मूसलाधार मानसूनी बारिश, बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से देशभर में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य आपका राहत कोष से बाढ़ प्रभावित सात राज्यों के लिए 2,117 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के छात्रू इलाके में शुक्रवार की देर रात बादल फटने के बाद पहाड़ी से आए मलबे और पत्थरों से आबादी वाले क्षेत्र में कई दुकानों, घरों को नुकसान पहुंचा और वाहन दब गए।मलबा आने से किश्तवाड़-अनंतनाग राष्ट्रीय राजमार्ग भी कुछ देर के लिए बंद रहा। अमरनाथ यात्रा भी बंद है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने से फंसे 2,200 लोगों को तीन विशेष ट्रेनें चलाकर निकाला गया।
केरल में भारी बारिश के बाद कई जगह हुए भूस्खलन में छह लोगों की मौत हो गई है और छह लोग लापता हैं। राज्य भर में 65 राहत शिविर खोले गए हैं, जिनमें 1,465 लोगों ने शरण ली है। 12 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसको देखते हुए 2 अगस्त को होने वाली राज्य पात्रता परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश: कुमारसैन में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। धर्मशाला के समीप भूस्खलन की चपेट में आने से दो युवक घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर है।
मणिपुर-असम: चुराचांदपुर जिले में भारी बारिश के बाद लानवा नदी आई बाढ़ में एक व्यक्ति बह गया। असम में बाढ़ से अब तक 82 लोगों की मौत हुई है और 1.93 लाख लोग प्रभावित।
गुजरात: दक्षिण और मध्य गुजरात में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति के बाद 27 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
ओडिशा: महानदी का जल स्तर बढ़ने के बाद हीराकुंड बांध के 22 गेट खोल दिए गए हैं और 10 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। बाढ़ से 8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
आयकर विभाग के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए गए. विभाग ने समय पर रिटर्न भरने वाले करदाताओं का धन्यवाद दिया और इसे बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत बताया.
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई को खत्म होने के साथ ही इस साल रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने अपना रिटर्न दाखिल किया. आयकर विभाग के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 (AY 2026-27) के लिए 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किए गए. विभाग ने समय पर रिटर्न दाखिल करने वाले सभी करदाताओं का धन्यवाद भी किया है.
समय पर रिटर्न भरने वालों को विभाग ने कहा धन्यवाद आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल किए जा चुके हैं. विभाग ने इसे करदाताओं की बढ़ती जागरूकता और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत बताया. विभाग ने कहा कि समय पर टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले सभी करदाताओं का योगदान देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण है.
किन लोगों के लिए थी 31 जुलाई की अंतिम तारीख? 31 जुलाई की डेडलाइन उन व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals), वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए थी, जिनके खातों का ऑडिट कराना जरूरी नहीं है. वहीं, जिन करदाताओं के लिए टैक्स ऑडिट अनिवार्य है या जिनकी आय व्यवसाय और पेशे से जुड़ी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अलग समय सीमा निर्धारित की गई है.
डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा? अगर कोई पात्र करदाता 31 जुलाई तक ITR दाखिल नहीं कर पाया है, तो उसके पास अभी भी बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने का विकल्प मौजूद है. हालांकि, इसके लिए आयकर कानून के तहत लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है. इसके अलावा कुछ टैक्स लाभों पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन लोगों का रिटर्न अभी तक दाखिल नहीं हुआ है, वे बिना देरी किए जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें.
समय पर ITR भरने के कई फायदे समय पर ITR दाखिल करने से टैक्स रिफंड जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा होम लोन, पर्सनल लोन, बिजनेस लोन और वीजा आवेदन के दौरान भी ITR एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में काम आता है. नियमित रूप से रिटर्न भरने से करदाता की वित्तीय विश्वसनीयता भी मजबूत होती है और भविष्य में आयकर विभाग से जुड़ी परेशानियों की संभावना कम रहती है.
बढ़ रही है टैक्स अनुपालन की संस्कृति पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन ITR फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. आयकर विभाग ने भी ई-फाइलिंग पोर्टल, प्री-फिल्ड डेटा और ऑनलाइन वेरिफिकेशन जैसी सुविधाओं के जरिए प्रक्रिया को सरल बनाया है. 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक ITR दाखिल होना इस बात का संकेत है कि देश में टैक्स अनुपालन को लेकर लोगों की जागरूकता पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है. आने वाले दिनों में विभाग इन रिटर्न की प्रोसेसिंग और टैक्स रिफंड जारी करने की प्रक्रिया भी तेज करेगा.
एएनआई, तेहरान। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका लगातार ईरान को हमले की धमकी दे रहा है तो ईरान भी पलटवार की बात कर रहा है।
इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरानी ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर नए हमले का आदेश देते हैं तो वह मध्य पूर्व के अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाएगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज ने यह रिपोर्ट दी है।तस्नीम के अनुसार, तेहरान ने एक व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत अगर अमेरिका या इजरायल नए हमले करते हैं तो मध्य पूर्व के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
सऊदी अरब का घावर तेल क्षेत्र (वैश्विक तेल आपूर्ति का 5 प्रतिशत से अधिक), अब्काइक और खुराइस सुविधाएं (प्रतिदिन 70 लाख बैरल से ज्यादा उत्पादन)। यूएई का जाकुम तेल क्षेत्र और रुवैस रिफाइनरी (प्रतिदिन 10 लाख बैरल से अधिक क्षमता)। कतर का नॉर्थ फील्ड और रास लफान (वैश्विक एलएनजी व्यापार का करीब 20 प्रतिशत)। कुवैत का बुर्गन तेल क्षेत्र (प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल), बहरीन की सित्रह रिफाइनरी। इजरायल के लेवियाथन और तमार गैस क्षेत्र।
एक वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने तस्नीम से कहा कि हमने किसी भी संभावित अमेरिकी लापरवाही का जवाब देने के लिए व्यापक योजना तैयार की है।
उन्होंने 40 दिन के युद्ध का जिक्र करते हुए दावा किया कि ईरान ने कतर की सबसे महत्वपूर्ण गैस रिफाइनरी पर हमला किया था और ट्रंप ने बाद में ट्रुथ सोशल पर माफी मांगी थी।यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ईरानी ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर हमले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, हालांकि अंतिम फैसला नहीं हुआ है।रिपोर्ट के अनुसार, ये हमले तेहरान पर दबाव बनाने के लिए हो सकते हैं ताकि वह संघर्ष विराम वार्ताओं में अमेरिकी शर्तें स्वीकार करे। इसमें इजरायली सेना की भी संभावित भागीदारी बताई गई है, जिससे ईरान के मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ सकता है।
खबर है कि हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, जिससे वहां घना धुआं भर गया। यह जहाज कतर के रास लाफान बंदरगाह से गुजरात के दहेज बंदरगाह की ओर जा रहा था। घटना ओमान की खाड़ी में, होर्मुज के पास हुई।
होर्मुज के आसपास व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज से सटे ईरान के कई बंदरगाह शहरों और द्वीपों को निशाना बनाया।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच कतर से भारत आ रहे एक जहाज पर भी कथित तौर पर ड्रोन हमला हुआ। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मंगलवार को सूत्रों ने बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जहाज पर कुल 29 नाविक सवार थे, जिनमें चार भारतीय नागरिक शामिल हैं। सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।
खबर है कि हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, जिससे वहां घना धुआं भर गया। यह जहाज कतर के रास लाफान बंदरगाह से गुजरात के दहेज बंदरगाह की ओर जा रहा था। घटना ओमान की खाड़ी में, होर्मुज के पास हुई।
सूत्रों ने बताया कि 7 जुलाई को अरब सागर से गुजरते समय एलएनजी कैरियर AL REKAYYAT पर कथित रूप से ड्रोन हमला किया गया। इस घटना की जानकारी आरपीएसएल ने डीजीकॉम को दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार जहाज को कुछ नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी भी व्यक्ति के घायल होने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि जहाज पर मौजूद सभी 29 चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। हमले के बाद इंजन रूम में लगी आग के कारण जहाज से काफी धुआं निकलता देखा गया।
गौरतलब है कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर जोर देता रहा है। भारत का रुख रहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही तथा व्यापार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
एनटीए ने शनिवार को घोषणा की कि अखिल भारतीय कोटे के लिए नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग चार अगस्त से शुरू होगी और अकादमिक सत्र आठ सितंबर से शुरू होगा।
आईएएनएस, नई दिल्ली। एनटीए ने शनिवार को घोषणा की कि अखिल भारतीय कोटे के लिए नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग चार अगस्त से शुरू होगी और अकादमिक सत्र आठ सितंबर से शुरू होगा।
एनटीए ने इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश में कहा कि अखिल भारतीय कोटे और राज्य कोटे के लिए नीट यूजी काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।मेडिकल कॉलेजों को भेजे गए अपने सर्कुलर में एनटीए ने कहा कि शनिवार-रविवार सहित छुट्टियों के दिन भी प्रवेश कार्य जारी रखा जाए।एनटीए के अनुसार, अखिल भारतीय कोटा/डीम्ड और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए काउंसलिंग का पहला दौर चार अगस्त से 17 अगस्त तक होगा। इसमें ज्वाइनिंग की आखिरी तारीख 22 अगस्त और सत्यापन की तारीख 23 अगस्त होगी।
राज्य कोटा काउंसलिंग का पहला दौर 13 से 22 अगस्त के बीच होगा। ज्वाइनिंग की आखिरी तारीख 28 अगस्त होगी और दस्तावेजों का सत्यापन 29 अगस्त को किया जाएगा।अखिल भारतीय कोटे के लिए काउंसलिंग का दूसरा राउंड 24 अगस्त से दो सितंबर के बीच होगा। राज्य कोटे के लिए काउंसलिंग का दूसरा दौर 31 अगस्त से आठ सितंबर के बीच होगा।एनटीए ने कहा कि तीसरे राउंड और खाली बची सीटों को भरने के बाद अखिल भारतीय कोटा और स्टेट काउंसलिंग, दोनों के लिए ज्वाइनिंग की आखिरी तारीख 10 अक्टूबर होगी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि अगर बंगलूरू विकास प्राधिकरण (बीडीए), पूर्व शहर सुधार न्यास बोर्ड (सीआईटीबी), नगर निकायों या सहकारी समितियों की ओर से दिए गए भूखंड पर पांच साल के भीतर घर नहीं बनाया गया, तो सरकार उसे वापस ले लेगी। हालांकि, भूखंड खरीदने के लिए जमा की गई रकम ब्याज सहित लौटा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि खाली पड़े भूखंड कूड़ा फेंकने की जगह न बन जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार से जमीन पाने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे उस पर घर बनाएं और अपनी संपत्ति की देखभाल करें।
हेब्बल जंक्शन के पास ‘फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट’ अभियान की शुरुआत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, चाहे वह बीडीए का भूखंड हो या नगर निगम का, मालिक की जिम्मेदारी है कि वह उसे साफ रखे। इसलिए भूखंड मिलने के पांच साल के भीतर घर बनना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो या तो दोगुना कर (टैक्स) लगाया जाएगा या फिर भूखंड वापस ले लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब भूखंड पर घर नहीं बनता, तो वह कूड़ा फेंकने की जगह बन जाता है। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार सच में उन भूखंडों को वापस ले लेगी, जहां घर नहीं बने हैं, तो शिवकुमार ने कहा, इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हमें ऐसा करना पड़ेगा। हम लोगों को घर बनाने के लिए ही भूखंड देते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने भूखंड मिलने के 20, 30 या 40 साल बाद भी घर नहीं बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा, हम उनकी जमा की गई रकम ब्याज सहित वापस करेंगे और भूखंड अपने पास ले लेंगे। जिन लोगों को सीआईटीबी, बीडीए या सहकारी समितियों से भूखंड मिले हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे घर बनाएं। वे बिना चारदीवारी बनाए भूखंड को खाली कैसे छोड़ सकते हैं, जिससे वह कूड़ा फेंकने की जगह बन जाए? अगर वे खुद वहां कूड़ा नहीं भी फेंकते हैं, तब भी अपनी संपत्ति की सुरक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार बंगलूरू को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही सरकार चाहती है कि संपत्ति मालिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अपने खाली प्लॉट को कूड़ा फेंकने की जगह न बनने दें।
राहुल गांधी बोले- परिसीमन भाजपा की साजिश है, इसका समर्थन करने वाले तमिलनाडु के साथ कर रहे धोखा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि परिसीमन भाजपा की साजिश है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का मकसद लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना और तमिलनाडु के लोगों की राजनीतिक ताकत छीनना है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा परिसीमन करने की कोशिश कर रही है। परिसीमन का मकसद लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना और तमिलनाडु के लोगों की राजनीतिक ताकत छीनना है। यह भाजपा की साजिश है… जो कोई भी परिसीमन का समर्थन करता है, वह तमिलनाडु और उसके भविष्य के साथ धोखा कर रहा है, और आरएएसएस व भाजपा को तमिलनाडु के लोगों और उनके भविष्य पर हमला करने का मौका दे रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में डिलिमिटेशन बिल को फिर से लाने की चर्चा तेज है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने की योजना है। वहीं, इस मुद्दे पर दक्षिण भारत की पार्टियों की चिंताएं भी सामने आई हैं। डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवन ने कहा है कि अगर इस प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों की सीटों पर असर नहीं पड़ता, तो इस पर अलग-अलग सुझाव दिए जा सकते हैं। फिलहाल, डिलिमिटेशन को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है और आने वाले समय में इस पर संसद में बड़ी बहस होने की संभावना है।
एट्टप्पन तमिल इतिहास का एक विवादास्पद नाम है। एट्टप्पन को आमतौर पर वीर स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडिया कट्टबोम्मन के साथ विश्वासघात करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है। 18वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों और स्थानीय पालयक्कर शासकों के बीच संघर्ष चल रहा था। इतिहास के अनुसार, एट्टप्पन ने कट्टबोम्मन की गतिविधियों की जानकारी अंग्रेजों को दी, जिससे उन्हें गिरफ्तार करने में मदद मिली। 1799 में कट्टबोम्मन को अंग्रेजों ने फांसी दे दी। इसी कारण तमिल संस्कृति में ‘एट्टप्पन’ नाम विश्वासघात का पर्याय बन गया है। हालांकि इस विषय पर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत मौजूद हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि परिसीमन भाजपा की साजिश है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का मकसद लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना और तमिलनाडु के लोगों की राजनीतिक ताकत छीनना है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा परिसीमन करने की कोशिश कर रही है। परिसीमन का मकसद लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना और तमिलनाडु के लोगों की राजनीतिक ताकत छीनना है। यह भाजपा की साजिश है… जो कोई भी परिसीमन का समर्थन करता है, वह तमिलनाडु और उसके भविष्य के साथ धोखा कर रहा है, और आरएएसएस व भाजपा को तमिलनाडु के लोगों और उनके भविष्य पर हमला करने का मौका दे रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में डिलिमिटेशन बिल को फिर से लाने की चर्चा तेज है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने की योजना है। वहीं, इस मुद्दे पर दक्षिण भारत की पार्टियों की चिंताएं भी सामने आई हैं। डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवन ने कहा है कि अगर इस प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों की सीटों पर असर नहीं पड़ता, तो इस पर अलग-अलग सुझाव दिए जा सकते हैं। फिलहाल, डिलिमिटेशन को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है और आने वाले समय में इस पर संसद में बड़ी बहस होने की संभावना है।
एट्टप्पन तमिल इतिहास का एक विवादास्पद नाम है। एट्टप्पन को आमतौर पर वीर स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडिया कट्टबोम्मन के साथ विश्वासघात करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है। 18वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों और स्थानीय पालयक्कर शासकों के बीच संघर्ष चल रहा था। इतिहास के अनुसार, एट्टप्पन ने कट्टबोम्मन की गतिविधियों की जानकारी अंग्रेजों को दी, जिससे उन्हें गिरफ्तार करने में मदद मिली। 1799 में कट्टबोम्मन को अंग्रेजों ने फांसी दे दी। इसी कारण तमिल संस्कृति में ‘एट्टप्पन’ नाम विश्वासघात का पर्याय बन गया है। हालांकि इस विषय पर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत मौजूद हैं।
सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया कि इस कृत्य को राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश कुमार और ‘इंडी’ गठबंधन के अन्य सांसदों का पूरा समर्थन प्राप्त था। शिकायतकर्ता ने गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीसीपी नॉर्थ, डीसीपी नॉर्थ वेस्ट और जहांगीरपुरी एसएचओ से मांग की है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले इन सभी लोगों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
संसद परिसर में राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामले को लेकर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए ‘नुक्कड़ नाटक’ पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को एक लिखित शिकायत सौंपी है। इस शिकायत में विपक्षी नेताओं पर हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
भाजपा ने अपनी शिकायत में मुख्य रूप से विपक्षी नेताओं को नामजद किया है, जिसमें राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष), पप्पू यादव (पूर्णिया से निर्दलीय सांसद) और अवधेश प्रसाद (समाजवादी पार्टी के सांसद) का नाम शामिल है।
शुक्रवार को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में चंदे के कथित गबन को लेकर एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान सांसद पप्पू यादव साधु के वेश (भगवा वस्त्र) में नजर आए थे और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस नाटक में हिस्सा लिया था। भाजपा का आरोप है कि इस नाटकीय प्रदर्शन के जरिए पूरे संत समाज और हिंदू आस्था का मजाक उड़ाया गया है।
इस घटना को लेकर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की है। बांसुरी स्वराज ने कहा कि विरोध के नाम पर पप्पू यादव, अवधेश प्रसाद और राहुल गांधी ने जो स्वांग रचा, वह कोई प्रदर्शन नहीं बल्कि सनातन संस्कृति और संत समाज का मजाक था। संविधान हमें विरोध का अधिकार जरूर देता है, लेकिन किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं देता।
विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि जानबूझकर भगवा वस्त्र पहने गए ताकि यह दर्शाया जा सके कि पूरा संत समाज चोर है। हम इसके सख्त खिलाफ हैं और चाहते हैं कि पुलिस इन नेताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे।
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा को सौंपे गए पत्र (जिसमें भाजपा विधायक अनिल शर्मा और करनैल सिंह भी शामिल थे) में स्पष्ट किया गया है कि इस राजनीतिक नाटक ने पवित्र हिंदू धार्मिक प्रतीकों (जैसे भगवा वस्त्र, तिलक) और प्रथाओं का सार्वजनिक रूप से उपहास किया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भगवान राम के भक्त और हिंदू पुजारी निजी स्वार्थ के लिए दान का गबन करते हैं। इस कृत्य से उन करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं को गहरी ठेस पहुंची है, जो मंदिरों में दिए जाने वाले दान और इन प्रतीकों को बेहद पवित्र मानते हैं।
गौरतलब है कि इस प्रदर्शन को लेकर पप्पू यादव की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी के जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में भी उनके खिलाफ इसी तरह की एक शिकायत दर्ज की गई थी। इसके अलावा, शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी साधु-संतों और वकीलों ने सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
राहुल गांधी में शनिवार को प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी पर छात्रों की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कि छात्र उनसे माफी के हकदार हैं, न कि उनकी माफी के।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की उस कथित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘भारत के छात्रों को उनकी माफी की जरूरत नहीं है। वे उनसे माफी के हकदार हैं।’ प्रधानमंत्री ने छात्रों द्वारा उनके खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों के लिए उन्हें ‘माफ’ करने की बात कही थी।
राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। यह मुलाकात चेन्नई के पास महाबलीपुरम में हुई।
माता-पिता को बच्चों को खोने का दुख सहते हुए देखना दर्दनाक- राहुल राहुल ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को खोने का दुख सहते हुए देखने से ज्यादा दर्दनाक कुछ भी नहीं है और हर युवा की मौत के बाद उसका परिवार जीवन भर का दर्द लेकर रह जाता है।
परीक्षाएं रद होने और सालों की तैयारी के रातों-रात बर्बाद- राहुल उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने, परीक्षाएं रद होने और सालों की तैयारी के रातों-रात बर्बाद हो जाने से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि छात्रों से ऐसे सिस्टम में ईमानदारी से काम करने को कहा जा रहा है जो खुद उनके प्रति ईमानदार नहीं है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की आलोचना की कि वे किसी भी ऐसे दुखी माता-पिता या छात्र से नहीं मिले जिनका भविष्य पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों और उनके परिवारों के दुख को समझने में नाकाम रही है।
पुणे में शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने तिलक के निर्भीक राष्ट्रवादी विचारों और अजीत डोभाल द्वारा तैयार किए गए आधुनिक भारत के सुरक्षा ढांचे के बीच समानता स्थापित की। उन्होंने कहा कि भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के क्षेत्र में डोभाल का योगदान ऐसा है कि जब भी देश का इतिहास लिखा जाएगा, उनके लिए एक स्वर्णिम पन्ना अवश्य सुरक्षित रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की तीनों सरकार में डोभाल ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर रहे हैं। उनकी इस पद पर नियुक्ति को लेकर गृह मंत्री ने खुलासा करते हुए कहा कि पहले भारत की विदेश नीति में दृढ़ता का अभाव दिखाई देता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अजीत डोभाल की रणनीतिक भूमिका ने इसे पूरी तरह बदल दिया। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। आज भारत की विदेश नीति मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान के साथ दुनिया के सामने खड़ी है। इसमें अब इस्पात जैसी मजबूती है, जिसे कोई नकार नहीं सकता।’
अमित शाह ने गुजरात के गृह मंत्री रहने के दिनों का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अजीत डोभाल से चर्चा करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, ‘उस समय मेरी अजीत जी से कोई व्यक्तिगत पहचान नहीं थी। वे मेरे घर आए और उन्होंने जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्हीं सुझावों के आधार पर गुजरात पुलिस ने न केवल अहमदाबाद बम धमाकों का सफलतापूर्वक खुलासा किया, बल्कि देशभर में हुए 13 बम धमाकों के मामलों की गुत्थी भी एक साथ सुलझाने में सफलता हासिल की। यह बेहद बड़ी उपलब्धि थी।’
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार को अमित शाह ने प्रेरणा का माध्यम क्यों बताया?
अमित शाह ने कहा कि ऐसे पुरस्कार केवल सम्मान देने की औपचारिकता नहीं होते, बल्कि समाज की ओर से उन व्यक्तित्वों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम होते हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। जब ऐसे लोगों का सम्मान होता है तो समाज उनके प्रति अपना ऋण कुछ हद तक चुकाता है। साथ ही, उनका जीवन और कार्य नई पीढ़ी तथा देश के लिए समर्पित हर नागरिक को प्रेरणा देते हैं। अजीत डोभाल को दिया गया लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार भी आने वाले समय में देशसेवा की भावना रखने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।’