिए। श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार कर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं।

सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है, कनखल भगवान महादेव का ससुराल है। भगवान शिव ने राजा दक्ष को वचन दिया था कि सावन के एक महीने वह यहीं पर वास करेंगे। इसलिए भगवान शिव सावन के एक महीने दक्ष प्रजापति मंदिर में ही वास करते हैं। देहरादून के टपकेश्वर समेत शिव मंदिरो में बारिश के बीच ही शिव भक्त पहुंच रहे हैं। हर तरफ लोग शिव भक्ति में रंगे हुए नजर आ रहे हैं।​ शिव मंदिरों को फुलों से भव्य तरीके से सजाया गया है।

NATIONAL : महिला पहलवान यौन शोषण केस में बरी होते ही बृजभूषण बोले- मैंने जो कहा था वो सही हुआ

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महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली राउज़ एवेन्यू कोर्ट से बृज भूषण शरण सिंह बरी हो गए हैं. कोर्ट के फैसले के बाद भूषण शरण सिंह ने

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया. अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण सिंह ने पहली प्रतिक्रिया दी है.

कासगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के फैसले के बाद कहा, ‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा… पहले दिन, जब मेरा पहला बयान आया, तो मैंने कहा था कि अगर कोई फैसला या कोई आरोप साबित होता है, तो मैं फांसी लगा लूंगा. आज, कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया. मैंने जो कहा था, वही सही साबित हुआ.’

घर पहुंचने पर फूलों की पंखुड़ियां से हुआ स्वागत
फैसले के बाद बृजभूषण ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें शुरुआत से ही अदालत पर पूरा भरोसा था. उन्होंने आगे कहा, ‘मैं शुरू से कहता रहा कि यह एक साजिश थी. तीन साल बाद अदालत ने मुझे बरी कर दिया. मैंने कभी खुद को अपराधी महसूस नहीं किया. आज मेरे और मेरे समर्थकों के लिए खुशी का दिन है.’

कोर्ट से बरी किए जाने के बाद बृज भूषण शरण सिंह के घर पर जश्न का माहौल है. उनके समर्थन और कार्यकर्ता आतिशबाजी और पटाखे फोड़कर खुशी मना रहे हैं. कोर्ट से बरी होने के बाद जब बृज भूषण शरण सिंह अपने घर पहुंचे तो उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं.

WFI की कुर्सी छोड़नी पड़ी, सांसद टिकट नहीं मिला
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे. राउज़ एवेन्यु कोर्ट ने 10 मई 2024 को बृज भूषण के खिलाफ धारा 354 और 354A के तहत आरोप तय किया था. साथ ही उनके सहयोगी विनोद तोमर के खिलाफ भी आरोप तय किया था.

हालांकि, कोर्ट ने बृजभूषण को छठी महिला पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों में बरी भी किया था. अब अदालत के ताजा फैसले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों को बरी कर दिया गया है. इस विवाद के कारण बृजभूषण सिंह को न सिर्फ भारतीय कुश्ती महासंघ की कुर्सी छोड़नी पड़ी, बल्कि बीजेपी ने उन्हें सांसदी का टिकट भी नहीं दिया था.

NATIONAL : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सरकार का बड़ा बयान; छात्रों पर केस नहीं होगा, 2700 आरोपियों पर FIR रहेगी कायम

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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि छात्रों के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल 2700 आरोपियों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी। कोर्ट ने भी सख्ती बरतने वाले अधिकारियों को बचाने से इनकार किया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने छात्रों को राहत देने वाला बड़ा बयान दिया। सरकार ने अदालत को बताया कि जिन छात्रों का प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से कोई संबंध नहीं पाया गया है, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी।

जिन लोगों की पहचान हिंसा, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में हुई है, उनके खिलाफ दर्ज लगभग 2700 एफआईआर को वापस नहीं लिया जाएगा। इन मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, ड्रोन रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की है। केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनकी भूमिका हिंसक घटनाओं में स्पष्ट रूप से सामने आई है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष छात्र या नागरिक को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान है। अदालत ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी पुलिस अधिकारी या सुरक्षा बल के जवान ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है या नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को केवल उसके पद या वर्दी के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ बिना पर्याप्त साक्ष्य के कार्रवाई न हो। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर होना जरूरी है।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले पर छात्र संगठनों ने सरकार के बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत मिलना सकारात्मक कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी मांग की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी निर्दोष छात्र को गलत तरीके से आरोपी न बनाया जाए।

सरकार के इस रुख से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होगा। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो केवल अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जबकि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत अब जांच की प्रगति, दर्ज एफआईआर और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने छात्रों को राहत देने वाला बड़ा बयान दिया। सरकार ने अदालत को बताया कि जिन छात्रों का प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से कोई संबंध नहीं पाया गया है, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी।

जिन लोगों की पहचान हिंसा, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में हुई है, उनके खिलाफ दर्ज लगभग 2700 एफआईआर को वापस नहीं लिया जाएगा। इन मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, ड्रोन रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की है। केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनकी भूमिका हिंसक घटनाओं में स्पष्ट रूप से सामने आई है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष छात्र या नागरिक को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान है। अदालत ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी पुलिस अधिकारी या सुरक्षा बल के जवान ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है या नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को केवल उसके पद या वर्दी के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ बिना पर्याप्त साक्ष्य के कार्रवाई न हो। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर होना जरूरी है।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले पर छात्र संगठनों ने सरकार के बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राहत मिलना सकारात्मक कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी मांग की कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी निर्दोष छात्र को गलत तरीके से आरोपी न बनाया जाए।

सरकार के इस रुख से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होगा। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो केवल अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जबकि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत अब जांच की प्रगति, दर्ज एफआईआर और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

NATIONAL : 100 रुपये उधार लेकर बोला- ‘आज किसी को मारनी है गोली…’, फिर पूर्व सरपंच के पति पर कर दी फायरिंग

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पंजाब के मोहाली में पूर्व सरपंच के पति रजनीश कुमार को गोली मारने के मामले में जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी पूर्व सैनिक महिंदर सिंह उर्फ मिंदा ने वारदात से ठीक पहले रजनीश कुमार से 100 रुपये उधार लिए थे. उसने यह कहकर पैसे मांगे थे कि उसे शराब पीनी है. इतना ही नहीं, उसने पैसे लेते समय कथित तौर पर यह भी कहा था कि “आज किसी को गोली मारनी है.”

उस वक्त रजनीश कुमार को लगा कि महिंदर मजाक कर रहा है, लेकिन कुछ ही देर बाद आरोपी शराब पीकर लौटा और दुकान के बाहर बैठे रजनीश पर फायरिंग कर दी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय बाजार में काफी भीड़ थी और कई बच्चे भी आसपास खेल रहे थे. सियालबा निवासी विजय कुमार ने बताया कि गोली चलने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी से राइफल छीन ली, जिससे बड़ा हादसा टल गया.

वहीं, मौके पर मौजूद अभिजीत सिंह ने बताया कि शनिवार होने के कारण बाजार में चहल-पहल थी. इसी दौरान महिंदर सिंह अचानक वहां पहुंचा और बिना किसी चेतावनी के रजनीश कुमार पर फायरिंग शुरू कर दी. एक गोली रजनीश के पेट में लगी, दूसरी दीवार में जा लगी, जबकि तीसरा फायर हवा में किया गया. लोगों ने समय रहते आरोपी को काबू कर लिया, नहीं तो कई अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ सकते थे.

घायल को तुरंत पीजीआई पहुंचाया गया
पड़ोसी दुकानदार शिव कुमार ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर वह बाहर आए तो देखा कि रजनीश कुमार पेट पकड़कर खड़े थे और खून बह रहा था. उन्होंने बिना देर किए घायल को पीजीआई अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया. फिलहाल उनका इलाज जारी है.

आरोपी गिरफ्तार, एक दिन की पुलिस रिमांड
मामले के जांच अधिकारी परमिंदर सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी महिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया. घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बयान देने के लिए फिलहाल अनफिट घोषित किया है.

घायल के भाई विनोद कुमार की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27, 54 और 59 के तहत मामला दर्ज किया है. आरोपी को अदालत में पेश कर एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है.

लाइसेंसी हथियार और प्रशासन से जवाब तलब
स्थानीय लोगों के अनुसार, महिंदर सिंह पूर्व सैनिक है और आर्थिक रूप से संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है. उसकी दो बेटियां विदेश में सेटल हैं, जबकि बेटा मोहाली की एक निजी कंपनी में कार्यरत है. उसके पास सुरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार था.

अब पुलिस ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पूछा है कि यदि आरोपी नशे का आदी था तो उसे हथियार का लाइसेंस कैसे जारी किया गया. प्रशासन ने लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है. वहीं पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वारदात के पीछे सिर्फ नशा वजह था या कोई पुरानी रंजिश भी थी.

NATIONAL : यह भारत को अस्थिर करने की साजिश… फेसबुक की गलती पर भड़की संसदीय समिति, जुकरबर्ग को अल्टीमेटम

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संसदीय समिति ने फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो 5 घंटे हटाए जाने पर सख्त रुख अपनाया. समिति अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने इसे देश को अस्थिर करने का प्रयास बताते हुए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की है. चेतावनी दी गई है कि माफी न मांगने पर आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मेटा की सेफ हार्बर सुरक्षा समाप्त कर दी जाएगी.

नई दिल्‍ली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक आधिकारिक वीडियो अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद भारत में सियासी और रणनीतिक हलचल तेज हो गई है. संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की. संसदीय समिति ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि मार्क जुकरबर्ग इस मामले में व्यक्तिगत रूप से माफी नहीं मांगते हैं तो भारत में कंपनी को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ली जा सकती है.

संसदीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद और समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने टेक दिग्गज मेटा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के वीडियो को हटाना महज एक तकनीकी चूक नहीं बल्कि देश को अस्थिर करने की एक सोची-समझी कोशिश को दर्शाता है.

दुबे ने कहा, “हमारी समिति ने मेटा को दो बातें स्पष्ट रूप से बता दी हैं. पहली यह कि माफी सीधे मार्क जुकरबर्ग की ओर से आनी चाहिए. अगर जुकरबर्ग ऐसा नहीं करते हैं तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत उन्हें प्राप्त सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए.” उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री का वीडियो 5 घंटे (रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक) गायब रह सकता है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता के दृष्टिकोण से बेहद चिंताजनक विषय है.

भाजपा सांसद ने जुकरबर्ग के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जनवरी में 2024 चुनावों को लेकर दिए गए उनके बयान और बाद में मांगी गई माफी से यह संकेत मिलता है कि मंशा भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की रही है. इसके अलावा, समिति ने मेटा, यूट्यूब और एक्स (X) जैसे दिग्गजों द्वारा चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) और महिलाओं को प्रभावित करने वाले कंटेंट पर ठोस कार्रवाई न करने पर भी सवाल उठाए.

क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 28 जुलाई की तड़के शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक पेज से उनका एक वीडियो अचानक गायब हो गया. यह वीडियो जनरेशन जेड (Gen Z) के नाम उनका संदेश था. उस दौरान यूज़र्स को स्क्रीन पर एक संदेश दिखाई दिया कि “कानूनी अनुरोध” (Legal Request) के कारण यह सामग्री भारत में रोकी गई है. विवाद बढ़ने के बाद मेटा ने वीडियो बहाल किया और इसे एक ‘आंतरिक तकनीकी खराबी’ बताते हुए खेद व्यक्त किया, जिसे संसदीय समिति ने खारिज कर दिया है.

संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने पर मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है. समिति ने चेतावनी दी है कि माफी न मांगने पर मेटा की ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा समाप्त की जा सकती है.

फेसबुक से पीएम मोदी का वीडियो हटने पर निशिकांत दुबे ने क्या आरोप लगाया?

समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि 5 घंटे तक पीएम मोदी का वीडियो हटाया जाना कोई आम गलती नहीं, बल्कि भारत को अस्थिर करने का एक प्रयास दिखाता है.

NATIONAL : ‘पीएम मोदी मेरे सबसे अच्छे दोस्त’, नेतन्याहू ने की जमकर तारीफ, बोले- भारत से मिलने वाला सपोर्ट लाजवाब

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ईरान के साथ जारी संघर्ष और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. सोमवार को बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में भारी इन्वेस्ट कर रहा है. उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सबसे बड़ा दोस्त बताया और भारत से मिले समर्थन की जमकर तारीफ की.

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी उनके सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और भारत से इजरायल को मिलने वाला सपोर्ट लाजवाब है.सोमवार को इजरायल के विदेश संबंधों पर बात करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश नए-नए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है. भारत इसमें सबसे अहम देशों में शामिल है. उन्होंने कहा कि हमें और ज्यादा मजबूत साझेदारियां बनानी होंगी. इसलिए वो भारत के साथ अपने रिश्तों में भारी निवेश कर रहे है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं.”

‘कौन कहता है इजरायल अकेला है?’
नेतन्याहू ने उन दावों को भी खारिज किया कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है. उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि इजरायल अकेला है, लेकिन भारत से इजरायल और मुझे जो समर्थन मिलता है, वह सचमुच लाजवाब है.

पिछले कुछ सालों भारत और इजरायल के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं. खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक, कृषि, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग में बड़ा विस्तार हुआ है.

साल 2018 में नेतन्याहू भारत आए थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच 9 अहम समझौतों पर साइन हुए थे. दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल संबंधों को खास साझेदारी” का दर्जा दिया था.

2026 में रिश्तों को मिला नया स्तर
इस साल दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करते हुए इंडिया-इजरायल स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर पीस, इनोवेशन एंड प्रॉस्पेरिटी का दर्जा दिया.
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया था. इस दौरान दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा, क्रिटिकल मिनरल, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और लेबर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.

भारत को बताया ‘वैश्विक महाशक्ति’
नेतन्याहू इससे पहले भी भारत को दुनिया की बड़ी ताकत बता चुके हैं. उन्होंने कई बार कहा है कि भारत इजरायल का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के रिश्ते लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं.

NATIONAL : दिल्ली की जेलों में कैदी की मौत पर परिजनों को मिलेंगे 7.5 लाख रुपए— CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला

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राजधानी दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों की अभिरक्षा के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौतों को लेकर दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऐसे मामलों में मृतक कैदियों के परिजनों को आर्थिक मदद देने के लिए नई मुआवजा योजना अधिसूचित ….

News Delhi: राजधानी दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों की अभिरक्षा के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौतों को लेकर दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऐसे मामलों में मृतक कैदियों के परिजनों को आर्थिक मदद देने के लिए नई मुआवजा योजना अधिसूचित कर दी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइंस के तहत तैयार इस नीति में घटना की गंभीरता के हिसाब से 5 लाख से लेकर 7.5 लाख रुपए तक के मुआवजे का प्रावधान किया गया है।

इस नई नीति की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कस्टडी के दौरान किसी भी व्यक्ति की अप्राकृतिक मौत बेहद चिंताजनक और गंभीर मामला है। सरकार का मकसद जेलों के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है, ताकि हर मामले में निष्पक्ष न्याय हो सके।

गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, मुआवजे की राशि को 2 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:-

  • 7.5 लाख रुपए का मुआवजा: अगर किसी कैदी की मौत जेल के अंदर कैदियों के बीच हुई हिंसक झड़प में होती है, या फिर जेल कर्मचारियों की मारपीट व यातना के कारण जान जाती है, तो उसके परिवार (निकटतम परिजन या कानूनी उत्तराधिकारी) को 7.5 लाख रुपए दिए जाएंगे।
  • 5 लाख रुपए का मुआवजा: यदि मौत जेल प्रशासन, डॉक्टरों या पैरामेडिकल स्टाफ की लापरवाही से होती है, या फिर कैदी जेल के भीतर खुदकुशी कर लेता है, तो परिजनों को 5 लाख रुपए की सहायता मिलेगी।

बताया जा रहा है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक बीमारी, उम्र संबंधी कारणों, जेल से भागने की कोशिश के दौरान हुई दुर्घटना या किसी प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली मौतों पर यह योजना लागू नहीं होगी। वहीं मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पूरी रिपोर्ट महानिदेशक को सौंपी जाएगी, जिसमें मजिस्ट्रेट जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल हिस्ट्री शामिल होगी। महानिदेशक की अगुवाई वाली कमेटी की सिफारिश पर प्रशासनिक सचिव अंतिम मुहर लगाएंगे। राशि जारी होने के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट एनएचआरसी के साथ भी साझा की जाएगी।

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