Friday, June 26, 2026
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NATIONAL : कांग्रेस की करारी हार के बाद नेता जितेंद्र सिंह ने असम प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह ने सोमवार को असम के प्रभारी पार्टी महासचिव पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया, और विधानसभा चुनावों के परिणामों की जिम्मेदारी ली जिसमें उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे को लिखे अपने इस्तीफे पत्र में सिंह ने कहा कि संगठन के हित में यही है कि वह पद छोड़ दें ताकि नए नेतृत्व और नई दिशा को जगह मिल सके।

“मैं तत्काल प्रभाव से असम के प्रभारी महासचिव पद से अपना इस्तीफा दे रहा हूं। हाल के चुनाव परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं, और मैं इन परिणामों में अपनी भूमिका की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं,” सिंह ने कहा।

उन्होंने कहा, “अपने सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, हम असम के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने में असमर्थ रहे, जिनकी सेवा करने का हमने लक्ष्य रखा था। संगठन के हित में यही उचित है कि मैं पद छोड़ दूं ताकि नए नेतृत्व और नई दिशा को अवसर मिल सके।”

सिंह ने कहा कि उन्हें सेवा करने का अवसर मिला और अपने कार्यकाल के दौरान उन पर जो भरोसा जताया गया, उसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने कहा, “मैं असम की जनता के साथ-साथ असम के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को उनके द्वारा दिखाए गए प्रेम और सम्मान के लिए धन्यवाद देता हूं।”उन्होंने आगे कहा, “मैं कांग्रेस पार्टी के मूल्यों और दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हूं और पार्टी के प्रयासों को उचित समझे जाने वाली किसी भी क्षमता में समर्थन देना जारी रखूंगा।”

सत्तारूढ़ एनडीए ने सोमवार को 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लगातार तीसरी बार असम में सरकार बनाने की राह पर कदम रखा है।जहां भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, वहीं उसके सहयोगी दलों – बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) – ने 10-10 सीटों पर कब्जा जमाया।

कांग्रेस को केवल 19 सीटें मिलीं और एक बड़े झटके के रूप में, उसके प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट में अनुभवी राजनेता और मौजूदा भाजपा विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी से 23,181 वोटों से हार गए।

NATIONAL : बंगाल की जीत के साथ और ताकतवर हुई भाजपा: अब 21 राज्यों में एनडीए का दबदबा, छह राज्यों तक सिमटा इंडिया गठबंधन

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देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव नतीजों में बड़ा राजनीतिक बदलाव दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में भाजपा बहुमत की ओर बढ़ रही है। इससे एनडीए 21 राज्यों में मजबूत हो गया है। वहीं, इंडिया गठबंधन छह राज्यों तक सिमटता नजर आ रहा है। तमिलनाडु में विजय की पार्टी ने चौंकाया है, जबकि केरल में कांग्रेस को राहत मिली है। असम में भी भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाई है।

पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में शानदार फतह हासिल करने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश की राजनीति में और भी ज्यादा ताकतवर हो गई है। बंगाल के इतिहास में एक ‘जीत’ का नया अध्याय जोड़ते हुए विपक्ष को करारी मात दी है। इस प्रचंड जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का दबदबा देश के 21 राज्यों में कायम हो गया है। वहीं, केंद्र में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभा रहा इंडिया गठबंधन अब सिकुड़ कर सिर्फ छह राज्यों तक ही सीमित रह गया है। इस नतीजे ने देश के सियासी नक्शे को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।

चुनाव आयोग के रुझानों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 147 सीटों के जादुई आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है और दोपहर ढाई बजे तक वह 191 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस ऐतिहासिक जीत की खबर मिलते ही कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल बन गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को ‘झालमुड़ी’ खिलाकर जीत की खुशी मनाई। केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी इस जश्न में शामिल हुए। इसके साथ ही असम में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 79 सीटों पर बढ़त बना ली है, जहां जोरहाट सीट से कांग्रेस के गौरव गोगोई को भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 वोटों से हरा दिया है। इन शानदार नतीजों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पहुंचने वाले हैं।

क्या इंडिया गठबंधन और कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी?
इस चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन के भविष्य पर अनिश्चितता के भारी बादल मंडराने लगे हैं। भले ही केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने जीत हासिल की हो, लेकिन तमिलनाडु में द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वहां ‘जन नायक’ अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने जबरदस्त उलटफेर करते हुए 234 में से 110 सीटों पर बढ़त बना ली है और विजय के परिवार में जश्न मन रहा है। अब कांग्रेस के पास अपने दम पर देश में सिर्फ तीन राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में ही पूर्ण बहुमत की सरकार बची है। इसके अलावा वह झारखंड में हेमंत सोरेन की पार्टी के साथ गठबंधन में है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जो केंद्र में भाजपा का विरोध करती है लेकिन वह इंडिया गठबंधन से बाहर है।

21 राज्यों के जादुई आंकड़े तक पहुंचा एनडीए गठबंधन
पश्चिम बंगाल की शानदार फतह के बाद भाजपा ने अपने दम पर 15 राज्यों में सरकार बनाने का आंकड़ा छू लिया है। देश में कुल 29 राज्य हैं और बहुमत के लिए 14.5 राज्यों का आंकड़ा चाहिए होता है, जिसे भाजपा ने अकेले ही पार कर लिया है। इसके अलावा, अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर भाजपा का यह आंकड़ा 21 राज्यों तक पहुंच गया है। इसमें बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), नगालैंड में नगा पीपुल्स फ्रंट और मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ गठबंधन की सरकारें शामिल हैं। इसका सीधा मतलब है कि देश के एक बहुत बड़े हिस्से पर अब सीधे तौर पर एनडीए का राज हो गया है।

NATIONAL : राहुल ने असम-बंगाल के नतीजों पर साधा निशाना; कहा- चुनाव चोरी, संस्था चोरी- अब और चारा ही क्या है!

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा चुनाव आयोग के सहयोग से चोरी किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कोई अलग घटना नहीं, बल्कि एक लगातार दोहराया जाने वाला पैटर्न है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस आरोप से सहमत हैं कि राज्य में 100 से अधिक सीटें छीन ली गईं। उन्होंने लिखा कि असम और बंगाल के चुनाव परिणाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

कई राज्यों में दिखा पैटर्न- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने आगे दावा किया कि यही स्थिति पहले भी कई चुनावों में देखी गई है। उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और लोकसभा 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी चुनावों में एक समान पैटर्न सामने आया है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

ममता बनर्जी ने भी लगाए थे गंभीर आरोप
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी भाजपा पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि राज्य में 100 से अधिक सीटें लूटी गई हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को भाजपा का आयोग बताते हुए चुनाव परिणामों को अनैतिक और अवैध करार दिया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने केंद्रीय बलों की तैनाती और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।

बंगाल में बदले राजनीतिक समीकरण
हालांकि, चुनाव परिणामों के ताजा रुझानों में पश्चिम बंगाल में भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि टीएमसी को बड़ा नुकसान हुआ है। कई प्रमुख सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया है। भवानीपुर और नंदीग्राम जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर भी भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कई सीटों पर मतगणना के अंतिम चरणों में भाजपा उम्मीदवार आगे रहे हैं, जिससे राज्य में सत्ता समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने भारी बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा उस समय मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी थी।

NATIONAL : अब कैसा दिखता है देश का सियासी नक्शा? नए शीर्ष पर पहुंची भाजपा, 72% क्षेत्रफल भगवामय

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पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी के नतीजे के साथ देश के सियासी नक्शे का रंग भी बदलेगा। आइये जानते हैं अभी कैसा है देश का सियासी नक्शा? पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद कैसे देश की सियासी तस्वीर बदली है? आइये जानते हैं…

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में आज मतगणना है। मतगणना के साथ ही यह भी साफ हो जाएगा कि किस राज्य में किस दल की सरकार बनेगी। कहां कौन सत्ता में वापसी करेगा और कहां परिवार्तन होगा सब दोपहर तक साफ हो जाएगा। नतीजों के साथ देश के सियासी नक्शे का रंग भी बदलेगा।

कहां-कहां भाजपा-सहयोगियों की सरकार?
चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की मतगणना से पहले की बात करें तो इस वक्त 20 राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगियों की सरकार है। इनमें से 12 राज्यों में सीधा भाजपा अपने बल पर सत्ता में है, जबकि आठ राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता में हैं।


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राज्य

किससे गठबंधन?

आंध्र प्रदेश

टीडीपी, भाजपा

अरुणाचल प्रदेश

भाजपा

असम

भाजपा, एजीपी, यूपीपीएल, बीपीएफ

बिहार

जदयू, भाजपा, हम, लोजपा (आर), रालोमो

छत्तीसगढ़

भाजपा

दिल्ली

भाजपा

गोवा

भाजपा

गुजरात

भाजपा

हरियाणा

भाजपा

मध्य प्रदेश

भाजपा

महाराष्ट्र

भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट), एनसीपी (अजित गुट)

मणिपुर

भाजपा

मेघालय

एनपीपी, भाजपा

नगालैंड

एनडीपीपी, एनपीएफ, भाजपा

पुडुचेरी

एआईएनआरसी, भाजपा

ओडिशा

भाजपा

राजस्थान

भाजपा

त्रिपुरा

भाजपा, आईपीएफटी

उत्तर प्रदेश

भाजपा

उत्तराखंड

भाजपा

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के नतीजों के मुताबिक, भाजपा अब जिन 21 राज्यों में शासन कर रही है, अगर उनका कुल क्षेत्रफल निकालें तो यह देश का करीब 72 फीसदी है। वहीं, आबादी के मामले में भाजपा इस वक्त भारत की 76 फीसदी आबादी पर शासन कर रही है।

भाजपा मौजूदा समय में जिन 21 राज्यों में शासन कर रही है, उनमें सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है, जिसका क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का 10.40% है। वहीं, सबसे छोटा पुदुचेरी है, जिसका क्षेत्रफल देश का 0.01 फीसदी है।

इसके अलावा आबादी के लिहाज से भाजपा के शासन वाला सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है, जिसके पास देश में 16.50 फीसदी आबादी है। वहीं, सबसे छोटा पुदुचेरी है, जिसकी आबादी देश की 0.10 फीसदी है।

कितने राज्यों की सरकार में कांग्रेस या गठबंधन की सरकार?

राज्य

किससे गठबंधन?

हिमाचल प्रदेश

कांग्रेस

झारखंड

जेएमएम, कांग्रेस

तमिलनाडु

डीएमके, कांग्रेस

कर्नाटक

कांग्रेस

तेलंगाना

कांग्रेस

जम्मू-कश्मीर

नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस

किन राज्यों में अन्य दलों की सरकार

राज्य

किस दल की सरकार

पंजाब

आप

पश्चिम बंगाल

तृणमूल कांग्रेस

केरल

एलडीएफ

सिक्किम

एसकेएम

मिजोरम

जेडपीएम

जब मोदी सत्ता में आए तब सात राज्यों में थीं भाजपा सरकारें
मई 2014 में नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके सत्ता में आने के समय देश के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दल सरकार चला रहे थे। इनमें पांच राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे, जबकि आंध्र प्रदेश और पंजाब में उसकी सहयोगी पार्टी सत्ता में थी। इन दो राज्यों में देश की छह फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। बाकी पांच राज्यों छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। इन राज्यों में देश की 19 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है।

यानी, जब नरेंद्र मोदी देश की सत्ता में आए उस वक्त करीब 26 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं। उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे बड़े राज्य शामिल थे।

2018 में पीक पर पहुंची भाजपा
2014 में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। चार साल बाद मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। इन राज्यों में देश की करीब 71 फीसदी आबादी रहती है। ये वो दौर था, जब भाजपा शासन आबादी के लिहाज से पीक पर था। वहीं, चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। इन राज्यों की सात फीसदी आबादी रहती है।

दिल्ली चुनाव के नतीजों का क्या असर?
बिहार चुनाव से पहले दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए। फरवरी 2025 में हुए इस चुनाव के बाद 27 साल बाद भाजपा ने दिल्ली में वापसी की। देश की आबादी का लगभग 1.3 फीसदी हिस्सा यहां रहता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली की आबादी 1.68 करोड़ थी। देश के 0.02 फीसदी भू-भाग वाले केंद्र शासित प्रदेश में फरवरी 2025 तक आम आदमी पार्टी की सरकार शासन कर रही थी।

बिहार चुनाव में जीत के बाद क्या स्थिति?
बिहार में बीते साल नवंबर में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने के साथ ही देश के सियासी नक्शे में कोई बदलाव नहीं हो पाया। अगर सरकार बदलती तो भाजपा और उसके सहयोगी सरकारों की देश में कुल संख्या सिमटकर 19 राज्यों तक रह जाती, हालांकि एनडीए ने अपनी जमीन बचाए और बनाए रखी। फिलहाल एनडीए 20 राज्यों में काबिज है। अब 2026 के चुनाव उसकी बढ़ती या कम होती जमीन पर फैसला करेंगे।

NATIOANL : ममता बनर्जी के सत्ता गंवाने की ये रहीं 5 बड़ी वजह…

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पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली बार राज्य में सत्ता में आने जा रही है और उसे दो-तिहाई से ज़्यादा बहुमत मिला है. बीजेपी ने जहां 206 सीटें जीत ली हैं, वहीं टीएमसी 80 पर ही जीत दर्ज कर सकी है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी भवानीपुर सीट से बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी से 15 हज़ार से अधिक वोटों से हार गईं. उससे पहले मतगणना के दौरान ही उन्होंने बीजेपी पर ‘वोट लूट’ का आरोप लगाया.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “बीजेपी ने 100 से ज्यादा सीटों की लूट की है. बीजेपी की जीत अनैतिक है. इलेक्शन कमीशन ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मिलकर जो किया है वो पूरी तरह अनैतिक है.”

उन्होंने जोर-जबरदस्ती से एसआईआर करने के आरोप लगाए और कहा, “उन्होंने अत्याचार किया. काउंटिंग एजेंटों को गिरफ़्तार किया. हम वापसी करेंगे.”

लेकिन पंद्रह साल तक लगातार सत्ता में रहने के बाद, तृणमूल कांग्रेस की इस चुनावी हार की वजह क्या हो सकती है, इसे लेकर काफ़ी चर्चा है.अब तक सामने आए नतीजों और रुझानों के आधार पर इस हार के पीछे पांच प्रमुख कारण माने जा रहे हैं.ममता बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी और विजय के साथ-साथ चर्चित चेहरों की सीट का हाल जानिए

ममता बनर्जी के मज़बूत क़िले में कैसे हुई बीजेपी की एंट्री

  1. महिला सुरक्षा का सवाल
    कोलकाता में बीबीसी संवाददाता इशाद्रिता
    इमेज कैप्शन,कोलकाता में बीबीसी संवाददाता इशाद्रिता ने महिलाओं से बात की
    इसमें बहुत कम शक है कि पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं का बड़ा हिस्सा लंबे समय से ममता बनर्जी की पार्टी का समर्थन करता रहा है.

स्कूली लड़कियों को साइकिल बांटने की योजना समेत लक्ष्मीर भंडार, कन्याश्री और सबुज साथी जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच तृणमूल सरकार को काफ़ी लोकप्रिय बनाया था.

लेकिन इस बार यह समर्थन आधार टूटता हुआ दिखाई दे रहा है. इसकी एक बड़ी वजह महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पार्टी की कथित नाकामी हो सकती है.

दो साल पहले हुआ आरजी कर आंदोलन इस चुनाव को प्रभावित करता दिखा. इसका बड़ा उदाहरण पानीहाटी है, जिसे पारंपरिक तौर पर तृणमूल का गढ़ माना जाता रहा है.

वहां आरजी कर मामले में महिला की मां बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में थीं और उन्होंने 28,836 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

पश्चिम बंगाल कवर कर रहे बीबीसी संवाददाताओं से भी कुछ महिलाओं की बातों सुरक्षा जैसे मुद्दे आए.

चुनाव प्रचार जब चल रहा था तो एक महिला ने टीएमसी सरकार के फिर से आने के सवाल पर कहा था, “क्या अब हम सुरक्षित भी रह पाएंगे? यही डर है. मैं अपने इन भाइयों की बात से सहमत हूं, मेरे पास अलग से कहने के लिए कुछ नहीं है. महिलाओं की अब कोई इज़्ज़त नहीं बचेगी. बिल्कुल भी नहीं. वे हमें तोड़कर रख देंगे. नहीं तो हमें यह क्यों सोचना पड़ता कि अभया की मां को जीत के बाद ही न्याय मिलेगा? क्या राज्य की हालत अब ऐसी हो गई है? क्या आप सोच सकते हैं कि वे हमारे साथ क्या करेंगे?”

कोलकाता में एक महिला के तौर पर सुरक्षित महसूस करने के सवाल पर एक महिला ने कहा, “आरजी कर घटना के बाद मैं अपने साथ कुछ सुरक्षा उपाय लेकर चलती हूं.”

एक अन्य युवती ने कहा, “कुछ जगहें अनसेफ़ महसूस होती हैं और रात के 9 -10 बजे के बाद तो असुरक्षित महसूस होता है.”

NATIONAL : केरलम में ‘लेफ्ट’ का आखिरी किला भी धवस्त, 50 साल में पहली बार एक भी राज्य में नहीं बची सरकार

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भारतीय राजनीति के मानचित्र पर दशकों तक अपनी गहरी ‘लाल’ छाप छोड़ने वाला वामपंथ आज एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां उसके पैरों के नीचे से आखिरी जमीन भी खिसक चुकी है।

केरलम विधानसभा चुनावों के परिणामों ने न केवल वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की हार सुनिश्चित कर दी, बल्कि पिछले पांच दशकों के उस गौरवशाली अध्याय पर भी विराम लगा दिया जिसमें कम्युनिस्टों के पास कम से कम एक राज्य की सत्ता सुरक्षित रहती थी।

कभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में एक शक्तिशाली ताकत रहने वाले वामदल अब 50 वर्षों से अधिक समय में पहली बार सभी राज्यों में सत्ता से बेदखल हो चुके हैं। दस साल बाद राज्य में कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार बनाएगी।

1977 के बाद यह पहला अवसर होगा जब देश के किसी भी राज्य में वामपंथियों की सरकार नहीं होगी। सत्ता का आखिरी गढ़ और ऐतिहासिक विरासत इस क्षण की गंभीरता को समझने के लिए अतीत पर एक नजर डालना जरूरी है।

केरलम सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि संसदीय साम्यवाद की वैश्विक प्रयोगशाला रहा है। 1957 में ईएमएस नंबूदरीपाद के नेतृत्व में यहीं दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार बनी थी। 2011 में बंगाल के 34 वर्षों के शासन के अंत और 2018 में त्रिपुरा के पतन के बाद, केरलम ही वह आखिरी किला था जिसने वामपंथ को राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखा था।

2021 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचने वाली एलडीएफ के लिए यह हार केवल सत्ता का जाना नहीं, बल्कि उस सांगठनिक ऊर्जा का अंत है जो सरकारी संरक्षण से फलती-फूलती थी।

राष्ट्रीय राजनीति में सिकुड़ता प्रभाव एक समय था जब केंद्र की राजनीति वामदलों के इशारों पर घूमती थी। 2004 के दौर को याद करें, जब 61 लोकसभा सीटों के साथ वामपंथियों ने संप्रग सरकार की नीतियों की दिशा तय की थी।

1996 में तो ज्योति बसु, जो पहले ही दो दशकों तक बंगाल के मुख्यमंत्री रह चुके थे, संयुक्त मोर्चा गठबंधन के हिस्से के रूप में प्रधानमंत्री पद के करीब पहुंच गए थे।

बसु इस पद को स्वीकार करने के लिए तैयार थे, लेकिन उनकी पार्टी के पोलित ब्यूरो ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। पार्टी के भीतर ‘केरल लाबी’ के विरोध ने उसे ‘ऐतिहासिक भूल’ में बदल दिया।

आज स्थिति यह है कि लोकसभा में इनकी संख्या इकाई के अंक तक सिमट गई है और बंगाल जैसे पुराने गढ़ों में एक-एक सीट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

आर्थिक उदारीकरण, पहचान आधारित राजनीति का उदय और संगठनात्मक थकान ने उस कैडर आधारित ढांचे को झकझोर दिया है जो कभी इनकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था।

केरलम का यह पतन भारतीय राजनीति में एक बड़े वैचारिक शून्य और वामपंथ के अस्तित्व पर गंभीर प्रश्नचिह्न छोड़ गया है।

NATIONAL : ऐतिहासिक जीत के बाद बोले पीएम मोदी- ‘पश्चिम बंगाल के भाग्य में विकास का नया अध्याय जुड़ा’

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद राष्ट्रीय राजधानी स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय में सोमवार की शाम जश्न का माहौल दिखा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब बदला नहीं वरन बदलाव की बात होनी चाहिए। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि राज्य के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है।

बंगाल के पुरुषों का पारंपरिक परिधान यानी सफेद कुर्ता और तसर सिल्क धोती पहने भाजपा मुख्यालय पहुंचे पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह जनादेश भयमुक्त, विकास और विश्वास से भरे बंगाल की ओर एक निर्णायक कदम है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि अब दशकों का इंतजार खत्म हुआ है और जनता ने उस विजन को साकार करने का अवसर भाजपा को दिया है।

‘बंगाल में विकास, सुरक्षा और रोजगार का नया दौर’, घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त काररवाई

पीएम मोदी ने भरोसा दिलाते हुए कहा, ‘बंगाल के भविष्य की एक ऐसी यात्रा शुरू हो रही है, जहां विकास, अटूट विश्वास और नई उम्मीदें कदम से कदम मिलाकर चलेंगी। मैं आज हर बंगालवासी को भरोसा देता हूं, बंगाल के बेहतर भविष्य के लिए, भाजपा दिन-रात एक कर देगी। बंगाल में अब महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, पलायन रुकेगा। पहली कैबिनेट में ही आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी दिखाई जाएगी और घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त काररवाई होगी।’

कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके को बहनों और बेटियों ने सजा दी

पीएम मोदी इस अवसर पर महिला आरक्षण के बहाने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर भी निशाना साधने से नहीं चूके। उन्होंने कहा, ‘विकसित भारत के निर्माण का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ भारत की नारी शक्ति है। नारी शक्ति अब विकसित भारत के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन नारी शक्ति की इस रफ्तार को कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने कुछ दिन पहले रोकने का काम किया है। इन नारी विरोधी दलों ने संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन को पास नहीं होने दिया और इसलिए मैंने कुछ दिन पहले कहा भी था कि महिलाओं के आरक्षण का विरोध करने वाले ऐसा दलों को महिलाओं का आक्रोश झेलना पड़ेगा। आज कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके को बहनों और बेटियों ने सजा दी है।’

समाजवादी पार्टी को सहना पड़ेगा उत्तर प्रदेश की महिलाओं का आक्रोश

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस समाजवादी पार्टी ने संसद में महिला आरक्षण को रोका है, उसे भी उत्तर प्रदेश की महिलाओं का आक्रोश सहना पड़ेगा। महिला विरोधी समाजवादी पार्टी कुछ भी करके अपने पाप को धgल नहीं पाएगी।

पश्चिम बंगाल में पहली बार डर नहीं, लोकतंत्र जीता

पीएम मोदी ने कहा, ‘बंगाल के ये चुनाव एक और वजह से बहुत खास रहे हैं। आप याद कीजिए, बंगाल चुनाव के समय कैसी खबरें आती थीं। हिंसा, डर और निर्दोष लोगों की मौतें। लेकिन इस बार पूरे देश ने एक नई खबर सुनी। पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ। पहली बार ऐसा हुआ कि चुनावी हिंसा में एक भी निर्दोष नागरिक की जान नहीं गई। लोकतंत्र के इस महापर्व में बंदूक की आवाज नहीं जनता जनार्धन की आवाज गूंजी। पहली बार डर नहीं, लोकतंत्र जीता है।’

देश को विवाद नहीं विकास चाहिए, विभाजन नहीं विश्वास चाहिए

उन्होंने कहा कि आज देश का हर राज्य भी एक-दूसरे से लड़कर नहीं, एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहता है। इन चुनावों ने इस संदेश को भी बहुत स्पष्ट किया है। बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में जिन तीन सरकारों को जनता ने सत्ता से बाहर किया उनकी एक समान पहचान थी, विभाजन की राजनीति। यही उनकी पहचान थी। उनकी राजनीति जोड़ने की नहीं, तोड़ने की थी। कभी भाषा के नाम पर विवाद खड़ा किया गया, कभी खाने-पीने की आदतों को लेकर समाज को बांटने की कोशिशें हुईं, कभी अपने ही देश के लोगों को तक बाहरी कहा गया, लेकिन भारत की जनता ने इस राजनीति को साफ जवाब दिया है। देश ने बता दिया है कि उसे विवाद नहीं विकास चाहिए, विभाजन नहीं विश्वास चाहिए।”

बदला नहीं, बदलाव और भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘मैं बंगाल के हर राजनीतिक दल से एक आग्रह भी करना चाहता हूं। बंगाल में बीते दशकों में राजनीतिक हिंसा की वजह से न जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद हो चुकी हैं। मेरा स्पष्ट मानना है कि आज से बंगाल की जो चुनावी आदतें फैली हुई हैं, उसमें बदलाव आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जब भाजपा जीती है, बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए। भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए।’

हिंसा के इस अंत हीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि हिंसा के इस अंत हीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसने किसे वोट दिया, किसे नहीं दिया, उससे ऊपर उठकर बंगाल की सेवा के लिए काम करना चाहिए।

NATIONAL : आज से भयमुक्त हुआ बंगाल, डॉ. मुखर्जी की आत्मा को शांति मिली: पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद सोमवार को नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पार्टी समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के 20 से ज्यादा राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकारें हैं। हमारा मंत्र है नागरिक देवो भवः। हम जनता की सेवा में जुटे हुए हैं। इसलिए जनता भाजपा पर ज्यादा से ज्यादा भरोसा कर रही है।

जनता साफ देख रही है कि जहां भाजपा, वहां गुड गवर्नेंस। जहां भाजपा, वहां विकास। आप बीते दो साल के ट्रेंड को देखिए। हरियाणा में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनी। महाराष्ट्र में जबरदस्त जीत मिली। दिल्ली में अभूतपूर्व जीत मिली। बिहार में भी हमें बड़ी जीत हासिल हुई। यह जीत सिर्फ राज्यों में ही नहीं लोकल गवर्नेंस में भी दिख रही है।

मैं यह जीत बंगाल की जनता को समर्पित करता हूं’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा- इस जीत के साथ-साथ वंदे मातरम के 150वें वर्ष में भारत माता को और उसी बंकिम जी को बंगाल के लोगों ने अपना सादर नमन प्रेषित किया है। श्री अरबिंदो को भी मतदाताओं ने ऐतिहासिक श्रद्धांजलि दी है। बंगाल में हमारे कितने भी कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन इस जीत के लिए समर्पित किया है। भाजपा की कितनी महिला कार्यकर्ताओं को तमाम अत्याचार सहने पड़े। केरल में और बंगाल में भाजपा के हर कार्यकर्ता को कितनी मुसीबतें झेलनी पड़ीं। उन पर कितने जुल्म हुए हैं, कितने अत्याचार हुए हैं। मैं आज बंगाल में भाजपा की सफलता का श्रेय ऐसे सभी कार्यकर्ताओं को और उनके परिवारों को देता हूं। मैं यह जीत बंगाल की जनता को समर्पित करता हूं।

आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा- गुजरात में इस बार भाजपा को स्थानीय चुनाव में सबसे बड़ा वोट शेयर मिला है। ये भाजपा की गुड गवर्नेंस का सबसे बड़ा उदाहरण है। आज भाजपा कार्यकर्ता के रूप में मेरे मन में एक और बात आ रही है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को कितनी शांति मिली होगी। उन्होंने 1951 में जनसंघ की स्थापना कर के प्रत्येक कार्यकर्ता को संदेश दिया था कि देश के लिए जीना है और देश के लिए मरना है। उन्होंने अपने जीवन से साबित किया कि राष्ट्र सर्वोपरि का मंत्र लेकर चलने वाले अपना जीवन देने में एक पल का भी संकोच नहीं करते। डॉ. मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए एक बड़ी लड़ाई लड़ी। उन्होंने जिस समृद्ध बंगाल का सपना देखा था, वह सपना कई दशकों से पूरा होने का इंतजार कर रहा था। आज 4 मई 2026 को बंगाल की जनता ने हम भाजपा कार्यकर्ताओं को अवसर दिया है। साथियों बंगाल के भाग्य में आज से एक नया अध्याय जुड़ गया है। आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है। विकास के भरोसे से युक्त हुआ है। बांग्लाए पोरिबोर्तन होए गए छे।

असम में भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन मिला
इस दौरान असम की जीत का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा- असम के टी-गार्डन वाले शहरों में भी भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन मिला है। असम अब अपने विकास की रफ्तार और बढ़ाएगा। साल 2021 में हमने पुदुचेरी की जनता के सामने पुदुचेरी का विजन रखा था। पुदुचेरी की जनता ने हमें अपना आशीर्वाद दिया था। पुदुचेरी की जनता ने इस विजन को पूरा करने के लिए हम पर एक बार फिर अपना भरोसा कायम किया है। मैं पुदुचेरी के युवाओं, मछुआरों को भरोसा देना चाहता हूं कि एनडीए की सरकार आपके लिए काम करती रहेगी।

मां गंगा हमारे ऊपर अपनी कृपा बरसा रही हैं
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा- 2013 में जब भाजपा ने मुझे पीएम उम्मीदवार के रूप में भी काम दिया और जब मैं काशी में अपना नामांकन भरने गया और जब पत्रकारों ने मुझे भेजा तो मैंने कहा था कि ‘न मुझे किसी ने भेजा है, न मैं यहां आया हूं, मुझे यहां मां गंगा ने बुलाया है।’ आज मैं महसूस कर रहा हूं कि मां गंगा हमारे ऊपर अपनी कृपा बरसा रही हैं। गंगा के साथ ब्रह्मपुत्र का भी हम पर अहसान रहा है। असम की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा-एनडीए पर भरोसा किया है। हैट्रिक- तीसरी बार।

गंगा से गंगासागर तक कमल ही कमल खिला
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा- पिछले साल 14 नवंबर को जब बिहार चुनाव के नतीजे आए थे, तब मैंने इसी जगह से, भाजपा मुख्यालय से आपसे कहा था कि गंगाजी बिहार से आगे बहते हुए गंगा सागर तक जाती हैं। आज बंगाल की जीत के साथ गंगोत्री से गंगासागर तक कमल ही कमल खिला हुआ है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल आज मां गंगा के इर्द-गिर्द बसे इन राज्यों में भाजपा-एनडीए सरकार है।

लोकतंत्र हमारी रगों में दौड़ता हुआ संस्कार है
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- जय-पराजय लोकतंत्र और चुनावी राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा होता है, लेकिन पांच राज्यों की जनता ने पूरे विश्व को दिखाया है कि ये हमारा भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी क्यों है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक तंत्र नहीं है। ये हमारी रगों में दौड़ता हुआ संस्कार है। आज सिर्फ भारत का लोकतंत्र नहीं जीता है, आज भारत का संविधान भी जीता है। हमारी सांविधानिक संस्थाएं जीती हैं। हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं जीती हैं। बंगाल में करीब 93 फीसदी मतदान होना, अपने आप में ऐतिहासिक रहा है। भारत के लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने में आप सबका योगदान इतिहास हमेशा याद रखेगा।

NATIONAL : ‘गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल’, पांच राज्यों के नतीजों के बाद BJP मुख्यालय में पीएम का संबोधन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा मुख्यालय पहुंचे। वे बंगाली कुर्ता-पाजामा में नजर आए। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी में खुशी का माहौल है। मुख्यालय में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुट रहे हैं और माहौल उत्सव जैसा बना हुआ है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम समेत पांच राज्यों में मतगणना जारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां उनका विशेष अंदाज देखने को मिला। वे बंगाली कुर्ता-पाजामा पहनकर पार्टी कार्यालय में नजर आए, जिससे माहौल और भी खास हो गया। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और प्रधानमंत्री उनके साथ मिलकर जीत का जश्न मनाने वाले हैं। मुख्यालय में पहले से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटने लगे हैं और पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखा जा रहा है।

पीएम मोदी ने संबोधन शुरू करते हुए कहा कि आज का दिन अहम है, जब वर्षों की साधना सिद्धी में बदलती है तो चेहरे पर जो खुशी होती है, वो खुशी आज मैं देशभर के भाजपा के कार्यकर्ता के चेहरे पर दे रहा हूं। मैं कार्यकर्ता के नाते हर भाजपा कार्यकर्ता की खुशी में शामिल हूं। आज का ये दिवस कई मायनों में खास है, विशेष है। ये देश के उज्ज्वल भविष्य की उद्घोषणा का दिन है। ये भरोसे का दिन है। भरोसा भारत के महान लोकतंत्र पर, भरोसा प्रदर्शन की राजनीति पर। भरोसा एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना पर। मैं बंगाल की जनता का, असम की जनता का, पुदुचेरी की जनता का, तमिलनाडु और केरल की जनता का आदरपूर्वक नमन करता हूं। मैं उनका वंदन करता हूं।

पीएम ने कहा भाजपा के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता ने कमाल कर दिया है, कमल खिला दिया है। आपने नया इतिहास रच दिया है। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन के अध्यक्ष पद संभालने के बाद ये पहले विधानसभा चुनाव थे। इनमें पार्टी कार्यकर्ताओं को जो उनका मार्गदर्शन मिला, वह इस विजय में बहुमूल्य रहा है। आज अलग-अलग उपचुनाव के परिणाम भी उत्साहजनक रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड और त्रिपुरा में जो उपचुनाव हुए, उनमें हमारे उम्मीदवारों को जनता-जनार्दन ने आशीर्वाद दिया। हम इन राज्यों में भी जीत गए। एनडीए की नेता सुनेत्रा पवार जी ने भी बड़ी जीत दर्ज की है। मैं सभी राज्यों की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि जय-पराजय लोकतंत्र और चुनावी राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा होता है, लेकिन पांच राज्यों की जनता ने पूरे विश्व को दिखाया है कि ये हमारा भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी क्यों है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक तंत्र नहीं है। ये हमारी रगों में दौड़ता हुआ संस्कार है। आज सिर्फ भारत का लोकतंत्र नहीं जीता है, आज भारत का संविधान भी जीता है। हमारी सांविधानिक संस्थाएं जीती हैं। हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं जीती हैं। बंगाल में करीब 93 फीसदी मतदान होना, अपने आप में ऐतिहासिक रहा है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि 2013 में जब भाजपा ने मुझे पीएम उम्मीदवार के रूप में भी काम दिया और जब मैं काशी में अपना नामांकन भरने गया और जब पत्रकारों ने मुझे पूछा तो मैंने कहा था कि ‘न मुझे किसी ने भेजा है, न मैं यहां आया हूं, मुझे यहां मां गंगा ने बुलाया है।’ आज मैं महसूस कर रहा हूं कि मां गंगा हमारे ऊपर अपनी कृपा बरसा रही हैं। गंगा के साथ ब्रह्मपुत्र का भी हम पर अहसान रहा है। असम की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा-एनडीए पर भरोसा किया है। हैट्रिक- तीसरी बार।

इस दौरान असम की जीत का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा ‘असम के टी-गार्डन वाले शहरों में भी भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन मिला है। असम अब अपने विकास की रफ्तार और बढ़ाएगा। साल 2021 में हमने पुदुचेरी की जनता के सामने पुदुचेरी का विजन रखा था। पुदुचेरी की जनता ने हमें अपना आशीर्वाद दिया था। पुदुचेरी की जनता ने इस विजन को पूरा करने के लिए हम पर एक बार फिर अपना भरोसा कायम किया है। मैं पुदुचेरी के युवाओं, मछुआरों को भरोसा देना चाहता हूं कि एनडीए की सरकार आपके लिए काम करती रहेगी।’

पीएम ने बताया कि आज देश के 20 से ज्यादा राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकारें हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मंत्र है नागरिक देवो भवः। हम जनता की सेवा में जुटे हुए हैं। इसलिए जनता भाजपा पर ज्यादा से ज्यादा भरोसा कर रही है। जनता साफ देख रही है कि जहां भाजपा, वहां गुड गवर्नेंस। जहां भाजपा, वहां विकास। आप बीते दो साल के ट्रेंड को देखिए। हरियाणा में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनी। महाराष्ट्र में जबरदस्त जीत मिली। दिल्ली में अभूतपूर्व जीत मिली। बिहार में भी हमें बड़ी जीत हासिल हुई। यह जीत सिर्फ राज्यों में ही नहीं लोकल गवर्नेंस में भी दिख रही है। गुजरात में इस बार भाजपा को स्थानीय चुनाव में सबसे बड़ा वोट शेयर मिला है। ये भाजपा की गुड गवर्नेंस का सबसे बड़ा उदाहरण है।

आज भाजपा कार्यकर्ता के रूप में मेरे मन में एक और बात आ रही है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को कितनी शांति मिली होगी। उन्होंने 1951 में जनसंघ की स्थापना कर के प्रत्येक कार्यकर्ता को संदेश दिया था कि देश के लिए जीना है और देश के लिए मरना है। उन्होंने अपने जीवन से साबित किया कि राष्ट्र सर्वोपरि का मंत्र लेकर चलने वाले अपना जीवन देने में एक पल का भी संकोच नहीं करते। डॉ. मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए एक बड़ी लड़ाई लड़ी। उन्होंने जिस समृद्ध बंगाल का सपना देखा था, वह सपना कई दशकों से पूरा होने का इंतजार कर रहा था। आज 4 मई 2026 को बंगाल की जनता ने हम भाजपा कार्यकर्ताओं को अवसर दिया है। साथियों बंगाल के भाग्य में आज से एक नया अध्याय जुड़ गया है। आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है। विकास के भरोसे से युक्त हुआ है। बांग्लाए पोरिबोर्तन होए गए छे। इस जीत के साथ-साथ वंदे मातरम के 150वें वर्ष में भारत माता को और उसी बंकिम जी को बंगाल के लोगों ने अपना सादर नमन प्रेषित किया है। श्री अरबिंदो को भी मतदाताओं ने ऐतिहासिक श्रद्धांजलि दी है। बंगाल में हमारे कितने भी कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन इस जीत के लिए समर्पित किया है। भाजपा की कितनी महिला कार्यकर्ताओं को तमाम अत्याचार सहने पड़े। केरल में और बंगाल में भाजपा के हर कार्यकर्ता को कितनी मुसीबतें झेलनी पड़ीं। उन पर कितने जुल्म हुए हैं, कितने अत्याचार हुए हैं। मैं आज बंगाल में भाजपा की सफलता का श्रेय ऐसे सभी कार्यकर्ताओं को और उनके परिवारों को देता हूं। मैं यह जीत बंगाल की जनता को समर्पित करता हूं।

4 मई की यह शाम भले ही ढल रही हो, लेकिन बंगाल की पावन धरा पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। एक ऐसा सवेरा, जिसका इतंजार पीढ़ियों ने किया है। भाजपा ने जितनी सीटें जीतीं वह महज एक चुनावी आंकड़ा नहीं है। ये उस अडिग विश्वास की हुंकार है, जिसने डर, तुष्टिकरण और हिंसा की राजनीति को जड़ से उखाड़ फेंका है। साथियों आज से बंगाल के भविष्य की एक ऐसी यात्रा शुरू हो रही है, जहां विकास, अटूट विश्वास और नई उम्मीदें कदम से कदम मिलाकर चलेंगी। मैं आज हर बंगाल वासी को भरोसा देता हूं कि बंगाल के बेहतर भविष्य के लिए भाजपा दिन-रात एक कर देगी। बंगाल में अब महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिलेगा। युवाओं को रोजगार मिलेगी। पलायन रुकेगा। पहली कैबिनेट में ही आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी दिखाई जाएगी और घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। इस महाविजय की दहलीज पर खड़े होकर हम गुरुदेव टैगोर को भी याद कर रहे हैं। बंगाल के ये चुनाव एक और वजह से बहुत खास रहे हैं। आप याद कीजिए बंगाल चुनाव के समय कैसी खबरें आती थीं। हिंसा, डर और निर्दोष लोगों की मौतें, लेकिन इस बार पूरे देश ने एक नई खबर सुनी। बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ। पहली बार ऐसा हुआ कि चुनावी हिंसा में एक भी निर्दोष नागरिक की जान नहीं गई। लोकतंत्र के इस महापर्व में बंदूक की आवाज के ऊपर भी जनता की आवाज गूंजी। पहली बार डर नहीं, लोकतंत्र जीता है।

आज जब बंगाल ने परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश किया है, तो मैं बंगाल के हर राजनीतिक दल से एक आग्रह भी करना चाहता हूं। बंगाल में बीते दशकों में राजनीतिक हिंसा की वजह से न जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद हो चुकी हैं। मेरा मानना है कि आज से बंगाल की चुनावी जो आदतें फैली हुई हैं, उसमें बदलाव आना चाहिए। आज जब भाजपा जीती है तो बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए। भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए। मेरी सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अपील है कि आइये हिंसा के इस अंतहीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म करें। किसने किसे वोट दिया, किसे नहीं दिया, उससे ऊपर उठकर बंगाल की सेवा के लिए काम करें।

इन राज्यों में चुनाव और उसके नतीजों की राजनीतिक विशेषज्ञ अपने तरीके से समीक्षा कर रहे हैं। लेकिन इन नतीजों की एक और अहम बात है, इनकी टाइमिंग। आप देख रहे हैं कि जब इन राज्यों में जनता वोट डाल रही थी, तो इसी दौरान विश्व में क्या कुछ नहीं हुआ। जगह-जगह युद्ध के सायरन बज रहे थे। अस्थिरता और अराजकता का माहौल रहा। उस दौरान भारत का जन-जन स्थिरता के लिए वोट दे रहा था। आज पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का देश पर पूरा असर पड़ा है। लेकिन भारत पूरे सामर्थ्य से इस संकट का सामना कर रहा है। इस चुनाव ने दिखाया है कि भारत इस चुनौती में भी एकजुट है, एकमत है और एक लक्ष्य से संकल्पित है। वह लक्ष्य है- विकसित भारत। यह लक्ष्य लेकर हम निकले हैं। विकसित भारत के संकल्प की सिद्धी में पूर्वोदय का बड़ा महत्व है। जब भारत समृद्ध था, तब आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक स्तर पर स्थिर था। तब उसके तीन स्तंभ था- अंग यानी आज का बिहार, बंग यानी आज का बंगाल और कलिंग यानी आज का ओडिशा। कलिंग उस वक्त हिंद महासागर के व्यापार का एकछत्र सम्राट था। कलिंग के बंदरगाह पूरे एशिया में भारत के उत्पाद को पहुंचाते थे। बंग वह सांस्कृतिक धरती थी, जहां से भारत की आत्मा की आवाज उठती थी। गुलामी के कालखंड में जैसे-जैसे समृद्ध भारत के मजबूत स्तंभ कमजोर हुए, भारत का सामर्थ्य भी क्षीण होता गया। इसलिए विकसित भारत के निर्माण के लिए इन तीनों स्तंभों का फिर मजबूत होना आवश्यक है। मुझे गर्व है कि अंग, बंग और कलिंग ने इस महाभियान के लिए भाजपा को चुन लिया है। एनडीए पर भरोसा किया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान पार्टी में उत्साह का माहौल देखने को मिला। असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी पार्टी 203 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी आगे है। असम में मिली प्रचंड जीत और बंगाल में मजबूत बढ़त के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। मुख्यालय में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल देखा गया। पीएम मोदी के भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय पहुंचने से पहले उत्साह का माहौल देखने को मिला। असम और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर कार्यकर्ताओं ने खुशी जाहिर की। मुख्यालय में कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ जश्न मनाया। असम और बंगाल से आए शुरुआती रुझानों ने कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ा दिया है।

भाजपा से जुड़े जानकारों और गत 12 वर्षों में चुनावों के बाद पीएम मोदी के पुराने संबोधनों को देखते हुए माना जा रहा है कि उनके संबोधन में आगामी योजनाओं और पार्टी की दिशा पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दरअसल, बंगाल में पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल करने की दिशा में बढ़ रही है। तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी- टीवीके के सामने पस्त होते दिख रहे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपने 15 मंत्रियों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। इस कारण डीएमके की सत्ता भी जाने के संकेत हैं।

NATIONAL : विधानसभा चुनावः बंगाल, असम, पुडुचेरी में कमल, तमिलनाडु में विजयरथ, केरल में कांग्रेस

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पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में बड़ा बहुमत प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही भाजपा के खाते में एक और राज्य जुड़ गया। असम और पुडुचेरी में भाजपा और एनडीए की सरकार दोबारा सत्ता में लौटी है। दक्षिण के दो बड़े राज्यों केरल और तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। केरल में वामदलों को हटा कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन 10 सालों बाद लौटा है। वहीं तमिलनाडु में एक साल पहले बनी एक्टर विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रात्रि 11 बजे तक के आंकडे इस प्रकार हैं–

पश्चिम बंगाल- 19 सीटों के नतीजे बाकी

पश्चिम बंगाल 293 सीटों पर बहुमत के लिए 147 सीटें चाहिए। भारतीय जनता पार्टी यहां 207, तृणमूल कांग्रेस 80 पर आगे या बढ़त बनाए हुए है। वहीं, कांग्रेस 2, आम जनता उन्नयन पार्टी 2, माकपा को एक और एआईएसएफ को एक सीट पर जीत मिली है। भाजपा को 45.85 प्रतिशत, तृणमूल कांग्रेस को 40.80 प्रतिशत मत मिले हैं।

भवानीपुर सीट में भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस की नेता एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक मतों से हराया है। वहीं दूसरी सीट नंदीग्राम से लड़ रहे अधिकारी ने यहां भी जीत दर्ज की। खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा के दिलीप घोष (पूर्व पार्टी अध्यक्ष) ने जीत दर्ज की है। आसनसोल दक्षिण से भाजपा की अग्निमित्र पॉल ने जीत हासिल की। बहरेमपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया है। वे पिछली लोकसभा में कांग्रेस के सदन में नेता थे। मथाभांगा से निशिथ प्रमाणिक ने जीत दर्ज की है। पानीहाटी में आरजीकर मामले की पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ ने भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की। तृणमूल का गढ़ माने जाने वाले डायमंड हार्बर से तृणमूल उम्मीदवार पन्नालाल हल्दर ने जीत दर्ज की। उत्तर बंगाल की ज्यादातर सीटों राजगंज, माल, कलिम्पोंग, दार्जिलिंग में भाजपा ने जीत दर्ज की।

तमिलनाडु- 8 सीटों के नतीजे बाकी

तमिलनाडु में 234 सीटों में बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए। यहां टीवीके 107, द्रमुक 60 सीटें, अन्नाद्रमुक 47 सीटों पर आगे या बढ़त बनाए हुए है। वहीं पीएमके ने 4, कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा को उधगमंडलम सीट पर जीत मिली है। डीएमडीके और अन्य को 1-1 सीटें मिली है। टीवीके को 34.92 प्रतिशत, द्रमुक को 24.19 प्रतिशत, अन्नाद्रमुक को 21.22 प्रतिशत मत प्रतिशत मिला है।

तमिलनाडु में टीवीके ने पूरे राज्य में खासकर उत्तरी, पश्चिमी और शहरी इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया। द्रमुक मुख्य रूप से कुछ दक्षिणी और पारंपरिक गढ़ों में सिमटी रही। मुख्यमंत्री एमके स्टालीन कोलाथुर टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू से हार गए। पार्टी प्रमुख एक्टर विजय पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से जीत पाने में कामयाब रहे। एडप्पाडी से अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पाडी क पलनीस्वामी ने रिकॉर्ड मार्जिन से जीत सहासिल की। माइलापोर से टीवीके उम्मीदवार वेंकटारमनन पी. उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। गोबिचेट्टिपालयम अन्नाद्रमुक के के.ए. सेंगोत्तैयान ने 10वीं बार जीत हासिल की (इतिहासिक)। चेपौक-तिरुवल्लिकेनी से मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने जीत दर्ज की। राज्य में कई द्रमुक मंत्री और बड़े नेताओं की हार हुई।

असम- सभी सीटों के नतीजे आए

असम में 126 सीटें हैं और बहुमत के लिए 64 सीटें चाहिए। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 102 सीटों पर जीत हासिल की है। इसमें भाजपा को 82 सीटें, बोडो पीपुल्स फ्रंट को 10 सीटें और असम गण परिषद को 10 सीटों पर जीत मिली है। वहीं कांग्रेस को 19 सीटें, एआईयूडीएफ को 2, रायजोर दल 2, तृणमूल कांग्रेस को 1 सीट पर जीत मिली है। यहां सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को 37.81 प्रतिशत तथा सहयोगी पार्टियों बोडोलैंड को 3.73 प्रतिशत, एजीपी को 6.47 प्रतिशत मत मिले हैं। गठबंधन की दृष्टि से यह आंकड़ा 48 प्रतिशत से अधिक होता है।

राज्य में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए ने भारी बहुमत हासिल किया तथा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जालुकबारी सीट पर भारी अंतर से जीते। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट में हार गए। विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया नजीरा में हारे। स्वास्थ्य मंत्री अजंता नेगी गोलाघाट सीट बचाने में सफल रहीं। रनोज पेगू धेमाजी जीते, अतुल बोरा बोखाखाट में जीते और कई अन्य भाजपा तथा सहयोगी दल के प्रमुख नेता विजयी रहे।

केरल- सभी सीटों के नतीजे आए

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन 99 के आंकड़े तक पहुंचा है। इसमें कांग्रेस ने 63, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 22, केरल कांग्रेस ने 7 सीटों, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने 3, राष्ट्रीय जनता दल ने 1 सीट और अन्य ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं वामदलों के नेतृत्व वाले गठबंधन को 36 सीटों पर जीत हासिल हुई है। गठबंधन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 26, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 8, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी केरल स्टेट कमेटी ने 1-1 सीटों पर जीत दर्ज की है। अन्य पार्टियों में भारतीय जनता पार्टी को 3 और अन्य उम्मीदवार 4 पर जीते हैं।

केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ ने भारी बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन और ओमान चांडी जैसे कांग्रेस नेता भारी अंतर से जीते हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन धर्मादम सीट पर जीते। हालांकि उनके एलडीएफ गठबंधन के नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। इसमें स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा समेत कई एलडीएफ मंत्री शामिल हैं। वहीं पहली बार भाजपा ने एक से अधिक सीटों पर चुनाव जीता है। भाजपा के राजीव चंद्रशेखर ने नेमोम सीट जीती तथा भाजपा ने कुल तीन सीटें हासिल कीं।

पुडुचेरी- सभी सीटों के नतीजे आए

पुडुचेरी की 30 सीटों में बहुमत के लिए 16 का आंकड़ा चाहिए। यहां अखिल भारतीय एन.आर. कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए कुल 18 जीत सीटों पर जीत हासिल की है। इसमें पार्टी को 12, सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को 4, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और लाचिया जननायक काची को 1-1 सीट पर जीत मिली है। वहीं अन्य पार्टियों की बात की जाए तो द्रमुक को 5, कांग्रेस को 1 सीट मिली है। टीवीके को 2, नेयम मक्कल कड़गम को 1 सीट पर सफलता मिली है। इसके अलावा 3 स्वतंत्र उम्मीदवार जीते हैं।

उपचुनाव- सभी के नतीजे आए

विधानसभा उपचुनाव के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में आए हैं। पार्टी ने सात में से चार पर जीत दर्ज की है। एक सीट पर उसके सहयोगी दल के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। कर्नाटक की दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।

पांच राज्यों की सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव में महाराष्ट्र की बारामती सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुनेत्रा पवार बड़े अंतर से जीती है। राहुरी से भाजपा उम्मीदवार अक्षय कार्डिले, गुजरात के उमरेठ सीट से भाजपा उम्मीदवार हर्षदभाई गोविंदभाई परमार ने जीत दर्ज की है। नगालैंड के कोरीडांग सीट पर भाजपा उम्मीदवार दाओचिर आई. इम्चेन, त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार जहर चक्रवर्ती ने जीत दर्ज की है। वहीं कर्नाटक के बागलकोट सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार उमेश हुलप्पा ने जीत दर्ज की है, जबकि दावनगेरे दक्षिण सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन ने जीत दर्ज की है।

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