Sunday, June 28, 2026
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RCB vs DC: डेविड मिलर ने छीना बेंगलुरु से मैच, लगातार 2 छक्के जड़कर दिलाई जीत

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दिल्ली कैपिटल्स ने लगातार दूसरे सीजन में बेंगलुरु को उसके होम ग्राउंड चिन्नास्वामी स्टेडियम में हराया है. संयोग से दोनों मौकों पर केएल राहुल ने अर्धशतक जमाकर जीत में बड़ी भूमिका निभाई.

दिल्ली कैपिटल्स ने एक रोमांचक मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 6 विकेट से हरा दिया. एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दिल्ली ने केएल राहुल और ट्रिस्टन स्टब्स के अर्धशतक और डेविड मिलर के आखिरी ओवर के लगातार 2 छक्कों की मदद से बेंगलुरु को हरा दिया. बेंगलुरु ने इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए 8 विकेट खोकर 175 रन बनाए थे. दिल्ली ने खराब शुरुआत के बावजूद आखिरी ओवर में इसे हासिल कर लिया. इसके साथ ही दिल्ली ने इस सीजन में तीसरी जीत दर्ज की, जबकि बेंगलुरु को इस सीजन में दूसरी हार का सामना करना पड़ा.

विस्फोटक बल्लेबाजों से भरी बेंगलुरु की टीम इस मैच में अपने बल्ले की ताकत नहीं दिखा पाई और इस सीजन में पहली बार पूरे 20 ओवर खेलने के बावजूद 200 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सकी. उसके लिए एक बार फिर विराट कोहली (19) और फिल सॉल्ट ने बेहद तेज शुरुआत की लेकिन दिल्ली के गेंदबाजों ने बेंगलुरु की पारी पर ब्रेक लगा दिया. फिल सॉल्ट ने 63 रन की तेज पारी खेली लेकिन उनके अलावा RCB का कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका. दिल्ली के लिए कप्तान अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और लुंगी एनगिडी ने 2-2 विकेट लिए.

दिल्ली के गेंदबाजों ने तो कमाल किया लेकिन बैटिंग में उसका आगाज बेहद खराब रहा. स्टार तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार (3/26) ने अपने शुरुआती 2 ओवर में ही 3 विकेट लेकर दिल्ली को मुश्किल में डाल दिया था. सिर्फ 18 रन पर 3 विकेट गंवाने के बाद केएल राहुल ने मोर्चा संभाला. अपने जन्मदिन को खास बनाते हुए राहुल ने काउंटर अटैक किया और 30 गेंदों में अर्धशतक जमाकर टीम की वापसी कराई. राहुल (57) के आउट होने के बाद ट्रिस्टन स्टब्स (60 नाबाद) ने पहले कप्तान अक्षर (26) और फिर डेविड मिलर के साथ मिलकर टीम को जीत तक पहुंचाया.

आखिरी ओवर में दिल्ली को जीत के लिए 15 रन चाहिए थे. शुरुआती 2 गेंदों में सिर्फ 2 रन मिले. इसके बाद मिलर ने लगातार 2 छक्के जमाते हुए स्कोर को बराबरी पर ला खड़ा किया. अब 2 गेंदों में 1 रन की जरूरत थी और उस मैच की याद आ गई, जिसमें मिलर (22 नाबाद) आखिरी 2 गेंदों पर 2 रन नहीं बना सके थे. मगर इस बार साउथ अफ्रीकी दिग्गज ने सीधे चौका जमाकर टीम को जीत दिला दी. दिल्ली की बेंगलुरु के खिलाफ चिन्नास्वामी में ये लगातार दूसरी जीत है. संयोग से पिछले साल की जीत में भी राहुल ने अर्धशतक जमाया था.

दिल्ली की इस सीजन में ये 5 मैच में तीसरी जीत है और इसके साथ ही टीम ने पॉइंट्स टेबल में अपनी स्थिति को मजबूत किया. अब टीम 6 पॉइंट्स के साथ चौथे स्थान पर आ गई है. वहीं इस हार के बावजूद बेंगलुरु 6 मैच में 8 पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर है. राजस्थान के भी 8 ही पॉइंट्स हैं लेकिन बेहतर नेट रनरेट के कारण RCB फिलहाल उससे ऊपर है.

SPORTS : हैदराबाद की चेन्नई पर 10 रन से जीत, अभिषेक-क्लासन ने जमाई फिफ्टी

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IPL 2026 के रोमांचक मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को एक और करीबी हार का सामना करना पड़ा है। शनिवार को हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में खेले गए मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई को 10 रन से हरा दिया। 195 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए चेन्नई की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 184 रन ही बना सकी। इससे पहले हैदराबाद ने निर्धारित ओवरों में 9 विकेट खोकर 194 रन बनाए थे। इस हार के साथ चेन्नई की मौजूदा सीजन में यह चौथी शिकस्त है, जबकि हैदराबाद ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर पॉइंट्स टेबल में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन निर्णायक क्षणों में चेन्नई की बल्लेबाज़ी बिखरती नजर आई।

हैदराबाद की ओर से अभिषेक शर्मा और हेनरिख क्लासन ने शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए 59-59 रन की पारियां खेलीं। दोनों ने मध्यक्रम में टीम को संभालते हुए प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया।

चेन्नई की गेंदबाज़ी में जैमी ओवर्टन और अंशुल कंबोज ने 3-3 विकेट झटके, लेकिन डेथ ओवर्स में रन रोकने में टीम असफल रही। जवाब में चेन्नई की शुरुआत तेज रही और टीम ने 10 ओवर में 112 रन बना लिए थे, लेकिन इसके बाद विकेटों का सिलसिला शुरू हुआ जो अंत तक जारी रहा।

मिड हेडिंग: मिडिल ऑर्डर फेल

चेन्नई के लिए कोई भी बल्लेबाज़ 35 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका। मैथ्यू शॉर्ट ने सबसे ज्यादा 34 रन बनाए, जबकि आयुष म्हात्रे ने 30 और सरफराज खान ने 25 रन का योगदान दिया। अहम मौकों पर विकेट गिरने से रन गति पर असर पड़ा और टीम लक्ष्य से पीछे रह गई।

मिड हेडिंग: गेंदबाज़ों का असर

हैदराबाद की ओर से ईशान मलिंगा ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए 3 विकेट झटके। उन्होंने टॉप ऑर्डर को झकझोरते हुए मैच का रुख बदल दिया। इसके अलावा नीतीश कुमार रेड्डी और प्रफुल्ल हिंगे ने 2-2 विकेट लिए, जिससे चेन्नई की पारी पटरी से उतर गई।

चेन्नई सुपर किंग्स इस सीजन में लगातार संघर्ष करती नजर आ रही है। शुरुआती मैचों में हार के बाद टीम संयोजन और बल्लेबाज़ी क्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, सनराइजर्स हैदराबाद ने शुरुआती झटकों के बाद अब लय पकड़ ली है और टीम संतुलित प्रदर्शन कर रही है।

आधिकारिक बयान

टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, चेन्नई प्रबंधन बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव पर विचार कर सकता है। कोचिंग स्टाफ ने भी स्वीकार किया है कि मिडिल ऑर्डर में स्थिरता की कमी टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हैदराबाद खेमे में जीत को लेकर संतोष जताया गया है और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की गई है।

इस हार के बाद चेन्नई पॉइंट्स टेबल में सातवें स्थान पर पहुंच गई है, जिससे प्लेऑफ की राह मुश्किल होती जा रही है। लगातार हार से टीम पर दबाव बढ़ेगा और आगामी मैचों में जीत अनिवार्य हो जाएगी।

दूसरी ओर, हैदराबाद की यह जीत टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और वह शीर्ष चार में अपनी जगह मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

चेन्नई सुपर किंग्स को अब अपने अगले मुकाबलों में रणनीतिक बदलाव के साथ उतरना होगा, खासकर बल्लेबाज़ी में निरंतरता लाने पर जोर देना होगा।

सनराइजर्स हैदराबाद अपने विजयी क्रम को जारी रखने के इरादे से अगले मैच में उतरेगी, जहां टीम की नजर लगातार तीसरी जीत पर होगी।

NATIONAL : बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज का निधन, PM मोदी ने जताया शोक

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बलबीर पुंज दो बार राज्यसाभा सांसद रहे. वे राजनेता के साथ-साथ लेखक भी थे. मीडिया में उनकी सक्रिय भागीदारी रही. प्रधानमंत्री मोदी समेत कई बीजेपी नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया.बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज का शनिवार को निधन हो गया. 76 साल के बलबीर पुंज पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के कई नेताओं ने शोक जताया.

बलबीर पुंज की गिनती बीजेपी के दिग्गज नेताओं में होती थी. वे पार्टी के उपाध्यक्ष पद भी संभाल चुके थे. युवावस्था में वे आरएसएस से जुड़ गए थे. वे पत्रकार भी रहे. उन्होंने साल 1971 में पत्रकारिता की शुरुआत की थी. मीडिया में उनका करियर बेहद प्रभावशाली रहा.वे राज्यसभा से दो बार सांसद रहे. पहली बार (2000 से 2006) उत्तर प्रदेश और दूसरी बार (2008 से 2014) तक ओडिशा से राज्यसभा सांसद बने. वे नेशनल यूथ कमिशन फॉर यूथ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया, जिसे केंद्र सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है.

पब्लिक पॉलिसी पर बीजेपी के दृष्टिकोण को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी. वे राजनेता के साथ एक लेखक भी थे. मीडिया में उनकी सक्रिय भागीदारी रही और दो बार दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलबीर पुंज के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. सोशल मीडिया हैंडल X पर पीएम मोदी उन्हें प्रखर लेखक, विचारक और बुद्धिजीवी बताते लिखा कि पुंज ने बीजेपी को मजबूत करने के लिए अथक काम किया. उनके लेख व्यापक रूप से पढ़े जाते थे और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के प्रति उनका गहरा जुनून झलकता था.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुंज के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी के बौद्धिक प्रकोष्ठ के संयोजक के रूप में उनका अहम रोल रहा. उन्होंने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव और कई राज्यों के प्रभारी रहते हुए संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. दुख की इसी घड़ी में पूरा भाजपा परिवार उनके परिजनों के साथ है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन को बेहद दुखद बताया. उन्होंने कहा कि यह राजनीति और पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी पुंज के निधन पर शोक जताया.

BUSINESS : ये है 2% डीए वृद्धि का कैलकुलेटर, 50 लाख केंद्रीय कर्मियों व 69 लाख पेंशनरों की हर महीने बढ़ेगी इतनी सैलरी

केंद्र सरकार द्वारा 2 फीसदी डीए बढ़ोतरी के फैसले के बाद 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों को सीधा फायदा मिलेगा। इस बढ़ोतरी से उनकी मासिक सैलरी और पेंशन में इजाफा होगा। यहां समझें कि किस बेसिक वेतन पर कितनी बढ़ोतरी होगी…

केंद्र सरकार ने अपने 50 लाख कर्मियों और 69 लाख पेंशनरों के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दरों में दो फीसदी की बढ़ोतरी की है। शनिवार को केंद्रीय कैबिनेट ने डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। एक जनवरी से देय महंगाई भत्ते की दर अब 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद हुई प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी है। पिछली बार केंद्र सरकार ने दीवाली पर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते एवं पेंशनरों की महंगाई राहत में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की थी।

‘2’ फीसदी डीए वृद्धि से होगा इतना फायदा …

बेसिक वेतन 2% वृद्धि 58% डीए 60% होने पर
18,000 रुपये 360 रुपये 10,440 रुपये 10,800 रुपये
25,000 रुपये 500 रुपये 14,500 रुपये 15,000 रुपये
35,000 रुपये 700 रुपये 20,300 रुपये 21,000 रुपये
52,000 रुपये 1,040 रुपये 30,160 रुपये 31,200 रुपये
70,000 रुपये 1,400 रुपये 40,600 रुपये 42,000 रुपये
85,500 रुपये 1,710 रुपये 49,590 रुपये 51,300 रुपये
1,00,000 रुपये 2,000 रुपये 58,000 रुपये 60,000 रुपये

कर्मचारी/पेंशनरों को सता रहा था ये डर …
केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर, एक जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दरों में बढ़ोतरी होने की राह देख रहे थे। अमूमन मार्च तक इन भत्तों में वृद्धि होती रही है, लेकिन इस बार अप्रैल में दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी यह घोषणा नहीं हो सकी। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी, सरकार से सवाल करने लगे थे कि डीए/डीआर की घोषणा टलने के पीछे क्या ‘पश्चिम एशिया संकट’ जिम्मेदार है। सरकारी कर्मियों को यह डर सताने लगा कि कोरोनाकाल की तरह कहीं एक बार फिर डीए/डीआर फ्रीज तो नहीं हो जाएगा। ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स’ ने डीए/डीआर बढ़ोतरी की घोषणा कराने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा। इतना ही नहीं, इन भत्तों को अविलंब जारी कराने के लिए गुरुवार को केंद्रीय कर्मचारी संगठन ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स’ सड़कों पर उतरा।
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केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2025 से अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद डीए/डीआर की दर 58 पर पहुंच गई। एक जनवरी 2026 से डीए/डीआर की दरों में दो फीसदी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही थी। वजह, अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) की रिपोर्ट ने भी ऐसा ही संकेत दिया था। जुलाई 2025 में सूचकांक 146.5, अगस्त में 147.1, सितंबर में 147.3, अक्टूबर में 147.7, नवंबर में 148.2 और दिसंबर में भी 148.2 पर संकलित हुआ था। इसके चलते महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दर 60 प्रतिशत के पार होने की संभावना जताई गई।

डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा, आमतौर से होली और दीवाली पर की जाती है। हालांकि डीए/डीआर की दरों में वृद्धि हर साल एक जनवरी और एक जुलाई से किए जाने का प्रावधान है। अगर तय समय से कुछ माह बाद डीए की घोषणा होती है तो सरकारी कर्मचारियों के खाते में उतने ही माह का एरियर आ जाता है। केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन भत्तों को तय समय पर जारी न कर केंद्र सरकार, खुद लाभ कमा रही है। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के अध्यक्ष एसबी यादव ने बताया, ‘डीए’ की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा जानबूझकर कई माह देरी से की जाती है। इससे सरकार को फायदा होता है। चूंकि डीए/डीआर की दरों में हुई बढ़ोतरी से सरकार पर हजारों करोड़ रुपये का भार पड़ता है। ऐसे में सरकार, डीए/डीआर की घोषणा, तीन चार माह देरी से करती है। इस अवधि के दौरान सरकार का पैसा निवेश होता है, जिस पर उसे अच्छा खासा ब्याज मिलता है।

WORLD : होर्मुज में भारतीय जहाजों पर गोलीबारी, क्या यूएन में भारत के आवाज उठाने से नाराज हुआ ईरान?

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा वीटो करने के मामले में भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया और तटस्थ रहने का फैसला किया. भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता भी जताई.

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत के दो मालवाहक जहाजों पर गोलीबारी की थीभारत ने ईरानी राजदूत को तलब कर इस घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए चिंता व्यक्त की थीभारत ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान विरोधी प्रस्ताव पर तटस्थता अपनाई लेकिन बहरीन के प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बना

ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को भारत ने दो जहाजों पर गोलीबारी की. जिसकी वजह से स्ट्रेट पार कर रहे इन मालवाहक जहाजों को वापस लौटना पड़ा. इसके बाद घटना को लेकर नई दिल्ली में तैनात ईरानी राजदूत मोहम्मद फताअली को तलब किया गया और भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. इस घटना के बाद अब सवाल भी उठने लगे हैं कि अब तक भारत को लेकर नरम रुख रखने वाले ईरान ने ऐसा क्यों किया? ईरान क्यों नाराज हुआ? और भारतीय जहाजों पर हमले के पीछे की वजह क्या है?

विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत का पक्ष रखा है. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत की ईरानी राजदूत से हुई बात का जिक्र किया और बयान में लिखा, “नई दिल्ली में ईरान के राजदूत को शनिवार शाम विदेश मंत्रालय ने विदेश सचिव के साथ एक बैठक के लिए बुलाया. इस बैठक के दौरान, विदेश सचिव ने होर्मुज स्ट्रेट में हुई गोलीबारी की घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त से अवगत कराया. इस फायरिंग की जद में भारत के झंडे वाले दो जहाज आए थे.”

व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए, विदेश सचिव ने राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत के विचारों को ईरान के अधिकारियों तक पहुंचाए, और होर्मुज स्ट्रेट से भारत आने वाले जहाजों को रास्ता देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द फिर से शुरू करें. ईरान के राजदूत ने इन विचारों को ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया.

शनिवार को यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) की ओर से वेबसाइट पर जारी चेतावनी के मुताबिक, ओमान के उत्तर-पूर्व में करीब 20 नॉटिकल मील दूरी पर गनबोट्स से हमला किया गया. टैंकर के मास्टर ने रिपोर्ट दी कि दो आईआरजीसी गनबोट्स बिना किसी वीएचएफ चेतावनी के करीब आईं और गोलीबारी शुरू कर दी. हालांकि, राहत की बात यह रही कि टैंकर और उसके चालक दल को कोई नुकसान नहीं हुआ.

विदेशी मीडिया ने बाद में बताया कि भारत का झंडा लगे दो जहाजों पर गोलीबारी हुई थी. इसमें ‘जग अर्णव’ और ‘सन्मार हेराल्ड’ शामिल थे. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जग अर्णव’ पर फायरिंग की गई, जबकि दूसरा जहाज सुरक्षित रहा. ये जहाज इराक से 20 लाख बैरल तेल लेकर आ रहा था.

पश्चिम एशिया में चल रही तनावपूर्ण स्थिति को लेकर शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई. यह पश्चिम एशिया की स्थिति पर अनौपचारिक मंत्री समूह की चौथी बैठक थी. इसकी अध्यक्षता कर रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की संभावित समस्या से निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है.

इस उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल सहित कई अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. पश्चिम एशिया की स्थिति का भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई.

दरअसल ईरान ने शुक्रवार को कॉमर्शियल यातायात के लिए होर्मुज जलमार्ग को खोलने की घोषणा की थी. इसके बाद कई मालवाहक जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार करने की कोशिश की. फिर ईरान ने शनिवार को अमेरिका पर दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और घोषणा कर दी कि उसने एक बार फिर से होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी नेवी ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखती है तो वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर देगा.

इस बड़े संघर्ष ने पहले ही ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इतिहास में दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई में सबसे बुरी रुकावट बताया है. शनिवार को आठवें हफ्ते में पहुंच चुके इस तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया में 80 से ज्यादा तेल और गैस सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया है.

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा वीटो करने के मामले में भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया और तटस्थ रहने का फैसला किया. भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता भी जताई. भारत ने वीटो को लेकर भले ही तटस्थ रुख अपनाया हो, लेकिन उसने 11 मार्च को बहरीन द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनने का फैसला किया था, जिसमें ईरान के मध्य पूर्व के पड़ोसी देशों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी. क्या यूएन में भारत के इस रुख की वजह से ईरान नाराज हुआ?

जनरल असेंबली की मीटिंग में वीटो पर बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा, “हमने सभी देशों से बातचीत और डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने और तनाव कम करने और असल मुद्दों को सुलझाने की अपील की है. हमने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की भी अपील की है.”

यह मीटिंग असेंबली के एक प्रोसेस के तहत बुलाई गई थी, जिसके तहत जो स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव पर वीटो करते हैं, उन्हें दस दिनों के अंदर अपने कामों के बारे में बताने के लिए उसके सामने पेश होना होता है. 7 अप्रैल को रूस और चीन ने काउंसिल के चुने हुए सदस्य बहरीन के पेश किए गए प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया. इस प्रस्ताव में ईरान से कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोकने और नेविगेशन की आजादी में रुकावट न डालने की मांग की गई थी.

रूस और चीन ने असेंबली में अपने वीटो का बचाव किया, जबकि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों ने कई दूसरे देशों के साथ मिलकर वीटो की आलोचना की. अपने छोटे, 90-सेकंड, 198-शब्दों के बयान में, भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश दोनों पक्षों से दूर रहे, लेकिन स्ट्रेट में नेविगेशन की आजादी पर भारत की स्थिति साफ कर दी. उन्होंने कहा, “भारत के लिए अपनी एनर्जी और आर्थिक सुरक्षा के लिए खास चिंता की बात होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग है. भारत इस बात पर दुख जताता है कि इस लड़ाई में कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया. इस लड़ाई के दौरान जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की कीमती जानें गईं.”

उन्होंने कहा, “हम फिर से कहते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है. इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना

इधर एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जुबानी हमला बोला. होर्मुज को लेकर ट्रंप ने ओवल स्थित दफ्तर में शनिवार को कहा कि वे हमें स्ट्रेट के नाम पर ब्लैकमेल नहीं कर सकते. ईरान के पास न नौसेना है, न वायुसेना. उनके पास कोई नेतृत्व नहीं है, उनके पास कुछ भी नहीं है, लेकिन फिर भी हम उनसे बात कर रहे हैं. ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने बहुत लोगों को मारा है. वे कई सालों से बचते आए हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

वैसे इस बार डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ सकारात्मक संकेत भी दिए, भरोसा दिलाया कि ईरान संग डील हो सकती है. ओवल ऑफिस में मीडिया से रूबरू ट्रंप बोले, “वे थोड़े नरम पड़ गए हैं, डील पर असल में बहुत कुछ ठीक ठाक चल रहा है, और हो सकता है दिन ढलते-ढलते हमारे पास कुछ अच्छी जानकारी हो.”

NATIONAL : ‘पश्चिम एशिया संकट पर सतर्क रहे भारत, हर स्थिति से निपटने की तैयारी जरूरी’, राजनाथ सिंह का बयान

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को अस्थिर बताते हुए कहा कि इससे हालात अचानक बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। राजनाथ सिंह ने यह टिप्पणी पश्चिम एशिया की स्थिति की निगरानी के लिए गठित मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए की। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, उपभोक्ता मामले के मंत्री प्रह्लाद जोशी, नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू, पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल शामिल हुए।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘जमीनी स्थिति अनिश्चित और अस्थिर है और भारत को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।’ सोशल मीडिया पोस्ट में सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार जोखिमों को कम करने के लिए तेजी और प्रभावी ढंग से कदम उठा रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल’ के गठन को मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख किया, जिसे 12,980 करोड़ रुपये की गारंटी के साथ स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अस्थिर समुद्री मार्गों के बीच भी भारतीय व्यापार के लिए निरंतर और सस्ती बीमा सुविधा सुनिश्चित करना है।

रक्षा मंत्री ने कहा, यह अहम फैसला भारत के समुद्री व्यापार को सस्ती और निरंतर बीमा कवरेज देगा, जिससे आयात-निर्यात संचालन की सुरक्षा और स्थिरता मजबूत होगी। यह देश के व्यापार तंत्र को और मजबूत, सुरक्षित और लचीला बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।’ बैठक में बताया गया कि वैश्विक आपूर्ति में झटकों के बावजूद भारत ने ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाए रखा है और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिशें जारी हैं।

वर्तमान में भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) का 60 दिनों से अधिक का स्टॉक है। वहीं एलएनजी का करीब 50 दिन और एलपीजी का लगभग 40 दिन का भंडार उपलब्ध है, जिसमें घरेलू उत्पादन का भी योगदान है। सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता हासिल की है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की है। अप्रैल और मई 2026 के लिए आयात की जरूरतें काफी हद तक सुरक्षित कर ली गई हैं, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहेगी।

NATIONAL : ‘एआई से डरो मत, इसका इस्तेमाल सावधानी और सोच-समझकर करो’, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा।

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मुख्य न्यायाधीश कर्नाटक राज्य न्यायिक अधिकारी संघ द्वारा आयोजित न्यायिक अधिकारियों के 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन में बोल रहे थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को न्यायिक अधिकारियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से डरने के बजाय, यह चेतावनी दी कि न्यायपालिका में प्रौद्योगिकी को अपनाने के साथ-साथ इसकी अंतर्निहित सीमाओं की स्पष्ट और सचेत समझ भी होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश कर्नाटक राज्य न्यायिक अधिकारी संघ द्वारा आयोजित न्यायिक अधिकारियों के 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसका विषय ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में न्यायपालिका की पुनर्कल्पना’ था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी एक सहायक उपकरण बनी रहनी चाहिए, न कि विकल्प।

इस कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना और अरविंद कुमार, और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विभू बखरू सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।उन्होंने आगे कहा कि एआई को न्यायिक प्रक्रिया में संतुलित तरीके से एकीकृत किया जाना चाहिए – इसका उपयोग दक्षता में सुधार के लिए किया जाना चाहिए, साथ ही न्याय के मूल में निहित मानवीय निर्णय, अनुभव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा भी की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति कांत ने कहा, “मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आपको कृत्रिम बुद्धिमत्ता से डरना नहीं चाहिए। जब ​​आपके सामने बहुत जटिल तथ्यों और कानून के पेचीदा सवालों से जुड़ा कोई मामला आता है, तो आप क्या करते हैं? आप अधिक सोच-विचार करते हैं, अधिक समय लगाते हैं, अधिक धैर्य रखते हैं, और ऐसे मामले का फैसला करते समय आपको संतुष्टि का अनुभव होता है।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हालांकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उदय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण अवसर और गंभीर चुनौतियां दोनों प्रस्तुत करता है, लेकिन इसमें कानूनी अनुसंधान में सहायता करके, केस प्रबंधन को सुव्यवस्थित करके, बड़ी मात्रा में डेटा को व्यवस्थित करके और प्रशासनिक बोझ को कम करके, जो अक्सर मूल्यवान न्यायिक समय को बर्बाद करता है, सार्थक तरीकों से दक्षता बढ़ाने की क्षमता है।

उन्होंने कहा, “संरचित और लक्षित प्रशिक्षण के साथ, न्यायिक अधिकारी उत्पादकता में सुधार करने और न्यायनिर्णय के मूल कार्य पर अधिक समय और ध्यान देने के लिए इन उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं।”

न्यायमूर्ति कांट ने कहा, “एआई पैटर्न, एल्गोरिदम और मौजूदा डेटासेट पर काम करता है; इसमें मानवीय अर्थों में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है, न ही यह उन नैतिक, सामाजिक और नैतिक आयामों से जुड़ सकता है जो अक्सर न्यायिक निर्णय लेने का आधार बनते हैं।”उन्होंने कहा, “निर्णय लेने की प्रक्रिया केवल विश्लेषणात्मक नहीं है, बल्कि यह चिंतनशील, प्रासंगिक और संवैधानिक मूल्यों द्वारा निर्देशित भी है। एआई उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता इस सूक्ष्म प्रक्रिया को एक यांत्रिक परिणाम में तब्दील कर सकती है, जिससे न्यायिक तर्क की गहराई, स्वतंत्रता और अखंडता कमजोर हो सकती है।”

एआई की अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में एआई प्लेटफॉर्म द्वारा मनगढ़ंत मिसालें, गलत उद्धरण और पूरी तरह से काल्पनिक कानूनी प्रस्ताव तैयार किए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।

“ये तथाकथित ‘भ्रम’ मामूली तकनीकी खामियां नहीं हैं; ये न्यायिक प्रक्रिया की बुनियाद पर ही प्रहार करती हैं, जो सटीकता, प्रामाणिकता और विश्वास पर टिकी है। यदि इन पर रोक नहीं लगाई गई, तो ये गुमराह कर सकती हैं, कानूनी तर्कों को विकृत कर सकती हैं, न्यायनिर्णय की गुणवत्ता से समझौता कर सकती हैं और परिणामों को गलत दिशा दे सकती हैं।”

न्यायमूर्ति कांट ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों के बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ भी चेतावनी दी थी, जिनका उपयोग भ्रामक दलीलें, निराधार दावे या ऐसे तर्क प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है जो सतही तौर पर तो विश्वसनीय प्रतीत होते हैं लेकिन उनमें वास्तविक योग्यता का अभाव होता है।

उन्होंने कहा, “इस तरह की प्रथाएं न केवल न्यायिक प्रणाली पर बोझ डालती हैं बल्कि उन वास्तविक विवादों से भी ध्यान भटकाती हैं जिनका तत्काल समाधान आवश्यक है। पहले से ही तनावग्रस्त प्रणाली में, यह एक और जटिलता जोड़ता है जिसका गंभीरता से समाधान किया जाना चाहिए।”बदलते परिवेश में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका पर जोर देते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “प्रौद्योगिकी को विवेक के साथ अपनाना चाहिए, न कि सम्मान के साथ।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न किसी भी सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच और स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानी चाहिए, और कहा, “सटीकता, प्रामाणिकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसी मशीन को नहीं सौंपी जा सकती। यह न्यायिक कर्तव्य का एक अनिवार्य और अपरिवर्तनीय घटक बना हुआ है।”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि व्यवस्था में बदलाव होते रहने के बावजूद, एक मूल सिद्धांत को कायम रखना आवश्यक है – कि न्याय एक मानवीय प्रयास है और हमेशा एक मानवीय प्रयास ही रहना चाहिए।उन्होंने कहा, “यह तर्क द्वारा आकारित होता है, मूल्यों द्वारा निर्देशित होता है और अनुभव द्वारा समृद्ध होता है, और कोई भी तकनीकी प्रगति न्यायिक निर्णय लेने के मूल में निहित सहज समझ और नैतिक निर्णय की नकल नहीं कर सकती है।”

मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, न्यायपालिका का भविष्य उसकी मूलभूत पहचान को बनाए रखते हुए अनुकूलन करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए निरंतर सीखने, चिंतन करने और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “हम एक परिवर्तन के दौर में खड़े हैं, जहां हमारे द्वारा लिए गए निर्णय आने वाले वर्षों में न्यायपालिका की दिशा तय करेंगे। हालांकि हमारे उपकरण और तरीके विकसित हो सकते हैं, लेकिन हमारी मूलभूत जिम्मेदारी अपरिवर्तित रहेगी – निष्पक्ष, सुलभ और मानवीय न्याय प्रदान करना।”यह बताते हुए कि संस्थानों को समय-समय पर आत्मचिंतन की आवश्यकता होती है, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका के लिए आत्मनिरीक्षण का समय आ गया है।

NATIONAL : राहुल गांधी पर FIR मामले में कोर्ट ने अपना आदेश बदला, कहा- बिना नोटिस केस दर्ज करना ठीक नहीं

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के अपने ही आदेश को संशोधित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस दिए केस दर्ज करना उचित नहीं है।लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) मामले में FIR दर्ज करने संबंधी अपने ही आदेश को बदल दिया है। कोर्ट ने शनिवार को अपनी वेबसाइट पर संशोधित आदेश जारी किया।

शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई की। याचिकाकर्ता समेत केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से कोर्ट ने पूछा कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत है? सभी पक्षों ने नोटिस की कोई आवश्यकता नहीं बताई। इसके बाद कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया था।

हालांकि, आदेश के टाइप होने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने फैसले की फिर से समीक्षा की। पुराने प्रेसिडेंट केसों और कानूनी प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद उन्होंने पाया कि ऐसे मामलों में आरोपी को नोटिस जारी करना जरूरी है।कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस दिए राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश उचित नहीं है। इसलिए कोर्ट ने अपने पिछले आदेश को संशोधित कर दिया।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) के लिए तय कर दी है। इस सुनवाई में राहुल गांधी या उनके वकील को नोटिस जारी करने और उनका पक्ष सुनने के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने कहा वह CJI से मामले की शिकायत करेंगे।

याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता और वकील हैं। उन्होंने 2024 से इस मामले पर लगातार शिकायतें की हैं। इसमें शामिल हैं। मई 2024 में चुनाव आयोग को आपत्ति, 2024 में हाईकोर्ट में PIL (जिसे खारिज कर MHA को जवाब देने को कहा गया), जुलाई 2024 में गृह मंत्रालय को विस्तृत शिकायत और वीडियो सबूत, तथा 2025 में BNSS की धारा 173(4) के तहत रायबरेली की ACJM कोर्ट में FIR की मांग।

याचिकाकर्ता का मुख्य दावा यह है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की एक कंपनी के वार्षिक रिटर्न में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया और लंदन का पता दिया। उनके पास यूके सरकार के कुछ ‘गुप्त ईमेल और दस्तावेज’ भी होने का दावा है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 318, 335, 340, 236, 237, 61, 148, 147, 152, 238, 336(3), 351 आदि के साथ Official Secrets Act 1923,

BUSINESS : देश के सबसे बड़े IPO की ओर बढ़ रहा रिलायंस जियो, मई में हो सकता है ऐलान; जानिए पूरी डिटेल

रिलायंस इंडस्ट्रीज जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की तैयारी कर रही है. मई में ड्राफ्ट फाइलिंग संभव है, संभावना है कि यह देश का सबसे बड़ा IPO बन सकता है.

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए मई का महीना खास हो सकता हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अपनी टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रही है. मिली जानकारी के अनुसार, मई में जियो आईपीओ के लिए शुरुआती ड्राफ्ट पेपर जमा कर सकता हैं. उम्मीद की जा रही है कि, यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है. ऐसे में निवेशकों की खास नजर कंपनी पर होने की संभावना हैं.

शुरुआत में कंपनी मार्च के अंत तक IPO से जुड़े दस्तावेज जमा करने की तैयारी में थी. कंपनी अपने दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के आधार पर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही थी. हालांकि, ईरान-यूएस में जारी तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट और अनिश्चितता के बीच कंपनी ने इस फैसले में थोड़ी देरी करने का फैसला लिया. कंपनी अपने वित्तीय आंकड़ों के साथ फिर से नियामक के पास जाने की योजना पर काम कर रही है.

रिलायंस समूह की ओर से लंबे अंतराल के बाद किसी बड़ी कंपनी का IPO लाने की तैयारी की जा रही हैं. जिससे निवेशकों के बीच खासा उत्साह देखने को मिल सकता हैं. करीब दो दशक बाद ऐसा मौका आ रहा है जब समूह की कोई बड़ी कंपनी बाजार में पब्लिक इश्यू लेकर आएगी.

कंपनी के तिमाही नतीजों से पहले किसी तरह की हलचल देखने को नहीं मिल रही है. ऐसे में संभावना है कि, इस दौरान IPO से जुड़ी कोई आधिकारिक फाइलिंग या घोषणा नहीं होगी.

जियो के संभावित मेगा IPO को लेकर कंपनी ने काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी है. इसे संभालने के लिए बड़ी टीम भी बनाई गई है. इस काम के लिए 19 घरेलू और विदेशी बैंकों को सलाहकार के तौर पर शामिल किया गया है. जिनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली, जेएम फाइनेंशियल, गोल्डमैन सैक्स, एचएसबीसी होल्डिंग्स, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप जैसे जाने-माने नाम शामिल हैं.फिलहाल IPO का साइज कितना होगा और इसे बाजार में कब उतारा जाएगा, इस पर अभी कोई ऑफिशियल घोषणा नहीं हुई है.

NATIONAL : ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर भारी पड़ी विपक्षी एकजुटता, स्टालिन बोले- तमिलनाडु ने हराया दिल्ली का अहंकार

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विपक्ष ने संसद में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संशोधन बिल को खारिज कर दिया. NDA दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका, जिससे मोदी सरकार को 12 साल में पहली विधायी हार मिली.

संसद में शुक्रवार को एकजुट विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट’ देने की आखिरी मिनट की अपील और गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. असल में महिला आरक्षण बिल में यह लिखने की बात कही गई थी कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50% बढ़ जाएगी. इस पर संसद में एनडीए को हार का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही, विपक्ष ने सरकार को 12 साल में पहली बार विधायी हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि प्रस्तावित कानून सदन में ज़रूरी दो-तिहाई वोट हासिल करने में नाकाम रहा

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि 2029 से महिलाओं को आरक्षण देने का वादा करने वाला यह बिल, लोकसभा में दक्षिण के राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने, बीजेपी के फ़ायदे के लिए राजनीतिक नक्शा बदलने और जाति जनगणना में देरी करने की एक चाल है. विपक्षी नेता शाह के इस दावे से बिल्कुल भी सहमत नहीं हुए कि प्रस्तावित फ़ॉर्मूले के तहत लोकसभा में दक्षिण के राज्यों का महत्व थोड़ा बढ़ जाएगा और सरकार जाति जनगणना कराने के लिए पूरी तरह तैयार है.

महिला आरक्षण बिल यानी संविधान के 131वे संशोधन से जुड़े इस बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े और विरोध में 230 वोट दिया गया. इसे पास होने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों में से करीब 352 वोटों की ज़रूरत थी. इस बिल के पास न हो पाने पर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दो अन्य बिल वापस ले लिए जाएंगे, जो इस मुख्य प्रस्ताव से अंदरूनी तौर पर जुड़े हुए हैं. इनमें से एक परिसीमन पर है. उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष ने महिलाओं को सम्मानित करने का ऐतिहासिक मौका गंवा दिया. हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि देश की महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण मिले.”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “उन्होंने (विपक्ष ने) प्रगति के बजाय राजनीति को चुना. उनका विरोध इस बात को पूरी तरह से बेनकाब करता है कि वे असल में किसके हितों की सेवा करते हैं.”विधेयक पर वोटिंग से पहले PM नरेंद्र मोदी ने सदस्यों से अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की गुजारिश की थी. हालांकि, बीते सालों में ऐसे मौके आए हैं, जब मोदी सरकार ने अपनी विधायी पहलों से कदम पीछे खींचे हैं, जैसे कि कृषि कानून. लेकिन यह पहली बार है, जब उसका कोई बिल संसद में पास नहीं हो सका है.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की, अपने खतरनाक परिसीमन प्रस्तावों को महिला आरक्षण से जोड़ने की नापाक और शरारतपूर्ण कोशिश लोकसभा में ऐतिहासिक रूप से फेल हो गई है.”पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “बीजेपी ने महिला आरक्षण विधेयक को आगे रखते हुए परिसीमन विधेयक पेश किया है. वह लोकसभा में सीटों की तादाद बढ़ाकर करीब 850 करने की कोशिश कर रही है. इससे देश टुकड़ों में बंट जाएगा.” उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन के नाम पर साजिश मंजूर नहीं है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है. 23 अप्रैल को, हम दिल्ली के अहंकार को और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को भी मिलकर हरा देंगे.”

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, “संसद में परिसीमन बिल फेल हुआ. यह मोदी के अहंकार की हार हुई है.”

गौर करने वाली बात है कि यह नरेंद्र मोदी के उस बयान के एक दिन बाद देखने को मिला, जिसमें उन्होंने विपक्षी पार्टियों से समर्थन के लिए संपर्क साधते हुए काफी हद तक निष्पक्ष रवैया अपनाया था. इसके साथ ही उन्हें चेतावनी भी दी थी कि अगर उन्होंने (विपक्ष) समर्थन नहीं दिया तो उन्हें महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा. अमित शाह ने दो दिनों तक चली लंबी बहस के जवाब में काफी आक्रामक रुख अपनाया, जब बिल का भविष्य साफ़ हो चुका था. उन्होंने हर राज्य में लोकसभा सीटों को 50% तक बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देने और दक्षिण भारत के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोप को खारिज किया.

बीजेपी ने कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के अन्य सदस्यों को ‘महिला-विरोधी’ करार देने में तेज़ी दिखाई, क्योंकि 2029 से आरक्षण का वादा करने वाला बिल पास न होने के तुरंत बाद, संसद परिसर में हल्की बारिश के बीच सत्ताधारी NDA की महिला सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया.

NDA सदस्यों ने भी एक बैठक की और उम्मीद है कि वे अपने विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू करेंगे. वोटिंग से पहले, पीएम मोदी ने सांसदों से भावुक अपील की थी कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें और अपने परिवार की महिलाओं को याद करते हुए, महिलाओं को उनका उचित हक दिलाएं और बिल को सर्वसम्मति से पास करवाना सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा, “सरकार ने तथ्यों और तर्क के आधार पर इस कानून से जुड़ी सभी आशंकाओं और गलतफहमियों को दूर कर दिया है. सभी चिंताओं का समाधान कर दिया गया है और जानकारी में जो भी कमियां थीं, उन्हें भी पूरा कर दिया गया है.”

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