Friday, June 26, 2026
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NATIONAL : बारिश थमते ही बढ़ने लगा तापमान, 9 मई से पश्चिम राजस्थान में हीटवेव की संभावना

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जयपुर, 06 मई (हि.स.)। प्रदेश में बारिश का दौर कमजोर पड़ने के साथ ही तापमान में फिर बढ़ोतरी दर्ज होने लगी है। बुधवार को कई शहरों के अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री तक उछाल देखा गया, जबकि पांच शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार फलौदी सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.8 और न्यूनतम 30.8 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और पाली में भी दिन का तापमान 40 डिग्री से अधिक रहा।

राधेश्याम शर्मा के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में आगामी दिनों में आंधी-बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी। हालांकि उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में अगले 2-3 दिन मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि अगले 3-4 दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। 9 मई से पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर जोधपुर संभाग के सीमावर्ती इलाकों में हीटवेव का नया दौर शुरू होने की संभावना है, जहां तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंच सकता है। इसके साथ ही 7 मई से जोधपुर संभाग और आसपास के क्षेत्रों में 20 से 30 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से धूलभरी हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। मंगलवार को राज्य के कुछ हिस्सों में मेघगर्जन और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सर्वाधिक 26 मिमी वर्षा सुमेरपुर (पाली) में रिकॉर्ड की गई।

राजधानी जयपुर में भी तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली है। यहां अधिकतम तापमान 36.6 और न्यूनतम 24.6 डिग्री दर्ज किया गया। दिन के तापमान में करीब 2 डिग्री और रात के तापमान में 2.3 डिग्री की वृद्धि हुई है। हालांकि हवाएं चलने से धूप की तीव्रता कुछ कम महसूस की गई। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में जयपुर सहित उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में गर्मी का असर बढ़ेगा।

WORLD : अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संदेशों का आदान प्रदान तेज

  • ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अब समझौता संभव
  • अमेरिकी सेना का प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन रुका-तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं
  • ईरान के विदेशमंत्री पहुंचे चीन, समकक्ष से की वार्ता

वाशिंगटन/बीजिंग, 07 मई (हि.स.)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पिछले 24 घंटों में ईरान के साथ उनकी बहुत अच्छी बातचीत हुई है। अब यह पूरी तरह संभव है कि हम कोई समझौता कर लें। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि तेहरान ने अभी तक वाशिंगटन के ताजा प्रस्ताव पर कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। इस बीच ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिकी सेना के प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन को रोक दिया है। उधर, ईरान के विदेशमंत्री चीन पहुंचे हैं। वहां उन्होंने इस समझौते के संबंध में बातचीत की है।

अल जजीरा, सीबीएस न्यूज और तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में एक सवाल पर कहा कि ईरान के साथ बातचीत के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है, लेकिन समझौता जरूर होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को आमने-सामने की बातचीत के लिए ईरान भेजना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता। ट्रंप ने दोहराया कि अगर अमेरिका अभी ईरान को छोड़ देता है, तो उसे दोबारा खड़ा होने में 20 साल लग जाएंगे। उनका मानना है कि ईरान पतन के कगार पर है। वह हार मानने को तैयार है।

ट्रंप ने स्टॉक मार्केट के ऊपर जाने और तेल की कीमतों के नीचे आने की बात की।उन्होंने कहा कि तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का जितना असर ईरान पर पड़ रहा है, उतना ही आर्थिक असर अमेरिका में भी पड़ रहा है। उधर, ईरान के शीर्ष राजनयिक ने बुधवार को बीजिंग में अपने समकक्ष वांग यी सहित चीन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। वांग ने चीन को ईरान का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया है। वांग ने अमेरिका-इजराइल की एकीकृत सैन्य कार्रवाई और युद्ध की निंदा की।

चीन के विदेशमंत्री ने लड़ाई को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया और संघर्ष के फिर से शुरू होने के प्रति आगाह किया। उन्होंने फारस की खाड़ी के देशों से अपने भविष्य की बागडोर अपने हाथों में लेने का आग्रह किया और अच्छे संबंध बनाने के लिए ईरान तथा उसके पड़ोसियों के बीच बातचीत को प्रोत्साहित किया। बीजिंग में ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने ईरान-अमेरिका वार्ता में हुए नवीनतम घटनाक्रम के बारे में वांग को जानकारी दी। अराघची की चीन यात्रा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग की यात्रा से ठीक एक सप्ताह पहले हुई है। ट्रंप 14-15 मई को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग जाने वाले हैं। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान चीन की उनकी पहली यात्रा होगी।

ईरान के विदेश मंत्री ने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ बुधवार को फोन पर बातचीत भी की। उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के साथ-साथ हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। रियाद ने क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए बातचीत का आह्वान किया है। ईरान का कहना है कि फारस की खाड़ी में अमेरिका की मौजूदगी ही पश्चिम एशिया में अस्थिरता का मुख्य कारण है।

NATIONAL : विजय से हाथ मिलाने को तैयार कांग्रेस के विधायक, गठबंधन के बदले क्या चाहिए ये भी बता दिया!

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तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर विजय ने चेन्नई के पट्टिनमपक्कम स्थित अपने आवास पर विधायकों संग बैठक की. इस बैठक में विजय ने टीवीके कैबिनेट के संभावित मंत्रियों पर मंथन किया.

तमिलनाडु की 234 सीटों में 108 सीटें जीतकर विजय की पार्टी टीवीके ने इतिहास रच दिया है. टीवीके हालांकि बहुमत के आकंड़े को पार नहीं कर पाई लेकिन राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. इस बीच कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है.सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में गहन चर्चा के बाद टीवीके को समर्थन देने पर बात बनी है. लेकिन कांग्रेस सरकार में मंत्री पद चाहती है.

कांग्रेस तमिलनाडु सरकार में दो मंत्री पद की मांग कर सकती है. इसके अलावा बोर्ड और कॉरपोरेशन में भी चेयरमैन पद की मांग कर सकती है. इस मीटिंग में जिन बातों पर सहमति बनी है. उसे लेकर रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को भेजी जाएगी. हाईकमान इस पर अंतिम फैसला लेगा.

सूत्रों का कहना है कि टीवीके को सशर्त समर्थन देने के लिए कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में रिजोल्यूशन पारित किया गया है. कांग्रेस विधायक टीवीके को सशर्त समर्थन देने को तैयार हैं. इस संबंध में कल समर्थन पत्र जारी किया जाएगा और इसके बाद कांग्रेस विधायक टीवीके प्रमुख विजय से मुलाकात करेंगे. इस फैसले की जानकारी टीवीके को दे दी गई है.

इससे पहले तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर विजय ने चेन्नई के पट्टिनमपक्कम स्थित अपने आवास पर विधायकों संग बैठक की. इस बैठक में विजय ने टीवीके कैबिनेट के संभावित मंत्रियों पर मंथन किया. इस दौरान जिन संभावित मंत्रियों के नाम सामने आए हैं, उनमें टी. नगर से विधायक एन. आनंद, तिरुचेंगोडे से अरुणराज, गोपिचेट्टिपालयम से सेंगोट्टैयन, विल्लीवक्कम से अधव अर्जुना, तिरुपरंकुंद्रम से विधायक सीटीआर निर्मलकुमार, आरके. नगर से मारिया विल्सन, एगमोर से राजमोहन, कोलाथुर से वीएस बाबू और जेसीडी प्रभाकर के नाम शामिल है.

टीवीके ने राज्यपाल को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें उनसे मिलने का समय मांगा गया है. वहीं, कांग्रेस के सभी पांचों विधायकों ने विजय की पार्टी के साथ गठबंधन की इच्छा जताई है.

सूत्रों के मुताबिक, विजय सात मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं. उनकी कैबिनेट में उनके साथ कुल नौ मंत्री होंगे.बता दें कि तमिलनाडु में ऐतिहासिक उलटफेर में टीवीके ने डीएमके को शिकस्त दी. डीएमके ने 59 सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी प्रमुख स्टालिन कोलाथुर सीट से हार गए. एआईएडीएमके 47 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर रही. टीवीके की यह जीत लगभग छह दशकों में एक बड़ी जीत है, जब तमिलनाडु की जमी-जमाई द्रविड़ राजनीति की दोध्रुवीय व्यवस्था को निर्णायक रूप से तोड़ा गया है.

NATIONAL : भारत खरीदेगा 5 नए S-400…सैन्य ताकत में होगा इजाफा, 2.38 लाख करोड़ के रक्षा सौदों पर मुहर

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भारतीय वायु सेना ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टनम की पांच और स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दे दी है। यह अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम लगभग 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी किया गया था, जहां इसने करीब 300 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विमान को निशाना बनाया था
भारत ने अपनी सैन्य शक्ति और समुद्री निगरानी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने शुक्रवार को विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसके तहत लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये की लागत के सैन्य हार्डवेयर खरीदे जाएंगे।

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली खरीदने को लेकर रूस की कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 445 करोड़ रुपये का समझौता किया है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के पी-8आई लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान के रखरखाव के लिए बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 413 करोड़ रुपये का एक अलग अनुबंध किया गया है। सरकार ने बताया कि भारतीय सेना के लिए ‘तुंगुस्का’ वायु रक्षा मिसाइल सिस्टम खरीदे जाएंगे, जो विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों से बचाव में मदद करेंगे। इससे भारत की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी, साथ ही भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग भी और गहरा होगा।

वहीं, पी-8आई विमानों के रखरखाव से जुड़ा यह समझौता ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के तहत किया गया है, जिसमें 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा। इससे इन विमानों की मरम्मत और देखभाल देश में ही बेहतर तरीके से हो सकेगी। पी-8आई एक आधुनिक और बहु-उद्देश्यीय लंबी दूरी का समुद्री निगरानी विमान है, जो पनडुब्बियों की पहचान और समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। फिलहाल भारतीय नौसेना ऐसे 12 विमानों का इस्तेमाल कर रही है।

एमटीए (मध्यम परिवहन विमान) भारतीय वायु सेना के पुराने हो चुके मुख्य परिवहन विमान एएन-32 की जगह लेगा। यह नया विमान 18 से 30 टन तक का भार ले जाने में सक्षम होगा। इसके आने से आईएल-76 और एएन-32 के बीच जो क्षमता का अंतर है, उसे पूरा करने में मदद मिलेगी। इस नए विमान की दौड़ में सबसे आगे ब्राज़ील की कंपनी एम्ब्रेयर का सी-390 विमान है, जिसकी भार उठाने की क्षमता करीब 26 टन है। इसके अलावा यूरोप की कंपनी एयरबस का ए400एम विमान भी एक मजबूत दावेदार है, जो लगभग 37 टन तक का भार ले सकता है। वहीं, लॉकहीड मार्टिन का सी-130जे विमान भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल है। यह वही विमान है जिसे भारतीय वायु सेना पहले से इस्तेमाल कर रही है।

भारतीय वायु सेना ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टनम की पांच और स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दे दी है। यह अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम लगभग 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी किया गया था, जहां इसने करीब 300 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विमान को निशाना बनाया था। फिलहाल वायु सेना के पास एस-400 की तीन स्क्वाड्रन हैं और दो अन्य स्क्वाड्रन इस साल मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय की शीर्ष खरीद संस्था ने स्वदेशी ‘धनुष’ तोप प्रणाली की 300 और इकाइयों की खरीद को भी मंजूरी दी है। यह पहले दिए गए ऑर्डर का अगला हिस्सा है। इससे पहले भारतीय सेना के पास ऐसी 114 तोपें मौजूद थीं। साथ ही टैंकों के लिए कवच-भेदी (आर्मर-पियर्सिंग) गोला-बारूद की खरीद को भी पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अलग-अलग तरह के ड्रोन की खरीद, सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के लिए एएल-31 जेट इंजनों की मरम्मत (ओवरहॉल), और तटरक्षक बल के लिए भारी होवरक्राफ्ट खरीदने का रास्ता भी साफ कर दिया है।

WORLD : पश्चिम एशिया संघर्ष ने बदला खेल, अप्रैल में 16% तक गिरी LPG खपत, क्या स्थिति है पेट्रोल-डीजल की?

ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है।

पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते एनर्जी सप्लाई को काफी धक्का पहुंचा है। भारत में एलपीजी को लेकर लगातार सरकार लेटेस्ट आंकड़े शेयर करती रहती है। रसोई गैस यानी कि एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) को लेकर भारत की निर्भरता आयात पर काफी ज्यादा रही है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है। अमेरिका और ईरान में युद्धविराम हुआ है, लेकिन अभी तक दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। वहीं भारत में रसोई गैस की खपत अप्रैल के महीने में 16% तक लुढ़क कर 22 लाख टन रह गई है। रसोई गैस को लेकर आज जारी लेटेस्ट आंकड़ों में यह जानकारी मिली।

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल में एलपीजी की घरेलू खपत सालाना आधार पर 16.16% घटकर 22 लाख टन रह गई जबकि अप्रैल 2025 में यह 26.2 लाख टन थी। मासिक आधार पर भी एलपीजी खपत में गिरावट दर्ज की गई है। मार्च 2026 में एलपीजी की घरेलू खपत 23.79 लाख टन रही थी। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष छिड़ने के कारण इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आने वाली गैस की खेपों में बाधा आई।

सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए होटल और उद्योगों जैसे कमर्शियल उपभोक्ताओं को सप्लाई घटा दी है। साथ ही घरेलू सिलेंडर की दो रिफिलिंग के बीच अंतराल भी बढ़ाया गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में विमानन ईंधन (एटीएफ) की खपत 1.37% घटकर 7.61 लाख टन रह गई, जो हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों में कमी का असर दर्शाती है। इस दौरान डीजल की खपत वृद्धि दर में भी सुस्ती रही और यह केवल 0.25% बढ़कर 82.82 लाख टन रही। मार्च में इसमें 8.1% की वृद्धि हुई थी। हालांकि पेट्रोल की खपत अप्रैल में 6.36% बढ़कर 36.7 लाख टन रही। हालांकि यह वृद्धि मार्च के 7.6% से कम है। सरकार के स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के प्रयासों के कारण पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी खपत लगातार बढ़ रही थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक तनाव का इस पर असर पड़ा है।

NATIONAL : इंडिगो फ्लाइट में पावर बैंक में ब्लास्ट, इमरजेंसी गेट से निकाले गए पैसेंजर

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इंडिगो की हैदराबाद-चंडीगढ़ फ्लाइट में लैंडिंग के बाद पावर बैंक में आग लगने से हड़कंप मच गया. केबिन में धुआं भरने पर तुरंत इमरजेंसी निकासी कर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. किसी बड़ी जनहानि की खबर नहीं है. एयरलाइन ने जांच के बाद ही विमान को दोबारा उड़ाने की बात कही. वहीं नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के अनुसार पावर बैंक का इस्तेमाल फ्लाइट में करना और उसे साथ ले जाना प्रतिबंधित है.

चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर मंगलवार को अफरा-तफरी मच गई. इंडिगो की हैदराबाद से आई फ्लाइट में एक यात्री के पावर बैंक में अचानक आग लग गई. एयरलाइन के मुताबिक, फ्लाइट 6E-108 लैंडिंग के बाद रनवे पर खड़ी थी, तभी एक यात्री के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में आग लगने की घटना सामने आई. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत इमरजेंसी निकासी (इवैक्यूएशन) शुरू कर दी गई और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर टर्मिनल तक पहुंचाया गया.

घटना के दौरान विमान के केबिन में धुआं भर गया था, जिससे यात्रियों को घबराहट होने लगी. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में यात्री रनवे पर उतरते दिखाई दिए. एयरलाइन ने बताया कि सभी यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और विमान की दोबारा उड़ान से पहले पूरी जांच की जाएगी.

इस बीच, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के 2026 के नए नियमों के अनुसार, फ्लाइट में पावर बैंक ले जाने की अनुमति केवल कैरी-ऑन सामान में ही होती है. यात्रियों को फ्लाइट में फोन और अन्य डिवाइस चार्ज करने के लिए पावर बैंक का उपयोग करने की अनुमति नहीं है.

DGCA के नियमों में यह भी कहा गया है कि पावर बैंक और अतिरिक्त बैटरी जैसी चीजो को फ्लाइट में ऊपर बने कंपार्टमेंट में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि ऐसी जगहों पर आग लगने पर उसे पहचानना और बुझाना ज्यादा मुश्किल होता है.

WORLD : कर्ज से परेशान पाकिस्तान ने शराब एक्सपोर्ट शुरू किया:गैर मुस्लिम देशों को सप्लाई, 50 साल पहले इस्लाम का हवाला देकर बैन किया था

कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने 50 साल बाद फिर से दूसरे देशों को शराब बेचना शुरू कर दिया है। देश की इकलौती लोकल कंपनी मरी ब्रूअरी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स एक्सपोर्ट की हैं।कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के मुताबिक, अभी शुरुआत में विदेशों में नेटवर्क बनाया जा रहा है और आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना है।

पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए करीब 50 साल पहले इस्लामिक नियमों का हवाला देकर शराब पर बैन लगाया गया था। इसके बाद शराब का एक्सपोर्ट भी बंद हो गया था। हालांकि, पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के लिए कुछ छूट थी।पाकिस्तान सरकार ने 2025 में शराब एक्सपोर्ट की अनुमति दी थी, जिसके बाद अब उन देशों में सप्लाई शुरू की गई जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं।

पाकिस्तान पर 138 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2026 में सरकार की वास्तविक आय करीब 11,072 अरब पाकिस्तानी रुपए (40 अरब डॉलर) है, जबकि खर्च 16,286 अरब रुपए (58 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 8,200 अरब रुपए (30 अरब डॉलर) सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं।

पाकिस्तान पर इस समय लगभग 38,640 अरब पाकिस्तानी रुपए (138 अरब डॉलर) का बाहरी कर्ज है। इसमें सरकारी कर्ज के अलावा निजी क्षेत्र, बैंकों और कंपनियों की देनदारियां भी शामिल हैं। इसमें से करीब 25,760 अरब पाकिस्तानी रुपए (92 अरब डॉलर) सरकारी कर्ज है।

पहले नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट ही बेच रही थी मरी ब्रूअरी

पिछले कई सालों से मरी ब्रूअरी सिर्फ नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। इसमें पैकेज्ड जूस, मिनरल वाटर और फ्रूट फ्लेवर वाली ड्रिंक्स शामिल हैं।पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की कमाई 100 मिलियन डॉलर (28 अरब PKR) रही। कंपनी के CEO इस्फानयार भंडारा ने एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए कोशिश की थी।में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में एक चीनी कंपनी को भी शराब बनाने की इजाजत दी थी, ताकि वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों की जरूरतें पूरी हो सकें।बैन से पहले मरी ब्रूअरी भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में शराब का निर्यात करती थी। अब एक बार फिर कंपनी विदेशी बाजार में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है।

अप्रैल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने देश में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उस वक्त भुट्टो सरकार के खिलाफ एक बड़ा और हिंसक विरोध आंदोलन चल रहा था।

भुट्टो पर 1977 के चुनाव में धांधली करने के अलावा ‘पश्चिमी लाइफस्टाइल’ अपनाने जैसे आरोप लग रहे थे। जब भुट्टो ने इन विपक्षी नेताओं से बातचीत शुरू की, तो उनकी कुछ मांगें थीं। जैसे नाइट क्लब और बार बंद किए जाएं और शराब की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए।

इसी दबाव में भुट्टो सरकार ने कराची में बनने वाले एक बड़े कैसीनो की योजना भी रद्द कर दी। इस कैसिनों को मई 1977 में शुरू होना था। यह कैसीनो एक कारोबारी तुफैल शेख बना रहे थे, जिनके पुराने सैन्य शासक अयूब खान और बाद में भुट्टो सरकार से अच्छे संबंध थे।

शेख पहले से ही कराची के सद्दर इलाके में होटल और नाइट क्लब चलाते थे और उन्हें उम्मीद थी कि नए कैसीनो खाड़ी देशों और यूरोप से बहुत से टूरिस्ट पाकिस्तान आएंगे।

जब भुट्टो ने शराब और नाइट क्लब पर रोक लगाने का फैसला किया, तो शेख परेशना हो गए। लेकिन भुट्टो ने उन्हें भरोसा दिया कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए है और हालात ठीक होते ही इसे खत्म कर दिया जाएगा।

जनरल जिया उल हक (बाएं) और जुल्फिकार अली भुट्टो (दाएं)। जिया के आदेश के बाद ही भुट्टो को फांसी दी गई थी। जनरल जिया बाद में प्लेन क्रैश में मारे गए थे।
जनरल जिया उल हक (बाएं) और जुल्फिकार अली भुट्टो (दाएं)। जिया के आदेश के बाद ही भुट्टो को फांसी दी गई थी। जनरल जिया बाद में प्लेन क्रैश में मारे गए थे।

कागज पर भले ही बार और शराब की दुकानें बंद हो गई थीं, लेकिन होटलों और दुकानों के पीछे के रास्तों से शराब आसानी से मिल रही थी। लेकिन भुट्टो ज्यादा दिन सत्ता में नहीं रह पाए। जुलाई 1977 में एक सैन्य शासक जिया उल हक ने उनकी सरकार गिरा दी।

जिया ने सत्ता में आने के बाद इस कानून को और सख्त कर दिया और इसे इस्लामी कानून से जोड़ दिया। इसमें साफ कहा गया कि मुसलमानों के लिए शराब बेचना और पीना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा होगी।

हालांकि एक रास्ता छोड़ा गया- लाइसेंस वाली शराब की दुकानें। ये दुकानें सिर्फ गैर-मुस्लिम लोगों के नाम पर चल सकती थीं और उन्हें ही शराब बेचने की अनुमति थी। विदेशी लोग भी सरकार से परमिट लेकर वहां से शराब खरीद सकते थे।

समय के साथ पाकिस्तान में ऐसी लाइसेंस वाली शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती गई, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में, जैसे कराची और क्वेटा में। जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर (1999–2008) में ये और बढ़ीं।

मुशर्रफ खुद को उदारवादी बताते थे। उन्होंने 1979 के कानून को हटाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं कर पाए। हालांकि उनके समय में शराब से जुड़े कानून को लागू करने में ढील दे दी गई। इस वजह से मुसलमानों के लिए भी शराब हासिल करना आसान हो गया था।

दावा- शराब बैन की वजह से कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए

पाकिस्तान के धार्मिक संगठन आज भी कहते हैं कि सरकारें शराबबंदी को सही तरीके से लागू नहीं करतीं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि इस पाबंदी ने अवैध शराब माफिया को जन्म दिया और जहरीली शराब से सैकड़ों लोगों की मौत हुई।

उनका यह भी कहना है कि शराब पर रोक के कारण कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए, जो कहीं ज्यादा खतरनाक है।

एक आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि 1979 में पाकिस्तान में हेरोइन के सिर्फ दो मामले सामने आए थे, लेकिन 1985 तक पाकिस्तान दुनिया में हेरोइन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हो गया।

2008 की एक स्टडी में भी पाया गया कि 1977 और 1979 की पाबंदियों के बावजूद पाकिस्तान में शराब का सेवन जारी रहा, क्योंकि अवैध तरीके मौजूद थे। इससे यह बात सामने आती है कि कानून बनाकर लोगों की आदतों को पूरी तरह नहीं बदला जा सकता।

दक्षिण एशिया में 5000 साल से शराब पी जा रही

धार्मिक लोग अक्सर कहते हैं कि शराब पीना इस्लाम के खिलाफ है और यह आदत अंग्रेजों के समय की देन है। लेकिन इतिहास कुछ और कहता है।

दक्षिण एशिया में लोग 5000 साल से शराब पी रहे हैं। सिंधु घाटी सभ्यता में भी शराब बनाई जाती थी। तक्षशिला म्यूजियम में दुनिया के सबसे पुराने डिस्टिलर में से एक रखा है, जो मोहनजोदड़ो में मिला था।

मुगल और दिल्ली सल्तनत के दौर में शराब, भांग और अफीम सब आम थे। कई शासक खुद शराब पीते थे। कुछ ने रोक लगाने की कोशिश की, लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं हुई।

WORLD : ट्रम्प बोले- 8-9 साल और राष्ट्रपति रहूंगा:सुनकर लोग हंसने लगे तो कहा- मैं मजाक नहीं कर रहा, अभी बहुत काम करना बाकी है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है। व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वे 8-9 साल बाद पद छोड़ेंगे।यह सुनकर वहां मौजूद लोग हंसने लगे तो ट्रम्प ने कहा कि वह मजाक नहीं कर रहे। उन्हें काम करना पसंद है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अभी उनके कार्यकाल की शुरुआत ही है और बहुत काम बाकी है।

ट्रम्प अगले महीने 80 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी उम्र को लेकर भी मजाक किया। उन्होंने कहा, “मैं बुजुर्ग नहीं हूं; मैं बुजुर्ग से कहीं ज्यादा जवान हूं। मुझे आज भी वैसा ही महसूस होता है जैसा 50 साल पहले होता था।”इससे पहले एंडी ओगल्स ने 23 जनवरी 2025 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बिल पेश किया था। इस बिल का मकसद अमेरिकी संविधान में बदलाव करके डोनाल्ड ट्रम्प के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता खोलना था।

इस प्रस्ताव में कहा गया था कि जो व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति नहीं रहा है, वह तीसरी बार चुनाव लड़ सके। चूंकि ट्रम्प 2020 में चुनाव हार गए थे, इसलिए इस बदलाव के बाद वे फिर से राष्ट्रपति बनने के लिए योग्य हो सकते थे।हालांकि यह बिल आगे नहीं बढ़ पाया और हाउस में वोटिंग तक भी नहीं पहुंच सका। दरअसल, अमेरिका में संविधान बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए हाउस और सीनेट दोनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है। मौजूदा हालात में रिपब्लिकन पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है।

इसके अलावा, ऐसे बदलाव को लागू करने के लिए 50 में से कम से कम 38 राज्यों की मंजूरी भी जरूरी होती है। अभी कई राज्यों में विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी की सरकार है, इसलिए इस तरह का प्रस्ताव पास होना बहुत मुश्किल माना जाता है।अमेरिका में पहले किसी व्यक्ति के सिर्फ 2 ही बार राष्ट्रपति बनने को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। 1951 में संविधान में 22 संशोधन किया गया। इसके तहत ये नियम बनाया गया कि अमेरिका में कोई शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।

दरअसल, अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने दो टर्म के बाद रिटायरमेंट ले लिया था। उसके बाद से राष्ट्रपति के दो टर्म से ज्यादा सेवाएं न देने का अनौपचारिक नियम ही बन गया। इसके बाद अमेरिका में यह प्रथा बन गई।31 अमेरिकी राष्ट्रपतियों में से किसी भी राष्ट्रपति ने इस प्रथा को नहीं तोड़ा, लेकिन फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के दौर में यह नियम टूट गया। वे 1933 से 1945 चार बार राष्ट्रपति चुनकर आए।

ट्रम्प को तीसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उतरना है तो उन्हें अमेरिकी संविधान में बदलाव करना होगा, जो इतना आसान नहीं है। ट्रम्प को इसके लिए अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव दोनों में दो-तिहाई बहुमत से एक बिल पास कराना होगा। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में इतने सदस्य नहीं हैं।

सीनेट में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से 52 सीनेटर है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। ये संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई यानी 67% बहुमत से काफी कम है।अगर ट्रम्प ये बहुमत हासिल कर लेते हैं तब भी उनके लि​​​​​​ए संविधान में संशोधन करना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इस संशोधन के लिए राज्यों से मंजूरी लेनी होती है।

इसके लिए तीन चौथाई राज्यों का बहुमत मिलन के बाद ही संविधान में संशोधन हो सकता है। यानी 50 अमेरिकी राज्यों में से अगर 38 संविधान में बदलाव के लिए राजी हो जाए तो ही नियम बदल सकते हैं।ट्रम्प खुद भी कई बार कह चुके हैं कि वो दो कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहना चाहते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प को तीसरा कार्यकाल नहीं मिलता तो वे सत्ता में बने रहने के लिए दूसरे तरीके अपना सकते हैं।

हैमिल्टन कॉलेज के प्रोफेसर फिलिप क्लिंकनर ने मुताबिक ट्रम्प 2028 में उपराष्ट्रपति बन सकते हैं और जेडी वेंस या किसी और को नाममात्र का राष्ट्रपति बना सकते हैं। ऐसा ही कुछ पुतिन ने रूस में किया था। इसके अलावा वो अपने परिवार के किसी सदस्य को राष्ट्रपति बना सकते हैं, ताकि पर्दे के पीछे से सरकार पर उनका कंट्रोल बना रहे।पुतिन 2000 से 2008 तक लगातार 2 बार रूस के राष्ट्रपति रह चुके थे। रूस के संविधान के मुताबिक वे लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे। ऐसे में उन्होंने अपने खास दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बना दिया था। इस दौरान पुतिन उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं अचानक काफी बढ़ गई हैं। ब्रिटिश अखबार द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह वेनेजुएला पर की गई अमेरिकी कार्रवाई है।अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका लेकर आ गए। यह मिलिट्री एक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी से हुआ।

WORLD : अमेरिकी विमान कतर के एयरस्पेस से लापता:इमरजेंसी सिग्नल देकर रडार से गायब हुआ; ईरानी एजेंसी बोली- हमारा कोई रोल नहीं

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना का एक KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान कतर के ऊपर इमरजेंसी सिग्नल देने के बाद लापता हो गया। KC-135 स्ट्रैटोटैंकर को ‘फ्लाइंग गैस स्टेशन’ कहा जाता है, क्योंकि यह हवा में अन्य सैन्य विमानों को ईंधन भरने में सक्षम है।ईरान की फॉर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, विमान ने उड़ान के दौरान ‘7700’ इमरजेंसी सिग्नल भेजा। यह सिग्नल तब दिया जाता है जब विमान में कोई गंभीर समस्या हो। हालांकि इसमें ईरान की किसी भी भूमिका की बात नहीं कही गई।

यह विमान UAE के अल धफरा एयर बेस से उड़ा था और फारस की खाड़ी के ऊपर उड़ रहा था। इसी दौरान कतर के पास उसका सिग्नल कुछ समय के लिए गायब हो गया। फ्लाइट डेटा के मुताबिक, विमान कुछ देर तक आसमान में चक्कर लगाता रहा और फिर नीचे उतरने लगा।अभी तक यह साफ नहीं है कि विमान में क्या खराबी आई थी। यह भी नहीं पता कि यह कोई तकनीकी समस्या थी या कुछ और। अमेरिका ने इसे लेकर जानकारी शेयर नहीं की है।

ईरान बोला- अमेरिका ने होर्मुज में जो नया रास्ता बताया वो सुरक्षित नहीं
ईरान ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज में जो नया समुद्री रास्ता बताया जा रहा है, वह सुरक्षित नहीं है। यह रास्ता पत्थरों से भरा हुआ और उथला है, जिससे जहाजों के लिए खतरा बढ़ गया है।

अमेरिका के लीडरशिप वाले जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने जहाजों को सलाह दी है कि वे ओमान के समुद्री इलाके से होकर गुजरें, जहां एक सुरक्षित क्षेत्र बनाया गया है।

लेकिन ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के मुताबिक, इस नए रास्ते से जाने की कोशिश कर रहे दो व्यापारिक जहाज बीच में ही फंस गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान के तट के पास का समुद्र पत्थरीला है, इसलिए जहाज न आगे बढ़ पा रहे हैं और न ही वापस लौट पा रहे हैं।

अमेरिका बोला- हम ईरान से लड़ाई नहीं चाहते
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ लड़ाई नहीं चाहता, लेकिन होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा जरूरी है।

उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत अमेरिका की सेना होर्मुज में काम कर रही है, ताकि जहाज सुरक्षित तरीके से आ-जा सकें।

पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान के “गैरकानूनी दबाव” को खत्म करना है, जो वह इस समुद्री रास्ते पर बनाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका को इस मिशन के लिए ईरान के हवाई क्षेत्र या समुद्री सीमा में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोत तैनात किया
अमेरिका ने होर्मुज में अपना बड़ा युद्धपोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश भेजा है। यह कदम डोनाल्ड ट्रम्प की नई योजना प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत उठाया गया है। इस योजना का मकसद उन जहाजों को सुरक्षित निकालना है, जो होर्मुज में फंसे हुए हैं।

BUSINESS : कुमार मंगलम बिड़ला बने VI के नए चेयरमैन, क्या अब शेयरों के आएंगे अच्छे दिन?

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Vodafone Idea ने कुमार मंगलम बिड़ला को नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया है. AGR बकाया में बड़ी राहत और सरकारी मोहलत के बाद कंपनी के लिहाज से यह बड़ी खबर मानी जा रही है. आइए समझते हैं कि इसके मायने क्या कंपनी के शेयरों के लिए क्या हो सकते हैं?
कुमार मंगलम बिड़ला बने VI के नए चेयरमैन, क्या अब शेयरों के आएंगे अच्छे दिन?

कुमार मगंलम बिड़ला की वोडफोन आइडिया में वापसी हो गई है. कंपनी ने अपनी 5 मई को अपनी फाइलिंग में बताया कि उन्हें नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है. उन्होंने रविंदर टक्कर को रिप्लेस किया है. कंपनी ने यह भी बताया कि टक्कर अब भी टेलीकॉम कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन के तौर पर काम करते रहेंगे. खास बात यह है कि बिड़ला की नियुक्ति उस समय हुई है जब Vodafone Idea को उसके एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया मामले में 27 प्रतिशत की बड़ी राहत मिली है.

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने 30 अप्रैल को Vodafone Idea के AGR बकाया में करीब 27% की कटौती करते हुए इसे 64,046 करोड़ रुपये कर दिया. इससे कंपनी को बड़ी राहत मिली है. साथ ही सरकार ने पेमेंट करने के लिए 5 साल की मोहलत भी दे दी है. रिपोर्ट में बताया गया कि यह फैसला तब लिया गया जब DoT ने वैधानिक बकाया का दोबारा आकलन करने के लिए एक कमेटी बनाई. इससे पहले दिसंबर में यह बकाया 87,695 करोड़ रुपये था. आज Vodafone Idea के 58 करोड़ से ज्यादा शेयरों में ट्रेडिंग हुई. AGR बकाया में कटौती की खबर के बाद कंपनी के शेयर में करीब 8% की तेजी आई और लगातार दूसरे दिन भी इसमें बढ़त बनी रही.

AGR विवाद की शुरुआत 2019 में हुई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि टेलीकॉम कंपनियों को AGR के आधार पर सभी वैधानिक बकाया चुकाने होंगे, जिसमें नॉन-टेलीकॉम इनकम भी शामिल होगी. उस समय DoT ने FY2017 तक Vi का AGR बकाया 58,254 करोड़ रुपये बताया था, जबकि कंपनी के हिसाब से यह करीब 21,500 करोड़ रुपये था.

2020 में DoT और कंपनियों के आकलन में अंतर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किसी भी तरह के खुद से किए गए आकलन या दोबारा आकलन पर रोक लगा दी थी. 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई के लिए हामी भरी और सरकार को दोबारा कैलकुलेशन की इजाजत दी. Vodafone Idea में सरकार की करीब 49% हिस्सेदारी है.

जब Vodafone Idea को हाल ही में AGR में राहत मिली, तब कंपनी के शेयरों ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया था और करीब 5% तक चढ़े थे. साथ ही बड़ी ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने भी कंपनी का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 14 रुपये कर दिया. अब कुमार मंगलम बिड़ला के नए चेयरमैन बनने से निवेशकों का सेंटिमेंट और पॉजिटिव हो सकता है. 6 मई 2026 को इसका असर Vi के शेयरों पर दिख सकता है.

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