Monday, March 16, 2026
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Bollywood : 33वें बर्थडे पर आलिया भट्ट का बड़ा तोहफा, ‘Eternal Kids’ के जरिए बच्चों को सुनाएंगी कहानियां

आलिया भट्ट ने अपने 33वें बर्थडे पर बच्चों को एक खास तोहफा दिया है. एक्ट्रेस ने ‘Eternal Kids’ नाम की नई पहल शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके जरिए बच्चों के लिए कहानियां बनाई जाएंगी. एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर आलिया भट्ट ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी Eternal Sunshine Productions के तहत बच्चों के लिए एक नई पहल शुरू की है. आज वो अपना 33वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं और इस खास मौके पर उन्होंने ‘Eternal Kids’ नाम का नया सेगमेंट लॉन्च करने का ऐलान किया. इसके जरिए बच्चों के लिए मजेदार, दिल छू लेने वाली और इमेजनरी स्टोरीज बनाई जाएंगी.

सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करते हुए आलिया ने बताया कि इस नई पहल के तहत कई प्रोजेक्ट्स पहले से ही तैयार किए जा रहे हैं. उन्होंने लिखा, ‘हमारी प्रोडक्शन कंपनी Eternal Sunshine Productions का अब एक नया हिस्सा भी है, जिसका नाम ‘Eternal Kids’ है. इसके लिए हमने पहले से ही तीन दिलचस्प प्रोजेक्ट्स का प्लान बना लिया है.’

पहला प्रोजेक्ट ‘There’s C and G and M’ नाम की एक कहानी है, जो आलिया भट्ट के दादाजी के बनाए किरदारों और कहानियों से प्रेरित है. आलिया ने बताया कि ये कहानियां उनके बचपन का बहुत खास हिस्सा रही हैं और वो और उनकी बहन Shaheen Bhatt इन्हें सुनते हुए बड़ी हुई हैं. आलिया ने लिखा, ‘मैं और शाहीन इन कहानियों को सुनते हुए बड़े हुए हैं और अब हम इन्हें आप सब तक पहुंचाने के लिए बहुत खुश हैं. ग्रैंडपा, आपको बहुत याद कर रही हूं.’

इसी बैनर के तहत दूसरा प्रोजेक्ट ‘OOLANGOO’ भी लॉन्च किया गया है. आलिया भट्ट ने बताया कि ये कहानी एक ऐसे रहस्यमय जीव के बारे में है जो इतना अलग और खास है कि उसकी कहानी सुनाते समय उनकी मां को उसके लिए एक नया शब्द बनाना पड़ा. आलिया ने ये भी बताया कि ये कहानी उनकी मां ने ही लिखी है. तीसरा प्रोजेक्ट ‘Adventures of Ed-a-Mamma’ की दुनिया को आगे बढ़ाने वाला होगा. ये बच्चों की किताबों पर बेस्ड है, जो आलिया के बच्चों के कपड़ों के ब्रांड Ed‑a‑Mamma से इंस्पायर हैं. अब प्रोडक्शन हाउस इसे एक सीरीज में बदलने की योजना बना रहा है और फ्यूचर में इस पर और किताबें भी लाई जाएंगी.

नई पहल की घोषणा करते हुए आलिया भट्ट ने कैप्शनमें लिखा, ‘Eternal Kids पेश है, जहां हमारे बचपन की यादें उस बच्चे से मिलती हैं जो आज भी हमारे अंदर कहीं न कहीं जिंदा है.’ आलिया की इस पहल को फैंस ने सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया. कमेंट्स में कई लोगों ने इसकी तारीफ की. बता दें, इसके अलावा आलिया भट्ट और उनकी बहन शाहीन एक और प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही हैं. ये प्राइम वीडियो की एक फिल्म होगी, जिसका नाम ‘डोंट बी शाय’ है.

Business : मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार की तैयारी, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखने का मास्टर प्लान; जानें डिटेल

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मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालात और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण ऊर्जा संसाधनों में कमी के संकेतों के बीच भारत सरकार लोगों को राहत देने की योजना बना रही है. आइए जानते हैं इस प्लान के बारे में. मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालात और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण ऊर्जा संसाधनों में कमी के संकेतों के बीच भारत सरकार लोगों को राहत देने की योजना बना रही है. सरकारी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां फिलहाल ईंधन की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ा रही हैं, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है. इस घाटे को कम करने के लिए सरकार रिफाइनरीज को पेट्रोल और डीजल की इंपोर्टेड रेट्स से कम कीमत पर देने की योजना बना रही है.

अगर ऐसा फैसला होता है तो एमआरपीएल, सीपीसीएल और एचएमएल जैसी सिंगल रिफाइनरी कंपनियों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं, केंद्र सरकार के इस प्लान के बारे में. मिली जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (आरटीपी) को सीमित करने या उसमें कुछ छूट तय करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही हैं. आरटीपी वह आंतरिक कीमत होती है जिस पर रिफाइनरियां अपने ही मार्केटिंग डिवीजन को पेट्रोल और डीजल बेचती हैं.

इस कदम का उद्देश्य यह है कि रिफाइनरियों को ईंधन के लिए आयात के बराबर पड़ने वाली लागत से कम भुगतान किया जाए. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रिफाइनरियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ आरटीपी के जरिए आगे नहीं बढ़ा पाएंगी और उन्हें इसका कुछ हिस्सा खुद ही उठाना पड़ सकता है. जिससे इन कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है.

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, अगर आरटीपी से जुड़ा प्रस्ताव निजी रिफाइनरी कंपनियों पर भी लागू किया गया, तो इसका असर नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी कंपनियों पर भी पड़ सकता है.

दरअसल ये कंपनियां अपने पेट्रोल और डीजल उत्पादन का बड़ा हिस्सा तेल कंपनियों को सप्लाई करती हैं. देश में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप में से लगभग 90 प्रतिशत का संचालन इन्हीं सरकारी तेल विपणन कंपनियों के पास है. इसलिए खरीद की शर्तों में बदलाव होने पर निजी रिफाइनरियों के कारोबार पर भी प्रभाव पड़ सकता है.

Entertainment : सलमान-आमिर के बाद कादर खान, चला सुनील ग्रोवर की मिमिक्री का जादू, मुरीद हुए सेलेब्स

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द ग्रेट इंडियन कपिल शो में सुनील ग्रोवर ने दिवंगत अभिनेता कादर खान की ऐसी मिमिक्री की कि हर कोई हैरान रह गया. गजराज राव, कुशा कपिला समेत कई सितारों ने उनकी जमकर तारीफ की और उनके अभिनय को अद्वितीय बताया। कॉमेडियन-एक्टर सुनील ग्रोवर जो करें वो गजब है. ये कहना अब बिल्कुल भी गलत नहीं होगा. क्योंकि सुनील जिस भी एक्टर की नकल को करने की ठानते हैं वो हू-ब-हू उसमें ढल जाते हैं. वो चाहे सलमान खान हो, आमिर खान या अब कादर खान. शायद ही आपने कभी किसी को आर्टिस्ट को कादर खान की नकल उतारते इतने बेहतरीन तरिके से देखा होगा।

हाल के द ग्रेट इंडियन कपिल शो के एपिसोड में वरुण धवन, डेविड धवन ने शिरकत की. स्पेशल एपिसोड में सुनील ग्रोवर ने दिवंगत एक्टर कादर खान की मिमिक्री की. उनकी एक्टिंग स्किल और नकल उतारने के तरीके को देख हर कोई हैरान रह गया. उनके क्लिप्स खूब वायरल हो रहे हैं. वहीं गजराज राव, कुशा कपिला, सलीम मर्चेंट समेत कई सेलेब्स उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं.

गजराज राव ने सुनील की कई तस्वीरें शेयर कर एक एप्रीसिएशन पोस्ट किया. वो लिखते हैं- सुनील ग्रोवर का फैन हूं, जो करते हैं दिल को भाता है. कपिल देव बन कर मंच पर आते हैं, तो कपिल देव उनको कौतुक से देखते रह जाते हैं. सलमान का रूप धरते हैं तो सलमान दिखने लगते हैं, दारा सिंह, सिद्धू ,आमिर खान, राजामौली कुछ भी बन जाते हैं. कल के कपिल शर्मा शो एपिसोड में कादर खान बन कर आ गए. लगा कि साक्षात कादर खान मंच पर हैं. 

‘ग्रोवर मिमिक नहीं करते हैं, उस इंसान की आत्मा में घुस जाते हैं. बोल चाल, हाव भाव सबको आत्मसात कर लेते हैं. ग्रोवर हमारे समय के सबसे बड़े बहरूपिया हैं. उनकी कला दिव्य है, वे अद्वितीय हैं. उनके संग कमाल की जुगलबंदी करने वाले कीकू शारदा, कृष्णा अभिषेक, कपिल शर्मा, सबका अभिनंदन. शो के राईटर्स, ग्रोवर की मेकअप और कॉस्ट्यूम टीम को सलाम. निर्देशक को सलाम, अर्चना जी, सिद्धू साब को सलाम. आप सब की मिलीजुली कारीगरी के बगैर ये जादू संभव नहीं. शुक्रिया कपिल शर्मा एंड मंडली, दुनिया को हंसाने के लिए इतनी सारी खुशियां बांटने के लिए.’

वहीं कुशा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुनील के उस वीडियो को दोबारा शेयर किया, जिसमें वो कादर की नकल कर रहे थे. उन्होंने उनके परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए कहा कि वो हर बार कमाल कर देते हैं और वो उनका एक्ट देखना कभी मिस नहीं करतीं.

उन्होंने लिखा- किसी की नकल करते समय वो जो छोटे-छोटे चुनाव करते हैं। वो बहुत दिलचस्प होते हैं. वो सच में उसी इंसान जैसे बन जाते हैं और उनकी नकल डराने तक की हद तक सटीक होती है. शायद उन्हें तैयारी के लिए एक हफ्ते से भी कम समय मिलता है, फिर भी वो हर बार इसे बेहतरीन तरीके से कर लेते हैं. “मैं सुनील ग्रोवर का परफॉर्मेंस कभी मिस नहीं करती. मिस क्या, मैं तो इसे बार-बार देखकर भी नहीं थकती. उनकी आवाज में बदलाव करने की कला पर तो पढ़ाई होनी चाहिए. क्या शानदार अभिनेता हैं, क्या बेहतरीन परफॉर्मर और कितने कमाल के इंसान.”

म्यूजिक मैस्ट्रो सलीम मर्चेंट ने भी सुनील की तारीफ करते हुए लिखा- सुनील ग्रोवर कौन और क्या हैं? भाई ये मास्टरपीस था. आप कुछ और ही हो.  सुनील ग्रोवर भी सभी की तारीफों से गदगद नजर आए, ग्रैटिट्यूड शो करते हुए उन्होंने सभी के पोस्ट को शेयर किया और शुक्रिया अदा किया. वहीं गजराज राव के पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा- मेरे प्रभु, इतना प्यार और सम्मान देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार और धन्यवाद. आप बहुत उदार हैं. जब आप जैसे महापुरुष से इतना प्यार और आशीर्वाद मिलता है, तो सबसे पहले मन में यही आता है—हे ईश्वर, तेरा शुक्र है. और दूसरी बात ये कि अब इसका जवाब क्या दूं.

Rajasthan News : गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, संयम लोढा के नेतृत्व में PM मोदी का फूंका पुतला

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कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की कथित कमी और बढ़ते दामों को लेकर शिवगंज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया है. इस प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक संयम लोढा ने किया.

रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की कथित कमी के विरोध में रविवार (15 मार्च) को राजस्थान के शिवगंज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शिवगंज-सिरोही के तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक संयम लोढा ने किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की.

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और महंगाई को लेकर तीखी आलोचना की. पूर्व विधायक संयम लोढा ने कहा कि रसोई गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है. वहीं, कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर भी व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

लोढा ने केंद्र सरकार पर देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विश्व पटल पर बीजेपी सरकार की नीतियों के कारण भारत की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है.

लोढा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान और अंतरराष्ट्रीय दबाव के संदर्भ में भारत की स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे शक्तिशाली और स्वाभिमानी देश के लिए यह स्थिति उचित नहीं है. उनका आरोप था कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश की स्वतंत्र निर्णय क्षमता प्रभावित हो रही है और भारत को अमेरिका की कठपुतली बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महंगाई, गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आम जनता को राहत देने की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी नहीं की गई और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी जनहित में आंदोलन को और तेज करेगी.

इस अवसर पर ब्लॉक अध्यक्ष प्रवीण रावल, सिरोही ब्लॉक अध्यक्ष रतन माली, नगर पालिका अध्यक्ष वजींगराम, पीसीसी सदस्य हरीश राठौर, मोहनलाल सीरवी, मंडल अध्यक्ष नरपत सिंह, मंडल अध्यक्ष पन्नाराम, मंडल अध्यक्ष तेजाराम, मंडल अध्यक्ष शिवलाल और मंडल अध्यक्ष गणपत सिंह उपस्थित रहे. इसके अलावा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश मीणा मौजूद रहें.

Life style : बदलते मौसम में आपको भी तो नहीं हो रहा लूज मोशन, जानें कैसे रख सकते हैं पेट को ठीक

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मौसम बदलते ही हमें तमाम तरह की दिक्कतें होने लगती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आपको लूज मोशन की दिक्कत हो रही है, तो आपको क्या करना चाहिए. मौसम बदलते ही कई लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं. खासकर लूज मोशन यानी दस्त की शिकायत इस समय काफी आम हो जाती है. इसका कारण अक्सर डाइजेशन सिस्टम पर पड़ने वाला असर होता है. दरअसल हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम पूरे शरीर की सेहत से गहराई से जुड़ा होता है. जब मौसम बदलता है तो खान-पान, पानी और वातावरण में बदलाव के कारण पेट की सेहत भी प्रभावित हो सकती है.

हमारी आंतों में करोड़ों सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है. ये शरीर में भोजन को पचाने, जरूरी विटामिन बनाने और हानिकारक बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं. अगर इन अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाए तो पाचन से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं. इसी वजह से मौसम बदलने के दौरान पेट का खास ख्याल रखना जरूरी हो जाता है.

लूज मोशन लगभग हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसमें बार-बार पतला या पानी जैसा मल आने लगता है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे फूड पॉइजनिंग, एलर्जी, बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन, तनाव या खान-पान में अचानक बदलाव. कई बार एंटीबायोटिक दवाओं के कारण भी आंतों के अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं, जिससे दस्त की समस्या हो सकती है. आमतौर पर लूज मोशन एक-दो दिन में ठीक हो जाते हैं, लेकिन इस दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. इसलिए शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है. अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे या कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

कुछ घरेलू उपाय भी पेट को राहत देने में मदद कर सकते हैं. जैसे कि केला पाचन के लिए अच्छा माना जाता है. केले को मैश करके उसमें थोड़ा घी, जायफल और इलायची मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिल सकता है. इसी तरह दही और चावल का हल्का भोजन भी पेट को शांत करने में मदद करता है. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं. दही में थोड़ा अदरक मिलाकर लेने से भी पाचन बेहतर हो सकता है, इसके अलावा अदरक, सौंफ और गुनगुने पानी का मिक्स भी पेट को राहत देने में सहायक माना जाता है. इसके साथ-साथ एक कप काली चाय में नींबू का रस और थोड़ा जायफल या इलायची मिलाकर पीने से भी दस्त की समस्या में आराम मिल सकता है. वहीं घी में हल्का पकाया हुआ सेब भी पाचन को सुधारने में मदद करता है.

मौसम बदलते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना, हल्का और ताजा भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और पेट के लिए फायदेमंद चीजें खाने से को स्वस्थ रखा जा सकता है। सही खान-पान और थोड़ी सावधानी से लूज मोशन जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है.

Business : मिडिल ईस्ट तनाव ने बिगाड़ा अंडे का फंडा, हुआ कुछ ऐसा कि खाने वालों की हो गई बल्ले-बल्ले.

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पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के खाद्य कारोबार पर भी दिखने लगा है. हाल के दिनों में देश में अंडों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के खाद्य कारोबार पर भी दिखने लगा है. हाल के दिनों में देश में अंडों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि खाड़ी देशों को होने वाला अंडों का निर्यात प्रभावित हुआ है.

दरअसल, क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वहां की मांग और सप्लाई चेन दोनों पर असर पड़ा है. जिसका सीधा प्रभाव भारत के पोल्ट्री बाजार और अंडों के दाम पर दिखाई दे रहा है. आइए जानते हैं, आखिर इस लड़ाई ने कैसे बिगाड़ा अंडे का फंडा. देश के कई बाजारों में अंडों की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट देखी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलूरु के थोक बाजार में अंडे की कीमत पहले करीब 7 रुपये प्रति पीस थी, जो घटकर लगभग 5 रुपये तक आ गई है. 100 अंडों वाला एक ट्रे करीब 500 रुपये में बिक रहा है.

खुदरा बाजार में भी कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. जहां पहले एक अंडे की कीमत 8 से 9 रुपये थी, वहीं अब इसकी कीमत करीब 5.50 से 6 रुपये के बीच पहुंच गई है. निर्यात आंकड़ों की बात करें तो, देश से हर रोज लगभग 1 करोड़ अंडे खाड़ी देशों को भेजे जाते थे. इन अंडों के मुख्य खरीदार संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, कतर और बहरीन जैसे देश रहे हैं.

लेकिन हाल की सुरक्षा चिंताओं और परिवहन में आ रही दिक्कतों के कारण इन देशों को होने वाला निर्यात काफी हद तक प्रभावित हो गया है. नतीजतन, जो अंडे विदेश भेजे जाने थे, वे अब घरेलू बाजार में आ रहे हैं. जिससे सप्लाई बढ़ गई है और कीमतों पर दबाव देखने को मिला. इसके साथ ही रमजान के दौरान खाड़ी देशों में खाने-पीने की आदतों में बदलाव भी देखा जाता है. अमूमन अंडों की मांग कम हो जाती है. मांग कम होने और निर्यात घटने के कारण अंडों की कीमतों में कमी देखने को मिली है.

अंडों के दाम घटने का सीधा असर पोल्ट्री कारोबार से जुड़े किसानों पर पड़ रहा है. खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात रुकने से उनकी आमदनी पर दबाव बढ़ गया है. क्योंकि घरेलू बाजार में मिलने वाली कीमतें विदेशों में मिलने वाले दाम की बराबरी नहीं कर पा रही हैं. बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब तक खाड़ी देशों के साथ निर्यात और परिवहन की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक भारत में अंडों की कीमतों में ज्यादा सुधार की उम्मीद कम है.

Bollywood : पुलकित सम्राट ने ऐसे किया था कृति खरबंदा को प्रपोज, एक्ट्रेस ने दूसरी वेडिंग एनिवर्सरी पर दिखाई झलक

एक्ट्रेस कृति खबंदरा और एक्टर पुलकित सम्राट की शादी को आज यानी 15 मार्च को 2 साल पूरे हो गए हैं. इस खास मौके पर एक्ट्रेस ने एक खास पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया है. बॉलीवुड के लिवेबल कपल कृति खबंदरा और पुलकित सम्राट आज 15 मार्च को अपनी सेकंड वेडिंग एनिवर्सरी सेलिब्रेट कर रहे हैं. इस खास मौके पर एक्ट्रेस ने प्रपोजल से लेकर अपनी वेडिंग तक की जर्नी दिखाई है. उन्होंने ये भी बताया कि पुलकित ने कैसे उन्हें प्रपोज किया था. आइए देखते है उनकी ये क्यूट फोटोज.

एक्ट्रेस कृति खबंदरा ने अपनी दूसरी वेडिंग एनिवर्सरी पर पुलकित सम्राट के साथ 10 फोटोज शेयर की. उन्होंने हर एक फोटो में अलग अलग कैप्शन लिखा. पहली फोटो में एक्ट्रेस ने लिखा, ‘उन्होंने कभी मुझसे ‘क्या तुम मुझसे शादी करोगी?’ नहीं पूछा. उन्होंने हमेशा कहा, ‘तुम मुझसे शादी करोगी. ‘ शायद दिल से हम दोनों को पहले से पता था.

‘ये हमारी ज़िंदगी का सबसे खास पल था. आखिरकार हम पति-पत्नी बन गए. सच कहें तो इससे बेहतर एहसास कोई नहीं होता. ‘एक्ट्रेस ने तीसरी फोटो में लिखा, ‘जश्न तभी पूरा होता है जब अपने सबसे प्यारे लोग साथ हों. परिवार का साथ आकर खुशियां मनाना बहुत खास होता है. हमें इंडियन शादियां बहुत पसंद हैं.’ ‘ये वो पल था जब हमने पहली बार एक-दूसरे से ‘आई लव यू’ कहा.’

‘जब मैं दुल्हन बनकर घर आई, तो मुझे बहुत प्यार और तोहफे मिले. लेकिन सबसे खास तोहफा पुलकित ने दिया. उन्होंने एक ब्रेसलेट दिया, जो उनके परिवार की महिलाओं के गहनों के टुकड़ों से बना था. ये मेरे लिए सबसे खास और यादगार गिफ्ट है.’ 6वीं फोटो में एक्ट्रेस ने लिखा, ‘हमारी पहली छोटी-सी लड़ाई भी हुई, लेकिन हमने जल्दी ही सुलह कर ली. हमने वादा किया कि कभी गुस्से में सोने नहीं जाएंगे.’

‘बस इसलिए कि हम इस फोटो में बहुत क्यूट लग रहे हैं. और हां, ये हमारी पसंदीदा डेट्स में से एक थी.’ ‘शादी से कुछ हफ्ते पहले हमारे दोस्तों ने हमारे लिए छोटी-सी पार्टी रखी थी. ये उसी पल की तस्वीर है.’ ‘यहीं से हमारी असली मस्ती शुरू हुई. पहले हम को-स्टार्स के तौर पर साथ नाचे और फिर पति-पत्नी के रूप में. सच में, जिंदगी ने पूरा चक्कर पूरा कर लिया.’

‘क्योंकि वो बहुत क्यूट है. बस उन्हें देखिए. हम दोनों को 2 साल मुबारक. नजर मत लगाना.’

Bihar News : छपरा मामले को लेकर पुलिस पर भड़के पप्पू यादव, कहा- ‘पीड़िता का चरित्र हनन बर्दाश्त नहीं’

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छपरा में एक बेटी के साथ हुई अमानवीय घटना पर सियासी घमासान मचा है. पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर पीड़िता और उसके परिवार को कलंकित करने का आरोप लगाया है. बिहार के छपरा में एक बेटी के साथ हुई भयावह और अमानवीय घटना को लेकर सियासी पारा गरमा गया है. इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में बिहार पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए उस पर मृतक बेटी और उसके पीड़ित परिजनों को कलंकित करने का संगीन आरोप लगाया है.

पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने पुलिस प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपनी इस शर्मनाक हरकत से बाज आए. अपने बयान में पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर एक पैटर्न के तहत काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, “बिहार पुलिस की यह आदत सी हो गई है कि जब भी राज्य में किसी बेटी पर जुल्म या दरिंदगी होती है, तो पुलिस न्याय दिलाने के बजाय उल्टे पीड़िता के चरित्र पर ही सवाल उठाने लगती है.” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिजनों को ही कटघरे में खड़ा कर देता है, ताकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके.

पप्पू यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन के इस असंवेदनशील और पीड़ित-विरोधी रवैये को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ने का ऐलान किया है.

छपरा की इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है और महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है. पप्पू यादव का यह आरोप इस ओर इशारा करता है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करने के बजाय अक्सर ‘विक्टिम ब्लेमिंग’ (Victim Blaming) का सहारा लेती है. उनके इस कड़े रुख के बाद स्पष्ट है कि अगर पुलिस ने अपनी जांच की दिशा नहीं बदली और पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा नहीं दिलाया, तो वे इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर सकते हैं. अब देखना यह है कि पुलिस मुख्यालय इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है.

Uttarakhand News : दोगुनी रफ्तार से पिघल रहा है हिमालय! सदी के अंत तक 68 फीसदी बर्फ गायब होने का खतरा

हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र में तापमान दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है. नए शोध के मुताबिक सदी के अंत तक करोड़ों लोगों के पानी पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. हिमालय को अक्सर एशिया का जल टॉवर कहा जाता है. यही पर्वत श्रृंखला करोड़ों लोगों के लिए पानी का सबसे बड़ा स्रोत है. वैज्ञानिक इसे “तीसरा ध्रुव” भी कहते हैं क्योंकि यहां दुनिया के ध्रुवीय इलाकों के बाद सबसे ज्यादा बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं. लेकिन अब यही हिमालय तेजी से बदलते मौसम और बढ़ते तापमान की वजह से गंभीर खतरे में है.

मिजोरम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विश्वंभर प्रसाद सती और सुरजीत बनर्जी के एक ताजा शोध ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है. अंतरराष्ट्रीय जर्नल अर्थ साइंस रिव्यूज में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र में तापमान दुनिया के औसत तापमान से लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो इस सदी के अंत तक हिमालय की लगभग 68 प्रतिशत बर्फ हमेशा के लिए गायब हो सकती है.

शोध के मुताबिक हिमालय में बदलाव की शुरुआत पिछले चार दशकों में तेजी से दिखाई देने लगी है. 1980 से 2020 के बीच हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र का तापमान प्रति दशक औसतन 0.2 से 0.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है. यह बढ़ोतरी वैश्विक औसत से करीब दोगुनी मानी जा रही है. वैज्ञानिकों ने पाया कि पूर्वी हिमालय के इलाकों में तापमान बढ़ने की रफ्तार और भी ज्यादा है. इसके साथ ही बारिश के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है. कहीं अत्यधिक बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है. इन बदलावों का सीधा असर ग्लेशियरों पर पड़ रहा है. कई ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं और बर्फ की परत हर साल पतली होती जा रही है.

शोध में भविष्य को लेकर बेहद चिंताजनक अनुमान भी सामने आया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो वर्ष 2100 तक हिमालय का करीब 68 प्रतिशत हिमावरण समाप्त हो सकता है.

काराकोरम क्षेत्र, जिसे अभी तक अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता था, वहां भी करीब 26 प्रतिशत बर्फीला आवरण खत्म होने की आशंका जताई गई है. इसका मतलब यह है कि आने वाले दशकों में हिमालय का स्वरूप ही बदल सकता है. यह सिर्फ पहाड़ों की खूबसूरती का सवाल नहीं है. हिमालय की बर्फ एशिया की कई बड़ी नदियों के लिए जीवनरेखा है. अगर बर्फ कम हुई तो इन नदियों का जल प्रवाह भी प्रभावित होगा. हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, तारिम और अमू दरिया जैसी बड़ी नदियां करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं. इन नदियों के सालाना प्रवाह का लगभग 33 से 42 प्रतिशत हिस्सा ग्लेशियरों और हिमावरण के पिघलने से आता है.

अध्ययन के अनुसार इन नदियों पर करीब 86.9 करोड़ लोग सीधे तौर पर निर्भर हैं. अभी ग्लेशियर तेजी से पिघलने के कारण कुछ जगहों पर नदियों में पानी बढ़ता हुआ दिख रहा है. मानसून से पहले ही पानी का बहाव तेज हो जाता है और कई बार बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है.

लेकिन वैज्ञानिक इसे राहत नहीं, बल्कि आने वाले संकट की चेतावनी मानते हैं. जब ग्लेशियर ही खत्म हो जाएंगे तो नदियों में पानी का स्थायी स्रोत खत्म हो जाएगा. तब कई नदियां मौसमी बन सकती हैं और इससे पानी, खेती और बिजली उत्पादन पर गहरा असर पड़ेगा. बढ़ते तापमान की वजह से हिमालय में एक और खतरा तेजी से बढ़ रहा है. ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी-बड़ी हिमनदीय झीलें बन रही हैं. इन झीलों के अचानक फटने से आने वाली बाढ़ को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ कहा जाता है.

ऐसी बाढ़ बिना चेतावनी के आती है और कुछ ही मिनटों में भारी तबाही मचा सकती है. उत्तराखंड समेत कई हिमालयी राज्यों में इसके उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं. इसके अलावा पर्माफ्रॉस्ट यानी जमीन के अंदर जमी रहने वाली बर्फीली परत भी पिघलने लगी है. शोध के मुताबिक यह परत हर साल 2 से 23 सेंटीमीटर तक गहरी पिघल रही है. इससे पहाड़ी ढलानों की मजबूती कमजोर पड़ रही है और भूस्खलन तथा जमीन धंसने की घटनाएं बढ़ रही हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र की पूरी जल प्रणाली अस्थिर हो सकती है. इसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा. भारत, पाकिस्तान, चीन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे कई देश इससे प्रभावित होंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत और ठोस कदम उठाने की जरूरत है. हिमालय सदियों से एशिया की जीवनरेखा रहा है, लेकिन अब उसकी बर्फ तेजी से पिघल रही है और यह पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है.

Business : शेयर बाजार में बढ़ सकता है उतार-चढ़ाव, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे. आइए जानते हैं, मार्केट की चाल के विषय में. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे. विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले और मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे. आइए जानते हैं, 16 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह में मार्केट की चाल के विषय में.

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा कि यह सप्ताह घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आंकड़ों से भरा है. उन्होंने बताया कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों पर उनका प्रभाव बाजार की समग्र दिशा को प्रभावित कर सकता है. घरेलू मोर्चे पर, बाजार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन के आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखेंगे.

लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने बताया कि वैश्विक जोखिम धारणा बिगड़ने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार पिछले सप्ताह भारी दबाव में रहे. पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

पिछले महीने 27 फरवरी से अब तक सेंसेक्स 6,723.27 अंक या 8.27 प्रतिशत नीचे आ चुका है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को सख्त बना सकता है, जिससे एशिया में मुद्रास्फीति बढ़ सकती हैं. एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाले सप्ताह में काफी उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है. पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण पोत परिवहन में होने वाली किसी भी देरी के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक पूंजी आवंटन पर असर पड़ सकता है.

विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में घरेलू शेयरों से लगभग 52,704 करोड़ रुपये निकाले हैं. इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव, रुपये की कमजोरी और भारतीय वृद्धि दर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का प्रभाव है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इस सप्ताह निवेशकों की नजर यूरो क्षेत्र के सीपीआई आंकड़ों, बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) और यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) के नीतिगत फैसलों तथा अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों पर भी रहेगी.

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